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Sunday, May 2, 2021

प्रार्थना

 

          केविन ने अपनी आँख से आँसू पोंछते हुए, मेरी पत्नी केरी को पढ़ने के लिए एक पर्ची पकड़ाई। उसे पता था की मैं और केरी प्रार्थना कर रहे थे कि हमारी बेटी प्रभु यीशु में विश्वास में लौट कर आ जाए। केविन ने बताया कि वह पर्ची उसे, उसकी माँ के देहांत के बाद, उनकी बाइबल में मिली थी, और उसने आशा व्यक्त की, कि हम उसे पढ़ने से प्रोत्साहित होंगे। उस पर्ची में सबसे ऊपर लिखा था “मेरे बेटे केविन के लिए” और उसके नीचे, उसके उद्धार के लिए एक प्रार्थना लिखी हुई थी, जो उसकी माँ केविन के लिए किया करती थी।

          केविन ने आगे बताया, “अब मैं इस पर्ची को हमेशा अपने साथ अपनी बाइबल में रखता हूँ। मेरी माँ पैंतीस वर्ष से भी अधिक तक मेरे उद्धार पाने के लिए प्रार्थना करती रही। तब मैं परमेश्वर से बहुत दूर था, परन्तु आज मैं मसीही विश्वासी हूँ।” उसने हमारी ओर ध्यान से देखते हुए और अपने आँसुओं में से मुसकुराते हुए कहा “अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करना कभी न छोड़ना – उत्तर आने में चाहे कितना भी समय क्यों न लग जाए, हिम्मत बनाए रखना।”

          उसके इन प्रोत्साहन के शब्दों से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा प्रार्थना से संबंधित एक दृष्टांत याद आया, जो लूका रचित सुसमाचार में लिखा है। लूका ने प्रभु के इस दृष्टांत का आरंभ इन शब्दों में किया,फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्टान्त कहा” (लूका 18:1)।

          इस दृष्टांत में प्रभु यीशु ने एक “अधर्मी न्यायी”, जो किसी की परवाह नहीं करता था, की तुलना पूर्णतः सिद्ध स्वर्गीय पिता परमेश्वर से, जो सभी की चिंता करता है और चाहता है कि लोग उसके पास आएँ तथा आशीषित हों, की है। उस न्यायी ने केवल इसलिए निवेदन को सुना और न्याय को चुकाया क्योंकि वह बारंबार किए जा रहे निवेदन से और परेशान नहीं होना चाहता था। हम इससे प्रोत्साहित हो सकते हैं कि जब वह अधर्मी न्यायी प्रार्थना का उत्तर दे सकता है, तो सब से प्रेम करने और सब का ध्यान रखने वाला परमेश्वर क्यों हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं देगा। हमारा परमेश्वर पिता चाहता है कि हम उससे प्रार्थना करें। - जेम्स बैंक्स

 

प्रभु परमेश्वर पिता, मुझे आपके कार्य और राज्य के लिए प्रार्थना करते रहने वाला बनाएं।


निरन्तर  प्रार्थना में लगे रहो। - 1 थिस्स्लुनीकियों 5:17

बाइबल पाठ: लूका 18:1-8

लूका 18:1 फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्टान्त कहा।

लूका 18:2 कि किसी नगर में एक न्यायी रहता था; जो न परमेश्वर से डरता था और न किसी मनुष्य की परवाह करता था।

लूका 18:3 और उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी: जो उसके पास आ आकर कहा करती थी, कि मेरा न्याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा।

लूका 18:4 उसने कितने समय तक तो न माना परन्तु अन्त में मन में विचारकर कहा, यद्यपि मैं न परमेश्वर से डरता, और न मनुष्यों की कुछ परवाह करता हूं।

लूका 18:5 तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्याय चुकाऊंगा कहीं ऐसा न हो कि घड़ी घड़ी आकर अन्त को मेरा नाक में दम करे।

लूका 18:6 प्रभु ने कहा, सुनो, कि यह अधर्मी न्यायी क्या कहता है?

लूका 18:7 सो क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उस की दुहाई देते रहते; और क्या वह उन के विषय में देर करेगा?

लूका 18:8 मैं तुम से कहता हूं; वह तुरन्त उन का न्याय चुकाएगा; तौभी मनुष्य का पुत्र जब आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्वास पाएगा?

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 राजाओं 12-13
  • लूका 22:1-20

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