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शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

शान्तिदूत


   किसी ने कलपना भी नहीं की थी कि अमेरिका के टेक्सस प्रांत में उमबार्जर का वह छोटा सा चर्च चित्रकला का अन्तर्राष्ट्रीय मंच बन जाएगा। दूसरे विश्वयुद्ध के अन्त समय में, इटली के सात युद्ध-बन्दियों को, जो निकट के एक युद्ध-बन्दी शिविर में रखे गए थे, चुना गया कि वे उस चर्च की ईंटों से बनी साधारण सी दीवर को संवारने का कार्य करें। पहले तो वे बन्दी अपने बंधकों की सहायता करने से हिचकिचाए, परन्तु फिर वे इस शर्त पर ऐसा करने को राज़ी हो गए कि उनका कार्य मसीही भाईचारे और सामनजस्य को समर्पित प्रयास माना जाए। उनमें से एक युद्ध-बन्दी ने बाद में बताया कि जब उन्होंने इस कार्य को करना आरंभ किया, तो चित्र बनाते समय और लकड़ी पर प्रभु यीशु के अन्तिम भोज की नक्काशी करते हुए, "भले भाव की एक लहर अपने आप ही हम में होकर प्रवाहित होने लग गई। कोई भी युद्ध अथवा बीते समय के बारे में बात नहीं करता था, क्योंकि हम यहाँ शान्ति तथा प्रेम का कार्य कर रहे थे।"

   हमारे जीवन परमेश्वर के प्रेम का परिचय दे पाने की अनोखी संभावनाओं से भरे रहते हैं। हम अपने आप को कठोर भावनाओं, तनाव पूर्ण संबंधों और सीमित कर देने वाली परिस्थितियों से घिरे तथा बंधे अनुभव कर सकते हैं; परन्तु शान्ति में सामर्थ है कि वह किसी भी बाधा से पार निकलकर बाहर आ सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा, "पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है" (याकूब 3:17-18)।

   आज हम चाहे जहाँ भी हों, चाहे जैसी भी परिस्थिति में हों, परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह वहीं पर हमें अपने शान्तिदूत बनाकर उपयोग करे। - डेविड मैक्कैसलैंड


सर्वोत्तम शान्तिदूत वे होते हैं जो अपने जीवनों में परमेश्वर की शान्ति को जानते हैं।

धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। - मत्ती 5:9

बाइबल पाठ: याकूब 3:13-18
James 3:13 तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्‍छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्पन्न होती है। 
James 3:14 पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना। 
James 3:15 यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है। 
James 3:16 इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है। 
James 3:17 पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। 
James 3:18 और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2


गुरुवार, 8 सितंबर 2016

क्या बोएं?


   मेरे कॉलेज भवन के घंटाघर पर एक प्रतिमा बनी है, जिसका नाम है "बोनेवाला"। उसके नीचे परमेश्वर के वचन बाइबल में से गलतियों 6:7 का भाग "मनुष्य जो बोता है" लिखा गया है। मिशिगन स्टेट विश्वविद्यालय कृषि शोध में अग्रणीय है; परन्तु कृषि तकनीकी तथा फसल उत्पादन के क्षेत्र में लाए गए अनेकों सुधारों के बावजूद, आज भी मक्की के दाने बोने से सेम की फसल पाना संभव नहीं हुआ है! जो हम बोते हैं, उसी की फसल हमें प्राप्त होती है।
   प्रभु यीशु मसीह ने अपनी शिक्षाओं को समझाने के लिए कृषि से संबंधित कई रूपक अलंकारों का प्रयोग किया। बीज बोने वाले के दृष्टांत में (मरकुस 4:1-20), उन्होंने परमेश्वर के वचन को भिन्न प्रकार की भूमि में बोए गए बीज के रूपक से समझाया। जैसा उस दृष्टांत में कहा गया है, बोने वाला तो बिना फर्क किए सभी स्थानों पर बीज डालता है, यह जानते हुए कि कुछ बीज ऐसे स्थानों पर भी पड़ेगा जहाँ वह उगने नहीं पाएगा।

   प्रभु यीशु के समान ही हमें भी हर समय सभी स्थानों पर बीज डालना है। यह परमेश्वर की ज़िम्मेदारी है कि वह बीज कहाँ गिरे और कैसा उगे तथा फल लाए। परमेश्वर नहीं चाहता है कि हम विनाश की कटनी काटें, इसलिए वह चाहता है कि हम अच्छा और सही बीज बोएं: "दुष्ट मिथ्या कमाई कमाता है, परन्तु जो धर्म का बीज बोता, उसको निश्चय फल मिलता है" (नीतिवचन 11:18)। प्रेरित पौलुस ने इस रूपक को और विस्तार से समझाते हुए गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखा कि बुराई के नहीं वरन अनन्त जीवन की आशीष के बीज बोएं (गलतियों 6:8)।

   इस प्रश्न, "क्या बोएं?" का उत्तर है, "वही बोएं जिसकी फसल आप काटना चाहते हैं"। अच्छाई की फसल काटने के लिए आज से ही अच्छाई के बीज बोना आरंभ कर दें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


ज़मीन के अन्दर बोया गया बीज ही फलदायक वृक्ष बनता है;
 निःस्वार्थ जीवन ही अनन्त आशीष की फसल लाता है।

धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। - गलतियों 6:7-8

बाइबल पाठ: मरकुस 4:1-20
Mark 4:1 वह फिर झील के किनारे उपदेश देने लगा: और ऐसी बड़ी भीड़ उसके पास इकट्ठी हो गई, कि वह झील में एक नाव पर चढ़कर बैठ गया और सारी भीड़ भूमि पर झील के किनारे खड़ी रही। 
Mark 4:2 और वह उन्हें दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें सिखाने लगो, और अपने उपदेश में उन से कहा। 
Mark 4:3 सुनो: देखो, एक बोनेवाला, बीज बाने के लिये निकला! 
Mark 4:4 और बोते समय कुछ तो मार्ग के किनारे गिरा और पक्षियों ने आकर उसे चुग लिया। 
Mark 4:5 और कुछ पत्थरीली भूमि पर गिरा जहां उसको बहुत मिट्टी न मिली, और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण जल्द उग आया। 
Mark 4:6 और जब सूर्य निकला, तो जल गया, और जड़ न पकड़ने के कारण सूख गया। 
Mark 4:7 और कुछ तो झाड़ियों में गिरा, और झाड़ियों ने बढ़कर उसे दबा लिया, और वह फल न लाया। 
Mark 4:8 परन्तु कुछ अच्छी भूमि पर गिरा; और वह उगा, और बढ़कर फलवन्‍त हुआ; और कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा और कोई सौ गुणा फल लाया। 
Mark 4:9 और उसने कहा; जिस के पास सुनने के लिये कान हों वह सुन ले।
Mark 4:10 जब वह अकेला रह गया, तो उसके साथियों ने उन बारह समेत उस से इन दृष्‍टान्‍तों के विषय में पूछा। 
Mark 4:11 उसने उन से कहा, तुम को तो परमेश्वर के राज्य के भेद की समझ दी गई है, परन्तु बाहर वालों के लिये सब बातें दृष्‍टान्‍तों में होती हैं। 
Mark 4:12 इसलिये कि वे देखते हुए देखें और उन्हें सुझाई न पड़े और सुनते हुए सुनें भी और न समझें; ऐसा न हो कि वे फिरें, और क्षमा किए जाएं। 
Mark 4:13 फिर उसने उन से कहा; क्या तुम यह दृष्‍टान्‍त नहीं समझते? तो फिर और सब दृष्‍टान्‍तों को क्योंकर समझोगे? 
Mark 4:14 बोने वाला वचन बोता है। 
Mark 4:15 जो मार्ग के किनारे के हैं जहां वचन बोया जाता है, ये वे हैं, कि जब उन्होंने सुना, तो शैतान तुरन्त आकर वचन को जो उन में बोया गया था, उठा ले जाता है। 
Mark 4:16 और वैसे ही जो पत्थरीली भूमि पर बोए जाते हैं, ये वे हैं, कि जो वचन को सुनकर तुरन्त आनन्द से ग्रहण कर लेते हैं। 
Mark 4:17 परन्तु अपने भीतर जड़ न रखने के कारण वे थोड़े ही दिनों के लिये रहते हैं; इस के बाद जब वचन के कारण उन पर क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो वे तुरन्त ठोकर खाते हैं। 
Mark 4:18 और जो झाडियों में बोए गए ये वे हैं जिन्होंने वचन सुना। 
Mark 4:19 और संसार की चिन्‍ता, और धन का धोखा, और और वस्‍तुओं का लोभ उन में समाकर वचन को दबा देता है। और वह निष्‍फल रह जाता है। 
Mark 4:20 और जो अच्छी भूमि में बोए गए, ये वे हैं, जो वचन सुनकर ग्रहण करते और फल लाते हैं, कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा, और कोई सौ गुणा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1


बुधवार, 7 सितंबर 2016

ध्यान


   मेरी सेवकाई के आरंभिक वर्षों में, मैं एक चर्च का पास्टर था, जब मेरी बेटी लिब्बी ने मुझसे पूछा, "पिताजी क्या हम प्रसिद्ध हैं?" मैंने उत्तर दिया, "नहीं लिब्बी, हम प्रसिद्ध नहीं हैं"। लिब्बी ने थोड़ा सोच कर खिसियाई हुई आवाज़ में उत्तर दिया, "हम प्रसिद्ध हो जाते यदि और लोग हमारे बारे में जानते!"

   बेचारी लिब्बी, केवल 7 वार्ष की आयु, और अभी से उस बात को लेकर परेशान जिसे लेकर हम में से बहुतेरे सारी उम्र परेशान रहते हैं: हमें कौन पहिचानता है, कौन जानता है और क्या हम वह पहिचान तथा प्रसिद्धी पा रहे हैं जिसके हम हकदार हैं?

   पहचान पाने के लिए हमारा यह संघर्ष समस्या ना होता यदि हम इसके कारण अपने जीवन के ध्यान का केंद्र होने से प्रभु यीशु को विस्थापित नहीं करते। लेकिन जब हम अपने आप पर ध्यान लगाने लगते हैं, प्रभु यीशु पर से हमारा ध्यान स्वतः ही हट जाता है।

   जीवन में यह संभव नहीं है कि हम एक साथ अपने ऊपर भी तथा प्रभु यीशु के ऊपर भी अपना पूरा-पूरा ध्यान लगाए रखें। इसीलिए, परमेश्वर के वचन में बाइबल में प्रेरित पौलुस का कथन, "वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:8) हमारे मसीही जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पौलुस के सामने एक चुनाव था - प्रभु यीशु या फिर वह स्वयं, और पौलुस ने जानते-बूझते हुए उन सभी बातों का तिरिस्कार कर दिया जो उसकी ओर ध्यान खींचतीं जिससे कि वह प्रभु यीशु को और गहराई से जान सके, अनुभव कर सके (पद 7-8, 10)।

   हमारे सामने भी आज यही निर्णय विद्यमान है; क्या हम अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए जीएंगे? या फिर हमारे अपने ध्यान का केंद्र प्रभु यीशु होगा जिससे कि हम उसे और निकटता से जान तथा अनुभव कर सकें! - जो स्टोवैल


हमारे चुनाव किसको महिमा देते हैं, परमेश्वर को या हमें?

यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता हे, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ। - यिर्मयाह 9:23-24

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:1-11
Philippians 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है। 
Philippians 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो। 
Philippians 3:3 क्योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। 
Philippians 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं। 
Philippians 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं। 
Philippians 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला; और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। 
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-2
  • 1 कुरिन्थियों 16


मंगलवार, 6 सितंबर 2016

गीत-संगीत


   मैंने अपने एक मित्र से उसकी माँ की हालत के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि बुढ़ापे ने उनकी स्मरण-शक्ति क्षीण कर दी है, और उन्हें कई लोगों के नाम और बीते समय की अनेकों घटनाएं अब याद नहीं रहती हैं। उसने आगे बताया कि, फिर भी, वे आज भी प्यानो पर बैठकर, बिना किसी छपी हुई हुए गीत-संगीत पुस्तक के, अनेकों भजन अपनी स्मरण-शक्ति से गा लेती हैं।

   प्राचीन दार्शनिकों, प्लेटो और अरस्तु ने संगीत के चँगाई देने वाले गुण के बारे में 2500 वर्ष पूर्व लिखा था। लेकिन उन से भी सदियों पहले, परमेश्वर के वचन बाइबल की पुस्तकों में गीत-संगीत की भरपूरी थी। बाइबल की प्रथम पुस्तक उत्पत्ति में यूबाल जो "...वीणा और बांसुरी आदि बाजों के बजाने की सारी रीति का उत्पादक हुआ" (उत्पत्ति 4:21) के उल्लेख से लेकर, बाइबल की अन्तिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य तक जहाँ परमेश्वर के लोगों को दिखाया गया है कि, "और वे परमेश्वर के दास मूसा का गीत, और मेम्ने का गीत गा गाकर कहते थे, कि हे र्स्‍वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, तेरे कार्य बड़े, और अद्भुत हैं, हे युग युग के राजा, तेरी चाल ठीक और सच्ची है" (प्रकाशितवाक्य 15:3), बाइबल के पन्ने गीत-संगीत की गूंज से भरे पड़े हैं। भजन संहिता बाइबल की गीत-संगीत की पुस्तक है जिसके भजन हमें परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और प्रेम के बारे में बताते हैं; और इस पुस्तक का अन्त होता है इस आहावहन से: "जितने प्राणी हैं सब के सब याह की स्तुति करें! याह की स्तुति करो" (भजन 150:6)।

   आज हमें अपने हृदयों में परमेश्वर की इस गीत-संगीत की सेवकाई की आवश्यकता इतिहास के किसी भी काल में रही आवश्यकता से बढ़कर है। दिन में हमारी चाहे जो भी परिस्थिति रही हो, संध्या के समय हम यही गाते हुए पाए जाएं: "हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊँगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊँचा गढ़, और मेरा करुणामय परमेश्वर है" (भजन 59:17)। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब आप अपनी आशीषों को गिनने लगते हैं, 
तो परमेश्वर कि स्तुति और आराधना स्वतः ही निकलने लगती है।

आओ हम यहोवा के लिये ऊंचे स्वर से गाएं, अपने उद्धार की चट्टान का जयजयकार करें! - भजन 95:1

बाइबल पाठ: भजन 150
Psalms 150:1 याह की स्तुति करो! ईश्वर के पवित्रस्थान में उसकी स्तुति करो; उसकी सामर्थ्य से भरे हुए आकाशमण्डल में उसी की स्तुति करो! 
Psalms 150:2 उसके पराक्रम के कामों के कारण उसकी स्तुति करो; उसकी अत्यन्त बड़ाई के अनुसार उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:3 नरसिंगा फूंकते हुए उसकी स्तुति करो; सारंगी और वीणा बजाते हुए उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:4 डफ बजाते और नाचते हुए उसकी स्तुति करो; तार वाले बाजे और बांसुली बजाते हुए उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:5 ऊंचे शब्द वाली झांझ बजाते हुए उसकी स्तुति करो; आनन्द के महाशब्द वाली झांझ बजाते हुए उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:6 जितने प्राणी हैं सब के सब याह की स्तुति करें! याह की स्तुति करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150
  • 1 कुरिन्थियों 15:29-58


सोमवार, 5 सितंबर 2016

अनन्त


   अमेरीकी गृह-युद्ध से पहले के उथल-पुथल भरे वर्षों में, सन 1859 में, एब्राहम लिंकन को विस्कौनसिन प्रांत के मिल्वॉकी शहर के कृषि संघ को संबोधित करने का अवसर मिला। अपने संबोधन में उन्होंने एक प्राचीन राजा की कहानी सुनाई जो एक ऐसे वाक्य की खोज में था जो हर समय और परिस्थिति में लागू हो। उस राजा के बुद्धिमान सभापतियों के लिए यह कठिन चुनौती थी, लेकिन उन्होंने वह वाक्य पा ही लिया; वाक्य था, "यह भी बीत जाएगा।"

   यह वाक्य हमारे आज के संसार के लिए, जो लगातार बद से बदतर होता जा रहा है, सर्वथा उपयुक्त है। यह बात केवल संसार पर ही लागू नहीं होती; यह हमारे जीवन पर भी लागू होती है क्योंकि हमारे दिन गिनती के हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा, "और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है" (याकूब 4:14)।

   यद्यपि हमारे वर्तमान दिन कुछ समय के हैं और बीत जाएंगे, लेकिन जिस परमेश्वर की हम उपासना और सेवा करते हैं वह अनन्तकाल का है। हमारे अनन्तकाल के परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह में होकर यह अनन्तकाल की आशीष संसार के लोगों के साथ बाँटनी चाही है। वह हम से ऐसे जीवन का वायदा करता है जो कभी समाप्त नहीं होगा, जिसका आनन्द कभी जाता नहीं रहेगा: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)।

   जब मसीह यीशु का पुनःआगमन होगा, वह हमें अपने साथ स्वर्ग ले जाएगा जहाँ हम अनन्तकाल तक उसके साथ रहेंगे। - बिल क्राउडर


आज की आशा के लिए कहानी के अन्त को स्मरण करें
 - परमेश्वर के साथ अनन्तकाल।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: याकूब 4:11
James 4:11 हे भाइयों, एक दूसरे की बदनामी न करो, जो अपने भाई की बदनामी करता है, या भाई पर दोष लगाता है, वह व्यवस्था की बदनामी करता है, और व्यवस्था पर दोष लगाता है; और यदि तू व्यवस्था पर दोष लगाता है, तो तू व्यवस्था पर चलने वाला नहीं, पर उस पर हाकिम ठहरा। 
James 4:12 व्यवस्था देने वाला और हाकिम तो एक ही है, जिसे बचाने और नाश करने की सामर्थ है; तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? 
James 4:13 तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। 
James 4:14 और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। 
James 4:15 इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। 
James 4:16 पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। 
James 4:17 इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 146-147
  • 1 कुरिन्थियों 15:1-28


रविवार, 4 सितंबर 2016

नाम


   एक चिड़िया-घर देखने आने वाले लोग क्रोधित हो गए जब जिस ’अफ्रीकी शेर’ को देखने वे आए थे, वह दहाड़ने की बजाए, भौंकने लग गया! चिड़िया-घर के कर्मचारियों ने बताया कि क्योंकि उनके पास शेर को लाने और रखने के लायक धन नहीं था, इसलिए उन्होंने तिब्बती मैस्टिफ जाति के बड़े से कुत्ते को शेर का सा बना कर रख लिया था। कहने की आवश्यकता नहीं है कि उस चिड़िया-घर की साख़ को बट्टा लगा और लोग वहाँ पुनः जाकर कुछ देखने से पहले भली-भांति सोचेंगे।

   साख़ बहुत नाज़ुक होती है; एक बार बिगड़ जाए तो उसे फिर से स्थापित कर पाना कठिन हो जाता है। ताकत, शोहरत और धन अर्जित करने की वेदी पर साख़ की बलि चढ़ा देना अकसर देखा जाता है; ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सचेत करती है कि, "बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है, और सोने चान्दी से औरों की प्रसन्नता उत्तम है" (नीतिवचन 22:1); तात्पर्य यह कि परमेश्वर हमें बता रहा है कि सच्ची कीमत उस की है जो हम हैं, ना कि उस की जो हमारे पास है।

   प्राचीन यूनानी दार्शनिक सुकरात ने कहा, "अच्छी साख़ कमाने के लिए वैसा बनने का सच्चा प्रयास करें जैसा आप दिखाई देना चाहते हैं।" प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी होने के नाते, प्रभु का नाम हमारे साथ जुड़ा है। हमारे प्रति प्रभु के प्रेम के कारण हम उसके नाम के योग्य चाल-चलन बनाए रखने के प्रयासरत रहें, अपने कार्यों और वचनों से उसकी समानता में होने को अपने जीवनों में दिखाएं।

   हम यदि अपने प्रभु की समानत में चलने के अपने इस प्रयास में असफल भी रहें, तो भी वह अपने प्रेम में होकर हमें उठाकर खड़ा करता है, हमें फिर से सामर्थ और अवसर देता है कि हम उसके नाम के अनुरूप चल सकें। हमारे जीवन और उदाहरण के कारण, हमारे आस-पास के लोग भी हमें बचाने और बदलने वाले प्रभु परमेश्वर को महिमा और आदर देने के लिए प्रेरित होंगे - क्योंकि प्रभु का नाम महिमा, आदर और सारी प्रशंसा के योग्य है। - पोह फैंग चिया


पार्थिव जीवन का सबसे शुद्ध और बहुमूल्य खज़ाना एक निर्मल प्रतिष्ठा है। - शेक्सपियर

यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है। - नीतिवचन 18:10

बाइबल पाठ: नीतिवचन 22:1-5
Proverbs 22:1 बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहने योग्य है, और सोने चान्दी से औरों की प्रसन्नता उत्तम है। 
Proverbs 22:2 धनी और निर्धन दोनों एक दूसरे से मिलते हैं; यहोवा उन दोनों का कर्त्ता है। 
Proverbs 22:3 चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देख कर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़ कर दण्ड भोगते हैं। 
Proverbs 22:4 नम्रता और यहोवा के भय मानने का फल धन, महिमा और जीवन होता है। 
Proverbs 22:5 टेढ़े मनुष्य के मार्ग में कांटे और फन्दे रहते हैं; परन्तु जो अपने प्राणों की रक्षा करता, वह उन से दूर रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 143-145
  • 1 कुरिन्थियों 14:21-40


शनिवार, 3 सितंबर 2016

आशा


   सौर-ऊर्जा से चलने वाला वायु-यान सोलर इंपल्स बिना ईधन लिए दिन और रात उड़ता रह सकता है। इसके अविष्कारक बर्टरैंड पिकर्ड और आन्द्रे बॉर्शबर्ग इससे सारे संसार का चक्कर लगाना चाहते हैं। जब दिन में वायुयान सौर ऊर्जा से उड़ रहा होता है तब साथ ही वह इतनी ऊर्जा और अर्जित कर लेता है कि रात भर भी उड़ सके। जब सूर्योदय होता है, पिकर्ड का कहना है कि तब "फिर से आशा आती है कि हम आगे बढ़ते रह सकते हैं।"

   सूर्योदय के साथ आशा आने की बात से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के आज के पाठ, विलापगीत 3 की यह बात स्मरण हो आती है: "परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (पद 21-23)। जब परमेश्वर की प्रजा घोर निराशा में थी, यरूशालेम को बाबुल की सेनाओं ने रौंद कर तहस-नहस कर दिया था, नबी यिर्मयाह ने कहा कि तब भी उनके पास आशा रखने का कारण है - परमेश्वर की दया और करुणा उनके साथ अभी भी बनी हुई है।

   कभी-कभी हमें अपने संघर्ष रात के समय में अधिक बहुत कठिन प्रतीत होते हैं, परन्तु जब भोर होती है तो एक नई आशा जागृत होती है कि हम आगे बढ़ सकते हैं। भजनकार ने कहा, "क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा" (भजन 30:5)।

   हे परमेश्वर पिता आपका धन्यवाद हो उस आशा के लिए जो आप प्रति भोर हमारे लिए भेजते हैं; आपकी उस दया और करुणा के लिए जो प्रति भोर हमारे लिए नई होती रहती है। - ऐनी सेटास


प्रत्येक नया दिन हमें परमेश्वर की आराधना के नए अवसर प्रदान करता है।

परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे। - मलाकी 4:2

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:18-33
Lamentations 3:18 इसलिऐ मैं ने कहा, मेरा बल नाश हुआ, और मेरी आश जो यहोवा पर थी, वह टूट गई है। 
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 140-142
  • 1 कुरिन्थियों 14:1-20