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शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

नेक सलाहकार


   हम में से कई लोग बहुत व्यस्त जीवन व्यतीत करते हैं, इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्गमन 18 अध्याय में दिए मूसा की व्यस्तता के वर्णन को समझ सकते हैं, उसके साथ सहानुभूति रख सकते हैं। उन लाखों इस्त्राएलियों के मध्य, जिन्हें वह मिस्त्र के दासत्व से निकालकर कनान देश को लिए जा रहा था, मूसा ही एक मात्र न्यायी था। इस लिए प्रातः से सन्धया तक मूसा ज़रूरतमन्द लोगों की भीड़ से घिरा रहता था (निर्गमन 18:3)।

   मेरे पास आकर कई लोगों ने, विशेषकर जवान माता-पिता ने कहा है कि वे मूसा की परिस्थिति समझते हैं और उससे सहानुभूति रखते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी व्यस्त परिस्थितियों में जीवन निर्वाह के लिए हमें मूसा के समान दो गुणों को विकसित कर लेना चाहिए; पहला तो सुनने में प्रवीण होना (पद 24) तथा दूसरा अन्य लोगों की सहायता स्वीकार करना (पद 25)। कई बार तो हमारा अहम हमें दूसरों से सहायता लेना स्वीकार करने से रोकता है, लेकिन यह सदा ही होने वाली बात नहीं है।

   जैसा मूसा के साथ हुआ, वैसे ही हमारे साथ भी होता है कि जीवन इतनी तेज़ी से चल रहा होता है और हमारे समय पर इतनी माँगें बनी रहती हैं (पद 13-15) कि हमारे पास उन माँगों को ही उचित प्रतिक्रीया देने का ही समय नहीं होता, किसी के पास परामर्श या सहायता की माँग लेकर जाना तो बहुत दूर की बात है। संभवतः इसीलिए परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सलाह देती है कि हमारे साथ और हमारे संपर्क में अच्छे सलाहकार रहने चाहिएं जो अपने अनुभव और भली समझ-बूझ के आधार पर हमें आवश्यकतानुसार स्वयं ही सही सलाह दे सकें, चाहे हमारे पास सलाह माँगने का अवसर हो या ना हो। हम यही बात मूसा के जीवन की इस घटना में भी देखते हैं जहाँ उसके ससुर येत्रो ने मूसा की हालत देखकर उसे समझाया कि वह अपनी कुछ ज़िम्मेदारियाँ अन्य योग्य लोगों में बाँट दे जो साधारण और हलके मामले सुलझा सकें और मूसा को केवल कठिन मामलों के लिए ही समय देना पड़े (पद 17-23)।

   कार्य करने की ज़िम्मेदारी परमेश्वर ने सब को दी है, लेकिन वह हमें कुछ ही कार्यों द्वारा अभिभूत होकर अन्य ज़िम्मेदारियों से मूँह मोड़ते हुए नहीं देखना चाहता। इसलिए परमेश्वर का भय मानने वाले भले सलाहकारों के साथ संगति रखें, आवश्यकतानुसार उनसे परामर्श लें और फिर उस परामर्श का पालन भी करें। - रैण्डी किलगोर


जो सलाह नहीं लेता वह सहायता से भी वंचित रहता है।

जहां बुद्धि की युक्ति नहीं, वहां प्रजा विपत्ति में पड़ती है; परन्तु सम्मति देने वालों की बहुतायत के कारण बचाव होता है। - नीतिवचन 11:14

बाइबल पाठ: निर्गमन 18:13-24
Exodus 18:13 दूसरे दिन मूसा लोगों का न्याय करने को बैठा, और भोर से सांझ तक लोग मूसा के आसपास खड़े रहे। 
Exodus 18:14 यह देखकर कि मूसा लोगों के लिये क्या क्या करता है, उसके ससुर ने कहा, यह क्या काम है जो तू लोगों के लिये करता है? क्या कारण है कि तू अकेला बैठा रहता है, और लोग भोर से सांझ तक तेरे आसपास खड़े रहते हैं? 
Exodus 18:15 मूसा ने अपने ससुर से कहा, इसका कारण यह है कि लोग मेरे पास परमेश्वर से पूछने आते है। 
Exodus 18:16 जब जब उनका कोई मुकद्दमा होता है तब तब वे मेरे पास आते हैं और मैं उनके बीच न्याय करता, और परमेश्वर की विधि और व्यवस्था उन्हें जताता हूं। 
Exodus 18:17 मूसा के ससुर ने उस से कहा, जो काम तू करता है वह अच्छा नहीं। 
Exodus 18:18 और इस से तू क्या, वरन ये लोग भी जो तेरे संग हैं निश्चय हार जाएंगे, क्योंकि यह काम तेरे लिये बहुत भारी है; तू इसे अकेला नहीं कर सकता। 
Exodus 18:19 इसलिये अब मेरी सुन ले, मैं तुझ को सम्मति देता हूं, और परमेश्वर तेरे संग रहे। तू तो इन लोगों के लिये परमेश्वर के सम्मुख जाया कर, और इनके मुकद्दमों को परमेश्वर के पास तू पहुंचा दिया कर। 
Exodus 18:20 इन्हें विधि और व्यवस्था प्रगट कर कर के, जिस मार्ग पर इन्हें चलना, और जो जो काम इन्हें करना हो, वह इन को जता दिया कर। 
Exodus 18:21 फिर तू इन सब लोगों में से ऐसे पुरूषों को छांट ले, जो गुणी, और परमेश्वर का भय मानने वाले, सच्चे, और अन्याय के लाभ से घृणा करने वाले हों; और उन को हज़ार-हज़ार, सौ-सौ, पचास-पचास, और दस-दस मनुष्यों पर प्रधान नियुक्त कर दे। 
Exodus 18:22 और वे सब समय इन लोगों का न्याय किया करें; और सब बड़े बड़े मुकद्दमों को तो तेरे पास ले आया करें, और छोटे छोटे मुकद्दमों का न्याय आप ही किया करें; तब तेरा बोझ हलका होगा, क्योंकि इस बोझ को वे भी तेरे साथ उठाएंगे। 
Exodus 18:23 यदि तू यह उपाय करे, और परमेश्वर तुझ को ऐसी आज्ञा दे, तो तू ठहर सकेगा, और ये सब लोग अपने स्थान को कुशल से पहुंच सकेंगें। 
Exodus 18:24 अपने ससुर की यह बात मान कर मूसा ने उसके सब वचनों के अनुसार किया।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 5-7


गुरुवार, 16 जनवरी 2014

पुस्तक


   अमेरीकी नागरिक जौन म्युइर (1838-1914) के पिता एक मसीही विश्वासी थे जो परमेश्वर के वचन बाइबल को कण्ठस्त करने पर बहुत ज़ोर देते थे। कहा जाता है कि किशोरावस्था तक जौन ने बाइबल का सम्पूर्ण नया नियम खण्ड और पुराने नियम खण्ड के अधिकांश भाग कण्ठस्त कर लिए थे और अपनी स्मरण शक्ति द्वारा ही उन्हें दोहरा सकता था।

   अपनी युवावस्था से ही जौन ने परमेश्वर की सृष्टि से विशेष प्रेम हो गया था और उसके दृष्टिकोण से प्रकृति परमेश्वर के बारे में जानने समझने का एक माध्यम थी। वह सृष्टि को "प्रकृति की पुस्तक" कहता था। जंगल और बियाबान में खोज करना उसे बहुत पसन्द था और अपनी इस खोज में वह पेड़-पौधों और जानवरों का एक ऐसे वातवरण में अध्ययन करने पाया जो सभ्यता और रिहायशी स्थानों के बढ़ते हुए दायरे से बाहर सीधे परमेश्वर के हाथों से उपलब्ध हुआ था। आगे चलकर जौन ने वन संरक्षण आन्दोलन का नेतृत्व किया और उसके प्रयासों का ही नतीजा था कि अमेरिका में कई राष्ट्रीय उद्यान बने जहां वनस्पति और जानवर संरक्षित रहते हैं और सुरक्षित विचरण कर सकते हैं, फल-फूल सकते हैं।

   परमेश्वर का ज्ञान हमें बाइबल से प्राप्त होता है इसलिए परमेश्वर में रुचि रखने वालों के लिए बाइबल का अध्ययन अनिवार्य है। बाइबल से ही हम सीखते हैं कि परमेश्वर ने अपने अन्देखे गुण अपनी सृष्टि में प्रगट किए हैं, इसलिए परमेश्वर की सृष्टि का अध्ययन और उसकी देखभाल भी परमेश्वर से प्रेम रखने वालों के लिए आवश्यक है। सृष्टि परमेश्वर की एक और पुस्तक है जहाँ शब्द और अक्षर नहीं वरन परमेश्वर की कारीगरी उसके गुणों का बयान करती है।

   परमेश्वर की दोनों पुस्तकों, बाइबल और सृष्टि, को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लीजिए, उनका अध्ययन और पालन करते रहिए; आपका जीवन आशीषित हो जाएगा। - डेनिस फिशर


सृष्टि रूपी परमेश्वर की पुस्तक से हम अनेक बहुमूल्य पाठ सीख सकते हैं।

क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:20

बाइबल पाठ: रोमियों 1:18-24
Romans 1:18 परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं। 
Romans 1:19 इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। 
Romans 1:20 क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। 
Romans 1:21 इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। 
Romans 1:22 वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। 
Romans 1:23 और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला।
Romans 1:24 इस कारण परमेश्वर ने उन्हें उन के मन के अभिलाषाओं के अुनसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-4


बुधवार, 15 जनवरी 2014

उपहार


   एक अविवाहिता युवती गर्भवती थी। वह एक ऐसे समाज में रहती थी जो अजन्में बच्चे के जीवन को कोई विशेष महत्व नहीं देता है, और गर्भपात वहाँ एक सामान्य बात है। लेकिन फिर भी उसने उस बच्चे को जन्म देने का निर्णय लिया। उसने एक बच्ची को जन्म दिया और उसे एक मसीही विश्वासी परिवार में गोद लेने के द्वारा सौंप दिया। वह बच्ची उस मसीही परिवार का एक अभिन्न अंग बन गई, वह उनके लिए अनमोल थी, वे उससे बहुत प्रेम करते थे और प्रेम का साथ ही उसका पालन-पोषण करने लगे, उसे मसीह के प्रेम के बारे बताया और उस बच्ची ने भी प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लिया। लेकिन इससे पहले कि वह बच्ची वयस्क होती एक दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई।

   उसकी मृत्यु से उस परिवार में एक खालीपन आ गया, लेकिन साथ ही वह उस परिवार में उन आनन्द के पलों की यादें भी छोड़ गई, जो उसने उनके साथ बिताए थे। उसके बचपन के आनन्द और किशोरावस्था के उल्लास की यादें ही अब उस परिवार के साथ शेष हैं। अवश्य ही उसकी मृत्यु ने उस परिवार के सद्स्यों के हृदय में एक रिक्त स्थान छोड़ दिया है, लेकिन ज़रा विचार कीजिए कि वह परिवार किस सब से वंचित रह जाता यदि उन्होंने कभी उस बच्ची को अपने हाथों में ना लिया होता, उसे गोद में ना खिलाया होता, उसके साथ मुस्कुराए ना होते, उसे सिखाया ना होता, उसका पालन-पोषण ना किया होता और उसे प्रभु यीशु के बारे में ना बताया होता। उस बेटी की मृत्यु के दुख के साथ उसके जीवन की खुशी की यादें भी उनके जीवनों का भाग हैं।

   प्रत्येक जीवन, प्रत्येक बच्चा, परमेश्वर की अद्भुत कारीगरी का एक नमूना है (भजन 139)। प्रत्येक मनुष्य हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा का वंशज है और उनके समान ही परमेश्वर के स्वरूप और समानता में रचा गया है (उत्पत्ति 1:27)। मृत्यु हमें जीवन की कुछ एच्छित बातों से वंचित तो कर देती है, परन्तु साथ ही हमें स्मरण दिलाती है उस कीमत की जो परमेश्वर द्वारा रचित प्रत्येक जीवन की है (कुलुस्सियों 1:16)।

   परमेश्वर से मिले जीवन रूपी उपहार की कीमत को समझें, उसे सावधानी पूर्वक संजोएं और उपयोग करें, उसे व्यर्थ ना करें वरन परमेश्वर के हाथों में ही सौंप कर परमेश्वर की विलक्षण कारिगरी का आनन्द लें। - डेव ब्रैनन


प्रत्येक जीवन परमेश्वर द्वारा रचा गया है और उसकी छाप लिए हुए है।

क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। - 
कुलुस्सियों 1:16

बाइबल पाठ: भजन 139:1-24
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।
Psalms 139:19 हे ईश्वर निश्चय तू दुष्ट को घात करेगा! हे हत्यारों, मुझ से दूर हो जाओ। 
Psalms 139:20 क्योंकि वे तेरी चर्चा चतुराई से करते हैं; तेरे द्रोही तेरा नाम झूठी बात पर लेते हैं। 
Psalms 139:21 हे यहोवा, क्या मैं तेरे बैरियों से बैर न रखूं, और तेरे विरोधियों से रूठ न जाऊं? 
Psalms 139:22 हां, मैं उन से पूर्ण बैर रखता हूं; मैं उन को अपना शत्रु समझता हूं। 
Psalms 139:23 हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले! 
Psalms 139:24 और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर! 

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 47-50


मंगलवार, 14 जनवरी 2014

चुनाव


   यदि आप को पता चले कि आपके बटुए से पैसे रहस्यमय रीति से गायब हो रहे हैं तो आप क्रोधित होंगे। लेकिन यदि तहकीकात से पता चले कि आपके बटुए से चोरी करने वाला और कोई नहीं वरन आपका पुत्र ही है तो आपका क्रोध शोक में बदल जाएगा। शोक शब्द की एक व्याख्या है वह भावना जो हम तब अनुभव करते हैं जब किसी निकट के प्रीय जन से हमें अनेपक्षित रीति से निराश और दुखी होते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी शोक शब्द का प्रयोग इस रूप में किया गया है। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है" (इफिसियों 4:30)। प्रेरित पौलुस यह समझाना चाह रहा है कि जिसे परमेश्वर ने हमारी सहायता के लिए दिया है और जो हमसे प्रेम करता है, हम उसे शोकित ना करें। प्रभु यीशु ने अपने चेलों से वायदा किया था: "परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा" (यूहन्ना 14:26); अर्थात परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर की ओर से उसे मसीही विश्वास में आते ही उसके उस विश्वास के जीवन के सुचारू निर्वाह में सहायता करने के लिए परमेश्वर द्वारा दिया जाता है। पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी को सिखाता है, प्रभु यीशु की शिक्षाएं और आज्ञाएं स्मरण कराता है, और सही दिशा में चलते रहने के लिए मार्गदर्शन करता है।

   जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे कार्यों या व्यवहार से शोकित होता है तो इसके परिणाम हमारे लिए बहुत तनाव ला सकते हैं, क्योंकि परमेश्वर का आत्मा हमें एक दिशा में जाने के लिए कहता और खींचता है और हमारे शरीर की अभिलाषाएं हमें उससे विपरीत दिशा में खींचती हैं। प्रेरित पौलुस ने इस खींच-तान के लिए लिखा: "क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ" (गलतियों 5:17)। यदि हम अपने जीवन में शरीर की अभिलाषाओं की पूर्ति के चुनाव करते रहेंगे, तो यह द्वन्द हमारे अन्दर बना रहेगा और शीघ्र ही हम जीवन से असंतुष्ट और दोषी अनुभव करने लगेंगे, हमारे जीवन का आननद और स्फूर्ती जाती रहेगी और एक आलस और उदासी हमें घेर लेगी (भजन 32:3-4)।

   इसलिए, इस बात का ध्यान रखना कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा हम मसीही विश्वासियों के जीवन से शोकित ना हो, हमारे मसीही विश्वास के जीवन के सुचारू निर्वाह के लिए बहुत आवश्यक है। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी शरीर की अभिलाषाओं से वशिभूत होकर उन अभिलाषाओं की पूर्ति के लिए गलत चुनाव ना करें (इफिसियों 4:31), वरन हम से प्रेम करने और हमारी भलाई के लिए सब कुछ करने वाले परमेश्वर के साथ वफादारी और उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करने के पक्ष में ही अपने चुनाव करें। - एलबर्ट ली


प्रत्येक मसीही विश्वासी का हृदय परमेश्वर के पवित्र आत्मा का मन्दिर है।

और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। - यूहन्ना 14:16

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:25-32
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो। 
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-46


सोमवार, 13 जनवरी 2014

खुले द्वार


   प्रभु यीशु ने अपने चेलों पर यह स्पष्ट कर दिया कि वह ही मार्ग, सत्य और जीवन है (यूहन्ना 14:6); केवल वह ही परमेश्वर पिता तक पहुँचने का एकमात्र माध्यम है। इस बात के लिए प्रभु यीशु पर किया गया हमारा विश्वास और उसके प्रति समर्पण हमारे मनों में उसके प्रति प्रेम और आज्ञाकारिता लाता है और हमें परमेश्वर के साथ हमारे अनन्तकाल के स्वर्गीय निवास स्थान का अडिग और अटल आश्वसन देता है।

   बेलारूस देश के मिंस्क नगर की एक बाइबल कॉलेज की छात्रा क्रिस्टीना ने अपने मसीही जीवन की यह गवाही लिखी: "प्रभु यीशु ने संसार के प्रत्येक जन के लिए मृत्यु सही, सबसे घोर और आशाहीन पापी के लिए भी। संसार का कोई अपराधी ऐसा नहीं, चाहे वह कितना भी निकृष्ट क्यों ना हो, जो यदि विश्वास से प्रभु यीशु के पास आए तो उसे क्षमा और नए जीवन का उपहार सेंत-मेंत ना मिले। एक बहुत लंबे समय तक प्रभु यीशु मेरे दिल के द्वार पर खटखटा रहा था। एक रीति से देखा जाए तो मेरे हृदय का द्वार उसके लिए खुला हुआ था, मैं मसीही थी, लेकिन मेरा उसके प्रति समर्पण अधूरा था। मैंने अपना जीवन पूर्णत्या उसको नहीं सौंपा था। मेरे हृद्य का द्वार खुला अवश्य था किन्तु एक सीमित तौर से, मैंने उस द्वार की भीतरी सुरक्षा कड़ी नहीं खोली थी इसलिए किसी का भी उस द्वार से अन्दर प्रवेश करना संभव नहीं था।"

   क्रिस्टीना जानती थी कि उसका यह रवैया ठीक नहीं था, और परमेश्वर उसे बदलने तथा पूर्ण समर्पण के लिए कह रहा था। अन्ततः क्रिस्टीना ने परमेश्वर की बात को मान लिया, अपने हृद्य के द्वार की सुरक्षा कड़ी खोल दी, प्रभु यीशु को भीतर आकर अपने हृद्य के सिंहासन पर विराजमान हो लेने दिया, उसके प्रति पूर्ण समर्पण कर दिया और उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करने का निर्णय ले लिया। यही सच्चे और समर्पित मसीही विश्वासी की पहचान है - प्रभु यीशु के प्रति समर्पण में कोई अधूरापन नहीं; खुले द्वार को सीमित रखने के लिए कोई सुरक्षा कड़ी नहीं, बच निकलने का कोई छिपा द्वार नहीं, जीवन का कोई भाग ऐसा नहीं जो प्रभु को ना सौंप दिया हो, कोई छिपा पाप नहीं और प्रभु यीशु की आज्ञाकारिता में कोई आनाकानी नहीं।

   क्रिस्टीना के समान ही यदि परमेश्वर आपको भी बुला रहा है, और आप उसकी इस बुलाहट को नज़रंदाज़ कर रहे हैं, तो यह समय है परमेश्वर की बात को मान लेने का, क्रिस्टीना के समान ही अपने जीवन की समपूर्ण कमान उसे सौंप देने का। अपने जीवन के द्वार को प्रभु यीशु के लिए पूरी तौर से खोल दीजिए और उसके आज्ञाकारी हो कर जीवन व्यतीत करने की आशीषों के आनन्द को अनुभव करना आरंभ कर दीजिए। आपको अपने इस निर्णय के लिए कभी पछतावा नहीं होगा। - डेव एगनर


परमेश्वर को समर्पित जीवन से अधिक सुरक्षित और कोई जीवन हो नहीं सकता।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-24
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। 
John 14:22 उस यहूदा ने जो इस्करियोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं। 
John 14:23 यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे। 
John 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिसने मुझे भेजा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 40-42


रविवार, 12 जनवरी 2014

मार्गदर्शक


   मेरी सहेली एन्ना के साथ एक बात अकसर होती रहती है, लोग उसके पास आकर अपने गन्तव्य स्थान को जाने के लिए उससे मार्ग की जानकारी लेते रहते हैं। उसके साथ ऐसा केवल उसके इलाके में ही नहीं होता, जब वह किसी विदेश यात्रा पर होती है तब भी उस विदेश में लोग उसके पास इसी उद्देश्य से आते रहते हैं। एन्ना सोचती है कि ऐसा इस कारण होता है क्योंकि वह लोगों को विश्वासयोग्य और इमानदार लगती है। मेरा विचार है कि शायद यह इसलिए होता है क्योंकि उसके हाव-भाव से यह प्रगट होता है कि वह भली भाँति जानती है कि वह कहाँ है और कहाँ जा रही है। हमारी एक अन्य सहेली का मानना है कि शायद इसका कारण यह है कि एन्ना में खोए हुओं को आकर्षित करने का गुण है।

   आत्मिक रीति से देखा जाए तो यह तीनों ही गुण हम मसीही विश्वासियों में पाए जाने चाहिएं। मसीही विश्वासी होने के नाते हमारे जीवनों का निश्चित उद्देश्य और दिशा है, हम भली भाँति जानते हैं कि हमारा गन्तव्य स्थान क्या है, हम कहीं अनिश्चितता में भटक नहीं रहे हैं वरन हम जानते हैं कि हम वहाँ कैसे पहुँचेंगे। ये सभी बातें हमें परमेश्वर की बुलाहट के अनुसार कार्य करने का भरोसा देती हैं, और जब लोग हमारे जीवनों में यह विश्वास देखते हैं तो जो भटका हुआ अनुभव करते हैं वे भी मार्गदर्शन के लिए हमारी ओर आकर्षित होते हैं।

   परमेश्वर ने कभी मनुष्य को अकेला नहीं छोड़ा है, परमेश्वर ने सदा ही अपनी उपस्थिति इस पृथ्वी पर बनाई रखी है जिससे जो मनुष्य उसे खोजना चाहते हैं वे उस तक पहुँच सकें। इस संसार को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए परमेश्वर की पहली ज्योति इस्त्राएल राष्ट्र था (यशायाह 42:6) और इस्त्राएल के महान राजा सुलेमान ने प्रार्थना करी कि परमेश्वर का महान नाम लोगों को परमेश्वर की ओर आकर्षित करे (1 राजा 8:41-43)। इस्त्राएल राष्ट्र की ज्योति की पराकाष्ठता प्रभु यीशु थे जो जगत की ज्योति बनकर आए थे (यूहन्ना 9:5)। और अब प्रभु यीशु ने यह कार्य अपने अनुयायियों, अर्थात हम मसीही विश्वासियों को सौंप रखा है कि वे जगत की ज्योति हों (मत्ती 5:14) जिससे संसार के लोग परमेश्वर तक पहुँचने का मार्गदर्शन पा सकें।
   इस लिए यह हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है कि संसार के लोगों के लिए सच्चे परमेश्वर से मेल-मिलाप कर लेने के मार्गदर्शक बनें (2 कुरिन्थियों 5:18)। विचार कीजिए, क्या परमेश्वर का यह उद्देश्य आपके जीवन से पूरा हो रहा है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


दूसरों को पाप के अन्धकार से बाहर निकालने के लिए उन पर अपने जीवन की ज्योति को प्रगट करें।

मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। - यूहन्ना 12:46

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:12-21
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं। 
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है। 
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 37-39


शनिवार, 11 जनवरी 2014

सेवार्थ


   मेरा एक मित्र नौकरी पाने के लिए एक साक्षात्कार में गया। वहाँ उससे पूछे गए प्रश्नों में से एक था, "आपके पास हमारे लायक कौन सी योग्यताएं हैं?" प्रश्न पूछने का उद्देश्य था यह आंकलन करना कि मेरा वह मित्र उस कंपनी में किस स्तर और किस प्रकार के कार्य के लिए उपयुक्त हो सकता था। मेरे मित्र ने तुरंत मन ही मन अपनी योग्यताओं और गुणों को दोहराया, और कंपनी द्वारा विज्ञापित नौकरी की आवश्यकतानुसार उपयुक्त बातें उन्हें बता दीं। संसार के कार्यों के लिए तो हमें योग्यताएं और गुण सीखने, बनाने, बढ़ाने और बताने पड़ते हैं परन्तु परमेश्वर के लिए कार्य करने के लिए केवल एक ही गुण चाहिए - परमेश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण। हमारे परमेश्वर को समर्पण का स्तर ही परमेश्वर के प्रति हमारे विश्वास के स्तर को निर्धारित करता है, और हमारे विश्वास का स्तर हमारे परमेश्वर के लिए उपयोगी होने की क्षमता को निर्धारित करता है।

   परमेश्वर ने अपनी प्रत्येक सन्तान को कुछ आत्मिक वरदान प्रदान किए हैं। यह वरदान हमारे अनुभवों, हमारे प्रशिक्षण और हमारी स्वाभाविक योग्यताओं के साथ मिलकर हमें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाते हैं; एक ऐसा जन जो परमेश्वर द्वारा हमारे लिए पहले से निर्धारित भले कार्यों को करने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। यदि परमेश्वर आपसे कुछ कार्य लेना चाहता है, तो वह पहले आपको उस कार्य के लिए तैयार भी करेगा और आवश्यक गुण तथा योग्यताएं भी देगा। उसका चुनाव संसार के समान नहीं है जहाँ हम अपनी योग्यताओं के आधार पर संसार के अधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। परमेश्वर हमें हम से अधिक भली रीति से जानता है। वह जानता है कि हम क्या कुछ कर सकते हैं और वह हमें उसके द्वारा निर्धारित सेवकाई के लिए तैयार करके ही वह ज़िम्मेदारी सौंपता है। उसे केवल एक ही बात हमसे चाहिए, कि हम उसके प्रति विश्वासयोग्य बने रहें: "फिर यहां भण्‍डारी में यह बात देखी जाती है, कि विश्वासयोग्य निकले" (1 कुरिन्थियों 4:2)। इसलिए यदि परमेश्वर आपको किसी कार्य के लिए बुला रहा है तो विश्वास रखिए कि उसने आप को उस कार्य के लिए आवश्यक योग्यताओं से परिपूर्ण किया है और आप की सफलता के लिए मार्ग तथा सहायता वह ही प्रदान करेगा।

   क्या परमेश्वर ने आपको अपनी सेवार्थ बुलाया है? कार्य, कठिनाईयों या परिस्थितियों से ना घबराएं; कार्य को पूरा करने के लिए आपका सहायक, आपको सामर्थ देने वाला, आपका मार्गदर्शन करने वाला स्वयं परमेश्वर ही है। बस विश्वास में आगे बढ़ते जाएं। - सिंडी हैस कैसपर


आत्मिक वरदान परमेश्वर की सेवकाई में उपयोग के लिए हैं, अपनी प्रशंसा पाने के लिए नहीं।

यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं। - तीतुस 3:8

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-36