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गुरुवार, 20 जून 2013

संक्षिप्त

   एक बार मैं ने गिनती की और पाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध "गेट्सीबर्ग भाषण" में 300 से भी कम शब्द प्रयुक्त हुए थे; अर्थात बात के प्रभावी और विस्मर्णीय होने के लिए शब्दों की बहुतायत होने की आवश्यकता नहीं है।

   यह भी एक कारण है कि मुझे भजन 117 बहुत पसन्द है; संक्षिप्त होना इस भजन की खासियत है। भजनकार ने कुल 38 शब्दों में जो कुछ वह कहना चाहता था कह दिया है; मूल इब्रानी भाषा में तो इस भजन में केवल 17 शब्द ही प्रयुक्त हुए हैं। परमेश्वर की स्तुति एवं प्रशंसा के इस भजन में सारे संसार के लिए संदेश है कि परमेश्वर यहोवा का करूणामय प्रेम हमारे ऊपर प्रबल हुआ है इसलिए वह स्तुति और धन्यवाद का पात्र है।

   थोड़ा परमेश्वर के प्रेम के बारे में मनन करें। हमारे जन्म और अस्तित्व से पहले ही परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया; हमारे जीवन भर उसका व्यवहार हमारे प्रति प्रेम और करुणा से भरा रहता है और हमारी मृत्योपरांत भी उसका प्रेम अपनी सन्तान के प्रति बना रहेगा। पौलुस प्रेरित ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण दिलाया कि उनके प्रति मसीह यीशु के प्रेम से हमें अलग कर सकने वाली कोई भी बात नहीं है (रोमियों 8:39)। परमेश्वर का हृदय प्रेम का एक ऐसा सोता है जो ना कभी सूख सकता है और ना कभी समाप्त हो सकता है।

   इस संक्षिप्त से स्तुति एवं प्रशंसा के भजन को पढ़कर अपनी जीवन यात्रा में प्रोत्साहन पाने के लिए परमेश्वर के मेरे प्रति करुणामय प्रेम से बढ़कर लाभकारी किसी अन्य बात की मैं कलपना भी नहीं कर सकता; जीवन यात्रा को सफल बनाने के लिए उसका प्रेम ही मेरे लिए पर्याप्त है। क्या आपने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रेम को स्थान दिया है? - डेविड रोपर


जितना हम परमेश्वर को अनुभव करते हैं उतना ही उसके प्रति आनन्दित और स्तुतिपूर्ण होते जाते हैं।

और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगो; उसे सराहो। - रोमियों 15:11 

बाइबल पाठ: भजन 117; रोमियों 8:31-39
Psalms 117:1 हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो! हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो!
Psalms 117:2 क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो!

Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2 
  • प्रेरितों 5:1-21


बुधवार, 19 जून 2013

बचाए गए

   जनवरी 2010 में हेती द्वीप समूह में एक विनाशकारी भूकम्प आया। भूकम्प और उसके बाद के बचाव कार्य को मीडिया के द्वारा व्यापक रूप से दिखाया गया। विनाश तथा जान और माल की हानि के दृश्यों के बीच में, सभी आशाओं के विपरीत, किसी किसी के मलबे से जीवित निकाले जाने के दृश्य भी देखने को मिलते थे, और उनके साथ ही उन बचाए गए लोगों के रिश्तेदारों आदि के कृतज्ञता तथा धन्यवाद सहित आँसुओं से भरे चेहरे भी दिखाए जाते थे। वे रिश्तेदार कृतज्ञ एवं धन्यवादी थे उन अनजान लोगों के प्रति जो चौबीसों घण्टे बचाने के कार्य में लगे रहते थे और जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई। 

   यदि यह आपके साथ होता तो आपको कैसा अनुभव होता? क्या आप कभी किसी जोखिम से बचाए गए हैं?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को, जिन्होंने व्यक्तिगत रीति से प्रभु यीशु को जाना और जीवन समर्पण किया था तथा जिनके जीवन उनके इस विश्वास को दिखाते थे, लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने पहले तो उन्हें आशवासन दिया कि वह निरंतर उन्हें प्रार्थना में स्मरण रखता है कि वे परमेश्वर की सिद्ध और भली इच्छा को जानने वाले और परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले बन सकें; तत्पश्चात पौलुस उन्हें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर ने उनके लिए क्या किया है: "उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है" (कुलुस्सियों 1:13-14)।

   मसीह यीशु में हम पाप और पाप के श्राप तथा दण्ड से बचाए जाते हैं। उसी ने अपने आप को हमारे लिए बलिदान कर दिया जिससे वह हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर, अपनी धार्मिकता हमे दे सके। उसी में हमें मोक्ष या उद्धार और परमेश्वर की सन्तान होने का दर्जा तथा स्वर्ग में स्थान मिलता है। मसीह यीशु ही है जो संसार के हर व्यक्ति को पाप की मृत्यु से उद्धार के अनन्त जीवन में प्रवेश देता है, अन्धकार की शक्तियों से बचाकर निर्मल ज्योति में निवास देता है।

   पाप के प्रभाव तथा अंजाम से बचाए जाने और परमेश्वर के इस अनुग्रह तथा कृपा का हमारे जीवन में क्या स्थान एवं महत्व है, हमारे लिए यह एक गहन विचार का तथा परमेश्वर के प्रति निरंतर धन्यवादी होने का विषय होना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो पाप से बचाए गए हैं वे ही दूसरों को भी पाप से बचाने की लालसा रखते हैं।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। - इफिसियों 2:4-6

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-18
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है।
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13 
  • प्रेरितों 4:23-37


मंगलवार, 18 जून 2013

केंद्र बिन्दु

   मुझे गोल्फ खेलना अच्छा लगता है, इसलिए कभी कभी मैं कुछ ऐसे वीडियो देखता हूँ जो इस खेल की बारीकियों और इसे खेलने के बारे में सिखाते हैं। लेकिन एक वीडियो से मैं बहुत निराश हुआ क्योंकि सिखाने वाले ने गोल्फ के एक बिन्दु को समझाने के लिए 8 क्रम और हर क्रम के नीचे और दर्जन भर उप-क्रम बताए। यह सब समझने में बहुत कठिन और अनुपयोगी था। यद्यपि मैं गोल्फ का कोई कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं हूँ, फिर भी सालों से खलने के अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि खेलते समय जितने अधिक विचार आपके दिमाग़ में चल रहे होंगे, आपकी सफलता की संभावना उतनी ही कम होगी। अच्छे खेल के लिए आपको अपने विचारों को सीमित एवं सरल तथा ध्यान को एक ही बात पर केंद्रित रखना चाहिए कि किस प्रकार गोल्फ के बल्ले और गेंद में सबसे अधिक कारगर संपर्क बनाया जाए। उस प्रशिक्षक द्वारा दिए गए इतने अधिक विचार ध्यान को केंद्रित रखने में बाधा थे।

   जैसे गोल्फ में, वैसे ही जीवन में इसी प्रकार से केंद्रित रहना सफलता के लिए अनिवार्य है। यही बात मसीही विश्वास और मसीही जीवन में भी पाई जाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इस बारे में लिखा है (फिलिप्पियों 3)। बजाए इसके कि वह अनेक बातों पर ध्यान करता रहे, पौलुस ने सबसे महत्वपूरण एक ही बात पर अपना ध्यान केंद्रित रखा: "हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों 3:13-14)।

   उसके जीवन की सफलता और उन्नति का यही राज़ था - "केवल यह एक काम करता हूं" - केंद्रित विचार। ध्यान इधर-उधर खींचने और भंग करने के अनेक आकर्षणों तथा विधियों से भरे इस संसार में एक मसीही विश्वासी के लिए अपने ध्यान को अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने से भला और कुछ नहीं है। लेकिन यह तब ही हो सकता है जब मसीह यीशु आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान हो। जब ऐसा होगा तब सांसारिक प्रलोभन और विचार नहीं वरन मसीह यीशु का जीवन और शिक्षाएं आपका मार्गदर्शक तथा उद्देश्य होंगी और परमेश्वर की आशीष आपके जीवन में बनी रहेगी। 

   क्या आज मसीह यीशु आपके जीवन तथा ध्यान का केंद्र बिन्दु है? - बिल क्राउडर


जब हम मसीह यीशु पर अपने ध्यान को बनाए रखते हैं तब ही हम उसके लिए सबसे प्रभावशाली होते हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - 1 कुरिन्थियों 9:24 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:8-16
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-11 
  • प्रेरितों 4:1-22


सोमवार, 17 जून 2013

सच्ची दौलत

   धन सशक्त है; हम उसे कमाने के लिए मेहनत करते हैं, उसे संचित करते हैं, उस के द्वारा अपनी इच्छापूर्ति के प्रयास करते हैं और अपने पार्थिव जीवन की अभिलाषाओं को पूरा करने की चाह रखते हैं। धन की बहकाने वाली सामर्थ के कारण, प्रभु यीशु की शिक्षाओं में सर्वाधिक धन से ही संबंधित थीं; किंतु उन्होंने कभी एक बार भी अपने लिए कोई भेंट या उपहार नहीं चाहा। स्पष्ट है कि उन्होंने धन से संबंधित अपनी शिक्षाएं, अपनी जेब भरने के लिए नहीं दीं। धन संचय करने तथा उसपर निर्भर रहने की शिक्षाओं के विपरीत प्रभु की शिक्षाएं चेतावनी थीं कि धन संचय करने की लालसा और धन को सांसारिक सामर्थ पाने के लिए उपयोग करने की प्रवृत्ति हमारे आत्मिक जीवन के विकास को अवरुद्ध कर देती है और पार्थिव जीवन में अनेक परेशानियाँ ले आती है। प्रभु यीशु ने अपने आस-पास एकत्रित लोगों को एक "धनी-मूर्ख" की नीतिकथा सुनाई जिससे वे परमेश्वर के प्रति धनवान होने के मर्म को समझ सकें तथा पहचान सकें कि परमेश्वर की दृष्टि में धनवान होना संसार के मापदण्ड से कितना भिन्न है: "फिर भीड़ में से एक ने उस से कहा, हे गुरू, मेरे भाई से कह, कि पिता की संपत्ति मुझे बांट दे। उसने उस से कहा; हे मनुष्य, किस ने मुझे तुम्हारा न्यायी या बांटने वाला नियुक्त किया है? और उसने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। उसने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्या करूं, क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं। और उसने कहा; मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उन से बड़ी बनाऊंगा; और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह। परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं" (लूका 12:13-21)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार परमेश्वर के प्रति धनवान होने से क्या तात्पर्य है? प्रेरित पौलुस ने लिखा है कि वे जो धनवान हैं वे अपने धन के प्रति मिथ्या अभिमान ना रखें वरन भले कार्यों में धनी बनें और धन को बाँटने में उदार हों (1 तिमुथियुस 6:17-18)। कहने का तात्पर्य है कि परमेश्वर की नज़रों में धनवान होना हमारे जीवन की गुणवन्ता तथा अपने धन के द्वारा दूसरों की सहायता करने पर निर्भर है। यह बड़ी रोचक बात है! संसार में धन कमाने और धनवान बनने के मार्ग दिखाने वालों की सलाह तथा मार्गदर्शन देने वालों की शिक्षाओं से कितनी भिन्न है यह शिक्षा! लेकिन जो लोग यह विचार रखते हैं कि उनकी सुरक्षा और समाज में उनका स्तर उनके संचित धन के अनुपात में होता है वे प्रभु यीशु की इस नीतिकथा तथा धन संबंधित शिक्षाओं से सचेत हों, सच्ची दौलत वही है जो अविनाशी और चिरस्थाई है ना कि इस पृथ्वी पर संचित करी जाने वाली नाशमान दौलत। - जो स्टोवैल


धन केवल उन्हीं के लिए आशीष है जो उसे दूसरों के लिए आशीष बनाते हैं।

इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। - 1 तिमुथियुस 6:17 

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 6:6-19
1 Timothy 6:6 पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है।
1 Timothy 6:7 क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं।
1 Timothy 6:8 और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए।
1 Timothy 6:9 पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं।
1 Timothy 6:10 क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है।
1 Timothy 6:11 पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धर्म, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर।
1 Timothy 6:12 विश्वास की अच्छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के साम्हने अच्छा अंगीकार किया था।
1 Timothy 6:13 मैं तुझे परमेश्वर को जो सब को जीवित रखता है, और मसीह यीशु को गवाह कर के जिसने पुन्‍तियुस पीलातुस के साम्हने अच्छा अंगीकार किया, यह आज्ञा देता हूं,
1 Timothy 6:14 कि तू हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने तक इस आज्ञा को निष्‍कलंक और निर्दोष रख।
1 Timothy 6:15 जिसे वह ठीक समयों में दिखाएगा, जो परमधन्य और अद्वैत अधिपति और राजाओं का राजा, और प्रभुओं का प्रभु है।
1 Timothy 6:16 और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा, और न कभी देख सकता है: उस की प्रतिष्‍ठा और राज्य युगानुयुग रहेगा। आमीन।
1 Timothy 6:17 इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।
1 Timothy 6:18 और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों।
1 Timothy 6:19 और आगे के लिये एक अच्छी नेव डाल रखें, कि सत्य जीवन को वश में कर लें।

एक साल में बाइबल: नहेम्याह 7-9 प्रेरितों 3

रविवार, 16 जून 2013

आदर

   घटना 1992 में बार्सेलोना में आयोजित हो रहे ग्रीष्मकालीन ओलिमपिक्स की है। उद्घाटन समारोह को देखने 65,000 दर्षक आए हुए थे और जैसे जैसे भिन्न देशों की टीम्स स्टेडियम में प्रवेश करतीं, वे उनका ज़ोर-शोर से स्वागत करते। लेकिन स्टेडियम के एक भाग में खामोशी और उदासी थी क्योंकि अमेरिका की तैराकी टीम के सदस्य रॉन कारनौ के पिता पीटर कारनौ जानलेवा हृदयाघात से जाते रहे थे।

   पाँच दिन पश्चात रॉन अपनी स्पर्धा में भाग लेने पहुँच गया; जब वह आया तो उसने अपने पिता की टोपी पहनी हुई थी। स्पर्धा के आरंभ होने से पहले उसने वह टोपी उतारी और संभाल कर अपने स्थान के पास रख ली। यह उस तैराक द्वारा अपने पिता को दी गई श्रद्धांजलि थी, जिन्हें रॉन अपना "सर्वश्रेष्ठ मित्र" कहकर संबोधित करता था। उसी टोपी को पहन हुए उसके पिता ने रॉन के साथ बहुत समय बिताया था और कई गतिविधियों में दोनो ने साथ भाग लिया था। उस टोपी को पहनने के द्वारा रॉन अपने पिता को सम्मान देना चाहता था उस हर एक पल और अवसर के लिए जो उन्होंने उसके साथ बिताया, उसे प्रोत्साहित किया, उसका मार्गदर्शन किया और उसे कठिनाईयों में सहारा दिया। आज रॉन के पिता तो उसके साथ नहीं थे लेकिन उनकी यादें रॉन के साथ थीं जो आज भी उसे प्रोत्साहित कर रही थीं, सहारा दे रही थीं।

   आज के इस दिन में, जो पिताओं को आदर देने के लिए मनाया जाता है, हम स्मरण रखें कि अपने पिता को आदर देने के कई तरीके हो सकते हैं। परमेश्वर का वचन बाइबल भी हमें निर्देश देती है कि अपने माता-पिता का आदर करें (इफिसियों 6:2)। आदर देने का एक तरीका है उन भले गुणों और मूल्यों को सम्मान देना जो उन्होंने हमें सिखाए हैं। साथ ही हम में जो पिता हैं उन्हें भी यह ध्यान देना है कि क्या हम अपने बच्चों को वह समय, प्रोत्साहन तथा मार्गदर्शन दे रहे हैं जो उनका अधिकार तथा उनके प्रति हमारा कर्तव्य है? क्या हमारे बच्चे किसी सार्वजनिक समारोह में हमें वैसा ही आदर देने की लालसा रखेंगे जैसा रॉन ने अपने पिता को दिया?

   आज के इस विशेष दिवस में संकल्प करें कि अपने माता-पिता को उनका योग्य आदर और स्थान देंगे और अपने बच्चों को प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन देने वाले और उनके साथ समय बिताने तथा सहारा देने वाले बनेंगे। - डेव ब्रैनन


अच्छे पिता हमें जीवन केवल देते नहीं हैं, वरन उस जीवन को जीना भी सिखाते हैं।

अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)। - इफिसियों 6:2 

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:1-4
Ephesians 6:1 हे बालकों, प्रभु में अपने माता पिता के आज्ञाकारी बनो, क्योंकि यह उचित है।
Ephesians 6:2 अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)।
Ephesians 6:3 कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।
Ephesians 6:4 और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6 
  • प्रेरितों 2:22-47


शनिवार, 15 जून 2013

वचन का अध्ययन

   मैं एक जवान प्रबन्धक के साथ परमेश्वर के वचन बाइबल को नियमित रूप से पढ़ने और उसपर मनन करने से होने वाले लाभ के बारे में बात कर रहा था, और उसने पूछा, "क्या मुझे बाइबल में लैव्यवस्था की पुस्तक पढ़ना आवश्यक है? पुराना नियम पढ़ना कभी कभी उबाऊ और कठिन होता है।" यह केवल उस एक जन का विचार नहीं है, बहुत से मसीही विश्वासी भी ऐसे ही विचार रखते हैं और पुराने नियम को या उसके कुछ भागों को पढ़ने से कतराते हैं। लेकिन सच तो यह है कि पुराने नियम को संपूर्णता से पढ़ना हमारे लिए आवश्यक तथा लाभपूर्ण है क्योंकि पुराने नियम से ही हमें नए नियम को समझने की पृष्ठभूमि और संसार की सृष्टि से चले आ रहे परमेश्वर के उद्देश्य पता लगते हैं जिनकी व्याख्या तथा पूर्ति नए नियम में आकर पूर्ण होती है।

   यशायाह हमें परमेश्वर के खोजी होने को प्रेरित करता है (यशायाह 55:6); साथ ही वह हमें यह भी सिखाता है कि परमेश्वर का वचन कभी व्यर्थ नहीं लौटता, वरन परमेश्वर की इच्छा पूरी करके ही लौटता है (यशायाह 55:11)। बाइबल की अन्य पुस्तकों में परमेश्वर के वचन को जीवित और प्रबल कहा गया है "क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है" (इब्रानियों 4:12); उसे उपदेश देने, समझाने, सुधारने तथा सिद्ध बनने के लिए लाभदायक बताया गया है (2 तिमुथियुस 3:16-17)। संभव है कि परमेश्वर के वचन की बातें हमें वर्तमान में ही व्यावाहरिक अथवा कार्यकारी ना लगें, परन्तु किसी अन्य समय और परिस्थिति में उनकी व्यावाहरिकता तथा उपयोगिता प्रकट हो जाती है और समझ में आती है।

   जब हम परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को अपने मन में पढ़ने तथा मनन करने के द्वारा संजो लेते हैं तो परमेश्वर का आत्मा हमें हमारी आवश्यकतानुसार उन्हें स्मरण दिलाता है और उन्हें जीवन में उपयोगी बनाता है - लैव्यवस्था को भी; उदाहरणस्वरूप, लैव्यवस्था 19:10-11 हमें सिखाती है कि व्यावसायिक स्पर्धा और निर्धनों के प्रति कैसा रवैया रखें। परमेश्वर का आत्मा ऐसे ही अनेक सिद्धांत और उदाहरण हमें सही समय पर स्मरण दिलाकर हमारी सहायता करता है जिससे हम सही निर्णय ले सकें। इसलिए परमेश्वर के वचन को उसकी संपूर्णता में अपने हृदय तथा जीवन में स्थान देना हमारे लिए बहुत आवश्यक है।

   परमेश्वर के वचन को पढ़ना तथा उसपर मनन करना हमारे मनों को एक अनमोल तथा सदा उपयोगी खज़ाने का भण्डार बना देता है, और हमारी आवश्यकता तथा परिस्थिति के अनुसार परमेश्वर का आत्मा हमारे इस भण्डार से लेकर हमें सही मार्ग दिखाता है, हमें सफल बनाता है। इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल की सभी 66 पुस्तकों का अध्ययन आवश्यक है - लैव्यवस्था का भी! - रैन्डी किल्गोर


परमेश्वर के वचन को समझने के लिए परमेश्वर के आत्मा पर निर्भर रहें।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: यशायाह 55:6-13
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है।
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है,
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
Isaiah 55:12 क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाडिय़ां गला खोल कर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे।
Isaiah 55:13 तब भटकटैयों की सन्ती सनौवर उगेंगे; और बिच्छु पेड़ों की सन्ती मेंहदी उगेगी; और इस से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3 
  • प्रेरितों 2:1-21


शुक्रवार, 14 जून 2013

नियम

   सभी अभिभावक यह भलि-भांति जानते हैं कि घर के नियम घरवालों की भलाई के लिए होते हैं; उनका पालन घर में शांति बनाए रखता है और आपसी प्रेम को बढ़ावा देता है। वे यह भी जानते हैं कि नियम भिन्न प्रकार के होते हैं; कुछ बच्चों द्वारा पालन किए जाने और उनकी भलाई के लिए होते हैं, कुछ व्यसकों द्वारा पालन किए जाने और उनकी भलाई के लिए होते हैं और कुछ ऐसे जो घर के सभी लोगों पर समान रूप से लागू होते हैं। लेकिन अन्ततः सभी नियम घर की उन्नति और मर्यादा को बनाए रखने के लिए होते हैं। हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर पिता ने भी हमारे लिए कुछ नियम बनाकर दिए हैं। इसलिए नहीं कि वह हमें बन्धनों में बांध कर रखना चाहता है, वरन इसलिए कि हम आपस में प्रेम, सहृदयता और परस्पर आदर के साथ रह सकें और एक दूसरे की उन्नति में सहायक हो सकें। परमेश्वर हमें भलि-भांति जानता है और यह भी कि मानव समाज सर्वोत्तम रीति से किस प्रकार कार्य कर सकता है; उसके ये नियम इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।

   परमेश्वर के सभी नियमों का संक्षिप्त किंतु संपूर्ण संकलन है परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई "दस आज्ञाएं"। जब मैंने इन दस आज्ञाओं को इस दृष्टिकोण से देखना आरंभ किया कि ये परमेश्वर द्वारा मेरी भलाई के लिए दी गई आज्ञाएं हैं, तो मैं इनकी व्यावाहरिकता और उपयोगिता को एक नवीन रीति से समझने पाया। मैंने पाया कि ये दस आज्ञाएं मनुष्य के परमेश्वर के साथ संबंध तथा मनुष्य के परस्पर एवं सामाजिक संबंधों और दायित्वों को बड़े स्पष्ट रूप में बताते हैं। हमारे जीवन की ऐसी कोई बात नहीं है जो इन दस आज्ञाओं की सीमाओं से बाहर हो। हमारे जीवन का हर पहलु इनके द्वारा निर्धारित होता है और इनका पालन हमारे अपने उत्थान के लिए सहायक एवं सामाजिक उत्थान में हमें उपयोगी बनाता है।

   ये आज्ञाऐं हमें परमेश्वर के प्रति सही दृष्टिकोण रखने तथा उसे अपने जीवनों में उचित स्थान एवं वास्तविक आदर देना सिखाती हैं। इनसे हमें कार्य तथा विश्राम का सही सामंजस्य बनाए रखने की शिक्षा मिलती है और ये हमें अपने परिवार तथा अपने समाज के प्रति सही व्यवहार रखना सिखाती हैं। ये आज्ञाऐं मनुष्य की मनोवृति को जानते और पहचानते हुए, मनुष्य को हर एक बुराई से बच कर चलने का मार्ग दिखाती हैं। इन आज्ञाओं को मानने से इन्कार करना प्रत्येक का अपना निर्णय है, लेकिन इनका पालन हर रीति से जीवन को आशीशित और समृद्ध बनाता है। ये आज्ञाऐं पृथ्वी पर जीवन को अर्थपूर्ण और सुचारु बनाती हैं और हमें एक शांतिप्रीय और स्वस्थ समाज बनने के लिए प्रेरित करती हैं जो परमेश्वर की आधीनता में परमेश्वर की महिमा के लिए कार्य करता है।


भला होता कि तेरी विधियों के मानने के लिये मेरी चालचलन दृढ़ हो जाए! तब मैं तेरी सब आज्ञाओं की ओर चित्त लगाए रहूंगा, और मेरी आशा न टूटेगी। - भजन 119:5-6

और परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं। - 1 यूहन्ना 5:3

बाइबल पाठ: - निर्गमन 20:1-17
Exodus 20:1 तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहे,
(1) Exodus 20:2 कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है।
Exodus 20:3 तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना।
(2) Exodus 20:4 तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी कि प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है।
Exodus 20:5 तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं,
Exodus 20:6 और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करूणा किया करता हूं।
(3) Exodus 20:7 तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।
(4) Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना।
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना;
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो।
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।
(5) Exodus 20:12 तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए।
(6) Exodus 20:13 तू खून न करना।
(7) Exodus 20:14 तू व्यभिचार न करना।
(8) Exodus 20:15 तू चोरी न करना।
(9) Exodus 20:16 तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।
(10) Exodus 20:17 तू किसी के घर का लालच न करना; न तो किसी की स्त्री का लालच करना, और न किसी के दास-दासी, वा बैल गदहे का, न किसी की किसी वस्तु का लालच करना।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 9-10 
  • प्रेरितों 1