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शनिवार, 29 मार्च 2014

भरोसा रखिए


   मेरे बचपन की बात है, मैं अपने चाचा-चाची के साथ मिशिगन झील पर गई, वहाँ मेरे चचेरे भाई-बहन तो झील के पानी में तैरते हुए दूर तक निकल गए लेकिन मैं अकेली ही तट पर छिछले पानी में खेलती रही। मेरे चाचा ने मुझ से पूछा, "क्या तुम तैर सकती हो?" मैंने उत्तर दिया, "नहीं" तो वे बोले, "कोई बात नहीं, मैं तुम्हें पानी के अन्दर तक ले जाऊँगा।" मैंने घबराकर कहा, "लेकिन वहाँ तो बहुत गहरा है।" परन्तु उन्होंने मुझे आश्वस्त करते हुए कहा, "बस मुझे थामे रहो, तुम मुझ पर भरोसा करती हो ना?" मैंने उनका हाथ पकड़ा और हम पानी के अन्दर गहराईयों की ओर चलने लगे। थोड़ी दूर चलने के बाद मेरे पाँव तले पर नहीं पड़ पा रहे थे क्योंकि पानी गहरा हो चुका था, तब मेरे चाचा ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मेरा हौंसला बढ़ाते हुए कहा, "मैंने थामा हुआ है, तुम मेरी गोद में हो।" फिर और कुछ दूर पानी के अन्दर जाकर वे बोले, "यहाँ अपने पाँव नीचे टिका लो, तुम खड़ी होने पाओगी" मुझे डर लग रहा था क्योंकि मेरी समझ के अनुसार तो हम अब गहरे पानी में थे, लेकिन मैंने उन पर भरोसा किया और अपने पैर पानी में नीचे की ओर किए, और मुझे आश्चर्य हुआ कि मैं आराम से खड़ी हो गई, क्योंकि चाचा ने मुझे पानी के अन्दर के एक रेत के टीले पर लाकर खड़ा कर दिया था, जो बाहर से दिख तो नहीं रहा था, पर मेरे खड़े रहने के लिए विद्यमान था।

   जीवन की समस्याएं कठोर और कष्टदायक हो सकती हैं; क्या कभी आप इन समस्याओं से उत्पन्न निराशा से ऐसे घिरे हैं कि आपको लगा मानो गहरे जल में डूबते जा रहे हैं? ऐसे में स्मरण रखें कि हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का आश्वासन है कि वो सदा हमारे साथ है। परमेश्वर ने हमसे यह वायदा तो नहीं किया कि हम कभी किसी समस्या में नहीं पड़ेंगे, जीवन के समुद्र की लहरें कभी हमारे लिए अशांत नहीं होंगी, लेकिन उस ने यह वायदा अवश्य किया है कि, "...मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों 13:5)।

   हमारी हर परिस्थिति में हमारा विश्वासयोग्य परमेश्वर हमारे पास और हमारे साथ बना रहता है, हमें थामे रहता है, उसका वायदा है: "जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी" (यशायाह 43:2)। - सिंडी हैस कैसपर


विश्वास रखिए, इससे पहले कि कोई बोझ आपको दबाने पाए, परमेश्वर के हाथ आपकी सहायता के लिए आपको थामे हुए होंगे।

चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है। - भजन 23:4

बाइबल पाठ: भजन 121:1-8
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 22-24


शुक्रवार, 28 मार्च 2014

खूबसूरत पल


   कैमरे के बटन के दबते ही वह खूबसूरत पल हमेशा के लिए कैद हो गया। ढलती गर्मियों का सूरज तट पर आकर टूट रही लहरों पर प्रतिबिंबित होकर उन्हें सुनहरी कर रहा था, ऐसा लग रहा था मानो पिघला हुआ सोना अटखेलियाँ कर रहा हो। यदि मेरा मित्र अपने कैमरे के साथ वहाँ ना होता तो वह लहर और उस की सुन्दरता बिना किसी के ध्यान में आए ऐसे ही चली जाती, जैसे ना जाने इससे पहले कितनी लहरें तट से टकराकर लौट चुकी थीं और अनगिनित अन्य भी आएंगी और लौट जाएंगी। उनकी सुन्दरता बस उनका रचियता परमेश्वर ही देखने पाता है।

   संसार भर के अनगिनित जलाशयों तथा समुद्रों के अनगिनित तटों पर ऐसे ही अनगिनित लहरें अटखेलियाँ करती रहती हैं, प्रत्येक लहर अपने आप में अद्वितीय है, हर एक में होकर परमेश्वर साधारण तथा सामान्य वस्तुओं से असाधारण और अविस्मर्णीय सुन्दरता प्रदर्शित करता है; जल और वायु से कला के अद्भुत नमूने बनाता है। ऊँचा आकाश, विशाल धरातल और जलाशय उसकी चित्रशाला हैं जहाँ हमें उसकी कलाकृतियाँ देखाई देती हैं। चाहे हम उसकी कला का प्रत्येक चमत्कार नहीं देख पाते, अधिकांशतः तो हमारे सामने आता ही नहीं, लेकिन जितना भी हम देखने पाते हैं वह उसकी विलक्षण क्षमता और सामर्थ का एहसास दिलाता है।

   केवल प्रकृति ही परमेश्वर की चित्रशाला नहीं है, एक और माध्यम है जिस में होकर परमेश्वर ने अपने आप को प्रकट किया है - मानव! हम मानव भी साधारण सी वस्तु से बनाए गए हैं - मिट्टी, लेकिन हमारी रचना में उसने एक अन्य और असाधारण अंश जोड़ दिया है - अपनी श्वास  (उत्पत्ति 2:7)। जैसे कि जल की लहरें और मैदान के फूल, वैसे ही हमारे जीवन भी कुछ ही लोगों की नज़रों में आते हैं, सारे संसार के नहीं; लेकिन हमारे जीवन का हर पल परमेश्वर द्वारा बनाया गया खूबसूरत पल है, मानों परमेश्वर संसार से कह रहा हो, अपने सृष्टिकर्ता की ओर देखो और उसके प्रति समर्पित तथा आज्ञाकारी रहो क्योंकि केवल वही सिद्ध और केवल उस का वचन ही अटल है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपने सृष्टिकर्ता की आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत कर के ही हम उसके उद्देश्यों को पूरा करते हैं।

और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया। - उत्पत्ति 2:7

बाइबल पाठ: यशायाह 40:6-11
Isaiah 40:6 बोलने वाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। 
Isaiah 40:7 जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। 
Isaiah 40:8 घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।
Isaiah 40:9 हे सिय्योन को शुभ समचार सुनाने वाली, ऊंचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनाने वाली, बहुत ऊंचे शब्द से सुना, ऊंचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, अपने परमेश्वर को देखो! 
Isaiah 40:10 देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ दिखाता हुआ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा; देखो, जो मजदूरी देने की है वह उसके पास है और जो बदला देने का है वह उसके हाथ में है। 
Isaiah 40:11 वह चरवाहे की नाईं अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिये रहेगा और दूध पिलानेवालियों को धीरे धीरे ले चलेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 19-21


गुरुवार, 27 मार्च 2014

वास्तविक


   नेपरविले, इलिनौए की एक चर्च मण्डली बहुत प्रसन्न है क्योंकि अन्ततः उनके चर्च भवन के ऊपर नए घंटे लगाए जा सके हैं। जब चर्च भवन बनाया गया था तब घंटे लगने का स्थान तो भवन के ऊपर बनाया गया लेकिन चर्च के पास घंटे खरीद पाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए वह स्थान ऐसे ही बिना घंटों के रिक्त पड़ा रहा। अब, अपनी 25वीं वर्षगाँठ पर वे इतने पैसे जमा करने पाए कि उस रिक्त स्थान पर तीन घंटे लगा सकें। यद्यपि वे तीनों घंटे देखने में बहुत सुन्दर हैं, परन्तु एक समस्या अभी भी बनी हुई है - वे लोग उन घंटों की आवाज़ कभी सुन नहीं पाएंगे, क्योंकि चाहे देखने में वे घंटे बहुत अच्छे और वास्तविक लगें, लेकिन हैं वे नकली, अर्थात देखने मात्र के ही हैं और कभी बज नहीं सकते!

   प्रेरित यूहन्ना ने अपनी पहली पत्री में मसीही विश्वासियों को प्रोत्साहित किया के वे ऊपरी रीति से केवल दिखाई देने वाले मसीही विश्वासी ना बनें, वरन अपने जीवन और चाल चलन के द्वारा अपने मसीही विश्वास की वास्तविकता को प्रमाणित करें। किसी व्यक्ति के विश्वास का वास्तविक होने का प्रमाण उसका परमेश्वर के साथ किसी रहस्यपूर्ण या अनोखे अनुभव का होना नहीं है वरन उस व्यक्ति का परमेश्वर को वास्तविक रीति से जानने और उससे प्रेम करने का प्रमाण है उस व्यक्ति का परमेश्वर की आधीनता और परमेश्वर के वचन बाइबल की आज्ञाकरिता में बने रहना।

   यूहन्ना ने लिखा: "पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। जो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था" (1 यूहन्ना 2:5-6)। यदि हम यह दावा करें कि हम ने प्रभु यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा पापों से क्षमा और उद्धार पाया है और परमेश्वर से प्रेम करते हैं, उसे निकटता से जानते हैं, तो फिर हमें अपने इस दावे को परमेश्वर के वचन बाइबल को जानने, मानने और पालन करने के द्वारा प्रमाणित भी करना चाहिए - यही हमारे विश्वास की वास्तविकता का प्रमाण है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर की आज्ञाकारिता उसके प्रति हमारे प्रेम और समर्पण का प्रगटिकरण है।

यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे। - यूहन्ना 14:23

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:3-11
1 John 2:3 यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो इस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1 John 2:4 जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उस में सत्य नहीं। 
1 John 2:5 पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1 John 2:6 सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1 John 2:7 हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1 John 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं; और यह तो उस में और तुम में सच्ची ठहरती है; क्योंकि अन्धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1 John 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है। 
1 John 2:10 जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1 John 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 16-18


बुधवार, 26 मार्च 2014

सामर्थ के मार्ग


   जब तराह हाई स्कूल की छात्रा थी तो उसे भय लगने लगा कि किसी दिन वह एक गंभीर बिमारी से ग्रस्त हो जाएगी, इस लिए उसने परमेश्वर से उसे इस संभावित बिमारी से बचाकर रखने के लिए प्रार्थना करना आरंभ कर दिया। फिर उसकी विचारधारा में एक परिवर्तन आया और उसने इस कालपनिक भय को छोड़ कर अपने भविष्य और जीवन की हर संभावना को, वह चाहे जो भी हो, परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया। कई वर्षों के उपरान्त तराह के चिकित्सकों को उसके शरीर में एक कैंसर की रसौली का पता चला जिसका इलाज कर के तराह को सफलता से रोग मुक्त किया जा सका। तराह का कहना था, क्योंकि वह अपने आप को और अपने भविष्य को परमेश्वर के हाथों में सौंप चुकी थी, इसलिए जब वास्तव में बिमारी आई तो वह परिणाम से निश्चिंत थी। उसकी समस्या उसके लिए परमेश्वर की सामर्थ पाने का मार्ग बन गई थी।

   परमेश्वर के प्रति इस प्रकार समर्पित होकर सब कुछ उसके हाथों में सौंप देना हमें प्रेरित पौलुस के जीवन से भी देखने को मिलता है। पौलुस अपने विषय में लिखता है कि "और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं" (2 कुरिन्थियों 12:7)। पौलुस ने इस के लिए परमेश्वर से बहुत प्रार्थना करी, कि परमेश्वर इस समस्या को उससे दूर कर दे, परन्तु परमेश्वर का उत्तर था "...मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है..."; यह उत्तर पा कर पौलुस की चिंता जाती रही, उसका रवैया सकारात्मक हो गया और वह कहने लगा "...इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे" (2 कुरिन्थियों 12:9)।

   अपनी दुर्बलताओं, कठिनाईयों और चिंतित करने वाले भय का सामना करने के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने आप को परमेश्वर को पूरी रीति से समर्पित कर दें, अपनी सारी चिंता उस पर डाल दें (1 पतरस 5:7) और उसे अपने कार्य को स्वतंत्रता के साथ करने दें। यदि ऐसा करेंगे तो हम देखेंगे कि जो हमारे लिए चिंता के विषय हो सकते थे, वे ही परमेश्वर के हाथों में उसकी सामर्थ के हमारे जीवन में आने और कार्यकारी होने के मार्ग बन गए हैं। - डेनिस फिशर


अपनी ही सामर्थ पर भरोसा परमेश्वर की सामर्थ के प्रति समर्पित हो जाने का विकल्प कदापि नहीं है। 

और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:7 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10
2 Corinthians 12:1 यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूंगा। 
2 Corinthians 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया। 
2 Corinthians 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है। 
2 Corinthians 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं। 
2 Corinthians 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्‍ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूंगा। 
2 Corinthians 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 13-15


मंगलवार, 25 मार्च 2014

साथ साथ


   घर रहकर व्यवसाय चलाने वाले लाखों लोग हैं। क्योंकि इन लोगों को कहीं बाहर जाकर काम नहीं करना होता, इसलिए इनमें से अनेक को उनका एकाकीपन परेशान करता है। ऐसे लोग, जो यह समझते हैं कि अकेले रह कर कार्य करने की अपेक्षा वे अन्य लोगों की संगति में रह कर बेहतर कार्य कर सकते हैं, उनकी सहायता के लिए, उन्हें एक समुदाय देने के लिए, "सह-कार्य स्थल" बनाए गए हैं। ये स्थल बड़े स्थान होते हैं जहाँ अलग अलग लोगों को उस बड़े स्थान के छोटे छोटे भाग किराए पर दिए जाते हैं और वे वहाँ से अपना व्यवसाय चला सकते हैं। उनके पास कार्य के लिए अपना व्यक्तिगत स्थान भी होता है, कई लोगों का साथ भी तथा आवशयकता पड़ने पर दूसरों के साथ बात-चीत या चर्चा करने की सुविधा भी।

   कभी कभी कुछ मसीही विश्वासियों को लगता है कि वे अकेले रहकर भलि-भांति कार्य कर सकते हैं। लेकिन प्रभु यीशु ने हमें एक साथ रहकर और एक दूसरे के साथ मिल कर कार्य करने के लिए रखा है। प्रभु ने अपनी विश्वासी मण्डली को अपनी देह के समान बताया है वह स्वयं जिसका सिर है और जिसमें हम सभी मसीही विश्वासी देह के भिन्न अंगों के समान हैं (रोमियों 12:5) - सबका अपना अपना स्थान और योगदान है और सब एक दूसरे के पूरक हैं, तथा एक साथ मिलकर ही सुचारू रूप से कार्य कर सकते हैं, अकेले अकेले रहकर नहीं (1 कुरन्थियों 12:27)। हमारा प्रभु चाहता है कि हम सभी सहभागिता में रहें और उसके द्वारा दिए गए आत्मिक वरदानों को हम एक दूसरे की उन्नति के लिए उपयोग करें।

   संभव है कि भिन्न कारणों से कुछ लोग दूसरों के साथ सहभागी हो पाने में असमर्थ हों, जैसे बिमारी के कारण संगति में आना संभव ना हो, अथवा कोई यह नहीं समझ पा रहा हो कि मण्डली में उसका सही स्थान और कार्य क्या है इसलिए दूरियाँ आ गई हों, लेकिन फिर भी वे भी प्रभु यीशु मसीह की उसी एक देह के अभिन्न अंग हैं, और देह की संपूर्णता उनके बिना संभव नहीं है। इसलिए यदि कोई अलग पड़ रहा है या हो गया है तो अन्य लोगों का कर्तव्य है कि अपने उस साथी की सुधि लें, उसे आवश्यक सहायता दें और उसे देह में यथास्थान आदर के साथ बना कर रखें।

   साथ साथ मिलकर रहने और चलने से ही हम मसीही विश्वासी एक दूसरे की उपयोगिता, सहायता और आवश्यकता को समझ सकते हैं, अपने प्रभु के लिए प्रभावी और कार्यकारी हो सकते हैं और प्रभु के निर्देश का निर्वाह कर सकते हैं। हम अकेले नहीं साथ साथ रहकर प्रभु के लिए कार्य करने को बनाए गए हैं। - ऐने सेटास


सहभागिता ना केवल हमें साथ रखती है वरन बढ़ाती भी है।

वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - रोमियों 12:5

बाइबल पाठ: 1 कुरन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख की होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 9-12


सोमवार, 24 मार्च 2014

सदा साथ


   बहुत साल पहले की बात है, जब मैं कॉलेज में छात्र था; मेरी मित्रता एक ऐसे व्यक्ति के साथ हुई जिसने बहुत भारी नुकसान सहा था - उसके बेटे की मृत्यु हो गई और उसकी पत्नि इस दुख को ना झेल पाने के कारण उसे छोड़कर चली गई।

   एक दिन मैं अपने इस मित्र के साथ सड़क पर जा रहा था, तो मैंने देखा के हमारे आगे आगे अस्तव्यस्त हाल में एक महिला अपने छोटे और मैले लड़के को लिए चल रही थी। वह महिला उस लड़के से बहुत नाराज़ लग रही थी और उसका हाथ पकड़े हुए बड़ी तेज़ी से चल रही थी जिससे उस बच्चे को उसके साथ कदम मिला कर चलना कठिन हो रहा था। हम एक व्यस्त चौराहे पर पहुँचे जहाँ भीड़ और गाड़ियाँ देखकर वह बच्चा ठिठक कर खड़ा हो गया तथा उस महिला के हाथ से उसका हाथ छूट गया। उस महिला ने खिसिया कर उसकी ओर पीछे मुड़कर देखा, उसे गाली दी और आगे बढ़ गई। वह बच्चा घबरा कर वहीं सड़क के किनारे बैठ गया और ज़ोर से रो पड़ा। यह सब देखकर मेरा मित्र बिना एक क्षण भी हिचकिचाए, तुरंत उस बच्चे के पास बैठ गया, उसे अपनी बाहों में भरा और अपने से चिपका के उसे सान्तवना देने लगा। वह महिला फिर रुकी, फिर उसने उस बच्चे की ओर क्रोध से देखा और फिर उसे गालियाँ देने लगी। मेरे मित्र ने एक ठंडी सांस भरी और उस महिला को संबोधित करते हुए कहा, "यदि आपको इसकी आवश्यकता नहीं है तो इसे मुझे दे दीजिए, मैं इसकी देखभाल कर लूंगा।"

   यही बात हमारा परमेश्वर पिता अपने बड़े प्रेम और अनुग्रह में होकर हम पाप की गन्दगी में पड़े, संसार में तुच्छ समझे जाने वाले, और अन्य सभी लोगों के साथ करता है। परमेश्वर ने भी अपने पुत्र प्रभु यीशु की मृत्यु का दुख सहा है, वह भी सभी मनुष्यों से बहुत प्रेम करता है, संसार में किसी को नाश होते हुए नहीं देखना चाहता, इसलिए वह हमारे पापों और दुखों को लेकर हमें अपनी शान्ति और अपना पवित्रता का जीवन देना चाहता है, हमें अपने पास प्रेम से रखना चाहता है। चाहे हमारे परिवार जन या मित्र हमारा तिरिस्कार कर दें, परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता, सदा हमारे साथ बना रहता है, हमें अपनी देखभाल में बनाए रखता है; बस आवश्यकता है पापों से पश्चाताप कर के विश्वास के साथ उसका हाथ थाम लेने की। जिसने भी पश्चाताप और विश्वास के साथ अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया परमेश्वर सदा उसके साथ रहता है, उसे सदा संभालता रहता है। - डेविड रोपर


यदि परमेश्वर गौरैयों की चिन्ता करता है तो हमारी भी अवश्य करता है।

क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता। वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। - लूका 12:6-7

बाइबल पाठ: भजन 27
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।। 
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 5-8


रविवार, 23 मार्च 2014

घोषणा और महिमा


   वह एयरपोर्ट पर करी जानी वाली सामान जाँच की एक सामान्य प्रक्रीया ही थी, उस सूटकेस में रखे सामान को देखने से उसमें कुछ विशेष प्रतीत नहीं हो रहा था। लेकिन जब कस्टम विभाग के अधिकारी ने कपड़ों को उठाकर देखा तो प्रसिद्ध चित्रकार पिकासो के बनाए 14 रेखा-चित्रों की मूल प्रतिलिपियों की स्केचबुक स्वेटरों के बीच में छिपा कर रखी गई मिली, जिनकी कुल कीमत लगभग 10.5 लाख अमेरीकी डॉलर आँकी गई, परन्तु जिस व्यक्ति का वह सामान था उसने कहा था कि उसके पास घोषित करने के लिए कुछ भी मूल्यवान नहीं है। स्पष्ट है कि वह व्यक्ति बहुमूल्य कलाकृति की तस्करी कर रहा था और अपराधी था, और उसके साथ फिर वैसा ही व्यवहार भी हुआ।

   हम मसीही विश्वासियों के पास पिकासो के चित्रों से भी कहीं अधिक मूल्यवान कुछ है, जिसे घोषित करने की ना केवल हमें आज्ञा मिली है, वरन ऐसा करना हमारी ज़िम्मेदारी भी है - वह है हमारा मसीह यीशु में विश्वास और उस विश्वास द्वारा हमें मिली पापों की क्षमा तथा उद्धार। हमारे प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है कि हम इस विश्वास, पापों की क्षमा और उद्धार के बारे में सारे संसार में जाकर सभी लोगों को बताएं (मत्ती 28:18-20; प्रेरितों 1:8), लेकिन फिर भी सारे संसार के लिए अति आवश्यक और उपयोगी इस बहुमूल्य बात को हम में से बहुतेरे अपने अन्दर ही छिपाए रहते हैं, बजाए इसके कि उसे लोगों के सामने घोषित करें।

   प्रभु यीशु ने हमें उस नगर के समान बताया है जो पहाड़ पर बसा है इसलिए छिप नहीं सकता, और हमें ’जगत की ज्योति’ कहा है तथा साथ ही कहा है कि इस ज्योति के उजियाले से सारा घर रौशन होना चाहिए। यही हमारे मसीही विश्वास का प्रमुख उद्देश्य है - वह ज्योति जो हमें परमेश्वर से मिली है, उसकी रौशनी, उसकी प्रतिभा सभी लोगों तक पहुँचाएं जिससे संसार के अन्य लोग भी जो पाप के अन्धकार में पड़े हैं वे उजियाले में आने का मार्ग और प्रेरणा पा सकें। प्रभु ने कहा है कि हमारी यह ज्योति मध्यम या हलकी नहीं वरन चमकती हुई होनी चाहिए (मत्ती 5:14-16) और हमें सब मनुष्यों के सामने अपने परमेश्वर पिता की महिमा का कारण होना चाहिए।

   यदि परमेश्वर द्वारा हमें सेंत-मेंत दिए गए इस अद्भुत और अनमोल उपहार की, जिसे वह इसी प्रकार सेंत-मेंत औरों को भी देना चाहता है, हम संसार और अपने आस-पास के लोगों के सामने घोषणा नहीं करते तो हम भी प्रभु यीशु की अनाज्ञाकारिता और घोषित करी जाने वाली बहुमूल्य वस्तु को छिपा कर रखने के दोषी ठहरते हैं, और संबंधित दण्ड के भागी भी होंगे। अपने मन के "सूटकेस" को खोलिए, अन्दर छिपे उस अनमोल खज़ाने को बाहर निकालिए और उसकी घोषणा लोगों के सामने कीजिए, और अपने प्रभु यीशु और परमेश्वर पिता की महिमा के कारण बन जाईए। - जेनिफर बेनसन शुल्ट


बुद्धिमता से चुने गए शब्द परमेश्वर के लिए मनों को खोल सकते हैं।

मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। - यूहन्ना 12:46

बाइबल पाठ: मत्ती 5:13-16
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-4