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Thursday, November 19, 2020

स्पष्ट संवाद


         एक बार मुझे पचास मील तक गाड़ी चला कर दूर रहने और काम करने वाले कंपनी के एक कार्यकर्ता के साथ बातचीत करने के लिए जाना पड़ा। मुझे एक अन्य कार्यकर्ता से समाचार मिला था कि वो हमारी कंपनी के विषय अनुचित बातें कह रहा था, और मुझे इससे हमारी कंपनी के नाम और साख़ के बिगड़ जाने की चिंता थी। मुझे लगा कि मुझे उससे स्पष्ट संवाद करना चाहिए, जिससे उसे अपनी राय बदलनी पड़े।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 शमूएल 25 अध्याय में एक अनहोने व्यक्ति ने गंभीर व्यक्तिगत जोखिम उठाकर इस्राएल के भावी राजा का, जो कि एक बहुत गलत चुनाव करके कार्य करने वाला था, सामना करने का निर्णय लिया। अबीगैल का विवाह नाबाल से हो रखा था, जो अपने नाम के अर्थ “मूर्ख” अनुरूप चरित्र वाला व्यक्ति था। दाऊद और उसके साथ के लोग नाबाल के लोगों और भेड़-बकरियों आदि की रक्षा करते रहे थे, जिसके लिए उन्हें आशा थी कि नाबाल उन्हें पारंपरिक रीति से दी जाने वाली भेंट दे देगा (पद 10, 11), परन्तु नाबाल ने न केवल माँगने पर भी वह भेंट देने से इनकार किया, वरन साथ ही दाऊद का अपमान भी किया। नाबाल के इस व्यवहार से रुष्ट होकर दाऊद उसके पास उसे सबक सिखाने जाने के लिए निकला, और बहुत संभव था कि वह नाबाल को मार ही डालता। अबीगैल को जब इस बात का पता चला, और यह जानते हुए कि उसका मूर्ख पति समझ-बूझ की बात नहीं सुनेगा, अबीगैल ने आगे जाकर दाऊद से भेंट की, उससे शान्ति बनाए रखने तथा अपने निर्णय पर पुनःविचार करने का आग्रह किया और उसे भेंट दे दी।

         अबीगैल का दाऊद के साथ प्रयास सफल रहा; उसके इस सफल संवाद का भेद क्या था? उसने सबसे पहले आगे भोजन वस्तुओं की भेंट भेजकर दाऊद और उसके साथियों के प्रति अपने पति के ऋण को चुकाया, और फिर उसने दाऊद के साथ स्पष्ट और सच्ची बात की। उसने बुद्धिमानी के साथ दाऊद को स्मरण करवाया कि परमेश्वर ने उसे क्यों बुलाया था और परमेश्वर के लिए उसकी सेवकाई क्या थी। इन बातों को ध्यान में रखते हुए दाऊद को प्रतिशोध लेने और नाबाल को मारने से पीछे हट जाने का अनुरोध किया, जिससे दाऊद को बाद में अपने विवेक पर अकारण हत्या का दोष न रखना पड़े, और ऐसा करने के लिए पछताना नहीं पड़े (पद 31)।

         संभव है कि आप भी किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो कोई गलत निर्णय लेने के बहुत निकट है, जिससे उसकी तथा औरों की हानि हो सकती है, या वह परमेश्वर के लिए उसकी सेवकाई में अप्रभावी हो सकता है। अबीगैल के समान, क्या परमेश्वर आपको भी किसी से स्पष्ट संवाद करने के लिए कह रहा है? – एलीसा मॉर्गन

 

कभी-कभी परमेश्वर का अनुसरण करने का अर्थ होता है स्पष्ट संवाद करना।


परन्तु तुम्हारी बात हां की हां, या नहीं की नहीं हो; क्योंकि जो कुछ इस से अधिक होता है वह बुराई से होता है। - मत्ती 5:37

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 25:21-35

 1 शमूएल 25:21 दाऊद ने तो सोचा था, कि मैं ने जो जंगल में उसके सब माल की ऐसी रक्षा की कि उसका कुछ भी न खोया, यह नि:सन्देह व्यर्थ हुआ; क्योंकि उसने भलाई के बदले मुझ से बुराई ही की है।

1 शमूएल 25:22 यदि बिहान को उजियाला होने तक उस जन के समस्त लोगों में से एक लड़के को भी मैं जीवित छोड़ूं, तो परमेश्वर मेरे सब शत्रुओं से ऐसा ही, वरन इस से भी अधिक करे।

1 शमूएल 25:23 दाऊद को देख अबीगैल फुर्ती कर के गदहे पर से उतर पड़ी, और दाऊद के सम्मुख मुंह के बल भूमि पर गिरकर दण्डवत की।

1 शमूएल 25:24 फिर वह उसके पांव पर गिर के कहने लगी, हे मेरे प्रभु, यह अपराध मेरे ही सिर पर हो; तेरी दासी तुझ से कुछ कहना चाहती है, और तू अपनी दासी की बातों को सुन ले।

1 शमूएल 25:25 मेरा प्रभु उस दुष्ट नाबाल पर चित्त न लगाए; क्योंकि जैसा उसका नाम है वैसा ही वह आप है; उसका नाम तो नाबाल है, और सचमुच उस में मूढ़ता पाई जाती है; परन्तु मुझ तेरी दासी ने अपने प्रभु के जवानों को जिन्हें तू ने भेजा था न देखा था।

1 शमूएल 25:26 और अब, हे मेरे प्रभु, यहोवा के जीवन की शपथ और तेरे जीवन की शपथ, कि यहोवा ने जो तुझे खून से और अपने हाथ के द्वारा अपना पलटा लेने से रोक रखा है, इसलिये अब तेरे शत्रु और मेरे प्रभु की हानि के चाहने वाले नाबाल ही के समान ठहरें।

1 शमूएल 25:27 और अब यह भेंट जो तेरी दासी अपने प्रभु के पास लाई है, उन जवानों को दी जाए जो मेरे प्रभु के साथ चलते हैं।

1 शमूएल 25:28 अपनी दासी का अपराध क्षमा कर; क्योंकि यहोवा निश्चय मेरे प्रभु का घर बसाएगा और स्थिर करेगा, इसलिये कि मेरा प्रभु यहोवा की ओर से लड़ता है; और जन्म भर तुझ में कोई बुराई नहीं पाई जाएगी।

1 शमूएल 25:29 और यद्यपि एक मनुष्य तेरा पीछा करने और तेरे प्राण का ग्राहक होने को उठा है, तौभी मेरे प्रभु का प्राण तेरे परमेश्वर यहोवा की जीवन रूपी गठरी में बन्धा रहेगा, और तेरे शत्रुओं के प्राणों को वह मानो गोफन में रखकर फेंक देगा।

1 शमूएल 25:30 इसलिये जब यहोवा मेरे प्रभु के लिये यह समस्त भलाई करेगा जो उसने तेरे विषय में कही है, और तुझे इस्राएल पर प्रधान कर के ठहराएगा,

1 शमूएल 25:31 तब तुझे इस कारण पछताना न होगा, तथा मेरे प्रभु का हृदय पीड़ित न होगा कि तू ने अकारण खून किया, और मेरे प्रभु ने अपना पलटा आप लिया है। फिर जब यहोवा मेरे प्रभु से भलाई करे तब अपनी दासी को स्मरण करना।

1 शमूएल 25:32 दाऊद ने अबीगैल से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज के दिन मुझ से भेंट करने के लिये तुझे भेजा है।

1 शमूएल 25:33 और तेरा विवेक धन्य है, और तू आप भी धन्य है, कि तू ने मुझे आज के दिन खून करने और अपना पलटा आप लेने से रोक लिया है।

1 शमूएल 25:34 क्योंकि सचमुच इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसने मुझे तेरी हानि करने से रोका है, उसके जीवन की शपथ, यदि तू फुर्ती कर के मुझ से भेंट करने को न आती, तो नि:सन्देह बिहान को उजियाला होने तक नाबाल का कोई लड़का भी न बचता।

1 शमूएल 25:35 तब दाऊद ने उसे ग्रहण किया जो वह उसके लिये लाई थी; फिर उस से उसने कहा, अपने घर कुशल से जा; सुन, मैं ने तेरी बात मानी है और तेरी बिनती ग्रहण कर ली है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1

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