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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

उद्देश्य


   न्यू यॉर्क टाईम्स में छपे एक लेख के अनुसार, अनेकों अफ्रीकी देशों में, बच्चों के नाम किसी सुप्रसिद्ध अतिथि, या ऐसी कोई विशेष घटना या परिस्थिति जो माता-पिता के लिए अर्थपूर्ण हो, के आधार पर दिए जाते हैं। जब चिकित्सकों ने एक बच्चे के माता-पिता को यह बताया कि उनके पास उस बच्चे की बीमारी का कोई इलाज नहीं है और केवल परमेश्वर ही जानता है कि वह बच्चा बचेगा कि नहीं, तो उन्होंने बच्चे का नाम ’परमेश्वर जानता है’ रख दिया। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसका नाम ’काफी’ इसलिए रखा गया क्योंकि उसके माँ के 13 बच्चे थे और वह अन्तिम था। प्रत्येक के नाम का कोई न कोई अर्थ होता है, और कभी-कभी उस नाम का अर्थ कुछ विशेष भी बताता है।

   प्रभु यीशु के जन्म से पहले, परमेश्वर के एक स्वर्गदूत ने प्रभु यीशु के साँसारिक पिता को उसके विषय में बताया, "वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा" (मत्ती 1:21)। यीशु यूनानी शब्द यहोशु से आया है, जिसका अर्थ होता है, "प्रभु बचाता है।" उस समय और उस संसकृति में अनेकों बच्चों का नाम यीशु रखा गया होगा, परन्तु केवल एक ही वह अभिषिक्त (मस्सा किया हुआ - मसीह) था जिस ने इस संसार में सबके पापों के लिए बलिदान होने के लिए जन्म लिया, जिससे समस्त सँसार में जो कोई भी उसे स्वीकार करे और उस पर विश्वास लाए, वह पापों की क्षमा पाए, पापों के दास्तव से मुक्त हो जाए और अनन्तकाल तक स्वर्ग में प्रभु के साथ रहे।

   जब क्रिसमस का समय निकट आता है तो हम बहुधा चार्ल्स वेसली द्वारा लिखे गी एक स्तुति गीत को गाते हैं, जिसके भाव हैं: "दीर्घ काल से प्रतीक्षित, अपने लोगों को मुक्त करने के लिए जन्में यीशु आईए; हमें हमारे भय और पापों से छुड़ाईए; जिससे आप में हम अपना विश्राम पाएं।"

   प्रभु यीशु मसीह के जन्म का उद्देश्य था समस्त मानव जाति के लिए पाप के अंधकार से अनन्त जीवन की ज्योति की ओर मुड़ने का मार्ग बनाए; हमारी निराशाओं को आशा में परिवर्तित कर दे, और हमें हमारे पापों से बचा ले। जब हम यीशु को अपना प्रभु स्वीकार कर लेते हैं, उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर, अपना जीवन उसे समर्पित कर देते हैं, तो हमारे जीवन में उसका यह उद्देश्य पूरा हो जाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु मसीह के नाम का अर्थ और उद्देश्य एक ही हैं - हमें बचा लेना।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: मत्ती 1:18-25
Matthew 1:18 अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। 
Matthew 1:19 सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की। 
Matthew 1:20 जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। 
Matthew 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। 
Matthew 1:22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो। 
Matthew 1:23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “परमेश्वर हमारे साथ”। 
Matthew 1:24 सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। 
Matthew 1:25 और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-41
  • 2 पतरस 3


गुरुवार, 30 नवंबर 2017

सूची


   मैं परदेश से वापस घर आने के लिए हवाई-अड्डे पर पहुँचा और विमान-सेवा वालों को अपना पासपोर्ट जाँच के लिए पकड़ाया; उन्होंने अपनी सूची में देखा तो मेरा नाम उस सूची में नहीं था। कारण था कि उपलब्ध सीटों से अधिक का आरक्षण हो रखा था, और मैंने समय से अपने यात्रा करने की पुष्टि नहीं की थी; इसलिए उस विमान से यात्रा करने वालों की अन्तिम सूची में मेरा नाम नहीं था। मेरी उस दिन घर पहुँचने की आशा धाराशाई हो गई।

   इस घटना से मुझे एक और सूची का स्मरण हो आया - जीवन की पुस्तक में लिखे नामों की सूची। परमेश्वर के वचन बाइबल में, लूका 10 अध्याय में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को सुसमाचार प्रचार के कार्य के लिए भेजा। जब वे लौट कर आए तो बड़ी प्रसन्नता के साथ उन्होंने प्रभु को अपनी सफलताओं के बारे में बताया। परन्तु प्रभु यीशु ने उनसे कहा, "तौभी इस से आनन्‍दित मत हो, कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इस से आनन्‍दित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं" (पद 20)। अर्थात, हमारे आनन्द का विषय हमारी सफलताएं नहीं, वरन हमारा नाम का परमेश्वर की पुस्तक में लिखा हुआ होना चाहिए।

   परन्तु हम निश्चित कैसे हो सकते हैं कि हमारे नाम परमेश्वर की जीवन की पुस्तक में लिखे हुए हैं? बाइबल हमें उत्तर देती है: "कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा" (रोमियों 10:9)।

   बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य 21 में यूहन्ना ने उस पवित्र नगर का स्तब्ध कर देने वाला विवरण लिखा है, जिसे परमेश्वर ने मसीह यीशु पर विश्वास करने वालों के लिए बनाया है। विवरण देने के पश्चात यूहन्ना लिखता है: "और उस में कोई अपवित्र वस्तु था घृणित काम करने वाला, या झूठ का गढ़ने वाला, किसी रीति से प्रवेश न करेगा; पर केवल वे लोग जिन के नाम मेम्ने के जीवन की पुस्‍तक में लिखे हैं" (प्रकाशितवाक्य 21:27)।

   जीवन की पुस्तक, स्वर्ग में जाने वालों के नामों की परमेश्वर की सूची है। क्या आपका नाम परमेश्वर की इस सूची में है? यदि नहीं तो आज, समय रहते सुनिश्चित कर लीजिए, कहीं ऐन मौके पर बाहर न रह जाएं; क्योंकि फ़िर वहाँ और उसके बाद कोई अवसर नहीं होगा। - लॉरेंस दरमानी


जो प्रभु यीशु के लिए अपने हृदय खोल देते हैं, 
परमेश्वर उनके लिए स्वर्ग के द्वार खोल देता है।

जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए? तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ। - मत्ती 7:21-23

बाइबल पाठ: लूका 10:17-24
Luke 10:17 वे सत्तर आनन्द से फिर आकर कहने लगे, हे प्रभु, तेरे नाम से दुष्टात्मा भी हमारे वश में हैं। 
Luke 10:18 उसने उन से कहा; मैं शैतान को बिजली के समान स्वर्ग से गिरा हुआ देख रहा था। 
Luke 10:19 देखो, मैने तुम्हे सांपों और बिच्छुओं को रौंदने का, और शत्रु की सारी सामर्थ्य पर अधिकार दिया है; और किसी वस्तु से तुम्हें कुछ हानि न होगी। 
Luke 10:20 तौभी इस से आनन्‍दित मत हो, कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इस से आनन्‍दित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं।
Luke 10:21 उसी घड़ी वह पवित्र आत्मा में हो कर आनन्द से भर गया, और कहा; हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया: हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा। 
Luke 10:22 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंप दिया है और कोई नहीं जानता कि पुत्र कौन है केवल पिता और पिता कौन है यह भी कोई नहीं जानता, केवल पुत्र के और वह जिस पर पुत्र उसे प्रकट करना चाहे। 
Luke 10:23 और चेलों की ओर फिरकर अकेले में कहा, धन्य हैं वे आंखे, जो ये बातें जो तुम देखते हो देखती हैं। 
Luke 10:24 क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि बहुत से भविष्यद्वक्ताओं और राजाओं ने चाहा, कि जो बातें तुम देखते हो देखें; पर न देखीं और जो बातें तुम सुनते हो सुनें, पर न सुनीं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39
  • 2 पतरस 2


बुधवार, 29 नवंबर 2017

सहायक


   सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्यूईस और उनके बड़े भाई वैरन कई वर्षों तक विनयार्ड नामक एक बोर्डिंग स्कूल में रहे और वहाँ उन्होंने बहुत कष्ट झेले क्योंकि उनका हैडमास्टर एक ऐसा क्रूर व्यक्ति था जिसने सबके लिए जीना दूभर कर रखा था। इस अनुभव से निकलने के दशकों बाद भी, वैरन ने अपनी व्यंगात्मक शैली में लिखा, "अब मैं 64 वर्ष से कुछ अधिक आयु का हूँ, और मैं कभी ऐसी परिस्थिति में नहीं पड़ा हूँ जहाँ मुझे इस बात का संतोष नहीं हुआ हो कि उस परिस्थिति में भी मैं विनयार्ड में होने की स्थिति से तो बेहतर ही हूँ।" हम में से अधिकांश अपने जीवनों में कोई न कोई ऐसा कठिन और अंधकारमय अवसर स्मरण कर सकते हैं जिसके कारण हम धन्यवादी हो सकते हैं कि हम उस परिस्थिति से तो फिर भी बेहतर स्थिति में ही हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 40:1-5 में दाऊदे के जीवन का एक ऐसा ही निम्न बिंदु दर्ज किया गया है, जब उसने प्रभु को पुकारा, और प्रभु ने उसे छुड़ाया। परमेश्वर ने उसे "सत्यानाश के गढ़हे" और "दलदल की कीच" से निकाला और उसे चट्टान पर स्थिर किया (पद 2)। दाऊद कहता है कि परमेश्वर ने "...मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है..." (पद 3)।

   परन्तु विषाद और निराशा से छुड़ाया जाना यदा-कदा ही एक बार में ही सदा के लिए किया गया कार्य होता हैं। भजन 40 में आगे दाऊद के परमेश्वर से पुनः किए गए आग्रह हैं कि परमेश्वर उसे उसके पाप से और शत्रुओं की धमकियों से छुड़ा ले, उस पर फिर से अपनी करुणा, भलाई, और सत्य को कार्यान्वित करे (पद 11-14)।

   दाऊद के साथ हम भी, अपने जीवन की प्रत्येक स्थिति और कठिनाई में कह सकते हैं: "मैं तो दीन और दरिद्र हूं, तौभी प्रभु मेरी चिन्ता करता है। तू मेरा सहायक और छुड़ाने वाला है" (पद 17)। - डेविड मैक्कैसलैंड


वह जो सारी सृष्टि को संभाले रहता है, आपको कभी नहीं छोड़ेगा।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह 41:10

बाइबल पाठ: भजन 40
Psalms 40:1 मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। 
Psalms 40:2 उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है। 
Psalms 40:3 और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।
Psalms 40:4 क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। 
Psalms 40:5 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।
Psalms 40:6 मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्न नहीं होता तू ने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तू ने नहीं चाहा। 
Psalms 40:7 तब मैं ने कहा, देख, मैं आया हूं; क्योंकि पुस्तक में मेरे विषय ऐसा ही लिखा हुआ है। 
Psalms 40:8 हे मेरे परमेश्वर मैं तेरी इच्छा पूरी करने से प्रसन्न हूं; और तेरी व्यवस्था मेरे अन्त:करण में बनी है।
Psalms 40:9 मैं ने बड़ी सभा में धर्म के शुभ समाचार का प्रचार किया है; देख, मैं ने अपना मुंह बन्द नहीं किया हे यहोवा, तू इसे जानता है। 
Psalms 40:10 मैं ने तेरा धर्म मन ही में नहीं रखा; मैं ने तेरी सच्चाई और तेरे किए हुए उद्धार की चर्चा की है; मैं ने तेरी करूणा और सत्यता बड़ी सभा से गुप्त नहीं रखी।
Psalms 40:11 हे यहोवा, तू भी अपनी बड़ी दया मुझ पर से न हटा ले, तेरी करूणा और सत्यता से निरन्तर मेरी रक्षा होती रहे! 
Psalms 40:12 क्योंकि मैं अनगिनत बुराइयों से घिरा हुआ हूं; मेरे अधर्म के कामों ने मुझे आ पकड़ा और मैं दृष्टि नहीं उठा सकता; वे गिनती में मेरे सिर के बालों से भी अधिक हैं; इसलिये मेरा हृदय टूट गया।
Psalms 40:13 हे यहोवा, कृपा कर के मुझे छुड़ा ले! हे यहोवा, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर! 
Psalms 40:14 जो मेरे प्राण की खोज में हैं, वे सब लज्जित हों; और उनके मुंह काले हों और वे पीछे हटाए और निरादर किए जाएं जो मेरी हानि से प्रसन्न होते हैं। 
Psalms 40:15 जो मुझ से आहा, आहा, कहते हैं, वे अपनी लज्जा के मारे विस्मित हों।
Psalms 40:16 परन्तु जितने तुझे ढूंढ़ते हैं, वह सब तेरे कारण हर्षित और आनन्दित हों; जो तेरा किया हुआ उद्धार चाहते हैं, वे निरन्तर कहते रहें, यहोवा की बड़ाई हो! 
Psalms 40:17 मैं तो दीन और दरिद्र हूं, तौभी प्रभु मेरी चिन्ता करता है। तू मेरा सहायक और छुड़ाने वाला है; हे मेरे परमेश्वर विलम्ब न कर।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36
  • 2 पतरस 1


मंगलवार, 28 नवंबर 2017

आँकलन


   बहुत पहले, जब दर्पणों या प्रतिबिंबित करने वाली चिकनी सतहों का अविश्कार नहीं हुआ था, लोग अपने आप को बहुत कम देखने पाते थे। यदि कहीं जल एकत्रित हो और उसकी सतह पर हलचल न हो, तब ही लोग अपने प्रतिबिंब को देखने पाते थे। परन्तु दर्पणों के अविश्कार के बाद से यह सब बदल गया, और जब से कैमरे आए तो अपने आप को देखने का आकर्षण एक भिन्न ही स्तर तक पहुँच गया। अब हमारे पास हमारी तसवीरें हैं जो आजीवन हमारे साथ रह सकती हैं और हम कभी भी देख सकते हैं कि आयु के किस समय पर हम कैसे दिखते थे। यह पारिवारिक इतिहास का लेखा और व्यक्तिगत संकलन बनाने के लिए तो अच्छा है, परन्तु यह हमारे आत्मिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। अपने आप को कैमरे से देखने के लिए बाहरी रूप से सजाते-संवारते रहने के कारण हम अपने भीतरी स्वरूप के आँकलन को नज़रंदाज़ कर सकते हैं।

   एक स्वास्थ आत्मिक जीवन के लिए आत्म-निरीक्षण बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर चाहता है कि हम अपना आँकलन करते रहें जिससे हम जाने-अनजाने में किए गए किसी पाप के दुष्परिणामों से बचे रहें। यह इतना आवश्यक है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में पवित्र आत्मा ने लिखवाया है कि प्रभु-भोज में सम्मिलित होने से पहले यह करना अनिवार्य है (1 कुरिन्थियों 11:28)। इस आँकलन का उद्देश्य न केवल परमेश्वर के साथ अपने संबंध को ठीक करते रहना है, परन्तु यह भी सुनिश्चित करना है कि हम एक दूसरे के साथ ठीक संबंध में बने रहें। प्रभु भोज में भाग लेना प्रभु यीशु मसीह के बलिदान, उसकी तोड़ी गई देह और बहाए गए लहु को स्मरण करना है; यदि हम अपने सहविश्वासियों के साथ मेल-मिलाप का और सही जीवन नहीं जी रहे हैं तो बाइबल हमें प्रभु-भोज में सम्मिलित होने की अनुमति नहीं देती है।

   अपने पाप, बुराईयों और कमियों को देखने और उनको मान लेने से, उनसे पश्चाताप कर लेने से अन्य मसीही विश्वासियों के साथ हमारी एक-मनता और परमेश्वर के साथ हमारा संबंध स्वस्थ बना रहता है। अपना आँकलन करने से कतराएं नहीं, वरन ऐसा करने को अपने जीवन का नियमित भाग बना लें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम परमेश्वर के वचन के दर्पण में अपने आप को देखते हैं,
 तब हम अपने को और स्पष्ट देखने पाते हैं।

अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो। - 2 कुरिन्थियों 13:5

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-34
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। 
1 Corinthians 11:33 इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। 
1 Corinthians 11:34 यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हार इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34
  • 1 पतरस 5


सोमवार, 27 नवंबर 2017

सहायता


   मेरे पति कार्य के सिलसिले में बाहर गए हुए थे, और एक होटल में ठहरे थे। उन्होंने आकर होटल में आराम करना आरंभ ही किया था, कि एक विचित्र से शोर से वे चौंक गए। उन्होंने बाहर गलियारे में निकल कर उस शोर के बारे में जानना चाहा तो पता चला कि साथ के एक कमरे से किसी के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी। उन्होंने होटल के कर्मचारी को कारण देखने के लिए बुलाया, और पाया कि एक व्यक्ति अपने कमरे के बाथरूम में फंस गया है; बाथरूम के दरवाज़े को बन्द करने वाली कुण्डी खराब हो गई थी और वह व्यक्ति दरवाज़ा खोलकर बाहर नहीं आ पा रहा था। अपने आप को अन्दर फंसा हुआ जानकर वह घबरा गया और सहायता के लिए ऊँची आवाज़ से पुकारने लगा।

   कभी कभी जीवन की परिस्थितियों में हम भी अपने आप को फंसा हुआ अनुभव करते हैं, और उन परिस्थितियों से बाहर निकलने का कोई मार्ग दिखाई न देने के कारण कहीं से कोई सहायता पाने के लिए गुहार लगाते हैं। अन्दर फंसे हुए उस व्यक्ति के समान, हमें भी बाहर से मिलने वाली सहायता की आवश्यकता होती है। परन्तु उस बाहर से आने वाली सहायता के लिए हमें यह स्वीकार करना होता है कि हम अपने आप में असहाय हैं। कई बार हम अपनी समस्याओं से निकलने के लिए अपने अन्दर ही समाधान ढूँढने लगते हैं। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि अनेकों बार हम स्वयं ही अपनी समस्याओं का कारण होते हैं क्योंकि हम अपने मन की इच्छा करना चाहते हैं, और हमारा "मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?" (यिर्मयाह 17:9) जो हमें बुराई और समस्याओं में धकेल देता है।

   परन्तु हमें धन्यवादी रहना चाहिए कि हमारा प्रभु परमेश्वर, "...हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है" (1 यूहन्ना 3:20)। इस कारण वह भली-भांति जानता है कि कब और कैसे हमारी सहायता करनी है। हमारे जीवन की प्रत्येक समस्या की स्थायी और कारगर सहायता परमेश्वर ही से आती है; वही हमारे धोखेबाज़ मन को परिवर्तित कर के स्वच्छ और पवित्र बना सकता है। प्रभु परमेश्वर पर भरोसा रखने और उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करने के उद्देश्य से ही हम वास्तव में मुक्त रहेंगे; हर बात, हर परिस्थिति के लिए उस से मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त करते रहेंगे। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर उनका सहायक बनता है जो यह मान लेते हैं कि वे असहाय हैं।

फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं? यिर्मयाह 23:24

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 17:7-14
Jeremiah 17:7 धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। 
Jeremiah 17:8 वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। 
Jeremiah 17:9 मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? 
Jeremiah 17:10 मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं। 
Jeremiah 17:11 जो अन्याय से धन बटोरता है वह उस तीतर के समान होता है जो दूसरी चिडिय़ा के दिए हुए अंडों को सेती है, उसकी आधी आयु में ही वह उस धन को छोड़ जाता है, और अन्त में वह मूढ़ ही ठहरता है। 
Jeremiah 17:12 हमारा पवित्र आराधनालय आदि से ऊंचे स्थान पर रखे हुए एक तेजोमय सिंहासन के समान है।
Jeremiah 17:13 हे यहोवा, हे इस्राएल के आधार, जितने तुझे छोड देते हैं वे सब लज्जित होंगे; जो तुझ से भटक जाते हैं उनके नाम भूमि ही पर लिखे जाएंगे, क्योंकि उन्होंने बहते जल के सोते यहोवा को त्याग दिया है। 
Jeremiah 17:14 हे यहोवा मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊंगा; मुझे बचा, तब मैं बच जाऊंगा; क्योंकि मैं तेरी ही स्तुति करता हूँ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1 पतरस 4


रविवार, 26 नवंबर 2017

धन्यवादी


   जब हमारे बच्चे छोटे ही थे, तो उन में से एक ने, रात्रि के खाने के समय जब उसे मटर की सबज़ी परोसी गई, दृढ़ आवाज़ में कहा "नहीं"। उसके यह कहने पर हमने उससे पूछा, "क्या नहीं?" हमारी अपेक्षा थी कि वह कहेगा, "नहीं चाहिए; धन्यवाद"; परन्तु उसने कहा, "नहीं मटर नहीं चाहिएं!" उसके इस प्रत्युत्तर से अच्छे आचरण पर एक चर्चा आरंभ हो गई। इसी प्रकार, अच्छे व्यवहार के विषय में अनेकों बार चर्चाएं हमारे परिवार में हो चुकी हैं।

   हमारा प्रभु परमेश्वर हमें स्मरण करवाता है कि अच्छे आचरण के अतिरिकत - जो कि बाह्य होता है, हमारे अन्दर एक धन्यवादी हृदय भी होना चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्जनों बार स्मरण करवाया गया है कि परमेश्वर से हमारे संबंध में धन्यवादी होना हमारे लाभ के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। भजन 118 का आरंभ तथा अन्त इस आग्रह से होता है, "यहोवा का धन्यवाद करो" (पद 1, 29)। जब भी हम प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति में आएं, हम धन्यवादी हृदय के साथ आएं (भजन 100:4)। जो निवेदन हम उससे करें, उन्हें भी धन्यवाद के साथ प्रस्तुत करें (फिलिप्पियों 4:6)। यह धन्यवादी रवैया हमें प्रभु परमेश्वर से मिलती रहने वाली अनगिनित आशीषों को स्मरण करवाता रहेगा, उसमें हमारे विश्वास को सुदृढ़ बनाए रखेगा, और हमें स्मरण करवाता रहेगा कि हमारी समस्याओं और कष्टों के समय में भी परमेश्वर की उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहती है।

   इसीलिए भजनकार हम से कहता है, "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है" (भजन 118:1)। - जो स्टोवैल


केवल परमेश्वर के प्रति धन्यवादी हृदय से ही जीवन समृद्ध बनता है। - डीट्रीश बॉनहोफर

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6

बाइबल पाठ: भजन 118:1-14
Psalms 118:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 118:2 इस्राएल कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:3 हारून का घराना कहे, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:4 यहोवा के डरवैये कहें, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 118:5 मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा, परमेश्वर ने मेरी सुन कर, मुझे चौड़े स्थान में पहुंचाया। 
Psalms 118:6 यहोवा मेरी ओर है, मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या कर सकता है? 
Psalms 118:7 यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष्टि कर सन्तुष्ट हूंगा। 
Psalms 118:8 यहोवा की शरण लेनी, मनुष्य पर भरोसा रखने से उत्तम है। 
Psalms 118:9 यहोवा की शरण लेनी, प्रधानों पर भी भरोसा रखने से उत्तम है।
Psalms 118:10 सब जातियों ने मुझ को घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:11 उन्होंने मुझ को घेर लिया है, नि:सन्देह घेर लिया है; परन्तु यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:12 उन्होंने मुझे मधुमक्खियों के समान घेर लिया है, परन्तु कांटों की आग के समान वे बुझ गए; यहोवा के नाम से मैं निश्चय उन्हें नाश कर डालूंगा! 
Psalms 118:13 तू ने मुझे बड़ा धक्का दिया तो था, कि मैं गिर पडूं परन्तु यहोवा ने मेरी सहायता की। 
Psalms 118:14 परमेश्वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1 पतरस 3


शनिवार, 25 नवंबर 2017

प्रावधान


   हमारे बेटे ने नर्सरी स्कूल जाना आरंभ ही किया था। पहले दिन वह बहुत रोया, और कहा, "मुझे स्कूल पसन्द नहीं है।" मेरे पति और मैंने उससे उसे समझाया, और आश्वस्त किया, कि हम चाहे शरीर में उसके निकट न भी हों, परन्तु हम उसके लिए प्रार्थना करते रहते हैं; और प्रभु यीशु तो सदा उसके साथ बने रहते हैं। उसने प्रश्न किया, "किंतु प्रभु यीशु मुझे दिखाई तो नहीं देते हैं?" मेरे पति ने उसे गले लगाते हुए कहा, "प्रभु तुम्हारे हृदय के अन्दर वास करते हैं; वे तुम्हें कभी नहीं छोड़ते हैं।" मेरे बेटे ने आशवस्त होकर अपने हृदय पर हाथ रखकर कहा, "हाँ, प्रभु यीशु मेरे अन्दर वास करते हैं।"

   केवल बच्चे ही अपनों से अलग होने पर चिंतित नहीं होते हैं, जीवन के हर चरण में हमें उनसे अलग होने की स्थितियों का सामना करते हैं जिनसे हम प्रेम करते हैं। यह भौगोलिक दूरियों के कारण हो सकता है या कभी मृत्यु के कारण। परन्तु हमें सदा स्मरण रखना चाहिए कि चाहे और कोई मनुष्य किसी भी कारणवश हमें छोड़ भी दे, तो भी हमारा प्रभु परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता है। उसने सदा हमारे साथ बने रहने का वायदा किया है। प्रभु ने हमारी सहायाता के लिए अपने पवित्र आत्मा को हमें सहायक और मार्गदर्शक के रूप में दिया है, और वह सदा हम में वास करता है (यूहन्ना 14:15-18)। हम उसकी प्रीय सन्तान हैं।

   हमारा बेटा भरोसा रखना सीख रहा है, और मैं भी। मेरे बेटे के समान ही मैं भी अपने अन्दर निवास करने वाले पवित्र-आत्मा को अपनी शारीरिक आँखों से देख नहीं पाती हूँ, परन्तु मैं अपने में और अपने लिए उसके कार्यों को अनुभव करती और देखती हूँ। वह प्रतिदिन मेरा मार्गदर्शन करता है, मुझे प्रोत्साहित करता है, परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने, समझने और जीवन में उपयोगी करने में मेरी सहायता करता है।

   हमें प्रभु परमेश्वर के इस अद्भुत प्रावधान, उसके पवित्र-आत्मा, के लिए सदा धन्यवादी रहना चाहिए, जिसके कारण हम मसीही विश्वासी कभी भी अकेले नहीं हो सकते हैं। - कीला ओकोआ


हम कभी अकेले नहीं हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-21
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26
  • 1 पतरस 2