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शनिवार, 30 अगस्त 2014

सच्चा धन


   हम लोग छुट्टियाँ बिताने अलास्का गए हुए थे, और वहाँ फेयरबैंक्स के निकट प्रसिद्ध एल डोराडो सोने की खान देखने गए। उस स्थान पर हमें भ्रमण करवाने और जब वह खान आरंभ हुई थी तब लोगों द्वारा सोना निकालने के तरीकों को दिखाने के बाद, हम को एक तश्तरी, और कंकर-मिट्टी से भरा एक बोरा दिया गया जिसको छान कर हमें उसमें मिले सोने के कणों को खोजने का प्रयास करना था। बोरे में से कंकर-मिट्टी लेकर हम तश्तरी में डालने लगे और बहते पानी के नीचे उसे हिला-हिला कर निथारने लगे जिससे मिट्टी तो बह जाए पर सोने के भारी कण नीचे तश्तरी के तले पर बैठ जाएं। यद्यपि यह करने की विधि हमें विशेषज्ञों ने दिखाई और सिखाई थी, लेकिन हम कुछ खास करने नहीं पाए; कारण? इस डर से कि कहीं हम कुछ मूल्यवान ना गवाँ दें, हम व्यर्थ के कंकरों को फेंकने से बहुत हिचकिचा रहे थे।

   बाद में इस घटना के बारे में सोचते हुए मुझे बोध हुआ कि ऐसे ही हम कितनी ही व्यर्थ साँसारिक बातों को अपने जीवन में लगाए रहते हैं और इस कारण सच्चे मूल्य की अनेक बातों को पाने नहीं पाते। प्रभु यीशु के पास एक जवान व्यक्ति आया, जिसके जीवन में यह सत्य जाता था। उस व्यक्ति के लिए उसकी नाशमान साँसारिक धन-संपत्ति उसे मिलने वाले अविनाशी आत्मिक खज़ानों से अधिक मूल्यवान थी (लूका 18:18-30)। उसके इस रवैये को देख प्रभु यिशु ने टिप्पणी करी, "...धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है" (पद 24)।

   धन अपने आप में बुरा नहीं है, लेकिन यदि धन को लेकर हमारा दृष्टिकोण सही नहीं है और धन का संचय ही हमारे जीवन का उद्देश्य बन गया है, तो फिर वह हमें सच्चे मूल्य की वस्तुओं को जमा करने से रोकेगा। संसार की नाशमान धन-संपत्ति जमा करने के प्रयास में समय गंवाना मूर्खता है, क्योंकि यह साँसारिक धन-संपत्ति नहीं वरन प्रभु यीशु मसीह में हमारा सच्चा विश्वास ही है जो हमें परीक्षाओं में सुरक्षित रखेगा और अन्ततः हमारे लिए प्रशंसा एवं आदर तथा हम में होकर परमेश्वर के लिए महिमा का कारण ठहरेगा (1 पतरस 1:7)।

   आज आपके लिए सच्चा धन क्या है; और आप उसे कहाँ जमा कर रहे हैं? कहीं नाशमान साँसारिक धन के पीछे आप अविनाशी खज़ाने गंवाने में तो नहीं लगे हैं? - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपनी नज़रें प्रभु यीशु पर लगाए रखिए; तब साँसारिक धन-संपत्ति की चका-चौंध आपकी आँखों को आत्मिक खज़ानों के प्रति अन्धा करने नहीं पाएगी।

और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। - 1 पतरस 1:7 

बाइबल पाठ: लूका 18:18-30
Luke 18:18 किसी सरदार ने उस से पूछा, हे उत्तम गुरू, अनन्‍त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Luke 18:19 यीशु ने उस से कहा; तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक, अर्थात परमेश्वर।
Luke 18:20 तू आज्ञाओं को तो जानता है, कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना, और चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Luke 18:21 उसने कहा, मैं तो इन सब को लड़कपन ही से मानता आया हूं। 
Luke 18:22 यह सुन, यीशु ने उस से कहा, तुझ में अब भी एक बात की घटी है, अपना सब कुछ बेच कर कंगालों को बांट दे; और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Luke 18:23 वह यह सुनकर बहुत उदास हुआ, क्योंकि वह बड़ा धनी था। 
Luke 18:24 यीशु ने उसे देख कर कहा; धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है? 
Luke 18:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है। 
Luke 18:26 और सुनने वालों ने कहा, तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Luke 18:27 उसने कहा; जो मनुष्य से नहीं हो सकता, वह परमेश्वर से हो सकता है। 
Luke 18:28 पतरस ने कहा; देख, हम तो घर बार छोड़कर तेरे पीछे हो लिये हैं। 
Luke 18:29 उसने उन से कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं जिसने परमेश्वर के राज्य के लिये घर या पत्‍नी या भाइयों या माता पिता या लड़के-बालों को छोड़ दिया हो। 
Luke 18:30 और इस समय कई गुणा अधिक न पाए; और परलोक में अनन्त जीवन।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42


शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

भरपेट


   एक मित्र ने, जो सिंगापुर में रहता है, एक पुराने चीनी अभिवादन के बारे में बताया। यह पूछने की बजाए कि "आप कैसे हैं?" लोग पूछते "क्या आपने भरपेट भोजन किया?" संभवतः यह अभिवादन उस समय आरंभ हुआ था जब लोगों के पास भोजन की कमी थी और बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता था कि उन्हें अगला भोजन कब मिलेगा। जब भी भोजन उपलब्ध होता तब भरपेट भोजन कर लेने में ही बुद्धिमानी होती थी।

   प्रभु यीशु के 5000 से अधिक लोगों को दो मछली और पाँच रोटी से भरपेट भोजन कराने के पश्चात (यूहन्ना 6:1-13), वह भीड़ प्रभु यीशु के पीछे पीछे आई, क्योंकि उन्हें और भोजन मिलने की आशा थी (पद 24-26)। तब उस भीड़ से प्रभु यीशु ने कहा कि वे शारीरिक नहीं वरन आत्मिक भोजन के लिए मेहनत करें, उसकी लालसा रखें, जो उन्हें प्रभु यीशु से ही मिल सकता था: "नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। ... यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा" (यूहन्ना 6:27; 35)।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सहायाता करें जिनके पास शारीरिक भोजन नहीं है लेकिन उससे भी बढ़कर उन्हें उस आत्मिक भोजन के बारे में बताएं जो उन्हें भीतरी शान्ति, पाप क्षमा और अनन्त जीवन प्रदान कर सकता है, अर्थात प्रभु यीशु मसीह।

   जीवन की रोटी, प्रभु यीशु मसीह आज हमें निमंत्रण दे रहा है कि हम उसके पास आएं और अपनी आत्मा की हर भूख को उससे तृप्त करें, उससे भरपेट खाएं। - डेविड मैक्कैसलैंड


आत्मा की प्रत्येक भूख को केवल प्रभु यीशु ही तृप्त कर सकता है।

जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस(शरीर) है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:24-35
John 6:24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न यीशु है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के यीशु को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे। 
John 6:25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया? 
John 6:26 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्‍त हुए। 
John 6:27 नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। 
John 6:28 उन्होंने उस से कहा, परमेश्वर के कार्य करने के लिये हम क्या करें? 
John 6:29 यीशु ने उन्हें उत्तर दिया; परमेश्वर का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उसने भेजा है, विश्वास करो। 
John 6:30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है? 
John 6:31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उसने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी। 
John 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है। 
John 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है। 
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर। 
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39


गुरुवार, 28 अगस्त 2014

जोश और आनन्द


   ग्यारह वर्ष पहले, आज ही के दिन, हमारा एक अच्छा मित्र दोपहर के भोजन के अवकाश में हल्की दौड़ लगाने के लिए बाहर गया, और फिर लौट कर वापस नहीं आया। कर्ट डी हॉन, जो उस समय इस पुस्तिका, Our Daily Bread के प्रबन्धन संपादक थे, उस धूप की चमक और गर्मी से भरे गुरुवार की दोपहर को हृदय-आघात का शिकार हो गए। हम में से जिन लोगों ने उनके साथ तब कार्य किया था, आज भी उनकी यादगार में उनकी कुछ निशानियाँ रखे हुए हैं।

   उदाहरणस्वरूप, मेरे दफ्तर की एक दीवार पर मैंने कर्ट से मुझे मिला अन्तिम ज्ञापन फ्रेम करके लगा रखा है। वह आज भी मुझे उनके संपादक के रूप में पूरी देख-रेख से कार्य करने की प्रवृति को याद दिलाता है - सदा इस प्रयास में संलग्न कि परमेश्वर का वचन भलि-भाँति तथा बिल्कुल सही रीति से प्रस्तुत किया जाए। मेरी एक अन्य सहयोगी ने वह कागज़ की गेंद लगा रखी है जो कर्ट ने उसकी ओर हंसी-मज़ाक करते हुए उछाली थी; वह गेंद स्मरण दिलाती है कि मुस्तैदी के साथ कार्य करते हुए भी कर्ट जीवन का आनन्द लेते रहने में कितना विश्वास रखता था।

   जब कभी हम कर्ट के बारे में बात करते हैं, हमें एहसास होता है कि हमें उनकी कमी कितनी अखरती है। हम उनके सुखद व्यक्तित्व के साथ उनकी उत्तमता प्राप्त करने की लालसा को स्मरण करते हैं। वे बड़ी मेहनत के साथ कार्य करते थे और जीवन से प्रेम करते थे। वे परमेश्वर के वचन को खराई के साथ सिखाने तथा जीवन को आनन्द के साथ जीने में विश्वास रखते थे।

   कर्ट तथा उनके जीवन के उदाहरणों को स्मरण करना तरोताज़गी भी देता है और चुनौती भी। वह हमें स्मरण दिलाता है कि हमारे प्रत्येक कार्य एवं बात को लोग देख रहे हैं और आँकलन कर रहे हैं कि हम प्रभु यीशु के लिए आनन्द के साथ हमारी निर्धारित सेवकाई कर रहे हैं कि नहीं (इफिसियों 2:10)। कर्ट के समान ही, जोश और आनन्द, क्या ये दो शब्द प्रभु यीशु के लिए आपकी भी सेवकाई को परिभाषित करते हैं? - डेव ब्रैनन


चिर स्थाई आनन्द के लिए प्रभु यीशु को सदा सर्वोपरि रखें।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! 
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! 
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो! 
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 33-36


बुधवार, 27 अगस्त 2014

नया सामान्य


   एक पास्टर ने, जिसने शारीरिक एवं मानसिक रीति से घायल होने वालों को सांत्वना और शान्ति प्रदान करने का प्रशिक्षण लिया था, टिप्पणी करी कि घायल लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस समय की चोट या हानि का दुख नहीं होता। इसकी बजाए, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है आगे आने वाले जीवन के साथ ताल-मेल बैठाना। जो पहले उनके लिए सामान्य होता था, वह अब नहीं रहा, इसलिए जो उनकी सहायता कर रहे हैं उन्हें उन आहत व्यक्तियों को एक नया सामान्य बैठाने में सहायक होना पड़ता है।

   हो सकता है कि यह नया सामान्य वहाँ हो जहाँ अब वे पहले के समान स्वस्थ एवं हृष्ट-पुष्ट नहीं रह सकते, या किसी निकट संबंधी का साथ जाता रहा हो, या किसी सन्तोषजनक नौकरी से हाथ धोना पड़ा हो, या किसी प्रीय जन की मृत्यु का विछोह हो, इत्यादि। ऐसी हानि के दुख की गंभीरता लोगों को पहले के जीवन से एक अलग ही प्रकार का जीवन व्यतीत करने पर मजबूर करती है, चाहे वह नया जीवन जीना उन्हें कितना भी नापसन्द क्यों ना हो।

   जिस व्यक्ति के समक्ष यह नया सामान्य आता है, उसके लिए यह समझ बैठना कि कोई भी उसकी परिस्थिति भली-भाँति नहीं समझ सकता, साधारण बात है। लेकिन यह सत्य नहीं है; प्रभु यीशु के हम मनुष्यों के साथ आकर जीवन व्यतीत करने के उद्देश्यों में से एक था हमारे जीवन और दुखों को व्यक्तिगत अनुभवों से जानना, जो उसकी वर्तमान सेवकाई में सहायक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री का लेखक प्रभु यीशु के विषय में लिखता है: "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों 4:15)।

   हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने पवित्रता का एक सिद्ध जीवन जीया, लेकिन वह पाप में पड़े संसार के लोगों के दुखों को भी जानता था। उसने हम लोगों के समान ही दुख उठाया, तिरिस्कृत हुआ, पीड़ा सही। इसलिए आज जब मैं और आप ऐसे अन्धकार भरे समयों से होकर निकलते हैं तो वह हमें सान्तवना और अपनी शान्ति देने तथा एक नये सामान्य को बनाने में सहायता करने के लिए तैयार एवं उपलब्ध है। - बिल क्राउडर


दुख के सागर में प्रभु यीशु आशा की स्थिर चट्टान है।

क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है। - इब्रानियों 2:18 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:9-16
Hebrews 4:9 सो जान लो कि परमेश्वर के लोगों के लिये सब्त का विश्राम बाकी है। 
Hebrews 4:10 क्योंकि जिसने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उसने भी परमेश्वर की नाईं अपने कामों को पूरा कर के विश्राम किया है। 
Hebrews 4:11 सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े। 
Hebrews 4:12 क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। 
Hebrews 4:13 और सृष्‍टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं।
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। 
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। 
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-32


मंगलवार, 26 अगस्त 2014

उपलब्ध


   मेरे पिता को पेपर मिल से उनकी सेवा-निवृति के समय उपहार में एक बाइबल दी गई थी। वह बाइबल देवदार की लकड़ी से बने एक विशेष डिब्बे में रखी गई थी जिस पर छापा हुआ था "पवित्र बाइबल"। उस समय मेरी उम्र 12 वर्ष की थी, और उस बाइबल को लेकर मेरे अन्दर कौतहूल रहता था। मुझे लगता था कि उस पर लिखे "पवित्र" से तात्पर्य है कि मैं उसके योग्य नहीं हूँ। लेकिन फिर भी अपनी जिज्ञासा शान्त करने के लिए मैंने उस डिब्बे में झांक कर, उस बाइबल को खोल कर उसे देखा। बाइबल के मध्य में क्रूस पर लटकाए हुए यीशु की तस्वीर थी जिसके साथ यूहन्ना 3:16 के शब्द लिखे हुए थे। तस्वीर के ऊपर लाल रंग की पारदर्शी पन्नी लगी हुई थी, जो मेरी समझ के अनुसार बहे हुए रक्त के कारण उसकी मृत्यु को दर्शाती थी।

   कभी कभी, जब और कोई ध्यान नहीं दे रहा होता था, तब मैं धीरे से उस बाइबल के डिब्बे को पुस्तकों की ताक से निकाल कर, बाइबल को खोलकर देखती, क्रूस पर लटके हुए यीशु पर विचार करती कि यह व्यक्ति कौन है और ऐसे क्यों मरा और सोचती कि क्या उसका प्रेम मेरे लिए भी था या मेरे जैसे लोग, जिनके जीवन में पाप है, उसके प्रेम की सीमा से परे थे?

   अनेकों वर्ष पश्चात मैंने सन्देश सुना कि कैसे परमेश्वर ने प्रभु यीशु में होकर अपने से मेल मिलाप करने और अपने प्रेम को उपलब्ध कराने के लिए प्रभु यीशु को बलिदान होने के लिए भेजा। परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 5:1-2 में लिखा है: "सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।" तब मैंने भी प्रभु यीशु पर विश्वास किया, उससे अपने पापों की क्षमा माँगी, अपना जीवन उसे समर्पित किया और अनन्त काल के लिए उद्धार प्राप्त किया।

   हम सब के लिए यह बड़े धन्यवाद कि बात है कि कोई भी मनुष्य परमेश्वर, उसके प्रेम और उसके वचन बाइबल की सीमा से बाहर नहीं है; ये अद्भुत खज़ाने संसार के प्रत्येक व्यक्ति के लिए, वो चाहे कोई भी और कैसा भी क्यों ना हो, सेंत-मेंत उपलब्ध हैं। आज, समय रहते, परमेश्वर से पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त कर लीजिए - ये मेरे और आपके जैसे पापी लोगों के लिए ही हैं। ऐनी सेटास


बाइबल हम मनुष्यों के लिए परमेश्वर का प्रेम-पत्र है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-8
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29


सोमवार, 25 अगस्त 2014

संचालक


   वायुयान की यात्रा का सबसे अधिक जोखिम भरा समय होता है वायुयान को सुरक्षित धरती पर उतारने का। जैसे जैसे वायुयान उतरने के लिए धरती के समीप आता जाता है, उसके आस-पास अन्य वायुयानों की संख्या बढ़ती जाती है, उसके उड़ने की सामान्य ऊँचाई 30,000 फीट के मौसम की अपेक्षा नीचे का मौसम अधिक खराब हो सकता है, तथा जहाँ उसे उतरना है उस हवाई अड्डे की हवाई पट्टी पर अन्य वायुयान हो सकते हैं। इसलिए वायुयान के चालक हवाई अड्डे पर रहने वाले वायुयान संचालकों पर निर्भर रहते हैं कि उन्हें सुरक्षित उतार लाएं। यदि वे संचालक ना हों तो उन वायुयानों का सुरक्षित उतर पाना संभव नहीं है और अव्यवस्था तथा हादसों का होना अवश्यंभावी है। इसलिए ज़रा उस समय की घबराहट की कल्पना कीजिए जब यात्रियों से भरे एक वायुयान के चालक ने यान उतारते समय हवाई अड्डे पर संचालक से संपर्क साधने का प्रयास किया और उसे कोई उत्तर नहीं मिला। अन्ततः मालुम पड़ा कि वह संचालक उपस्थित तो था परन्तु सो गया था, जिससे उस वायुयान और उसके यात्रियों की जान बहुत जोखिम में आ गई थी। अच्छा समाचार यह है कि वह वायुयान बिना किसी प्रकार के कोई नुकसान के सुरक्षित उतारा जा सका।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए इससे भी बेहतर और अच्छी खबर यह है कि हमारा परमेश्वर प्रभु यीशु, जो समस्त सृष्टि की प्रत्येक बात को संचालित करता है, वह ना कभी ऊँघता है और ना सोता है। अपने स्वर्गीय स्थान से वह संसार के प्रत्येक जन एवं उनकी हर एक बात, हर एक परिस्थिति पर नज़र बनाए रखता है; हमारे साथ क्या हो रहा है और क्या होने जा रहा है, उससे कुछ छुपा नहीं है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा है: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा" (भजन 121:2-3)।

   आप परमेश्वर प्रभु यीशु पर भरोसा रख सकते हैं - वह आपके जीवन की हर बात, हर परिस्थिति, हर घटना, हर आवश्यकता को भली-भांति जानता है। वह ही आपके जीवन की सभी बातों को बिना रुके या थके संचालित करता रहता है जिससे सब बातें मिलकर आपके लिए भलाई उत्पन्न करें तथा परमेश्वर कि महिमा होने पाए। अपने जीवन को उसे पूर्णतयः समर्पित कर दें, तथा निश्चिंत होकर अपने जीवन का संचालन उसके हाथों में छोड़ दीजिए। - जो स्टोवैल


क्योंकि हमारा प्रभु यीशु कभी ऊँघता या सोता नहीं, इसलिए हम निश्चिंत रह सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26


रविवार, 24 अगस्त 2014

जोखिम


   संसार भर में जब सन 2010 में आर्थिक संकट गहराता जा रहा था, विश्व में अनेक स्थानों पर कारोबार करने वाले एक बैंकिंग व्यवसायसंघ के उच्च प्रबन्धकों की, ग्राहकों को धोखा देने के लिए जाँच करी गई। वे लोग यह जानते हुए भी कि उन ग्राहकों के निवेश अवश्य ही असफल हो जाएंगे, ग्राहकों को यह आश्वासन देकर धोखा देते रहे कि उनके निवेश किए हुए धन से उन्हें बहुत पैसा वापस मिलने वाला है; और जब वह निवेश विफल हुआ तब उन निवेश करने वाले ग्राहकों के पास कुछ नहीं बचा।

   धोखा देना कोई नई बात नहीं है। प्रभु यीशु ने शैतान के लिए कहा, "...वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है" (यूहन्ना 8:44)। हमारी आत्माओं का शत्रु, शैतान हमें फुसलाना चाहता है कि वर्तमान के लिए ही जीएं जबकि वह जानता है कि इसका परिणाम अनन्त मृत्यु एवं कभी ना पल्टी जा सकने वाली हानि है।

   इसके विपरीत, प्रभु यीशु ने कभी अपने चेलों से सांसारिक समृद्धि से भरा हुआ सरल जीवन मिलने का कोई वायदा नहीं किया, वरन उनसे कहा कि वे आत्म-बलिदान का जीवन जीने और उसके साथ तथा उसके नाम के लिए दुख उठाने को तैयार रहें। चेलों को यह समझाने के बाद कि वह मारा जाएगा और फिर तीसरे दिन मृतकों में से जी उठेगा, प्रभु यीशु ने उनसे कहा, "यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा" (लूका 9:23-24)।

   आज हर बात के लिए दो आवाज़ें हैं जो हमसे कहती हैं कि अपने जीवन का निवेश कहाँ करें, एक प्रभु यीशु की और दूसरी शैतान की। धारणाओं, प्रथाओं, सुनी-सुनाई बातों, प्रमाण रहित दावों या अन्ध-विश्वास के अनुसार नहीं वरन भली भाँति देख परख कर तथा सभी दावों सच्चाई की जाँच कर के ही निर्णय लें तथा अपने जीवन का निवेश करें। गलत बात में निवेश करना बहुत जोखिम भरा है, और उस गलत निवेश की हानि को पलटने का फिर कोई साधन है ही नहीं। - डेविड मैक्कैसलैंड


यदि हम जीवते एवं सच्चे परमेश्वर के सत्यों को थामे रहेंगे तो शैतान के धोखों में फंसने नहीं पाएंगे।

पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। - 2 तिमुथियुस 3:12

बाइबल पाठ: लूका 9:18-27
Luke 9:18 जब वह एकान्‍त में प्रार्थना कर रहा था, और चेले उसके साथ थे, तो उसने उन से पूछा, कि लोग मुझे क्या कहते हैं? 
Luke 9:19 उन्होंने उत्तर दिया, युहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, और कोई कोई एलिय्याह, और कोई यह कि पुराने भविष्यद्वक्ताओं में से कोई जी उठा है। 
Luke 9:20 उसने उन से पूछा, परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? पतरस ने उत्तर दिया, परमेश्वर का मसीह। 
Luke 9:21 तब उसने उन्हें चिताकर कहा, कि यह किसी से न कहना। 
Luke 9:22 और उसने कहा, मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरिनए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्‍छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे। 
Luke 9:23 उसने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। 
Luke 9:24 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा। 
Luke 9:25 यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपना प्राण खो दे, या उस की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? 
Luke 9:26 जो कोई मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा; मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की, और पवित्र स्वर्ग दूतों की, महिमा सहित आएगा, तो उस से लजाएगा। 
Luke 9:27 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कोई कोई ऐसे हैं कि जब तक परमेश्वर का राज्य न देख लें, तब तक मृत्यु का स्‍वाद न चखेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 21-23