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Wednesday, October 2, 2019

प्रार्थना



      किसी ऐसे जन को मन लगा कर प्रार्थना करते सुनना जो हम से प्रेम करता है बहुत मधुर होता है। जब हम किसी मित्र को परमेश्वर द्वारा दी गई अन्तःदृष्टि और अनुकंपा के साथ प्रार्थना करते हुए सुनते हैं, तो कुछ ऐसा लगता है मानो स्वर्ग पृथ्वी को स्पर्श कर रहा हो। यह जानना कितना अच्छा है कि हमारे प्रति परमेश्वर की दया के कारण, हमारी प्रार्थनाएं स्वर्ग में उस तक पहुंचती हैं और सुनी जाती हैं। कभी-कभी हो सकता है कि जब हम प्रार्थना करते हैं तो हमारे पास व्यक्त करने के लिए उचित शब्द अथवा भाव न हों। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को सिखाया कि वे सदा प्रार्थना करें और निराश होकर प्रार्थना करना न छोड़ दें (लूका 18:1)। बाइबल हमें यह भी सिखाती है कि ऐसा करने का एक और कारण भी है, क्योंकि “मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है” (रोमियों 8:34)।

      क्योंकि प्रभु यीशु हमारे लिए प्रार्थनाएं करता रहता है, इसलिए हम प्रार्थना करने में कभी अकेले नहीं होते हैं। वह हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है, और हमारे पक्ष में होकर हमारे लिए परमेश्वर पिता से बातचीत करता है। ऐसे में हमें अपने शब्दों की वाक्पटुता के विषय चिन्तित होने के आवश्यकता नहीं है, क्यों जैसा प्रभु यीशु हमें समझता है वैसा कोई और हमें नहीं समझता है। वह हर बात में हमारी सहायता करता है, और हमारी प्रत्येक आवश्यकता को परमेश्वर के समक्ष प्रस्तुत करता है। वह यह भी जानता है कि कब हमारे द्वारा माँगी जा रही बात हमारे लिए भली नहीं होगी, और वह हमारे प्रत्येक निवेदन अथवा चिन्ता का अपनी सिद्ध बुद्धिमत्ता एवं प्रेम के साथ सही उत्तर, सही समय पर प्रदान करता है।

      प्रभु यीशु मसीह प्रार्थनाओं में हमारा सिद्ध सहयोगी है – ऐसा मित्र जो हमारे लिए असीम अनुग्रह के साथ विनती करता है। हमारे लिए उसके द्वारा की जाने वाली प्रार्थनाओं की मनोहरता शब्दों में बयान नहीं की जा सकती है। इसलिए हमें सदा हर बात के लिए धन्यवाद के साथ प्रार्थना करते रहना चाहिए। - जेम्स बैंक्स

प्रभु यीशु के साथ प्रार्थना करने से बढ़कर और कोई सौभाग्य नहीं है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-34
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 14-16
  • इफिसियों 5:1-16