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शनिवार, 14 जून 2014

आराधना के योग्य


   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, यूहन्ना के प्रकाशितवाक्य, के 5 अध्याय में प्रभु यीशु मसीह के दो शब्द चित्र मिलते हैं - यहूदा का सिंह (पद 5) तथा वध किया हुआ मेमना (पद 6)। इन शब्द चित्रों का संदर्भ देकर प्रसिद्ध मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने प्रश्न किया, "ऐसा क्यों है कि हमारा महान प्रभु अपनी महिमा में घातक घावों के साथ दिखाया गया है?" अपने प्रश्न का स्पर्जन ने उत्तर दिया, "क्योंकि वे घाव ही उसकी महिमा हैं।"

   सामान्यतः मेमने का चिन्ह सामर्थ और विजय का प्रतीक नहीं हैं। अधिकांश लोग ऐसे चिन्ह पसन्द करते हैं जो सामर्थ दिखाते हैं और लोगों की प्रशंसा को आमंत्रित करते हैं। लेकिन परमेश्वर ने यही चुना कि वह एक शिशु बनकर संसार में अवतरित हो, एक गरीब बढ़ई के घर में जन्म ले और बड़ा हो। वह अपनी सेवकाई के दिनों में पैदल ही एक से दूसरे स्थान पर यात्रा करते हुए परमेश्वर के राज्य और धार्मिकता तथा पापों से पश्चताप का प्रचार करता रहा और एक रोमी क्रूस पर लटा कर उसे मार डाला गया। सबने, यहाँ तक कि उसके चेलों ने भी यही सोचा कि क्रूस पर उसकी मृत्यु का तात्पर्य था अपने समय की स्थापित धर्म व्यवस्था को चुनौती देने वाले का अन्त। लेकिन मेमने के समान दीन जीवन बिताने वाले प्रभु यीशु मसीह ने तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जी उठ कर, परमेश्वर की अतुल्य सामर्थ और महिमा को संसार के सामने प्रकट किया।

   वह दिन आने वाला है जब प्रभु यीशु अपनी महिमा में लौट कर आएगा और अपना राज्य स्थापित करेगा। उस दिन सारे संसार के सब लोग उसके सामने दण्डवत करेंगे और कहेंगे, "... कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है" (प्रकाशितवाक्य 5:12)! मेमने के समान दीन और नम्र प्रभु यीशु, सिंह के समान सामर्थी और जयवन्त तथा हमारी आराधना के योग्य है। - सी. पी. हिया


अपने राजा के आदर के लिए हम उसका यशगान करते हैं।

इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। फिलिप्पियों 2:9-11

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 5:1-12
Revelation 5:1 और जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्‍तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई भी, और वह सात मुहर लगा कर बन्‍द की गई थी। 
Revelation 5:2 फिर मैं ने एक बलवन्‍त स्वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्द से यह प्रचार करता था कि इस पुस्‍तक के खोलने और उस की मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है? 
Revelation 5:3 और न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्‍तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला। 
Revelation 5:4 और मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला। 
Revelation 5:5 तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है। 
Revelation 5:6 और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आंखे थीं; ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं। 
Revelation 5:7 उसने आ कर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्‍तक ले ली, 
Revelation 5:8 और जब उसने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं। 
Revelation 5:9 और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध हो कर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है। 
Revelation 5:10 और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं। 
Revelation 5:11 और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी। 
Revelation 5:12 और वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 61-63


शुक्रवार, 13 जून 2014

सर्वोत्तम शिक्षक


   बहुत से जवान लोगों ने, भविष्य की अपनी तैयारी के संबंध में मुझ से कहा है, "हमें संसार में जाकर अधर्मी परिस्थितियों और लोगों का अनुभव लेना आवश्यक है जिस से हम उनके लिए तैयार और उनका सामना करने के लिए सामर्थी बन सकें।" इस विचारधारा ने बहुत से अपरिपक्व मसीहियों को निगल लिया है और कुछ को तो परमेश्वर के विरुद्ध भी कर दिया है।

   यह सच है कि हम संसार में रहते हैं तथा हमें संसार में ही रहना भी है (यूहन्ना 17:15) और अपने स्कूल, व्यवसाय, पड़ौस आदि में गैर-मसीही लोगों और विचारधारा का सामना भी हमें करना पड़ता है, इसलिए यह अति आवश्यक है कि हम सावधान रहें कि संसार की बातों का सामना करते करते कहीं हमें उन के अनुरूप ना होने लग जाएं, उन से संबंध ना बनाने लग जाएं। हम सब मसीही विश्वासी परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 1:1 में दिए परमेश्वर के निर्देश के पालन से भली-भांति परिपक्व हो सकते हैं। इस भजन में दिए निर्देशों के अनुसार हमें:
  • प्रथम, ध्यान रखना है कि हमारे चुनाव तथा निर्णय "दुष्टों की युक्ति" के अनुसार ना हों।
  • दूसरे, हमें अपने आप को ऐसी परिस्थितियों से दूर रखना है जहाँ वे लोग जो मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से नहीं जानते और उसे समर्पित जीवन व्यतीत नहीं करते, वे हमारे सोच-विचार को प्रभावित कर सकें।
  • तीसरे, हम उनके साथ निकट या घनिष्ट ना हों जो परमेश्वर के वचन बाइबल का, परमेश्वर का और हमारे जीवनों में उनकी भूमिका का ठट्ठा करते हैं या उसे महत्वहीन मानते हैं।
   ऐसे लोगों की सलाह हमें परमेश्वर से दूर ले जाती है। इसलिए अपने प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और परामर्श के लिए हमें परमेश्वर के पवित्र वचन बाइबल तथा बाइबल से प्रेम करने वालों एवं उसके आज्ञाकारी रहकर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के पास ही जाना चाहिए। संसार का ज्ञान या अनुभव नहीं वरन परमेश्वर और उसका जीवता एवं सच्चा वचन ही हर बात तथा परिस्थिति के लिए हमारा सर्वोत्तम शिक्षक है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने मस्तिष्क को भर लें, उसे अपने मन पर राज्य और अपने जीवन का मार्गदर्शन करने दें।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2 

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! 
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। 
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है। 
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे; 
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 58-60


गुरुवार, 12 जून 2014

उपयोगी


   नर मोर बहुत खूबसूरत पक्षी होते हैं। उनकी रंगीन पंखों से बनी लंबी पूँछ, उस पूँछ में भिन्न प्रकार के पंख और उनके चमकते चटकीले रंग, उनके सिर की कलगी, उनकी गरदन और छाती के चमकते हुए रंग बस देखते ही बनते हैं, खासकर जब वे अपनी पूँछ खड़ी करके नृत्य करते हैं तो देखने वालों को मानों मंत्र-मुग्ध कर देते हैं। लेकिन उनके पाँव बड़े कुरूप होते हैं!

   ईमानदारी से कहें तो यह हम सब की दशा भी है - हम सब में कोई ना कोई कमज़ोरी या किसी ना किसी बात की घटी अवश्य होती है - वह हम में जन्म से विद्यमान हो सकती है या किसी कारणवश हम में आने वाली हो सकती है; वह लंबे समय से हमारे साथ हो सकती है, या फिर हाल ही में किसी घटना के कारण हम में आ सकती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी एक कमी को "शरीर में चुभाया गया काँटा" कहा जो उसे नम्र रखने के लिए था (2 कुरिन्थियों 12:7-9)। पौलुस ने तीन बार परमेश्वर से उसे हटाने के लिए प्रार्थना करी, संभवतः इस विचार से कि उसके हटने के बाद वह और भली रीति से परमेश्वर की सेवा करने पाएगा, लेकिन परमेश्वर ने उसे आश्वस्त किया कि "मेरा अनुग्रह ही तेरे लिए काफी है" और "मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है"। परमेश्वर के इस आश्वासन पर पौलुस का प्रत्युत्तर था, "इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूँगा कि मसीह की सामर्थ्य मुझ पर छाया करती रहे"।

   मसीही विश्वास की एक विशेषता है कि परमेश्वर अपने महत्वपूर्ण कार्यों को हमारे द्वारा संपन्न कराने के लिए हमें हमारी निर्बलताओं के बावजूद चुन लेता है, ना कि इसलिए कि हम में कोई वाकपटुता है, या हम कार्य करने की विशेष योग्यता रखते हैं या हमारा रूप-रंग अच्छा है। प्रसिद्ध मिशनरी सेवक हडसन टेलर ने कहा था, "परमेश्वर को अपने कार्य करवाने के लिए किसी योग्यता-विहीन तथा निर्बल जन की आवश्यकता थी, इसलिए उसने मुझे और आपको चुन लिया"।

   जब हम परमेश्वर को ही अपनी सामर्थ और योग्यता का आधार बना लेते हैं, तो वो हमें ऐसे उपयोग करने पाता है जो हमारी कलपना से परे है। - डेविड रोपर


परमेश्वर की सामर्थ हमारी निर्बलता में प्रकट होती है।

हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - 1 कुरिन्थियों 1:26-27

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:7-10
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 55-57


बुधवार, 11 जून 2014

मित्र


   स्कूल में जाने वाले अनेक ऐसे छात्र-छात्राएं होते हैं जो किसी शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता से ग्रस्त होते हैं, और अन्य "स्वस्थ" छात्र-छात्राओं को उनके साथ संबंध बनाने और उन्हें समझने में कठिनाई होती है, इसलिए वे उनके साथ व्यवहार नहीं करते और कुछ तो उनकी परवाह भी नहीं करते। इसलिए ये विकलांग लोग अपने आप को अकेला और उपेक्षित अनुभव करते हैं, भीड़ भरे भोजन स्थलों पर भी अकेले ही बैठ कर खाते-पीते हैं। उनकी इस आवश्यकता को देखते और समझते हुए बारबर्रा पेलिलिस नामक एक महिला ने "मित्रों का समूह" नामक एक कार्यक्रम आरंभ किया है, जिसमें विकलांग छात्रों का स्वस्थ छात्रों के साथ जोड़ा बनाया जाता है और वे भोजन के लिए या सामाजिक कार्यों के लिए एकसाथ जाते हैं। इस प्रकार से मित्र बना कर दोनों ही प्रकार के लोगों को एक दूसरे को समझने और अपनी धारणाएं बदलने का अवसर मिलता है जो दोनों के लिए ही लाभप्रद रहता है।

   मेल-मिलाप के साथ रहना प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार का एक अभिन्न अंग है; परमेश्वर ने भी प्रभु यीशु में होकर हम से हमारे पाप की दशा में मेल-मिलाप किया: "परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)" (इफिसीयों 2:4-5)। मसीह यीशु में विश्वास लाने से "पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो" (इफिसीयों 2:13)।

   अब मसीह यीशु में होकर हम परमेश्वर के घराने के गौरवान्वित सदस्य बन गए हैं (पद 19), इसलिए अब हम मसीही विश्वासियों को अपने आस-पास के उपेक्षित और अकेले लोगों को देखने की आँखें और उनकी सहायता करने के मन होने चाहिएं। यदि हम में से प्रत्येक एक उपेक्षित और अकेले जन की सहायता के लिए हाथ बढ़ाएगा, उनका मित्र बनेगा, तो समाज पर इसका कितना व्यापक प्रभाव पड़ेगा, मसीह यीशु की कितनी भली और महिमामय गवाही संसार के सामने जाएगी। - डेविड मैक्कैसलैंड


मित्रता का हाथ बढ़ाकर अकेलों को प्रोत्साहित और कमज़ोरों को सबल करने वाले बन जाएं।

और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। - 2 कुरिन्थियों 5:18

बाइबल पाठ: इफिसीयों 2:1-13
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)। 
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे। 
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 52-54


मंगलवार, 10 जून 2014

अनुत्तरित


   मेरे सबसे बड़े संघर्षों में से एक है अनुत्तरित प्रार्थना; संभवतः आप समझ सकते हैं कि मैं क्या कह रही हूँ। हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे मित्र को नशे की आदत से छुड़ा ले, या किसी प्रीय जन को उद्धार दे, या किसी बीमार बच्चे को स्वस्थ कर दे, या फिर कोई बिगड़े हुए संबंध को सुधार दे। हम यह मानते हैं कि ये सब तथा इनके जैसी अन्य कई बातें परमेश्वर को पसन्द होंगी, उसकी इच्छा के अनुसार होंगी। वर्षों तक हम इन विषयों के लिए प्रार्थना करते रहते हैं, लेकिन ना तो परमेश्वर से कोई उत्तर आता है और ना ही प्रार्थना के अनुरूप कोई प्रभाव दिखाई देता है।

   हम परमेश्वर को स्मर्ण दिलाते हैं कि वह सर्वसामर्थी परमेश्वर है, कुछ भी कर सकता है और हमारी प्रार्थना एक भली प्रार्थना है; हम उससे विननती करते हैं, गिड़गिड़ाते हैं। हमारे अन्दर सन्देह भी आते हैं - शायद वह हमारी सुनने को तैयार नहीं है, या शायद वह इतना सामर्थी नहीं है जितना हम उसे समझ रहे थे। हम प्रार्थना में वह बात माँगना छोड़ देते हैं - कई दिन या महीनों तक। हम फिर अपने सन्देह के कारण दोषी भी अनुभव करते हैं। हम स्मरण करते हैं कि परमेश्वर चाहता है कि हम अपनी आवश्यकताएं उसके पास लेकर जाएं, और हम फिर से अपनी प्रार्थनाओं में उन बातों को माँगने लग जाते हैं।

   कभी कभी हमें लगता है कि हम प्रभु यीशु द्वारा लूका 18 में दिए गए दृष्टान्त की विधवा के समान हैं, जो न्यायी के आगे गुहार लगाती रही, उससे अपना न्याय माँगती रही, जब तक कि उसने उस विधवा की सुन नहीं ली। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि हमारा परमेश्वर उस कठोर न्यायी के समान नहीं है, वह दयालु है, सामर्थी है। हमें अपने परमेश्वर पर विश्वास है क्योंकि वह भला है, बुद्धिमान है, और सर्वप्रभुतासंपन्न है। हम समरण करते हैं कि हमारे प्रभु यीशु ने हमें सिखाया है कि हमें, "...नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए..." (लूका 18:1)।

   इसलिए हम परमेश्वर से माँगते हैं, प्रार्थना करते हैं और उसके उत्तर की प्रतीक्षा करते हैं। - ऐनी सेटास


विलंब इनकार नहीं है; इसलिए प्रार्थना करते रहिए।

इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचने, और मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो। - लूका 21:36

बाइबल पाठ: लूका 18:1-8
Luke 18:1 फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा। 
Luke 18:2 कि किसी नगर में एक न्यायी रहता था; जो न परमेश्वर से डरता था और न किसी मनुष्य की परवाह करता था। 
Luke 18:3 और उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी: जो उसके पास आ आकर कहा करती थी, कि मेरा न्याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा। 
Luke 18:4 उसने कितने समय तक तो न माना परन्तु अन्‍त में मन में विचारकर कहा, यद्यपि मैं न परमेश्वर से डरता, और न मनुष्यों की कुछ परवाह करता हूं। 
Luke 18:5 तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्याय चुकाऊंगा कहीं ऐसा न हो कि घड़ी घड़ी आकर अन्‍त को मेरा नाक में दम करे। 
Luke 18:6 प्रभु ने कहा, सुनो, कि यह अधर्मी न्यायी क्या कहता है? 
Luke 18:7 सो क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उस की दुहाई देते रहते; और क्या वह उन के विषय में देर करेगा? 
Luke 18:8 मैं तुम से कहता हूं; वह तुरन्त उन का न्याय चुकाएगा; तौभी मनुष्य का पुत्र जब आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्वास पाएगा?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-51


सोमवार, 9 जून 2014

सरल जीवन


   क्या अभिभावक अपने बच्चों को खुश रखने के लिए आवश्यकता से अधिक प्रयास कर रहे हैं? क्या उनके इस प्रयास का प्रतिकूल प्रभाव हो रहा है? ये वे प्रश्न हैं जिनके साथ लोरि गौटलिब के एक साक्षातकार का परिचय एवं आरंभ दिया गया। लोरि गौटलिब नाखुश जवान व्यक्तियों पर लिखे गए एक लेख की लेखिका हैं और उपरोक्त दोनों प्रश्नों के लिए उनके उत्तर हैं "हाँ"। उनका कहना है कि वे अभिभावक जो अपने बच्चों को जीवन में पराजय या निराशा का सामना करने से बचाए रखते हैं, वे अपने बच्चों को संसार का एक मिथ्या दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं तथा उन्हें व्यसक होने पर जीवन की कटु सच्चाईयों का सामना करने के लिए तैयार नहीं करने पाते हैं। जब उनके बच्चे बड़े होकर संसार की वास्तविकताओं का सामना करते हैं तो वे उन्हें समझने और सही प्रतिक्रीया देने में असमर्थ होते हैं और अपने आप को अन्दर से खाली और चिंताग्रस्त महसूस करते हैं।

   कुछ मसीही विश्वासी भी यह आशा रखते हैं कि परमेश्वर भी उनके लिए एक ऐसा ही पिता रहेगा जो उन्हें किसी भी निराशा या दुख में नहीं जाने देगा। लेकिन परमेश्वर ने ऐसा कोई आश्वासन कभी अपने लोगों को नहीं दिया है और ना ही वह ऐसा पिता है जो अपने बच्चों को यथार्त से अनभिज्ञ रखता है। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि परमेश्वर अपने लोगों को अपने द्वारा निर्धारित सीमाओं में और अपनी निगरानी में दुखों और प्रतिकूल परिस्थितियों से होकर निकलने देता है (यशायाह 43:2; 1 थिस्सलुनीकियों 3:3)।

   यदि हम इस धारणा के साथ आरंभ करेंगे कि एक सरल जीवन हमें वास्तविक खुशी देगा, तो अपनी इस गलत धारणा को जीने और निभाने के प्रयास में हम थक जाएंगे। लेकिन जब हम इस सच्चाई का सामना करते हुए कि जीवन कठिन है जीवन जीएंगे तो हम अपने जीवन भली रीति और परमेश्वर की इच्छानुसार व्यतीत करने पाएंगे। सही दृष्टिकोण के साथ जीवन निर्वाह करना हमें कठिन समयों के लिए तैयार करता है।

   परमेश्वर का उद्देश्य हमें केवल खुश रखना ही नहीं वरन साथ ही पवित्र बनाना भी है (1 थिस्स्य्लुनीकियों 3:13)। जब हम पवित्र होंगे तो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार चलेंगे भी जिससे परमेश्वर की आशीषों और उसकी शांति को प्राप्त करके हम सन्तुष्टि और खुशी का जीवन भी बिताने पाएंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सन्तुष्ट वह है जिसने मीठे के साथ कड़ुवा भी स्वीकार करना सीख लिया है।

यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। - फिलिप्पियों 4:11-12

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 3:1-13
1 Thessalonians 3:1 इसलिये जब हम से और भी न रहा गया, तो हम ने यह ठहराया कि एथेन्‍स में अकेले रह जाएं। 
1 Thessalonians 3:2 और हम ने तीमुथियुस को जो मसीह के सुसमाचार में हमारा भाई, और परमेश्वर का सेवक है, इसलिये भेजा, कि वह तुम्हें स्थिर करे; और तुम्हारे विश्वास के विषय में तुम्हें समझाए। 
1 Thessalonians 3:3 कि कोई इन क्‍लेशों के कारण डगमगा न जाए; क्योंकि तुम आप जानते हो, कि हम इन ही के लिये ठहराए गए हैं। 
1 Thessalonians 3:4 क्योंकि पहिले भी, जब हम तुम्हारे यहां थे, तो तुम से कहा करते थे, कि हमें क्‍लेश उठाने पड़ेंगे, और ऐसा ही हुआ है, और तुम जानते भी हो। 
1 Thessalonians 3:5 इस कारण जब मुझ से और न रहा गया, तो तुम्हारे विश्वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करने वाले ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो गया हो। 
1 Thessalonians 3:6 पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्हारे पास से हमारे यहां आकर तुम्हारे विश्वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्हें देखने की। 
1 Thessalonians 3:7 इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्हारे विश्वास से तुम्हारे विषय में शान्‍ति पाई। 
1 Thessalonians 3:8 क्योंकि अब यदि तुम प्रभु में स्थिर रहो तो हम जीवित हैं। 
1 Thessalonians 3:9 और जैसा आनन्द हमें तुम्हारे कारण अपने परमेश्वर के साम्हने है, उसके बदले तुम्हारे विषय में हम किस रीति से परमेश्वर का धन्यवाद करें? 
1 Thessalonians 3:10 हम रात दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्हारा मुंह देखें, और तुम्हारे विश्वास की घटी पूरी करें।
1 Thessalonians 3:11 अब हमारा परमेश्वर और पिता आप ही और हमारा प्रभु यीशु, तुम्हारे यहां आने के लिये हमारी अगुवाई करे। 
1 Thessalonians 3:12 और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए। 
1 Thessalonians 3:13 ताकि वह तुम्हारे मनों को ऐसा स्थिर करे, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए, तो वे हमारे परमेश्वर और पिता के साम्हने पवित्रता में निर्दोष ठहरें।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48


रविवार, 8 जून 2014

स्वर्ग में प्रवेश


   मुझे अपने चर्च में आयोजित स्कूल के अवकाश के समय में बच्चों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम में तीसरी एवं चौथी कक्षा के बच्चों को परमेश्वर के वचन बाइबल की बातें सिखाने का कार्य दिया गया था। मैंने सोचा कि कार्यक्रम के अन्तिम दिन पर मैं अपने सभी छात्रों को एक एक उपहार दूँगा, और यह बात मैंने उन बच्चों को भी बता दी। लेकिन मैंने इसके लिए एक शर्त उनके सामने रखी, उपहार प्राप्त करने के लिए उन्हें मुझे यह बताना होगा कि कोई व्यक्ति स्वर्ग कैसे जा सकता है।

   उस अन्तिम दिन पर उपहार लेने से पहले जो बातें मुझे उन 9 या 10 वर्ष के बच्चों ने बताईं वे काफी रोचक थीं। अधिकांश बच्चे तो यह समझ और जान गए थे कि स्वर्ग पहुंचने का मार्ग प्रभु यीशु से मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार है, लेकिन कुछ अभी भी इस सुसमाचार को समझ नहीं पाए थे, इसलिए वे अपनी समझ के अनुसार जो उन्हें सही लगा वह बता रहे थे। एक बच्चे ने कहा, "अच्छा बनने और सन्डे स्कूल जाने के द्वारा", तो दूसरे ने झिझकते हुए मुझ से ही पूछा "क्या परमेश्वर से प्रार्थना करने के द्वारा?" एक और ने कहा, "यदि आप अपने मित्रों के साथ अच्छा व्यवहार करेंगे और अपने माता-पिता के आज्ञाकारी रहेंगे।"

   उद्धार पाने तथा स्वर्ग जाने के प्रभु यीशु में उपलब्ध सही मार्ग को समझाने और इन सभी गलत धारणाओं को धीरे से दूर करने के प्रयास में मैंने उन्हें फिर से समझाने का प्रयत्न किया कि प्रभु यीशु द्वारा हमारे पापों को अपने ऊपर उठाकर कलवरी के क्रूस पर बलिदान होने, मारे जाने और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठने के द्वारा हमारे लिए स्वर्ग जाने का मार्ग अब सेंत-मेंत उपलब्ध है। इसलिए अब जो कोई प्रभु यीशु के इस कार्य को स्वीकार कर के पश्चाताप के साथ उससे अपने पापों की क्षमा माँगता है और अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है वह उद्धार पाता है, स्वर्ग में जाता है। लेकिन उन बच्चों को एक बार फिर यह सुसमाचार समझाते हुए साथ ही मुझे यह भी ध्यान आया कि इन बच्चों के समान ही संसार में कितने ही जन हैं जो अभी भी सुसमाचार को नहीं समझते और अपनी ही गलत धारणाओं और प्रयासों में जी रहे हैं, अपने ही तरीकों से स्वर्ग जाने के प्रयास कर रहे हैं, जबकि स्वर्ग जाने का मार्ग तो परमेश्वर की ओर से उन्हें सेंत-मेंत उपलब्ध है, उन्हें बस विश्वास के साथ कदम बढ़ाकर उस पर चल निकलना है।

   आज आप की क्या स्थिति है? क्या उद्धार या मोक्ष के बारे में आपके विचार परमेश्वर के विचार और वचन के अनुरूप हैं? क्या आपने कभी प्रभु यीशु द्वारा संसार के सभी लोगों के लिए किए गए कार्य पर गंभीरता से विचार किया है? स्वर्ग में प्रवेश के लिए परमेश्वर आपसे प्रभु यीशु में विश्वास के अलावा और कुछ नहीं मांगता; उसने अपने वचन में लिखवाया है, "प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा" (प्रेरितों 16:31) - क्या आपने यह विश्वास किया है? - डेव ब्रैनन


यह मानना मसीह यीशु मारा गया, इतिहास को मानना है; यह विश्वास करना कि मसीह यीशु मेरे पापों के लिए मारा गया, उद्धार को मानना है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 3:20-28
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो। 
Romans 3:27 तो घमण्ड करना कहां रहा उस की तो जगह ही नहीं: कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन विश्वास की व्यवस्था के कारण। 
Romans 3:28 इसलिये हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं, कि मनुष्य व्यवस्था के कामों के बिना विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 43-45