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गुरुवार, 15 मई 2014

दूर और निकट


   दो स्वस्थ आँखें होना ही स्पष्टता से देख पाने के लिए काफी नहीं है - यह मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभव से जाना है। मेरी आंख का पर्दा खराब हो गया था जिसके लिए मुझे कई ऑपरेशनों से होकर निकलना पड़ा। उन ऑपरेशनों के द्वारा मेरी दोनों आँखों को ठीक से दिखाई तो देने लगा, लेकिन वे दोनों परस्पर ताल-मेल के साथ कार्य नहीं कर रहीं थीं। एक आँख से दूर की चीज़ें स्पष्ट दिखती थीं तो दूसरी से पास की, और एक साथ मिलकर कार्य करने की बजाए, दोनों ही एक दूसरे पर हावी होने के प्रयास में रहती थीं, जिससे मैं किसी भी चीज़ पर दृष्टि केंद्रित कर के उसे स्पष्ट देख नहीं पाती थी। अन्ततः 3 महीने के अंतराल के बाद मुझे एक नया चश्मा दिया गया जिसकी सहायता से मैं दृष्टि केंद्रित कर के स्पष्ट देखने पाई।

   कुछ ऐसा ही परमेश्वर के प्रति हमारे दृष्टिकोण के साथ भी होता है। कुछ लोग परमेश्वर को निकटता से जान पाने पर ही - अर्थात उसे अपने प्रतिदिन के जीवन में निकटता से स्क्रीय अनुभाव कर के ही उस पर अपना ध्यान केंद्रित करने पाते हैं। अन्य लोगों को दूर का परमेश्वर ही स्पष्ट दिखाई देता है - अर्थात वे उसे किसी भी सोच-विचार से ऊपर और महान, सारी सृष्टि पर सामर्थी, प्रभावी और महिमामय जान कर ही उस पर केंद्रित रहने पाते हैं।

   जब इन दोनों दृष्टिकोणों में विवाद हो और सहमति नहीं बने, तब परमेश्वर का वचन बाइबल ही मेरे उस चश्मे के समान कार्य करती है, दोनों दृष्टिकोणों में तालमेल बनाती है और यह दिखाती है कि दोनों ही दृष्टिकोण सही हैं। राजा दाऊद ने अपने लिखे भजन - भजन 145 में दोनों ही दृष्टिकोणों को रखा है। वह कहता है: "यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है" (पद 3); और फिर यह भी कि, "जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है" (पद 18)।

   हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमारे इतना निकट है कि हमारी हर दशा को जानता है और हमारी हर प्रार्थना को सुनता है; लेकिन साथ ही इतना महान, महिमामय और सामर्थी है कि हमारी हर समस्या एवं आवश्यकता से कहीं बड़ा और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखने वाला है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर इतना बड़ा है कि हमारी छोटी से छोटी आवश्यकता को समझ सकता है, उसे पूरा कर सकता है।

देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? - व्यवस्थाविवरण 4:7

बाइबल पाठ: भजन 145
Psalms 145:1 हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा। 
Psalms 145:2 प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा। 
Psalms 145:3 यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है। 
Psalms 145:4 तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा। 
Psalms 145:5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा। 
Psalms 145:6 लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा। 
Psalms 145:7 लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण कर के उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे। 
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। 
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे! 
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे; 
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें। 
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी। 
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है। 
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है। 
Psalms 145:17 यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है। 
Psalms 145:18 जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 
Psalms 145:19 वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है। 
Psalms 145:20 यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है। 
Psalms 145:21 मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 5-7


बुधवार, 14 मई 2014

जीवन का जल


   एक व्यक्ति ने, जो पश्चिमी टेक्सस के एक खेती-किसानी करने वाले परिवार में बड़ा हुआ था, मुझे अपने खलिहान के निकट लगी एक जर्जर पवन-चक्की के बारे में बताया था। उस पवन-चक्की के चलने से ही पानी को उसके घर तक लाने का पंप चलता था, और वही मीलों दूर तक पानी का एकमात्र स्त्रोत थी। जब हवा तेज़ चल रही होती थी तो वह पवन-चक्की भलि-भांति चलती थी और अच्छे से पानी उपलब्ध कराती थी, परन्तु जब हवा धीमी होती थी तो जर्जर अवस्था के कारण पवन-चक्की घूम कर हवा के रुख के अनुकूल अपने आप नहीं हो पाती थी इसलिए नहीं चल पाती थी; तब उसे हाथ से घुमा कर ऐसी स्थिति में लाना पड़ता जहाँ से हवा द्वारा उसके पंखे चल सकें और पानी के पंप को चला सकें जिससे घर को पानी मिल सके। पानी मिलने के लिए पवन-चक्की का हवा के अनुकूल दिशा में होना अनिवार्य था।

   जब मैं दूर-दराज़ के इलाकों में कार्य कर रहे पस्टरों से मिलता हूँ, और उनकी सनस्याएं सुनता हूँ तो मुझे उस पवन-चक्की की याद आती है। बहुत से पास्टर ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि वे बिलकुल अकेले और बेसहारा रह गए हैं - ऐसे देख-रेख करने वाले जिनकी अपनी देख-रेख करने वाला कोई नहीं है। परिणाम यह होता है कि अपनी निराश के कारण वे अपने चर्च के लोगों को जीवन का जल अर्थात परमेश्वर का वचन ठीक से नहीं देने पाते। उन्हें मैं उस पवन-चक्की के बारे में बताता हूँ, और समझाता हूँ कि उन्हें भी अपने आप को ऐसी स्थिति में लाना है, अर्थात प्रभु यीशु और उसके वचन की ओर उन्मुख होना है जिससे उनमें से होकर परमेश्वर का वचन लोगों तक पहुँच सके। जब वे परमेश्वर की ओर सही रीति से होंगे, तब परमेश्वर उन में होकर अपने जीवनदायक वचन को लोगों तक भी पहुँचा सकेगा।

   जो बात उन पास्टरों के लिए सही है, वही हम सब मसीही विश्वासियों के लिए भी उतनी ही सही है, क्योंकि प्रभु की सेवकाई हमारे अन्दर से निकल कर संसार के लोगों में प्रवाहित होती है। प्रभु यीशु ने कहा, "जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (यूहन्ना 7:38)। जब परमेश्वर हमारे अन्दर की गहराइयों से होकर बोलता है, तब ही हम दूसरों के जीवनों को छूने और प्रभावित करने पाते हैं। दूसरों को तरोताज़ा करते रहने के लिए हमें स्वयं भी उस जीवन के जल के स्त्रोत के साथ सही रीति से जुड़े रहना है। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों में थकने लगें तो प्रभु यीशु को अपनी सामर्थ का स्त्रोत बना लीजिए।

यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। - यूहन्ना 4:10

बाइबल पाठ: गलतियों 6:6-10
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 1-4


मंगलवार, 13 मई 2014

चिंता


   आँकड़े पेचीदा होते हैं, वे हमें जानकारी तो देते हैं, लेकिन कभी कभी वे हमें उन लोगों के प्रति संवेदनविहीन भी बना देते हैं जिनकी जानकारी वे हमें दे रहे हैं। मुझे इस बात का एहसास अभी हाल ही में हुआ जब मैंने एक जानकारी देने वाला आँकड़ा पढ़ा: संसार भर में प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ लोग भूख से मर जाते हैं। यह कंपकंपा देने वाली बात है, और उनके लिए जो बहुतायत के समाज में रहते हैं इसे समझना कठिन है। संसार भर में लाखों बच्चे अपने पाँचवे जन्म दिन से पहले ही मर जाते हैं, और इन मौतों में से एक तिहाई भूख के कारण होती हैं। ये संख्याएं स्तब्ध कर देने वाली हैं, लेकिन ये आंकड़ों से बढ़कर भी कुछ हैं - ये मनुष्य हैं, वे मनुष्य जिन्हें परमेश्वर ने बनाया, जिनके उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र को बलिदान किया और जिनसे परमेश्वर उतना ही प्रेम करता है जितना वह मुझ से और आप से करता है।

   परमेश्वर पिता के इस प्रेम को हम उन लोगों तक पहुँचा सकते हैं, उन लोगों की सहायता करने तथा उनकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक होने के द्वारा। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "जो कंगाल पर अंधेर करता, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है, परन्तु जो दरिद्र पर अनुग्रह करता, वह उसकी महिमा करता है" (नीतिवचन 14:31)। स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा इन ज़रूरतमंद लोगों की सहायता के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में स्वयंसेवक बनकर, उन लोगों के लिए नौकरी की तलाश करने में उनकी सहायता कर के, उन्हें कोई रोज़गार कमाने की कला सिखा कर, स्कूल जाने वाले गरीब बच्चों के लिए भोजन का प्रबन्ध कर के, भूख से पीड़ित लोगों के लिए भोजन सामग्री दान कर के, जहाँ स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है उनके लिए स्वच्छ जल के कुएँ खोदने के लिए आर्थिक सहायाता देकर, इत्यादि ऐसे अनेक तरीके हैं जिनके द्वारा हम उन के सहायक हो सकते हैं और वह प्रेम जो परमेश्वर ने हम से किया है, उसकी अनुभूति उन्हें भी करवा सकते हैं।

   इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने का बीड़ा उठा कर हम परमेश्वर के उनके प्रति प्रेम का आदर करते हैं, उनके लिए उसकी चिंता और देख-रेख में संभागी होते हैं। यह सहायता करना का एक और कारण से भी हम मसीही विश्वासियों के लिए आवश्यक है - जब भूख से कुलबुला रहे पेट और अंतड़ियों का शोर उन लोगों पर हावी नहीं होगा तो शायद प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा और सेंत-मेंत उद्धार का सुसमाचार वे लोग बेहतर सुन और समझ भी सकेंगे। - बिल क्राउडर


हम अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम को जितना अधिक समझने पाएंगे, उतना ही उसे दूसरों को पहुँचाने का प्रयास भी करेंगे।

जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा। - नीतिवचन 19:17

बाइबल पाठ: मत्ती 25:31-46
Matthew 25:31 जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। 
Matthew 25:32 और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। 
Matthew 25:33 और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाई और खड़ी करेगा। 
Matthew 25:34 तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। 
Matthew 25:35 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया। 
Matthew 25:36 मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए। 
Matthew 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया? 
Matthew 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए? 
Matthew 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? 
Matthew 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। 
Matthew 25:41 तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। 
Matthew 25:42 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया। 
Matthew 25:43 मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहिनाए; बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि न ली। 
Matthew 25:44 तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की? 
Matthew 25:45 तब वह उन्हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया। 
Matthew 25:46 और यह अनन्त दण्‍ड भोगेंगे परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 8-10


सोमवार, 12 मई 2014

पुकारें


   कातुशिका होकुसई जापान के इतिहास के सबसे यशस्वी और बहुतायत से चित्र बनाने वाले कलाकारों में गिने जाते हैं। सन 1826 से सन 1833 तक, जब उनकी आयु मध्य 60 तथा आरंभिक 70 के मध्य थी, उन्होंने अपने सबसे विख्यात कृति बनाई - लकड़ी के सांचों से रंगीन चित्रों की श्रंखला जिसका शीर्षक था, फूजी पर्वत के 36 दृश्य। इन चित्रों में से एक जो बहुत विख्यात हुआ वह था "The Great Wave off Kanagaawa" (कानागावा तट के निकट विशाल लहर)। उन्होंने यह चित्र उस समय बनाया जब वे आर्थिक और भावनात्मक संघर्ष के दौर से हो कर निकल रहे थे। इस चित्र में एक बहुत ऊँची दीवार के समान समुद्र की लहर दिखाई गई है, लहर के सिरे पर पंजों के समान दिखने वाला फेन है जो कि लहर के नीचे यात्रियों से भरी तीन छोटी नावों पर गिरने को तैयार है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 में भी समुद्र के जोखिम में फंसे लोगों का वर्णन दिया है। वे लहरों पर तैरते हुए एक पल में आकाश की ऊँचाईयों पर तो दुसरे ही पल में समुद्र की गहराईयों में उतर आते हैं, जिससे उनके जी में जी नहीं रहता। तब वे सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारते हैं, परमेश्वर उनकी पुकार सुनकर लहरों को शान्त करता है और उन्हें उनके गन्तव्य तक सुरक्षित पहुँचा देता है।

   जब हम जीवन कि कठिनाईयों का सामना कर रहे होते हैं तो सहायता, मार्गदर्शन और सांत्वना के लिए हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रीया अन्य मनुष्यों की ओर देखने की होती है। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि वे मनुष्य भी तो हमारे समान ही जीवन की परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं, उन्हें भी हमारे समान ही कठिनाईयों और जोखिमों का सामना करना होता है। केवल परमेश्वर ही है जो जीवन रूपी नाव और परिस्थितियों रूपी समुद्र से बाहर है, उनके ऊपर है, तथा उन पर नियंत्रण रखने की सामर्थ रखता है। वह ही है जो परिस्थितियों के समुद्र को शांत कर के हमें गन्तव्य तक भली भांति पहुँचा सकता है। क्या आप भी जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं? परमेश्वर प्रभु यीशु को विश्वास के साथ पुकारें, अपने जीवन की बाग-डोर उसके हाथ में सौंप दें और निश्चिंत हो जाएं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हम उस परमेश्वर की आराधना करते हैं जो हमारी हर समस्या से बड़ा है तथा हमारे जीवन की हर बात को नियंत्रित कर सकता है।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 4-7


रविवार, 11 मई 2014

प्रभावशाली महिला


   सोलहवीं शताबदी में योरप में हुए प्रोटेस्टेन्ट धर्म सुधार के आरंभिक दिनों में रोमन कैथोलिक मत से निकल कर आने वाली एक सन्यासिन कैथरीन वॉन बोरा का विवाह धर्म सुधार के अग्रणीय, विटिनबर्ग में रहने वाले मार्टिन लूथर से हुआ। उनका यह विवाह हर रीति से एक आनन्दमय पारिवारिक जीवन और पारस्परिक संबंध का जीवन था। लूथर ने अपने अनुभव के आधार पर लिखा, "संसार के संबंधों में भले विवाह संबंध से बढ़कर मधुर और कोई संबंध नहीं है, और जीवन साथी से बिछुड़ने से अधिक कटु कोई अनुभव नहीं है"।

   क्योंकि कैथरीना प्रति प्रातः 4 बजे उठकर अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह आरंभ कर देती थी, इसलिए लूथर उसे "विटिनबर्ग का भोर का तारा" कहते थे। कैथरीना अपने घर के फल और सबज़ी के बागीचे की मेहनत के साथ देख-रेख करती थी। वह पारिवारिक व्यवसाय, लूथर परिवार के घर और ज़ायदाद की भी उतनी ही मेहनत और लगन से देख-भाल करती थी। समय के साथ लूथर और कैथरीना के छः बच्चे भी हुए, जिनके लिए कैथरीना का मानना था कि उनके चरित्र निर्माण की पाठशाला उनका अपना घर ही है और वह इस ज़िम्मेदारी को भी उतनी ही लगन के साथ निभाती थी। कैथरीना की इस भली विचारधारा, मेहनत और लगन ने उसे वास्तव में एक बहुत प्रभावशाली महिला बना दिया था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की नीतिवचन पुस्तक के 31वें अध्याय में एक उत्तम गृहणी के चरित्र का वर्णन दिया है; कैथरीना उसी वर्णन के अनुसार अपने आप को चलाने वाली महिला थी। जो जो गुण बाइबल में दी गई उस महिला के जीवन में पाए जाते हैं, कैथरीना उन्हीं के अनुसार प्रातः होने से पहले ही उठ कर अपने घराने के लिए भोजन और परिवार की देखभाल के लिए मेहनत किया करती थी।

   कैथरीना जैसी प्रभावशाली महिलाओं के जीवनों से हम परमेश्वर के भय में जीना, हर संबंध को सच्चे प्रेम से निभाना और हर ज़िम्मेदारी को पूरी कर्मठता के साथ पूरा करना सीख सकते हैं। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के भय में चलने वाली भली माताएं ना केवल शब्दों द्वारा जीवन जीना सिखाती हैं, वरन अपने जीवनों के उदाहरण से उसे जी कर भी दिखाती हैं।

हर बुद्धिमान स्त्री अपने घर को बनाती है, पर मूढ़ स्त्री उसको अपने ही हाथों से ढा देती है। - नीतिवचन 14:1

बाइबल पाठ: नीतिवचन 31:10-31
Proverbs 31:10 भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उस के पति के मन में उस के प्रति विश्वास है। 
Proverbs 31:11 और उसे लाभ की घटी नहीं होती। 
Proverbs 31:12 वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है। 
Proverbs 31:13 वह ऊन और सन ढूंढ़ ढूंढ़ कर, अपने हाथों से प्रसन्नता के साथ काम करती है। 
Proverbs 31:14 वह व्यापार के जहाजों की नाईं अपनी भोजन वस्तुएं दूर से मंगवाती हैं। 
Proverbs 31:15 वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है और अपनी लौण्डियों को अलग अलग काम देती है। 
Proverbs 31:16 वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है। 
Proverbs 31:17 वह अपनी कटि को बल के फेंटे से कसती है, और अपनी बाहों को दृढ़ बनाती है। 
Proverbs 31:18 वह परख लेती है कि मेरा व्यापार लाभदायक है। रात को उसका दिया नहीं बुझता। 
Proverbs 31:19 वह अटेरन में हाथ लगाती है, और चरखा पकड़ती है। 
Proverbs 31:20 वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र के संभालने को हाथ बढ़ाती है। 
Proverbs 31:21 वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं। 
Proverbs 31:22 वह तकिये बना लेती है; उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं। 
Proverbs 31:23 जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है। 
Proverbs 31:24 वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है; और व्योपारी को कमरबन्द देती है। 
Proverbs 31:25 वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है। 
Proverbs 31:26 वह बुद्धि की बात बोलती है, और उस के वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं। 
Proverbs 31:27 वह अपने घराने के चाल चलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती। 
Proverbs 31:28 उसके पुत्र उठ उठ कर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठ कर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है: 
Proverbs 31:29 बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है। 
Proverbs 31:30 शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी। 
Proverbs 31:31 उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-3


शनिवार, 10 मई 2014

क्षमा याचना


   मार्क से गलती हो गई। उसे रेस्टोरन्ट में एक मित्र से मिलना था और वह निर्धारित समय से एक घंटा विलम्ब से पहुँचा, तब तक उसका मित्र उसकी प्रतीक्षा करने के बाद वहाँ से जा चुका था। अपनी गलती के लिए शर्मिंदा होते हुए मार्क ने एक उपहार खरीदा और फिर एक स्थानीय दुकान से क्षमा याचना व्यक्त करने वाला एक कार्ड खरीदने गया। विभिन्न प्रकार और अवसरों के लिए प्रयोग में आने वाले अनेकों कार्डों में मार्क को क्षमा याचना का कार्ड ढूँढ़ पाना कठिन हो गया। आखिरकर उसे कुछ कार्ड मिले, जो उस दुकान के एक कोने में अप्रत्यक्ष से रखे हुए थे। उसने एक कार्ड लिया, उसे अपने उपहार के साथ लगा कर अपने मित्र को दिया, जिसने उसकी क्षमा याचना स्वीकार कर ली।

   चाहे क्षमा याचना कार्ड मिलना आसान ना भी हो, तो भी हमारे संबंधों मे क्षमा याचना की आवश्यकता बहुधा होती ही है। क्षमा याचना करना परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के अनुरूप है। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को सिखाया कि वे आगे बढ़कर उन लोगों के साथ, जिन्हें उन से कोई ठोकर लगी हो, अपने संबंध ठीक करें (मत्ती 5:23-24; 18:15-20)। प्रेरित पौलुस में होकर परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने लिखवाया: "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों 12:18); ऐसा कर पाने के लिए क्षमा याचना करने का मन रखना अनिवार्य है।

   लेकिन क्षमा याचना करना सामन्यतः लोगों को बहुत कठिन लगता है, क्योंकि ऐसा करने के लिए सबसे पहले एक विनम्र हृदय होना आवश्यक है, तब ही हम अपनी गलती को मानने वाले और सच्चे मन से किसी से क्षमा माँगने वाले बन सकते हैं; और यह मनुष्य का स्वाभाविक व्यावहार नहीं है। प्रभु यीशु से मिलने वाली पापों की क्षमा और उसको किया गया जीवन समर्पण हमारे अहंकारी स्वभाव को विनम्र बनाता है और हमें क्षमा याचना करने वाला बनाता है। जहाँ क्षमा याचना और क्षमा प्राप्ति है, वहाँ संबंधों में कटुता बनी नहीं रह सकती, और संबंधों की बहाली स्वाभाविक हो जाती है।

   क्या आप से किसी के प्रति कोई गलती हुई है? अपने अहम को आड़े ना आने दें, परमेश्वर के सामने इस बात को मान लें और उससे बात ठीक करने के लिए सहायता माँगें। फिर विनम्र होकर आगे बढ़ें और उस जन से क्षमा याचना करें, चाहे आपके पास क्षमा याचना का कार्ड ना भी हो। परमेश्वर की सहायता और आपकी सच्चे प्रयास से संबंध बहाल हो जाएंगे। - ऐनी सेटास


अन्तिम बात कहने का सबसे अच्छा तरीका है क्षमा याचना।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: मत्ती 5:21-26
Matthew 5:21 तुम सुन चुके हो, कि पूर्वकाल के लोगों से कहा गया था कि हत्या न करना, और जो कोई हत्या करेगा वह कचहरी में दण्‍ड के योग्य होगा। 
Matthew 5:22 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई अपने भाई पर क्रोध करेगा, वह कचहरी में दण्‍ड के योग्य होगा: और जो कोई अपने भाई को निकम्मा कहेगा वह महासभा में दण्‍ड के योग्य होगा; और जो कोई कहे “अरे मूर्ख” वह नरक की आग के दण्‍ड के योग्य होगा। 
Matthew 5:23 इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे। 
Matthew 5:24 और जा कर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर; तब आकर अपनी भेंट चढ़ा। 
Matthew 5:25 जब तक तू अपने मुद्दई के साथ मार्ग ही में हैं, उस से झटपट मेल मिलाप कर ले कहीं ऐसा न हो कि मुद्दई तुझे हाकिम को सौंपे, और हाकिम तुझे सिपाही को सौंप दे और तू बन्‍दीगृह में डाल दिया जाए। 
Matthew 5:26 मैं तुम से सच कहता हूं कि जब तक तू कौड़ी कौड़ी भर न दे तब तक वहां से छूटने न पाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-13


शुक्रवार, 9 मई 2014

महिमामय तथा उपयोगी


   मेरे नाती-पोते रंगीन लेगो के साथ खेलना बहुत पसन्द करते हैं। लेगो के उन छोटे छोटे कई भिन्न रंगों के आकारों को आपस में जोड़ कर किले, हवाई जहाज़, घर आदि कुछ भी दिए गए निर्देशों के अनुसार बनाया जा सकता है। लेगो से खेलने के लिए वे बच्चे खिलौने के डिब्बे को ज़मीन पर उलट कर सभी आकारों को बाहर निकाल लेते हैं, और फिर निर्देश पुस्तिका में दी गई किसी चीज़ को बनाने लग जाते हैं। लेकिन शीघ्र ही बजाए दिए गए निर्देशों का पालन करते रहने के, वे अपनी समझ और इच्छानुसार बनाना आरंभ कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ ही देर में बनाई जा रही वह चीज़ बिगड़ जाती है, और उन्हें सारे आकारों को अलग अलग करके फिर से बनाना आरंभ करना पड़ता है - लेकिन इस बार वे निर्देशों का ध्यान भी करते रहते हैं।

   क्या आज आप अपने जीवन को सुचारू रूप से चलता हुआ पाने की बजाए उसे अस्त-व्यस्त पाते हैं? यदि ऐसा है तो आपको भी अपने जीवन को परमेश्वर के नियमों के अनुसार सुधारने और पुनः बनाने की आवश्यकता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा है कि प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन की नेंव प्रभु यीशु मसीह है, और हम सब को ध्यान देना है कि हम उस नेंव पर कैसे निर्माण कर रहे हैं (1 कुरिन्थियों 3:10-11)। प्रभु ने हमारे लिए कुछ निर्देश भी दिए हैं जिनके अनुसार ही हमें अपने जीवनों को उसकी महिमा और उपयोगिता के लिए बनाना है। 

ये निर्देश हैं:
- नम्रता पूर्वक दूसरों की सेवा करते हुए उन्हें अपने से बढ़कर समझो (फिलिप्पियों 2:3-4);
- ज़रूरतमन्दों को अपने संसाधनों में से उदारता पूर्वक दो (याकूब 2:14-17);
- जो आपके साथ बुराई भी करें उनके साथ भी प्रेम पूर्वक व्यवहार करो (रोमियों 12:14-21);

ये अपने जीवन को भलि-भांति परमेश्वर के लिए महिमामय तथा उपयोगी (1 कुरिन्थियों 3:16) बनाने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उसके निर्देशों में से कुछ निर्देश हैं, जिनका पालन द्वारा हमारी अपनी तथा अन्य लोगों की भलाई होती है। - जो स्टोवैल

जीवन संवारने तथा बनाने के लिए बाइबल परमेश्वर की ओर से दिया हुआ मार्गदर्शक एवं नक्षा है।

और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो। - इफिसियों 2:20-22

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:9-17
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:11 क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 
1 Corinthians 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। 
1 Corinthians 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते। 
1 Corinthians 3:16 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 
1 Corinthians 3:17 यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9