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सोमवार, 29 अगस्त 2011

जीवन का जल

एक स्वस्थ वृक्ष की संरचना का लगभग ८०% भाग नमी होती है। पानी की यह बड़ी मात्रा, वृक्ष भूमि में फैली अपनी जड़ों द्वारा, ओस और वर्षा से एकत्रित करता है। अपनी पुस्तक As a Tree Grows में लेखक फिलिप केलर कहते हैं,"वृक्ष यह सारा जल अपने लिए एकत्रित नहीं करते। धरती कि सतह के नीचे फैली उनकी जड़ों का विशाल जाल, जो शायद धरती के ऊपर उनके तने, शाखाओं और पत्तियों से भी अधिक व्यापक होता है, यह सारा जल एकत्रित करके ऊपर पत्तों तक भेज देता है, जहाँ से वह ऑक्सिजन के साथ वायुमण्डल में विसर्जित होता रहता है। जल और ऑकसिजन का यह उत्सर्जन ही जंगल में मिलनी वाली हवा को ठण्डक और ताज़गी देने वाली बनाता है।"

मसीही विश्वासी भी जीवन के जल का उपयोग कुछ ऐसे ही करते हैं। प्रभु यीशु ने युहन्ना ७:३८ में कहा कि जो कोई उसपर विश्वास लाएगा, उसके हृदय से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी। इससे प्रभु का तातपर्य पवित्र आत्मा की उस सेवकाई से था जो वह हम में रह कर करता है। जब हम अपने पापों का अंगीकार करके, प्रभु यीशु से उनकी क्षमा माँग कर, अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देते हैं, उसी समय से परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे अन्दर बस जाता है; वह हमें सामर्थ और स्फूर्ति देता है और इस योग्य करता है कि हम दूसरों की सहायता कर सकें और प्रभु यीशु की ओर लोगों का ध्यान खींच सकें। हमारी ज़िम्मेदारी रहती है कि हम परमेश्वर के वचन का अध्ययन करें, जहाँ जहाँ पवित्र आत्मा हमें कायल करे उन बातों को परमेश्वर के सन्मुख अपने जीवन में ठीक करें, उससे अपनी कमियों-कमज़ोरियों और पापों के लिए क्षमा मांग कर परमेश्वर की आज्ञाकारिता में आगे बढ़ें।

जैसे जैसे हम परमेश्वर द्वारा दिये गए हमारे सहायक - पवित्र आत्मा पर निर्भर रहना सीखेंगे, उसकी अगुवाई में आगे बढ़ेंगे, हमारे जीवनों से भी, हमारे संपर्क में आने वाले लोगों के लाभ के लिए, ठण्डक और ताज़गी देने वाले जीवन जल की नदियाँ प्रवाहित होने लगेंगी। - डेव एग्नर


आत्मा की प्यास केवल जीवन का जल ही बुझा सकता है।

जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्‍त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना ७:३८


बाइबल पाठ: यूहन्ना ७:३७-४०

Joh 7:37 फिर पर्ब्‍ब के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए।
Joh 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्‍त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी।
Joh 7:39 उस ने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्‍योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्‍योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।
Joh 7:40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२६-१२८
  • १ कुरिन्थियों १०:१९-३३

रविवार, 28 अगस्त 2011

हमारा सहायक

बाइबल एवं मसीही विश्वास की शिक्षा का एक विद्यार्थी पाप अंगीकार के विषय में लिख रहा था। उसे लिखना था कि "जब हम अपने पापों को मान लेते हैं तो वह हमारे पाप बोध (guilt) को हमसे दूर कर देता है", परन्तु गलती से उसने guilt शब्द के स्थान पर quilt (रज़ाई) लिख दिया। जब उसके अध्यापक ने उसका पर्चा पढ़ा तो इस वाक्य को पढ़ कर टिप्पणी करी, "डरना मत, परमेश्वर ने तुम्हें एक comforter अर्थात सहायक दे रखा है, वह तुम्हें सर्दी में ठिठुरने नहीं देगा (comforter शब्द गरम शॉल के लिए भी उपयोग होता है)।" उस अध्यापक ने विनोद में ही एक बहुत महत्वपूर्ण तथ्य विद्यार्थी को सिखा दिया।

प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों को आश्वासन दिया कि परमेश्वर पिता उनके साथ सदा बने रहने के लिए एक सहायक अर्थात अपना पवित्र आत्मा देगा, और प्रभु का यह वायदा पिन्तेकुस्त के दिन पूरा हुआ (प्रेरितों २:१-४), और तब से ले कर आज तक प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ परमेश्वर का पवित्र आत्मा बना रहता है और उसमें अपना कार्य करता रहता है। परमेश्वर के पवित्र आत्मा का उद्देश्य सदैव प्रभु यीशु को महिमा देना है ना कि अपने आप को ऊँचा उठाना। हमारा लक्षय होना चाहिए कि हम प्रभु यीशु मसीह के बारे जो कुछ सीख सकते हैं वह सीखें और उसके आत्मा की सहायता से उन बातों को अपने जीवन में लागू करें।

मसीही विश्वासी के जीवन में किए जाने वाले पवित्र आत्मा के कुछ कार्य हैं:
  • हमें सत्य के मार्ग में ले चलना (यूहन्ना१६:१३)
  • हमें परमेश्वर की सन्तान होने के लिए आश्वस्त रखना (रोमियों ८:१६)
  • प्रार्थना करने में हमारी सहायता करना (रोमियों ८:२६)
  • हमें अंश अंश करके मसीह के स्वरूप में बदलते जाना (२ कुरिन्थियों ३:१८)
  • हमें सामर्थी बनाना (इफिसियों ३:१६)
अपने इसी सहायक की सहायता के कारण हम प्रतिदिन नई हिम्मत और सामर्थ के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। हमारी प्रार्थना सदा यही रहे: "परमेश्वर पिता आपके द्वारा दिये गए इस सहायक के लिए आपका बहुत धन्यवाद। हमारी सहायता करें कि आपके दिए सहायक को न हम बुझाएं और न शोकित करें।" - डेनिस डी हॉन


प्रत्येक मसीही विश्वासी का मन पवित्र आत्मा का घर-मन्दिर है।

मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। - युहन्ना १४:१६

बाइबल पाठ: युहन्ना १४:१२-३१

Joh 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्‍योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।
Joh 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।
Joh 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।
Joh 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
Joh 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
Joh 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्‍योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
Joh 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
Joh 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि संसार मुझे न देखेगा, परन्‍तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
Joh 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
Joh 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।
Joh 14:22 उस यहूदा ने जो इस्‍किरयोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्‍या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं।
Joh 14:23 यीशु ने उस को उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
Joh 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिस ने मुझे भेजा।
Joh 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
Joh 14:26 परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
Joh 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
Joh 14:28 तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्‍योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
Joh 14:29 और मैं ने अब इस के होने के पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
Joh 14:30 मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्‍योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
Joh 14:31 परन्‍तु यह इसलिए होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२३-१२५
  • १ कुरिन्थियों १०:१-१८

शनिवार, 27 अगस्त 2011

ओक वृक्ष से शिक्षा

हमारे घर के पीछे कुछ सुन्दर ओक वृक्ष खड़े हैं। हर वर्ष पतझड़ की ऋतु में मैं देखता हूँ कि उन पर कुछ सूखे पत्ते इधर-उधर लगे रह जाते हैं, जबकि बाकि सभी पत्ते उन ओक तथा अन्य वृक्षों पर से झड़ चुके होते हैं। शीत ऋतु की तेज़ हवाएं और बसन्त की बारिष भी उन सूखे पत्तों को गिरा नहीं पाती। लेकिन जैसे जैसे बसन्त ऋतु बढ़ती है, दृश्य बदलने लगता है। वृक्षों की उन सूखी और बेजान प्रतीत होने वाली डालियों से नई कोंपलें फूटने लगती हैं। जैसे जैसे कोंपलें बढ़ती हैं, वे उन पुराने सूखे पत्तों को गिरा देती हैं; नए जीवन की शक्ति उन पुराने सूखे जीवन के अवशेषों को साफ कर देती है।

मसीही विश्वासी के अन्दर परमेश्वर का पवित्र आत्मा भी अपना अनुग्रह का कार्य कुछ ऐसे ही करता है। कुछ पुरानी आदतें हमारे जीवनों से चिपकी रह जाती हैं। हमारे जीवन की परीक्षाएं और क्लेष भी हमारी पुरानी पापों में पतित प्रकृति की इन आदतों को हम से दूर नहीं कर पाते। लेकिन हमारे प्रभु का आत्मा हम में नए जीवन के संचार को बनाए रखता है, और मसीह का यह जीवन हम में से बाहर प्रगट होने के मार्ग ढूंढ़ता रहता है। जैसे जैसे हम परमेश्वर के सामने अपने पापों का अंगीकार करते, प्रार्थना करते और उसके वचन का मनन करने में समय बिताते हैं, हमारी पुरानी पतित अवस्था के अवशेष, वे आदतें, हमसे दूर होने लगती हैं और प्रभु का जीवन हम में विदित होने लगता है।

जब उन पुरानी आदतों को दूर कर देने के हमारे अपने सभी प्रयास विफल हों और उन आदतों की हमारे जीवन में उपस्थिति हमारे लिए निराशा का कारण बनने लगे तो हमें ओक वृक्ष से शिक्षा लेनी चाहिए। जैसे बाहर से सूखे प्रतीत होने वाले ओक वृक्ष में जीवन का संचार बाकी रहता है और अपने समय में प्रगट होकर पुराने जीवन के अवशेषों को दूर कर देता है, वैसे ही प्रत्येक मसीही विश्वासी में प्रभु के आत्मा की उपस्थिति और नए जीवन का संचार बना रहता है, और अनुकूल परिस्थितियों में प्रगट हो कर पुरानी बातों को हटा देता है। जैसे जैसे हम परमेश्वर के आत्मा की प्रेरणा और आवाज़ की ओर अपना ध्यान लगाकर अपने जीवन में पवित्र आत्मा के फलों, जैसे प्रेम, ईमानदारी, विश्वासयोग्यता आदि को स्थान देते हैं, उसकी सामर्थ हमारे जीवनों में कार्य कर के पुरानी बातों को हटाती और नए जीवन को दिखाती जाती है। - डेनिस डी हॉन


यदि प्रभु यीशु मसीह हमारे जीवन का केंद्र बिंदु है, तो बाहरी परिधि स्वतः ही ठीक हो जाएगी।

पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। - गलतियों ५:१६

बाइबल पाठ: गलतियों ५:१६-२६

Gal 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।
Gal 5:17 क्‍योंकि शरीर आत्मा के विरोध में लालसा करता है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
Gal 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।
Gal 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
Gal 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, झूठ, विधर्म।
Gal 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
Gal 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,
Gal 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
Gal 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्‍होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Gal 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
Gal 5:26 हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२०-१२२
  • १ कुरिन्थियों ९

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

धीरज का कौशल

अपनी पुस्तक They Call me Coach में जौन वुडएन ने, जो कई वर्ष तक UCLA टीम के बास्केट बॉल सिखाने वाले रहे थे, अपने कार्य करने के तरीके के बारे में लिखा। उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक मैंने अपनी टीम को धैर्य से खेलने का पाठ पढ़ाया, और उन्हें धैर्य से खेलते रहना सिखाता रहा। खेल में मेरा नियम सदा ही रहा है कि अन्ततः धैर्य ही की जीत होती है। इससे मेरा तात्पर्य है कि अपनी बनाई हुई खेलने की योजना पर धैर्य से बने रहना। यदि हम अपनी योजना पर बने रहेंगे तो प्रतिद्वंदी को कमज़ोर कर सकते हैं और उन पर हावी हो सकते हैं। यदि हम अधीर होकर अपनी नीति त्याग दें और प्रतिद्वंदियों की नीति अपनाने लगें तो अवश्य ही हम कठिनाई में पड़ जाएंगे। यदि हम संयम के स्थान पर अपनी भावनाओं को अपने ऊपर हावी होने देंगे तो हम कभी ठीक से नहीं खेल पाएंगे। इसका यह अर्थ नहीं है कि हम सदा ही प्रतिद्वंदी से अधिक अंक बनाते रहेंगे, परन्तु यह अर्थ अवश्य है कि यदि हार का सामना करना भी पड़े, तो हम स्वयं अपने आप को ही पराजित नहीं करेंगे।

परमेश्वर का वचन हमें प्रेरित करता है कि हम परमेश्वर पर निर्भर होना सीखें, और साथ ही इस निर्भरता के अनुरूप सही चिंतन तथा उचित कार्य भी करते रहें। परिस्थितियां कैसी भी क्यों न प्रतीत हों, हमें विश्वास रखना है कि परमेश्वर अपनी बाट जोहने वालों को, उसकी योजना के अनुसार जीवन व्यतीत करने के लिए, आदर देगा।

भजन ३७ में परमेश्वर का यही सन्देश है: "मुझ पर भरोसा रखो और जो मेरी दृष्टी में सही है वही करते रहो। चाहे तुम्हें परिस्थितियां कितनी भी असंभव क्यों न लगें, नतीजा मुझ पर छोड़ दो और मैं अन्ततः तुम्हें विजयी अवश्य बनाऊंगा।"

परमेश्वर पर निर्भरता तथा धीरज का यह कौशल न केवल हमें अपने आप को हराने से बचाए रखेगा, वरन यह भी सुनिश्चित करेगा कि हमें एक महिमामयी विजय प्राप्त हो सके। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर महान कार्य जलदबाज़ी में नहीं करता; उसकी बाट जोहना सीखें।

अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़ और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। - भजन ३७:५


बाइबल पाठ: भजन ३७:१-११

Psa 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर!
Psa 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाई मुर्झा जाएंगे।
Psa 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।
Psa 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को मूरा करेगा।
Psa 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़ और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।
Psa 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाई प्रगट करेगा।
Psa 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिस के काम सुफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!
Psa 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।
Psa 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Psa 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा।
Psa 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११९:८९-१७६
  • १ कुरिन्थियों ८

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

व्यस्त जीवन

मार्ग पर धीमी चलती गाड़ियों के बीच में फंस जाना मुझे बहुत बुरा लगता है। लेकिन उस से भी अधिक परेशान और खिसिया देने वाला अनुभव होता है जब मेरी गाड़ी की पंक्ति के दाएं-बाएं की पंक्तियां भी ऐसे ही धीमी चल रही हों और मेरे आगे और पीछे बड़े बड़े ट्रक अड़े खड़े हों, जिससे मेरे पास कहीं भी निकल सकने का कोई मार्ग न बचे। ऐसे में फंस कर बस मैं सामने वाले ट्रक पर लिखी बातों को ही पढ़ कर समय बिता सकता हूँ, और तब मुझे उन बातों से कोई विनोद नहीं होता।

कुछ समय पहले मैं ऐसी ही परिस्थिति में था, मेरा धीरज कम हो रहा था और मेरा उतावलापन बढ़ रहा था, मेरी कार और मेरा शरीर शिथिल तथा निश्क्रीय थे, ऐसे में मेरा दिमाग़ सक्रीय हो गया। मैं ने समझा कि यही बात मसीही जीवन में भी लागू होती है। कभी कभी प्रभु के साथ चलने में हम परिस्थितियों द्वारा ऐसे फंसा दिये जाते हैं कि हम कुछ भी कर पाने में असमर्थ हो जाते हैं, बस कसमसाते ही रहते हैं कि न जाने आगे क्या होगा, कब होगा, आदि। ऐसे में अधीरता और क्रोध समस्या को केवल बढ़ाते ही हैं।

मुझे लगता है कि कुछ ऐसा ही भजन ६२ के लेखक ने अनुभव किया होग जब उसने यह भजन लिखा। लेकिन भजनकार ने परमेश्वर के साथ अपने सुदृढ़ संबंध को याद किया और धैर्य पाया कि उसके लिए मार्ग खुल जाएगा।

मेरे मसीही जीवन के अनुभव में मैं ने पाया है कि, जैसे व्यस्त मार्गों में फंसने के बाद होता है, कुछ समय के पश्चात मार्ग खुल जाता है, आगे बढ़ने का मार्ग मिल जाता है। हमें अपने मसीही जीवन के अवरोधों में फंसने से अधीर हो कर कोई गलत कदम नहीं उठाना चाहिए, वरन उस समय का उपयोग परमेश्वर के साथ शांत होकर समय बिताने में लगाना चाहिए। जितनों ने उसकी बाट जोही है, वे कभी निराश नहीं हुए। - डेनिस डी हॉन


धीरज का अर्थ है परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा, बिना उसके प्रेम पर कोई सन्देह किए हुए करते रहना।

हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है। - भजन ६२:५


बाइबल पाठ: भजन ६२

Psa 62:1 सचमुच मैं चुपचाप होकर परमेरश्वर की ओर मन लगाए हूं; मेरा उद्धार उसी से होता है।
Psa 62:2 सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है, मैं बहुत न डिगूंगा।
Psa 62:3 तुम कब तक एक पुरूष पर धावा करते रहोगे, कि सब मिल कर उसका घात करो? वह तो झुकी हुई भीत वा गिरते हुए बाड़े के समान है।
Psa 62:4 सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं; वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं।
Psa 62:5 हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है।
Psa 62:6 सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है इसलिये मैं न डिगूंगा।
Psa 62:7 मेरा उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर है; मेरी दृढ़ चट्टान, और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है।
Psa 62:8 हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो, उस से अपने अपने मन की बातें खोल कर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।
Psa 62:9 सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तौल में वे हलके निकलते हैं, वे सब के सब सांस से भी हलके हैं।
Psa 62:10 अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो, चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।
Psa 62:11 परमेश्वर ने एक बार कहा है, और दो बार मैं ने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्वर का है।
Psa 62:12 और हे प्रभु, करूणा भी तेरी है। क्योंकि तू एक एक जन को उसके काम के अनुसार फल देता है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११९:१-८८
  • १ कुरिन्थियों ७:२०-४०

बुधवार, 24 अगस्त 2011

शांत, अधीर और संयमी

लेखक बोरहैम एक पादरी की विदाई सभा में सम्मिलित हुए। इस पादरी ने २० वर्ष तक एक चर्च में कार्य किया था। उस सभा में बहुत से अन्य पादरी भी आए, और सब ने विदाई लेने वाले पादरी की भूरि भूरि प्रशंसा करी, उसके गुणों का खूब बखान किया। बोरहैम ने लिखा कि उस सभा में जो कुछ कहा गया, उस में से उन्हें कुछ भी याद नहीं रहा, सिवाय एक बात के, जो उस चर्च के एक आदमी ने अपने पादरी के विषय में कही; उस व्यक्ति का कहना था कि "पिछले २० वर्षों में लगभग प्रति दिन मैं ने पादरी साहब को देखा है, लेकिन मैंने उन्हें कभी किसी बात के लिए अधीर नहीं पाया।" विदाई समारोह की समाप्ति के पश्चात पादरी ने उस व्यक्ति कि इस बात को, उनके विषय में कही गई अन्य सभी बातों से अधिक संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा, यह बात मेरे लिए प्रमाण है कि मैं ने वास्तव में धीरज से परमेश्वर की बाट जोहना सीखा है और यशायाह ३०:१५ का भेद समझ लिया है।

बहुत से लोगों के लिए कठिन परिस्थित्यों में शांत, अधीर और संयमी रहना या तो उनके आत्म अनुशासन की अथवा उनके स्वभाव की विशेषता है। लेकिन एक मसीही विश्वासी के लिए परमेश्वर की बाट जोहना भीतरी सामर्थ पाने की विधि है। परमेश्वर के सेवक और जाने-माने प्रचारक मार्टिन लूथर ने एक बार कहा था कि प्रतिदिन उनके पास करने के लिए इतना होता है कि यदि वे प्रतिदिन तीन घंटे प्रार्थना में न बिताएं तो उनके लिए कुछ कर पाना संभव नहीं हो पाएगा। लेकिन सामन्यतः हम इस क्रम को बदल देते हैं और व्यस्तता के साथ हमारा प्रार्थना का समय घट जाता है। फिर हम चिंतित होते हैं कि हम क्यों कठिन परिस्थितियों में विचिलित रहते हैं या अधीरता से व्यवहार करते हैं; ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम परमेश्वर के साथ शांत होकर समय बिताना छोड़ देते हैं।

उन पादरी साहब के जीवन से शिक्षा लीजिए; परमेश्वर की बाट जोहना सीखिए; आप भी शांत, अधीर और संयमी बन जाएंगे। - रिचर्ड डी हॉन


जितने के लिए प्रार्थना करने का समय हम रखते हैं, केवल उतना ही कार्य हमें अपने हाथ में लेना चाहिए।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। - यशायाह ३०:१५
बाइबल पाठ: यशायाह ३०:१५-१८
Isa 30:15 प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया,
Isa 30:16 तुम ने कहा, नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़ कर भागेंगे, इसलिये तुम भागोगे; और यह भी कहा कि हम तेज सवारी पर चलेंगे, सो तुम्हारा पीछा करने वाले उस से भी तेज होंगे।
Isa 30:17 एक ही की धमकी से एक हजार भागेंगे, और पांच की धमकी से तुम ऐसा भागोगे कि अन्त में तुम पहाड़ की चोटी के डण्डे वा टीले के ऊपर की ध्वजा के समान रह जाओगे जो चिन्ह के लिये गाड़े जाते हैं।
Isa 30:18 तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११६-११८
  • १ कुरिन्थियों ७:१-१९

मंगलवार, 23 अगस्त 2011

ज़िन्दगी की दौड़

कंप्यूटर द्वारा ५००० रेस के घोड़ों के अध्ययन करने से पता चला कि घोड़े के बचपन से ही जाना जा सकता है कि वह बड़ा होकर अच्छा दौड़ने वाला घोड़ा होगा कि नहीं। Massachusetts Institute of Technology के एक प्राधायपक ने पाया कि तेज़ दौ़ड़ने वाले घोड़े के पांव दौड़ते समय ज़मीन पर एक के बाद एक पड़ते हैं न कि दो पांव एक साथ। ऐसे घोड़े जब दौड़ते हैं तो हर एक पांव ज़मीन पर तब आता है जब उससे पहले वाला ज़मीन से वेग लेकर उठ रहा होता है। इस प्रकार चारों पांव बारी बारी ज़मीन से वेग लेकर उठते हैं और घोड़ा व्यय उर्जा से सबसे अच्छी गति प्राप्त करने पाता है। घोड़े के चलने-भागने का तरीका उसके पैदा होने के कुछ ही महिनों के अन्दर निर्धारित हो जाता है और फिर उनकी सारी उम्र नहीं बदलता। इसलिए बचपने से ही घोड़ों का अध्ययन करने से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि कौन सा घोड़ा आगे चलकर अच्छा भागने वाला घोड़ा बनेगा।

परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही जीवन को एक दौड़ की संज्ञा दी। उसने कहा मसीही जीवन की दौड़ वे ही भली भांति दौड़ सकते हैं जो परिश्रम करने में निपुण होते हैं। मसीही विश्वासी के लिए इसका तातपर्य है संयम और अनुशासन से दौड़ना (१ कुरिन्थियों ९:२४-२७)। इसी संदर्भ में इब्रानियों की पत्री का लेखक भी बताता है कि मसीही दौड़ का अच्छा धावक वह है जो व्यर्थ बोझ साथ लेकर नहीं दौड़ता, वरन उसे त्याग कर इस दौड़ को पूरा करता है - "इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। - इब्रानियों १२:१

बाइबल के पुराने नियम में यशायाह भविष्यद्वक्ता ने भी जीवन की दौड़ को भली भांति दौड़ने की बात कही। उसने कहा कि यह दौड़ वही भली भांति दौड़ सकते हैं जो परमेश्वर पर निर्भर होना और उसके समय की प्रतीक्षा करना जानते हैं, क्योंकि ऐसे लोग परमेश्वर को अपनी सामर्थ और अपनी आशा बनाना लेते हैं (यशायाह ४०:३१)।

ज़िन्दगी की दौड़ यदि भलि भांति दौड़ कर पूरी करनी है और परमेश्वर से प्रतिफल पाना है तो उसके लिए परमेश्वर पर निर्भर होना, उसके समय की प्रतीक्षा करना; जीवन में संयम तथा अनुशासन का पालन करना और ज़िन्दगी को उलझाने वाले पापों से बचा कर रखना होगा। - मार्ट डी हॉन


जो परमेश्वर पर निर्भर रहेंगे वे पाप के बोझ से मुक्त रहेंगे।

क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - १ कुरिन्थियों ९:२४


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ९:२४-२७

1Co 9:24 क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।
1Co 9:25 और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्‍तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।
1Co 9:26 इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्‍तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्‍तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।
1Co 9:27 परनतु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११३-११५
  • १ कुरिन्थियों ६