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शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

खुले द्वार


   डेनमार्क के दार्शनिक सोरेन कर्कगार्ड (1813-1855) ने लिखा था: "यदि मुझे किसी एक वस्तु की इच्छा करने का अवसर होता तो मैं दौलत, ताकत आदि की इच्छा नहीं करता, वरन एक ऐसे दृष्टिकोण की जो संभावनाओं को देखने और पहचानने के लिए सदा तत्पर और तैयार रहे।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस भी अपने जीवन में मसीही सेवकाई के अवसरों के प्रति सदा सचेत बना रहता था। उसे जब जहाँ अवसर मिलता था वह मसीह यीशु में विश्वास के द्वारा पाप से क्षमा और उद्धार का सुसमाचार देता था। जब उसे बन्दी बनाकर राज्यपाल फेलिक्स के सामने लाया गया, उसने फेलिक्स के सामने सुसमाचार सुनाया (प्रेरितों 24:24)। जब वह सिलास के साथ बन्दीगृह में डाला गया, उन्होंने बन्दियों और जेलर को सुसमाचार सुनाया (फिलिप्पियों 16:25-34) और बाद में जब पौलुस को रोम में बन्दी बना कर भेजा गया तो उसने वहाँ भी सुसमाचार सुनाया और वहाँ से पत्रियाँ लिखकर मसीही विश्वासियों की मण्डलियों के लोगों को मसीह यीशु के लिए कार्यरत रहने के लिए उभारा (फिलिप्पियों 1:12-18)।

   कुरिन्थुस की मण्डली को लिखे अपने पत्र में पौलुस ने लिखा कि वह उसकी इच्छा तो है कि उनके पास आकर कुछ समय उनके साथ बिताए, लेकिन इफसुस में मिले सेवकाई के एक अवसर के कारण अभी उसका इफसुस में रहना अधिक आवश्यक है: "परन्तु मैं पेन्‍तिकुस्‍त तक इफिसुस में रहूंगा। क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं" (1 कुरिन्थियों 16:8-9)। पौलुस ने अपनी मसीही सेवकाई में औरों को भी उनकी प्रार्थनाओं के द्वारा संभागी कर लिया, क्योंकि वह उनसे निवेदन करता था कि वे उसके लिए प्रार्थना करें जिससे वह मसीह के सुसमाचार को स्पष्टता से बता सके (कुलुस्सियों 4:3)।

   परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपको मसीही सेवकाई के लिए खुले द्वार दिखाए। जो आप देखने पाएंगे वह आपको भी चकित कर देगा। - डेनिस फिशर


परमेश्वर द्वार के एक ओर ’अवसर’ लिखता है और दूसरी ’उत्तरदायित्व’।

और इस के साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो, कि परमेश्वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिस के कारण मैं कैद में हूं। - कुलुस्सियों 4:3 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 16:1-12
1 Corinthians 16:1 अब उस चन्‍दे के विषय में जो पवित्र लोगों के लिये किया जाता है, जैसी आज्ञा मैं ने गलतिया की कलीसियाओं को दी, वैसा ही तुम भी करो। 
1 Corinthians 16:2 सप्‍ताह के पहिले दिन तुम में से हर एक अपनी आमदनी के अनुसार कुछ अपने पास रख छोड़ा करे, कि मेरे आने पर चन्‍दा न करना पड़े। 
1 Corinthians 16:3 और जब मैं आऊंगा, तो जिन्हें तुम चाहोगे उन्हें मैं चिट्ठियां देकर भेज दूंगा, कि तुम्हारा दान यरूशलेम पहुंचा दें। 
1 Corinthians 16:4 और यदि मेरा भी जाना उचित हुआ, तो वे मेरे साथ जाएंगे। 
1 Corinthians 16:5 और मैं मकिदुनिया हो कर तुम्हारे पास आऊंगा क्योंकि मुझे मकिदूनिया हो कर तो जाना ही है। 
1 Corinthians 16:6 परन्तु सम्भव है कि तुम्हारे यहां ही ठहर जाऊं और शरद ऋतु तुम्हारे यंहा काटूं, तब जिस ओर मेरा जाना हो, उस ओर तुम मुझे पहुंचा दो। 
1 Corinthians 16:7 क्योंकि मैं अब मार्ग में तुम से भेंट करना नहीं चाहता; परन्तु मुझे आशा है, कि यदि प्रभु चाहे तो कुछ समय तक तुम्हारे साथ रहूंगा। 
1 Corinthians 16:8 परन्तु मैं पेन्‍तिकुस्‍त तक इफिसुस में रहूंगा। 
1 Corinthians 16:9 क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।
1 Corinthians 16:10 यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्हारे यहां निडर रहे; क्योंकि वह मेरी नाईं प्रभु का काम करता है। 
1 Corinthians 16:11 इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्तु उसे कुशल से इस ओर पहुंचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्योंकि मैं उस की बाट जोह रहा हूं, कि वह भाइयों के साथ आए। 
1 Corinthians 16:12 और भाई अपुल्लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्छा न की, परन्तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 2 राजा 18-20

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

नम्र व्यवहार


   बॉस्टन के भीड़-भाड़ वाले इलाके के मार्ग की एक सुरंग में मेरी कार खराब होकर रुक गई। मेरे अगल बगल से बच कर निकलते हुए अन्य कार चालक उन्हें हो रही असुविधा के कारण अपने क्रोध और कुण्ठा को व्यक्त करते हुए निकलने लगे। कुछ समय पश्चात कार ठीक करने वालों ने अपनी गाड़ी भेजकर मेरी गाड़ी खींचकर मरम्मत के लिए मंगा ली, और कार को ठीक कर के मुझे वापस सौंप दिया। कुछ दिन के बाद कार फिर खराब हो गई और मुझे अन्तर्राज्य राजमार्ग पर रात के दो बजे फिर फंसा दिया। मैंने फिर से गाड़ी मंगाई, जो आई और कार को खींचकर मरम्मत के लिए ले गई। लेकिन अब की बार कुछ और बात साथ हो गई - मेरे दुर्भाग्यवश मरम्मत की दुकान द्वारा प्रयोग करे जाने वाला कार खड़ी करने का स्थान, स्थानीय बेसबॉल टीम के खेलने के समय सार्वजनिक कार खड़े करने के स्थान के रूप में भी प्रयोग होता था। जिस दिन मुझे कार वापस मिलनी थी वह उस टीम के खेलने का दिन था; इसलिए जब मैं संध्या को अपना कार्य समाप्त करके अपनी कार को लेने के लिए पहुँचा तो मुझे मेरी कार 30 अन्य कारों से घिरी खड़ी मिली, जहाँ से बाहर निकल पाना संभव नहीं था!

   यह देखकर मैंने क्या किया? बस यूँ समझ लीजिए कि मेरी प्रतिक्रिया मसीही चरित्र के अनुसार नहीं थी। मैं भी वापस मरम्मत की दुकान पर पहुँच कर अन्य लोगों के समान ही चिल्लाने और भला-बुरा कहने लगा। यह करते हुए थोड़ी देर में मुझे एहसास हुआ कि मेरे ऐसा करने से वहाँ उपस्थित मरम्मत करने वाले कर्मचारियों का रवैया, जो स्वयं भी अब दिन की समाप्ति पर अपने अपने घरों को लौटकर जाने की तैयारी में थे, मेरे प्रति और उदासीन तथा सहायता ना करने वाला होता जा रहा था। मैं स्वयं ही अपनी सहायता करने के उद्देश्य से खिसिया हुआ, पैर पटकता हुआ दुकान के बन्द दरवाज़े पर पहुँचा और उन्हें हिला हिला कर खोलने का असफल प्रयास करने लगा। असफलता से मेरा क्रोध और भी बढ़ गया था, और मेरे क्रोध, खिसियाहट और असफलता को देखकर वे कर्मचारी हंसने लगे, मेरा ठट्टा करने लगे।

   कुण्ठित और क्रोधित मैं वापस मुड़कर बाहर की ओर चला ही था कि मुझे यह एहसास हुआ कि मैंने मसीही चरित्र से कितना विपरीत व्यवहार किया है। अपने इस व्यवहार से शर्मिंदा होकर मैं लौट कर उन कर्मचारियों के पास आया और उनसे बोला, "मैं शर्मिंदा हूँ, कृप्या मुझे क्षमा कर दीजिए"। मेरी यह बात सुनकर वे अवाक रह गए; उन्होंने वे बन्द दरवाज़े मेरे लिए खोल दिए और मुझे अन्दर आ लेने दिया। मैंने नम्र होकर उनसे कहा कि एक मसीही विश्वासी होने के नाते मुझे ऐसा अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए था; यह उनके लिए और भी अचरज की बात थी। कुछ ही मिनिटों में वे सब मिलकर मेरे लिए मेरी कार के चारों तरफ खड़ी अन्य कारों को हटाने लगे, और कुछ ही समय में मुझे अपनी कार निकाल कर ले जाने का रास्ता मिल गया।

   मैंने एक महत्वपूर्ण सबक सीख लिया था, चिड़चिड़े और क्रोधित व्यवहार की अपेक्षा नम्र व्यवहार अधिक कारगर होता है और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में सहायक होता है। - रैंडी किल्गोर


नम्र व्यवहार कठोर हृदय को तोड़ने का माध्यम बन जाता है।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:3-5

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-5
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 15-17


बुधवार, 9 अप्रैल 2014

निरंतर प्रयासरत


   मेरे पति ने जब हमारे घर के सामने वाले बरामदे के ऊपर छत डाली तो उन्होंने आशा रखी कि कसी दिन कोई पक्षी वहाँ अपना घोंसला बनाएगा, इसलिए उन्होंने उसके लिए कोने के खम्बे के पास थोड़ी सी तिरछी जगह छोड़ दी। बाद में हमें यह देखकर बड़ी हंसी आई कि कुछ रौबिन चिड़ियाँ उस स्थान पर बैठने के लिए आपस में लड़ रही हैं। एक चिड़िया घोंसला बनाने के लिए कुछ तिनके लाती और वहाँ रखती लेकिन उनकी आपसी लड़ाई के कारण वे तिरछे स्थान से फिसल कर नीचे गिर जाते। खम्बे के नीचे तिनकों और घास-फूस के ढेर लगने लगे लेकिन घोंसला किसी का भी नहीं बन पा रहा था। फिर कुछ दिन तक बारिश आती रही, और हमने देखा कि एक घोंसला बन ही गया। घोंसला बनाने वाली मादा रौबिन ने गीली मिट्टी और घास को मिलाकर घोंसला बनाना आरंभ किया, जो उस तिरछे स्थान पर चिपक गया, गिरा नहीं, और उसे वहाँ रहने का वह स्थान मिल गया। उस चिड़िया के निरंतर प्रयासरत रहने ने उसे परिस्थिति पर विजयी बना दिया।

   निरंतर प्रयासरत रहने की यह भावना प्रेर्णादायक होती है और मसीही विश्वास के जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। मसीह को आदर देने वाला जीवन जीने के प्रयास में हमें अवश्य ही कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है जो हमें कुँठित और निराश बना सकता है। लेकिन जब हम अपनी सामर्थ पर नहीं वरन परमेश्वर पर भरोसा रखकर उन कठिनाईयों का सामना करते हैं, तो हमें आगे बढते रहने की प्रेर्णा मिलती रहती है, चाहे हमारी कठिनाईयों का समाधान हमें दिखाई ना भी दे। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे" (गलतियों 6:9)।

   क्या हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता कुछ असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों के द्वारा आपको जीवन में निरंतर प्रयासरत बने रहने का पाठ सिखाने का प्रयास कर रहा है? निढाल होकर पीछे ना हटें, प्रयासरत रहें, क्योंकि परमेश्वर उन परिस्थितियों के द्वारा आप में चरित्र और उस चरित्र द्वारा आशा उत्पन्न कर रहा है (रोमियों 5:3-4)। - सिंडी हैस कैसपर


जब संसार कहता है, "हार मान लो" तब आशा कहती है, "एक बार और प्रयास करो"।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे। याकूब 1:2-4

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-8
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 11-14


मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

पहचान


   अपने लेख Leading By Name में लेखक मार्क लैबर्टन ने नाम की पहचान और सामर्थ के बारे में लिखा है। उन्होंने कहा: "मेरे एक संगीतप्रेमी मित्र द्वारा कही गई बात का प्रभाव मुझे अभी तक याद है; उस मित्र ने मुझे भी संगीतप्रेमी कहा। आज तक कभी किसी ने मुझे इस संबोधन से नहीं बुलाया था। मैं कोई वाद्य नहीं बजाता और ना ही एकल गीत गाता हूँ, लेकिन उस मित्र द्वारा मुझे यह कहे जाते ही मुझे लगा कि मेरी भी एक पहचान है, लोग मेरे अन्दर विद्यमान किसी गुण के लिए मुझे भी चाहते हैं, पहचानते हैं, मुझे मान्यता देते हैं, मेरा आदर करते हैं।"

   संभवतः कुछ ऐसा ही शमौन को लगा होगा जब प्रभु यीशु ने उसे एक नया नाम दिया - कैफा। जब अन्द्रियास ने जान लिया कि यीशु ही वह प्रतीक्षित जगत का उद्धारकर्ता मसीहा है तो वह तुरंत अपने भाई शमौन के पास गया और उसे प्रभु यीशु के पास लेकर आया। (यूहन्ना 1:41-42)। जब शमौन प्रभु यीशु से मिला तब अवश्य ही प्रभु ने उसके अन्तःकरण में झाँक कर देखा होगा, और उसके अन्दर पाए जानी वाली किसी विशेष बात को पहचानकर उसे मान्यता दी, आदर दिया। हाँ, प्रभु यीशु ने उसके अन्दर छिपी और बातें भी देखी होंगी - वह आवेश में आकर कार्य करने वाला व्यक्ति है जिससे उसे परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वह बार बार हार जाता है। लेकिन इन सब खामियों से बढ़कर प्रभु यीशु ने यह भी देखा होगा कि शमौन में आगे चलकर मण्डली का अगुवा बनने की संभावना है। प्रभु यीशु ने उसे कैफा कहा, जिसका अर्थ है चट्टान (यूहन्ना 1:42; मत्ती 16:18)।

   यही हमारे लिए भी होता है। परमेश्वर हमारे अन्दर की हर बात को देखता और जानता है। उसे हमारे अहंकार, क्रोध, दूसरों के प्रति प्रेम की कमी इत्यादि सब पता है; लेकिन वह यह भी जानता है कि प्रभु यीशु मसीह में विश्वास ले आने के कारण हम क्या हो गए हैं। इसीलिए वह हमारी प्रभु यीशु में आने से बनी नई पहचान के सूचक संबोधन देता है; परमेश्वर हमें धर्मी ठहराए हुए तथा परमेश्वर से मेल-मिलाप पाए हुए (रोमियों 5:9-10), क्षमा प्राप्त किए हुए, पवित्र और प्रीय (कुलुस्सियों 2:13; 3:12); चुने हुए तथा विश्वासयोग्य (प्रकाशितवाक्य 17:14) कहता है। ये सभी संबोधन, जिस दृष्टिकोण से अब परमेश्वर हमें देखता है उसके अनुरूप उसके द्वारा दी गई हमारी पहचान हैं।

   परमेश्वर की नज़रों में आप क्या हैं इसे कभी नहीं भूलें; अपनी पहचान के अनुसार अपना चाल-चलन बनाए रखें, वही आपकी परिभाषा होगी। - मार्विन विलियम्स


मसीह यीशु में होकर आपको मिलने वाली पहचान को कोई कभी चुरा नहीं सकता।

जब अन्यजातियां तेरा धर्म और सब राजा तेरी महिमा देखेंगे; और तेरा एक नया नाम रखा जाएगा जो यहोवा के मुख से निकलेगा। - यशायाह 62:2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:35-42 
John 1:35 दूसरे दिन फिर यूहन्ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। 
John 1:36 और उसने यीशु पर जो जा रहा था दृष्टि कर के कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है। 
John 1:37 तब वे दोनों चेले उस की यह सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। 
John 1:38 यीशु ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उसने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे। 
John 1:39 तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था। 
John 1:40 उन दोनों में से जो यूहन्ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिये थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था। 
John 1:41 उसने पहिले अपने सगे भाई शमौन से मिलकर उस से कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात मसीह मिल गया। 
John 1:42 वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्टि कर के कहा, कि तू यूहन्ना का पुत्र शमौन है, तू केफा, अर्थात पतरस कहलाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 7-10


सोमवार, 7 अप्रैल 2014

सहायता


   क्या ऐसा हो सकता है कि हमारा मददगार होना मदद पाने वालों के लिए परेशानी का कारण बन जाए? क्या हमारी सहायता दूसरों के जीवन को और भी कठिन बना सकती है? जी हाँ, ऐसा संभव है; तब, जब हम सहायता करने के प्रयास में दूसरों के जीवनों में द्खलंदाज़ी करने लगते हैं, उन्हें नियंत्रित करने के प्रयास करने लगते हैं, उनकी स्वतंत्रता में बाधा बनने लगते हैं, उन्हें सीखने और पनपने के अवसर देने की बजाए उन्हें दबाए रखने लगते हैं। यदि जो सहयाता हम देने का प्रयास कर रहे हैं वह केवल हमारी चिन्ता से प्रेरित होकर है, तो हम अपने स्वार्थ के कारण दूसरों के लिए कठिनाई पैदा करने वाले बन जाते हैं।

   तो फिर हम कैसे पहचान सकते हैं कि जो सहायता हम करना चाह रहे हैं और हमारे मन के भाव वास्तव में परमेश्वर के निस्वार्थ प्रेम से प्रेरित हैं? परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हम शुद्ध और निस्वार्थ मन से प्रेम कैसे कर सकते हैं - अपने मनों और विचारों को परमेश्वर को समर्पित रखने तथा उससे मार्गदर्शन पाने के द्वारा: "हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले! और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर! " (भजन 139:23-24)।

   हम प्रार्थना में अपने परमेश्वर पिता से माँग सकते हैं कि वह हमें दिखाए और बताए कि कहीं अनजाने में ही हम दूसरों के मार्गों की बाधा और उनके लिए कष्ट का कारण तो नहीं बन रहे हैं। हम प्रार्थना में यह भी कह सकते हैं कि परमेश्वर पिता हमें वह प्रेम करना और दिखाना सिखाए जो उसके वचन और स्वभाव के अनुरूप है: "प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता" (1 कुरिन्थियों 13:4-5)।

   दूसरों, विशेषकर जिनसे हम प्रेम करते हैं, की सहायता करने के हमारे प्रयास कभी भी चिन्ता से पूर्णतः मुक्त तो नहीं हो सकेंगे, लेकिन परमेश्वर पिता की सहायता और उसके वचन की आज्ञाकारिता से हम वैसा ही निस्वार्थ प्रेम दिखाना सीख सकते हैं जैसा परमेश्वर पिता ने स्वयं हम से किया है तथा सही रीति से सहायता करने वाले बन सकते हैं। और इस प्रेम तथा सहायता के निस्वार्थ होने की पहचान है होगी कि हम लोगों से उस प्रेम के प्रतिफल पाने की या प्रशंसा की कोई इच्छा नहीं रखेंगे। पिता परमेश्वर हमें यह सामर्थ दे कि हम शुद्ध मन और उद्देश्यों से दूसरों की भलाई के लिए प्रेम करें, सहायता करें और बदले में उनसे कुछ पाने की कोई उम्मीद नहीं रखें। - डेविड रोपर


शुद्ध मन और उद्देश्यों से दूसरों की सहायता करने के लिए निस्वार्थ प्रेम करना भी आवश्यक है।

हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की ओर फिरें! - विलापगीत 3:40

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-8
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 4-6


रविवार, 6 अप्रैल 2014

खूबसूरत धब्बे


   बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं एक नदी के किनारे किनारे पैदल यात्रा करते हुए वृक्षों के एक ऐसे झुरमुट पर पहुँचा जहाँ उन पेड़ों की छाल को छील कर निकाला हुआ था। उस इलाके में रहने वाले मेरे एक मित्र ने मुझे बता रखा था कि वहाँ के स्थानीय निवासी इस प्रकार पेड़ों से छाल छील कर अन्दर के लेस वाले पदार्थ को अपने कार्य के लिए निकालते हैं। उस छीलने के कारण जो धब्बे पेड़ों पर आए थे उस से उन पेड़ों के स्वरूप बिगड़ गए थे, लेकिन कुछ दाग़ ऐसे भी थे जिनमें पेड़ का लेस निकल कर जम गया था और जो वर्षों से वायु और मौसम को झेलते झेलते चमकदार और सुन्दरता के अनूठे नमूने बन गए थे।

   कुछ ऐसा ही हमारे पापों के साथ भी होता है। हम सभी मनुष्यों के जीवनों में पाप के दाग़ और धब्बे पाए जाते हैं। लेकिन जो दाग़ और धब्बे प्रभु यीशु के पास पश्चाताप में लाकर उसे समर्पित कर दिए गए और प्रभु यीशु के पवित्र लोहु में ढाँप दिए गए, अब उनके निशान एक विलक्षण सुन्दरता को दिखाते हैं, जैसे:
   - जिन्होंने पाप की कड़ुवाहट को चखा है और अब पाप से घृणा तथा धार्मिकता से प्रेम करते हैं; उनके जीवन में वे पाप के धब्बे पवित्रता की सुन्दरता को दिखाते हैं।
   - जो ये जानते-समझते हैं कि वे परमेश्वर की धार्मिकता के स्तर से कितने दूर हैं (रोमियों 3:23), वे दूसरों के प्रति उनकी कमज़ोरियों में सहनशील रहते हैं, और जब दूसरे गिरते हैं तो वे उनके प्रति सहानुभूति, दयालुता, और समझ-बूझ के साथ व्यवहार करते हैं; उनके जीवन में वे पाप के धब्बे नम्रता की सुन्दरता को दिखाते हैं।
   - जब जीवन के पाप सेंत-मेंत और पूर्णतः क्षमा हो जाने का अनुभव होता है, तो यह दया करने वाले प्रभु के प्रति प्रेम का गहरा संबंध बन जाता है, ऐसा प्रेम जो फिर दूसरों के प्रति भी दिखाई देता है; उनके जीवन में वे पाप के धब्बे प्रेम की सुन्दरता को दिखाते हैं।

   अपने पापों से परेशान मत हों, उन्हें प्रभु यीशु सौंप दें जो उन्हें सहर्ष लेकर बदले में अपनी धार्मिकता आप को देने को तैयार खड़ा है। पाप और धार्मिकता की यह अदला-बदली ना केवल आपको पाप के बोझ और दुषपरिणामों से मुक्त कर देगी वरन जीवन में लगे उन पाप के धब्बों को अनूठी सुन्दरता के नमूने भी बना देगी। - डेविड रोपर


क्षमा पाया हुआ हृदय सुन्दर जीवन का सोता बन जाता है।

क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। - भजन 32:1-2

बाइबल पाठ: लूका 7:36-50
Luke 7:36 फिर किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे साथ भोजन कर; सो वह उस फरीसी के घर में जा कर भोजन करने बैठा। 
Luke 7:37 और देखो, उस नगर की एक पापिनी स्त्री यह जानकर कि वह फरीसी के घर में भोजन करने बैठा है, संगमरमर के पात्र में इत्र लाई। 
Luke 7:38 और उसके पांवों के पास, पीछे खड़ी हो कर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी और उसके पांव बारबार चूमकर उन पर इत्र मला। 
Luke 7:39 यह देखकर, वह फरीसी जिसने उसे बुलाया था, अपने मन में सोचने लगा, यदि यह भविष्यद्वक्ता होता तो जान लेता, कि यह जो उसे छू रही है, वह कौन और कैसी स्त्री है? क्योंकि वह तो पापिनी है। 
Luke 7:40 यह सुन यीशु ने उसके उत्तर में कहा; कि हे शमौन मुझे तुझ से कुछ कहना है वह बोला, हे गुरू कह।
Luke 7:41 किसी महाजन के दो देनदार थे, एक पांच सौ, और दूसरा पचास दीनार धारता था। 
Luke 7:42 जब कि उन के पास पटाने को कुछ न रहा, तो उसने दोनों को क्षमा कर दिया: सो उन में से कौन उस से अधिक प्रेम रखेगा। 
Luke 7:43 शमौन ने उत्तर दिया, मेरी समझ में वह, जिस का उसने अधिक छोड़ दिया: उसने उस से कहा, तू ने ठीक विचार किया है। 
Luke 7:44 और उस स्त्री की ओर फिरकर उसने शमौन से कहा; क्या तू इस स्त्री को देखता है मैं तेरे घर में आया परन्तु तू ने मेरे पांव धाने के लिये पानी न दिया, पर इस ने मेरे पांव आंसुओं से भिगाए, और अपने बालों से पोंछा! 
Luke 7:45 तू ने मुझे चूमा न दिया, पर जब से मैं आया हूं तब से इस ने मेरे पांवों का चूमना न छोड़ा। 
Luke 7:46 तू ने मेरे सिर पर तेल नहीं मला; पर इस ने मेरे पांवों पर इत्र मला है। 
Luke 7:47 इसलिये मैं तुझ से कहता हूं; कि इस के पाप जो बहुत थे, क्षमा हुए, क्योंकि इस ने बहुत प्रेम किया; पर जिस का थोड़ा क्षमा हुआ है, वह थोड़ा प्रेम करता है। 
Luke 7:48 और उसने स्त्री से कहा, तेरे पाप क्षमा हुए। 
Luke 7:49 तब जो लोग उसके साथ भोजन करने बैठे थे, वे अपने अपने मन में सोचने लगे, यह कौन है जो पापों को भी क्षमा करता है? 
Luke 7:50 पर उसने स्त्री से कहा, तेरे विश्वास ने तुझे बचा लिया है, कुशल से चली जा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 1-3


शनिवार, 5 अप्रैल 2014

घमण्‍ड


   छोटे बच्चों को सिखाई जाने वाली अंग्रेज़ी कविता, Little Jack Horner, को लेकर मैं सदा ही उलझन में रहा हूँ। कविता की पंक्तियाँ कहती हैं कि छोटा बालक जैक हॉर्नर एक कोने में बैठ कर पाइ नामक वयंजन खा रहा था; उसने अपना अंगूठा पाइ में डाला, पाइ में से एक आलूबुखारा निकाला और बोला "देखो मैं कितना अच्छा हूँ!" यह मुझे बड़ा अटपटा लगता है, कि जैक एक कोने में बैठा यह सब कर रहा था और अपने आप को अच्छा कह रहा था, जबकि कोने में तो उन बच्चों को बैठने के लिए कहा जाता है जो कुछ बुरा करते हैं। मेरी उलझन है कि उस कविता में बयान किए गए जैक के कार्यों में आपस में कोई तालमेल नहीं था, तो क्या जैक अपने प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह सब कर रहा था?

   अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और अपनी उपलब्धियों तथा योग्यताओं को लोगों के सामने प्रदर्षित करना हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। हम हर बात का श्रेय लेने की लालसा रखते हैं और चाहते हैं कि सभी लोग हमारा ध्यान रख कर ही कार्य करें, हम ही सभी गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बने रहें। लेकिन इस प्रकार अपने आप को हर बात का केन्द्र बनाकर जीवन जीना अपने आप को धोखा देना और एक निकृष्ट जीवन जीना है। सच्चाई यह है कि हमारे पापों ने हमें परमेश्वर के सामने दोषी ठहराकर हमें एक ’कोने में’ खड़ा कर दिया है, अर्थात दण्ड का भागी बना दिया है। अब फैसला हमारा है कि हम अपने पापों में बने रह कर दण्ड भोगते रहने को तैयार रहेंगे, अथवा परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा का लाभ उठाकर उस दण्ड को भोगते रहने से बच निकलेंगे।

   प्रेरित पौलुस ने इस स्थिति के संबंध में हमारे लिए अपनी गवाही के द्वारा एक सही दृष्टिकोण रखा है। सांसारिक दृष्टि से पौलुस एक बहुत गुणी, ज्ञानी और प्रभावशाली व्यक्ति था। लेकिन पौलुस ने पहचाना के उसका यह सांसारिक ज्ञान, स्थान और उपलब्धियां परमेश्वर के सामने उसे पाप के दोष से मुक्त ठहराने के लिए कतई सक्षम नहीं थे; वह अपने पापों में ही जी रहा था और उनके दण्ड का भागी था। सत्य तथा वास्तविक वस्तुस्थिति का बोध होते ही पौलुस ने उस अनन्त काल के दण्ड से बचने के एकमात्र उपाय को सहर्ष अपना लेने में कोई समय नहीं गंवाया; उसने प्रभु यीशु के प्रभुत्व को सहर्ष स्वीकार किया, और जिन बातों को वह पहले अपने लाभ की मानता था, उन्हें प्रभु यीशु के आधीन कर दिया - "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:7-8)।

   जिस वास्तविकता को पौलुस ने पहचाना, उसे संसार के लोगों को आज भी पौलुस के समान ही पहचानने की आवश्यकता है - हमारे गुण, योग्यताएं, स्थान और उपलब्धियां हमें हमारे पापों के दोष एवं दण्ड से मुक्त नहीं करेंगे। पाप के दोष एवं दण्ड से बचने का एकमात्र उपाय है प्रभु यीशु पर किया गया विश्वास और समर्पण। उसके बाद फिर अपने ऊपर किसी प्रकार का घमण्ड करने या अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का कोई स्थान नहीं रह जाता है, वरन फिर "जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे" (1 कुरिन्थियों 1:31)। - जो स्टोवैल


हम प्रभु यीशु के बिना कुछ भी नहीं हैं, इसलिए सारा आदर और श्रेय प्रभु यीशु को ही दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:1-11
Philippians 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है। 
Philippians 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो। 
Philippians 3:3 क्योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। 
Philippians 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं। 
Philippians 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं। 
Philippians 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला; और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। 
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 20-22