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शुक्रवार, 26 जून 2015

सबसे बुरा समय


   मई 2011 में मिस्सूरी प्रांत का जोपलिन शहर एक भयानक चक्रवादी तूफान से उजड़ गया। उस दिन एक जवान महिला ने तूफान से बचने के लिए स्नान करने वाले बड़े से टब में लेटकर शरण ली और उसका पति उसकी रक्षा के लिए उसके ऊपर लेट गया। तूफान के वेग से टूटते घर के मलबे और उड़ती गिरती हुई वस्तुओं से पति के शरीर पर चोटें पहुँचती रहीं जिनके कारण उसकी मृत्यु हो गई किंतु उस महिला की जान बच गई। स्वाभाविक रूप से उस महिला के सामने प्रश्न था, "ऐसा क्यों?" लेकिन उस तूफान के एक वर्ष बाद उसी महिला ने कहा कि उसे अब इस बात से सांत्वना मिलती है कि उसके जीवन के सबसे बुरे दिन में भी वह अथाह प्रेम की पात्र थी।

   जब मैं किसी के जीवन के सबसे बुरे दिनों के बारे में सोचती हूँ तो मेरा ध्यान परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, अय्युब की ओर जाता है। अय्युब एक बहुत समृद्ध तथा भक्त व्यक्ति था जो परमेश्वर से बहुत प्रेम करता था, उसकी उपासना करता था और परमेश्वर भी उसकी खराई का उदाहरण देता था। लेकिन एक ही दिन में, अलग अलग घटानाओं में उसके दस बच्चे, उसके सारे सेवक और उसके सारे जानवर मारे गए। अय्युब इस बात से बहुत दुखी हुआ और विलाप करते हुए उसने भी परमेश्वर से प्रश्न किया "ऐसा क्यों?" उसने परमेश्वर से कहा, "हे मनुष्यों के ताकने वाले, मैं ने पाप तो किया होगा, तो मैं ने तेरा क्या बिगाड़ा? तू ने क्यों मुझ को अपना निशाना बना लिया है, यहां तक कि मैं अपने ऊपर आप ही बोझ हुआ हूँ?" (अय्युब 7:20)

   अय्युब के मित्रों ने उस पर दोष लगाया कि अवश्य ही उसने पाप किया है जिसका उसे ऐसा प्रतिफल मिला है; लेकिन आगे चलकर परमेश्वर ने उनके इस दोषारोपण को लेकर अय्युब के मित्रों से कहा, "और ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उसने तेमानी एलीपज से कहा, मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही" (अय्युब 42:7)।

   परमेश्वर ने अय्युब को उसके दुखों का कोई कारण तो नहीं बताया, परन्तु परमेश्वर ने अय्युब के प्रश्नों को सुना और उन प्रश्नों के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया। वरन परमेश्वर ने अय्युब को सृष्टि की हर बात और सारे संचालन पर अपने नियंत्रण को समझाया और अय्युब ने उसकी इस बात को स्वीकार किया (अय्युब 42:1-6)।

   जब हम परीक्षाओं में पड़ें, दुख परेशानियाँ हम पर आएं, तो आवश्यक नहीं कि परमेश्वर उनका कारण भी हमें बताए। लेकिन हम हर परिस्थिति में हर कठिनाई में इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि परमेश्वर का प्रेम हमारे प्रति कभी कम नहीं होता; वह सदा हमारे साथ रहता है; हमारे दुखों में हमारे साथ दुखी भी होता है और अन्ततः हर बात के द्वारा हमारा भला ही करता है। - ऐनी सेटास


हमारे प्रति परमेश्वर का प्रेम हमें परीक्षाओं से बचाता नहीं वरन उन परीक्षाओं में हमें सुरक्षित रखता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: अय्युब 7:11-21
Job 7:11 इसलिये मैं अपना मुंह बन्द न रखूंगा; अपने मन का खेद खोल कर कहूंगा; और अपने जीव की कड़ुवाहट के कारण कुड़कुड़ाता रहूंगा। 
Job 7:12 क्या मैं समुद्र हूँ, वा मगरमच्छ हूँ, कि तू मुझ पर पहरा बैठाता है? 
Job 7:13 जब जब मैं सोचता हूं कि मुझे खाट पर शान्ति मिलेगी, और बिछौने पर मेरा खेद कुछ हलका होगा; 
Job 7:14 तब तब तू मुझे स्वप्नों से घबरा देता, और दर्शनों से भयभीत कर देता है; 
Job 7:15 यहां तक कि मेरा जी फांसी को, और जीवन से मृत्यु को अधिक चाहता है। 
Job 7:16 मुझे अपने जीवन से घृणा आती है; मैं सर्वदा जीवित रहना नहीं चाहता। मेरा जीवनकाल सांस सा है, इसलिये मुझे छोड़ दे। 
Job 7:17 मनुष्य क्या है, कि तू उसे महत्व दे, और अपना मन उस पर लगाए, 
Job 7:18 और प्रति भोर को उसकी सुधि ले, और प्रति क्षण उसे जांचता रहे? 
Job 7:19 तू कब तक मेरी ओर आंख लगाए रहेगा, और इतनी देर के लिये भी मुझे न छोड़ेगा कि मैं अपना थूक निगल लूं? 
Job 7:20 हे मनुष्यों के ताकने वाले, मैं ने पाप तो किया होगा, तो मैं ने तेरा क्या बिगाड़ा? तू ने क्यों मुझ को अपना निशाना बना लिया है, यहां तक कि मैं अपने ऊपर आप ही बोझ हुआ हूँ? 
Job 7:21 और तू क्यों मेरा अपराध क्षमा नहीं करता? और मेरा अधर्म क्यों दूर नहीं करता? अब तो मैं मिट्टी में सो जाऊंगा, और तू मुझे यत्न से ढूंढ़ेगा पर मेरा पता नहीं मिलेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 5-7
  • प्रेरितों 8:1-25


गुरुवार, 25 जून 2015

नम्र


   सिंक्लेयर ल्युइस का उपन्यास ’मेन स्ट्रीट’ शहर में रहने वाली एक ऐसी महिला पर आधारित है जिसकी शादी गाँव मे रहने और काम करने वाले एक साधारण से स्वभाव के डॉक्टर से होती है। गाँव के साधाराण, सामान्य लोगों में आने के बाद, अपनी शहरी पृष्ठभूमि और रहन-सहन के कारण वह महिला अपने आप को वहाँ के अन्य सभी लोगों से श्रेष्ठ समझती है। परन्तु एक दिन एक चिकित्सीय संकट में उसके पति के नम्र व्यवहार से उसे अपने अभिमानपूर्ण व्यवहार और जीवन-शैली पर पुनःविचार करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। एक परदेशी किसान की बाँह चोटिल हो जाती है और उस बाँह को काटने का निर्णय लेना पड़ता है। वह महिला अचरज और आदर के साथ देखती है कि कैसे उसका पति उस घायल किसान और उसकी घबराई हुई पत्नि से सान्तवना भरे भाव में बातें करता है, उन्हें ढाढ़स देता है। उस चिकित्सक का संवेदनापूर्ण व्यवहार और नम्र आचरण, उसकी पत्नि के अभिमानी मन के समक्ष एक चुनौती प्रस्तुत करता है।

   मसीही विश्वासी होने के कारण हम परमेश्वर की सन्तान भी हैं और उसके स्वर्गीय राज्य के वारिस भी; इसलिए इस संसार के अपने सभी संबंधों को लेकर हम या तो अपने आप को औरों से ऊँचा तथा श्रेष्ठ समझ सकते हैं, या फिर अपने प्रभु परमेश्वर के समान ही नम्रता के साथ औरों के भले के कार्य कर सकते हैं। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उनसे आग्रह किया, "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे" (फिलिप्पियों 2:3-4)।

   आज हमें भी, प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण, प्रभु यीशु के समान ही अपने हितों से अधिक औरों के हितों का धयान रखना चाहिए। जैसे प्रभु यीशु ने दास का सा स्वरूप धारण कर लिया और हमारे हित के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया, वैसे ही हमें भी नम्रता के साथ दूसरों की भलाई और हित के लिए कार्य करना है। - डैनिस फिशर


दूसरों की भलाई को अपनी भलाई से बढ़कर मानना आनन्दायक होता है।

भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। - रोमियों 12:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 3-4
  • प्रेरितों 7:44-60


बुधवार, 24 जून 2015

अनुभव


   जब वायु-यान चालकों का प्रशिक्षण होता है तो उन्हें कई घंटे उड़ान का सा अनुभव देने वाली मशीन - फ्लाईट सिमुलेटर पर सीखने में बिताने पड़ते हैं। ये सिमुलेटर देखने में विमान के चालक कक्ष जैसे ही बने होते हैं और उनमें उस कक्ष के समान ही सभी उपकरण लगे होते हैं। प्रशिक्षण लेने वाले के समक्ष उस सिमुलेटर में उड़ान जैसे कृत्रिम अनुभव रखे जाते हैं और उसे उन अनुभवों में होकर वायुयान चलाना सीखना होता है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशिक्षार्थी ज़मीन पर ही मशीन के अन्दर बैठा होता है, और यदि उससे उस कृत्रिम वायुयान का कोई नुकसान या दुर्घटना भी हो जाए तो भी वास्तव में कोई हानि नहीं हुई होती। सिखाने के लिए ये सिमुलेटर एक बहुत कारगर यंत्र हैं और वायुयान चालकों को तैयार करने में इनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, परन्तु फिर भी ये वास्तविक उड़ान जैसी हर परिस्थिति को बना पाने और वैसा अनुभव दे पाने में सक्षम नहीं हैं। वैसा अनुभव तो चालक को वास्तविक वायुयान में बैठकर और अन्ततः वास्तविक उड़ान भरने से ही मिलता है।

   जीवन भी अनेक रीति से ऐसा ही है - उसे कृत्रिम अनुभवों के आधार पर नहीं जीया जा सकता। ऐसा कोई भी पूर्ण्तया सुरक्षित अथवा किसी भी जोखिम से विहीन वातावरण नहीं है जिसमें हम जीवन के सभी उतार-चढ़ाव कभी भी बिना किसी हानि को उठाएअ अनुभव कर सकें। पाप और उसके दुषप्रभावों से भरे तथा उनसे बिगड़े हुए इस संसार में जीवन जीने के खतरों से हम बच नहीं सकते। इसीलिए हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु द्वारा दिए गए आश्वासन बहुत शान्ति देने वाले हैं; प्रभु यीशु ने कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है" (यूहन्ना 16:33)।

   यद्यपि हम मसीही विश्वासी इस पतित संसार में जीवन के खतरों और जोखिमों से बचे तो नहीं रह सकते, लेकिन हम उन खतरोंअ उर जोखिमों के बावजूद आश्वस्त और शान्त होकर अवश्य रह सकते हैं क्योंकि परमेश्वर प्रभउ के साथ बना हुआ हमारा संबंध हमारे लिए अनन्त काल की शान्ति और हर परिस्थिति में आवश्यक सामर्थ तथा सहायता के उपलब्ध होने का आश्वासन है। हमारा प्रभु संसार तथा संसार के हाकिमों और दुष्ट की सभी शक्तियों एवं योजनाओं पर जयवन्त है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर को समर्पित जीवन से अधिक सुरक्षित जीवन कोई नहीं है।

प्रभु यीशु ने कहा: "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।" - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 7:22-43


मंगलवार, 23 जून 2015

अधिकार और अधिकारी


   हमारे चर्च के लोग चर्च के नए भवन के निर्माण को लेकर बहुत उत्साहित थे। प्रति इतवार वे सब उस भवन के निर्माण के लिए ज़मीन में करी गई खुदाई को देखते; निर्माण कार्य बढ़ तो रहा था किंतु उसकी गति बहुत धीमी थी। इस धीमी गति का कारण था पानी - जो एक स्थान पर आवश्यकता से अधिक था तो दूसरे स्थान पर आवश्यकता से कम! खुदाई के एक किनारे पर पानी का एक भूमिगत सोता था, इसलिए जब तक कि निर्माण की देखरेख करने वाले इस बात से सन्तुष्ट नहीं हो जाते कि वह पानी किसी अन्य वाजिब स्थान की ओर भलि-भांतिमोड़ दिया गया है, वहाँ निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता था। दूसरी ओर नगरपालिका अधिकारियों का कहना था कि हमारे पास भवन में अनिवार्यतः लगाए जाने वाली आग बुझाने की सुविधा की आवश्यकतानुसार पर्याप्त पानी का स्त्रोत नहीं था इसलिए जब तक पानी के नए पाईप डालकर उस सुविधा की आवश्यकतानुसार पर्याप्त दबाव के साथ सही मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो जाता तब तक निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता था। हम में से कोई नहीं चाहता था कि इन नियमों के कारण निर्माण का कार्य धीमा हो किंतु हमें यह भी एहसास था कि यदि नियमानुसार कार्य नहीं किया गया तो आगे चलकर हमें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, समय और संसाधन दोनों का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और भवन भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।

   कई बार हम सरकारी और अन्य अधिकारियों को लेकर कुड़कुड़ाते हैं, परन्तु अधिकारियों और अधिकारों को उचित आदर देना परमेश्वर को आदर देना है। प्रेरित पौलुस की अधिकारियों के साथ अपनी ही समस्याएं रहती थीं, परन्तु फिर भी उसने परमेश्वर के पवित्र आत्मा की अगुवाई में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें सिखाया, "हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं" और "...यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी" (रोमियों 13:1, 3)।

   हम मसीही विश्वासियों को भी परमेश्वर का पवित्र आत्मा यही सिखाता है - अधिकारियों और अधिकारों के प्रति स्वस्थ रवैया बनाए रखें; यह हमारे और हमारी मसीही गवाही के लिए भला होगा और इन सबसे बढ़कर हमारे द्वारा परमेश्वर की महिमा के लिए होगा। - डेव ब्रैनन


हमारे द्वारा अधिकारों को दिया गया आदर, परमेश्वर को आदर देता है।

परमेश्वर का नाम युगानुयुग धन्य है; क्योंकि बुद्धि और पराक्रम उसी के हैं। समयों और ऋतुओं को वही पलटता है; राजाओं का अस्त और उदय भी वही करता है; बुद्धिमानों को बुद्धि और समझ वालों को समझ भी वही देता है; - दानिय्येल 2:20-21

बाइबल पाठ: रोमियों 13:1-7
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 9-10
  • प्रेरितों 7:1-21


सोमवार, 22 जून 2015

सामर्थ


   नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी द्वारा प्रकाशित एक संसार के नक्शे पर लिखा हुआ है, "पृथ्वी का वज़न 6.6 सिक्सट्रिल्यन टन है" और हमारी कलपना से भी परे यह इतना भारी वज़न किस पर स्थिर किया गया है - शून्य पर! यह पृथ्वी जिस पर हम निवास करते हैं और अपना जीवन जीते हैं, अपनी धुरी पर 1000 मील प्रति घंटा की गति से घूमते हुए अन्तरिक्ष में सूरज के चारों ओर भी चक्कर लगा रही है; ये सभी कार्य नियमित और निर्धारित रीति से अपने समयानुसार अविरल होते रहते हैं। लेकिन अपने स्वास्थ्य, रिश्तेदारियों, भुगतानों को करने आदि की चिन्ताओं में पड़े होने से हमें इन बातों को पहचानने तथा उनकी ओर ध्यान देने का समय ही नहीं मिल पाना हमारे लिए बड़ी सामान्य सी बात है। लेकिन परमेश्वर हमारी प्रत्येक बात और आवश्यकता का ध्यान करता है; उनका भी जिन्हें हम जानते भी नहीं हैं, और उनके लिए भी जो उसे जानते और मानते नहीं हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में पुराने नियम खण्ड के एक पात्र, अय्युब ने अपने स्वास्थ्य, परिवार और संपदा की आक्समिक और समझ से बाहर भारी हानि उठाने पर, परमेश्वर की सृष्टि में विदित उसके कार्यों और सामर्थ के द्वारा अपनी परिस्थिति को समझने की प्रयास किया। उसने कहा, "वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना टेक पृथ्वी को लटकाए रखता है" (अय्युब 26:7)। अय्युब ने बादलों को देखकर अचंभा किया जो इतना जल लिए रहते हैं फिर भी फटते नहीं (अय्युब 26:8); अय्युब ने उजियाले और अन्धकार के सिवाने पर विचार किया (अय्युब 26:10) और इन सब बातों को परमेश्वर की गति का महज़ छोर मात्र ही कहा (अय्युब 26:14)।

   सृष्टि ने अय्युब के प्रश्नों का उत्तर तो नहीं दिया, परन्तु उस सृष्टिकर्ता परमेश्वर की ओर, जो सहायता और आशा के साथ उसके प्रश्नों के उत्तर दे सकता था, उसका ध्यान अवश्य कर दिया।

   वह परमेश्वर जो इस सृष्टि को अपने शब्द से संभाले हुए है (इब्रानियों 1:3; कुलुस्सियों1:17), वही हमारे जीवनो को भी संभाले रहता है। वे अनुभव जो हमें "शून्य" या महत्वहीन प्रतीत होते हैं, वे सब परमेश्वर पिता की सामर्थ और प्रेम में होकर हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक कार्य पूरा कर रहे हैं। परमेश्वर का कोई भी कार्य व्यर्थ अथवा महत्वहीन नहीं है; उसपर भरोसा रखिए, उसके समय की प्रतीक्षा कीजिए, उसे समर्पित रहिए। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


जब हम परमेश्वर की सृष्टि में दिखने वाली उसकी सामर्थ पर मनन करते हैं, हम अपने प्रति उसकी देखरेख की सामर्थ को भी पहिचानते हैं।

वह [प्रभु यीशु] उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा। - इब्रानियों 1:3 

बाइबल पाठ: अय्युब 26:5-14
Job 26:5 बहुत दिन के मरे हुए लोग भी जलनिधि और उसके निवासियों के तले तड़पते हैं। 
Job 26:6 अधोलोक उसके साम्हने उघड़ा रहता है, और विनाश का स्थान ढंप नहीं सकता। 
Job 26:7 वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना टेक पृथ्वी को लटकाए रखता है। 
Job 26:8 वह जल को अपनी काली घटाओं में बान्ध रखता, और बादल उसके बोझ से नहीं फटता। 
Job 26:9 वह अपने सिंहासन के साम्हने बादल फैला कर उसको छिपाए रखता है। 
Job 26:10 उजियाले और अन्धियारे के बीच जहां सिवाना बंधा है, वहां तक उसने जलनिधि का सिवाना ठहरा रखा है। 
Job 26:11 उसकी घुड़की से आकाश के खम्भे थरथरा कर चकित होते हैं। 
Job 26:12 वह अपने बल से समुद्र को उछालता, और अपनी बुद्धि से घपण्ड को छेद देता है। 
Job 26:13 उसकी आत्मा से आकाशमण्डल स्वच्छ हो जाता है, वह अपने हाथ से वेग भागने वाले नाग को मार देता है। 
Job 26:14 देखो, ये तो उसकी गति के किनारे ही हैं; और उसकी आहट फुसफुसाहट ही सी तो सुन पड़ती है, फिर उसके पराक्रम के गरजने का भेद कौन समझ सकता है?

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 6-8
  • प्रेरितों 6



रविवार, 21 जून 2015

कमज़ोर तथा बलवन्त


   कुछ वर्ष पहले की बात है, देर रात का समय था, मैं कुछ अन्य लोगों के साथ एक इमारत में लिफ्ट में था; हम सब थके हुए दिखाई दे रहे थे। लिफ्ट एक मंज़िल पर रुकी और एक कद्दावर व्यक्ति अन्दर आया, उसने दबी हुई पुरानी सी टोपी, कुचला हुआ पुराना सा कोट और घिसे हुए पुराने से जूते पहने हुए थे। लिफट के अन्दर आते ही उसने हम सब पर एक नज़र घुमाई और भारी गुर्राहट वाली आवाज़ में बोला, "पुरुषों, सलाम!" उसके मुँह से यह सुनते ही हम सब अपने कंधों को चौरस करके सीधे खड़े हो गए; हम सब उसके द्वारा किए गए संबोधन के अनुसार दिखने का प्रयास कर रहे थे।

   आज के दिन, जो पुरुषों के सम्मान को समर्पित है, आईये पुरुष होने के बारे में कुछ बातें करें। हम साहसी और सामर्थी बनने के प्रयास तो करते हैं, किंतु कई बार यह महज़ दिखावा होता है; अपने सारे प्रयासों के बावजूद हम अपने अन्दर इस बात को जानते हैं कि हम वैसे हैं नहीं जैसा दिखा रहे हैं। बाहर से दिखाई देने वाली हमारी निर्भीकता के पीछे अन्दर ही अन्दर हमारे अनेक डर, असुरक्षाएं और कमियाँ छुपी रहती हैं। हमारा बाहर से दिखाई देने वाला पौरुष कई बार छलावा मात्र ही होता है।

   प्रेरित पौलुस इस सच्चाई को स्वीकार करने से लजाया नहीं; उसने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखी अपनी दूसरी पत्री में लिखा, "...हम भी तो उस में निर्बल हैं; परन्तु परमेश्वर की सामर्थ से जो तुम्हारे लिये है, उसके साथ जीएंगे" (2 कुरिन्थियों 13:4)। यह केवल धर्मपरायणता दिखाने के लिए कही जाने वाली बात नहीं है वरन दीन कर देने वाली सच्चाई है। लेकिन साथ ही पौलुस ने यह भी लिखा कि "जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ" (1 कुरिन्थियों 16:13), जो एक विरोधाभास जैसा लगता है।

   यह कैसे हो सकता है कि हम स्वाभिक रूप से निर्बल भी हों और फिर पुराषार्थ करें तथा बलवन्त होते जाएं? यह केवल तब संभवव है जब हम, प्रेरित पुलुस के समान ही, अपने कमज़ोरियों को मानते हुए अपने आप को पूर्णतः परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर दें, और फिर उसकी सामर्थ तथा मार्गदर्शन के साथ, उसके कार्यों को करें, जिनके लिए वह हमें आवश्यक बल, बुद्धि और योग्यता प्रदान करेगा। प्रभु यीशु हम कमज़ोरों को भी बलवन्त बना देता है। - डेविड रोपर


सच्चा बल, आत्मा में परमेश्वर की सामर्थ का होना है।

इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं। - 2 कुरिन्थियों 12:10 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 16:9-13
1 Corinthians 16:9 क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।
1 Corinthians 16:10 यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्हारे यहां निडर रहे; क्योंकि वह मेरी नाईं प्रभु का काम करता है। 
1 Corinthians 16:11 इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्तु उसे कुशल से इस ओर पहुंचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्योंकि मैं उस की बाट जोह रहा हूं, कि वह भाइयों के साथ आए। 
1 Corinthians 16:12 और भाई अपुल्लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्छा न की, परन्तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा। 
1 Corinthians 16:13 जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 3-5
  • प्रेरितों 5:22-42



शनिवार, 20 जून 2015

शरणस्थान


  एक दिन मैं एक बड़ी झील के किनारे घूम रही थी; चलते चलते मैं बड़े बड़े पत्थरों और चट्टानों के निकट पहुँची और मेरा ध्यान उन चट्टानों के बीच अन्दर को बने एक छोटे से सुरक्षित स्थान की ओर गया जहाँ एक छोटा सा पौधा जड़ पकड़े हुए उग रहा था। प्रतीत हो रहा था कि उस पौधे को बढ़ने के लिए ना केवल पर्याप्त धूप और पानी उपलब्ध हो रहा है, वरन उन चट्टानों के बीच अन्दर को होने के कारण एक और महत्वपूर्ण चीज़ भी मिल रही है - सुरक्षा। वहाँ किसी भी बारिश-तूफान या तेज़ हवा से उसके कोमल पत्तों को कोई हानि नहीं हो सकती थी।

   उस पौधे के उस सुरक्षित स्थान को देखकर मुझे प्रसिद्ध मसीही भजन, "यीशु मेरे शरणस्थान, तुझ में मेरा है कल्याण" स्मरण हो आया। उस भजन के शब्द उन बातों को व्यक्त करते हैं जिन्हें हम तब चाहते हैं जब हमारा सामना हमारे प्रति बुरे इरादे रखने वाले क्रूर लोगों से होता है जो परमेश्वर को कोई मान्यता या आदर नहीं देते (भजन 94:4-7)। जब हम किसी के बुरे इरादों का निशाना बनते हैं, हम भजनकार की गवाही: "परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है" (भजन 94:22) को स्मरण कर सकते हैं।

   एक चट्टान के समान हमारा परमेश्वर भरोसेमन्द और मज़बूत है; एक शरणस्थान के रूप में वह हमें संकटों और स्मस्याओं के टल जाने तक सुरक्षित रख सकता है। भजनकार हमें स्मरण दिलाता है: "वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी" (भजन 91:4)। जब परमेश्वर हमारा रक्षक है तो हमें इस बात से घबराने की आवश्यकता नहीं है कि दूसरे हमारा क्या बिगाड़ सकते हैं; हम हर बात और परिस्थिति में विश्वास रख सकते हैं कि जब भी परेशानियाँ आएंगी तब परमेश्वर हमें संभालेगा, हमारा शरणस्थान बना रहेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर अपने लोगों के लिए सदा का शरणस्थान है।

मेरा चट्टानरूपी परमेश्वर है, जिसका मैं शरणागत हूँ, मेरी ढाल, मेरा बचाने वाला सींग, मेरा ऊंचा गढ़, और मेरा शरण स्थान है, हे मेरे उद्धार कर्त्ता, तू उपद्रव से मेरा उद्धार किया करता है। - 2 शमूएल 22:3

बाइबल पाठ: भजन 94
Psalms 94:1 हे यहोवा, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, अपना तेज दिखा! 
Psalms 94:2 हे पृथ्वी के न्यायी उठ; और घमण्ड़ियों को बदला दे! 
Psalms 94:3 हे यहोवा, दुष्ट लोग कब तक, दुष्ट लोग कब तक डींग मारते रहेंगे? 
Psalms 94:4 वे बकते और ढ़िठाई की बातें बोलते हैं, सब अनर्थकारी बड़ाई मारते हैं। 
Psalms 94:5 हे यहोवा, वे तेरी प्रजा को पीस डालते हैं, वे तेरे निज भाग को दु:ख देते हैं। 
Psalms 94:6 वे विधवा और परदेशी का घात करते, और अनाथों को मार डालते हैं; 
Psalms 94:7 और कहते हैं, कि याह न देखेगा, याकूब का परमेश्वर विचार न करेगा। 
Psalms 94:8 तुम जो प्रजा में पशु सरीखे हो, विचार करो; और हे मूर्खों तुम कब तक बुद्धिमान हो जाओगे? 
Psalms 94:9 जिसने कान दिया, क्या वह आप नहीं सुनता? जिसने आंख रची, क्या वह आप नहीं देखता? 
Psalms 94:10 जो जाति जाति को ताड़ना देता, और मनुष्य को ज्ञान सिखाता है, क्या वह न समझाएगा? 
Psalms 94:11 यहोवा मनुष्य की कल्पनाओं को तो जानता है कि वे मिथ्या हैं। 
Psalms 94:12 हे याह, क्या ही धन्य है वह पुरूष जिस को तू ताड़ना देता है, और अपनी व्यवस्था सिखाता है, 
Psalms 94:13 क्योंकि तू उसको विपत्ति के दिनों में उस समय तक चैन देता रहता है, जब तक दुष्टों के लिये गड़हा नहीं खोदा जाता। 
Psalms 94:14 क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा को न तजेगा, वह अपने निज भाग को न छोड़ेगा; 
Psalms 94:15 परन्तु न्याय फिर धर्म के अनुसार किया जाएगा, और सारे सीधे मन वाले उसके पीछे पीछे हो लेंगे। 
Psalms 94:16 कुकर्मियों के विरुद्ध मेरी ओर कौन खड़ा होगा? मेरी ओर से अनर्थकारियों का कौन साम्हना करेगा? 
Psalms 94:17 यदि यहोवा मेरा सहायक न होता, तो क्षण भर में मुझे चुपचाप हो कर रहना पड़ता। 
Psalms 94:18 जब मैं ने कहा, कि मेरा पांव फिसलने लगा है, तब हे यहोवा, तेरी करूणा ने मुझे थाम लिया। 
Psalms 94:19 जब मेरे मन में बहुत सी चिन्ताएं होती हैं, तब हे यहोवा, तेरी दी हुई शान्ति से मुझ को सुख होता है। 
Psalms 94:20 क्या तेरे और दुष्टों के सिंसाहन के बीच सन्धि होगी, जो कानून की आड़ में उत्पात मचाते हैं? 
Psalms 94:21 वे धर्मी का प्राण लेने को दल बान्धते हैं, और निर्दोष को प्राणदण्ड देते हैं। 
Psalms 94:22 परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है। 
Psalms 94:23 और उसने उनका अनर्थ काम उन्हीं पर लौटाया है, और वह उन्हें उन्हीं की बुराई के द्वारा सत्यानाश करेगा; हमारा परमेश्वर यहोवा उन को सत्यानाश करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 5:1-21