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Wednesday, January 17, 2018

स्वर्ग की झलक


   सड़क पार, हमारे चर्च के सामने, एक विश्व-स्तरीय वनस्पति उद्यान है, जहाँ सभी चर्चों की सम्मिलित गोष्ठी का आयोजन किया गया था। मैं उस समारोह में गई, और उस उद्यान में विचरण करते हुए लोगों से भी मिल रही थी, और पौधों के बारे में जानकारी रखने वाले, उन से प्रेम करने तथा उनकी देखभाल करने वाले लोगों के परिश्रम की सुन्दर प्रस्तुति का आनन्द भी ले रही थी। यह सब करते हुए मुझे एहसास हुआ कि वह संध्या और स्थान, चर्च को कैसे कार्य करने चाहिए जिससे कि वह पृथ्वी पर स्वर्ग की झलक प्रस्तुत करे, के संकेतों से भरपूर थी।

   उद्यान एक ऐसा स्थान होता है जहाँ प्रत्येक पौधे को एक ऐसे वातावरण में रखा जाता है जहाँ वह अच्छे से बढ़े और फूले-फले। माली उस पौधे के लिए मिट्टी तैयार करते हैं, उन्हें कीड़ों से बचाते हैं, सुनिश्चित करते हैं कि सभी पौधों को आवश्यकतानुसार एवं पर्याप्त मात्रा में भोजन, जल और सूर्य का प्रकाश प्राप्त हो। इस सारी देखभाल और परिश्रम का परिणाम होता है एक ऐसा सुन्दर और खुशबूदार स्थान जो लोगों को आनंदित करता है।

   उद्यान के समान ही चर्च को भी वह स्थान होना है जहाँ सब मिलकर परमेश्वर की महिमा तथा सब की भलाई के लिए कार्य करें। एक ऐसा स्थान जहाँ सब बढ़ें, फूलें, फलें, अपने आप को एक सुरक्षित वातावरण में अनुभव करें। एक ऐसा स्थान जहाँ उनकी आवश्यकतानुसार सभी लोगों की देखभाल की जाती हो; जहाँ हम सभी अपना प्रिय कार्य करें – ऐसे कार्य जिनसे सब का भला हो (1 कुरिन्थियों 14:26)।

   अच्छी देखभाल पाने वाले पौधों के समान, जो लोग एक स्वस्थ वातावरण में बढ़ते हैं, उनके जीवन की सुगंध औरों को परमेश्वर की ओर आकर्षित करती है, परमेश्वर के प्रेम और दया की सुंदरता को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करती है। चर्च सिद्ध तो नहीं है, परन्तु स्वर्ग की झलक अवश्य हो सकता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जो हृदय प्रभु यीशु के प्रेम की सुगंध से भरे हुए हैं, 
वे उसकी सुंदरता को भी प्रदर्शित करेंगे।

इसलिये हे भाइयो क्या करना चाहिए? जब तुम इकट्ठे होते हो, तो हर एक के हृदय में भजन, या उपदेश, या अन्यभाषा, या प्रकाश, या अन्यभाषा का अर्थ बताना रहता है: सब कुछ आत्मिक उन्नति के लिये होना चाहिए। - 1 कुरिन्थियों 14:26

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 14:6-12
1 Corinthians 14:6 इसलिये हे भाइयों, यदि मैं तुम्हारे पास आकर अन्य अन्य भाषा में बातें करूं, और प्रकाश, या ज्ञान, या भविष्यद्वाणी, या उपदेश की बातें तुम से न कहूं, तो मुझ से तुम्हें क्या लाभ होगा?
1 Corinthians 14:7 इसी प्रकार यदि निर्जीव वस्तुएं भी, जिन से ध्‍वनि निकलती है जैसे बांसुरी, या बीन, यदि उन के स्‍वरों में भेद न हो तो जो फूंका या बजाया जाता है, वह क्योंकर पहिचाना जाएगा?