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मंगलवार, 24 जून 2014

दूरी और समय


   बहुत वर्षों से मैं नेपाल में काम कर रहे एक पास्टर के साथ पत्राचार द्वारा संपर्क में हूँ। वह पास्टर अपने चर्च के सदस्यों के साथ अकसर हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिलने वाली पापों से क्षमा एवं उद्धार का सुसमाचार प्रचार करने के लिए यात्रा करता रहता है। हाल ही में मुझे उससे एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें उसने आने वाले सप्ताह में अपनी यात्रा का कार्यक्रम लिखा था और उसके लिए प्रार्थना करने को कहा था।

   उसके उस व्यस्त कार्यक्रम के अनुसार उसने उस सप्ताह में अपनी मोटरसाईकिल द्वारा 160 किलोमीटर की यात्रा का लक्ष्य रखा था जिसमें उसे अनेक स्थानों पर सुसमाचार प्रचार तथा पुस्तिकाओं का वितरण करना था। मुझे अपने मित्र द्वारा उस कठिन पहाड़ी क्षेत्र में इतनी लंबी यात्रा करने पर अचरज हुआ और मैंने उसे पत्र लिख कर उसका कुशल-मंगल तथा यात्रा का समाचार पूछा। उसका उत्तर आया, "पहाड़ों में अपने चर्च के सदस्यों के साथ पैदल यात्रा करना और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करना हमारे लिए एक बड़ा अद्भुत समय रहा है। क्योंकि सभी चर्च सदस्यों के पास मोटरसाईकलें नहीं थीं इसलिए हम सब ने पैदल ही यह यात्रा करने का निर्णय लिया। यह हम सबके लिए बहुत आशीषमय रहा है और अभी अनेक ऐसे स्थान हैं जहाँ जाना बाकी है।" 

   उसके इस उत्तर से मुझे दो बातें स्मरण हो आईं - पहली तो, "और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा" (मत्ती 9:35); और दूसरी अपनी दशा। मुझे कितनी हिचकिचाहट होती है यदि बर्फ के समय में मुझे अकेले रह रहे किसी विधुर से मिलने जाना होता है; या सड़क के पार रह रहे किसी पड़ौसी की सहायता के लिए बाहर निकलना पड़ता है; या जब मैं किसी कार्य में व्यस्त हूँ तब कोई मित्र आकर मेरा द्वार खटखटाए तो जाकर उसके लिए द्वार खोलना पड़ता है - अर्थात उस मसीही प्रेम के अन्तर्गत जब मुझे किसी समय भी कोई दूरी तय करनी होती है।

   मेरे मित्र उस नेपाली पास्टर के लिए प्रभु यीशु का उदाहरण सर्वोपरी है। वह अपने प्रभु के समान ही परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार के प्रचार के लिए किसी भी समय कोई भी दूरी तय करने के लिए तैयार रहता है, और प्रभु हम मसीही विश्वासियों से यही चाहता है (मत्ती 28:18-20)। - डेविड रोपर


परमेश्वर ने हमें जो दिया है, वह चाहता है कि हम उसे दूसरों के साथ बाँटें भी।

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। - प्रेरितों 1:8

बाइबल पाठ: मत्ती 9:35-38, 28:18-20
Matthew 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। 
Matthew 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। 
Matthew 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। 
Matthew 9:38 इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।

Matthew 28:18 यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। 
Matthew 28:19 इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। 
Matthew 28:20 और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93


सोमवार, 23 जून 2014

धोखा


   चीन के एक सेनापति सन त्ज़ू द्वारा छठवीं शताब्दी में लिखित पुस्तक The Art of War (युद्ध की कला) सदियों से सैनिक विचारधारा के लिए मार्गदर्शक रही है। इस पुस्तक को केवल सेना के नायकों ने ही नहीं वरन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे नेतृत्व, प्रबन्धन, व्यवसाय, राजनीति, खेलकूद आदि में कार्यरत स्त्री-पुरषों ने नीतिसंगत कौशल से कार्य करने के लिए उपयोगी पाया है। उस चीनी सेनापति सन त्ज़ू ने जो सैनिक युद्ध के बारे में लिखा वह हम मसीही विश्वासियों के लिए भी हमारे आत्मिक दुश्मन शैतान की युक्तियों को समझ पाने में उपयोगी है। सन त्ज़ू ने लिखा: "समस्त युद्ध कौशल धोखे पर आधारित है। इसलिए जब हम आक्रमण करने में सामर्थी हों तो प्रतीत होना चाहिए कि सामर्थी नहीं हैं; जब अपने बल का प्रयोग करने पर हों तो लगना चाहिए कि शिथिल पड़े हैं; जब निकट आ रहे हों तब शत्रु को लगना चाहिए कि कहीं दूर जा रहे हैं; जब दूर हों तो उसे प्रतीत होना चाहिए कि निकट ही हैं।"

   ठीक इसी प्रकार जिस आत्मिक युद्ध में शैतान हमारे विरुद्ध लगातार डटा रहता है, वह भी धोखे पर ही आधारित है। अदन की वाटिका में हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा से जो पहला पाप शैतान ने करवाया वह भी धोखे पर ही आधारित था। उस पहले पाप को उदाहरण बना कर प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखा, "परन्तु मैं डरता हूं कि जैसे सांप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं" (2 कुरिन्थियों 11:3)।

   इसी कारण हमारे प्रभु यीशु ने हमें सचेत किया है कि शैतान ही झूठ का पिता है (यूहन्ना 8:44) और सदा इस प्रयास में रहता है कि हमें धोखे से पाप में फंसा ले, गिरा दे। इस प्रकार शैतान से धोखा खाने और उसकी चालबाज़ियों से बचने का क्या कोई उपाय है? उपाय है, परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने मन मस्तिष्क को भर लेना, जैसा भजनकार ने कहा है, "मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं" (भजन 119:11)। जब हम परमेश्वर के वचन को जानेंगे, तो सत्य को जानेंगे, शैतान की युक्तियों एवं कुटिलताओं को समझने पाएंगे और शैतान के धोखे में पड़ने से बच जाएंगे (2 कुरिन्थियों 2:11)। केवल परमेश्वर के वचन बाइबल की सच्चाईयाँ ही हमें हमारे आत्मिक शत्रु शैतान की चालों से बचाए रख सकती हैं। - बिल क्राउडर 


शैतान के झूठ से बचे रहने का सर्वोत्त्म सुरक्षा उपाय है परमेश्वर का वचन बाइबल।

कि शैतान का हम पर दांव न चले, क्योंकि हम उस की युक्तियों से अनजान नहीं। - 2 कुरिन्थियों 2:11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-32, 42-47
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। 
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा। 

John 8:42 यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा। 
John 8:43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते। 
John 8:44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है। 
John 8:45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते। 
John 8:46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते? 
John 8:47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो। 

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 88-90


रविवार, 22 जून 2014

खामोशी


  अमेरिका के न्यू इंगलैंड प्रांत में जहाँ मैं रहता हूँ बेसबॉल का खेल इतना लोकप्रीय है कि किसी "धर्म" के अनुचरों के समान ही उसके अनुचर भी हैं। यहाँ के लोग अपनी स्थानीय टीम ’बॉस्टन रेड सॉक्स’ को इतना चाहते हैं कि यदि कानून प्रतिबंधित भी कर दिया जाता कि कोई अपने कार्य के समय में उनके बारे में चर्चा नहीं करेगा, तो भी ’बॉस्टन रेड सॉक्स’ के अनुचर अपनी टीम के बारे में चर्चा करने से बाज़ नहीं आते।

   इससे मेरे मन में हम मसीही विश्वासियों के लिए एक प्रश्न उत्पन्न हुआ: क्या कभी ऐसे भी समय होते हैं जब एक मसीही विश्वासी को परमेश्वर के बारे में नहीं बोलना चाहिए, खामोश रहना चाहिए? मेरे विचार से ऐसे समय अवश्य होते हैं। कई बार जब हमारे विश्वास को चुनौती देने वाले चर्चा के लिए गंभीर नहीं होते, वरन केवल विवाद का अवसर ढूँढ़ रहे होते हैं तब हमारी खामोशी ही उनके प्रश्नों का सर्वोत्तम उत्तर होती है। जब प्रभु यीशु को मृत्यु दण्ड के लिए पकड़वाया गया तो उसे एक बहुत प्रतिकूल वातावरण और व्यवहार का सामना करना पड़ा। इस प्रतिकूल व्यवहार में जब काइफा महायाजक (प्रधान पुरोहित) ने प्रभु से प्रश्न किए तो प्रभु ने खामोशी को ही अपना उत्तर बनाया (मत्ती 26:63) क्योंकि प्रभु जानता था कि कैफा की रुचि सत्य जानने की कदापि नहीं है (पद 59)।

   चाहे हम महीसी विश्वासी मनुष्य होने के कारण प्रभु यीशु के समान प्रत्येक के मन के विचार जान पाने की सामर्थ ना भी रखते हों, तो भी हमें हर बात में और हर समय हमारे अन्दर बसने वाले परमेश्वर के पवित्र आत्मा की अगुवाई के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए जिससे "तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए" (कुलुस्सियों 4:6)। साथ ही हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि प्रश्न और चर्चा मसीह यीशु से भटक कर व्यर्थ की बातों की ओर जा रही है तो हमारा उस समय खामोश होकर शेष चर्चा को फिर किसी अन्य उचित समय और संदर्भ के लिए छोड़ देना अधिक अच्छा होगा।

   क्या अन्य कोई और भी अवसर हो सकते हैं जब हमारा खामोश रहना उचित हो सकता है? यदि हमारे विश्वास के बारे में चर्चा हमारा तथा हमारे सहकर्मियों का ध्यान हमारे कार्य से हटा सकता है तो कार्य के समय पर अपने कार्य पर ध्यान देना और चर्चा को किसी खाली समय पर करना अधिक उचित होगा। या फिर, यदि कोई व्यक्ति कई बार की चर्चा के बावजूद मन को कठोर किए हुए है तो बजाए उस पर दबाव डालते रहने के खामोश होकर कुछ समय के लिए उसे चर्चा की गई बातों पर विचार करने के लिए छोड़ देना चाहिए।

   स्मरण रखें कि हम परमेश्वर के अनुग्रह के गवाह केवल चर्चा से ही नहीं वरन अपने व्यवहार से भी हो सकते हैं (1 पतरस 3:1-2)। - रैण्डी किलगोर


सुसमाचार प्रचार का एक माध्यम खामोशी भी हो सकती है।

अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। - 1 पतरस 2:12

बाइबल पाठ: मत्ती 26:57-64; याकूब 1:19-26
Matthew 26:57 और यीशु के पकड़ने वाले उसको काइफा नाम महायाजक के पास ले गए, जहां शास्त्री और पुरिनए इकट्ठे हुए थे। 
Matthew 26:58 और पतरस दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन तक गया, और भीतर जा कर अन्‍त देखने को प्यादों के साथ बैठ गया। 
Matthew 26:59 महायाजक और सारी महासभा यीशु को मार डालने के लिये उसके विरोध में झूठी गवाही की खोज में थे। 
Matthew 26:60 परन्तु बहुत से झूठे गवाहों के आने पर भी न पाई। 
Matthew 26:61 अन्‍त में दो जनों ने आकर कहा, कि उसने कहा है; कि मैं परमेश्वर के मन्दिर को ढा सकता हूं और उसे तीन दिन में बना सकता हूं। 
Matthew 26:62 तब महायाजक ने खड़े हो कर उस से कहा, क्या तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्या गवाही देते हैं? परन्तु यीशु चुप रहा: महायाजक ने उस से कहा। 
Matthew 26:63 मैं तुझे जीवते परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे। 
Matthew 26:64 यीशु ने उस से कहा; तू ने आप ही कह दिया: वरन मैं तुम से यह भी कहता हूं, कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।

James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 85-87


शनिवार, 21 जून 2014

लुभावना एवं घातक


   ऑस्ट्रेलिया में करे गए एक अध्ययन में पाया गया कि यदि सिग्रेट के डिब्बे दिखने में साधारण से हों, लुभावने ना हों तो वे युवाओं को धुम्रपान के लिए कम आकर्षित करेंगे। इस निशकर्ष के कारण ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह कानून पारित किया कि सिग्रेट के डिब्बों पर आकर्षक रंग, चिन्ह और धुम्रपान बढ़ावा देने वाले वाक्य नहीं वरन धुम्रपान से सेहत को होने वाले नुकसान संबंधी चेतावनी की बातें और धुम्रपान से खराब हुए फेफड़ों के चित्र दिखाने होंगे। अर्थात अब वहाँ धुम्रपान को लुभावना और सामाजिक रीति से उत्कृष्ठ व्यक्तित्व का चिन्ह नहीं किंतु घातक और निम्न कोटी का दिखाया जाएगा। लेकिन केवल सिग्रेट का डिब्बे ही एक ऐसा उत्पाद नहीं है जो बाहर से दिखने में लुभावने परन्तु अन्दर से प्रभाव में घातक होते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में बारंबार यह चेतावनी आई है कि हम अपने द्वारा किए गए सभी चुनावों के दूरगामी परिणामों के बारे में ध्यानपूर्वक विचार कर लें। इस पुस्तक के कई पदों में प्रयुक्त वाक्याँश "अन्त में" इस बात को ध्यान दिलाता है कि हम जिस बात या वस्तु की चाह कर रहे हैं आगे चलकर अन्ततः उसके परिणाम क्या होंगे - आनन्द अथवा दुख, आदर अथवा निरादर, जीवन अथवा मृत्यु। क्योंकि परमेश्वर हमें हर नुकसान से बचा कर रखना चाहता है इसलिए "...बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है" (नीतिवचन 2:6-7)।

   संसार की लुभावनी बातों को लेकर किए गए मूर्खतापूर्ण चुनावों के घातक परिणामों से बचने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल की बुद्धिमानी की बातों को अपना मार्गदर्शक बना लें, "तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा" (नीतिवचन 2:9)। - डेविड मैक्कैसलैंड


उचित तथा महत्वपूर्ण को पहचान पाना ही बुद्धिमानी है।

यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। - भजन 25:8-9

बाइबल पाठ: नीतिवचन 2:6-20
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं। 
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।। 
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।। 
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।। 
Psalms 25:12 वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा। 
Psalms 25:13 वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा। 
Psalms 25:14 यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उस से डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा। 
Psalms 25:15 मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा।। 
Psalms 25:16 हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं। 
Psalms 25:17 मेरे हृदय का क्लेश बढ़ गया है, तू मुझ को मेरे दु:खों से छुड़ा ले। 
Psalms 25:18 तू मेरे दु:ख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर।। 
Psalms 25:19 मेरे शत्रुओं को देख कि वे कैसे बढ़ गए हैं, और मुझ से बड़ा बैर रखते हैं। 
Psalms 25:20 मेरे प्राण की रक्षा कर, और मुझे छुड़ा; मुझे लज्जित न होने दे, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 82-84


शुक्रवार, 20 जून 2014

अच्छे पड़ौसी


   जून 2011 में जब विनाशकारी बाढ़ के कारण उत्तरी डकोटा प्रांत के मिनोट कस्बे के लोगों को अपने घर छोड़ने तथा खाली करने पड़े तो उस इलाके के लोगों ने वह किया जो उनके लिए स्वाभाविक था - ज़रूरतमन्दों की सहायता। उस कस्बे से एक घंटे की यात्रा की दूरी पर रहने वाले भी, बिना किसी के कहे, सहायता करने के लिए वहाँ पहुँच गए। किसी ने लोगों को रहने के लिए स्थान प्रदान किए तो किसी ने उनके सामान को सुरक्षित रखने के लिए स्थान दिया। उत्तरी डकोटा के लोग अपने व्यवहार द्वारा दिखा रहे थे कि अच्छे पड़ौसी होने का क्या अर्थ होता है।

   मसीह यीशु के अनुयायियों के लिए भी अच्छा पड़ौसी होना, अर्थात दूसरों के प्रति प्रेम और आदर का व्यवहार रखना एक स्वाभाविक बात होनी चाहिए (मत्ती 22:39; यूहन्ना 13:35; 1यूहन्ना 4:7-11)। चाहे हमारे पास उन उत्तरी डकोटा के निवासियों के समान किसी प्राकृतिक आपदा के समय नाटकीय ढंग से प्रतिक्रीया करने के अवसर ना भी हों, तो भी अपने आस-पास के लोगों से प्रेम और आदर का व्यवहार करने के अवसर तो सदा विद्यमान रहते हैं। अच्छे पड़ौसी होने के लिए हम दूसरों के साथ कृपालू हो सकते हैं (लूका 10:29-37), उनके साथ पक्षपात ना करें (लैव्यवस्था 19:13-18; याकूब 2:1-8), उनसे सत्य बोलें (इफिसियों 4:25), उनके प्रति क्षमाशील रहें (इफिसियों 4:32; कुलुस्सियों 3:13)।

   मसीही विश्वासी सबसे अच्छे पड़ौसी बन कर रह सकते हैं क्योंकि दूसरों के प्रति प्रेम, आदर और क्षमा का व्यवहार हमारे प्रभु के संसार के प्रति व्यवहार से हमें मिला है; प्रभु यीशु ने सारे संसार से प्रेम किया और सभी के उद्धार के लिए अपने प्राण दिए, और आज भी उस पर विश्वास लाने वाले सभी लोगों को क्षमा करके अपने साथ स्वर्ग में रखने की चाह रखता है। - मार्विन विलियम्स


अपने पड़ौसी के प्रति हमारा प्रेम ही मसीह यीशु के प्रति हमारे प्रेम का माप है।

हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:11

बाइबल पाठ: लूका 10:29-37
Luke 10:29 परन्तु उसने अपनी तईं धर्मी ठहराने की इच्छा से यीशु से पूछा, तो मेरा पड़ोसी कौन है? 
Luke 10:30 यीशु ने उत्तर दिया; कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिये, और मार पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए। 
Luke 10:31 और ऐसा हुआ; कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्तु उसे देख के कतरा कर चला गया। 
Luke 10:32 इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतरा कर चला गया। 
Luke 10:33 परन्तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया। 
Luke 10:34 और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की। 
Luke 10:35 दूसरे दिन उसने दो दिनार निकाल कर भटियारे को दिए, और कहा; इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा। 
Luke 10:36 अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा? 
Luke 10:37 उसने कहा, वही जिसने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 79-81


गुरुवार, 19 जून 2014

लापरवाही के निर्णय


   एक राष्ट्रीय समाचार पत्रिका ने इंटरनैट पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करी जिसके अनुसार हमारा समुदाय राष्ट्र के उन सर्वोच्च 10 समुदायों में से एक था जो समाप्ति की कगार पर पहुँच चुके हैं; इसे पढ़कर स्थानीय नागरिक बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने उस पत्रिका के इस गलत निषकर्ष के बारे में अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए तथ्य प्रस्तुत किए। समुदाय का एक नागरिक तो इस कठोर निर्णय का विरोध करने के लिए इस सीमा तक गया कि उसने अनेक नागरिकों को अपने साथ लिया और उनके साथ हमारे समुदाय के विभिन्न भागों में जाकर वहाँ के सजीव जीवन और चल रहे कार्य का वीडियो बनाया। उसके इस वीडियो ने अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान सत्य की ओर आकर्षित किया और उस पत्रिका को यह स्वीकार करना पड़ा कि उसके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट गलत थी। लेकिन जिस संस्था ने "शोध" करके यह रिपोर्ट तैयार करी थी वह अपने निषकर्ष पर अड़ी रही, यह जानते हुए भी कि उनकी "शोध" बहुत ही सीमित मानदण्डों पर आधारित थी।

   उस संस्था के इस लापरवाही से भरे निषकर्ष और फिर उसे लेकर, तथ्यों की अनदेखी करते हुए अपने बचाव के प्रयासों से मैं अचंभित हुई। लेकिन फिर मैंने विचार किया कि यह हम लोगों के लिए कितनी सामान्य सी बात है कि अनेक बातों में हम दूसरों के बारे में थोड़ी सी जानकारी के आधार पर ही गलत निषकर्ष निकाल लेते हैं और अपने अहम में आकर उन गलत निर्णयों को थामे रहते हैं, उनका विशलेष्ण कर के तथा तथ्यों को स्वीकार करके अपने निर्णयों को बदलना नहीं चाहते।

   इस प्रवृति का एक उत्तम उदाहरण है परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब के साथ घटी घटना, जहाँ उसकी त्रासदी में उसे सांत्वना देने आए उसके मित्रों ने यह गलत निर्णय लिया कि अय्युब का पापी होना ही उसके दुखों का कारण है और वे इस आधार पर उस पर दोष मढ़ते रहे, तथा अय्युब उन्हें समझाने और अपने आप को निर्दोष साबित करने के प्रयास करता रहा। अन्ततः स्वयं परमेश्वर ने अय्युब का बचाव किया और एक चौंका देने वाला निषकर्ष उन मित्रों के सामने रखा। परमेश्वर ने अय्युब के मित्रों द्वारा अय्युब को दोषी ठहराने के प्रयासों की निन्दा नहीं की, वरन इस बात की निन्दा करी कि उन्होंने परमेश्वर के बारे में असत्यों को आधार बनाकर अय्युब को दोषी ठहराने का प्रयास किया (अय्युब 42:7)। 

   परमेश्वर द्वारा कही गई यह बात हमें सिखाती है कि जब हम दूसरों के बारे में तथ्यों को ठीक से जाने या जाँचे बिना और लापरवाही से निर्णय लेते हैं तो हम परमेश्वर के विरुद्ध पाप करते हैं - यह एक नम्र करने वाला तथ्य है, जिसे हमें सदा स्मरण रखना चाहिए तथा जिसकी हमें कभी अवहेलना नहीं करनी चाहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो स्मरण रखिए कि संसार आपके परमेश्वर का आप के व्यवहार के द्वारा आँकलन करता है।

परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है। फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। - रोमियों 8:33-34

बाइबल पाठ: अय्युब 42:1-8
Job 42:1 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया; 
Job 42:2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। 
Job 42:3 तू कौन है जो ज्ञान रहित हो कर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिन को मैं जानता भी नहीं था। 
Job 42:4 मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे। 
Job 42:5 मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; 
Job 42:6 इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ। 
Job 42:7 और ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उसने तेमानी एलीपज से कहा, मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही। 
Job 42:8 इसलिये अब तुम सात बैल और सात मेढ़े छांट कर मेरे दास अय्यूब के पास जा कर अपने निमित्त होमबलि चढ़ाओ, तब मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा, क्योंकि उसी की मैं ग्रहण करूंगा; और नहीं तो मैं तुम से तुम्हारी मूढ़ता के योग्य बर्ताव करूंगा, क्योंकि तुम लोगों ने मेरे विषय मेरे दास अय्यूब की सी ठीक बात नहीं कही।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 76-78


बुधवार, 18 जून 2014

स्मरण एवं मनन


   मेरे जन्म के पहले ही मेरे परदादा एब्राम हैस अपनी आँखों की रौशनी गंवा चुके थे। वे अपने क्षेत्र में दो बातों के लिए विख्यात थे - अपनी खराद मशीन पर लकड़ी की सुन्दर वस्तुओं को बनाने और परमेश्वर के वचन बाइबल के अनेक पदों को स्मरण रखने तथा दोहराने। वे और उनके एक मित्र - एली अकसर आपस में एक दूसरे के साथ बाइबल के पदों को बाँटते रहते थे। उन दोनों में पदों को ऐसे बोलने की एक स्पर्धा सी रहती थी; जबकि एली बाइबल के हवाले अधिक बताने पाते थे, मेरे परदादा पदों के लेख को दोहराने पाते थे।

   आज हमारा परिवार परदादा एब्राम को अधिकतर "दृष्टिहीन दादा" संबोधित करके याद करता है। आँखों के चले जाने के बाद बाइबल के पदों को स्मरण रखने की उनकी आदत उनके लिए जीवन जीने का सहारा बन गई। लेकिन हमारे लिए यह क्यों आवश्यक है कि हम परमेश्वर के वचन को स्मरण रखें और उस पर मनन करें?

   भजन 119 हमें कई कारण बताता है कि परमेश्वर के वचन को अपने हृदयों में रख लेने से हमारे जीवन में क्या प्रभाव आते हैं: पहले तो उस वचन के द्वारा हम प्रलोभनों और परीक्षाओं का सामना करने की सामर्थ पाते हैं (पद 11, इफिसियों 6:17)| फिर जब हम उस वचन पर मनन करते हैं तो हम परमेश्वर को और बेहतर रीति से जानने लगते हैं। जब परमेश्वर का वचन हमारे मन-मस्तिष्क में बस जाता है तो हम उसकी आवाज़ को बेहतर सुनने और समझने लगते हैं, उसके मार्गदर्शन सरलता से समझने लगते हैं। हम परमेश्वर के वचन को ही प्रार्थना करने, परमेश्वर से वार्तालाप करने, उसकी आराधना करने और दूसरों को उसके बारे में बताने के लिए प्रयोग करने पाते हैं (कुलुस्सियों 3:16)।

   परमेश्वर का वचन जीवित और प्रबल है (इब्रानियों 4:12); इस बहुमूल्य वचन को स्मरण रखें, उस पर मनन करते रहें, उसे अपने हृदय में बसा लें, और वह आपको पाप से बचाए रखेगा (भजन 119:11)। - सिंडी हैस कैसपर


जब परमेश्वर का वचन हमारे हृदय में बसा रहेगा तो परमेश्वर के मार्ग हमारे मार्ग बन जाएंगे।

धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते। - भजन 37:30-31

बाइबल पाठ: भजन 119:9-15
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 73-75