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शुक्रवार, 9 मई 2014

महिमामय तथा उपयोगी


   मेरे नाती-पोते रंगीन लेगो के साथ खेलना बहुत पसन्द करते हैं। लेगो के उन छोटे छोटे कई भिन्न रंगों के आकारों को आपस में जोड़ कर किले, हवाई जहाज़, घर आदि कुछ भी दिए गए निर्देशों के अनुसार बनाया जा सकता है। लेगो से खेलने के लिए वे बच्चे खिलौने के डिब्बे को ज़मीन पर उलट कर सभी आकारों को बाहर निकाल लेते हैं, और फिर निर्देश पुस्तिका में दी गई किसी चीज़ को बनाने लग जाते हैं। लेकिन शीघ्र ही बजाए दिए गए निर्देशों का पालन करते रहने के, वे अपनी समझ और इच्छानुसार बनाना आरंभ कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ ही देर में बनाई जा रही वह चीज़ बिगड़ जाती है, और उन्हें सारे आकारों को अलग अलग करके फिर से बनाना आरंभ करना पड़ता है - लेकिन इस बार वे निर्देशों का ध्यान भी करते रहते हैं।

   क्या आज आप अपने जीवन को सुचारू रूप से चलता हुआ पाने की बजाए उसे अस्त-व्यस्त पाते हैं? यदि ऐसा है तो आपको भी अपने जीवन को परमेश्वर के नियमों के अनुसार सुधारने और पुनः बनाने की आवश्यकता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा है कि प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन की नेंव प्रभु यीशु मसीह है, और हम सब को ध्यान देना है कि हम उस नेंव पर कैसे निर्माण कर रहे हैं (1 कुरिन्थियों 3:10-11)। प्रभु ने हमारे लिए कुछ निर्देश भी दिए हैं जिनके अनुसार ही हमें अपने जीवनों को उसकी महिमा और उपयोगिता के लिए बनाना है। 

ये निर्देश हैं:
- नम्रता पूर्वक दूसरों की सेवा करते हुए उन्हें अपने से बढ़कर समझो (फिलिप्पियों 2:3-4);
- ज़रूरतमन्दों को अपने संसाधनों में से उदारता पूर्वक दो (याकूब 2:14-17);
- जो आपके साथ बुराई भी करें उनके साथ भी प्रेम पूर्वक व्यवहार करो (रोमियों 12:14-21);

ये अपने जीवन को भलि-भांति परमेश्वर के लिए महिमामय तथा उपयोगी (1 कुरिन्थियों 3:16) बनाने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उसके निर्देशों में से कुछ निर्देश हैं, जिनका पालन द्वारा हमारी अपनी तथा अन्य लोगों की भलाई होती है। - जो स्टोवैल

जीवन संवारने तथा बनाने के लिए बाइबल परमेश्वर की ओर से दिया हुआ मार्गदर्शक एवं नक्षा है।

और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो। - इफिसियों 2:20-22

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:9-17
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:11 क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 
1 Corinthians 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। 
1 Corinthians 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते। 
1 Corinthians 3:16 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 
1 Corinthians 3:17 यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9


गुरुवार, 8 मई 2014

उपलब्ध


   गैरी अदालत में बैठा अपने मुकदमे की सुनवाई का नंबर आने की प्रतीक्षा में था। उस दौरान वह चल रहे मुकदमों की सुनवाई के दौरान एक के बाद एक लोगों की गवाहियाँ सुन रहा था जो बेघर किए जा रह थे। उन लोगों में से कई तो इस न्यायिक कार्यवाही से होकर ऐसे निकल रहे थे मानो वे इससे भलि-भांति परिचित हों और उन्हें कोई परवाह ना हो। लेकिन उन में से एक महिला, लेस्ली, बहुत घबराई हुई थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है, और आगे क्या होगा, और ना ही उस महिला को समझ आ रहा था कि सही सहायता पाने के लिए किस के पास जाए।

   वहाँ बैठे बैठे गैरी को लगा जैसे उसके अन्दर कोई उसे उस महिला की सहायता के लिए आगे बढ़ने को कह रहा है। गैरी बहुत देर तक अपने अन्दर की उस आवाज़ को दबाता और नज़रन्दाज़ करता रहा, लेकिन वह आवाज़ शान्त नहीं हुई। गैरी ने आगे बढ़कर उस महिला की सहायता ना करने के कई बहाने ढूँढे; जैसे कि, अनजाने लोगों के साथ बातचीत करना उसे नहीं आता; उसे डर था कि उसका यह प्रयास गलत ना समझ लिया जाए, इत्यादि; लेकिन अन्ततः उसे लगा कि यह आवाज़ परमेश्वर की ओर से है, और वह परमेश्वर के निर्देशों के प्रति अनाज्ञाकारी नहीं होना चाहता था।

   जब वह महिला, लेस्ली, न्यायालय से निकल कर जाने लगी तब गैरी उसके पास गया और उससे कहा, "महोदया, मैंने अदालत में दी गई आपकी गवाही सुनी है, और मेरा विश्वास है कि परमेश्वर चाहता है कि मैं आपकी सहायता करूं।" पहले तो लेस्ली को गैरी पर शक हुआ, लेकिन गैरी ने उसे अपनी और अपनी इच्छा की खराई का विश्वास दिलाया। फिर गैरी ने कुछ लोगों से फोन द्वारा संपर्क किया और उस महिला का एक स्थानीय चर्च के लोगों के साथ संपर्क करवा दिया, जिन्होंने उसका घर बचाए रखने के लिए उसकी सहायता करी।

   परमेश्वर ने हम मसीही विश्वासियों को सक्रीय होकर उसके लिए कार्यरत रहने के लिए बुलाया है (1 यूहन्ना 3:18)। जब हम परमेश्वर की आवाज़ किसी की सहायता करने जाने के लिए सुनें, तो उस बुलाहट के प्रति ना केवल संवेदनशील हों वरन आज्ञाकारी भी रहें। परमेश्वर के लिए उपलब्ध बन कर ही हम उसके लिए उपयोगी हो सकते हैं। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


जब हम परमेश्वर की इच्छानुसार दूसरों की सेवा में लगे होते हैं, तब ही हम अपने लिए सर्वोत्तम कार्य में होते हैं।

अपना मुंह खोल और धर्म से न्याय कर, और दीन दरिद्रों का न्याय कर। - नीतिवचन 31:9

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:16-23
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। 
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? 
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। 
1 John 3:19 इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उसके विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे। 
1 John 3:20 क्योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है। 
1 John 3:21 हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्वर के साम्हने हियाव होता है। 
1 John 3:22 और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है; क्योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं; और जो उसे भाता है वही करते हैं। 
1 John 3:23 और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उसने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें।

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 4-6


बुधवार, 7 मई 2014

समयानुसार


   मैं पहली बार सन 2005 में जमाइका के दक्षिणी तट के निकट पास्टर औडले ब्लैक के चर्च में आया था। तब उन्होंने अपने चर्च की आराधना सभा के लिए भवन के विस्तार का एक कार्यक्रम आरंभ किया ही था। उसके बाद मैं जितनी बार लौट कर वहाँ आया मैंने पाया कि उस भवन विस्तार में धीरे ही सही लेकिन कुछ ना कुछ बढ़ोतरी अवश्य ही होती जा रही थी। उन लोगों में इस बात को लेकर कोई निराशा नहीं थी कि भवन के पूरा होने में इतना समय लग रहा है। पास्टर ब्लैक और उस चर्च के अन्य लोग परमेश्वर के समय और जो कुछ वह उनके लिए कर रहा है उसको लेकर बहुत खुश रहते हैं। उनका यह धैर्य, आनन्द और विश्वास मेरे लिए एक प्रेर्णा और शिक्षा है।

   हम लोग सामान्यतः अधीर रहते हैं। हम चाहते हैं कि हमारा चर्च तेज़ी से बढ़े, चर्च के जवान तेज़ी से परिपक्व हों और हमारी सभी समस्याएं बस आज ही हल हो जाएं। हमें यह स्मरण दिलाया जाना आवश्यक है कि हर बात को कुछ समय लगता है, सब कुछ परमेश्वर के समयानुसार ही होता है। उदाहरण के लिए, जब इस्त्राएलियों ने मिस्त्र की गुलामी से छुड़ाए जाने के बाद वाचा किए हुए कनान देश की ओर कूच किया तो परमेश्वर ने उन्हें वहाँ पहुँचाने के लिए लंबे मार्ग को चुना (निर्गमन 13:17-18)। उस लंबे मार्ग की यात्रा के समय में वे बहुत सी चुनौतियों से होकर निकले, परमेश्वर ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया और अनेक बातों में से निकालकर एक नए जीवन के लिए तैयार किया।

   हमारे आज के सब कुछ त्वरित रीति से करने की लालसा रखने वाले संसार में हमारा नज़रिया भी हमारे लिए सब कुछ बिना किसी विलंब के हो जाने का रहता है। लेकिन कई दफा यह शीघ्रता परमेश्वर की योजना के अनुसार नहीं होती। हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर की इच्छा और योजना जानते रहने वाला बनना चाहिए, उसके समयानुसार हर कार्य को होने देने को स्वीकार करने वाला होना चाहिए। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर की समय-सारणी भले ही धीमी गति से बढ़े, लेकिन आगे की ओर स्थिरता के साथ बढ़ती है।

क्योंकि हर एक विषय का समय और नियम होता है, यद्यिप मनुष्य का दु:ख उसके लिये बहुत भारी होता है। - सभोपदेशक 8:6

बाइबल पाठ: निर्गमन 13:17-22
Exodus 13:17 जब फिरौन ने लोगों को जाने की आज्ञा दे दी, तब यद्यपि पलिश्तियों के देश में हो कर जो मार्ग जाता है वह छोटा था; तौभी परमेश्वर यह सोच कर उन को उस मार्ग से नहीं ले गया, कि कहीं ऐसा न हो कि जब ये लोग लड़ाई देखें तब पछताकर मिस्र को लौट आएं। 
Exodus 13:18 इसलिये परमेश्वर उन को चक्कर खिलाकर लाल समुद्र के जंगल के मार्ग से ले चला। और इस्राएली पांति बान्धे हुए मिस्र से निकल गए। 
Exodus 13:19 और मूसा यूसुफ की हड्डियों को साथ लेता गया; क्योंकि यूसुफ ने इस्राएलियों से यह कहके, कि परमेश्वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा, उन को इस विषय की दृढ़ शपथ खिलाई थी, कि वे उसकी हड्डियों को अपने साथ यहां से ले जाएंगे। 
Exodus 13:20 फिर उन्होंने सुक्कोत से कूच कर के जंगल की छोर पर एताम में डेरा किया। 
Exodus 13:21 और यहोवा उन्हें दिन को मार्ग दिखाने के लिये मेघ के खम्भे में, और रात को उजियाला देने के लिये आग के खम्भे में हो कर उनके आगे आगे चला करता था, जिससे वे रात और दिन दोनों में चल सकें। 
Exodus 13:22 उसने न तो बादल के खम्भे को दिन में और न आग के खम्भे को रात में लोगों के आगे से हटाया।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3


मंगलवार, 6 मई 2014

आमंत्रण


   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में यहेजकेल नबी की पुस्तक परमेश्वर के अनाज्ञाकारी रहे लोगों के ऊपर आने वाले परमेश्वर के न्याय के बारे में बताती है। परमेश्वर ने उन लोगों को बलवा करने वाले निर्ल्लज तथा हठीले लोग कहा (यहेजकेल 2:3-4)। यहेजकेल द्वारा लिखे गए उनके पाप के वर्णन और असके कारण उन पर आने वाले उग्र न्याय के शब्द चित्र भयावह हैं। लेकिन फिर भी अपने लोगों के पाप और उसके कारण उन पर आई बाबुल की बन्धुवाई और दुर्दशा में परमेश्वर के विलाप में उनके प्रति परमेश्वर का प्रेम चमकता दिखता है, वह उन्हें फिर से जीवन मार्ग पर चलने के लिए लौट आने का आमंत्रण देता है।

   परमेश्वर ने उन लोगों से कहा: "अपने सब अपराधों को जो तुम ने किए हैं, दूर करो; अपना मन और अपनी आत्मा बदल डालो! हे इस्राएल के घराने, तुम क्यों मरो? क्योंकि, प्रभु यहोवा की यह वाणी है, जो मरे, उसके मरने से मैं प्रसन्न नहीं होता, इसलिये पश्चात्ताप करो, तभी तुम जीवित रहोगे" (यहेजकेल 18:31-32)।

   यह विवरण हमारे सामने एक महान सत्य को लाकर रखता है - परमेश्वर यह नहीं चाहता कि हम ग्लानि में जीते रहें, या उसकी आज्ञाओं को मानने के अपने प्रयास और बढ़ा दें, वरन उसकी इच्छा यह है कि हम उसके पास पश्चाताप में लौट आएं, उससे पुनः सामर्थ पाएं, एक नया मन और नयी आत्मा (यहेजकेल 36:26-27) उससे प्राप्त करें और फिर उसकी सेवकाई में लग जाएं।

   यदि आपको लगता है कि आप परमेश्वर से दूर भटक गए हैं, या आप का यह मानना है कि अब वह आप के साथ नहीं चलता तो यही समय है कि आप उपरोक्त सत्य को स्वीकार कर लें और उसके पास लौट आएं। वह सदा आपकी प्रतीक्षा में रहता है। क्या आप उसके प्रेम भरे आमंत्रण को स्वीकार कर के उससे एक नया मन और आत्मा पा लेना चाहते हैं? क्या आप उसके साथ जीवन मार्ग पर चलने के उसके इस आमंत्रण को अपनाएंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


वर्तमान एवं भविष्य को सुखद बनाने के लिए भूतकाल के लिए प्रभु यीशु में होकर मिलने वाली परमेश्वर की क्षमा प्राप्त कर लें।

मैं तुम को नया मन दूंगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूंगा; और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकाल कर तुम को मांस का हृदय दूंगा। और मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर देकर ऐसा करूंगा कि तुम मेरी विधियों पर चलोगे और मेरे नियमों को मान कर उनके अनुसार करोगे। - यहेजकेल 36:26-27

बाइबल पाठ: यहेजकेल 18:25-32
Ezekiel 18:25 तौभी तुम लोग कहते हो, कि प्रभु की गति एकसी नहीं। हे इस्राएल के घराने, देख, क्या मेरी गति एकसी नहीं? क्या तुम्हारी ही गति अनुचित नहीं है? 
Ezekiel 18:26 जब धमीं अपने धर्म से फिर कर, टेढ़े काम करने लगे, तो वह उनके कारण मरेगा, अर्थात वह अपने टेढ़े काम ही के कारण मर जाएगा। 
Ezekiel 18:27 फिर जब दुष्ट अपने दुष्ट कामों से फिर कर, न्याय और धर्म के काम करने लगे, तो वह अपना प्राण बचाएगा। 
Ezekiel 18:28 वह जो सोच विचार कर अपने सब अपराधों से फिरा, इस कारण न मरेगा, जीवित ही रहेगा। 
Ezekiel 18:29 तौभी इस्राएल का घराना कहता है कि प्रभु की गति एकसी नहीं। हे इस्राएल के घराने, क्या मेरी गति एकसी नहीं? क्या तुम्हारी ही गति अनुचित नहीं? 
Ezekiel 18:30 प्रभु यहोवा की यह वाणी है, हे इस्राएल के घराने, मैं तुम में से हर एक मनुष्य का न्याय उसकी चालचलन के अनुसार ही करूंगा। पश्चात्ताप करो और अपने सब अपराधों को छोड़ो, तभी तुम्हारा अधर्म तुम्हारे ठोकर खाने का कारण न होगा। 
Ezekiel 18:31 अपने सब अपराधों को जो तुम ने किए हैं, दूर करो; अपना मन और अपनी आत्मा बदल डालो! हे इस्राएल के घराने, तुम क्यों मरो? 
Ezekiel 18:32 क्योंकि, प्रभु यहोवा की यह वाणी है, जो मरे, उसके मरने से मैं प्रसन्न नहीं होता, इसलिये पश्चात्ताप करो, तभी तुम जीवित रहोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 8-10


सोमवार, 5 मई 2014

माँगने से पहले


   अन्तराष्ट्रीय आर.बी.सी. मिनिस्ट्रीज़ के मेरे एक सहकर्मी ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल संबंधी संसाधनों का अनुवादक होने से उसे मिलने वाले आनन्द के बारे में बताया। उसने कहा, वह अपने आप को बहुत ही धन्य समझती है क्योंकि उन संसाधनों से मिलनी वाली बाइबल की शिक्षाओं की वह सर्वप्रथम प्राप्तकर्ता होती है। वह जैसे जैसे उन संसाधनों का अनुवाद करती है, उसने अनुभव से देखा है कि परमेश्वर उसकी आवश्यकता के अनुसार अपने वचन को उसे उन संसाधनों के द्वारा सिखाता रहता है, उसे प्रोत्साहित करता रहता है, उसे मार्गदर्शन देता रहता है। उसके जीवन की हर परिस्थिति के लिए आवश्यक सहायता उसे स्वतः ही मिलती रहती है।

   वह जब यह बात कह रही थी तो मैं सोच रहा था कि हमारा परमेश्वर कैसे हमारी सहायता अनेक प्रकार से किंतु सदा ही बड़े विश्वासयोग्य तरीके से करता रहता है। जीवन के भिन्न समयों में हमें भिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को यह आश्वासन है कि हम उन चुनौतियों का सामना कभी अपनी सामर्थ और योग्यता से नहीं करते; क्योंकि जैसा प्रभु यीशु ने कहा है, "... तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है" (मत्ती 6:8)।

   हमारी आवश्यकताओं के समय में - चाहे वे आत्मिक हों, शारीरिक हों या भावनात्मक हों - हम अपने परमेश्वर पिता की देखभाल और चिंता पूरे विश्वास तथा निश्चिंतता के साथ भरोसा रख सकते हैं। वह हमें इतनी भली भांति जानता है कि सिद्ध समय पर वह हमारे लिए जो सर्वोत्तम है वही देता है और साथ ही हमारे लिए अपनी चिंता का आश्वासन भी देता है। उसने कहा है, "क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता। वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो" (लूका 12:6-7)।

   वह जो हमारे माँगने से पहले हमारी आवश्यकताओं को जानता है और उनकी पूर्ति का इन्तज़ाम करके रखता है, हम उसके प्रेम और बुद्धिमत्ता पर पूरा भरोसा रख सकते हैं। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का समय और विधि सदा ही सही होते हैं।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-15
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Matthew 6:8 सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। 
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन। 
Matthew 6:14 इसलिये यदि तुम मनुष्य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा। 
Matthew 6:15 और यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा न करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 5-7


रविवार, 4 मई 2014

महिमा के योग्य


   सितंबर 29, 1909 को एक जवान व्यक्त ने एक अजीब डब्बे से दिखने वाले यन्त्र में उड़ान भरी। वह उस यन्त्र में लगे लीवरों के प्रयोग के द्वारा ऊंचाई पाता गया और न्यू-यॉर्क बन्दरगाह के ऊपर से उड़ान भरने लगा। लोग बड़े अचरज से उसे देख रहे थे, बन्दरगाह में उसके लिए नावों से सीटीयाँ और भौंपू बजने लगे। बन्दरगाह में लगे ’स्टैच्यु ऑफ लिबर्ट” पर खड़े लोग उसके लिए उत्साह से आनन्दित होने लगे। उड़ान भरने वाला वह व्यक्ति था विल्बर राईट।

   इस से 6 वर्ष पहले विल्बर के भाई और्विल ने संसार की सबसे प्रथम उड़ान भरी थी। उन्होंने उड़ान भरने के लिए अपनी प्रेर्णा के बारे में कहा: "उड़ान भरने का विचार हमें हमारे पूर्वजों से मिला है ... जो बड़ी ईर्ष्या से पक्षियों को आकाश की ऊँचाईयों में, हर बाधा से ऊपर, तेज़ी और सरलता से आकाश के राजमार्गों पर उड़ते हुए देखते थे।" उन राईट बन्धुओं ने, अपने हवाई जहाज़ को बनाने से पहले बहुत समय उन पक्षियों तथा उनकी उड़ान का अध्ययन करने में बिताया था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की प्रथम पुस्तक उत्पत्ति के प्रथम अध्याय में हम पढ़ते हैं कि, "आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की" (उत्पत्ति 1:1), और परमेश्वर ने कहा, "...पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें" (उत्पत्ति 1:20)। हम राईट बन्धुओं की महान उपलब्धि की दाद देते हैं; लेकिन वह सृष्टिकर्ता परमेश्वर, जिसने सर्वप्रथम ऐसे अनेक जीव बनाए जो स्वतः ही उड़ने की क्षमता रखते हैं, वह सर्वोच्च महिमा के योग्य है - अपनी अद्भुत सृष्टि और अपनी प्रत्येक विलक्षण कृति के लिए। - डेनिस फिशर


सृष्टि की रचना एक महान रचनाकार की ओर इशारा करती है।

इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:19-20

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-23
Genesis 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। 
Genesis 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। 
Genesis 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। 
Genesis 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। 
Genesis 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया। 
Genesis 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। 
Genesis 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया। 
Genesis 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया। 
Genesis 1:14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। 
Genesis 1:15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया।
Genesis 1:16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। 
Genesis 1:17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, 
Genesis 1:18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया। 
Genesis 1:20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें। 
Genesis 1:21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:22 और परमेश्वर ने यह कह के उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 
Genesis 1:23 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-4


शनिवार, 3 मई 2014

चिंता


   कुछ वर्ष पहले की बात है कि परमेश्वर के वचन बाइबल के हमारे सामूहिक अध्ययन के समय हमारे दल के अगुवे ने हम सब के सामने चुनौती रखी कि हम बाइबल से एक पूरा अध्याय कण्ठस्त करें और फिर सब लोगों के सामने खड़े होकर उसे दोहराएं। तुरंत ही अपने अन्दर ही अन्दर मैं इसका विरोध करने लगी और इसे लेकर दुखी होने लगी - एक पूरा अध्याय; कण्ठस्त; सबके सामने दोहराना - मुझे से कभी नहीं होगा क्योंकि कुछ भी कण्ठस्त कर लेना कभी भी मेरी क्षमताओं में सम्मिलित नहीं रहा था। मैं सोच सोच कर ही घबरा रही थी कि मेरी बारी आएगी, मैं हिचकिचाते हुए बोलना आरंभ करूंगी और फिर कहीं अटक कर रुक जाऊंगी, सभी लोग मेरी ओर देख रहे होंगे और मैं खामोश खड़ी कसमसा रही होऊंगी, अगले शब्द स्मरण करने और अपनी शर्मिन्दगी छुपाने के असफल प्रयास कर रही होऊंगी।

   इसके कुछ दिन के पश्चात, बड़े अनमने भाव से कोई अध्याय कण्ठस्त करने के लिए मैं अपनी बाइबल के पन्ने पलटने लगी; लेकिन स्मरण करने के लिए मुझे कुछ भी सही सूझ नहीं पड़ रहा था। फिर मैं फिलिप्पियों 4 अध्याय पर आकर रुक गई। उस अध्याय का एक पद मेरे सामने था, और मैंने उसे मन और मुँह की शान्ति के साथ ध्यान से पढ़ा, "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं" (फिलिप्पियों 4:6)। बस मुझे मिल गया था कि मुझे कौन सा अध्याय स्मरण करना है, और यह भी कि मैं कैसे अपनी ज़िम्मेदारी से संबंधित हर चिंता से बच कर निश्चिंत आगे बढ़ सकती हूँ, इस कार्य को भली भांति कर सकती हूँ।

   परमेश्वर की कद्पि यह इच्छा नहीं है कि हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहें, क्योंकि चिंता हमारे प्रार्थना के जीवन को पंगु कर देती है। प्रेरित पौलुस ने हमें लिखा है कि चिंता करने और घबराने की बजाए हमें परमेश्वर से सहायता मांगनी चाहिए। जब हम पौलुस की कही इस बात को अपनी चिंताओं पर जयवन्त होने का अपना जीवन मार्ग बना लेंगे, तब परमेश्वर की शांति हमारे मन-मस्तिष्क को स्थिर और हमें शांति में बनाए रखेगी (पद 7)।

   किसी ने कटाक्ष करते हुए कहा है, "जब हम आसानी से चिंता कर सकते हैं, तो फिर प्रार्थना में ज़ोर क्यों लगाएं?" कहने का तात्पर्य स्पष्ट है, चिंता करने से कुछ नहीं मिलता, लेकिन प्रार्थना हमें उसके संपर्क में ले आती है जो सृष्टि को चलाता है और हमारी प्रत्येक चिंता का हल दे सकता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि हमारे हाथ प्रार्थना में परमेश्वर के आगे जुड़े हुए हैं तो उन्हें चिंता में मरोड़ना असंभव है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन 55:22

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:1-9
Philippians 4:1 इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्थिर रहो।
Philippians 4:2 मैं यूओदिया को भी समझाता हूं, और सुन्‍तुखे को भी, कि वे प्रभु में एक मन रहें। 
Philippians 4:3 और हे सच्चे सहकर्मी मैं तुझ से भी बिनती करता हूं, कि तू उन स्‍त्रियों की सहयता कर, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ सुसमाचार फैलाने में, क्‍लेमेंस और मेरे उन और सहकिर्मयों समेत परिश्रम किया, जिन के नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखे हुए हैं। 
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 33-36