मंगलवार, 6 जुलाई 2010

ध्यान का केंद्र

अमेरिका और कैनाडा की सीमा पर एक लम्बी कतार में फंसे जोएल स्कून को अपना मन हल्का करने के लिए कुछ करना थाउसने अपने बुलबुले बनाने वाले द्रव्य की बोतल ली और कार से बाहर निकला और हवा में बुलबुले उड़ाने लगाफिर उसने कतार में फंसे अन्य ड्राईवरों को भी बुलबुले बनाने वाले द्रव्य की बोतलें पकड़ाईं और थोड़ी ही देर में वहां बुलबुले ही बुलबुले हो गएकतार तो उसी धीमी गति से बढाती रही पर लोग खुश हो गये

ब्रिटेन के एक प्रख्यात व्यक्ति - जौन ल्युब्बौक (१८३४-१९१३) ने कहा था की "हम वही देखते हैं जो देखना चाहते हैं"एक अच्छा नज़रिया और सही रीती से केंद्रित मन जीवन को आनंदित रखने में सहयाता करते हैं, चाहे उनसे हमारी परिस्थितियां ना भी बदलें

पौलुस ने कुरिन्थियों की मंडली को उनके क्लेशों में उन्हें प्रोत्साहित किया: "हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोडे ही दिन की हैं परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं" ( कुरिन्थियों :१८)।

तो ऐसी कौन सी अनदेखी और अनंत वस्तुएं हैं जीना पर हम ध्यान लगा सकते हैं? परमेश्वर का चरित्र एक अति उत्तम स्थान है ध्यान केंद्रित करने के लिए - वह भला है (भजन २५:), न्यायी है (यशायाह ३०:१८), क्षमाशील है ( युहन्ना :) और विश्वासयोग्य है (व्यवस्थाविवरण :)।

परमेश्वर के चरित्र पर ध्यान लगाने से हमें जीवन के संघर्षों में भी शान्ति मिल सकती है। - एनी सेटास

जब मसीह आपके ध्यान का केंद्र होगा तो बाक़ी सब के प्रति दृष्टीकोण भी सही रहेगा

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ४:-१८

हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं - कुरिन्थियों :१८

एक साल में बाइबल:
  • अय्यूब ३२, ३३
  • प्रेरितों के काम १४