ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

मुसीबत की जड़


   मेरे घर के लॉन में कुछ गड़बड़ी थी; वह गड़बड़ी मुझे दिखाई तो नहीं दे रही थी लेकिन उसके दुषप्रभाव मेरे सामने थे - पूरी देख-रेख के बावजूद सारी घास और मैदान खराब होता जा रहा था। मैंने बारीकी से जाँच करनी आरंभ करी और शीघ्र ही मुसीबत कि जड़ सामने आ गई - छछूंदर। कीड़े-मकौड़े खाते रहने वाले और धरती की सतह के नीचे बिलों में रहने वाले वे छोटे जन्तु बड़ी देख-भाल के साथ रखे गए मेरे घास के लॉन की सतह के नीचे यहाँ से वहाँ अपने बिल बनाए जा रहे थे और घास को बरबाद करे जा रहे थे। ना तो वे जन्तु और ना ही उनके बिल ऊपर से दिखाई देते थे, किंतु उन से हो रहा नुकसान सबके सामने प्रगट था।

   इस्त्राएलियों के साथ भी एक छिपी हुई मुसीबत की जड़ थी जो उनके लिए परेशानी का कारण ठहरी (यहोशु 7)। इस्त्राएली मुसीबत में तो पड़े किंतु उसका कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा था। कुछ तो था जो उनकी दृष्टि से ओझल था किंतु उसके दुषप्रभाव उनके सामने थे। वे दुषप्रभाव तब उजागर हुए जब यहोशु ने छोटे से नगर ऐ को जीतने के लिए 3000 की सेना भेजी। ऐ की छोटी से सेना को पराजित करने के लिए यह काफी होनी चाहिए थी किंतु परिणाम उलटा ही निकला। ऐ के सैनिकों ने इस्त्राएलियों को खदेड़ दिया और उनके 36 सैनिक मार डाले। यहोशु को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो गया। कारण जानने के लिए वह प्रार्थना में परमेश्वर के आगे गिड़गिड़ा कर पड़ गया और परमेश्वर ने उसे बताया कि मुसीबत की जड़ क्या है - उन इस्त्राएलियों में एक ऐसा जन भी था जिसने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता करी और यरिहो से हुए पिछले युद्ध में अर्पण की हुई वस्तुओं में से अपने लिए कुछ चुरा लीं (यहोशु 7:11)। अनाज्ञाकारिता और झूठ के पाप के दुषप्रभाव से परमेश्वर की सुरक्षा और आशीष इस्त्राएली सेना पर से हट गई और उनकी हार का कारण हो गई। जब उस पाप को एवं पाप करने वाले को प्रकट किया गया तथा पाप का निर्धारित समाधान किया गया तत्पश्चात ही इस्त्राएल फिर विजय प्राप्त कर सका।

   हमारे जीवनों के छिपे हुए पाप हमारे लिए बहुत मुसीबत की जड़ होते हैं। हम चाहे अपने निकट के लोगों और परिवार जनों से बहुत कुछ छुपा लें, परमेश्वर से कुछ नहीं छुपा सकते। यदि पाप का समाधान नहीं होगा तो उसके दुषपरिणाम झेलने ही पड़ेंगे। इस मुसीबत की जड़ को अपने जीवन से दूर ही रखिए, तब ही परमेश्वर की आशीषें आपके साथ रहेंगी और आप जयवंत रहेंगे। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के समक्ष पाप अंगीकार और उसके लिए पश्चताप से ही क्षमा प्राप्त हो सकती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: यहोशु 7:1-13
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया। 
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो वा तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं। 
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए, 
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया। 
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली। 
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते। 
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है! 
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा? 
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है? 
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है। 
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा। 
Joshua 7:13 उठ, प्रजा के लोगों को पवित्र कर, उन से कह; कि बिहान तक अपने अपने को पवित्र कर रखो; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, कि हे इस्राएल, तेरे मध्य में अर्पण की वस्तु है; इसलिये जब तक तू अर्पण की वस्तु को अपने मध्य में से दूर न करे तब तक तू अपने शत्रुओं के साम्हने खड़ा न रह सकेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21


बुधवार, 16 जुलाई 2014

व्यवहार तथा वार्तालाप


   मैसाचूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टैकनौलॉजी के एक शोधकर्ता एवं वैज्ञानिक ने अपने बच्चे के जीवन के पहले तीन वर्ष को रिकॉर्ड किया, यह जानने के लिए कि हम मानव भाषा कैसे सीखते हैं। उन्होंने और उनकी पत्नि ने अपने घर में स्थान स्थान पर कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाए जिनके द्वारा उन्होंने 200,000 घंटों से भी अधिक की ऑडियो तथा वीडियो रिकॉर्डिंग्स करीं। इन रिकॉर्डिंग्स को जमा करके, उन्हें संपादित तथा संक्षिप्त करके, उनका विशलेषण करके उन्होंने जाना कि कैसे बच्चों द्वारा निकाली जाने वाली ’गागा’ ध्वनि ’वॉटर’ (पानी) शब्द में परिवर्तित होती है।

   विचार कीजिए, यदि आपको ज्ञात हो कि कोई आपकी हर बात, हर व्यवहार, मुँह से निकलने वाला हर शब्द को रिकॉर्ड कर रहा है तब आपके व्यवहार तथा वार्तालाप पर उसका क्या प्रभाव होगा? यदि ऐसा हो, तो यह अध्ययन आपके बारे में क्या बात प्रकट करेगा? परमेश्वर के वचन बाइबल की नीतिवचन पुस्तक के 18 अध्याय में कुछ अविवेकपूर्ण बातों के उदाहरण प्रस्तुत करे गए हैं। नीतिवचन का लेखक लिखता है कि मूर्ख लोग अपने व्यवहार तथा वार्तालाप द्वारा कुछ बातों को प्रगट करते हैं: वे दूसरों की बात समझने की बजाए अपने ही विचार दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं (पद 2); उनके शब्दों से विनाश आता है (पद 7); वे बिना पूरी बात सुनें और समझे ही आवेगवश बोलने लगते हैं (पद 13)। कहीं ये तथा ऐसी ही अन्य बातें आज हमारा ही चरित्र-चित्रण तो नहीं कर रही हैं?

   हमें अपने व्यवहार तथा वार्तालाप का अध्ययन करते रहने वाला बनना चाहिए। परमेश्वर की सहायता से हम अपने मुँह से निकलने वाले हानिकारक शब्दों को दूसरों को उभारने वाले तथा प्रोत्साहित करने वाले शब्दों में परिवर्तित कर सकते हैं, जिससे दूसरों को शांति तथा अनुग्रह मिले, यह परमेश्वर की हमारे लिए इच्छा है: "कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो" (इफिसीयों 4:29)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हमारे शब्दों में बनाने की भी शक्ति है और बिगाड़ने की भी।

और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा। - मत्ती 12:36-37

बाइबल पाठ: नीतिवचन 18:1-15
Proverbs 18:1 जो औरों से अलग हो जाता है, वह अपनी ही इच्छा पूरी करने के लिये ऐसा करता है, 
Proverbs 18:2 और सब प्रकार की खरी बुद्धि से बैर करता है। मूर्ख का मन समझ की बातों में नहीं लगता, वह केवल अपने मन की बात प्रगट करना चाहता है। 
Proverbs 18:3 जहां दुष्ट आता, वहां अपमान भी आता है; और निन्दित काम के साथ नामधराई होती है। 
Proverbs 18:4 मनुष्य के मुंह के वचन गहिरा जल, वा उमण्डने वाली नदी वा बुद्धि के सोते हैं। 
Proverbs 18:5 दुष्ट का पक्ष करना, और धर्मी का हक मारना, अच्छा नहीं है। 
Proverbs 18:6 बात बढ़ाने से मूर्ख मुकद्दमा खड़ा करता है, और अपने को मार खाने के योग्य दिखाता है। 
Proverbs 18:7 मूर्ख का विनाश उस की बातों से होता है, और उसके वचन उस के प्राण के लिये फन्दे होते हैं। 
Proverbs 18:8 कानाफूसी करने वाले के वचन स्वादिष्ट भोजन की नाईं लगते हैं; वे पेट में पच जाते हैं। 
Proverbs 18:9 जो काम में आलस करता है, वह बिगाड़ने वाले का भाई ठहरता है। 
Proverbs 18:10 यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है। 
Proverbs 18:11 धनी का धन उसकी दृष्टि में गढ़ वाला नगर, और ऊंचे पर बनी हुई शहरपनाह है। 
Proverbs 18:12 नाश होने से पहिले मनुष्य के मन में घमण्ड, और महिमा पाने से पहिले नम्रता होती है। 
Proverbs 18:13 जो बिना बात सुने उत्तर देता है, वह मूढ़ ठहरता है, और उसका अनादर होता है। 
Proverbs 18:14 रोग में मनुष्य अपनी आत्मा से सम्भलता है; परन्तु जब आत्मा हार जाती है तब इसे कौन सह सकता है? 
Proverbs 18:15 समझ वाले का मन ज्ञान प्राप्त करता है; और बुद्धिमान ज्ञान की बात की खोज में रहते हैं।

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 15-18


मंगलवार, 15 जुलाई 2014

पहुनाई


   अपनी पुस्तक Outlive Your Life में मैक्स लुकाडो लिखते हैं: "आतिथ्य असामान्य समुदाय के लिए द्वार खोल देता है। यह कोई इत्तिफाक नहीं है कि hospitality (आतिथ्य) तथा hospital शब्द एक ही मूल लातीनी शब्द से आए हैं, क्योंकि दोनों का ही परिणाम समान ही होता है - स्वस्थ करना। जब आप किसी के लिए अपने घर के द्वार खोलते हैं तो आप उसे जो सन्देश दे रहे हैं वह है, ’तुम मेरे और परमेश्वर के लिए महत्वपूर्ण हो।’ हो सकता है कि आप अपना द्वार दूसरे के लिए खोलते हुए उसे सन्देश देना चाह रहे हैं कि, ’आओ थोड़ी देर के लिए मेरे साथ संगति करो’, लेकिन जो आपके मेहमान को प्रतीत होता है वह है कि वह मेहमान आपके द्वारा उसके लिए प्रयास करने और परेशानी उठाने के काबिल है।"

   जब अक्विला और प्रिस्‍किल्ला ने अपने घर के द्वार प्रेरित पुलुस के स्वागत के लिए खोले तब पौलुस को भी ऐसा ही प्रतीत हुआ होगा। जब पौलुस उस समय कुरिन्थुस पहुँचा था, तब शायद एथेन्स से कुरिन्थुस तक की अपनी लंबी यात्रा से वह थका हुआ रहा होगा। संभव है कि एथेन्स में अपनी सेवकाई को लेकर (प्रेरितों 17:16-34) वह कुछ निराश भी रहा हो; क्योंकि बाद में पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को लिखा "और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्हारे साथ रहा" (1 कुरिन्थियों 2:3)। संभवतः अक्विला और प्रिस्‍किल्ला पौलुस से बाज़ार में मिले होंगे और वहाँ से उन्होंने उसे अपने घर आने का निमंत्रण दिया। लेकिन जो बात प्रगट है वह है कि उन दोनों ने पौलुस के लिए करी गई अपनी मसीही पहुनाई द्वारा एक आत्मिक तरोताज़गी पाने का स्थान और अवसर प्रदान किया था।

   मसीह यीशु के विश्वासी और अनुयायी होने के कारण हमें आतिथ्य में सक्रीय रहने के लिए बुलाया गया है, जिससे उनके लिए जो जीवन की किसी कठिन समस्या से जूझ रहे हैं या किसी निराशा में पड़े हैं, हम एक ’स्वास्थ्य’ प्रदान करने का स्थान उपलब्ध करा सकें। क्योंकि प्रभु यीशु ने हमारी आवश्यकताओं को पूरा किया है और हमें आशीषें प्रदान करी हैं, इसलिए हमें प्रभु द्वारा उपलब्ध करवाए गए संसाधानों को पहुनाई द्वारा उसकी सेवाकाई के लिए उपयोग करते रहना चाहिए। - मार्विन विलियम्स


मसीही पहुनाई का अर्थ है एक खुला हुआ हृदय के साथ एक खुला हुआ घर।

मैं ने तुम्हें सब कुछ कर के दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु की बातें स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है; कि लेने से देना धन्य है। - प्रेरितों 20:35

बाइबल पाठ: प्रेरितों 18:1-4
Acts 18:1 इस के बाद पौलुस अथेने को छोड़कर कुरिन्थुस में आया। 
Acts 18:2 और वहां अक्‍विला नाम एक यहूदी मिला, जिस का जन्म पुन्‍तुस का था; और अपनी पत्‍नी प्रिस्‍किल्ला समेत इतालिया से नया आया था, क्योंकि क्‍लौदियुस ने सब यहूदियों को रोम से निकल जाने की आज्ञा दी थी, सो वह उन के यहां गया।
Acts 18:3 और उसका और उन का एक ही उद्यम था; इसलिये वह उन के साथ रहा, और वे काम करने लगे, और उन का उद्यम तम्बू बनाने का था। 
Acts 18:4 और वह हर एक सब्त के दिन आराधनालय में वाद-विवाद कर के यहूदियों और यूनानियों को भी समझाता था।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 12-14


सोमवार, 14 जुलाई 2014

दो पाठ


   इस पुस्तिका, Our Daily Bread के लिए नियम पालन करने की आवश्यकता पर लेख लिखने के कुछ ही सप्ताह के अन्दर मुझे इस से संबंधित दो पाठ सीखने को मिले। एक पाठ तो मैंने तब सीखा जब मैं 850 मील गाड़ी चलाने की यात्रा पर निकला; मैंने निश्चय किया कि मैं निर्धारित गति सीमा से अधिक रफतार से गाड़ी नहीं चलाऊँगा। एक छोटे से नगर में से होकर निकलते समय मैं गाड़ी चलाते हुए खाने के प्रयास में सैण्डविच का बाहरी आवरण खोलने लगा और वहाँ लगे गति संबंधी संकेतों पर तथा अपनी गाड़ी की गति पर ध्यान देना भूल गया - परिणाम था मुझे सीमा से अधिक रफतार से गाड़ी चलाने के लिए चालान का भुगतान करना पड़ा। तो मेरा पहला पाठ था कि जानबूझकर गति सीमा का उल्लंघन किया जाय या यह अनजाने में हो जाए, दोनों का परिणाम एक ही होता है! और अभी मुझे 700 मील गाड़ी और चलानी बाकी थी।

   इसके साथ ही जो दूसरा पाठ मैंने सीखा वह था कि हमारे प्रत्येक निर्णय की परीक्षा अवश्य ही होगी। मुझे मूसा द्वारा इस्त्राएलियों को कहे गए शब्द स्मरण हो आए, जब वे वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने की तैयारी में थे: "और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं" (व्यस्थाविवरण 8:2)।

   लेखक एवं प्रचारक यूजीन पीटरसन ने मसीह यीशु का अनुकरण करने की प्रक्रिया को "आज्ञाकारिता का एक लंबा मार्ग" कहा है। परमेश्वर के आज्ञाकारी होने के प्रत्येक निर्णय के साथ उस आज्ञाकारिता में बने रहने के अनेक निर्णय करना आवश्यक रहता है। परमेश्वर ने मुझे नम्र किया और सिखाया कि उसके पीछे चलने के लिए कितना महत्वपूर्ण है उसकी आज्ञाकारिता के लिए अपने मन को तैयार करना और मार्ग के संकेतों तथा बातों का ध्यान रखते हुए अपने निर्णय को निभाते रहना। - डेविड मैक्कैसलैंण्ड


परमेश्वर से प्रेम करने का अर्थ है परमेश्वर का आज्ञाकारी होना।

इस बात पर भी तुम ने अपने उस परमेश्वर यहोवा पर विश्वास नहीं किया, जो तुम्हारे आगे आगे इसलिये चलता रहा, कि डेरे डालने का स्थान तुम्हारे लिये ढूंढ़े, और रात को आग में और दिन को बादल में प्रगट हो कर चला, ताकि तुम को वह मार्ग दिखाए जिस से तुम चलो। - व्यस्थाविवरण 1:32-33

बाइबल पाठ: व्यस्थाविवरण 8:1-10
Deuteronomy 8:1 जो जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं उन सभों पर चलने की चौकसी करना, इसलिये कि तुम जीवित रहो और बढ़ते रहो, और जिस देश के विषय में यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से शपथ खाई है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ। 
Deuteronomy 8:2 और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं। 
Deuteronomy 8:3 उसने तुझ को नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा ही जानते थे, वही तुझ को खिलाया; इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है। 
Deuteronomy 8:4 इन चालीस वर्षों में तेरे वस्त्र पुराने न हुए, और तेरे तन से भी नहीं गिरे, और न तेरे पांव फूले। 
Deuteronomy 8:5 फिर अपने मन में यह तो विचार कर, कि जैसा कोई अपने बेटे को ताड़ना देता है वैसे ही तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को ताड़ना देता है। 
Deuteronomy 8:6 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करते हुए उसके मार्गों पर चलना, और उसका भय मानते रहना। 
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है। 
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है। 
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा। 
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 8-11


रविवार, 13 जुलाई 2014

चींटी


   अपनी पुस्तक, Adventures Among Ants: A Global Safari with a Cast of Trillions में लेखक मार्क मौफैट बचपन से ही चींटियों के प्रति उनके आकर्षण के बारे में बताते हैं। उनका यह आकर्षण आयु बढ़ने के साथ कम नहीं हुआ, वे चींटियों से इतना लगाव रखते थे कि इस विषय पर उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली और फिर इस विषय पर एक विशेषज्ञ के रूप में सारे संसार में भ्रमण किया। इन छोटे से आकार के जन्तुओं के अध्ययन ने उन्हें इनके मेहनती जीवन के बारे में अद्भुत बातें सिखाई हैं।

   मौफैट द्वारा चींटियों के बारे में अचरज भरी बातें पता लगाने से बहुत पहले परमेश्वर के वचन बाइबल में इन जन्तुओं के कार्य कौशल के बारे में टिप्पणी करी गई है। राजा सुलेमान ने अपने नीतिवचनों में इनका उल्लेख किया है और उनसे शिक्षा लेने को कहा है कि कैसे वे योजनाबद्ध रीति से कार्य करती हैं, समय रहते कठिन समयों के लिए जुटा लेती हैं तथा स्वतः ही अनुशासन में रहकर कार्य करती रहती हैं।

   परमेश्वर ने हमें शिक्षा देने के लिए अपनी सृष्टि में विस्मित कर देने वाली बातें बना कर रखीं हैं। परमेश्वर ने अपनी बातों की शिक्षाओं को भौतिक प्रकृति में प्रदर्शित किया है, और वह चाहता है कि हम चींटी जैसी उसकी छोटी सी रचना से व्यावाहरिक जीवन और आत्मिक महत्व की बड़ी बड़ी बातें सीखें। परमेश्वर का वचन बाइबल और परमेश्वर कि सृष्टि उसके अद्भुत प्रताप की शिक्षाओं से भरे पड़े हैं; आवश्यकता है तो केवल ध्यान से उनका अध्ययन करने की, उन बातों को देखने समझने और पहचानने की। - डेनिस फिशर


परमेश्वर की रची प्रकृति पर ध्यान देने से हम बहुत से महत्वपूर्ण पाठ सीख सकते हैं।

पशुओं से तो पूछ और वे तुझे दिखाएंगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बता देंगे। पृथ्वी पर ध्यान दे, तब उस से तुझे शिक्षा मिलेगी; ओर समुद्र की मछलियां भी तुझ से वर्णन करेंगी। कौन इन बातों को नहीं जानता, कि यहोवा ही ने अपने हाथ से इस संसार को बनाया है। - अय्युब 12:7-9

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:6-11
Proverbs 6:6 हे आलसी, च्यूंटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे, और बुद्धिमान हो। 
Proverbs 6:7 उन के न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला, 
Proverbs 6:8 तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजन वस्तु बटोरती हैं। 
Proverbs 6:9 हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? 
Proverbs 6:10 कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथ रखे लेटे रहना, 
Proverbs 6:11 तब तेरा कंगालपन बटमार की नाईं और तेरी घटी हथियारबन्द के समान आ पड़ेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 4-7


शनिवार, 12 जुलाई 2014

पवित्र आत्मा


   संसार भर में कभी ना कभी सभी लोग एक अदृश्य सामर्थ के नाट्कीय प्रभावों को देखते हैं - आँधी-तूफान और बवंडरों के द्वारा मनुष्य के बनाए हुए ढांचों को तिनकों के समान उड़ते हुए। वायु का यह प्रचण्ड बल किसी को दिखाई नहीं देता, हम केवल उसके प्रभावों को ही देख पाते हैं और उन प्रभावों को देखकर ही उस की वास्तविकता, उस की उपस्थिति तथा उसके बल का आंकलन कर लेते हैं।

   ऐसे ही परमेश्वर के पवित्र आत्मा के विषय में भी है - हम अपनी भौतिक आँखों से उसे देख तो नहीं पाते किंतु उसके द्वारा लोगों के जीवनों में लाए गए परिणामों के द्वारा हम उसके कार्य और सामर्थ को पहचान सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों के कार्य के दूसरे अध्याय में पवित्र-आत्मा के द्वारा पिन्तेकुस्त के दिन मसीही विश्वासियों के उससे भरे जाने का विवरण दर्ज है: "और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया" (प्रेरितों 2:2)। यह घटना उन प्रारंभिक मसीही विश्वासियों तथा यरुशलेम के निवासियों के लिए एक प्रत्यक्ष प्रमाण था कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा मसीही विश्वासियों के जीवनों में कार्यरत है।

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा आज भी हम सभी मसीही विश्वासियों के जीवन में कार्यरत है, इसलिए यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो उत्साहित हों और परमेश्वर के कार्यों को पहिचानें। पवित्र आत्मा आपके जीवन में ईश्वरीय गुणों के फल लाता है (गलतियों 5:22-23), सभी मसीही विश्वासियों को एक देह बनाता है (1 कुरिन्थियों 12:13) और सबको परमेश्वर की उपस्थिति का विश्वास दिलाता है (1 यूहन्ना 3:4)।

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा हम मसीही विश्वासियों के जीवनों में कार्यरत एक सामर्थी व्यक्ति है; चाहे हम उसे देख नहीं सकते किंतु उसके द्वारा हमारे जीवनों में होने वाले कार्य और प्रभाव उसकी वास्तविकता और सामर्थ की पहचान हैं। - बिल क्राउडर


पवित्र आत्मा अदृश्य किंतु सामर्थी रीति से कार्य करता है।

तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, जरूब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है : न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। हे बड़े पहाड़, तू क्या है? जरूब्बाबेल के साम्हने तू मैदान हो जाएगा; और वह चोटी का पत्थर यह पुकारते हुए आएगा, उस पर अनुग्रह हो, अनुग्रह! - ज़कर्याह 4:6-7

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:1-11
Acts 2:1 जब पिन्‍तेकुस का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। 
Acts 2:2 और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उस से सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया। 
Acts 2:3 और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं; और उन में से हर एक पर आ ठहरीं। 
Acts 2:4 और वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे। 
Acts 2:5 और आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम में रहते थे। 
Acts 2:6 जब वह शब्द हुआ तो भीड़ लग गई और लोग घबरा गए, क्योंकि हर एक को यही सुनाईं देता था, कि ये मेरी ही भाषा में बोल रहे हैं। 
Acts 2:7 और वे सब चकित और अचम्भित हो कर कहने लगे; देखो, ये जो बोल रहे हैं क्या सब गलीली नहीं? 
Acts 2:8 तो फिर क्यों हम में से हर एक अपनी अपनी जन्म भूमि की भाषा सुनता है? 
Acts 2:9 हम जो पारथी और मेदी और एलामी लोग और मिसुपुतामिया और यहूदिया और कप्‍पदूकिया और पुन्‍तुस और आसिया। 
Acts 2:10 और फ्रूगिया और पमफूलिया और मिसर और लिबूआ देश जो कुरेने के आस पास है, इन सब देशों के रहने वाले और रोमी प्रवासी, क्या यहूदी क्या यहूदी मत धारण करने वाले, क्रेती और अरबी भी हैं। 
Acts 2:11 परन्तु अपनी अपनी भाषा में उन से परमेश्वर के बड़े बड़े कामों की चर्चा सुनते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-3


शुक्रवार, 11 जुलाई 2014

शांति


   फोटोग्राफर ऐन गेडेस ने सोए हुए बच्चों की तस्वीरों को एक कला का रूप दे दिया है। उनके द्वारा ली गई सोए हुए बच्चों की तस्वीरें मुस्कुराहट उत्पन्न करती हैं; आराम से सोए हुए बच्चे की तस्वीर से बढ़कर कुछ और शांति की छवि नहीं हो सकती।

   लेकिन सभी माता-पिता भली-भांति जानते हैं कि बच्चों की देखभाल करना, उन्हें शांत रखना और फिर आराम से सुला देना कितना थका देने वाला और अन्वरत ज़िम्मेदारी का कार्य है क्योंकि अपनी उत्सुकतता और मासूमियत में बच्चे अनायास ही पल भर ही में किसी जोखिम में पड़ जाने की क्षमता रखते हैं। उन्हें दिन भर सुरक्षित रखने, उनके पीछे पीछे भागने, उनका मनोरंजन करने, उनका मार्गदर्शन करने, उनकी लड़ाईयाँ सुलझाने, उन्हें तैयार रखने के बाद जब शाम ढलती है तब सभी अभिभावक बच्चों को आराम से सुलाने के इच्छुक हो जाते हैं। रात में सभी खिलौनों को वापस स्थान पर रखने और बच्चों को पाएजामे पहनाने के बाद, बच्चे धीमे हो जाते हैं और माता या पिता के साथ लिपटकर लेटकर कोई कहानी सुनने के साथ सो जाते हैं। उस सोते हुए बच्चे की मनोरम शांति को देखकर दिन भर करी गई दौड़धूप और उठाई गई परेशानी निरर्थक नहीं लगती।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी बताती है कि परमेश्वर पिता का भी अपने बच्चों के प्रति इच्छित स्थिति शांति की ही है (लैव्यवस्था 26:6), लेकिन बहुधा अपनी अपरिपक्वता के कारण हम परेशानियों में पड़ जाते हैं और झगड़े उत्पन्न कर लेते हैं। बच्चों के अभिभावकों के समान ही परमेश्वर भी हर पल हर क्षण हमारी देखभाल करता रहता है, हमें सुरक्षित रखता है, हमारी आवश्यकताएं पूरी करता रहता है, और चाहता है कि गलत बातों के करने और उनमें पड़ने से हटकर हम उन्हें छोड़ कर उसके निकट आ जाएं और शांत होकर उसके प्रेम भरे मार्गों में सुरक्षा और तसल्ली के साथ विश्राम करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


उसकी इच्छा में ही हमारी शांति है। - डान्ते

मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है। - भजन 4:8

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 26:1-12
Leviticus 26:1 तुम अपने लिये मूरतें न बनाना, और न कोई खुदी हुई मूर्ति वा लाट अपने लिये खड़ी करना, और न अपने देश में दण्डवत करने के लिये नक्काशीदार पत्थर स्थापन करना; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। 
Leviticus 26:2 तुम मेरे विश्राम दिनों का पालन करना और मेरे पवित्रस्थान का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 26:3 यदि तुम मेरी विधियों पर चलो और मेरी आज्ञाओं को मानकर उनका पालन करो, 
Leviticus 26:4 तो मैं तुम्हारे लिये समय समय पर मेंह बरसाऊंगा, तथा भूमि अपनी उपज उपजाएगी, और मैदान के वृक्ष अपने अपने फल दिया करेंगे; 
Leviticus 26:5 यहां तक कि तुम दाख तोड़ने के समय भी दावनी करते रहोगे, और बोने के समय भी भर पेट दाख तोड़ते रहोगे, और तुम मनमानी रोटी खाया करोगे, और अपने देश में निश्चिन्त बसे रहोगे। 
Leviticus 26:6 और मैं तुम्हारे देश में सुख चैन दूंगा, और तुम सोओगे और तुम्हारा कोई डराने वाला न हो; और मैं उस देश में दुष्ट जन्तुओं को न रहने दूंगा, और तलवार तुम्हारे देश में न चलेगी। 
Leviticus 26:7 और तुम अपने शत्रुओं को मार भगा दोगे, और वे तुम्हारी तलवार से मारे जाएंगे। 
Leviticus 26:8 और तुम में से पांच मनुष्य सौ को और सौ मनुष्य दस हजार को खदेड़ेंगे; और तुम्हारे शत्रु तलवार से तुम्हारे आगे आगे मारे जाएंगे; 
Leviticus 26:9 और मैं तुम्हारी ओर कृपा दृष्टि रखूंगा और तुम को फलवन्त करूंगा और बढ़ाऊंगा, और तुम्हारे संग अपनी वाचा को पूर्ण करूंगा। 
Leviticus 26:10 और तुम रखे हुए पुराने अनाज को खाओगे, और नये के रहते भी पुराने को निकालोगे। 
Leviticus 26:11 और मैं तुम्हारे बीच अपना निवासस्थान बनाए रखूंगा, और मेरा जी तुम से घृणा नहीं करेगा। 
Leviticus 26:12 और मैं तुम्हारे मध्य चला फिरा करूंगा, और तुम्हारा परमेश्वर बना रहूंगा, और तुम मेरी प्रजा बने रहोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150