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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

ज्वालामुखी


   उसमें विस्फोटक शक्ति है, अपने मार्ग में आने वाली हर वस्तु को वह भस्म कर डालता है और उसका प्रभाव आणविक विस्फोट के समान विनाशकारी होता है। जब क्रोध किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बना कर प्रदर्षित किया जाए तब वह किसी फटते हुए ज्वालामुखी के समान ही होता है। क्रोध के आवेश का वह समय चाहे थोड़े सी देर का ही हो लेकिन अपने पीछे ध्वस्त भावनाएं, आहत संबंध और पीड़ादायक कटु अनुभव छोड़ जाता है जो लंबे समय तक कष्ट देते रहते हैं।

   दुख की बात यह भी है कि वे लोग जिनसे हम प्रेम करते हैं और जिनके साथ हम समय व्यतीत करते हैं, वे ही हमारे क्रोध और आहत करने वाले शब्दों का सबसे अधिक शिकार होते हैं। चाहे हम आवेश में आकर क्रोधित हों या किसी बात से उकसाए गए हों, प्रतिक्रीया के लिए एक चुनाव सदा ही हमारे हाथ में होता है - हमारी प्रतिक्रीया क्रोध में होगी या संयम तथा सहनशीलता के साथ।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि "सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो" (इफिसियों ४:३१-३२)।

   यदि आप क्रोध करने की आदत से परेशान हैं और इसके कारण आपके संबंधों पर प्रभाव आ रहा है तो अपनी इस कमज़ोरी को प्रभु यीशु के हाथों में सौंप दें क्योंकि उसी की सामर्थ से आप इस पर जयवंत हो सकते हैं: "जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पियों ४:१३)। परमेश्वर से अपने अनियंत्रित व्यवहार और क्रोध के लिए क्षमा माँगें और उस से प्रार्थना करें कि वह आपको अपनी भावनाओं और आवेश को नियंत्रित करने की सामर्थ दे तथा दूसरों को अपने से अधिक आदर देने वाला बनाए: "भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो" (रोमियों १२:१०)। अन्य परिपक्व मसीही विश्वासियों से सहायता लें, उनकी संगति में रहें और उनसे सीखें कि उत्तेजित होने पर अपने आप को कैसे संयम में रखें।

   यदि परमेश्वर का आदर करने, उसे प्रसन्न करने तथा उसके प्रेम को दूसरों के सामने प्रदर्शित करने की सच्ची मनोभावना मन में होगी तो अपने ज्वालामुखी समान क्रोध पर जयवन्त भी अवश्य होंगे। - सिंडी हैस कैसपर


दूसरों पर अपना क्रोध उँडेल देना क्रोध से छुटकारा पाने का तरीका नहीं है।

क्रोध करने वाला मनुष्य झगड़ा मचाता है और अत्यन्त क्रोध करने वाला अपराधी होता है। - नीतिवचन २९:२२

बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२०-३२
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १३ 
  • मत्ती २६:२६-५०


सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

स्वाभाविक बात


   जिम प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार केरी के साथ बाँट रहा था। जिम ने केरी को समझाया कि कैसे पाप स्वभाव के साथ जन्म लेने और पापी होने के कारण परम पवित्र परमेश्वर के साथ सभी मनुष्यों के संबंध में रुकावट है और वे परमेश्वर की संगति से दूर हैं। जिम ने यह भी समझाया कि कैसे प्रभु यीशु ने समस्त मानवजाति के पापों को अपने ऊपर लेकर उनके पाप का दण्ड उनके स्थान पर सह लिया और अब प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा प्रभु यीशु की धार्मिकता हमें मिल जाती है और परमेश्वर के साथ संबंध तथा संगति की हर बाधा दूर हो जाती है। केरी उद्धार और पापों से क्षमा के सुसमाचार को मानने से बार बार एक ही बात को लेकर इनकार करती रही। केरी का कहना था कि जैसे जिम अब उससे बाँट रहा है वैसे ही, "प्रभु यीशु को अपने जीवन में ग्रहण कर लेने के बाद क्या मुझे भी इस बात को दूसरों के साथ बाँटना होगा? यदि हाँ तो वह मैं यह नहीं कर सकती, यह मेरे व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं है इसलिए मैं प्रभु यीशु को ग्रहण नहीं करुंगी।"

   जिम ने उसे फिर समझाया कि प्रभु यीशु के बारे में दूसरों को बताना प्रभु को ग्रहण करने के लिए कोई शर्त नहीं है; लेकिन हाँ प्रभु यीशु को ग्रहण कर लेने के बाद केरी स्वाभाविक रूप से और स्वतः ही संसार के सामने प्रभु यीशु की राजदूत अवश्य ही हो जाएगी (२ कुरिन्थियों ५:२०)। कुछ समय तक विचार करने के बाद केरी ने अपने पापों के लिए प्रभु यीशु से क्षमा मांगी, अपना जीवन प्रभु को समर्पित किया और प्रभु यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित करके उसे अपने दिल में रहने का स्थान दिया। जिम के पास से वह प्रसन्नता तथा मन में आलौकिक शांति के साथ विदा हुई, वह बहुत रोमांचित भी थी। अगले २४ घंटों में कुछ अद्भुत और सर्वथा अनपेक्षित हो गया - अपने आप ही केरी ने तीन अन्य लोगों के साथ उस बात को बाँटा जो परमेश्वर ने उसके जीवन में करी, अर्थात अपने पापों की क्षमा और उद्धार पाने के बारे में, और उन्हें प्रभु यीशु के बारे में बताया!

   क्योंकि हम मसीही विश्वासीयों का प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप हो गया है, इसलिए परमेश्वर ने अब हमें यह मेल-मिलाप की सेवा भी सौंप दी है (पद १८) और अब "हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो" (पद २०)। यदि सेंत-मेंत मिले पापों की क्षमा और उद्धार के लिए हम परमेश्वर के धन्यवादी होंगे तो जो परमेश्वर ने हमारे जीवनों में जो किया है उसे दूसरों के साथ बाँटना हमारे लिए एक स्वाभाविक बात होगी। - ऐने सेटास


मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार से भला कोई समाचार नहीं है; इसे प्रसारित करते रहिए।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - २ कुरिन्थियों ५:१७

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१२-२१
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं।
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे।
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ११-१२ 
  • मत्ती २६:१-२५


रविवार, 10 फ़रवरी 2013

शुभकामनाएं


   सिंगापुर में चीनी नव वर्ष के सामाजिक एवं व्यावसायिक सामूहिक प्रीतिभोज अधिकांशतः एक विशेष प्रकार के भोजन से आरंभ होते हैं जो बिना पकाए ही कई वस्तुओं को एक साथ मिलाकर बनाया जाता है। परंपरा है कि जितने लोग भोज में उपस्थित होते हैं वे सब मिलकर इन सब वस्तुओं को एक बर्तन में एक साथ मिलाते हैं और ऐसा करते हुए एक दूसरे के लिए नववर्ष में सौभाग्य लाने के लिए कुछ बातों को बोलते रहते हैं। इस भोजन पदार्थ का नाम है यू शेंग जो कि चीनी भाषा में ’समृद्धि का वर्ष’ कहे जाने के जैसा ही सुनाई पड़ता है।

   हमारे शब्द आते समयों के लिए हमारी भावनाओं और आशाओं को व्यक्त कर सकते हैं लेकिन वे शब्द किसी के जीवन में समृद्धि ला नहीं सकते। यह सामर्थ तो केवल परमेश्वर के पास है, इसलिए अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि हम विचार करें और जानें कि परमेश्वर हम से आते समयों के लिए क्या आशा रखता है।

   फिलिप्पी के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने उनसे कहा, "मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए" (फिलिप्पियों १:९)। फिलिप्पी की मण्डली पौलुस के साथ सहभागी रही थी और वह भी उनसे बहुत प्रेम करता था (फिलिप्पियों १:५, ७) लेकिन पौलुस यह भी चाहता था कि वे परस्पर प्रेम में भी और अधिक बढ़ते जाएं। पौलुस केवल उनसे परमेश्वर के ज्ञान में ही बढ़ने की आशा नहीं रखता था लेकिन उस परमेश्वरीय प्रेम में भी जो कि परमेश्वर के साथ निकट संबंध होने से आता है। परमेश्वर को निकटता से जानने से ही हम सही और गलत के भेद को समझने और फिर उसे जीवनों में लागू करने में सक्षम होने पाते हैं।

   नववर्ष में लोगों को अपनी शुभकामनाएं देना भला है, लेकिन हमारी हार्दिक इच्छा परमेश्वरीय प्रेम में बढ़ते जाने की होनी चाहिए जिससे हमारे जीवन धार्मिकता के फलों से सुसज्जित होकर परमेश्वर की महिमा का कारण ठहरें (फिलिप्पियों १:११)। - सी. पी. हिया


जिनके पास परमेश्वर के लिए दिल होता है वे दिल में लोगों को जगह देना भी जानते हैं।

मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। - फिलिप्पियों १:९

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:३-१२
Philippians1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं।
Philippians1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं।
Philippians1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो।
Philippians1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा।
Philippians1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो।
Philippians1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं।
Philippians1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
Philippians1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ।
Philippians1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे।
Philippians1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ८-१० 
  • मत्ती २५:३१-४६


शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

आनन्द एवं शोक


   इस्त्राएल राष्ट्र के आरंभिक वर्षों में गोल्डा मेयर वहाँ की प्रधानमंत्री बनीं। गोल्डा मेयर ने अपने जीवन में बहुत से संघर्षों तथा उतार चढ़ावों को देखा था। अपने प्रधानमंत्री काल में भी उन्होंने नवजात इस्त्राएल राष्ट्र को अनेक संघर्षों, हानिकारक प्रसंगों एवं कुछ आनन्द के अवसरों से होकर निकलते हुए देखा। आनन्द और शोक के समयों के विषय में उन्होंने कहा, "जो अपने संपूर्ण हृदय से विलाप करना नहीं जानते, वे दिल खोल कर हँसना भी नहीं जान सकते।"

   परमेश्वर के जन प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में विलाप और आनन्द करने की बात एक अनोखे रूप में कही है। रोम के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में वह अपने पाठकों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों एवं संदर्भ से बाहर निकल कर इन विषयों के लिए दूसरों की ओर देखने को कहता है। पौलुस ने कहा: "आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ" (रोमियों १२:१५)।

   यदि हम केवल अपने दुखों और असफलताओं पर ही विलाप करें तो हम दूसरों के कटु अनुभवों में उनके साथ होने, उनके साथ सहृदयता दिखाने और उनके प्रति संवेदनशील होने के अवसर गवाँ देंगे। यदि हम केवल अपने ही सुखों में और केवल अपनी ही सफलताओं में आनन्दित होते हैं तो हम प्रभु की सामर्थ के अद्भुत प्रगटिकरण के अवसरों में सम्मिलित नहीं हो पाते क्योंकि प्रभु अपनी सामर्थ और उद्देश्य अन्य लोगों के जीवनों में होकर भी प्रगट करता है।

   प्रत्येक जीवन आनन्द एवं शोक, सफलता एवं असफलता दोनो ही प्रकार के अनुभवों से भरा है। हम मसीही विश्वासियों को यह सौभाग्य दिया गया है कि हम लोगों के जीवनों में इन दोनो प्रकार के अनुभवों में सम्मिलित हो सकें और परमेश्वर के अनुग्रह को कार्यकारी होते हुए देख सकें। इस अवसर को व्यर्थ ना जाने दें; लोगों के जीवनों में सम्मिलित हों, उनके दुख भी बांटें और उनके सुखों में भी उनके साथ आनन्दित हों। - बिल क्राउडर


दूसरों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना मसीह को आदर देता है।

आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। - रोमियों १२:१५

बाइबल पाठ: रोमियों १२:९-१६
Romans12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
Romans12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans12:12 आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Romans12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।
Romans12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ६-७ 
  • मत्ती २५:१-३०


शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

प्रशिक्षण स्थल


   अंतरिक्ष यात्रियों में से अनेक अपने बचपन में स्काउट हुआ करते थे। स्काउटिंग प्रशिक्षण युवकों को अनुशासित जीवन जीना सिखाता है जो आगे चलकर उन्हें उनके लक्ष्य प्राप्त करने में बहुत सहायक होता है, चाहे वह लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रा ही क्यों ना हो। युवक स्काऊट्स की एक सभा के दौरान उन्हें २० जुलाई १९६९ को एक वरिष्ठ ईगल स्काउट से मिले एक संदेश ने रोमांचित कर दिया; वह ईगल स्काऊट थे नील आर्मस्ट्रॉन्ग जिन्होंने बाह्य अंतरिक्ष से, उस सभा के दौरान, उन्हें अपना अभिवादन भेजा।

   स्काउट प्रशिक्षण शिविर के समान एक मसीही घर को भी आत्मिक अनुशासन सिखाने और उसमें बढ़ते रहने का प्रशिक्षण देना का स्थान होना चाहिए। परमेश्वर का वचन बाइबल अभिभावकों से कहती है कि वे बच्चों के सही विकास के लिए अपने बच्चों को घरों में एक सकारात्मक वातावरण प्रदान करें और बच्चों को "...प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो" (इफिसीयों ६:४)। अर्थात बच्चों की शारीरिक, मानसिक और आत्मिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति सही रीति से होने पाए; उनके विकास के सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाए और प्रत्येक बच्चे कि आवश्यकतानुसार उचित शब्दों तथा व्यवहार द्वारा उसका सही मार्गदर्शन किया जाए जिससे वह समुचित विकास के साथ एक अच्छा और ईमानदार नागरिक तथा मसीह का विश्वासी बनने पाए।

   यह हम मसीही विश्वासियों की ज़िम्मेवारी है कि हम अपने घरों को प्रेम तथा अनुशासन का ऐसा प्रशिक्षण स्थल बनाएं जो हमारे बच्चों को समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले, समाज की उन्नति एवं परमेश्वर की महिमा के कारण बनें। - डेनिस फिशर


जो आज आप बच्चों के हृदय में डालेंगे हैं वही कल उनके चरित्र को निर्धारित करेगा।

हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो। - इफिसीयों ६:४

बाइबल पाठ: इफिसीयों ६:१-४
Ephesians6:1 हे बालकों, प्रभु में अपने माता पिता के आज्ञाकारी बनो, क्योंकि यह उचित है।
Ephesians6:2 अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)।
Ephesians6:3 कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।
Ephesians6:4 और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ४-५ 
  • मत्ती २४:२९-५१

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

रक्षक स्वर्गदूत


   जब हमारी नातिन जूलिया एक छोटी बच्ची थी तो हम उसे अपने साथ पहाड़ों की एक यात्रा पर लेकर गए। घुमावदार पहाड़ी मार्गों से होकर निकलने, गहरी घाटियों और गगनचुंबी चट्टानों को देखने के बाद जूलिया और उसकी नानी आपस में यात्रा के संबंध में बातचीत कर रहे थे; मेरी पत्नी ने जूलिया से कहा, "जब तुम्हारे नाना गाड़ी चला रहे होते हैं तो मुझे डर नहीं लगता क्योंकि मेरा मानना है कि उनके ऊपर एक रक्षक स्वर्गदूत रखा गया है।" यात्रा मार्ग से प्रभावित जूलिया ने तपाक से उत्तर दिया, "लेकिन मेरा मानना है कि एक नहीं रक्षक स्वर्गदूतों की पूरी सेना उन्हें संभालती होगी।"

   अनजाने में ही उस छोटी बच्ची के मुँह से परमेश्वर के वचन का तथ्य निकल गया। भजनकार ने कहा: "परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है" (भजन ६८:१७)। पवित्र बाइबल में परमेश्वर को ’सेनाओं का यहोवा’ कह के भी संबोधित किया गया है, और स्वर्गदूत परमेश्वर की सेना है। प्रभु यीशु को पकड़वाए जाने के समय प्रभु ने इसी तथ्य के संदर्भ में अपने चेले पतरस से कहा था: "क्या तू नहीं समझता, कि मैं अपने पिता से बिनती कर सकता हूं, और वह स्‍वर्गदूतों की बारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उपस्थित कर देगा?" (मत्ती २६:५३) परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने अपने इन्हीं स्वर्गदूतों को हम मसीही विश्वासियों की सेवा-टहल करने वाली आत्माएं कर दिया है (इब्रानियों १:१३-१४)।

   बाइबल में राजाओं के वृतान्त में हम पढ़ते हैं कि अराम देश कि सेना ने परमेश्वर के भविष्यद्वकता एलीशा के नगर को घेर लिया; एलीशा निश्चिंत था किंतु उसका सेवक घबरा कर पूछने लगा "हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?" तब एलिशा ने उत्तर दिया, "मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं" और फिर एलीशा की प्रार्थना पर परमेश्वर ने उस सेवक की आँखें खोल दीं कि वह आलौकिक को देख सके और तब सेवक ने देखा कि "एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है" (२ राजा ६:१५-१७) - सेनाओं के यहोवा की सेना उसके जन के साथ विद्यमान थी।

   चाहे हम उन्हें अपनी शारीरिक आँखों से नहीं देख पाते लेकिन हम मसीही विश्वासी इस बात से सदा आश्वस्त रह सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने स्वर्गदूतों को हमारे चारों ओर नियुक्त किया हुआ है और हमें आभास भी नहीं होने पाता कि हमारे विरुद्ध होने वाले शत्रु शैतान के कितने और कैसे कैसे हमले वे विफल कर देते हैं। परमेश्वर की आज्ञा के बिना और उसकी निर्धारित सीमा के बाहर कोई भी शक्ति हमें छू भी नहीं सकती यह हम अय्युब की पुस्तक के १ एवं २ अध्याय में स्पष्ट देखते हैं।

   हम मसीही विश्वासियों के जीवनों में जो भी होता है वह हमारी भलाई तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए ही होता है। इसलिए यदि दुख-क्लेषों से होकर निकलना भी पड़े तो लेश-मात्र भी विचलित ना हों वरन उनमें भी परमेश्वर की महिमा करें। - डेविड रोपर


परमेश्वर के लोग परमेश्वर के स्वर्गदूतों के संरक्षण में रहते हैं।

क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें। - भजन ९१:११

बाइबल पाठ: २ राजा ६:८-१७
2 Kings6:8 ओैर अराम का जाजा इस्राएल से युद्ध कर रहा था, और सम्मति कर के अपने कर्मचारियों से कहा, कि अमुक स्थान पर मेरी छावनी होगी।
2 Kings6:9 तब परमेश्वर के भक्त ने इस्राएल के राजा के पास कहला भेजा, कि चौकसी कर और अमुक स्थान से हो कर न जाना क्योंकि वहां अरामी चढ़ाई करने वाले हैं।
2 Kings6:10 तब इस्राएल के राजा ने उस स्थान को, जिसकी चर्चा कर के परमेश्वर के भक्त ने उसे चिताया था, भेज कर, अपनी रक्षा की; और उस प्रकार एक दो बार नहीं वरन बहुत बार हुआ।
2 Kings6:11 इस कारण अराम के राजा का मन बहुत घबरा गया; सो उसने अपने कर्मचारियों को बुला कर उन से पूछा, क्या तुम मुझे न बताओगे कि हम लोगों में से कौन इस्राएल के राजा की ओर का है? उसके एक कर्मचारी ने कहा, हे मेरे प्रभु! हे राजा! ऐसा नहीं,
2 Kings6:12 एलीशा जो इस्राएल में भविष्यद्वक्ता है, वह इस्राएल के राजा को वे बातें भी बताया करता है, जो तू शयन की कोठरी में बोलता है।
2 Kings6:13 राजा ने कहा, जा कर देखो कि वह कहां है, तब मैं भेज कर उसे पकड़वा मंगाऊंगा। और उसको यह समाचार मिला कि वह दोतान में है।
2 Kings6:14 तब उसने वहां घोड़ों और रथों समेत एक भारी दल भेजा, और उन्होंने रात को आकर नगर को घेर लिया।
2 Kings6:15 भोर को परमेश्वर के भक्त का टहलुआ उठा और निकल कर क्या देखता है कि घोड़ों और रथों समेत एक दल नगर को घेरे हुए पड़ा है। और उसके सेवक ने उस से कहा, हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?
2 Kings6:16 उसने कहा, मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं।
2 Kings6:17 तब एलीशा ने यह प्रार्थना की, हे यहोवा, इसकी आंखें खोल दे कि यह देख सके। तब यहोवा ने सेवक की आंखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा, कि एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १-३ 
  • मत्ती २४:१-२८


बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

पक्षपात


   समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट में पूर्वधारणा एवं पक्षपात पर एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें बताया गया कि शोध कर्ताओं ने पाया है कि लगभग सभी लोग किसी न किसी रूप में और कुछ न कुछ मात्रा में पूर्वधारणा एवं पक्षपात रखते हैं और यह रवैया उनमें भी पाया जाता है जो इसके विरोधी हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे स्वाभिमान का प्रमुख भाग उस भावना से आता है जो हमारे एक विशेष समुदाय अथवा वर्ग से जुड़े होने के कारण हमें अपने आप को दूसरों से बेहतर आँकने देती है। पक्षपात को पराजित करना सरल नहीं है - परमेश्वर के लोगों और समुदाय में भी नहीं!

   प्रेरित पौलुस द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखे शब्द हम मसीही विश्वासियों को आज भी निर्देषित करते हैं कि हमारे व्यवहार और हमारे शब्दों में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव दिखाई नहीं देना चाहिए क्योंकि मसीह यीशु में हर भेदभाव मिट गया है और हम मसीह के स्वरूप में ढाले जा रहे हैं: "और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है" (कुलुस्सियों ३:१०-११)। इसलिए बड़े-छोटे या ऊँच-नीच अथवा पक्षपात की बजाए हमारे परस्पर व्यवहार में करुणा, दया, नम्रता, कोमलता और धीरज दिखाई देने चाहिएं (पद १२) और इन सब के ऊपर प्रेम जो सिद्धता का कटिबन्ध है (पद १४) विद्यमान होना चाहिए।

   मसीह यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में जाति, वर्ग, वर्ण, रंग अथवा राष्ट्रीयता के आधार पर किसी को कोई वरियता नहीं है क्योंकि क्रूस के द्वारा मसीह यीशु ने हम सब को अपने आप में एक कर दिया है ताकि हम एक दूसरे के साथ सदैव ही ईमानदारी, आदर और प्रेम में व्यवहार करें। मसीही विश्वासियों को अपनी नहीं वरन परमेश्वर के पुत्र एवं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


पक्षपात प्रकट को विकृत कर देता है, वार्तालाप में असत्य मिला देता है और जहाँ कार्यान्वित होता है वहाँ विनाश ले आता है।

उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है। - कुलुस्सियों ३:११

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:८-१७
Colossians3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३९-४० 
  • मत्ती २३:२३-३९