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शुक्रवार, 20 मई 2016

सत्य वचन


   बहुत से लोगों का मानना है कि परमेश्वर का वचन बाइबल केवल कालपनिक कहानियों का संकलन है - एक लड़के ने दैत्य को मारा; एक मनुष्य को बड़ी सी मछली ने निगल लिया; एक व्यक्ति ने पानी का जहाज़ बनाकर अपने परिवार तथा जानवरों को जलप्रलय से बचा लिया, आदि। यहाँ तक कि कुछ धार्मिक लोग भी यही मानते हैं कि बाइबल की बातें अच्छी नैतिक कहानियां हैं जो हमें कुछ आत्मिक बातों की शिक्षाएं प्रदान करने के लिए लिखी गई हैं।

   किंतु स्वयं प्रभु यीशु ने बाइबल की इन घटनाओं को सत्य घटनाएं कहकर लोगों के सामने इनकी पुष्टि करी। नूह द्वारा जलप्रलय से बचने के लिए जहाज़ बनाने के द्वारा प्रभु यीशु ने समझाया कि उसका पुनःआगमन भी ऐसे ही होगा, जब लोग उसकी आशा भी नहीं कर रहे होंगे: "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी। और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा" (मत्ती 24:37-39)।

   प्रभु यीशु ने मछली के पेट में काटे गए योना के तीन दिनों के उदाहरण के द्वारा कब्र में बिताए जाने वाले अपने तीन दिनों को समझाया "यूनुस तीन रात दिन जल-जन्‍तु के पेट में रहा, वैसे ही मनुष्य का पुत्र तीन रात दिन पृथ्वी के भीतर रहेगा" (मत्ती 12:40)। प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में नूह और जलप्रलय की घटना के द्वारा भविष्य में प्रभु यीशु के पुनःआगमन के विषय में सचेत किया (2 पतरस 2:4-9)।

   परमेश्वर ने हमें अपना वचन दिया है, जो सत्य है, यथार्थ है और प्रमाणित है; ना कि कालपनिक कहानियों का संकलन है। अनेक प्रयासों के बावजूद आज तक बाइबल की कोई एक बात भी गलत प्रमाणित नहीं हो पाई है। परमेश्वर का यह अटल वचन हमें चिताता है कि प्रभु यीशु का पुनःआगमन होगा और वह अपने अनुयायियों को अनन्त काल तक अपने साथ सुख और शान्ति में रहने के लिए ले जाएगा तथा जगत न्याय में जाएगा। प्रभु यीशु ने जो चिन्ह उसके पुनःआगमन के समय के पूरा होने के सम्बंध में दिए हैं (मत्ती 24), वे आज के इस समय में हमारी आंखों के सामने पूरे हो रहे हैं; क्या आप उसके पुनःआगमन और अपने न्याय के लिए तैयार हैं? - सिंडी हैस कैस्पर

यदि हम प्रभु यीशु के पुनःआगमन की प्रतीक्षा में हैं 
तो हमारे पास आशावान रहने का उचित और भला कारण है।

आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। - यूहन्ना 1:1

बाइबल पाठ: मत्ती 24:32-44
Matthew 24:32 अंजीर के पेड़ से यह दृष्‍टान्‍त सीखो: जब उस की डाली को मल हो जाती और पत्ते निकलने लगते हैं, तो तुम जान लेते हो, कि ग्रीष्म काल निकट है। 
Matthew 24:33 इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो, कि वह निकट है, वरन द्वार ही पर है।
Matthew 24:34 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो लें, तब तक यह पीढ़ी जाती न रहेगी। 
Matthew 24:35 आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी। 
Matthew 24:36 उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता। 
Matthew 24:37 जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:38 क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी। 
Matthew 24:39 और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:40 उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। 
Matthew 24:41 दो स्‍त्रियां चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी। 
Matthew 24:42 इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा। 
Matthew 24:43 परन्तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता। 
Matthew 24:44 इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 6:45-71


गुरुवार, 19 मई 2016

निराशा


   मैं और मेरी बहिन, ताईवान में अपनी छुट्टियाँ मनाने जाने की उत्सुक्ता से प्रतीक्षा कर रहे थे। हमने अपने वायुयान के टिकिट खरीद लिए थे और होटल में कमरे भी आरक्षित कर लिए थे। लेकिन उस यात्रा के दो सप्ताह पहले, घर में आई एक आपात स्थिति के कारण मेरी बहिन को घर पर ही रुक जाना पड़ा। हमें बहुत निराशा हुई कि हमारी योजना तथा कार्यक्रम बाधित हो गए थे और हम अपेक्षित नहीं कर पा रहे थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु के जीवन काल की एक घटना में देखते हैं कि प्रभु यीशु अपने चेलों के साथ एक आवश्यक उद्देश्य के अन्तर्गत जा रहे थे, परन्तु उनकी यह यात्रा बाधित हुई (मरकुस 5:21-42)। अराधनालय के मुख्या, याइर की बेटी बहुत बीमार थी और वह प्रभु यीशु के पास अपनी बेटी कि चंगाई के लिए याचना करने आया था। समय कीमती था, देर नहीं करी जा सकती थी इसलिए प्रभु यीशु तुरंत अपने चेलों के साथ याइर के घर की ओर चल पड़े। एक बड़ी भीड़ उनके साथ चल रही थी, उनपर गिरी पड़ती थी। अचानक ही प्रभु यीशु रुक गए और उन्होंने प्रश्न किया, "...मेरा वस्‍त्र किस ने छूआ" (मरकुस 5:30)?

   चेले यह प्रश्न सुनकर खिन्न हुए और बोले "...तू देखता है, कि भीड़ तुझ पर गिरी पड़ती है, और तू कहता है; कि किस ने मुझे छुआ" (मरकुस 5:31)? लेकिन प्रभु यीशु के लिए उद्देश्य में आई यह बाधा एक अन्य महिला को चंगा करने और अपनी सामर्थ को प्रगट करने का अवसर था। उस भीड़ में एक स्त्री भी थी जिसे 12 वर्ष से लहु बहने की बीमारी थी, और सभी प्रयास तथा इलाज करवा लेने के बावजूद उसका रोग गया नहीं था। यहूदी मान्यताओं के अनुसार इस बहते लहु के कारण वह अपवित्र थी और सामाजिक तथा धार्मिक संगति तथा कार्यों में सम्मिलित होने के अयोग्य थी (लैव्यवस्था 15:25-27)। प्रभु यीशु पर विश्वास करके इस स्त्री ने अपने मन में ठाना कि यदि वह उसका वस्त्र भर छू लेगी तो चंगी हो जाएगी, और इसीलिए उसने भीड़ में होकर चुपके से प्रभु यीशु को छू लिया और उसे अपने विश्वास के अनुसार तुरंत चंगाई मिल भी गई; किंतु प्रभु यीशु ने इस बात को तुरंत पहचान लिया और रुक कर प्रश्न किया, उस स्त्री से उसके विश्वास का अंगीकार करवाया।

   उस स्त्री को मिली यह चंगाई तथा संबंधित वार्तालाप में बीता समय याइर की बेटी के लिए भारी पड़ गया - उसका देहांत हो गया। सबको लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता है, अब बहुत देर हो गई है। लेकिन याइर के उद्देश्य में आई उस स्त्री की चंगाई की बाधा, याइर तथा अन्य लोगों के लिए प्रभु यीशु को और बेहतर जानने का अवसर बन गई। प्रभु यीशु ने याइर को आश्वस्त किया, उसके घर जाकर उसकी बेटी को पुनः जीवित करके माता-पिता को सौंप दिया।

   सभी बाधाएं अन्ततः प्रभु यीशु की अद्वितीय सामर्थ को प्रगट करने और परमेश्वर की महिमा होने का कारण बन गईं। वह जो हमारे लिए निराशा का कारण है, यदि प्रभु परमेश्वर के हाथों में समर्पित हो, तो वही हमारे लिए आशीष और परमेश्वर की महिमा का कारण हो जाता है। - पो फैंग चिया


अपने सामने आने वाली हर बाधा में प्रभु परमेश्वर के उद्देश्यों को ढूंढ़ें।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: मरकुस 5:21-42
Mark 5:21 जब यीशु फिर नाव से पार गया, तो एक बड़ी भीड़ उसके पास इकट्ठी हो गई; और वह झील के किनारे था। 
Mark 5:22 और याईर नाम आराधनालय के सरदारों में से एक आया, और उसे देखकर, उसके पांवों पर गिरा। 
Mark 5:23 और उसने यह कहकर बहुत बिनती की, कि मेरी छोटी बेटी मरने पर है: तू आकर उस पर हाथ रख, कि वह चंगी हो कर जीवित रहे। 
Mark 5:24 तब वह उसके साथ चला; और बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली, यहां तक कि लोग उस पर गिरे पड़ते थे।
Mark 5:25 और एक स्त्री, जिस को बारह वर्ष से लोहू बहने का रोग था। 
Mark 5:26 और जिसने बहुत वैद्यों से बड़ा दुख उठाया और अपना सब माल व्यय करने पर भी कुछ लाभ न उठाया था, परन्तु और भी रोगी हो गई थी। 
Mark 5:27 यीशु की चर्चा सुनकर, भीड़ में उसके पीछे से आई, और उसके वस्‍त्र को छू लिया। 
Mark 5:28 क्योंकि वह कहती थी, यदि मैं उसके वस्‍त्र ही को छू लूंगी, तो चंगी हो जाऊंगी। 
Mark 5:29 और तुरन्त उसका लोहू बहना बन्‍द हो गया; और उसने अपनी देह में जान लिया, कि मैं उस बीमारी से अच्छी हो गई। 
Mark 5:30 यीशु ने तुरन्त अपने में जान लिया, कि मुझ में से सामर्थ निकली है, और भीड़ में पीछे फिरकर पूछा; मेरा वस्‍त्र किस ने छूआ? 
Mark 5:31 उसके चेलों ने उस से कहा; तू देखता है, कि भीड़ तुझ पर गिरी पड़ती है, और तू कहता है; कि किस ने मुझे छुआ? 
Mark 5:32 तब उसने उसे देखने के लिये जिसने यह काम किया था, चारों ओर दृष्टि की। 
Mark 5:33 तब वह स्त्री यह जानकर, कि मेरी कैसी भलाई हुई है, डरती और कांपती हुई आई, और उसके पांवों पर गिरकर, उस से सब हाल सच सच कह दिया। 
Mark 5:34 उसने उस से कहा; पुत्री तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है: कुशल से जा, और अपनी इस बीमारी से बची रह।
Mark 5:35 वह यह कह ही रहा था, कि आराधनालय के सरदार के घर से लोगों ने आकर कहा, कि तेरी बेटी तो मर गई; अब गुरू को क्यों दुख देता है? 
Mark 5:36 जो बात वे कह रहे थे, उसको यीशु ने अनसुनी कर के, आराधनालय के सरदार से कहा; मत डर; केवल विश्वास रख। 
Mark 5:37 और उसने पतरस और याकूब और याकूब के भाई यूहन्ना को छोड़, और किसी को अपने साथ आने न दिया। 
Mark 5:38 और अराधनालय के सरदार के घर में पहुंचकर, उसने लोगों को बहुत रोते और चिल्लाते देखा। 
Mark 5:39 तब उसने भीतर जा कर उस से कहा, तुम क्यों हल्ला मचाते और रोते हो? लड़की मरी नहीं, परन्तु सो रही है। 
Mark 5:40 वे उस की हंसी करने लगे, परन्तु उसने सब को निकाल कर लड़की के माता-पिता और अपने साथियों को ले कर, भीतर जहां लड़की पड़ी थी, गया। 
Mark 5:41 और लड़की का हाथ पकड़कर उस से कहा, ‘तलीता कूमी’; जिस का अर्थ यह है कि ‘हे लड़की, मैं तुझ से कहता हूं, उठ’। 
Mark 5:42 और लड़की तुरन्त उठ कर चलने फिरने लगी; क्योंकि वह बारह वर्ष की थी। और इस पर लोग बहुत चकित हो गए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 6:22-44


बुधवार, 18 मई 2016

सूचि


   मेरे एक मित्र ने हाल ही में मुझे बताया कि उसने अपनी बहन को यूरोप की यात्रा करवा कर, उसने अपनी मृत्युपूर्व इच्छाओं की सूचि में से एक और पूरी कर ली है। मेरा वह मित्र स्वयं तो अनेक बार यूरोप जा चुका था, लेकिन उसकी बहन कभी यूरोप नहीं गई थी, और वह चाहता था कि उसकी बहन भी यूरोप देख सके। उस मित्र की इच्छा सूचि में यह निःस्वार्थ इच्छा का होना मेरे लिए विस्मयकारी था; इसने मुझे विचार करने पर बाध्य किया कि मेरी इच्छाएं कितनी अपने आप पर और कितनी दूसरों पर केंद्रित होती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर द्वारा दिए गए वरदानों तथा उनके सदुपयोग के बारे में निर्देश दिए (रोमियों 12)। यदि हम इन वरदानों पर थोड़ा विचार करें तो पाएंगे कि यह सभी वरदान दूसरों की भलाई से संबंधित हैं; उदाहरणस्वरूप, सिखाने का वरदान शिक्षक की ही नहीं वरन उसके विद्यार्थियों की उन्नति और भलाई के लिए है। इसी प्रकार पद 6 से 8 में उल्लेखित अन्य वरदानों के साथ भी यही बात है। पौलुस ने परमेश्वर की इस उदार भावना को हमारे अनुसरण के लिए पद 10 में रेखंकित किया: "भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।"

   पौलुस ने ना केवल इस रवैये को अपनी शिक्षाओं में कहा, वरन उसने इसे अपने जीवन में जी कर भी दिखाया; उसने औरों को अपने साथ अपनी मसीही सेवकाई में सम्मिलित किया, उन्हें सिखाया और आने वाली मसीही विश्वासियों की पीढ़ी की भलाई के लिए उन्हें तैयार किया। साथ ही पौलुस ने उदारता, आतिथ्य, क्षमा, अनुकंपा आदि को अपने दैनिक व्यवहार का एक अभिन्न अंग बनाकर अपने साथियों तथा हमारे लिए एक सजीव उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

   जीवन के हमारे उद्देश्यों की सूचि में एक अनिवार्य बात होनी चाहिए, परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए वरदानों का दूसरों की भलाई तथा परमेश्वर की महिमा के लिए सदुपयोग। - डेविड मैक्कैसलैंड


स्वस्थ आत्मिक जीवन के लिए नम्रता और दूसरों की भलाई का अभ्यास करते रहें।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:3-5

बाइबल पाठ: रोमियों 12
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुवाई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे। 
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। 
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। 
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। 
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो। 
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो। 
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। 
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। 
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 6:1-21


मंगलवार, 17 मई 2016

संपर्क


   हम मनुष्य प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष, लौकिक तथा अलौकिक, दोनों ही सच्चाईयों के संपर्क में रहते हैं। मैं इस बात के बारे में तब सोचने लगा जब मैं न्यूज़ीलैंड के समुद्री तट से एक नाव में व्हेल मछलियों को देखने के लिए गया। व्हेल मछली कुछ देर पानी की सतह पर रहकर आराम करती, कुछ लंबी-लंबी सांसें लेती जिससे जब वह श्वास बाहर निकालती तो एक अद्भुत फव्वारा सा निकलता, और फिर वह लगभग एक मील की गहराई तक पानी में अपना भोजन ढूँढ़ने और खाने के लिए उतर जाती। यद्यपि उन व्हेल मछलियों का पानी अन्दर अपना एक संसार है, वहाँ के अपने जीव-जन्तु हैं, लेकिन उसे सांस लेने और ऑक्सीजन द्वारा अपना रक्त साफ करने के लिए पानी कि सतह पर आना ही पड़ता है। व्हेल पानी के बाहर के संसार के बारे में कुछ नहीं जानती है, लेकिन जीवित रहने के लिए पानी की सतह पर आकर पानी के बाहर के संसार के साथ उसे संपर्क बना कर रखना ही होता है।

   यही हमारी भी स्थिति है, जैसे व्हेल को अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए ऑक्सीजन लेने पानी की सतह पर आना होता है, वैसे ही हमें भी अपने आत्मा, मन और हृदय को स्वच्छ रखने के लिए परमेश्वर के संपर्क में बारंबार आना ही होता है। हमारे लिए लौकिक और आलौकिक में कोई स्पष्ट विभाजन नहीं है; जिस संसार में हम रहते और कार्य करते हैं वह ’या तो इस ओर, नहीं तो उस ओर’ का संसार नहीं है। एक मसीही विश्वासी होने के नाते मैं जो प्रार्थना, आराधना, परमेश्वर के प्रेम को ज़रूरतमंदों, बीमारों और बन्धनों में पड़े हुओं तक पहुँचाने का कार्य करता हूँ, वह लौकिक भी है और अलौकिक भी, सांसारिक भी है और स्वर्गीय भी। हमारे सभी कार्य इस प्रत्यक्ष संसार में, जिसे हम देख, छू, सूंघ और अनुभव कर सकते हैं में होते हैं, लेकिन हमारे जीवनों पर उनके प्रभाव ना केवल इस संसार में वरन आने वाले संसार में भी जाते हैं।

   जिस परमेश्वर ने हमें प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले इस संसार की तथा हमारी सृष्टि करी है, वही इस प्रत्यक्ष संसार को अप्रत्यक्ष रीति से संचालित करता है तथा हमें अपने संपर्क में आने के तरीके और अवसर भी देता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा: "और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना" (कुलुस्सियों  1:22-23)। प्रभु यीशु में होकर संभव हुए परमेश्वर से इस मेल-मिलाप के द्वारा परमेश्वर ने हमारे लिए यह संभव किया है कि हम उससे संपर्क में बने रहें तथा वह आत्मिक ऑक्सीजन, अर्थात उसका वचन, प्राप्त करते रहें जो हमारे प्राण, देह और आत्मा को स्वच्छ एवं स्वस्थ रखता है। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर का सिंहासन उसके बच्चों की पहुँच के बाहर कभी नहीं रहता।

क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं। - रोमियों 5:10-11

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:9-23
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ। 
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है। 
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। 
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। 
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 5:25-47


सोमवार, 16 मई 2016

अच्छे सलाहकार


   पन्द्रहवीं शताब्दी के धर्मशास्त्री थौमस ए. केम्पिस ने कहा था, "ऐसा बुद्धिमान कौन है जो हर विषय का सिद्ध ज्ञान रखे? इसलिए, अपने विचार पर आवश्यकता से अधिक भरोसा मत रखना, वरन औरों के विचार सुनने के लिए भी तैयार रहना। चाहे आपके अपने विचार अच्छे भी हों, तौभी परमेश्वर के प्रेम में होकर यदि आप अपने विचार को छोड़कर दूसरों के बेहतर विचार सुनकर उन्हें मान लेंगे, तो इससे आपका भला ही होगा।" थौमस ने जीवन के निर्णय लेने में भले सलाहकारों की उपयोगिता और महत्व को पहचान लिया था।

   जीवन में परमेश्वर की इच्छा जानने और उसके अनुसार चलने के लिए बुद्धिमान व्यक्ति को अपने समक्ष ऐसे विकल्प बनाए रखने चाहिएं जिन में होकर परमेश्वर का मार्गदर्शन उस तक पहुंचा सके, जैसे कि परमेश्वर का वचन बाइबल, परमेश्वर को समर्पित और उससे प्रेम करने वाले परिपक्व लोग, स्वयं प्रार्थना और बाइबल अध्ययन में परमेश्वर के साथ समय बिताना आदि। जब कोई व्यक्ति अच्छे सलाहकारों की सलाह लेता है, तो वह यह भी दिखाता है कि उसे एहसास है कि उस निर्णय के लेने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातों को संभवतः वह स्वयं जान नहीं पाया है। परमेश्वर के वचन बाइबल में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति सुलेमान ने बताया कि अच्छे सलाहकारों से सलाह लेने का क्या महत्व है: "बिना सम्मति की कल्पनाएं निष्फल हुआ करती हैं, परन्तु बहुत से मंत्रियों की सम्मत्ति से बात ठहरती है" (नीतिवचन 15:22)।

   प्रभु यीशु ही हमारा अद्भुत, युक्ति करने वाला, प्राक्रमी परमेश्वर है (यशायाह 9:6), वही हमारे लिए परमेश्वर की बुद्धि है, और वही अच्छे सलाहकारों के द्वारा हमें सुरक्षित रखता है। इसलिए परमेश्वर के भय में रहने और चलने वाले, परमेश्वर के वचन में दृढ़ और स्थापित रहने वाले अच्छे सलाहकारों को ढूँढ़ें, उनकी संगति में रहें, उनके लिए प्रभु परमेश्वर का धन्यवाद करें और अपने जीवन के लिए स्पष्ट और नेक सलाह प्राप्त करने में उनका सहयोग लेते रहें। - मार्विन विलियम्स


यदि आप अच्छे सलाहकारों की सलाह लेते रहेंगे तो सही निर्णय ले पाने की संभावनाओं को बढ़ाते रहेंगे।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 8:12-21
Proverbs 8:12 मैं जो बुद्धि हूं, सो चतुराई में वास करती हूं, और ज्ञान और विवेक को प्राप्त करती हूं। 
Proverbs 8:13 यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है। घमण्ड, अंहकार, और बुरी चाल से, और उलट फेर की बात से भी मैं बैर रखती हूं। 
Proverbs 8:14 उत्तम युक्ति, और खरी बुद्धि मेरी ही है, मैं तो समझ हूं, और पराक्रम भी मेरा है। 
Proverbs 8:15 मेरे ही द्वारा राजा राज्य करते हैं, और अधिकारी धर्म से विचार करते हैं; 
Proverbs 8:16 मेरे ही द्वारा राजा हाकिम और रईस, और पृथ्वी के सब न्यायी शासन करते हैं। 
Proverbs 8:17 जो मुझ से प्रेम रखते हैं, उन से मैं भी प्रेम रखती हूं, और जो मुझ को यत्न से तड़के उठ कर खोजते हैं, वे मुझे पाते हैं। 
Proverbs 8:18 धन और प्रतिष्ठा मेरे पास है, वरन ठहरने वाला धन और धर्म भी हैं। 
Proverbs 8:19 मेरा फल चोखे सोने से, वरन कुन्दन से भी उत्तम है, और मेरी उपज उत्तम चान्दी से अच्छी है। 
Proverbs 8:20 मैं धर्म की बाट में, और न्याय की डगरों के बीच में चलती हूं, 
Proverbs 8:21 जिस से मैं अपने प्रेमियों को परमार्थ के भागी करूं, और उनके भण्डारों को भर दूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 24-25
  • यूहन्ना 5:1-24


रविवार, 15 मई 2016

संपूर्ण


   हमारे बेटे मार्क के सेना में भरती को 4 सप्ताह ही हुए थे कि एक प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान उसके घुटने में गंभीर चोट लग गई। परिणामस्वरूप उसे सेना छोड़नी पड़ी, और 19 वर्ष की आयु में उसे चलने-फिरने के लिए लकड़ी का सहारा लेना पड़ा। चोट की गंभीरता के कारण उसे 2 वर्ष तक आराम, पुनःस्थापन के व्यायाम और पुनःस्वस्थ होने की लंबी प्रक्रिया से निकलना पड़ा। अन्ततः वह अपने घुटने पर बंधे सहायकों (braces) को उतारने पाया, जो उसे चोटिल होने के बाद से बांध कर रखने पड़े थे। यद्यपि आज भी उसे थोड़ा-बहुत दर्द होता रहता है लेकिन चंगा होने की लंबी और धीमी प्रक्रिया से होकर वह आज अपनी टांग को पूरी तरह से प्रयोग करने की स्थिति में आ गया है।

   हमारे शरीरों को भला-चंगा होने में हमारे अनुमान से कहीं अधिक समय लगता है। यही बात हमारी आत्मिक चंगाई पर भी ऐसे ही लागू होती है। जीवन में लिए गए गलत निर्णयों, अविवेकपूर्ण कार्यों या दूसरों द्वारा हमें पहुंचाए गए आघातों के कारण हम पर आने वाले बोझ या घाव जीवन पर्यन्त हमारे साथ रहते हैं; उनकी पीड़ा हमें समय-असमय स्मरण आति रहती है। लेकिन हम मसीही विश्वासियों के लिए हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता की ओर से आश्वासन है कि मसीह यीशु में लाए गए विश्वास के साथ ही हमारी आत्मिक चंगाई आरंभ हो जाती है और हम अन्ततः इन सब बातों से निकल कर एक ऐसे स्थान पर होंगे जहाँ इनका ना तो स्मरण और ना कोई प्रभाव शेष रहेगा। इस विषय में परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना लिखता है: "और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)।

   जब भी हम किसी पीड़ादायक परिस्थिति में हों तो इस बात को ध्यान करना शान्तिदायक होता है कि हमारे परमेश्वर पिता की उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहती है और वह हमें संपूर्ण तथा निश्चिंत करने के मार्ग बना कर देता रहता है, और अन्ततः अपने साथ अनन्त शांति में अनन्त काल के लिए ले लेगा। - बिल क्राउडर


हम जैसे ही मसीह यीशु के पास अपनी व्यथित तथा टूटी हुई दशा में आते हैं, 
वह हमें संपूर्ण करना आरंभ कर देता है।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है; और परमेश्वर सच्चा है, वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-8
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा। 
Revelation 21:8 पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 22-23
  • यूहन्ना 4:31-54


शनिवार, 14 मई 2016

भला


   मेरे बाल काटने के बाद मेरे बालों की देखभाल करने वाले ने कहा, "आपके बाल वास्तव में काफी स्वस्थ हैं; मेरी आशा है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि आप हमारे द्वारा बनाए गए उत्पाद प्रयोग करती हैं।" मैंने उत्तर दिया, "माफ कीजिए, लेकिन ऐसा नहीं है; मैं तो केवल वह प्रयोग करती हूँ जिसकी सुगन्ध अच्छी होती है और जो महंगा नहीं होता।" फिर मैंने उससे आगे कहा, "लेकिन मैं अच्छा भोजन खाने पर बहुत ध्यान देती हूँ; मेरे विचार से इससे बहुत प्रभाव पड़ता है।"

   अपने आप को आकर्षक बनाने के लिए जो कुछ हम लोग करते हैं, उन बातों के बारे में सोचने पर मेरा ध्यान इस पर भी जाता है कि अपने आप को आत्मिक रीति से आकर्षक बनाने के लिए हम क्या करते हैं? यरुशालेम के धार्मिक अगुवओं के साथ हुए प्रभु यीशु के वार्तालाप में, प्रभु ने यह मुद्दा भी उनके सामने रखा (मत्ती 23)। वे धार्मिक अगुवे, परमेश्वर द्वारा दिए गए नियमों के अलावा अपने ही द्वारा बनाए गए अनेकों उल्झाने वाले नियमों का पालन करते थे, जिससे कि अपने आस-पास के लोगों और समाज को यह दिखा सकें कि वे उन बाकी सभी लोगों से भले और धर्मी थे। लेकिन उनके ये प्रयास परमेश्वर को किसी रीति प्रभावित नहीं करते थे। प्रभु यीशु ने उनसे कहा, "हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं" (पद 25)। अपने आप को औरों से अधिक भला और धर्मी दिखाने के उनके प्रयास, उलटा यही दिखाते थे कि वास्तव में भले और धर्मी नहीं थे।

   प्रत्येक समाज तथा संस्कृति के अपने धार्मिक आचरण, व्यवहार और प्रथाएं होती हैं; लेकिन परमेश्वर किसी जाति, समाज, धर्म या संस्कृति विशेष से बंधा हुआ नहीं है। परमेश्वर के आदर्श तथा उसको ग्रहणयोग्य व्यवहार के मानक भी उसने स्वयं ही निर्धारित किए हैं; और जो उसे पसन्द है उसका आँकलन वह दूसरों के देखने या उनके विचारों के अनुसार नहीं करता। परमेश्वर को एक कोमल निर्मल हृदय और पवित्र तथा नम्र मंशाएं भाती हैं।

   परमेश्वर को ग्रहणयोग्य जीवन बाहर से भला दिखने वाला नहीं वरन हर बात और हर परिस्थिति में अन्दर से भला बने रहने वाला जीवन है। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


अन्दर से भले हुए बिना, हम बाहर से भले दिख तो सकते हैं, परन्तु भले रह नहीं सकते।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। रोमियों 12:1-2 

बाइबल पाठ: मत्ती 23:23-31
Matthew 23:23 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गंभीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। 
Matthew 23:24 हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छर को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो। 
Matthew 23: हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं। 
Matthew 23:26 हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों।
Matthew 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। 
Matthew 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Matthew 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धर्मियों की कब्रें बनाते हो। 
Matthew 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपने बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते। 
Matthew 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्तान हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30