ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 8 सितंबर 2018

स्त्रोत



      मैं 18 वर्ष की थी जब मुझे मेरी पहली पूर्णकालिक नौकरी मिली, और मैंने पैसे बचाने के अनुशासन के बारे में एक महत्वपूर्ण शिक्षा सीखी। मैं काम करती रही और पैसे बचाती रही, जब तक कि मेरे पास स्कूल की एक वर्ष की फीस चुकाने के लिए पैसे एकत्रित नहीं हो गए। तभी मेरी माँ को अचानक ही ऑपरेशन के लिए ले जाना पड़ा, और मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास बैंक में उनके इलाज के लायक पैसे हैं। मेरी माँ के प्रति मेरा प्रेम, मेरे भविष्य के लिए मेरी योजनाओं से बढ़कर था।

      ऐसे में इलाज़बेथ इलियट द्वारा उनकी पुस्तक Passion and Purity में लिखे गए ये शब्द मेरे लिए और भी अधिक अर्थपूर्ण हो गए: “यदि हमें जो दिया गया है, हम उसे कस कर पकड़ लेते हैं और समयानुसार उसे छोड़ने को तैयार नहीं होते हैं, या उसका वैसा प्रयोग नहीं करते हैं जैसा हमें देने वाला चाहता है कि हम करें, तो हम अपनी आत्मा की उन्नति में बाधा डालते हैं। यहाँ यह गलती करना बहुत सरल रहता है कि हम यह कहें कि ‘क्योंकि यह मुझे परमेश्वर से मिला है इसलिए यह मेरा ही है; मैं इसके साथ जैसा चाहे वैसा कर सकता हूँ।’ जी नहीं! सत्य यह है कि वह हमारे पास इसलिए है जिससे हम उसके लिए उस देने वाले स्त्रोत का धन्यवाद करें, और उस वस्तु को पुनः उसे ही समर्पित कर दें,...वह दे देने के लिए मेरा है।”

      उस समय मुझे एहसास हुआ कि मेरी नौकरी, और पैसे बचाने का मेरा वह अनुशासन मुझे परमेश्वर से मिले उपहार थे! मैं अपने परिवार को उदारता से दे सकी क्योंकि मैं जानती थी कि परमेश्वर किसी और रीति से मुझे स्कूल की पढ़ाई करवा देगा, और उसने ऐसा ही किया भी।

      आज परमेश्वर कैसे चाहता है कि हम दाऊद की प्रार्थना, “मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है” (1 इतिहास 29:14) को अपने जीवनों में  लागू करें; यह जानते और मानते हुए कि परमेश्वर ही हमारी सभी आवाश्यकताओं की पूर्ति का स्त्रोत है। - कीला ओकोआ


सब कुछ परमेश्वर का, और परमेश्वर से ही है।

क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन। - रोमियों 11:36

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 29:14
1 Chronicles 29:14 मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।
1 Chronicles 29:15 तेरी दृष्टि में हम तो अपने सब पुरखाओं के समान पराए और परदेशी हैं; पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान बीते जाते हैं, और हमारा कुछ ठिकाना नहीं।
1 Chronicles 29:16 हे हमारे परमेश्वर यहोवा! वह जो बड़ा संचय हम ने तेरे पवित्र नाम का एक भवन बनाने के लिये किया है, वह तेरे ही हाथ से हमे मिला था, और सब तेरा ही है।
1 Chronicles 29:17 और हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जांचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है; मैं ने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैं ने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहां उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं।
1 Chronicles 29:18 हे यहोवा! हे हमारे पुरखा इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर! अपनी प्रजा के मन के विचारों में यह बात बनाए रख और उनके मन अपनी ओर लगाए रख।
1 Chronicles 29:19 और मेरे पुत्र सुलैमान का मन ऐसा खरा कर दे कि वह तेरी आज्ञाओं चितौनियों और विधियों को मानता रहे और यह सब कुछ करे, और उस भवन को बनाए, जिसकी तैयारी मैं ने की है।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें