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गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

प्रभु यीशु की कलीसिया के कार्यकर्ता और उनकी सेवकाई (2)


भविष्यद्वक्ता और भविष्यवाणी (1)

 पिछले लेख से हमने इफिसियों 4:11 से उन पाँच प्रकार के सेवकों और उनकी सेवकाइयों के विषय देखना आरंभ किया है, जिन्हें प्रभु ने अपनी कलीसिया की उन्नति के लिए स्थानीय कलीसियाओं में नियुक्त किया है। जैसा शैतान का स्वभाव और कार्य है, वह प्रभु की हर बात के विषय लोगों में असमंजस, गलत शिक्षाएं, और विरोधाभास डालता रहता है। इन पाँच प्रकार के सेवकों और उनकी सेवकाई को लेकर भी उसने मसीही विश्वासियों, कलीसियाओं, तथा ईसाई समाज में यही कर रखा है। इसी कारण प्रभु के वचन की इन बातों और इन सेवकों के लिए प्रयोग किए गए संज्ञात्मक शब्दों को लेकर लोगों में आज बहुत सी गलत धारणाएं, मान्यताएं, और शिक्षाएं देखी जाती हैं। शैतान द्वारा डाली गई इन भ्रामक बातों की वास्तविकता को समझ कर, इन बातों के विषय वचन की सच्चाई को जानना और समझना हमारे लिए अनिवार्य है। मूल यूनानी भाषा में इन पाँचों सेवकाइयों के लिए प्रयोग किए गए शब्द, वचन की सेवकाई के विभिन्न स्वरूपों को दिखाते हैं। 

पिछले लेख में हमने पहले प्रकार के सेवक - प्रेरितों और उनकी सेवकाई के बारे में, वचन में दी गई शिक्षाओं से देखा था कि प्रभु ने ही प्रेरितों को नियुक्त किया, प्रभु का हर शिष्य प्रेरित नहीं कहलाया जाता था, वचन में किसी मनुष्य द्वारा प्रेरितों की नियुक्ति के लिए कोई निर्देश नहीं दिए गए, और आरंभिक कलीसिया में, जब परमेश्वर का वचन बाइबल अपनी संपूर्णता में नहीं लिखी गई थी, तब प्रभु के वचन की शिक्षाओं का दायित्व प्रेरितों को सौंपा गया। प्रभु ने अपने वचन को परमेश्वर पवित्र आत्मा की अगुवाई में अपने प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा लिखवाया, और हमें उपलब्ध करवा दिया, और मसीही सेवकों को यह दायित्व सौंपा कि इस वचन को पवित्र आत्मा की अगुवाई और मार्गदर्शन में औरों को सिखाएं, विशेषकर ऐसे लोगों को जो फिर इसे अन्य लोगों को भी सिखा सकें। इस रीति से आज भी प्रेरित और भविष्यद्वक्ता, उनके द्वारा लिखे गए वचन में होकर, हमें प्रभु के वचन की शिक्षाएं देने का कार्य कर रहे हैं। वचन में उन पहले प्रेरितों की सेवकाई और उनके समय के बाद प्रभु द्वारा किसी और के प्रेरित नियुक्त किए जाने का कोई उल्लेख, उदाहरण, या शिक्षा नहीं है। किन्तु शैतान के लिए अवश्य लिखा है कि उसके दूत झूठे प्रेरित बनकर लोगों को बहकाते और भरमाते रहते हैं। इसलिए जो आज अपने आप को प्रेरित कहते हैं, इस सेवकाई को एक उपाधि के समान यश और प्रशंसा प्राप्ति के लिए प्रयोग करते हैं, उनसे सावधान रहने, और उन्हें पिछले लेख में दिए गए प्रेरितों के गुणों और चिह्नों के आधार पर जाँचने, परखने, और तब ही उनके दावे को स्वीकार करना अति-आवश्यक है।  

आज के इस लेख में हम इन पाँच में से दूसरे सेवक, भविष्यद्वक्ताओं और उनकी सेवकाई के बारे में वचन के तथ्य देखेंगे। प्रेरितों और उनकी सेवकाई के समान, भविष्यद्वक्ताओं की इस सेवकाई को लेकर भी शैतान ने बहुत सी गलत शिक्षाएं, धारणाएं, और बातें फैला रखी हैं। सामान्यतः, लोग यही समझते और मानते हैं कि बाइबल के अनुसार भविष्यद्वक्ता होने, या भविष्यवाणी करने का अर्थ है भावी कहना या भविष्य की बातें बताना। निःसंदेह परमेश्वर ने अपने लोगों के मध्य कुछ लोगों को भविष्य की बातें बताने के लिए सक्षम किया और इसके लिए खड़ा किया; किन्तु परमेश्वर द्वारा नियुक्त और खड़े किए गए ये भविष्यद्वक्ता, अन्य सेवकों और सेवकाइयों की तुलना में, संख्या में बहुत कम और केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही देखे जाते हैं। परमेश्वर के वचन में परमेश्वर द्वारा नियुक्त ये भविष्यद्वक्ता सामान्यतः हर समय और हर स्थान पर इस्राएली या मसीही समाज में नहीं देखे जाते हैं। पुराने नियम में परमेश्वर के लोगों में, इस्राएली या यहूदियों में, और नए नियम में मसीही विश्वासियों और प्रभु यीशु की मण्डली में इन भविष्यद्वक्ताओं की सेवकाई मुख्यतः ऐसे समयों पर देखी जाती है जब परमेश्वर के लोग पाप में भ्रष्ट होकर बिगड़ते चले जा रहे थे, परमेश्वर से दूर होते जा रहे थे, और इस बात के लिए उनके आते दण्ड और विनाश के लिए उन्हें चेतावनियाँ देने, उन्हें वापस परमेश्वर की ओर लौट आने के लिए उकसाने को इन भविष्यद्वक्ताओं की सेवकाई चेतावनी के वचन के रूप में रही है। उस दण्ड और विनाश के साथ, परमेश्वर ने अपने प्रेम, उनकी बहाली और आशीषों आदि के विषय भी भविष्यवाणियों में आश्वस्त किया; किन्तु संपूर्ण बाइबल में सभी भविष्यद्वक्ताओं की सेवकाई परमेश्वर से भटके हुए लोगों को परमेश्वर की ओर वापस मुड़ने अन्यथा भारी दण्ड और ताड़ना का सामना से संबंधित ही रही है। नए नियम में भविष्यवाणी की और बाइबल की अंतिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भी सारे संसार के सभी लोगों के लिए इसी विषय की बातों को देखा जाता है। अर्थात, बाइबल के आधार पर, भविष्यवाणी करना और भविष्यद्वक्ता की ज़िम्मेदारी निभाना कोई हल्की या आम बात नहीं थी; उसके गंभीर अभिप्राय थे। 

 किन्तु आज के ईसाई समाज या मसीहियों में, विशेषकर उन में जो परमेश्वर पवित्र आत्मा के नाम से अनेकों प्रकार की गलत शिक्षाओं और धारणाओं को मानते और मनाते हैं, औरों को बताते तथा सिखाते हैं, परमेश्वर के नाम से कुछ भीभविष्यवाणीके रूप में कह देना एक आम बात हो गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि परमेश्वर के वचन में प्रयोग किए गए “भविष्यद्वक्ता” और “भविष्यवाणी” शब्दों की सही समझ उन्हें नहीं है। “भविष्यद्वक्ता” और “भविष्यवाणी” शब्दों का यह दुरुपयोग न केवल वचन के विरुद्ध है, वरन परमेश्वर की ओर से इसकी भर्त्सना की गई है, और इसे परमेश्वर द्वारा दण्डनीय बताया गया है। इस संदर्भ में परमेश्वर के वचन से कुछ पद देखिए:

  • व्यवस्थाविवरण 18:21-22 “और यदि तू अपने मन में कहे, कि जो वचन यहोवा ने नहीं कहा उसको हम किस रीति से पहचानें? तो पहचान यह है कि जब कोई नबी यहोवा के नाम से कुछ कहे; तब यदि वह वचन न घटे और पूरा न हो जाए, तो वह वचन यहोवा का कहा हुआ नहीं; परन्तु उस नबी ने वह बात अभिमान कर के कही है, तू उस से भय न खाना
  • यहेजकेल 13:2-3 हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के जो भविष्यद्वक्ता अपने ही मन से भविष्यवाणी करते हैं, उनके विरुद्ध भविष्यवाणी कर के तू कह, यहोवा का वचन सुनो। प्रभु यहोवा यों कहता है, हाय, उन मूढ़ भविष्यद्वक्ताओं पर जो अपनी ही आत्मा के पीछे भटक जाते हैं, और कुछ दर्शन नहीं पाया!”
  • यहेजकेल 13:6-9 “वे लोग जो कहते हैं, यहोवा की यह वाणी है, उन्होंने भावी का व्यर्थ और झूठा दावा किया है; और तब भी यह आशा दिलाई कि यहोवा यह वचन पूरा करेगा; तौभी यहोवा ने उन्हें नहीं भेजा। क्या तुम्हारा दर्शन झूठा नहीं है, और क्या तुम झूठमूठ भावी नहीं कहते? तुम कहते हो, कि यहोवा की यह वाणी है; परन्तु मैं ने कुछ नहीं कहा है। इस कारण प्रभु यहोवा तुम से यों कहता है, तुम ने जो व्यर्थ बात कही और झूठे दर्शन देखे हैं, इसलिये मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ, प्रभु यहोवा की यही वाणी है। जो भविष्यद्वक्ता झूठे दर्शन देखते और झूठमूठ भावी कहते हैं, मेरा हाथ उनके विरुद्ध होगा, और वे मेरी प्रजा की गोष्ठी में भागी न होंगे, न उनके नाम इस्राएल की नामावली में लिखे जाएंगे, और न वे इस्राएल के देश में प्रवेश करने पाएंगे; इस से तुम लोग जान लोगे कि मैं प्रभु यहोवा हूँ
  • यिर्मयाह 5:31 “भविष्यद्वक्ता झूठमूठ भविष्यवाणी  करते हैं; और याजक उनके सहारे से प्रभुता करते हैं; मेरी प्रजा को यह भाता भी है, परन्तु अन्त के समय तुम क्या करोगे?”
  • यिर्मयाह 14:14 “और यहोवा ने मुझ से कहा, ये भविष्यद्वक्ता मेरा नाम ले कर झूठी भविष्यवाणी  करते हैं, मैं ने उन को न तो भेजा और न कुछ आज्ञा दी और न उन से कोई भी बात कही। वे तुम लोगों से दर्शन का झूठा दावा कर के अपने ही मन से व्यर्थ और धोखे की भविष्यवाणी  करते हैं
  • यिर्मयाह 23:21-22 “ये भविष्यद्वक्ता बिना मेरे भेजे दौड़ जाते और बिना मेरे कुछ कहे भविष्यवाणी  करने लगते हैंयदि ये मेरी शिक्षा में स्थिर रहते, तो मेरी प्रजा के लोगों को मेरे वचन सुनाते; और वे अपनी बुरी चाल और कामों से फिर जाते
  • यिर्मयाह 23:30-32 “यहोवा की यह वाणी है, देखो, जो भविष्यद्वक्ता मेरे वचन औरों से चुरा चुराकर बोलते हैं, मैं उनके विरुद्ध हूँ। फिर यहोवा की यह भी वाणी है कि जो भविष्यद्वक्ताउसकी यह वाणी है”, ऐसी झूठी वाणी कहकर अपनी अपनी जीभ डुलाते हैं, मैं उनके भी विरुद्ध हूँ। यहोवा की यह भी वाणी है कि जो बिना मेरे भेजे या बिना मेरी आज्ञा पाए स्वप्न देखने का झूठा दावा कर के भविष्यवाणी  करते हैं, और उसका वर्णन कर के मेरी प्रजा को झूठे घमण्ड में आकर भरमाते हैं, उनके भी मैं विरुद्ध हूँ; और उन से मेरी प्रजा के लोगों का कुछ लाभ न होगा
  • यिर्मयाह 27:15 “यहोवा की यह वाणी है कि मैं ने उन्हें नहीं भेजा, वे मेरे नाम से झूठी भविष्यवाणी  करते हैं; और इसका फल यही होगा कि मैं तुझ को देश से निकाल दूंगा, और तू उन नबियों समेत जो तुझ से भविष्यवाणी करते हैं नष्ट हो जाएगा

       हम अगले लेख में परमेश्वर के वचन में प्रयोग किए गए “भविष्यद्वक्ता” और “भविष्यवाणी” शब्दों की सही अर्थ को, और उनके आधार पर भविष्यवाणी की सेवकाई की सही समझ देखेंगे। यदि आप एक मसीही विश्वासी हैं, तो आपके लिए यह अनिवार्य है कि आप परमेश्वर के वचन की गलत समझ और गलत उपयोग से बचें। वचन की सही समझ और सही उपयोग आपके लिए आत्मिक उन्नति और आशीष का कारण होगा, किन्तु गलत समझ और गलत उपयोग बहुत हानिकारक होगा। इसलिए यदि आप किसी गलत शिक्षा अथवा धारणा में पड़े हुए हैं, तो स्थिति को जाँच-परखकर अभी समय और अवसर के रहते उससे बाहर निकल आएं, आवश्यक सुधार कर लें।

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी। 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • निर्गमन 31-33      
  • मत्ती 22:1-22