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शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

विदित या वास्तविक


   अकसर यह कहा जाता है कि "जो प्रत्यक्ष है वह वास्तविक है"। अमेरिका के निवासियों के लिए यह धारणा संभवतः 26 सितंबर 1960 के दिन सजीव हुई होगी, जब उस दिन राष्ट्रपति पद के दो उम्मीदवारों के मध्य होने वाली बहस का सर्वप्रथम राष्ट्रीय टेलिविज़न पर प्रसारण किया गया। टेलिविज़न कैमरा के सामने जॉन केनेडी शांत और नियंत्रण में नज़र आए किंतु रिचर्ड निक्सन बेचैन दिखाई दे रहे थे। जो विचार इससे लोगों के सामने आया वह था कि केनेडी अधिक मज़बूत नेता होंगे। इस प्रसारण ने ना केवल उस चुनाव को एक निर्णायक मोड़ दे दिया, वरन उसने अमेरिका की राजनीतिक प्रक्रीया को भी बदल दिया; विदित तथा प्रत्यक्ष होने का महत्व राजनीति का नियम बन गया।

   अकसर जो विदित होता है वह वास्तविक होता है, परन्तु हमेशा नहीं - विशेषकर परमेश्वर को लेकर हमारी धारणाओं के संबंध में। जब प्रभु यीशु और उनके चेले एक छोटी मछली पकड़ने वाली नाव में गलील की झील को पार कर रहे थे, तो अचानक आए एक तूफान से उनकी नाव डूबने को होने लगी। प्रभु यीशु नाव में सो रहे थे और तूफान देखकर चेले घबरा गए, उन्होंने बेचैन होकर उन्हें जगाया और उनसे कहा, "...हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं" (मरकुस 4:38)।

   उन चेलों का यह प्रश्न उन प्रश्नों के समान ही है जो मैंने अनेकों बार परमेश्वर से पूछे हैं; जब भी मुझे प्रतीत हुआ है कि परमेश्वर का किसी विपरीत परिस्थिति में मेरे पक्ष में हस्तेक्षेप ना करना इस बात का सूचक है कि उसे मेरी परवाह नहीं है। लेकिन वास्तविकता यही है कि मेरे लिए उसकी परवाह, मेरे देख पाने या जाँच अथवा नाप पाने से कहीं बढ़कर है। हमारा प्रभु परमेश्वर हमारी हर बात के प्रति गहरी परवाह रखता है; इसीलिए वह हमें कहता है, आश्वस्त करता है कि हम अपनी सभी चिंता उस पर डाल दें: "और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है" (1 पतरस 5:7), प्रत्येक परिस्थिति का निवारण उस पर छोड़ दें, क्योंकि वह हमारी भलाई ही की योजनाएं बनाता है, भलाई ही के लिए कार्य करता रहता है। चाहे यह विदित हो या ना हो पर वास्तविकता यही है। - बिल क्राउडर


चाहे हम परमेश्वर की प्रेम भरी उपस्थिति को महसूस ना भी करें, 
लेकिन उसकी प्रेम भरी देखभाल हमारे साथ सदा बनी रहती है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें, 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़ कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1


गुरुवार, 3 नवंबर 2016

निकट


   मिनी और जॉर्ज लेसी के सामने कुछ प्रश्न थे: "क्या यीशु मसीह काफी है? क्या उसके साथ हमारा संबंध हमें संभालने के लिए काफी है? क्या वह हमें जीने की इच्छा और कारण देने के लिए काफी है? क्या उसे हमारी कोई चिंता है?"

   अपनी मिशनरी सेवकाई के दौरान, 1904 में, लेसी दंपत्ति की सबसे छोटी बेटी बीमार पड़ी; और फिर एक के बाद एक, उनके पाँचों बच्चे बीमार होकर मर गए, उनमें से एक भी नए वर्ष को नहीं देखने पाया। अपनी मिशनरी संस्था को लिखे गए पत्रों में जॉर्ज लेसी ने अपने गहरे दुःख तथा अकेलेपन के संबंध में लिखा: "कभी कभी यह हमारे सहने के बाहर लगता है।" लेकिन साथ ही उसने यह भी लिखा, "हमारा प्रभु हमारे साथ है और अद्भुत रीति से हमारी सहायता भी कर रहा है।" अपने इस कठिन और सबसे अन्धकारपूर्ण समय में, उन्होंने पाया कि प्रभु यीशु उनके साथ, उनके निकट है और उनके साथ उसकी यह उपस्थिति उनके लिए काफी है।

   हम में से अनेकों ऐसे पलों का सामना करेंगे, जब हमारे मनों में प्रश्न उठेंगे कि क्या अब और आगे बढ़ पाना हमारे लिए संभव है। यदि हमारा स्वास्थ्य बिगड़ जाए, हमारी नौकरी जाती रहे, हमारे निकट संबंधी जाते रहें इत्यादि, तो क्या प्रभु परमेश्वर के साथ हमारा संबंध फिर भी हमें आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करने के लिए काफी है?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने हमें परमेश्वर की उपस्थिति और विश्वासयोग्यता के बारे में स्मरण करवाया है (भजन 30)। जब भजनकार अत्याधिक निराशा में था, क्योंकि उसका अनुभव था कि परमेश्वर उसे सांत्वना और शांति देता है (पद 2-3) तो उसने पुकारा, "हे यहोवा, सुन, मुझ पर अनुग्रह कर; हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो" (पद 10), और परमेश्वर ने उसकी सहायता करी (पद 11)। प्रभु यीशु मसीह के विश्वासियों को दृढ़ होकर डटे रहने के लिए आवश्यक सामर्थ की कभी घटी नहीं होगी; प्रभु परमेश्वर सदा हमारे निकट और साथ रहेगा। - रैंडी किलगोर


सर्वसामर्थी प्रभु प्रभु यीशु में विश्वास हमें हर परिस्थिति में 
दृढ़ होकर डटे रहने के लिए आवश्यक सामर्थ प्रदान करता है।

यहोवा मेरा बल और मेरी ढ़ाल है; उस पर भरोसा रखने से मेरे मन को सहायता मिली है; इसलिये मेरा हृदय प्रफुल्लित है; और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूंगा। - भजन 28:7

बाइबल पाठ: भजन 30
Psalms 30:1 हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया। 
Psalms 30:2 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है। 
Psalms 30:3 हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है।
Psalms 30:4 हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो। 
Psalms 30:5 क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सवेरे आनन्द पहुंचेगा।
Psalms 30:6 मैं ने तो अपने चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का। 
Psalms 30:7 हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था; जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया।
Psalms 30:8 हे यहोवा मैं ने तुझी को पुकारा; और यहोवा से गिड़गिड़ाकर यह बिनती की, कि 
Psalms 30:9 जब मैं कब्र में चला जाऊंगा तब मेरे लोहू से क्या लाभ होगा? क्या मिट्टी तेरा धन्यवाद कर सकती है? क्या वह तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकती है? 
Psalms 30:10 हे यहोवा, सुन, मुझ पर अनुग्रह कर; हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो।
Psalms 30:11 तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है; 
Psalms 30:12 ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो। हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमोन


बुधवार, 2 नवंबर 2016

हाथ


   मुझे अपने बचपन का एक खेल स्मरण है - सेब पकड़ना; इसके लिए खेलने वाले के हाथ पीछे करके बाँध दिए जाते थे और उसे अपने मुँह तथा दाँतों से एक धागे से बंधे और झूलते हुए सेब को पकड़ना होता था। झूलते हुए सेब को ऐसे पकड़ना बड़ा कठिन और खिसियाने वाला होता था। यह मुझे स्मरण दिलाता है कि हाथ हमारे लिए कितने महत्वपूर्ण हैं - हम उनकी सहायता से ही खाने पाते हैं, किसी का अभिनंदन करने पाते हैं, कुछ थामने पाते हैं, अपनी सुरक्षा करने पाते हैं। कहने का तातपर्य यह है कि जीवन के लिए जो भी आवश्यक है, वह करने के लिए हाथों की बहुत महत्वपूर्ण तथा आवश्यक भूमिका होती है।

   जब परमेश्वर के वचन बाइबल में मैं भजन 46:10 पढ़ता हूँ, तो इसे रोचक पाता हूँ कि यहाँ परमेश्वर कहता है कि "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं"। मूल इब्रानी भाषा में प्रयुक्त जिस शब्द का अनुवाद यहाँ ’चुप’ हुआ है उसका अर्थ है ’संघर्ष बन्द करना’, या, यदि बिलकुल शब्दार्थ को लें तो ’हाथ बगल में रख लेना’। पहली नज़र में यह परामर्श बड़ा जोखिम भरा लगता है, क्योंकि किसी भी कठिन परिस्थिति में हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है उस परिस्थिति में अपना हाथ डालकर उसे अपने लाभ के लिए मोड़ देने का प्रयास करना। लेकिन यहाँ परमेश्वर हम से कह रहा है, "अपने हाथ हटा लो और केवल मुझे ही इस समस्या का निवारण कर लेने दो; और विश्वास रखो कि निवारण मैं ही दूँगा।"

   लेकिन सामान्यतः अपने हाथ पूर्णतया हटा कर परमेश्वर को पूरी स्वतंत्रता के साथ कार्य करने देने में हम अपने अन्दर असुरक्षित अनुभव करते हैं। किंतु यदि हम वास्तव में इस बात पर विश्वास रखते हैं कि, जैसा भजनकार इस भजन में लिखता है, "परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (भजन 46:1) और यह कि, "सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है" (भजन 46:7), तो हम हर परिस्थिति, परेशानी, समस्या में शांत होकर, अपने हाथ हटा कर परमेश्वर की देखभाल में विश्राम कर सकते हैं; सभी निवारण को उसके हाथों में छोड़ सकते हैं। - जो स्टोवैल


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में सौंप देते हैं, 
तब वह अपनी शांति हमारे हृदयों में भर देता है।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया - यशायाह 30:15 

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3


मंगलवार, 1 नवंबर 2016

कलाकृति


   प्रत्येक पतझड़ ऋतु में हमारा शहर तीन सप्ताह के लिए एक कला-दीर्घा बन जाता है। संसार भर से लगभग 2000 कलाकार आकर अपनी कला की प्रदर्शनी संग्रहालयों, होटलों, पार्क, सड़क के किनारे, चर्च और नदियों में भी लगाते हैं। मुझे सबसे अधिक पसन्द आने वाली कलाकृतियों में से एक हैं पच्चिकारी विधि से बनी कलाकृतियाँ, जिसके लिए कलाकार छोटे-छोटे टुकड़ों को एकत्रित करके उनसे कलाकृति बनाते हैं। सन 2011 की ईनाम जीतने वाली कलाकृति थी 9 x 13 आकार की रंगीन काँच के टुकड़ों से बनी मिया टैवोनैट्टी का प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़े होने का चित्र। उस कलाकृति का निरीक्षण करते हुए मैंने उस कलाकार को कलाकृति बनाने की कहानी सुनाते हुए सुना कि कैसे उन काँच के टुकड़ों को सही आकार देने और उसके स्थान के लिए तैयार करते हुए उसने आप को कितनी बार काँच से घायल कर लिया था।

   उस हृदयविदारक घटना के खूबसरत चित्रिकरण को निहारते हुए मुझे वहाँ प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के दृश्य से भी बढ़ कर कुछ नज़र आया - मैंने वहाँ प्रभु यीशु की देह, अर्थात उसके विश्वासियों की मण्डली को बनाया गया देखा। काँच के प्रत्येक टुकड़े में मैंने एक मसीही विश्वासी को देखा, जिसे मसीह यीशु ने उसके सही स्थान के लिए तराशकर तैयार किया था, जो अपने स्थान पर देह को पूर्ण कर रहा था, स्वयं सुन्दर दिख रहा था और देह को सुन्दर बना रहा था; और सभी टुकड़े एक साथ मिलकर एक संपूर्ण देह बना रहे थे (इफिसियों 2:16, 21)। कलाकृति बनाने के लिए कलाकार के प्रयासों की कहानी में मैंने प्रभु यीशु के घायल होने और अपना रक्त बहाने को देखा जिससे काँच के टुकड़ों में आपसी तालमेल और एक जुटता आ सके। उस पूर्ण कलाकृति में मैंने उस प्रेम को देखा जिसके अन्तर्गत दुःख और तकलीफ उठाकर, बलिदान देकर के यह कार्य पूर्ण किया जा सका।

   हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के द्वारा मसीह यीशु में होकर बनाई गई कलाकृति के अंश हैं जो हमारे उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर की महानता को दिखाती है; उसकी जो हमारे टूटे हुए और चुभने तथा आहत करने वाले जीवनों को लेकर अपनी समानता में ढालता है, हमारे द्वारा एक सुन्दर तथा उपयोगी निर्माण करता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु मसीह ने अपनी मण्डली को सुन्दर और बहुमूलय बनाने के लिए अपना सब कुछ दे दिया।

क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। - रोमियों 8:29

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:10-22
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)। 
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे। 
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। 
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। 
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दोनों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। 
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। 
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। 
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। 
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2


सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

प्रेम


   वर्षों पहले मैंने एक जवान से, जिसकी सगाई हो गई थी, पूछा, "तुम कैसे जानते हो कि तुम उससे प्रेम करते हो?" इस प्रश्न का उद्देश्य था कि वह आने वाली शादी के लिए अपने हृदय के उद्देश्यों को जान सके। कुछ देर विचार करने के पश्चात उस जवान ने उत्तर दिया, "मैं जानता हूँ कि मैं उससे प्रेम करता हूँ क्योंकि मैं अपना शेष जीवन उसे प्रसन्न रखने के लिए बिताना चाहता हूँ।" हमने उसके इस उत्तर के तात्पर्य के बारे में कुछ देर विचार-विमर्श किया और यह भी समझने का प्रयास किया कि अपने आप को प्रथम रखने की बजाए दूसरे के लिए निःस्वार्थ भाव से भला चाहने की कीमत क्या होती है। हम ने समझा कि सच्चे प्रेम का बलिदान के साथ बहुत गहरा संबंध है।

   यह बात परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई बुद्धिमता के समान है। परमेश्वर के वचन में विभिन्न प्रकार के प्रेम को बताने के लिए कई भिन्न शब्द प्रयुक्त हुए हैं। सर्वोच्च गुणवन्ता वाले प्रेम के लिए ’अगापे’ प्रयुक्त हुआ है; यह उस प्रेम को दिखाता है जो आत्म-बलिदान द्वारा प्रदर्शित और परिभाषित होता है। इस अगापे प्रेम का सर्वोत्तम उदाहरण है परमेश्वर पिता द्वारा हमारे प्रति किया गया प्रेम जिसके अन्तरगत उन्होंने हमारे लिए प्रभु यीशु मसीह को बलिदान होने के लिए दे दिया; परमेश्वर के लिए हम बहुत मूल्यवान हैं। प्रेरित पौलुस ने कहा, "परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा" (रोमियों 5:8)।

   यदि बलिदान प्रेम का सही माप है, तो मनुष्यों के लिए प्रभु यीशु के प्रेम से बढ़कर और कोई प्रेम हो नहीं सकता है: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। - बिल क्राउडर


प्रेम का माप इससे है कि आप उसके लिए क्या कुछ दे देने के लिए तैयार हैं।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। - यूहन्ना 15:13

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-8
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1


रविवार, 30 अक्टूबर 2016

आवर्धन


   क्रिस्टोफर लॉक पुराने भोंपू, तुरही, फ्रेंचहॉर्न आदि खरीदता है और उन्हें फिर आईफोन्स और आईपैड्स के लिए ध्वनि आवर्धन कर देने वाले उपकरण बना देता है। उसकी ये रचनाएं सन 1800 के अन्त के समय में आए ध्वनि तथा संगीत बजाने वाले प्रथम फोनोग्राफ्स के भोंपू-समान स्पीकरों पर आधारित हैं। क्रिस्टोफर के इन एनालॉग टेलीफोनोग्राफ्स से निकल कर आना वाला संगीत गुणवन्ता में उन डिजिटल उपकरणों में लगे छोटे स्पीकर्स से अधिक "ऊँची आवाज़ वाला, स्पष्ट, बेहतर और गहराई लिए हुए" होता है। व्यर्थता से बचाए गए ये पीतल के उपकरण ना केवल कला के रुचिकर नमूने हो जाते हैं, वरन लोगों को पसन्द आने वाला उच्च गुणवन्ता का संगीत सुनने में इनके प्रयोग से अतिरिक्त बिजली का खर्च भी नहीं आता।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों जो बात लिखी वह आज हमें भी स्मरण दिलाती है कि मसीही विश्वास का जीवन जीते समय, और मसीह यीशु को औरों से बाँटते समय, हम अपने आप में कोई "मधुर संगीत" नहीं हैं, वरन क्रिस्टोफार के भोंपुओं के समान, केवल उस संगीत को सुनाने वाले उपकरण मात्र हैं। पौलुस ने लिखा, "क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं" (2 कुरिन्थियों 4:5)। हमारे मसीही विश्वास के जीवनों का उद्देश्य स्वयं को सन्देश बनाना नहीं वरन मसीही विश्वास के सन्देश को अपने जीवन और मुख से प्रसारित करना है: "परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे" (2 कुरिन्थियों 4:7)। हम तो केवल उपकरण हैं, हम से निकलने और सुनाई देना वाला संगीत और सामर्थ तो प्रभु परमेश्वर से है।

   यदि एक पुराना भोंपू सुधारा जाकर संगीत को आवर्धित करके सुनने वालों के लिए आकर्षक बना सकता है, तो मसीह यीशु में लाए विश्वास द्वारा ठीक किए गए हमारे दोषपूर्ण जीवन परमेश्वर की भलाई और अनुग्रह को आवर्धित करके लोगों को आकर्षित करने वाले क्यों नहीं बन सकते है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के हाथों में कुछ भी, कोई भी अनुपयोगी अथवा व्यर्थ नहीं है।

परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। - 1 कुरिन्थियों 1:27-29

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:17-4:7
2 Corinthians 3:17 प्रभु तो आत्मा है: और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्‍वतंत्रता है। 
2 Corinthians 3:18 परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं।
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते। 
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं। 
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। 
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। 
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं। 
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्टी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4


शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

छाया


   मुझे लगा कि कोई मेरा पीछा कर रहा है; जैसे ही मैं एक अन्धियारे गलियारे के मोड़ को मुड़कर सीढ़ी चढ़ने लगा, तो जो मुझे दिखाई दिया उसके कारण मैं चौंक कर वहीं थम गया। ऐसा ही कुछ दिन के बाद फिर से हुआ; मैं अपनी पसन्दीदा कॉफी की दुकान के पिछले दरवाज़े से निकला ही था कि एक व्यक्ति के बड़े से आकार को अपनी तरफ आता देखकर ठिठक गया। लेकिन दोनों ही बार उन घटनाओं का अन्त मुस्कुराहट के साथ हुआ, क्योंकि दोनों बार मैं अपनी ही छाया से डर गया था!

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने वास्तविक और कालपनिक भय के फर्क के बारे में लिखा है। उसके साथ के कुछ यहूदी लोगों ने उससे कहा कि वह परमेश्वर से उनके विषय में पूछे कि उन्हें यरुशालेम ही में रहना चाहिए या सुरक्षा के लिए मिस्त्र चले जाना चाहिए, क्योंकि उन लोगों को बाबुल के राजा का भय सता रहा था (यिर्मयाह 42:1-3)। यिर्मयाह ने परमेश्वर से प्रार्थना करके उन्हें परमेश्वर उत्तर लाकर दिया कि यदि वे लोग परमेश्वर पर भरोसा रखकर यरुशालेम ही में बने रहेंगे तो उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं होगी (पद 10-12)। परन्तु यदि वे पुनः मिस्त्र को लौट जाएंगे, तो बाबुल का राजा उन्हें वहाँ घात करने के लिए ढूँढ़ लेगा (पद 15-16)। भय की वास्तविक बातों से भरे इस संसार में, परमेश्वर ने उन इस्त्राएलियों को उस पर भरोसा रखकर यरुशालेम में ही रहने का कारण दिया था। परमेश्वर पहले भी उन्हें मिस्त्र से सुरक्षित निकाल कर ले आया था।

   इस घटना के सदियों बाद, परमेश्वर ने मनुष्यों को पाप और मृत्यु के भय से छुड़ाने के लिए चिर-प्रतीक्षित मसीहा को भेजा जिसने अपने बलिदान और मृतकों से पुनरुत्थान के द्वारा समस्त मानव जाति के लिए उद्धार का मार्ग तैयार करके दे दिया। आज हमारा सर्वशक्त्त्तिमान प्रभु परमेश्वर समस्त मानव जाति के सभी लोगों को पाप और मृत्यु के डर से निकल कर उसके साथ उसकी छाया में सुरक्षित रहने के लिए आमंत्रित करता है। - मार्ट डीहॉन


परमेश्वर के पंखों की सुरक्षा की छाया में आने से, 
जीवन की छोटी छायाओं का भय जाता रहता है।

हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा। - भजन 57:1 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 42:1-12
Jeremiah 42:1 तब कारेह का पुत्र योहानान, होशयाह का पुत्र याजन्याह, दलों के सब प्रधान और छोटे से ले कर बड़े तक, सब लोग यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के निकट आकर कहने लगे, 
Jeremiah 42:2 हमारी बिनती ग्रहण कर के अपने परमेश्वर यहोवा से हम सब बचे हुओं के लिये प्रार्थना कर, क्योंकि तू अपनी आंखों से देख रहा है कि हम जो पहले बहुत थे, अब थोड़े ही बच गए हैं। 
Jeremiah 42:3 इसलिये प्रार्थना कर कि तेरा परमेश्वर यहोवा हम को बताए कि हम किस मार्ग से चलें, और कौन सा काम करें? 
Jeremiah 42:4 सो यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने उन से कहा, मैं ने तुम्हारी सुनी है; देखो, मैं तुम्हारे वचनों के अनुसार तुम्हारे परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना करूंगा ओर जो उत्तर यहोवा तुम्हारे लिये देगा मैं तुम को बताऊंगा; मैं तुम से कोई बात न छिपाऊंगा। 
Jeremiah 42:5 तब उन्होंने यिर्मयाह से कहा, यदि तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे द्वारा हमारे पास कोई वचन पहुंचाए और हम उसके अनुसार न करें, तो यहोवा हमारे बीच में सच्चा और विश्वासयोग्य साक्षी ठहरे। 
Jeremiah 42:6 चाहे वह भली बात हो, चाहे बुरी, तौभी हम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा, जिसके पास हम तुझे भेजते हैं, मानेंगे, क्योंकि जब हम अपने परमेश्वर यहोवा की बात मानें तब हमारा भला हो। 
Jeremiah 42:7 दस दिन के बीतने पर यहोवा का वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा। 
Jeremiah 42:8 तब उसने कारेह के पुत्र योहानान को, उसके साथ के दलों के प्रधानों को, और छोटे से ले कर बड़े तक जितने लोग थे, उन सभों को बुला कर उन से कहा, 
Jeremiah 42:9 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसके पास तुम ने मुझ को इसलिये भेजा कि मैं तुम्हारी बिनती उसके आगे कह सुनाऊं, वह यों कहता है, 
Jeremiah 42:10 यदि तुम इसी देश में रह जाओ, तब तो मैं तुम को नाश नहीं करूंगा वरन बनाए रखूंगा; और तुम्हें न उखाडूंगा, वरन रोपे रखूंगा; क्योंकि तुम्हारी जो हानि मैं ने की है उस से मैं पछताता हूँ। 
Jeremiah 42:11 तुम बाबुल के राजा से डरते हो, सो उस से मत डरो; यहोवा की यह वाणी है, उस से मत डरो, क्योंकि मैं तुम्हारी रक्षा करने और तुम को उसके हाथ से बचाने के लिये तुम्हारे साथ हूँ। 
Jeremiah 42:12 मैं तुम पर दया करूंगा, कि वह भी तुम पर दया कर के तुम को तुम्हारी भूमि पर फिर से बसा देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 18-19
  • 2 तिमुथियुस 3