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शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

आपात स्थिति


   मार्च 2011 में एक विध्वंसकारी सुनामी जापान के तट से टकराई जिससे समुद्र के किनारे के गाँव तथा नगर उजड़ गए, और लगभग 16000 लोगों की जानें जाती रहीं। लेखिका तथा कवित्री ग्रेटल एर्लिच उस विनाश को देखने जब जापान पहुँची, तो जो कुछ उन्होंने देखा उसका बयान करने के लिए उनके पास शब्द नहीं थे; उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उस परिस्थिति पर एक कविता लिखी। बाद में समाचार मीडिया को दिए एक टेलिविज़न साक्षात्कार में इस विषय पर बात करते हुए उन्होंने अपने एक दिवंगत मित्र और कवी विलियम स्टैफोर्ड का हवाला देकर कहा: "मेरे पुराने मित्र विलियम स्टैफोर्ड ने कहा था, कविता आत्मा की आपात स्थिति का उद्गार है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए, चाहे वे आनन्द से भरा स्तुतिगान हो या हानि से आया गहरा दुःख, हम कविता का भरपूरी से प्रयोग पाते हैं। जब राजा शाउल और उसका पुत्र योनातान युद्ध में मारे गए तो दाउद दुःख से अभिभूत हो गया (2 शमूएल 1:1-2) और अपने इस गहरे दुःख को व्यक्त करने के लिए उसने एक विलापगीत लिखा: "शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था। हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए, हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था" (1 शमूएल 1:23-26)।

   आज हमें यदि किसी आत्मा की आपात स्थिति का सामना करना पड़े, वह चाहे आनन्द की हो या दुःख की, हमारी प्रार्थना भी एक कविता के समान प्रमेश्वर के सामने हमारी भावनाएं प्रगट करती है; और हम परमेश्वर के वचन बाइबल से भी प्रार्थनाओं की उन कविताओं का प्रयोग अपनी भावना व्यक्त करने के लिए कर सकते हैं। चाहे अपने मन की बात कहने के लिए हमारे पास शब्द ना हों, लेकिन परमेश्वर का आत्मा हमारी सहायता करता है (रोमियों 8:26) और हमारे मन की भावनाओं को परमेश्वर के सामने प्रार्थना में प्रस्तुत करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर केवल शब्दों को ही नहीं सुनता; वह दिल का हाल भी पढ़ता है।

इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। - रोमियों 8:26

बाइबल पाठ: 2 शमूएल 1:17-27
2 Samuel 1:17 (शाऊल और योनातन के लिये दाऊद का बनाया हुआ विलापगीत ) तब दाऊद ने शाऊल और उसके पुत्र योनातन के विषय यह विलापगीत बनाया, 
2 Samuel 1:18 और यहूदियों को यह धनुष नाम गीत सिखाने की आज्ञा दी; यह याशार नाम पुस्तक में लिखा हुआ है; 
2 Samuel 1:19 हे इस्राएल, तेरा शिरोमणि तेरे ऊंचे स्थान पर मारा गया। हाय, शूरवीर क्योंकर गिर पड़े हैं! 
2 Samuel 1:20 गत में यह न बताओ, और न अश्कलोन की सड़कों में प्रचार करना; न हो कि पलिश्ती स्त्रियाँ आनन्दित हों, न हो कि खतनारहित लोगों की बेटियां गर्व करने लगें। 
2 Samuel 1:21 हे गिलबो पहाड़ो, तुम पर न ओस पड़े, और न वर्षा हो, और न भेंट के योग्य उपज वाले खेत पाए जाएं! क्योंकि वहां शूरवीरों की ढालें अशुद्ध हो गई। और शाऊल की ढाल बिना तेल लगाए रह गई। 
2 Samuel 1:22 जूझे हुओं के लोहू बहाने से, और शूरवीरों की चर्बी खाने से, योनातन का धनुष लौट न जाता था, और न शाऊल की तलवार छूछी फिर आती थी। 
2 Samuel 1:23 शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। 
2 Samuel 1:24 हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था। 
2 Samuel 1:25 हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए, 
2 Samuel 1:26 हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था। 
2 Samuel 1:27 हाय, शूरवीर क्योंकर गिर गए, और युद्ध के हथियार कैसे नाश हो गए हैं!

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 1-3
  • गलतियों 2