ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 23 मार्च 2019

शान्ति



      मेरी सहेली ने मुझे उसकी चार दिन की बच्ची को गोदी ले लेने का सैभाग्य प्रदान किया। किन्तु उस बच्ची को गोदी में उठा लेने के कुछ ही समय बाद वह बच्ची बेचैन होने लगी। मैंने उसे अपने से और चिपटा लिया, मेरा गाल उसके सर को छू रहा था, और मैं उसे हलके से हिलाते हुए गुनगुनाने लगी जिससे वह शान्त हो जाए किन्तु ऐसा नहीं हुआ। अपने मातृत्व के डेढ़ दशक के अनुभव का संपूर्ण प्रयोग करने के बावजूद मैं उस बच्ची को शान्त नहीं कर पाई, वह और अधिक बेचैन होती चली गई, जब तक कि मैंने उसे वापस उसकी माँ की गोदी में नहीं दे दिया। मेरे ऐसा करते ही वह तुरंत शान्त हो गई, उसका रोना बन्द हो गया, उसका शरीर ढीला पड़ गया, उसने पहचान लिया कि वह फिर से उसके भरोसेमंद सुरक्षा के स्थान में लौट आई है। मेरी सहेली को भी पता था कि उसे अपनी बच्ची को कैसे पकड़ना और सहलाना है जिससे उसकी बेचैनी दूर हो सके।

      परमेश्वर भी अपने बच्चों की देखभाल एक माँ के समान करता है: कोमलता, विश्वासयोग्यता, और शान्ति प्रदान करने में सदा प्रयासरत रहने के साथ। यदि हम थकित या चिन्तित होते हैं तो वह हमें प्रेम के साथ अपनी बाहों में उठाकर हमें अपनी शान्ति और सुरक्षा का एहसास करवाता है। वह हमें बहुत निकटता से जानता और समझता है क्योंकि वह हमारा सृष्टिकर्ता तथा स्वर्गीय पिता है। उसके हम से वायदा है: “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (यशायाह 26:3)।

      जब इस सँसार के बोझ और परेशानियां हमें अभिभूतित करते हैं, तब हम इस बात में सांत्वना और शान्ति पा सकते हैं कि हमारा स्वर्गीय पिता हमारी रक्षा करता है,हमारे लिए संघर्ष करता है, और प्रेमी पिता के समान हमें संभालता है। - कर्स्टन होम्बर्ग


परमेश्वर की शान्ति हमें पूर्ण आराम देती है।

मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है – यशायाह 51:12

बाइबल पाठ: यशायाह 66:12-16
Isaiah 66:12 क्योंकि यहोवा यों कहता है, देखो, मैं उसकी ओर शान्ति को नदी के समान, और अन्यजातियों के धन को नदी की बाढ़ के समान बहा दूंगा; और तुम उस से पीओगे, तुम उसकी गोद में उठाए जाओगे और उसके घुटनों पर कुदाए जाओगे।
Isaiah 66:13 जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दुंगा; तुम को यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी।
Isaiah 66:14 तुम यह देखोगे और प्रफुल्लित होगे; तुम्हारी हड्डियां घास के समान हरी भरी होंगी; और यहोवा का हाथ उसके दासों के लिये प्रगट होगा, और, उसके शत्रुओं के ऊपर उसका क्रोध भड़केगा।
Isaiah 66:15 क्योंकि देखो, यहोवा आग के साथ आएगा, और उसके रथ बवण्डर के समान होंगे, जिस से वह अपने क्रोध को जलजलाहट के साथ और अपनी चितौनी को भस्म करने वाली आग की लपट में प्रगट करे।
Isaiah 66:16 क्योंकि यहोवा सब प्राणियों का न्याय आग से और अपनी तलवार से करेगा; और यहोवा के मारे हुए बहुत होंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80



शुक्रवार, 22 मार्च 2019

याद



      चीन में स्थित एक भूतपूर्व जापानी बन्दी शिविर के प्रांगण में एक स्मृति का पत्थर खड़ा है, जहाँ 1945 में एक व्यक्ति का देहांत हुआ था। उस स्मृति-चिन्ह पर लिखा है, “एरिक लिड्डल का जन्म तियांजिन प्रांत में स्कॉटलैंड से आए माता-पिता के घर में 1902 में हुआ। उसके जीवन का चरमोत्कर्ष 1924 के ओलिम्पिक खेलों में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण-पदक जीतना था। उसके बाद वह लौट कर चीन के तियानजिन में आ गए और शिक्षक का कार्य करते रहे। उनका सारा जीवन युवाओं को मनुष्यों की भलाई करते रहने के लिए प्रोत्साहित करते रहने में व्यतीत हुआ।”

      बहुत से लोगों की दृष्टि में एरिक लिड्डल की सबसे उच्च उपलब्धि खेल के मैदान में थी। परन्तु उन्हें चीन, जहाँ उनका जन्म हुआ और जिस देश से वे प्रेम करते थे, के तियानजिन में युवकों के उत्थान के लिए भी जाना जाता है।

      मूसा को परमेश्वर के वचन बाइबल के विश्वास के अध्याय, इब्रानियों 11 में, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया गया है जिसने परमेश्वर के लोगों के साथ गिने जाने को मिस्र की दौलत और शोहरत से अधिक मूल्यवान समझा। और परमेश्वर ने उसे अपने लोगों को मिस्र के दासत्व से निकालकर लाने और उन्हें वाचा की भूमि, कनान, तक पहुँचाने के योग्य जाना।

      हम किस बात के लिए याद किए जाएँगे? क्या अपनी शैक्षिक उपलब्धियों के लिए, या कार्य स्थल में प्राप्त की गई पदवी और स्तर के लिए, अथवा हमें प्राप्त होने वाली आर्थिक सफलता के लिए? ये सभी हमें सँसार में पहचान तो दिलवा सकती हैं, किन्तु हमारी वास्तविक और स्थाई याद, जो हमारे बाद भी बनी रहेगी, हमारे द्वारा शान्ति से लोगों के जीवनों को सुधारने-संवारने के लिए किए गए कार्यों के द्वारा ही होगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता ही सच्ची सफलता है।

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है। - इब्रानियों 11:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-29
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिस्र के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिस्र को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56



गुरुवार, 21 मार्च 2019

समर्पण



      मुझे कार्य से कुछ अवकाश लेने की इच्छा हुई, इसलिए मैं निकट के एक उद्यान में टहलने के लिए चली गई। टहलते हुए मार्ग के किनारे मिट्टी से झांकती हुई कुछ हरियाली ने मेरा ध्यान आकर्षति किया। मिट्टी में से जीवन की कुछ कोपलें बाहर निकल रही थीं, जो कुछ ही सप्ताह में सुन्दर डैफोडिल फूलों से भर जाएँगी, जो कि बसंत ऋतु और आते ग्रीष्म काल का संकेत हैं, और इसका भी कि हमने एक और शरद ऋतु पार कर ली थी!

      परमेश्वर के वचन बाइबल में जब हम होशे की पुस्तक को पढ़ते हैं, तो उसके कुछ भाग कभी समाप्त न होने वाली शरद ऋतु के समान प्रतीत हो सकते हैं। क्योंकि परमेश्वर ने अपने इस नबी को एक अपरिहार्य कार्य दिया था – एक दुराचारी तथा विश्वासघाती स्त्री से विवाह करे, जो कि परमेश्वर और उसके लोगों इस्राएल के बीच के संबंध का सूचक था (होशे 1:1-2)। होशे की पत्नि गोमेर ने विवाह के वचनों को तोड़ा और अपने पुराने व्यवहार में लौट गई, किन्तु होशे ने फिर भी उसे वापस बुलाया, इस आशा के साथ कि वह उससे पूर्ण समर्पण के साथ प्रेम करेगी (3:1-3)। इसी प्रकार से परमेश्वर भी चाहता है कि हम उससे ऐसे बल और समर्पण के साथ प्रेम करें जो प्रातः की ओस के समान थोड़े समय में गायब न हो जाए।

      परमेश्वर के प्रति हमारा संबंध कैसा है? क्या हम केवल कठिनाईयों के समयों में ही उसे खोजते हैं, उससे अपनी परेशानियों के समाधान ढूँढते हैं, परन्तु जब आनन्द और उत्सव के समय होते हैं तो उसकी अवहेलना करते हैं? उन इस्राएलियों के समान जो शीघ्र ही अपने आस-पास के लोगों की मूर्तिपूजा को अपना लेते थे और परमेश्वर से दूर हो जाते थे, क्या हम भी अपने समय की मूर्तियों, जैसे कि व्यस्तता, सांसारिक सफलता, समाज और लोगों के प्रभाव आदि में खो जाते हैं और परमेश्वर से दूर हो जाते हैं?

      आज अपने आप को परमेश्वर के प्रति पुनः समर्पित करें; उस परमेश्वर के प्रति जो हम से सदा प्रेम करता है और सदा हर रीति से हमारी भलाई, हमारा उद्धार ही चाहता है। - एमी बाउचर पाई


यद्यपि हम परमेश्वर के प्रति विश्वासघाती हो सकते है, वह हमसे कभी दूर नहीं होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: होशे 6:1-4
Hosea 6:1 चलो, हम यहोवा की ओर फिरें; क्योंकि उसी ने फाड़ा, और वही चंगा भी करेगा; उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बान्धेगा।
Hosea 6:2 दो दिन के बाद वह हम को जिलाएगा; और तीसरे दिन वह हम को उठा कर खड़ा करेगा; तब हम उसके सम्मुख जीवित रहेंगे।
Hosea 6:3 आओ, हम ज्ञान ढूंढ़े, वरन यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिये यत्न भी करें; क्योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का सा निश्चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन बरसात के अन्त की वर्षा के समान जिस से भूमि सिंचती है।
Hosea 6:4 हे एप्रैम, मैं तुझ से क्या करूं? हे यहूदा, मैं तुझ से क्या करूं? तुम्हारा स्नेह तो भोर के मेघ के समान, और सवेरे उड़ जाने वाली ओस के समान है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 7-9
  • लूका 1:21-38



बुधवार, 20 मार्च 2019

विश्राम



      मेरा ध्यान उस प्रमुख समाचार की ओर गया: “धावकों के लिए विश्राम दिन भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” अमेरिका के पहाड़ों पर दौड़ने वाले दल के भूतपूर्व सदस्य, टॉमी मैन्निंग द्वारा लिखे गए उस लेख में लेखक ने एक ऐसे सिद्धान्त पर बल दिया था, समर्पित खिलाड़ी जिसकी कभी-कभी उपेक्षा करते हैं – व्यायाम के पश्चात शरीर को फिर से बल प्राप्ति के लिए विश्राम की आवश्यकता होती है। मैन्निंग ने लिखा, “शरीर की रचना और संचालन के दृष्टिकोण से, प्रशिक्षण में सीखे और अर्जित किए गए परिवर्तन विश्राम के समय में ही शरीर में उन उपयोगी परिवर्तनों को लाने पाते हैं। इसका अर्थ है कि विश्राम भी परिश्रम के समान ही उपयोगी है।”

      यही सिद्धान्त हमारे मसीही विश्वास के जीवन में भी उतना ही सत्य है। हतोत्साहित होने और थक कर शिथिल पड़ जाने से बच कर रहने के लिए विश्राम के नियमित समय आवश्यक हैं, परिश्रम और विश्राम में एक संतुलन बनाए रखना चाहिए। पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के समय में प्रभु यीशु ने इस आत्मिक संतुलन को बनाए रखने के अवसरों का उपयोग किया, उसके समय पर होने वाली अत्याधिक मांगों के बावजूद।

      जब प्रभु के शिष्य प्रचार और चंगाई के थका देने वाले कठिन कार्य को कर के लौटे तो प्रभु ने उनसे कहा कि “तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था” (मरकुस 6:31)। परन्तु एक बड़ी भीड़ उनके पीछे आ गई, और वे विश्राम न कर सके, तो प्रभु यीशु ने उस भीड़ को परमेश्वर के राज्य के विषय सिखाया और पाँच रोटी तथा दो मछली से उस भीड़ को भोजन करवाया (पद 32-44)। जब भीड़ चली गई, तो यीशु “उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया” (पद 46)।

      यदि हमारे जीवन केवल हमारे कार्य तथा सेवकाई ही से व्यस्त रहते हैं, तो शीघ्र ही हम अपने कार्यों में कम प्रभावी होते चले जाएँगे। प्रभु यीशु हमें आमंत्रित करता है कि हम नियमित कुछ समय उसके साथ प्रार्थना और विश्राम में बिताने के लिए निकाला करें, जिससे थक कर शिथिल और निष्क्रीय होने से बचे रह सकें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीही विश्वास और सेवकाई के हमारे जीवनों में विश्राम भी सेवकाई के कार्य जितना महत्वपूर्ण है।

और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस 1:35

बाइबल पाठ: मरकुस 6:30-46
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
Mark 6:33 और बहुतों ने उन्हें जाते देखकर पहिचान लिया, और सब नगरों से इकट्ठे हो कर वहां पैदल दौड़े और उन से पहिले जा पहुंचे।
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा।
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है।
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें।
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं?
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी।
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो।
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए।
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं।
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए।
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी।
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।
Mark 6:45 तब उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mark 6:46 और उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 4-6
  • लूका 1:1-20



मंगलवार, 19 मार्च 2019

शब्द



      वह इतवार की रात थी, और अधिकांश लोग सो रहे थे जब पुडिंग लेन में स्थित थॉमस फैरिनर की बेकरी में एक छोटी सी आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने एक से दूसरे घर फैलना आरंभ कर दिया और और शीघ्र ही लंडन सन 1666 के भयानक अग्निकांड में घिर गया जिसमें 70,000 से अधिक लोग बेघर हो गए और शहर का 4/5 भाग ध्वस्त हो गया। एक छोटी सी आग से इतना बड़ा विनाश आया।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक अन्य छोटी परन्तु अत्यन्त विनाशकारी आग के विषय बताता है। जब याकूब ने लिखा, तब वह जीवनों और संबंधों के विषय चिन्तित था न कि मकानों के। याकूब ने अपनी पत्री में कहा, “वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है” (याकूब 3:5)।

      हमारे शब्द रचनात्मक भी हो सकते हैं। नीतिवचन 16:24 में  लिखा है, “मन भावने वचन मधु भरे छते के समान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं” प्रेरित पौलुस ने लिखा, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलुस्सियों 4:6)। जैसे नमक हमारे भोजन को स्वाद देता है, उसी प्रकार अनुग्रह सहित कहे गए हमारे शब्द औरों को बलवंत करने में सहायक होते हैं।

      पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे शब्द उन्हें सहायता प्रदान कर सकते हैं जो दुखित हैं, जो अपने विश्वास में बढ़ना चाहते हैं, या जिन्हें उद्धारकर्ता के पास आने की आवश्यकता है। हमारे शब्द आग लगाने की बजाए आग बुझाने और लोगों को सुधारने-संवारने का भी काम कर सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारे शब्द आज कैसे होंगे?

बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। - नीतिवचन 15:2

बाइबल पाठ: याकूब 3:3-12
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 1-3
  • मरकुस 16



सोमवार, 18 मार्च 2019

निकट



      हमारे पुत्र, एलेन के जन्म की अगली प्रातः डॉक्टर ने मेरे पास बैठकर हमारे पुत्र के विषय मुझ से कहा, “कुछ गड़बड़ी है” – हमारा पुत्र जो बाहर से देखने में इतना सुडौल दिखा रहा था, उसमें एक जन्म-दोष था जिससे उसकी जान खतरे में थी और उसे तुरंत ऑपरेशन के लिए 700 मील दूर एक अन्य अस्पताल में ले जाना आवश्यक था।

      जब डॉक्टर आपसे कहता है कि आपके बच्चे के साथ कुछ गड़बड़ी है, तो आपका जीवन घबराहट से भर जाता है। आगे के संभावित खतरे से आपकी आत्मा कुचली हुई अनुभव करती है और आप लड़खड़ाते हुए परमेश्वर को थामने का प्रयास करने लगते हैं जो आपको इतनी सामर्थ्य दे कि आप अपने बच्चे को संभाल सकें। आप विचारते हैं, “क्या एक प्रेमी परमेश्वर यह होने देगा?” और साथ ही, “क्या उसे मेरे बच्चे की चिंता है? क्या वह वास्तव में है?” इन, तथा इन जैसे अन्य विचारों ने उस प्रातः मेरे विश्वास को झकझोर दिया।

      फिर मेरे पति, हिराम, आए और उन्हें यह जानकारी दी गई। डॉक्टर के जाने के पश्चात, हिराम ने कहा, “जोलीन, चलो प्रार्थना करें” और मैंने सहमति में सर हिलाया। उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर प्रार्थना की, “पिता परमेश्वर हम आपका धन्यवाद करते हैं एलेन को हमें देने के लिए। प्रभु, वह आपका है, हमारा नहीं। इससे पहले कि हम उसे जानने पाते, आपने उससे प्रेम किया, और वह आपका ही है। हमारी प्रार्थना है कि हम चाहे उसके साथ न हो सकें, परन्तु आप हर समय उसके साथ बने रहें। आमीन।”

      हीराम सदा ही कम बोलने वाले रहे हैं। उन्हें अपने विचार शब्दों में व्यक्त करने में कठिनाई होती है, और वे बोलकर व्यक्त करने का प्रयास भी कम ही करते हैं, यह जानते हुए कि उनके न बोलने पर भी मेरे पास समझने के लिए पर्याप्त शब्द रहते हैं। परन्तु उस दिन जब मेरा हृदय टूटा हुआ था, मेरी आत्मा कुचला हुआ अनुभव कर रही थी, और मेरा विश्वास जाता रहा था, परमेश्वर ने हिराम को वे शब्द कहने की सामर्थ्य दी जो मैं नहीं बोलने पाई थी। और अपने पति के हाथों को कसकर पकड़े हुए, अपने आँसुओं और चुप्पी में, मैंने अनुभव किया कि परमेश्वर मेरे बहुत निकट है। - जोलीन फिलो, अतिथि लेखिका


सबसे अच्छा मित्र, प्रार्थना करने वाला मित्र होता है।

जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। – यशायाह 43:2-3

बाइबल पाठ: भजन 34:11-18
Psalms 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psalms 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psalms 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psalms 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psalms 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psalms 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psalms 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psalms 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47



रविवार, 17 मार्च 2019

भरोसा



      कुछ संस्कृतियों में यह अपेक्षा की जाती है कि आयु में कम व्यक्ति अपने से बड़े को कमरे में पहले जाने देगा; जबकि कुछ अन्य में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जिसका ओहदा अधिक ऊँचा होगा, वह पहले प्रवेश करेगा। हमारी परम्पराएँ चाहे जो भी हों, ऐसे समय भी आते हैं जब यह चुनना कठिन होता है कि महत्वपूर्ण मामलों में पहले कौन होगा, विशेषकर तब जब पहले होने का विशेषाधिकार हमारा अपना होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक, अब्राहम, के विषय हम देखते हैं कि उसके तथा उसके भतीजे लूत के पास इतना पशु-धन और नौकर थे कि उनके सेवकों में बारंबार होने वाली नोक-झोंक के कारण उनका साथ रहना और यात्रा करना कठिन होने लगा था। संघर्ष से बच कर रहने के लिए अब्राहम ने सलाह दी कि वे दोनों अलग हो जाएँ, और उदारतापूर्वक लूत को अधिकार दिया कि वह पहला चुनाव करे कि उसे किस ओर जाना है “तब अब्राम लूत से कहने लगा, मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई बन्धु हैं। क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा” (उत्पत्ति 13:8-9)। लूत ने अपने लिए यार्दन नदी की घाटी का उपजाऊ इलाका चुना, और अब्राहम के लिए शेष इलाका जो उसके समान उपजाऊ नहीं था, छोड़ दिया।

      बड़ा होने पर भी अब्राहम ने इस परिस्थिति में अपने विशेषाधिकार पर बल नहीं दिया, परन्तु अपने भविष्य को परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया। लूत के चुनाव ने आगे चलाकर उसके तथा उसके परिवार के लिए बहुत परेशानी खड़ी कर दी (देखें उत्पत्ति 19)। किन्तु अब्राहम परमेश्वर की अगुवाई और अनुग्रह में बढ़ता तथा सामर्थी होता चला गया।

      आज जब हमारे समक्ष अनेकों प्रकार के विकल्प और चुनाव होते हैं, तो हम अपने स्वर्गीय पिता पर भरोसा रखें कि वह हमारा मार्गदर्शन करेगा, हमें सही मार्ग पर ले जाएगा। उसका हमसे वायदा है कि वह हमारी देखभाल करेगा, हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा; हम उसपर भरोसा बनाए रखें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जो चुनाव परमेश्वर पर छोड़ देते हैं, परमेश्वर उन्हें सदा सर्वोत्तम ही देता है। - जिम ईलियट

और जब कभी तुम दाहिनी वा बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो। – यशायाह 30:21

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 13:1-18
Genesis 13:1 तब अब्राम अपनी पत्नी, और अपनी सारी सम्पत्ति ले कर, लूत को भी संग लिये हुए, मिस्र को छोड़ कर कनान के दक्खिन देश में आया।
Genesis 13:2 अब्राम भेड़-बकरी, गाय-बैल, और सोने-रूपे का बड़ा धनी था।
Genesis 13:3 फिर वह दक्खिन देश से चलकर, बेतेल के पास उसी स्थान को पहुंचा, जहां उसका तम्बू पहले पड़ा था, जो बेतेल और ऐ के बीच में है।
Genesis 13:4 यह स्थान उस वेदी का है, जिसे उसने पहले बनाई थी, और वहां अब्राम ने फिर यहोवा से प्रार्थना की।
Genesis 13:5 और लूत के पास भी, जो अब्राम के साथ चलता था, भेड़-बकरी, गाय-बैल, और तम्बू थे।
Genesis 13:6 सो उस देश में उन दोनों की समाई न हो सकी कि वे इकट्ठे रहें: क्योंकि उनके पास बहुत धन था इसलिये वे इकट्ठे न रह सके।
Genesis 13:7 सो अब्राम, और लूत की भेड़-बकरी, और गाय-बैल के चरवाहों के बीच में झगड़ा हुआ: और उस समय कनानी, और परिज्जी लोग, उस देश में रहते थे।
Genesis 13:8 तब अब्राम लूत से कहने लगा, मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई बन्धु हैं।
Genesis 13:9 क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा।
Genesis 13:10 तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की बाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
Genesis 13:11 सो लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गए।
Genesis 13:12 अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।
Genesis 13:13 सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।
Genesis 13:14 जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात यहोवा ने अब्राम से कहा, आंख उठा कर जिस स्थान पर तू है वहां से उत्तर-दक्खिन, पूर्व-पश्चिम, चारों ओर दृष्टि कर।
Genesis 13:15 क्योंकि जितनी भूमि तुझे दिखाई देती है, उस सब को मैं तुझे और तेरे वंश को युग युग के लिये दूंगा।
Genesis 13:16 और मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों के समान बहुत करूंगा, यहां तक कि जो कोई पृथ्वी की धूल के किनकों को गिन सकेगा वही तेरा वंश भी गिन सकेगा।
Genesis 13:17 उठ, इस देश की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर; क्योंकि मैं उसे तुझी को दूंगा।
Genesis 13:18 इसके पशचात्‌ अब्राम अपना तम्बू उखाड़ कर, माम्रे के बांजों के बीच जो हेब्रोन में थे जा कर रहने लगा, और वहां भी यहोवा की एक वेदी बनाई।

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25