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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

प्रेम


   मैं अपने पति के साथ एक सार्वजनिक स्थान पर थी, और लोगों ने ऊपर आसमान की ओर देखना आरंभ कर दिया। वहाँ ऊपर एक छोटा वायु-यान धुँआ छोड़ रहा था और उस वायु-यान का चालक उस धुएं से कुछ अक्षर बना रहा था। हमारे देखते देखते उसने लिखा "मैं आपसे प्रेम करता हूँ", और नीचे हमारे आस-पास के अधिकांश लोग अटकलें लगाने लगे कि वह आगे क्या लिखेगा। किसी ने सोचा कि वह किसी प्रेमी द्वारा प्रेम का प्रकटिकरण होगा; या संभवतः आस-पास के किसी मकान में कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका से पूछने वाला है कि क्या वह उससे विवाह करेगी। हम देखते रहे और उस चालक ने लिखा "मैं आपसे प्रेम करता हूँ यीशु" - वह वायु-यान चालक प्रभु यीशु के प्रति अपने प्रेम को सभी लोगों को दिखा रहा था।

   मेरा एक मित्र अपनी सभी प्रार्थनाओं का अन्त, "प्रभु मैं आपसे प्रेम करता हूँ" कहकर करता है। उसका कहना है कि यह जानते हुए कि मेरे लिए प्रभु यीशु ने क्या कुछ किया है, मैं यह बात कहे बिना रह नहीं पाता। परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों को लिखी गई अपनी पत्री के छठे अध्याय में प्रेरित पौलुस प्रभु यीशु द्वारा हमारे लिए करी गई बातों में से कुछ का वर्णन करता है, जिनके कारण वह हमारे प्रेम का हकदार है: प्रभु यीशु हमारे ही पापों के लिए क्रूस पर मारा गया और गाड़ा गया, वह हमारे ही लिए मृतकों में से तीसरे दिन फिर से जी उठा। उसके इस कार्य के द्वारा ही अब जो कोई स्वेच्छा से उसमें विश्वास लाकर उसे अपना जीवन समर्पित करता है वह एक नया जीवन प्राप्त करता है (पद 4) और उसे फिर पाप की आधीनता या मृत्यु का भय नहीं रहता (पद 6, 9), और एक दिन हम सभी मसीही विश्वासी उसके साथ अनन्त जीवन बिताने के लिए मृत्कों मे से जी उठेंगे (पद 8)।

   इसलिए इसमें कोई विचित्र लगने वाली या आश्चर्यचकित करने वाली बात नहीं कि हम जिन्होंने प्रभु यीशु को जाना है, उसे अपना उद्धारकर्ता स्वीकार किया है, उसे अपना जीवन समर्पित किया है, उससे मिली पापों की क्षमा और अनन्त जीवन के लिए उससे कहते हैं, "प्रभु मैं आपसे प्रेम करता हूँ"। - ऐनी सेटास


हमारे प्रति प्रेम दिखाने के लिए प्रभु यीशु हमारे लिए मर गया; उसके प्रति प्रेम दिखाने के लिए हमें उसके लिए जीना है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: रोमियों 6:1-11
Romans 6:1 सो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? 
Romans 6:2 कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताएं? 
Romans 6:3 क्या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया 
Romans 6:4 सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। 
Romans 6:5 क्योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएंगे। 
Romans 6:6 क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। 
Romans 6:7 क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। 
Romans 6:8 सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी। 
Romans 6:9 क्योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की। 
Romans 6:10 क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है। 
Romans 6:11 ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 7-9
  • लूका 9:18-36



सोमवार, 25 अगस्त 2014

संचालक


   वायुयान की यात्रा का सबसे अधिक जोखिम भरा समय होता है वायुयान को सुरक्षित धरती पर उतारने का। जैसे जैसे वायुयान उतरने के लिए धरती के समीप आता जाता है, उसके आस-पास अन्य वायुयानों की संख्या बढ़ती जाती है, उसके उड़ने की सामान्य ऊँचाई 30,000 फीट के मौसम की अपेक्षा नीचे का मौसम अधिक खराब हो सकता है, तथा जहाँ उसे उतरना है उस हवाई अड्डे की हवाई पट्टी पर अन्य वायुयान हो सकते हैं। इसलिए वायुयान के चालक हवाई अड्डे पर रहने वाले वायुयान संचालकों पर निर्भर रहते हैं कि उन्हें सुरक्षित उतार लाएं। यदि वे संचालक ना हों तो उन वायुयानों का सुरक्षित उतर पाना संभव नहीं है और अव्यवस्था तथा हादसों का होना अवश्यंभावी है। इसलिए ज़रा उस समय की घबराहट की कल्पना कीजिए जब यात्रियों से भरे एक वायुयान के चालक ने यान उतारते समय हवाई अड्डे पर संचालक से संपर्क साधने का प्रयास किया और उसे कोई उत्तर नहीं मिला। अन्ततः मालुम पड़ा कि वह संचालक उपस्थित तो था परन्तु सो गया था, जिससे उस वायुयान और उसके यात्रियों की जान बहुत जोखिम में आ गई थी। अच्छा समाचार यह है कि वह वायुयान बिना किसी प्रकार के कोई नुकसान के सुरक्षित उतारा जा सका।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए इससे भी बेहतर और अच्छी खबर यह है कि हमारा परमेश्वर प्रभु यीशु, जो समस्त सृष्टि की प्रत्येक बात को संचालित करता है, वह ना कभी ऊँघता है और ना सोता है। अपने स्वर्गीय स्थान से वह संसार के प्रत्येक जन एवं उनकी हर एक बात, हर एक परिस्थिति पर नज़र बनाए रखता है; हमारे साथ क्या हो रहा है और क्या होने जा रहा है, उससे कुछ छुपा नहीं है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा है: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा" (भजन 121:2-3)।

   आप परमेश्वर प्रभु यीशु पर भरोसा रख सकते हैं - वह आपके जीवन की हर बात, हर परिस्थिति, हर घटना, हर आवश्यकता को भली-भांति जानता है। वह ही आपके जीवन की सभी बातों को बिना रुके या थके संचालित करता रहता है जिससे सब बातें मिलकर आपके लिए भलाई उत्पन्न करें तथा परमेश्वर कि महिमा होने पाए। अपने जीवन को उसे पूर्णतयः समर्पित कर दें, तथा निश्चिंत होकर अपने जीवन का संचालन उसके हाथों में छोड़ दीजिए। - जो स्टोवैल


क्योंकि हमारा प्रभु यीशु कभी ऊँघता या सोता नहीं, इसलिए हम निश्चिंत रह सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26


रविवार, 6 मार्च 2011

व्यवस्था का पालन

नियम ही नियमों का उल्लंघन करने को उभारते हैं! किसी बच्चे से कहिये कि वह "उस रखी हुई मिठाई को न खाए" - क्या होगा? वह ललचाई नज़रों से उस मिठाई की ओर देखता रहेगा और फिर लालच में पड़कर मिठाई को खा ही लेगा। यदि उसे जता कर मना नहीं किया गया होता तो शायद वह कभी मिठाई की ओर देखता भी नहीं।

परमेश्वर के पवित्र नियमों के प्रति हमारा भी ऐसा ही बर्ताव होता है। जिन बातों से हमें बचाने के लिये ये नियम दिये गये, उन्हीं बातों को करने के लिये वे हमें उकसा देते हैं। यह इसलिये होता है क्योंकि "पाप और मृत्यु की व्यवस्था" (रोमियों ८:२) हमारे शरीरों में कार्य करती है। पौलुस कहता है कि "...बिना व्यवस्था के मैं पाप को नहीं पहिचानता: व्यवस्था यदि न कहती, कि लालच मत कर तो मैं लालच को न जानता। परन्‍तु पाप ने अवसर पाकर आज्ञा के द्वारा मुझ में सब प्रकार का लालच उत्‍पन्न किया, क्‍योंकि बिना व्यवस्था के पाप मुर्दा है।" (रोमियों ७:७, ८) उस मनाही ने ही मन में सब प्रकार की बुराई को अवसर दिया। परमेश्वर की व्यवस्था तो भली है, पवित्र है, आत्मिक है परन्तु व्यवस्था आज्ञाकारी बनाने में असमर्थ है। व्यव्स्था सही मार्ग को बता तो सकती है, और बताती भी है; पर उस मार्ग पर चलने की सामर्थ नहीं दे सकती। और इसीलिए, मार्ग जानने के बाद भी मार्ग पर न चल पाने के कारण हम व्यवस्था के दोषी ठहरते हैं।

तो कैसे फिर हम परमेश्वर की व्यवस्था का पालन कर सकते हैं, यदि व्यवस्था ही हमें दोषी ठहरा देती है? - प्रभु यीशु मसीह में होकर जो हमें सामर्थ और स्वतंत्रता देता है "सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं: क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया।" (रोमियों ८:१, २)

इसे इस प्रकार समझिये - वायुयान गुरुत्वाकर्षण की व्यवस्था से बंधा ज़मीन पर रहता है। किंतु जब वह उड़नपट्टी पर वेग से चलना आरंभ करता है तो उसके एक गति को पार करने से वायु प्रवाह और उड़ान के नियमों कि व्यवस्था गुरुत्वाकर्षण के नियमों की व्यवस्था के ऊपर लागू हो जाते हैं और विमान उड़ने लगता है। जब तक वह वायु प्रवाह और उड़ान के नियमों के आधीन होकर उनका पालन करेगा, वह गुरुत्वाकर्षण के नियमों के ऊपर विजयी रहेगा, जैसे ही उड़ान के नियमों का उल्लंघन होगा, गुरुत्वाकर्षण के नियम उसे फिर पृथ्वी पर ले आएंगे। इसी प्रकार जब हम मसीह की आधीनता में हो जाते हैं वह हमें अपने आत्मा द्वारा सामर्थ देता है कि हम पाप और मृत्यु की व्यवस्था के ऊपर जयवंत हो सकें "पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। क्‍योंकि शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ। और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।" (गलतियों ५:१६-१८)

क्‍योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है। - डेनिस डी हॉन


पाप और मृत्यु की व्यवस्था के अंधेरे में भटकने वालों को प्रभु का अनुग्रह जीवन की ज्योति में ले चलता है।

क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया। - रोमियों ८:२


बाइबल पाठ: रोमियों ८:१-११

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं: क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया।
क्‍योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण र्दुबल होकर न कर सकी, उस को परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेजकर, शरीर में पाप पर दण्‍ड की आज्ञा दी।
इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए।
क्‍योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं परन्‍तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं।
शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्‍तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्‍ति है।
क्‍योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्‍योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है, और न हो सकता है।
और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।
परन्‍तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्‍तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।
और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्‍तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।
और यदि उसी का आत्मा जिस ने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है तो जिस ने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरणहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण १-२
  • मरकुस १०:१-३१

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

कलह और सच्ची शांति

दिसंबर ७, १९४१ को एक जापानी युद्धपोत ’अकागी’ से मित्सुओ फ़ुचीदा ने जंगी वायुयान में उड़ान भरी। फ़ुचीदा ने अमेरिका के पर्ल हारबर पर आकस्मात किये गये जापानी हवाई हमले का नेतृत्व किया, जिसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्वयुद्ध में शामिल हो गया।

इसके बाद के युद्ध के वर्षों में फ़ुचीदा जंगी जहाज़ों में उड़ान भरता रहा और कई दफा मौत से बाल बाल बचा। युद्ध के अन्त होने तक फ़ुचीदा निराशा और कटुता से भर गया था।

कुछ वर्षों पश्चात उसने एक सच्ची कहानी पढ़ी जिसने उसकी आत्मिक जिज्ञासा को जागृत किया। एक जवान मसीही युवती ने, जिसके माता पिता युद्ध में जापानीयों द्वारा मारे गये थे, निर्ण्य लिया कि वह जापानी युद्ध बंदीयों की सेवा करेगी। इससे प्रभावित फ़ूचिदा ने बाइबल पढ़ना आरंभ किया।

जब उसने क्रूस पर से अपने सताने वालों के लिये प्रभु यीशु मसीह द्वारा कहे गए शब्द पढ़े "हे पिता, इन्‍हें क्षमा कर, क्‍योंकि ये जानते नहीं कि क्‍या कर रहें हैं।" (लूका २३:३४), तब वह समझ सका कि वह युवती अपने दुशमनों को दया कैसे दिखा सकी। उस दिन फ़ुचिदा ने प्रभु यीशु को अपना हृदय समर्पित कर दिया।

यह भूतपूर्व सैनिक अपने सहनागरिकों के लिये सुसमाचार प्रचारक बन गया और उसका जीवन उस शांति का उदहरण बन गया जो मसीह पर विश्वास लाने वालों के जीवन में काम करती है, और उसने अपने जीवन से दिखाया कि कैसे "तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे ह्रृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षित रखेगी।" (फिलिप्पियों ४:१७)।

क्या आपने यह शांति पाई है? आप चाहे जैसी भी परिस्थितियों से होकर निकले हों, परमेश्वर का वायदा है कि "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं" (फिलिप्पियों ४:१६) और वह अवश्य अपनी शांति आपको उपलब्ध करायेगा। - डेनिस फिशर


सच्ची शांति जीवन में कलह की अनुपस्थिति नहीं, वरन जीवन में सच्चे परमेश्वर की उपस्थिति है।

तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे ह्रृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षित रखेगी। - फिलिप्पियों ४:१७


बाइबल पाठ: लूका २३:३२-४३

वे और दो मनुष्यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले।
जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुंचे, तो उन्‍होंने वहां उसे और उन कुकिर्मयों को भी एक को दाहिनी ओर और दूसरे को बाईं ओर क्रूसों पर चढ़ाया।
तब यीशु ने कहा हे पिता, इन्‍हें क्षमा कर, क्‍योंकि ये जानते नहीं कि क्‍या कर रहें हैं; और उन्‍होंने चिट्ठियां डाल कर उसके कपड़े बांट लिए।
लोग खड़े खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर करके कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले।
सिपाही भी पास आकर और सिरका दे कर उसका ठट्ठा करके कहते थे।
यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा।
और उसके ऊपर एक पत्र भी लगाया, कि यह यहूदियों का राजा है।
जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्‍दा करके कहा "क्‍या तू मसीह नहीं? तो फिर अपके आप को और हमें बचा।"
इस पर दूसरे ने उसे डांट कर कहा, "क्‍या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है।"
"और हम तो न्यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्‍योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।"
तब उस ने कहा "हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना।"
उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।

एक साल में बाइबल:
  • दानियेल ५-७
  • २ युहन्ना