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Wednesday, August 21, 2019

शान्त



      लेखक डैनियल लेविटिन ने अपनी पुस्तक “The Organized Mind: Thinking Straight in the Age of Information Overload” में लिखा है कि “पिछले पाँच वर्षों में हमने इतनी जानकारी एकत्रित कर ली है जितनी मानव इतिहास में पहले कभी नहीं की गई। एक प्रकार से हम इस उत्तेजना के आसक्त हो गए हैं।” समाचारों और ज्ञान के निरन्तर होते रहने वाले ये आक्रमण हमारे मस्तिष्क पर काबू कर लेते हैं। हमारे वातावरण में मीडिया के द्वारा किए जा रहे लगातार प्रहार के कारण हमारे लिए शान्त होकर बैठना, विचार करना, और प्रार्थना करना कठिन होता जा रहा है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार लिखता है, “चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!” (भजन 46:10), जो हमें परमेश्वर की ओर ध्यान लगाने की अनिवार्यता के बारे में सचेत करता है। बहुत से लोगों के लिए प्रतिदिन परमेश्वर के साथ शान्त होकर समय बिताना, जब वे बाइबल पढ़ते, प्रार्थना करते और परमेश्वर की भलाई तथा महानता पर विचार करते हैं, दिनचर्या का एक अनिवार्य भाग है ।

      जब भजन 46 के भजनकार के समान हम भी यह अनुभव करते हैं कि “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक” (पद 1), तो इससे हमारे भय भाग जाते हैं (पद 2), तथा हमारा ध्यान सँसार की बेचैनी से हटकर परमेश्वर की शान्ति पर आ जाता है और हमारे अन्दर एक शान्त भरोसा जागृत करता है कि परमेश्वर नियंत्रण में है (पद 10)।

      हमारे चारों ओर का सँसार चाहे जितना भी अस्त-व्यस्त क्यों न हो जाए, हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की उपस्थिति में  शान्त होकर उसके प्रेम और सामर्थ्य में रह सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हमें प्रतिदिन शान्त होकर परमेश्वर की सुनना ज़रूरी है।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया – यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 107-109
  • 1 कुरिन्थियों 4