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Wednesday, February 28, 2018

परिपक्व


   मुझे अपने युवा पुत्र और उसके मित्रों को टी-बॉल खेलते देखना मनोरंजक लगता है। बेसबॉल खेल के इस संस्करण में, अभी प्रशिक्षण ले ही रहे खिलाड़ी अकसर गलत स्थान की ओर दौड़ते हैं, या यदि वे बॉल को पकड़ लें तो उन्हें समझ नहीं अआया है कि उस बॉल का आगे क्या करें। यदि हम व्यावसायिक खिलाड़ियों द्वारा इस प्रकार की गलतियाँ करते हुए खेल को खेलते हुए देखते तो यह इतना मनोरंजक नहीं होता।
   यह परिपक्वता की बात है।

   अभी प्रशिक्षण ले रहे युवा खिलाड़ियों के लिए संघर्ष करना, आगे क्या करना है उसे न जानना, हर बात को सही रीति से न करना स्वीकारीय है। वे प्रयास कर रहे हैं, सीख रहे हैं। इसलिए हम उन्हें प्रशिक्षित करते हैं, और धैर्य के साथ उन्हें परिपक्वता की ओर लेकर चलते हैं। बाद में जब वे एक टीम के रूप में कौशल के साथ खेलते हैं, तब हम उनकी सफलता का उत्सव मनाते हैं, उनके खेल कौशल से प्रसन्न होते हैं।

   जो लोग प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय लेते हैं, उनके साथ भी जीवन में ऐसा ही कुछ होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने कहा कि चर्च को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो “सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लें” (इफिसियों 4:2)। साथ ही हमें भिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देने वालों (पासबान, शिक्षक,आत्मिक मार्गदर्शक) की भी चर्च में आवश्यकता होती है जो हम सब को परिपक्वता तथा विश्वास में एक होने की ओर लेकर चलें (पद 13)।

   चर्च में जब हम साथ संगति के जीवन का आनन्द लेते हैं, साथ प्रचार और शिक्षाओं को सुनते और सीखते हैं, तो उद्देश्य होता है कि मसीह यीशु में परिपक्व होते चले जाएँ (पद 15)। हम में से प्रत्येक मसीही विश्वासी इस यात्रा में है, और मसीह में परिपक्वता की इस यात्रा में हम सब एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रह सकते हैं, एक दूसरे के सहायक हो सकते हैं। - डेव ब्रैनन


जब हम एक दूसरे के साथ-साथ चलते हैं, तो यात्रा आनन्दमय हो जाती है।

तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। - गलतियों 6:2

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:1-16
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो।
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो।
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है।
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा।
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपरऔर सब के मध्य में, और सब में है।
Ephesians 4:7 पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है।
Ephesians 4:8 इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्‍धुवाई को बान्‍ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए।
Ephesians 4:9 (उसके चढ़ने से, और क्या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था।
Ephesians 4:10 और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश से ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)।
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया।
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए।
Ephesians 4:13 जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं।
Ephesians 4:14 ताकि हम आगे को बालक न रहें, जो मनुष्यों की ठग-विद्या और चतुराई से उन के भ्रम की युक्तियों की, और उपदेश की, हर एक बयार से उछाले, और इधर-उधर घुमाए जाते हों।
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं।
Ephesians 4:16 जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13



Tuesday, February 27, 2018

ध्यान


   जब भी मैं घर को किसी विशेष अवसर के लिए साफ़ कर रही होती हूँ, मेरे मन में यह निराशाजनक विचार आता है कि आने वाले मेहमान जो साफ़ किया गया है उसपर ध्यान करने के स्थान अपर उस पर ध्यान करेंगे जो साफ़ नहीं हुआ है। यह विचार एक अन्य और बड़े दार्शनिक तथा आत्मिक महत्व के प्रश्न को सामने लाता है: हम मनुष्य क्यों वही पहले देखते हैं और उसके प्रति प्रतिक्रया देते हैं, जो गलत है? हमारा ध्यान सही और अच्छे पर पहले क्यों नहीं जाता है? क्यों हम कटुता और अनादर को दयालुता और प्रेम से अधिक स्मरण रखते हैं? क्यों भलाई के कार्यों के स्थान पर अपराधों को अधिक ध्यान और चर्चा मिलाती है? क्यों हमारे चारों ओर बिखरी अद्भुत सुंदरता और विलक्षणता पर हमारा ध्यान उतना नहीं जाता है जितना किसी दुर्घटन या विपदा की ओर जाता है?

   साथ ही मुझे यह एहसास भी होता है कि परमेश्वर के प्रति भी मैं यही रवैया रखती हूँ। मेरा ध्यान उस पर अधिक जाता है जो परमेश्वर ने नहीं किया है; जो मेरे पास नहीं है; जिन परिस्थितियों का उसने समाधान नहीं किया है, उसके स्थान पर जो परमेश्वर ने कर दिया है; जो मुझे दे दिया है; जो परिस्थितयाँ उसने मेरे लिए सुलझा दी हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम अय्यूब के बारे में पढ़ते हैं, और देखते हैं कि हमारा यह रवैया परमेश्वर को भी अप्रसन्न करता है। लंबे समय से संपन्नता और हर भली वस्तु की बहुतायत का सुख भोगने के बाद, अचानक ही अय्यूब पर एक के बाद एक त्रासदी आतीं हैं। ऐसा होते ही, वे त्रासदियाँ ही उसके जीवन, वार्तालाप, ध्यान का केन्द्र बन जाती हैं। अन्ततः परमेश्वर हस्तक्षेप करके उससे कुछ कठिन प्रश्न पूछता है और उन प्रश्नों के द्वारा अय्यूब का ध्यान परमेश्वर की सामर्थ्य और सार्वभौमिकता की ओर, तथा उन बातों की ओर ले जाता है जिन्हें अय्यूब न जानता था और न ही जिनको कभी उसने देखा था (अय्यूब 38-40)।

   जब भी मैं किसी नकारात्मक पर ध्यान केंद्रित करने लगती हूँ, मेरा प्रयास होता है कि मैं थोड़ा थम कर अय्यूब के जीवन एवँ अनुभवों पर ध्यान करूँ, और अपना ध्यान परमेश्वर द्वारा किए गए उन अद्भुत कार्यों पर ले जाऊं जो वह मेरे लिए करता आया है और करता रहेगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सब भली बातों का ध्यान करते रहें, और परमेश्वर के धन्यवादी बने रहें।

केवल इतना हो कि तुम लोग यहोवा का भय मानो, और सच्चाई से अपने सम्पूर्ण मान के साथ उसकी उपासना करो; क्योंकि यह तो सोचो कि उसने तुम्हारे लिये कैसे बड़े बड़े काम किए हैं। - 1 शमूएल 12:24

बाइबल पाठ: अय्यूब 40:1-14
Job 40:1 फिर यहोवा ने अय्यूब से यह भी कहा:
Job 40:2 क्या जो बकवास करता है वह सर्वशक्तिमान से झगड़ा करे? जो ईश्वर से विवाद करता है वह इसका उत्तर दे।
Job 40:3 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया:
Job 40:4 देख, मैं तो तुच्छ हूँ, मैं तुझे क्या उत्तर दूं? मैं अपनी अंगुली दांत तले दबाता हूँ।
Job 40:5 एक बार तो मैं कह चुका, परन्तु और कुछ न कहूंगा: हां दो बार भी मैं कह चुका, परन्तु अब कुछ और आगे न बढ़ूंगा।
Job 40:6 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यह उत्तर दिया:
Job 40:7 पुरुष के समान अपनी कमर बान्ध ले, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे बता।
Job 40:8 क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? क्या तू आप निर्दोष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा?
Job 40:9 क्या तेरा बाहुबल ईश्वर के तुल्य है? क्या तू उसके समान शब्द से गरज सकता है?
Job 40:10 अब अपने को महिमा और प्रताप से संवार और ऐश्वर्य्य और तेज के वस्त्र पहिन ले।
Job 40:11 अपने अति क्रोध की बाढ़ को बहा दे, और एक एक घमण्डी को देखते ही उसे नीचा कर।
Job 40:12 हर एक घमण्डी को देख कर झुका दे, और दुष्ट लोगों को जहां खड़े हों वहां से गिरा दे।
Job 40:13 उन को एक संग मिट्टी में मिला दे, और उस गुप्त स्थान में उनके मुंह बान्ध दे।
Job 40:14 तब मैं भी तेरे विषय में मान लूंगा, कि तेरा ही दहिना हाथ तेरा उद्धार कर सकता है।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



Monday, February 26, 2018

देखभाल


   मैंने यूँ ही हलके में, उस 84 वर्षीय वृद्धा और मेरी मित्र से पूछा, “कैसी हैं माताजी?” उन्होंने अपने दुखते जोड़ों की ओर संकेत करते हुए कहा, “बुढ़ापा बहुत कठिन होता है!” परन्तु फिर साथ ही बड़ी निष्ठा के साथ यह भी कहा, “परन्तु परमेश्वर मेरे साथ भला रहा है और अभी भी है।”

   सुप्रसिद्ध सुसमाचार प्रचारक बिली ग्राहम ने अपनी पुस्तक Nearing Home में लिखा है, “वृद्ध होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य रहा है।” परन्तु बिली ग्राहम ने इस संदर्भ में, परमेश्वर के वचन बाइबल के बारे में यह भी बताया है कि, “यद्यपि बाइबल हमारे वृद्ध होने में अनुभव की जाने वाले समस्याओं को छुपाती या नज़रंदाज़ तो नहीं करती है, लेकिन साथ ही बाइबल वृद्धावस्था को तुच्छ या दांत किटकिटा कर बस सहन करते रहने वाला बोझ भी नहीं बताती है।” फिर बिली ग्राहम ने कुछ प्रश्नों का उल्लेख किया जिनका सामना वृद्ध होते हुए उन्हें करना पड़ा है; जैसे कि “हम कैसे आयु के साथ बढ़ने वाले उन भय, संघर्षों और बढ़ती सीमाओं का न केवल सामना कर सकते हैं वरन उन सब के होते हुए भी अन्दर से और भी बलवंत हो सकते हैं।”

   बाइबल ही में हमें परमेश्वर का आश्वासन मिलता है, “तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा”(यशायाह 46:4)।

   हम नहीं जानते हैं कि पृथ्वी पर हमें कितने समय और जीवित रहना है; न ही यह जानते हैं कि पृथ्वी पर अपने समय के दौरान हमें किन परिस्थितियों और कठिनाईयों का सामना करना पद सकता है। परन्तु इस सब में एक बात तो निश्चित है: हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे जीवन भर हमारी देखभाल करता रहेगा। - लौरेंस दर्मानी


वृद्धावस्था से न घबाराएं; परमेश्वर सदा आपके साथ बना रहेगा।

हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं। - भजन 90:12

बाइबल पाठ: यशायाह 46:4-13
Isaiah 46:3 हे याकूब के घराने, हे इस्राएल के घराने के सब बचे हुए लोगो, मेरी ओर कान लगाकर सुनो; तुम को मैं तुम्हारी उत्पत्ति ही से उठाए रहा और जन्म ही से लिये फिरता आया हूं।
Isaiah 46:4 तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा;
Isaiah 46:5 मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता भी रहूंगा।। तुम किस से मेरी उपमा दोगे और मुझे किस के समान बताओगे, किस से मेरा मिलान करोगे कि हम एक समान ठहरें?
Isaiah 46:6 जो थैली से सोना उण्डेलते वा कांटे में चान्दी तौलते हैं, जो सुनार को मजदुरी देकर उस से देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन दण्डवत भी करते हैं!
Isaiah 46:7 वे उसको कन्धे पर उठा कर लिये फिरते हैं, वे उसे उसके स्थान में रख देते और वह वहीं खड़ा रहता है; वह अपने स्थान से हट नहीं सकता; यदि कोई उसकी दोहाई भी दे, तौभी न वह सुन सकता है और न विपत्ति से उसका उद्धार कर सकता है।।
Isaiah 46:8 हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ।
Isaiah 46:9 प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से है; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है।
Isaiah 46:10 मैं तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा।
Isaiah 46:11 मैं पूर्व से एक उकाब पक्षी को अर्थात दूर देश से अपनी युक्ति के पूरा करने वाले पुरूष को बुलाता हूं। मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्धा है और उसे सफल भी करूंगा।
Isaiah 46:12 हे कठोर मनवालो तुम जो धर्म से दूर हो, कान लगाकर मेरी सुनो।
Isaiah 46:13 मैं अपनी धामिर्कता को समीप ले आने पर हूं वह दूर नहीं है, और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा; मैं सिय्योन का उद्धार करूंगा और इस्राएल को महिमा दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29



Sunday, February 25, 2018

निर्णय


   जनवरी 28, 1986 के दिन, मौसम संबंधित पाँच विलम्ब होने के बाद, अन्ततः अंतरिक्षयान,चैलेंजर, ने तेज धवनी और आग की लपटों के साथ अंतरिक्ष की ओर अपनी यात्रा आरंभ की। वायुमण्डल में ऊपर उठने के मात्र 73 सेकेंड में, किसी अंदरूनी खराबी के कारण वह यान टूट कर टुकड़े-टुकड़े हो गया, और उसके चालाक दल के सातों जन मारे गए।

   बाद की जाँच में इस असफलता एवं दुर्घटना का ज़िम्मेदार एक ओ-रिंग सील को पाया गया, जिसमें पहले भी कमियाँ होने की बात जानकारी में थी। इस घातक चूक को “go fever”, अर्थात किसी भी कीमत पर कार्य को जल्दबाजी में बस कर ही देने की प्रवृत्ति है, चाहे उसके लिए महत्वपूर्ण सावधानियों को नज़रंदाज़ ही क्यों न करना पड़े।

   हमारा महत्वकांक्षी मानवीय स्वभाव निरन्तर हम पर अविवेकशील चुनाव करने के लिए दबाव डालता रहता है। परन्तु साथ ही, इसके विपरीत, हम भय के वशीभूत भी रह सकते हैं जो हमें अत्याधिक सजग बनाकर कुछ भी करने से रोके रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम इस्राएलियों द्वारा, एक ही बात को लेकर, इन दोनों प्रवृत्तियों को प्रदर्शित करने का उदाहरण पाते हैं।

   मिस्र की गुलामी से निकलकर, कनान देश में प्रवेश करने की तैयारी के समय, लोगों के मन में उस देश को लेकर आशंकाएं उठीं, तो परमेश्वर ने उन्हें 12 लोगों के एक दल के द्वारा उस देश की टोह लेकर आने को कहा, जिससे वे स्वयं देख सकें कि परमेश्वर उन्हें जिस देश में बसाने के लिए ले जा रहा था वह कितना उपजाऊ और उत्तम था। उन 12 लोगों ने आकर लोगों को उस देश की संपन्नता और उपजाऊ होने की बात तो बताई, परन्तु साथ ही उनमें से 10 ने सब लोगों को यह कहकर घबरा भी दिया कि उस देश में विशालकाय मानव हैं और उन्हें नहीं लगता है कि वे लोग उन्हें हारने पाएँगे। बहुत समझाने और परमेश्वर की सामर्थ्य पर भरोसा रखने के आग्रह के बावजूद, लोगों ने मूसा और भेद लेने गए अन्य 2 व्यक्तियों की बात नहीं मानी, परमेश्वर के विरुद्ध बलवा किया और वापस मिस्र की ओर लौट जाना चाहा, जिसके परिणामस्वरूप इस्राएलियों को भरमा देने वाले 10 लोग मार दिए गए, और परमेश्वर ने उन्हें 40 वर्ष तक जंगल से होकर निकलने का दण्ड दिया जिसमें बलवा करने वाली पीढ़ी को समाप्त हो जाना था। यह देखकर, अब इस्राएलियों ने तुरंत अपना मन बदल लिया, और परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध, एवँ उसकी सुरक्षा के बिना “go fever” प्रवृत्ति दिखाते हुए कनान में प्रवेश करने का निर्णय लिया, और घुसते ही भारी हानि उठाई, जिससे उन्हें परमेश्वर के कहे अनुसार जंगल की 40 वर्ष की यात्रा आरंभ करनी पड़ी।

   हम जब भी परमेश्वर पर से अपनी आँख हटाकर, अपनी ही इच्छा के अनुसार निर्णय लेते हैं, तब हम उपरोक्त में से एक या दूसरी गलती कर बैठते हैं – या तो अधीर होकर उसके बिना ही किसी बात में आगे बढ़ जाते हैं, अथवा अपने भय से अभिभूत होकर उसकी बात को अनसुना कर देते हैं, उसके अनाज्ञाकारी हो जाते हैं। दोनों ही परिस्थितियों में हमें हानि ही होती है। लेकिन जब हम अपनी नज़रें परमेश्वर पर बनाए रखते हैं, उसकी इच्छा के अनुसार निर्णय लेते हैं, कार्य करते हैं तब हम बुद्धिमत्तापूर्ण साहस के निर्णय लेने पाते हैं, सफल होते हैं। - टिम गुस्ताफसन


थोड़ा सा धैर्य, बड़े विनाश से बचा लेता है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है। - भजन 46:10-11

बाइबल पाठ: गिनती 14:36-45
Numbers 14:36 तब जिन पुरूषों को मूसा ने उस देश के भेद लेने के लिये भेजा था, और उन्होंने लौटकर उस देश की नामधराई कर के सारी मण्डली को कुड़कुड़ाने के लिये उभारा था,
Numbers 14:37 उस देश की वे नामधराई करने वाले पुरूष यहोवा के मारने से उसके साम्हने मर गए।
Numbers 14:38 परन्तु देश के भेद लेने वाले पुरूषों में से नून का पुत्र यहोशू और यपुन्ने का पुत्र कालिब दोनों जीवित रहे।
Numbers 14:39 तब मूसा ने ये बातें सब इस्त्राएलियों को कह सुनाईं और वे बहुत विलाप करने लगे।
Numbers 14:40 और वे बिहान को सवेरे उठ कर यह कहते हुए पहाड़ की चोटी पर चढ़ने लगे, कि हम ने पाप किया है; परन्तु अब तैयार हैं, और उस स्थान को जाएंगे जिसके विषय यहोवा ने वचन दिया था।
Numbers 14:41 तब मूसा ने कहा, तुम यहोवा की आज्ञा का उल्लंघन क्यों करते हो? यह सफल न होगा।
Numbers 14:42 यहोवा तुम्हारे मध्य में नहीं है, मत चढ़ो, नहीं तो शत्रुओं से हार जाओगे।
Numbers 14:43 वहां तुम्हारे आगे अमालेकी और कनानी लोग हैं, सो तुम तलवार से मारे जाओगे; तुम यहोवा को छोड़कर फिर गए हो, इसलिये वह तुम्हारे संग नहीं रहेगा।
Numbers 14:44 परन्तु वे ढिठाई कर के पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए, परन्तु यहोवा की वाचा का सन्दूक, और मूसा, छावनी से न हटे।
Numbers 14:45 अब अमालेकी और कनानी जो उस पहाड़ पर रहते थे उन पर चढ़ आए, और होर्मा तक उन को मारते चले आए।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43



Saturday, February 24, 2018

आशावान


   जब हौलेंड के महान चित्रकार रेम्ब्रान्ड्ट की 63 वर्ष की आयु में अनेपक्षित मृत्यु हुई, तो चित्र बनाने के उनके पटल पर एक अधूरा चित्र लगा हुआ था। वह चित्र परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित पात्र शमौन की उस समय की भावनाओं पर केंद्रित है, जब शिशु यीशु को उनके जन्म के 40 दिन के बाद यरुशलेम के मंदिर में लाया गया और शमौन ने शिशु यीशु को गोद में लिया। इस चित्र की पृष्ठभूमि और अन्य विवरण अधूरे हैं। कुछ कला-विशेषज्ञों का मानना है कि रेम्ब्रान्ड्ट जानता था कि उसके जीवन का अन्त निकट है, और शमौन के समान, वह भी विदा होने के लिए तैयार था।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि शमौन पर पवित्र-आत्मा का प्रभाव था (पद 25), इसलिए इसमें कोई संयोग नहीं है कि जब यूसुफ और मरियम अपने पहलौठे को परमेश्वर को अर्पित करने के लिए लेकर आए तो वह मंदिर में उपस्थित था। शमौन ने, जो वायदा किए हुए आनेवाले मसीहा की प्रतीक्षा में था, शिशु को गोद में लिया और परमेश्वर की बढ़ाई करते हुए कहा, “हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है। जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो” (लूका 2:29-32)।

   शमौन इस्राएल के इतिहास के स्वर्णिम दिनों की प्रतीक्षा नहीं कर रहा था, वरन इस्राएल से आने वाले उस मसीहा की प्रतीक्षा में था जो आकर सारे सँसार के सभी लोगों के लिए पापों से छुड़ाए जाने का मार्ग बना कर देने वाला था।

   शमौन के समान हम मसीही विश्वासी भी जीवन में आशावान रह सकते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि एक दिन हम प्रभु परमेश्वर को अवश्य देखेंगे। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ। - प्रकाशिवाक्य 22:20

बाइबल पाठ: लूका 2:21-35
Luke 2:21 जब आठ दिन पूरे हुए, और उसके खतने का समय आया, तो उसका नाम यीशु रखा गया, जो स्वर्गदूत ने उसके पेट में आने से पहिले कहा था।
Luke 2:22 और जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार उन के शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो वे उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएं।
Luke 2:23 (जैसा कि प्रभु की व्यवस्था में लिखा है कि हर एक पहिलौठा प्रभु के लिये पवित्र ठहरेगा)।
Luke 2:24 और प्रभु की व्यवस्था के वचन के अनुसार पंडुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्‍चे ला कर बलिदान करें।
Luke 2:25 और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था।
Luke 2:26 और पवित्र आत्मा से उसको चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा।
Luke 2:27 और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें।
Luke 2:28 तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद कर के कहा,
Luke 2:29 हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है।
Luke 2:30 क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है।
Luke 2:31 जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है।
Luke 2:32 कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो।
Luke 2:33 और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे।
Luke 2:34 तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं --
Luke 2:35 वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20



Friday, February 23, 2018

प्रयास


   बचपन में मुझे पेड़ों पर चढ़ना बहुत पसंद था। जितना ऊँचा मैं चढ़ता था, उतनी दूर तक का दृश्य मुझे दिखाई देता था। कभी-कभी और अच्छा देख पाने के प्रयास में मैं पेड़ की डाली पर और आगे की ओर बढ़ता जाता था, जब तक कि वह डाली मेरे भार के कारण झुकने नहीं लगती थी। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि मेरे व्यसक हो जाने के साथ ही अब मेरे पेड़ों पर चढ़ने के दिन भी समाप्त हो चुके हैं – ऐसा करना न तो सुरक्षित लगता है, और न ही सम्मानजनक।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु के समय की एक घटना को पढ़ते हैं। ज़क्कई, जो कि एक धनी किन्तु नाटा व्यक्ति था, प्रभु यीशु को देखना चाहता था। परन्तु अपने कद के कारण वह भीड़ के पार प्रभु यीशु को देख न्हीं पाता था। प्रभु यीशु को देखने के प्रयास में एक दिन ज़क्कई ने एक निर्णय लिया; अपने सम्मान और अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना, वह उस मार्ग के एक पेड़ पर चढ़ गया, जिससे प्रभु यीशु को होकर निकलना था। उसका यह प्रयास सफल रहा; न केवल वह प्रभु यीशु को देख सका, वरन प्रभु यीशु ने उस पेड़ के नीचे आकर ज़क्कई को बुलाया और उसके घर भोजन करने भी गए। प्रभु यीशु से मिलने के पश्चात ज़क्कई का जीवन बदल गया, प्रभु यीशु ने सबके सामने उसके विषय में कहा, “...आज इस घर में उद्धार आया है...” (लूका 19:9)।

   हो सकता है कि कुछ बातें आज हमें भी प्रभु यीशु को देख पाने से रोक रही हों। घमण्ड हमें उसे अद्भुत युक्ति करने वाले के रूप में देखने से रोक सकता है। चिंताएं हमें उसे शान्ति के राजकुमार के रूप में जानने से रोक सकती हैं (यशायाह 9:6)। सँसार की वस्तुओं और स्तर पाने की लालसाएं हमें उसे वास्तविक तृप्ति के स्त्रोत – जीवन की रोटी (यूहन्ना 6:48) के रूप में देखने से रोक सकतीं हैं।

   प्रभु यीशु को बेहतर देख पाने, उसे निकट से जान पाने के लिए आप क्या प्रयास करने के लिए तैयार हैं? उसकी ओर बढ़ने का कोई भी ईमानदारी से किया गया प्रयास निश्चय ही अच्छे परिणाम लाएगा। जो उसे सच्चे मन से खोजते हैं, प्रभु परमेश्वर उन्हें अच्छा प्रतिफल देता है (इब्रानियों 11:6)।


परमेश्वर में अपने विश्वास को दृढ़ करने के लिए, परमेश्वर के मुख के खोजी हों।

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है। - इब्रानियों 11:6

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था।
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था।
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था।
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था।
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है।
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया।
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है।
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं।
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है।
Luke 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:21-41



Thursday, February 22, 2018

शान्त


   वर्षों पहले मैं पत्रों का उत्तर कुछ ही सप्ताह के अन्दर दे देता था, और मेरे साथ पत्राचार करने वाले इससे प्रसन्न रहते थे। फिर फैक्स मशीनें आ गईं, और उत्तर कुछ ही दिनों के भीतर दिए जाने लगे। आज ईमेल, मैसेजिंग, और मोबाइल फोनों के कारण, मुझसे उत्तर की उसी दिन अपेक्षा की जाती है!

   परमेश्वर के वचन बाइबल की एक जानी-पहचानी आयात है, “चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं” (भजन 46:10)। बाइबल के इस पद में मैं परमेश्वर की ओर से समान महत्व की दो आज्ञाओं को पढ़ता हूँ: पहली, हमें शान्त या चुप रहना है – यह ऐसी बात है, आज का जीवन जिसके विरुद्ध चलता और चलवाता है। इस उत्तेजित और कोलाहल भरे सँसार में कुछ पलों की शान्ति भी हमारे लिए सामान्यतः उपलब्ध नहीं रहती है। हमारी शान्ति ही हमें दूसरी आज्ञा के लिए तैयार करती है: “जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं ।” यह सँसार, जो परमेश्वर के अस्तित्व को महिमा देने की बजाए उसे दबा देना चाहता है, इसमें रहते और कार्य करते हुए मैं कैसे समय निकालूं जिसमें होकर मैं परमेश्वर के साथ समय ऐसा बिता सकूँ, जिसके द्वारा वह मेरे भीतरी जीवन को पोषित कर सके।

   पैट्रीश्या हम्पल लिखती हैं कि “प्रार्थना वह आदत है जो हर बात पर ध्यान करवाती है।” आहा, प्रार्थना...ध्यान लगाने की आदत। शान्त हो जाओ और जान लो। प्रार्थना में सबसे पहला कदम होता है कि इस बात को समझें और जानें कि परमेश्वर परमेश्वर ही है। इस तथ्य को समझने और इस पर ध्यान केंद्रित करने से शेष सभी बातें स्वतः ही ध्यान के केन्द्र में आ जाती हैं। प्रार्थना हमें हमारी असफलताओं, कमजोरियों, और सीमाओं को उस महान प्रभु परमेश्वर के सम्मुख स्वीकार करवा देती है, जो मानवीय कमजोरियों के प्रति अनन्त करुणा के साथ व्यवहार करता है। - फिलिप यैन्सी


प्रार्थना में परमेश्वर हमारे मनों को शान्त कर सकता है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20



Wednesday, February 21, 2018

दृष्टिकोण


   हमारा घर एक तराई में स्थित है, चारों ओर ऊँचे पहाड़ हैं, जिससे नीचे तराई में शीत ॠतु में बहुत ठंडा हो जाता है। पहाड़ों पर से धुंध और बादल नीचे आकर तराई में ठहर जाते हैं, सूर्य की रौशनी उनके पार नहीं आने पाती और नीचे की ठंडी हवा उन बादलों के नीचे दबी रह जाती है, जिससे तापमान बहुत कम हो जाता है, परन्तु बादलों के ऊपर सूर्य की गर्मी से तापमान उतना कम नहीं होने पाता। तराई से निकलकर ऊपर पहाड़ पर चढ़ने का एक मार्ग भी है, और कार से कुछ ही मिनिटों की यात्रा करके हम उस धुंध और ठण्ड से बच कर ऊपर की गर्मी और चमकते हुए सूर्य के आनन्द को ले सकते हैं। वहाँ ऊपर से नीचे का दृश्य बिलकुल भिन्न दिखता है।

   कभी-कभी जीवन भी इसी प्रकार होता है। परिस्थितियाँ उस धुंध के समान हमें घेर लेती हैं, और प्रतीत होता है कि कोई रोशनी, कोई गरमाहट उनके पार नहीं पहुँच पा रही है। परन्तु प्रभु परमेश्वर में हमारा विश्वास हमारे लिए वह एक मार्ग है जिसके द्वारा हम तराई से निकलकर ऊपर चढ़ सकते हैं – अपने मन “स्वर्गीय वस्तुओं की खोज में” लगा सकते हैं (कुलुस्सियों 3:1)। जब हम ऐसा करते हैं, तो प्रभु परमेश्वर हमारे लिए संभव करता है कि हम परिस्थितियों से ऊपर उठ कर आगे बढ़ने के लिए सामर्थ्य और शान्ति पाएँ। जैसे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, “...मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं” (फिलिप्पियों 4:11)।

   विश्वास के इस मार्ग द्वारा हम अपनी परेशानी और धुँधलेपन से ऊपर चढ़ सकते हैं; कुछ समय प्रभु परमेश्वर के साथ बिता सकते हैं, उसकी शान्ति और सामर्थ्य को प्राप्त कर सकते हैं, और एक भिन्न दृष्टिकोण से जीवन और परिस्थतियों का अवलोकन तथा मूल्याँकन कर सकते हैं। - डेविड रोपर


विश्वास आपको आपके भय से ऊपर उठा सकता है।

सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। - कुलुस्सियों 3:1-2

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:8-13
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।।
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं।
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है।
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3



Tuesday, February 20, 2018

चार बातें


   जोन, जब आराधना सभा में आकार बैठी, तब वह अपने बच्चों के साथ कुछ कठिन समस्याओं से जूझ रही थी। वह थक चुकी थी और मातृत्व की जिम्मेदारियों से “सेवानिवृत्ति” लेना चाहती थी। तभी उस सभा के उपदेशक ने परमेश्वर के वचन बाइबल से अपना सन्देश आरंभ किया, जो उन लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए ही था जो अपनी परिस्थितियों से थक-हार चुके हैं और हथियार डाल देने की कगार पर हैं। जोन ने उस प्रातः, परमेश्वर के वचन में से, उस सन्देश के द्वारा जो बाते सुनीं और सीखीं उनमें से इन चार बातों ने उसे हताश होकर बैठ जाने की बजाए आगे बढ़ते रहने में सहायता की:

   ऊपर की ओर नज़रें गड़ाएँ और प्रार्थना करें – आसाप ने सारी रात प्रार्थना की, और अपनी भावनाएँ व्यक्त करने के लिए यह भी प्रगट किया कि उसे लगता है जैसे परमेश्वर उसे भूल गया है और उसको त्याग दिया है (भजन 77:9-10)। हम परमेश्वर से सब कुछ कह सकते हैं, और अपनी भावनाओं के विषय में स्पष्ट और ईमानदार हो सकते हैं। हम उससे कुछ भी पूछ सकते हैं। हो सकता है कि उसके उत्तर तुरंत ना आएँ और न ही वैसे हों जैसे हम चाहते हैं, परन्तु अपने आप को खुली रीति से व्यक्त करने के लिए वह हमारी आलोचना कदापि नहीं करेगा।

   अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखें और उन बातों कोई स्मरण करें जो परमेश्वर ने आपके तथा औरों की जीवनों में की हैं – आसाप ने परमेश्वर से केवल अपने दुखों के बारे में ही बातें नहीं कीं; उसने परमेश्वर की सामर्थ्य और महान कार्यों को भी स्मरण किया, जो परमेश्वर ने उसके तथा औरों की जीवनों में किए थे। उसने लिखा, “मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा” (पद 11)।

   आगे की ओर देखें – उस परिस्थिति से हो सकने वाली संभावित भलाईयों के बारे में विचार करें। यह विचार करें कि आप इन परिस्थितियों से क्या सीख सकते हैं; उनमें होकर परमेश्वर आपसे क्या चाह सकता है कि आप करें? इस पर विचार करें कि क्योंकि परमेश्वर के मार्ग सिद्ध हैं, इसलिए आपकी जानकारी के अनुसार वह आगे क्या कर सकता है? (पद 13)।

   पुनःअवलोकन करें  - इस बार परमेश्वर पर विश्वास की नज़रों से अपनी परिस्थितियों पर दृष्टि करें। अपने आप को स्मरण करवाएं कि वह अद्भुत आश्चर्यकर्म करने वाला परमेश्वर है, जिस पर सदैव भरोसा किया जा सकता है (पद 14)।

   ये चार बातें हमारी भी सहायता करें कि हम प्रभु यीशु में विश्वास की अपनी यात्रा को सही दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते रहें। - ऐनी सेटास


हमारी समस्याएं परमेश्वर के समाधान खोज निकालने के अवसर होते हैं।

और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं। - 2 कुरिन्थियों 12: 9-10

बाइबल पाठ: भजन 77:1-15
Psalms 77:1 मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा।
Psalms 77:2 संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं।
Psalms 77:3 मैं परमेश्वर का स्मरण कर कर के करहाता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला)
Psalms 77:4 तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।।
Psalms 77:5 मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है।
Psalms 77:6 मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं:
Psalms 77:7 क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा?
Psalms 77:8 क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है?
Psalms 77:9 क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध कर के अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला)
Psalms 77:10 मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।।
Psalms 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा।
Psalms 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।
Psalms 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?
Psalms 77:14 अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।
Psalms 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है।। (सेला)


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 26-27
  • मरकुस 2