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बुधवार, 26 मार्च 2014

सामर्थ के मार्ग


   जब तराह हाई स्कूल की छात्रा थी तो उसे भय लगने लगा कि किसी दिन वह एक गंभीर बिमारी से ग्रस्त हो जाएगी, इस लिए उसने परमेश्वर से उसे इस संभावित बिमारी से बचाकर रखने के लिए प्रार्थना करना आरंभ कर दिया। फिर उसकी विचारधारा में एक परिवर्तन आया और उसने इस कालपनिक भय को छोड़ कर अपने भविष्य और जीवन की हर संभावना को, वह चाहे जो भी हो, परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। कई वर्षों के उपरान्त तराह के चिकित्सकों को उसके शरीर में एक कैंसर की रसौली का पता चला जिसका इलाज कर के तराह को सफलता से रोग मुक्त किया जा सका। तराह का कहना था, क्योंकि वह अपने आप को और अपने भविष्य को परमेश्वर के हाथों में सौंप चुकी थी, इसलिए जब वास्तव में बिमारी आई तो वह परिणाम से निश्चिंत थी। उसकी समस्या उसके लिए परमेश्वर की सामर्थ पाने का मार्ग बन गई थी।

   परमेश्वर के प्रति इस प्रकार समर्पित होकर सब कुछ उसके हाथों में सौंप देना हमें प्रेरित पौलुस के जीवन से भी देखने को मिलता है। पौलुस अपने विषय में लिखता है कि "और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं" (2 कुरिन्थियों 12:7)। पौलुस ने इस के लिए परमेश्वर से बहुत प्रार्थना करी, कि परमेश्वर इस समस्या को उससे दूर कर दे, परन्तु परमेश्वर का उत्तर था "...मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है..."; यह उत्तर पा कर पौलुस की चिंता जाती रही, उसका रवैया सकारात्मक हो गया और वह कहने लगा "...इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे" (2 कुरिन्थियों 12:9)।

   अपनी दुर्बलताओं, कठिनाईयों और चिंतित करने वाले भय का सामना करने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने आप को परमेश्वर को पूरी रीति से समर्पित कर दें, अपनी सारी चिंता उस पर डाल दें (1 पतरस 5:7) और उसे अपने कार्य को स्वतंत्रता के साथ करने दें। यदि ऐसा करेंगे तो हम देखेंगे कि जो हमारे लिए चिंता के विषय हो सकते थे, वे ही परमेश्वर के हाथों में उसकी सामर्थ के हमारे जीवन में आने और कार्यकारी होने के मार्ग बन गए हैं। - डेनिस फिशर


अपनी ही सामर्थ पर भरोसा परमेश्वर की सामर्थ के प्रति समर्पित हो जाने का विकल्प कदापि नहीं है। 

और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:7 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10
2 Corinthians 12:1 यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूंगा। 
2 Corinthians 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया। 
2 Corinthians 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है। 
2 Corinthians 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं। 
2 Corinthians 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्‍ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूंगा। 
2 Corinthians 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 13-15


मंगलवार, 25 मार्च 2014

साथ साथ


   घर रहकर व्यवसाय चलाने वाले लाखों लोग हैं। क्योंकि इन लोगों को कहीं बाहर जाकर काम नहीं करना होता, इसलिए इनमें से अनेक को उनका एकाकीपन परेशान करता है। ऐसे लोग, जो यह समझते हैं कि अकेले रह कर कार्य करने की अपेक्षा वे अन्य लोगों की संगति में रह कर बेहतर कार्य कर सकते हैं, उनकी सहायता के लिए, उन्हें एक समुदाय देने के लिए, "सह-कार्य स्थल" बनाए गए हैं। ये स्थल बड़े स्थान होते हैं जहाँ अलग अलग लोगों को उस बड़े स्थान के छोटे छोटे भाग किराए पर दिए जाते हैं और वे वहाँ से अपना व्यवसाय चला सकते हैं। उनके पास कार्य के लिए अपना व्यक्तिगत स्थान भी होता है, कई लोगों का साथ भी तथा आवशयकता पड़ने पर दूसरों के साथ बात-चीत या चर्चा करने की सुविधा भी।

   कभी कभी कुछ मसीही विश्वासियों को लगता है कि वे अकेले रहकर भलि-भांति कार्य कर सकते हैं। लेकिन प्रभु यीशु ने हमें एक साथ रहकर और एक दूसरे के साथ मिल कर कार्य करने के लिए रखा है। प्रभु ने अपनी विश्वासी मण्डली को अपनी देह के समान बताया है वह स्वयं जिसका सिर है और जिसमें हम सभी मसीही विश्वासी देह के भिन्न अंगों के समान हैं (रोमियों 12:5) - सबका अपना अपना स्थान और योगदान है और सब एक दूसरे के पूरक हैं, तथा एक साथ मिलकर ही सुचारू रूप से कार्य कर सकते हैं, अकेले अकेले रहकर नहीं (1 कुरन्थियों 12:27)। हमारा प्रभु चाहता है कि हम सभी सहभागिता में रहें और उसके द्वारा दिए गए आत्मिक वरदानों को हम एक दूसरे की उन्नति के लिए उपयोग करें।

   संभव है कि भिन्न कारणों से कुछ लोग दूसरों के साथ सहभागी हो पाने में असमर्थ हों, जैसे बिमारी के कारण संगति में आना संभव ना हो, अथवा कोई यह नहीं समझ पा रहा हो कि मण्डली में उसका सही स्थान और कार्य क्या है इसलिए दूरियाँ आ गई हों, लेकिन फिर भी वे भी प्रभु यीशु मसीह की उसी एक देह के अभिन्न अंग हैं, और देह की संपूर्णता उनके बिना संभव नहीं है। इसलिए यदि कोई अलग पड़ रहा है या हो गया है तो अन्य लोगों का कर्तव्य है कि अपने उस साथी की सुधि लें, उसे आवश्यक सहायता दें और उसे देह में यथास्थान आदर के साथ बना कर रखें।

   साथ साथ मिलकर रहने और चलने से ही हम मसीही विश्वासी एक दूसरे की उपयोगिता, सहायता और आवश्यकता को समझ सकते हैं, अपने प्रभु के लिए प्रभावी और कार्यकारी हो सकते हैं और प्रभु के निर्देश का निर्वाह कर सकते हैं। हम अकेले नहीं साथ साथ रहकर प्रभु के लिए कार्य करने को बनाए गए हैं। - ऐने सेटास


सहभागिता ना केवल हमें साथ रखती है वरन बढ़ाती भी है।

वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - रोमियों 12:5

बाइबल पाठ: 1 कुरन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख की होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 9-12


सोमवार, 24 मार्च 2014

सदा साथ


   बहुत साल पहले की बात है, जब मैं कॉलेज में छात्र था; मेरी मित्रता एक ऐसे व्यक्ति के साथ हुई जिसने बहुत भारी नुकसान सहा था - उसके बेटे की मृत्यु हो गई और उसकी पत्नि इस दुख को ना झेल पाने के कारण उसे छोड़कर चली गई।

   एक दिन मैं अपने इस मित्र के साथ सड़क पर जा रहा था, तो मैंने देखा के हमारे आगे आगे अस्तव्यस्त हाल में एक महिला अपने छोटे और मैले लड़के को लिए चल रही थी। वह महिला उस लड़के से बहुत नाराज़ लग रही थी और उसका हाथ पकड़े हुए बड़ी तेज़ी से चल रही थी जिससे उस बच्चे को उसके साथ कदम मिला कर चलना कठिन हो रहा था। हम एक व्यस्त चौराहे पर पहुँचे जहाँ भीड़ और गाड़ियाँ देखकर वह बच्चा ठिठक कर खड़ा हो गया तथा उस महिला के हाथ से उसका हाथ छूट गया। उस महिला ने खिसिया कर उसकी ओर पीछे मुड़कर देखा, उसे गाली दी और आगे बढ़ गई। वह बच्चा घबरा कर वहीं सड़क के किनारे बैठ गया और ज़ोर से रो पड़ा। यह सब देखकर मेरा मित्र बिना एक क्षण भी हिचकिचाए, तुरंत उस बच्चे के पास बैठ गया, उसे अपनी बाहों में भरा और अपने से चिपका के उसे सान्तवना देने लगा। वह महिला फिर रुकी, फिर उसने उस बच्चे की ओर क्रोध से देखा और फिर उसे गालियाँ देने लगी। मेरे मित्र ने एक ठंडी सांस भरी और उस महिला को संबोधित करते हुए कहा, "यदि आपको इसकी आवश्यकता नहीं है तो इसे मुझे दे दीजिए, मैं इसकी देखभाल कर लूंगा।"

   यही बात हमारा परमेश्वर पिता अपने बड़े प्रेम और अनुग्रह में होकर हम पाप की गन्दगी में पड़े, संसार में तुच्छ समझे जाने वाले, और अन्य सभी लोगों के साथ करता है। परमेश्वर ने भी अपने पुत्र प्रभु यीशु की मृत्यु का दुख सहा है, वह भी सभी मनुष्यों से बहुत प्रेम करता है, संसार में किसी को नाश होते हुए नहीं देखना चाहता, इसलिए वह हमारे पापों और दुखों को लेकर हमें अपनी शान्ति और अपना पवित्रता का जीवन देना चाहता है, हमें अपने पास प्रेम से रखना चाहता है। चाहे हमारे परिवार जन या मित्र हमारा तिरिस्कार कर दें, परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता, सदा हमारे साथ बना रहता है, हमें अपनी देखभाल में बनाए रखता है; बस आवश्यकता है पापों से पश्चाताप कर के विश्वास के साथ उसका हाथ थाम लेने की। जिसने भी पश्चाताप और विश्वास के साथ अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया परमेश्वर सदा उसके साथ रहता है, उसे सदा संभालता रहता है। - डेविड रोपर


यदि परमेश्वर गौरैयों की चिन्ता करता है तो हमारी भी अवश्य करता है।

क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता। वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। - लूका 12:6-7

बाइबल पाठ: भजन 27
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।। 
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 5-8


रविवार, 23 मार्च 2014

घोषणा और महिमा


   वह एयरपोर्ट पर करी जानी वाली सामान जाँच की एक सामान्य प्रक्रीया ही थी, उस सूटकेस में रखे सामान को देखने से उसमें कुछ विशेष प्रतीत नहीं हो रहा था। लेकिन जब कस्टम विभाग के अधिकारी ने कपड़ों को उठाकर देखा तो प्रसिद्ध चित्रकार पिकासो के बनाए 14 रेखा-चित्रों की मूल प्रतिलिपियों की स्केचबुक स्वेटरों के बीच में छिपा कर रखी गई मिली, जिनकी कुल कीमत लगभग 10.5 लाख अमेरीकी डॉलर आँकी गई, परन्तु जिस व्यक्ति का वह सामान था उसने कहा था कि उसके पास घोषित करने के लिए कुछ भी मूल्यवान नहीं है। स्पष्ट है कि वह व्यक्ति बहुमूल्य कलाकृति की तस्करी कर रहा था और अपराधी था, और उसके साथ फिर वैसा ही व्यवहार भी हुआ।

   हम मसीही विश्वासियों के पास पिकासो के चित्रों से भी कहीं अधिक मूल्यवान कुछ है, जिसे घोषित करने की ना केवल हमें आज्ञा मिली है, वरन ऐसा करना हमारी ज़िम्मेदारी भी है - वह है हमारा मसीह यीशु में विश्वास और उस विश्वास द्वारा हमें मिली पापों की क्षमा तथा उद्धार। हमारे प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है कि हम इस विश्वास, पापों की क्षमा और उद्धार के बारे में सारे संसार में जाकर सभी लोगों को बताएं (मत्ती 28:18-20; प्रेरितों 1:8), लेकिन फिर भी सारे संसार के लिए अति आवश्यक और उपयोगी इस बहुमूल्य बात को हम में से बहुतेरे अपने अन्दर ही छिपाए रहते हैं, बजाए इसके कि उसे लोगों के सामने घोषित करें।

   प्रभु यीशु ने हमें उस नगर के समान बताया है जो पहाड़ पर बसा है इसलिए छिप नहीं सकता, और हमें ’जगत की ज्योति’ कहा है तथा साथ ही कहा है कि इस ज्योति के उजियाले से सारा घर रौशन होना चाहिए। यही हमारे मसीही विश्वास का प्रमुख उद्देश्य है - वह ज्योति जो हमें परमेश्वर से मिली है, उसकी रौशनी, उसकी प्रतिभा सभी लोगों तक पहुँचाएं जिससे संसार के अन्य लोग भी जो पाप के अन्धकार में पड़े हैं वे उजियाले में आने का मार्ग और प्रेरणा पा सकें। प्रभु ने कहा है कि हमारी यह ज्योति मध्यम या हलकी नहीं वरन चमकती हुई होनी चाहिए (मत्ती 5:14-16) और हमें सब मनुष्यों के सामने अपने परमेश्वर पिता की महिमा का कारण होना चाहिए।

   यदि परमेश्वर द्वारा हमें सेंत-मेंत दिए गए इस अद्भुत और अनमोल उपहार की, जिसे वह इसी प्रकार सेंत-मेंत औरों को भी देना चाहता है, हम संसार और अपने आस-पास के लोगों के सामने घोषणा नहीं करते तो हम भी प्रभु यीशु की अनाज्ञाकारिता और घोषित करी जाने वाली बहुमूल्य वस्तु को छिपा कर रखने के दोषी ठहरते हैं, और संबंधित दण्ड के भागी भी होंगे। अपने मन के "सूटकेस" को खोलिए, अन्दर छिपे उस अनमोल खज़ाने को बाहर निकालिए और उसकी घोषणा लोगों के सामने कीजिए, और अपने प्रभु यीशु और परमेश्वर पिता की महिमा के कारण बन जाईए। - जेनिफर बेनसन शुल्ट


बुद्धिमता से चुने गए शब्द परमेश्वर के लिए मनों को खोल सकते हैं।

मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। - यूहन्ना 12:46

बाइबल पाठ: मत्ती 5:13-16
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-4


शनिवार, 22 मार्च 2014

लालसा


   किसी ने मुझ से पूछा, "आपकी सबसे बड़ी समस्या क्या है?" मैंने उत्तर दिया, "वह जो रोज़ सुबह मुझे दर्पण में दिखाई देता है!" मेरा तात्पर्य स्वयं अपने आप से था और मेरा इशारा मेरे अन्दर के "पहले मैं" वाली लालसाओं की ओर था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब 4:1 में आया है, "तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?" यहाँ याकूब ’सुख-विलासों’ द्वारा अपने पाठकों का ध्यान उन स्वार्थी लालसाओं की ओर खेंचना चाह रहा है जिनकी पूर्ति में ही हम अपने आनन्द को ढूँढते हैं तथा उन के लिए उचित-अनुचित सब करने को तैयार हो जाते हैं। याकूब हमें सचेत करता है कि इन लालसाओं के कारण ही हम में परस्पर लड़ाई झगड़े पनपते हैं (पद 1, 2) और ये हमें परमेश्वर से भी विमुख कर देती हैं (पद 4)। इसीलिए इस से पहले याकूब ने लिखा: "परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है" (याकूब 1:14)।

   इस कारण यह अति आवश्यक है कि हम यह ’पहले मैं’ वाला रवैया छोड़ दें। याकूब ऐसा कर पाने का उपाय भी बताता है: सर्वप्रथम, ’परमेश्वर के आधीन हो जाओ’ (पद 7) - परमेश्वर परमेश्वर ही है और हमारे जीवनों में उसी की इच्छा सदा सर्वोपरि रहनी चाहिए; अर्थात, हमें अपने प्राथमिकताओं के स्तर सही निर्धारित करने हैं और निभाने हैं। दूसरा, ’परमेश्वर के निकट आ जाओ’ (पद 8) - परमेश्वर आपके मन के अन्दर तक की प्रत्येक वास्तविकता आप से पहले और आप से बेहतर जानता है, इसलिए उस से छुपाने या संकोच करने के बजाए अपनी उन लालसाओं, कमज़ोरियों, पाप में फंसाने वाली इच्छाओं एवं बातों को लेकर, उन से शुद्धि पाने के लिए, परमेश्वर के निकट आ जाओ (1 यूहन्ना 1:9)। तीसरा, ’प्रभु के सामने दीन बनो’ (पद 10), अर्थात अपने पापों और बुराईयों के लिए पश्चातापी बनो, उनके लिए बहाने बनाने वाले या उन्हें न्यायसंगत ठहराने के लिए तर्क देने वाले ना बनो; जब उसके सामने हम दीन बनेंगे तो परमेश्वर स्वयं ही हमें शिरोमणि भी बनाएगा।

   ध्यान रखें, दुचित्ते हो कर बुराई और भलाई दोनों ही की ओर आकर्षित ना होते रहें। अपने मनों को परमेश्वर और उसके मार्ग पर लगाएं। ’पहले मैं’ या ’पहले मेरा’ वाली भावना सही मार्ग नहीं है, वरन इसके विपरीत हमारी भावना सदा ही ’पहले परमेश्वर’ एवं ’पहले परमेश्वर की इच्छा’ होना चाहिए। सही लालसा ही जीवन के लिए सही मार्ग और सही भविष्य निर्धारित करेगी। - एल्बर्ट ली


जो अपनी प्रशंसा तथा अपने स्वार्थ को भुला कर किया जाता है वो स्वतः ही प्रशंसनीय एवं विस्मरणीय हो जाता है।

कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। - इफिसियों 4:22

बाइबल पाठ: याकूब 4:1-10
James 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? 
James 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं। 
James 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। 
James 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है। 
James 4:5 क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? 
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 29-31


शुक्रवार, 21 मार्च 2014

जीवनी के शब्द


   मैं अपने कॉलेज के छात्रों को संक्षिप्त जीवनी लिखने के विचार को समझाने के लिए कोई रोचक और उपयुक्त उदाहरण ढूँढ रहा था, और मुझे यह विचार मिला: "एक संक्षिप्त वाक्य में जीवनी लिखो।" जब प्रसिद्ध लेखक और पुलिट्ज़र पुरुस्कार विजेता एर्नेस्ट हेमिंगवे से यह कहा गया तो उन्होंने यह मार्मिक वाक्य लिखा: "बिकाऊ हैं: कभी प्रयोग ना हो सकीं छोटे बच्चे की जूतियाँ।" इस वाक्य के पीछे छुपी दुख भरी गाथा की कलपना कर पाना कोई कठिन कार्य नहीं है।

   इस बात पर सोचते हुए मुझे विचारा आया कि क्या परमेश्वर के वचन बाइबल में भी किसी के लिए ऐसे ही संक्षिप्त शब्दों में ’एक वाक्य की जीवनी’ लिखी होगी? जब मैंने खोजना आरंभ किया तो मैं चकित हो गया कि परमेश्वर के लिए उपयोगी और समर्पित कई लोगों के लिए बाइबल में ऐसी संक्षिप्त जीवनी पहले से ही लिखी हुई है। उदाहरणस्वरूप दाऊद के लिए परमेश्वर ने कहा: "मेरे मन के अनुसार व्यक्ति" (1 शमूएल 13:14; प्रेरितों 13:22)। प्रेरित पौलुस ने अपने लिए लिखा, "परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित" (इफिसियों 1:1) तथा तिमुथियुस के लिए लिखा, "विश्वास में मेरा सच्चा पुत्र" (1 तिमुथियुस 1:1)। प्रभु यीशु की माता मरियम के लिए लिखा गया, "प्रभु की दासी" (लूका 2:38) और प्रभु यीशु के लिए लिखा गया है "देहधारी हुआ और हमारे बीच में निवास किया" (यूहन्ना 1:14)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आए इन उदाहरणों के संदर्भ में हमें आज अपने बारे यह विचार गंभीरता से करना चाहिए कि यदि हमारी जीवनी भी ऐसे ही एक संक्षिप्त वाक्य में लिखी जाए, तो वह क्या होगी? वह जीवनी वाक्य स्कारात्मक होगा या नकारात्मक? क्या लेखक कहेगा, "उस व्यक्ति से प्रेम करना सरल नहीं था" या कहेगा "अपने प्रभु के लिए चमकने वाली ज्योति"? यदि स्वयं आप से ही अपनी संक्षिप्त एक वाक्य की जीवनी लिखने को कहा जाए तो आप अपने जीवनी के शब्द क्या लिखेंगे? - डेव ब्रैनन


मेरी जीवनी: "पहले खोया हुआ था, अब खोजा हुआ तथा अनन्तकाल के लिए प्रभु यीशु का धन्यवादी हूँ।"

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-28


गुरुवार, 20 मार्च 2014

पुनर्मिलन


   लड़कपन में मेरे पास एक पालतु कुत्ता था जिसे मैं बहुत चाहता था। एक दिन अचानक ही वह ग़ायब हो गया। मुझे पता नहीं कि कोई उसे चुराकर ले गया, या वह खुद ही कहीं भाग गया, लेकिन उसके जाने से मैं बहुत टूट गया। मैंने उसे सब जगह ढूंढा, मुझे अच्छे से याद है कि मैं एक ऊँचे पेड़ पर चढ़कर अपने आस-पास के स्थानों को देखा करता था कि वह मुझे कहीं नज़र आ जाए। मैं अपने उस चहेते कुत्ते को वापस पाना चाहता था, और बहुत समय तक उसके लौट आने या उसके मिल जाने की खबर की प्रतीक्षा में रहा, लेकिन मैं अपने उस प्रीय कुत्ते से फिर कभी मिल नहीं पाया।

   मेरे इस विछोह के दुख से भी कहीं अधिक बढ़कर होता है वह दुख जब हमारा कोई प्रीय जन इस संसार से विदा हो जाता है। संसार के लोगों के पास उस बिछुड़े हुए प्रीय जन से फिर कभी मिल सकने की कोई आशा नहीं है, लेकिन हम मसीही विश्वासी जानते हैं कि हमारे जो प्रीय जन इस जीवन में प्रभु यीशु के विश्वासी रहे हैं, उनसे हमारा बिछुड़ना अस्थायी है, हम उनसे फिर मिलेंगे और उसके बाद फिर कभी जुदा नहीं होंगे; उन से हमारा पुनर्मिलन अनन्तकाल का होगा।

   प्रेरित पौलुस ने थिस्सलुनीकिया के विश्वासियों को आश्वस्त किया: "क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे" (1 थिस्सलुनीकियों 4:16-17)। इन पदों में लिखे जो शब्द बिछुड़ने से दुखी मनों को सान्तवना और शांति देते हैं वे हैं ’साथ’ और ’सदा’; ये हमें आश्वस्त करते हैं कि मसीह यीशु के अनुयायियों को स्थायी विछोह कभी सहना नहीं पड़ेगा। हम मसीही विश्वासियों के लिए मृत्यु का अर्थ ’अलविदा’ नहीं, ’फिर मिलेंगे’ है। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के विश्वासी कभी अन्तिम अलविदा नहीं कहते।

और मैं[यीशु] उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। - यूहन्ना 10:28

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18
1 Thessalonians 4:13 हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाईं शोक करो जिन्हें आशा नहीं। 
1 Thessalonians 4:14 क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। 
1 Thessalonians 4:15 क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे। 
1 Thessalonians 4:16 क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे। 
1 Thessalonians 4:17 तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। 
1 Thessalonians 4:18 सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 21-24