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Thursday, October 29, 2020

कृतज्ञ


         निरंतर बने रहने वाली पीड़ा और कुण्ठाओं तथा मेरी बहुत सीमित गतिशीलता के कारण होने वाली निराशाओं ने अन्ततः मुझे दबोच ही लिया था। मैं बहुत अधिक माँग करते रहने वाली और अधन्यवादी हो गई। मैं अपने पति द्वारा की जा रही मेरी देखभाल के बारे में शिकायतें करने लगी। जैसे वो घर की सफाई करते थे, मैं उसे लेकर कुड़कुड़ाती रहती थी। और यद्यपि मेरे पति मेरी जानकारी में सबसे उत्तम खाने बनाने वाले हैं, फिर भी मैं हमारे भोजनों में विविधता को लेकर खिसियाती रहती थी। जब अन्ततः मेरे पति ने मुझे कहा कि मेरे इस व्यवहार से उन्हें ठेस पहुँचती है तो मैं क्रोधित होने लगी। उन्हें पता ही नहीं था कि मैं कैसा अनुभव कर रही हूँ। अन्ततः परमेश्वर ने मुझ पर मेरी गलतियों को प्रकट किया, और मैंने अपने पति से तथा परमेश्वर से क्षमा माँगी।

         परिस्थितियों में बदलाव होने की लालसा से शिकायत करना, कुड़कुड़ाना, और सम्बन्धों को बिगाड़ देने वाले आत्म-केन्द्रित व्यवहार को करना हो सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि इस्राएली इस दुविधा से परिचित थे। ऐसा लगता है कि वे कभी संतुष्ट नहीं होते थे, वरन हर समय परमेश्वर के प्रावधानों को लेकर कुड़कुड़ाते रहते थे (निर्गमन 17:1-3)। यद्यपि प्रभु अपने लोगों की देखभाल करता था, और उस जंगल में भी उन्हें प्रतिदिन “आकाश से भोजन वस्तु” (16:4) दिया करता था, वे अन्य प्रकार के भोजन की लालसा करने लगे (गिनती 11:4)। परमेश्वर द्वारा की जाने वाली उनकी प्रेम भरी चिंता और देखभाल को लेकर आनन्दित होने के स्थान पर वे इस्राएली कुछ और, कुछ बेहतर, कुछ भिन्न की चाह रखने लगे, या फिर उसकी जो उन्हें पहले मिला करता था (पद 4-6)। उन्होंने अपनी इस कुण्ठा को मूसा पर निकाला (पद 10-14)।

         परमेश्वर की भलाई तथा विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखना हमें और कृतज्ञ बना देता है। आज हम उन अनगिनत तरीकों के लिए जिनके द्वारा वह हमारी चिंता तथा देखभाल करता है, हम अपने प्रभु परमेश्वर के धन्यवादी एवं कृतज्ञ हो सकते हैं। - सोहचील डिक्सन

 

कृतज्ञता पूर्ण स्तुति हमें संतुष्ट और परमेश्वर को आनन्दित करती है।


यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; - भजन संहिता 23:1-2

बाइबल पाठ: गिनती 11:1-11

गिनती 11:1 फिर वे लोग बुड़बुड़ाने और यहोवा के सुनते बुरा कहने लगे; निदान यहोवा ने सुना, और उसका कोप भड़क उठा, और यहोवा की आग उनके मध्य जल उठी, और छावनी के एक किनारे से भस्म करने लगी।

गिनती 11:2 तब मूसा के पास आकर चिल्लाए; और मूसा ने यहोवा से प्रार्थना की, तब वह आग बुझ गई,

गिनती 11:3 और उस स्थान का नाम तबेरा पड़ा, क्योंकि यहोवा की आग उन में जल उठी थी।

गिनती 11:4 फिर जो मिली-जुली भीड़ उनके साथ थी वह कामुकता करने लगी; और इस्राएली भी फिर रोने और कहने लगे, कि हमें मांस खाने को कौन देगा।

गिनती 11:5 हमें वे मछलियां स्मरण हैं जो हम मिस्र में सेंत-मेंत खाया करते थे, और वे खीरे, और खरबूजे, और गन्दने, और प्याज, और लहसुन भी;

गिनती 11:6 परन्तु अब हमारा जी घबरा गया है, यहां पर इस मन्ना को छोड़ और कुछ भी देख नहीं पड़ता।

गिनती 11:7 मन्ना तो धनिये के समान था, और उसका रंग रूप मोती का सा था।

गिनती 11:8 लोग इधर उधर जा कर उसे बटोरते, और चक्की में पीसते या ओखली में कूटते थे, फिर तसले में पकाते, और उसके फुलके बनाते थे; और उसका स्वाद तेल में बने हुए पुए का सा था।

गिनती 11:9 और रात को छावनी में ओस पड़ती थी तब उसके साथ मन्ना भी गिरता था।

गिनती 11:10 और मूसा ने सब घरानों के आदमियों को अपने अपने डेरे के द्वार पर रोते सुना; और यहोवा का कोप अत्यन्त भड़का, और मूसा को भी बुरा मालूम हुआ।

गिनती 11:11 तब मूसा ने यहोवा से कहा, तू अपने दास से यह बुरा व्यवहार क्यों करता है? और क्या कारण है कि मैं ने तेरी दृष्टि में अनुग्रह नहीं पाया, कि तू ने इन सब लोगों का भार मुझ पर डाला है?

 

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 18-19
  • 2 तिमुथियुस 3

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