ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सांत्वना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सांत्वना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 20 जून 2021

साथ

 

          हमारे चर्च के एक छः सदस्यों के परिवार के घर में आग लग गई, और घर को नष्ट कर दिया। यद्यपि पिता और एक बेटा बच गए; पिता अभी अस्पताल में ही थे, जब उनकी पत्नी, माँ, और दो अन्य बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। दुर्भाग्यवश, इस प्रकार की हृदयविदारक घटनाएँ बार-बार होती रहती हैं। और वो जब भी घटित होती हैं, उनके साथ यह प्रश्न भी दोहराया जाता है कि “भले लोगों के साथ बुरी घटनाएँ क्यों होती हैं?” और यह हमारे लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इस प्राचीन प्रश्न का कोई नया उत्तर नहीं है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने भजन 46 में जो सत्य व्यक्त किया है, वही इस प्रश्न के उत्तर के लिए बार-बार प्रयोग किया जाता है; उसी के साथ लोगों को सांत्वना और प्रोत्साहन प्रदान  किया जाता है। “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक” (पद 1)। इस भजन के 2 और 3 पद में जिन परिस्थितियों का वर्णन किया गया है, वे भयानक और विनाशकारी हैं – धरती और पहाड़ डोल गए, समुद्र में प्रचंड लहरें उफान पर हैं। हम उन परिस्थितियों में अपने होने की कल्पना करने से ही काँप उठते हैं, जिनका वर्णन यहाँ काव्यात्मक रीति से किया गया है। लेकिन कभी-कभी हम अपने आप को वैसी परिस्थितियों में फंसा हुआ पाते हैं – किसी लाइलाज बीमारी के भंवर में फंसा हुआ; किसी आर्थिक संकट में इधर से उधर उछाले जाते हुए; प्रिय जनों की मृत्यु के कारण आहत और स्तब्ध, आदि।

          यह तर्क देना बहुत सहज है कि मुसीबतों के होने का अभिप्राय है कि परमेश्वर अनुपस्थित है। लेकिन पवित्र शास्त्र के सत्य ऐसी धारणाओं का समर्थन नहीं करते हैं। लिखा है, “सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है” (पद 7, 11)। चाहे हमारी परिस्थितियाँ असहनीय भी हों, तब भी हमारा परमेश्वर पिता उनमें भी हमारे साथ ही होता है। वह भला, प्रेमी, और विश्वासयोग्य है; हम उसके हमारी हर परिस्थिति में हमारे साथ बने रहने से सांत्वना और प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं। - आर्थर जैक्सन

 

पिता परमेश्वर चाहे परिस्थितियाँ आपके हमारे साथ होने पर शक उत्पन्न करें; 

किन्तु हम तब भी आपके वचन की सच्चाई पर भरोसा बनाए रखें।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: भजन 46

भजन संहिता 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।

भजन संहिता 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;

भजन संहिता 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।

भजन संहिता 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।

भजन संहिता 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।

भजन संहिता 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।

भजन संहिता 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

भजन संहिता 46:8 आओ, यहोवा के महा-कर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।

भजन संहिता 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!

भजन संहिता 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!

भजन संहिता 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 5:1-21


मंगलवार, 15 जून 2021

शब्द

 

          उस लड़के ने मेरा उपहास करते हुए मुझे, “हड्डी पर चढी चमड़ी” कहा, और एक अन्य ने उसके साथ सम्मिलित होते हुए मुझे “छड़ी” बुलाया। प्रत्युत्तर में मैं एक जाना-पहचाना वाक्य – “छड़ी और पत्थर मेरी हड्डियां तोड़ सकते हैं, किन्तु तुम्हारे शब्द मुझे कभी आहत नहीं करेंगे” बोल सकती थी। किन्तु उस छोटी आयु में भी मैं जानती थी कि यह वाक्य सत्य नहीं है। कठोर, दया-रहित, बिना विचार किए कहे गए शब्द निःसंदेह आहत करते थे। कभी-कभी शब्दों के घाव इतने गहरे होते थे,और इतने दिनों तक बने रहते थे, जितने किसी छड़ी या पत्थर के घाव नहीं होते थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में शमूएल नबी की माँ, हन्ना, निःसंदेह, बिना विचारे कहे गए शब्दों की चोट को अच्छे से जानती थी। उसका पति, एल्काना उसे प्यार करता था, परन्तु क्योंकि वह संतानहीन थी, इसलिए उसकी सौतन, पनिन्ना, जिसके बहुत से बच्चे थे, उसे ताने मारती थी। ऐसी संस्कृति में, जिसमें अकसर पत्नी का मूल्यांकन उसके बच्चों की संख्या के आधार पर होता था, पनिन्ना के ये ताने उसके निःसंतान होने की पीड़ा को और बढ़ा देते थे। अन्ततः हन्ना की यह हालत हो जाती थी कि वह रोटी रहती और भोजन भी नहीं करने पाती थी (1 शमूएल 1:6-7)। उसके पति एल्काना की भले उद्देश्य से कही गई बात, “हे हन्ना, तू क्यों रोती है? और खाना क्यों नहीं खाती? और मेरा मन क्यों उदास है? क्या तेरे लिये मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूं?” (पद 8) भी उसे सांत्वना नहीं देने पाती थी।

          हन्ना के समान ही हम में से कई लोगों ने आहत करने वाले शब्दों के पीड़ादायक परिणाम झेले होंगे। और हम में से कुछ ने उन आहत करने वालों शब्दों की प्रतिक्रिया में, दूसरों को आहत करने वाले शब्द भी कहे होंगे। लेकिन हम सभी अपने प्रेमी और दयालु परमेश्वर के पास अपनी इस पीड़ा को लेकर जा सकते हैं, उस से उस परिस्थिति का सामना करने की शक्ति और चंगाई पाने के लिए (भजन 27:5, 12-14)। वह हमसे हर हाल में प्रेम करता है, हमें शान्ति देता है; हमसे प्रेम और अनुग्रह के शब्द बोलता है। - एलिसन कीड़ा

 

परमेश्वर हमारी हर बात सुनने और समाधान करने के लिए सदैव तत्पर रहता है।


ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार के बोलना तलवार के समान चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं। - नीतिवचन 12:18

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 1:1-8

1 शमूएल 1:1 एप्रैम के पहाड़ी देश के रामतैम सोपीम नाम नगर का निवासी एल्काना नाम पुरुष था, वह एप्रेमी था, और सूप के पुत्र तोहू का परपोता, एलीहू का पोता, और यरोहाम का पुत्र था।

1 शमूएल 1:2 और उसके दो पत्नियां थीं; एक का तो नाम हन्ना और दूसरी का पनिन्ना था। और पनिन्ना के तो बालक हुए, परन्तु हन्ना के कोई बालक न हुआ।

1 शमूएल 1:3 वह पुरुष प्रति वर्ष अपने नगर से सेनाओं के यहोवा को दण्डवत करने और मेलबलि चढ़ाने के लिये शीलो में जाता था; और वहां होप्नी और पीनहास नाम एली के दोनों पुत्र रहते थे, जो यहोवा के याजक थे।

1 शमूएल 1:4 और जब जब एल्काना मेलबलि चढ़ाता था तब तब वह अपनी पत्नी पनिन्ना को और उसके सब बेटे-बेटियों को दान दिया करता था;

1 शमूएल 1:5 परन्तु हन्ना को वह दूना दान दिया करता था, क्योंकि वह हन्ना से प्रीति रखता था; तौभी यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी।

1 शमूएल 1:6 परन्तु उसकी सौत इस कारण से, कि यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी, उसे अत्यन्त चिढ़ाकर कुढ़ाती रहती थीं।

1 शमूएल 1:7 और वह तो प्रति वर्ष ऐसा ही करता था; और जब हन्ना यहोवा के भवन को जाती थी तब पनिन्ना उसको चिढ़ाती थी। इसलिये वह रोती और खाना न खाती थी।

1 शमूएल 1:8 इसलिये उसके पति एल्काना ने उस से कहा, हे हन्ना, तू क्यों रोती है? और खाना क्यों नहीं खाती? और मेरा मन क्यों उदास है? क्या तेरे लिये मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21


सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

प्रेम और शान्ति

 

          मैं हमेशा इससे आश्चर्यचकित होती हूँ कि कैसे हमारे सबसे अधिक दुःख की घड़ी में भी शान्ति – अद्भुत, शक्तिशाली, समझ से बाहर शान्ति (फिलिप्पियों 4:7) – किसी-न-किसी रीति से हमारे हृदयों को भर सकती है। मैंने हाल ही में इस अपने दिवंगत पिता की स्मृति में रखी गई सभा के समय अनुभव किया। सभा के बाद हमारे जानकारों, मित्रों, और रिश्तेदारों की लम्बी कतार में लोग हमें सांत्वना देते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे; उनमें अपने हाई स्कूल के दिनों  के एक अच्छे मित्र को भी देखकर मुझे बहुत राहत अनुभव हुई। उसने बिना कुछ भी कहे मुझे एक लम्बे आलिंगन में ले लिया। शांत रहते हुए भी इस दुःख के समय में मेरे प्रति उसकी समझ ने मुझे शान्ति से भर दिया। उस कठिन दिन में शान्ति अनुभव करने का वह मेरा पहला अवसर था; जो एक शक्तिशाली याद दिलाना भी था कि मैं इस संसार में उतनी अकेली नहीं हूँ, जितना मुझे लग रहा था; मुझसे प्रेम करने वाले लोग भी हैं।

          जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने भजन 16 में ब्यान किया है, परमेश्वर हमारे जीवनों में जो शान्ति और आनन्द ले कर आता है वह, अपने कठिन समयों में हमारे द्वारा भावनाओं को दबाकर संवेदनहीन होने के प्रयास से नहीं आता है। वरन, यह एक उपहार के समान है जिसे हम तब अनुभव करते हैं जब हम अपने भले परमेश्वर की शरण में चले जाते हैं (पद 1-2)।

          किसी प्रिय जन की मृत्यु से होने वाली दुखद पीड़ा को हम अपने आप को कुछ अन्य बातों में व्यस्त करने के द्वारा, उस दुःख से अपना ध्यान बंटाने के द्वारा, कम करने के प्रयास कर सकते हैं, यह विचार रखते हुए कि इन ‘पराए देवताओं’ की ओर ध्यान लगाने से हमारे दुःख का निवारण हो जाएगा। किन्तु ऐसे में हमें देर-सवेर यह एहसास हो ही जाता है कि दुःख से ध्यान बंटाने के द्वारा हमारा दुःख और अधिक बढ़ता ही है (पद 4)।

          या फिर, हम परमेश्वर की ओर मुड़ सकते हैं, इस भरोसे के साथ कि चाहे हमें समझ न भी आए, लेकिन जो जीवन उसने हमें दिया है, वह – इन दुखों के होते हुए भी – भला और मनोहर है (पद 6-8)। और तब हम उसकी प्रेम भरी बाँहों में अपने आप को समर्पित करके आश्वस्त हो सकते हैं कि हमारे दुखों में भी वह हमें एक ऐसी शान्ति और आनन्द में लेकर चल सकता है जिसे मृत्यु भी कभी कम नहीं कर सकती है (पद 11)। - मोनिका ब्रैंड्स

 

प्रभु परमेश्वर हमारे दुखों में भी हमें अपनी बाँहों में उठाए रहता है।


वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:4

बाइबल पाठ: भजन 16

भजन संहिता 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं।

भजन संहिता 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं।

भजन संहिता 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं।

भजन संहिता 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लहू वाले अर्घ नहीं चढ़ाऊँगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा।

भजन संहिता 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है।

भजन संहिता 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।

भजन संहिता 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।

भजन संहिता 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।

भजन संहिता 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।

भजन संहिता 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।

भजन संहिता 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 4-5 
  • मत्ती 24:29-51

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

शान्त


     एक माँ की कल्पना कीजिए, अपने छोटे से बच्चे पर प्रेम के साथ झुकी हुई, उसकी ऊँगली हलके से बच्चे की नाक और होठों पर रखी हुई है, और वह नम्र आवाज़ में बच्चे से कह रही है “श्श!, शांत!”, कोमलता से उसे सान्तवना दे रही है। उस माँ का हाव-भाव, और साधारण शब्द, उस बच्चे की निराशा, परेशानी, या दुःख के समय में उसकी व्याकुलता को शांत करने के लिए हैं। इस प्रकार के दृश्य सभी स्थानों पर देखे जाते हैं, सदा देखे जाते हैं, और हम में से अधिकाँश ने या तो यह किया है, या ऐसे प्रेम भरी अभिव्यक्तियों से शान्ति पाई है। जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 131 पर विचार करता हूँ, तो मेरे मन में यही चित्रण उभर कर आता है।

     इस भजन की भाषा और शैली यही संकेत देते हैं कि भजनकार दाऊद ने कुछ ऐसा अनुभव किया था, जिसके कारण उसे कुछ गंभीर विचार करना पड़ा था। क्या आपने किसी ऐसी निराशा, पराजय, या असफलता का सामना किया है, जिसके कारण आप ने गंभीर, विचारमग्न, आंकलन करने वाली प्रार्थना की हो? जब आप किसी परीक्षा में असफल रहते हैं, आपकी कोई नौकरी जाती रहती है, या कोई संबंध टूट जाता है? दाऊद ने अपने मन की बात खुलकर परमेश्वर के सामने रख दी, और ऐसा करते समय उसने अपने मन को भी इमानदारी से टटोला, और मन की बातों को प्रकट किया (भजन 131:1)। अपनी परिस्थितियों के साथ शान्ति स्थापित करने में, उसे वैसी ही संतुष्टि प्राप्त हुई, जैसी उस छोटे बच्चे को अपने माँ के साथ होने से मिलती है (पद 2)।

     जीवन की परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, और कभी कभी वे हमें झुका देती हैं। किन्तु फिर भी हम आशावान और संतुष्ट रह सकते हैं, इस बात में स्थिर और सुदृढ़ कि हमारा परमेश्वर पिता हमें कभी नहीं छोड़ेगा या त्यागेगा। हम शांत होक उस पर सम्पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - आर्थर जैक्सन

 

केवल मसीह यीशु ही में हमें संतुष्टि मिलती है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है। - भजन 46:10-11

बाइबल पाठ: भजन 131

भजन संहिता 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।

भजन संहिता 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।

भजन संहिता 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!      

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


बुधवार, 18 मार्च 2020

वचन



      द्वितीय विश्व-युद्ध के समय, घर से दूर, अमेरिकी सेना में प्रशिक्षण के लिए भरती हुए कुछ रंगरूटों ने अपनी चुनौतियों का सामना करने के लिए मज़ाक और पत्राचार का सहारा लिया। एक नौजवान ने, अपने एक पत्र में, उन्हें बिमारियों से बचने के टीके लगाए जाने की प्रक्रिया को हास्यास्पद रीति से बढ़ा-चढ़ा कर बताया, उसने लिखा, “दो चिकित्सा अधिकारी हमारे पीछे भाले लेकर भागे। उन्होंने हमें पकड़ कर जबरन ज़मीन पर लेटा दिया, और हमारी दोनों बाहों में एक-एक भाला चुभो दिया।”

      परन्तु एक रंगरूट को समझ में आने लगा कि मज़ाक करने के द्वारा वे कुछ सीमा तक ही शान्ति पा सकेंगे। फिर किसी ने उसे परमेश्वर के वचन बाइबल की एक प्रति पढ़ने के लिए दी। कुछ समय बाद उसने पत्र में लिखा, “मैं उसे प्रतिदिन पढ़ता हूँ और मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि बाइबल से इतना कुछ सीखा जा सकता है।”

      कई सदियों पहले जब दास बनाकर बेबीलोन को निर्वासित किए गए यहूदी दासत्व से छूट कर लौट कर अपने देश में आए, तो उन्होंने पाया कि उनकी समस्याएँ भी उन के साथ ही आईं हैं। जब वे यरूशलेम की शहरपनाह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे तो उन्हें शत्रुओं, भुखमरी, और स्वयं के पापों का सामना करना पड़ा। अपनी इन कठिनाइयों और समस्याओं के मध्य, वे परमेश्वर के वचन की ओर मुड़े। जब याजकों ने उन्हें परमेश्वर की व्यवस्था से पढ़कर सुनाना आरंभ किया, तो उसे सुन कर जो उन्होंने सीखा, उस वचन ने उनके मन और जीवन में जो कार्य किया, उस से वे चकित हो गए; परमेश्वर के वचन की बातों के प्रभाव से वे रोने लगे (नहेम्याह 8:9)। साथ ही, वचन के द्वारा उन्हें शान्ति भी मिली, और उनके अधिपति नहेम्याह ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा, “...उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है” (पद 10)।

      हमें परमेश्वर के वचन को सुनने के लिए किसी समस्या या विकट परिस्थितियों में पड़ने की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। बाइबल में होकर हम परमेश्वर के चरित्र, उसकी क्षमा, और उसकी शान्ति के बारे में जान सकते हैं। जब हम उसके वचन के साथ समय बिताना आरंभ करेंगे, तो परमेश्वर का पवित्र आत्मा जो हमें वचन में से सिखाएगा, वह हमें दंग कर देगा। - टिम गुस्ताफसन

बाइबल हमें दिखाती है कि हम वास्तविकता में क्या हैं; 
और यह भी दिखाती है कि परमेश्वर हम से कितना प्रेम करता है।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:26-27

बाइबल पाठ: नहेम्याह 8: 5-12
नहेम्याह 8:5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए।
नहेम्याह 8:6 तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमेन, आमेन, कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया।
नहेम्याह 8:7 और येशू, बानी, शेरेब्याह, यामीन, अक्कूब, शब्बतै, होदिय्याह, मासेयाह, कलीता, अजर्याह, योजाबाद, हानान और पलायाह नाम लेवीय, लोगों को व्यवस्था समझाते गए, और लोग अपने अपने स्थान पर खड़े रहे।
नहेम्याह 8:8 और उन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक से पढ़कर अर्थ समझा दिया; और लोगों ने पाठ को समझ लिया।
नहेम्याह 8:9 तब नहेम्याह जो अधिपति था, और एज्रा जो याजक और शास्त्री था, और जो लेवीय लोगों को समझा रहे थे, उन्होंने सब लोगों से कहा, आज का दिन तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के लिये पवित्र है; इसलिये विलाप न करो और न रोओ। क्योंकि सब लोग व्यवस्था के वचन सुनकर रोते रहे।
नहेम्याह 8:10 फिर उसने उन से कहा, कि जा कर चिकना चिकना भोजन करो और मीठा मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास बैना भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है।
नहेम्याह 8:11 यों लेवियों ने सब लोगों को यह कहकर चुप करा दिया, कि चुप रहो क्योंकि आज का दिन पवित्र है; और उदास मत रहो।
नहेम्याह 8:12 तब सब लोग खाने, पीने, बैना भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उन को समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47



शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

प्रेम



      पीनट्स कॉमिक कार्टून का एक मुख्य पात्र है लाइनस। लाइनस हाज़िरजवाब और चतुर है, किन्तु सदा असुरक्षित अनुभव करता रहता है, और अपने साथ सदा एक छोटा कंबल लिए रहता है, जिससे उसे सुरक्षा की भावना बनी रहती है। लाइनस के समान, हम सभी को किसी न किसी बात से भय और असुरक्षा की भावना रहती है, और सांत्वना तथा सुरक्षा प्रदान करने वाले की आवश्यकता होती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु के एक शिष्य, पतरस, को देखते हैं, जिसने भय के कारण प्रभु को जानने से भी इनकार कर दिया। जब प्रभु यीशु को पकड़ा गया, तो पतरस कुछ साहस कर के प्रभु के पीछे-पीछे महायाजक के आंगन तक तो चला गया। परन्तु जब लोग उसे पहचानने का प्रयास करने लगे, तो पतरस भयभीत हुआ और प्रभु का इनकार करने लगा (यूहन्ना 18:15-26)। यद्यपि उसने लज्जाजनक शब्दों के प्रयोग द्वारा प्रभु का इनकार किया, किन्तु फिर भी प्रभु ने उससे प्रेम करना बंद नहीं किया; और अन्ततः प्रभु पतरस को अपने पास लौटा ले आया (यूहन्ना 21:15-19)।

      बाद में पवित्र आत्मा की अगुवाई में लिखी अपनी पहली पत्री में जिस प्रेम के प्रति उसने 1 पतरस 4:8 में बल दिया है, वह प्रभु से मिले उसी गहरे प्रेम को अनुभव करने के कारण था। पतरस ने संबंधों में प्रेम के महत्त्व पर बहुत महत्त्व दिया, जिसे हम उसके द्वारा प्रेम करने के साथ “सबसे ऊपर” के प्रयोग द्वारा देखते हैं। इस पद में प्रेम करने को प्रोत्साहित करते हुए पतरस कहता है, “और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।”

      क्या कभी आप को भी अपनी किसी असुरक्षा के समय में ऐसी सुरक्षा की भावना की आवश्यकता अनुभव हुई है? मुझे तो हुई है! कोई ऐसी बात कह देने, या कुछ ऐसा कर बैठने के उपरान्त, जिसके लिए फिर बाद में मुझे पछतावा हुआ, मैंने दोषी और लज्जित होने को अनुभव किया है। तब मुझे भी वैसे ही प्रभु के प्रेम से ढाँपे जाने की आवश्यकता महसूस होती है जैसी सुसमाचारों के विवरणों में अपमानित और लज्जित लोगों को प्रभु द्वारा ढांपे जाने की हुई थी।

      प्रभु यीशु के अनुयायियों के लिए, प्रेम वह कंबल है जिसे उन्हें अनुग्रह और साहसपूर्वक औरों को देना चाहिए, उन्हें सान्तवना और प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए। क्योंकि हम ने प्रभु से यह ढांपने और प्रोत्साहित करने वाला प्रेम पाया है, इसलिए हमें भी उस प्रेम को औरों को पहुँचाने वाला बनना चाहिए। - आर्थर जैकसन

परमेश्वर आपसे और मुझ से प्रेम करता है – हमें भी एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 18:15-18, 25-27
John 18:15 शमौन पतरस और एक और चेला भी यीशु के पीछे हो लिये: यह चेला महायाजक का जाना पहचाना था और यीशु के साथ महायाजक के आंगन में गया।
John 18:16 परन्तु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा, तब वह दूसरा चेला जो महायाजक का जाना पहचाना था, बाहर निकला, और द्वारपालिन से कहकर, पतरस को भीतर ले आया।
John 18:17 उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, क्या तू भी इस मनुष्य के चेलों में से है? उसने कहा, मैं नहीं हूं।
John 18:18 दास और प्यादे जाड़े के कारण को एले धधकाकर खड़े ताप रहे थे और पतरस भी उन के साथ खड़ा ताप रहा था।
John 18:25 शमौन पतरस खड़ा हुआ ताप रहा था। तब उन्होंने उस से कहा; क्या तू भी उसके चेलों में से है? उसने इन्कार कर के कहा, मैं नहीं हूं।
John 18:26 महायाजक के दासों में से एक जो उसके कुटुम्ब में से था, जिसका कान पतरस ने काट डाला था, बोला, क्या मैं ने तुझे उसके साथ बारी में न देखा था?
John 18:27 पतरस फिर इन्कार कर गया और तुरन्त मुर्ग ने बांग दी।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28



मंगलवार, 26 नवंबर 2019

जानता



      जब अपने चर्च में डेनीस की मुलाक़ात एक दुखी युवती से हुई तो उसके हृदय में उसके लिए भावनाएं उठीं, और डेनीस ने सोचा कि मैं उसकी सहायता करने का प्रयास करूंगी। प्रति सप्ताह वह उसके साथ प्रार्थना करने और उसे परामर्श देने के लिए समय लगाती; डेनीस उसकी सलाहकार, मार्गदर्शिका बन गई। परन्तु चर्च के कुछ अगुवों का ध्यान डेनीस के इस कार्य की और नहीं गया, और उन्होंने उस युवती को परामर्श देने और सहायता करने के लिए एक चर्च कर्मचारी को नियुक्त कर दिया; इस टिप्पणी के साथ कि कोई उस युवती पर ध्यान नहीं दे रहा था।

      यद्यपि डेनीस अपने कार्य के लिए किसी ख्याति की चाह में तो नहीं थी, परन्तु उसे कुछ निराशा अवश्य हुई। उसने मुझे बताया कि उसे लगा कि “यह ऐसा था, मानो मैं कुछ कर ही नहीं रही थी।” परन्तु एक दिन उस युवती ने डेनीस को बताया कि वह डेनीस से उसे मिली सांत्वना एवं सहायता के लिए बहुत धन्यवादी है। यह सुनकर डेनीस को प्रोत्साहन मिला। उसे ऐसा लगा जैसे परमेश्वर उस से कह रहा है, “मैं जानता हूँ कि तुम उसकी सहायता और सांत्वना के लिए उसके साथ हो।” डेनीस अभी भी उस युवती के साथ नियमित मिलती है।

      कभी-कभी, जब हमारे प्रयासों की कोई पहचान या सराहना नहीं होती है, तो हमें निराशा होती है। परन्तु पवित्र शास्त्र हमें स्मरण करवाता है कि हम जो भी करते हैं, परमेश्वर वह सब कुछ जानता है; उसे वह भी पता होता है जो अन्य किसी को पता नहीं होता है। जब हम उसके नाम में होकर औरों की सेवा करते हैं, किसी मनुष्य से प्रशंसा पाने के लिए नहीं, वरन बस उसके लिए, तो यह परमेश्वर को प्रसन्न करता है।

      इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने हमें यह कहा है कि हम अपने दान गुप्त में दें, ताकि हमें प्रतिफल परमेश्वर पिता से मिले (मत्ती 6:4)। हमें किसी की भी ओर ख्याति अथवा प्रशंसा पाने के लिए देखने की आवश्यकता नहीं है। हम इस बात से संतुष्ट रह सकते हैं कि जब हम उसकी तथा उसके नाम में औरों की सेवा करते हैं, तब हमारा परमेश्वर पिता उसे जानता है। - लेस्ली कोह

परमेश्वर सब कुछ देखता और जानता है।

हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है। तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। - भजन 139:1-2

बाइबल पाठ: मत्ती 6: 1-4
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे।
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके।
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए।
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1 पतरस 3



शनिवार, 5 अक्टूबर 2019

शान्ति



      बैटी की पुत्री विदेश यात्रा से लौटी थी, और वह अस्वस्थ अनुभव कर रही थी। जब उसकी पीड़ा असहनीय हो गई तो बैटी और उसके पति अपनी पुत्री को लेकर अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा विभाग में ले गए। वहाँ पहुँचने पर डॉक्टरों और नर्सों ने अपना काम करना आरंभ कर दिया, और बैटी बेचैन सी कभी टहलती, और कभी बैठ जाती। कुछ समय के पश्चात एक नर्स ने आकर बैटी को सांत्वना देते हुए कहा, “चिन्ता मत कीजिए, वह ठीक हो जाएगी; हम उसकी अच्छी देखभाल करेंगे और उसे स्वस्थ बना देंगे।” उस पल में बैटी ने शान्ति और प्रेम को अपने ऊपर प्रवाहित होते अनुभव किया। उसे यह एहसास हुआ कि यद्यपि वह चिन्तित होकर अपनी बेटी के आस-पास मंडरा रही थी, वह प्रभु ही है जो  उसकी बेटी की देखभाल कर रहा था और उस कठिन समय में उसे भी शान्ति प्रदान कर रहा था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में व्यवस्थाविवरण की पुस्तक में परमेश्वर ने अपने लोगों को स्मरण दिलाया कि जब वे मरुभूमि और जंगल में से होकर जा रहे थे तब परमेश्वर उनपर प्रेमी पिता के समान मंडराता रहता था, उसने उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा। परमेश्वर ने उकाब पक्षी के रूपक के द्वारा उन्हें बताया कि उसने उन पर अपने पंख फैला रखे थे और उन्हें ऊपर उठाए रखता था (32:11)। परमेश्वर चाहता था कि वे लोग स्मरण रखें कि चाहे उन्हें उस यात्रा में कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करना पड़ा था, परन्तु परमेश्वर ने उन्हें कभी छोड़ा नहीं था, वह सदा उनके साथ-साथ बना रहता था।

      हमें भी अनेकों प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, परन्तु हम भी इस बात से शान्ति पा सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता हमें कभी नहीं छोड़ता है। जब भी हमें लगता है कि हम गिरने लगे हैं, हमारा परमेश्वर उकाब के समान अपने पंखों पर हमें उठा लेता है, अपनी शान्ति से हमें सांत्वना प्रदान करता है। - एमी बाउचर पाई

हमारा परमेश्वर पिता हम पर मंडराता रहता है।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 32:7-12
Deuteronomy 32:7 प्राचीनकाल के दिनों को स्मरण करो, पीढ़ी पीढ़ी के वर्षों को विचारो; अपने बाप से पूछो, और वह तुम को बताएगा; अपने वृद्ध लोगों से प्रश्न करो, और वे तुझ से कह देंगे।
Deuteronomy 32:8 जब परमप्रधान ने एक एक जाति को निज निज भाग बांट दिया, और आदमियों को अलग अलग बसाया, तब उसने देश देश के लोगों के सिवाने इस्राएलियों की गिनती के अनुसार ठहराए।
Deuteronomy 32:9 क्योंकि यहोवा का अंश उसकी प्रजा है; याकूब उसका नपा हुआ निज भाग है।
Deuteronomy 32:10 उसने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजने वालों से भरी हुई मरूभूमि में पाया; उसने उसके चंहु ओर रहकर उसकी रक्षा की, और अपनी आंख की पुतली के समान उसकी सुधि रखी।
Deuteronomy 32:11 जैसे उकाब अपने घोंसले को हिला हिलाकर अपने बच्चों के ऊपर ऊपर मंडराता है, वैसे ही उसने अपने पंख फैलाकर उसको अपने परों पर उठा लिया।
Deuteronomy 32:12 यहोवा अकेला ही उसकी अगुवाई करता रहा, और उसके संग कोई पराया देवता न था।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25
  • फिलिप्पियों 1



रविवार, 8 सितंबर 2019

संभाल



      हाल ही में मुझे अपने कॉलेज के समय में लिखी गई डायरियां मिलीं, और मैं उन्हें फिर से पढ़ने लगी। उन डायरियों में लिखी बातों को पढ़ने से मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने बारे में तब वैसे विचार नहीं रखती थे, जैसे आज रखती हूँ। उस समय अकेलेपन और मेरे मसीही विश्वासों के प्रति संदेह के संघर्ष मुझे बहुत विवश करने वाले प्रतीत होते थे। परन्तु अब जब मैं पीछे मुड़कर अपनी जीवन यात्रा के पड़ावों को देखती हूँ, तो मुझे स्पष्ट दिखाई देता है कि परमेश्वर मुझे कैसे संभाल कर लाया है। यह स्मरण करने से कि कैसे उस कठिन लगने वाले समय में भी परमेश्वर बड़ी कोमलता से मेरी अगुवाई एवँ सहायता करता आया था, मुझे भरोसा होता है कि आज जो अभिभूत करने वाला प्रतीत हो रहा है, वही कुछ समय के बाद उसके चँगा करने वाले और संभाले रखने वाले प्रेम की गाथा का एक भाग होगा।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 30 एक उत्सव मनाने का भजन है, जहाँ भजनकार इसी प्रकार से पीछे मुड़कर जीवन के अनुभवों को देखता है और अचरज करता है, कृतज्ञ होता है, कि परमेश्वर कैसी सामर्थी रीति से संभाले रहा – रोग से निरोगी होने में, मृत्यु के जोखिम से जीवित निकाल लाने में, परमेश्वर के न्याय का सामना करने से उसकी कृपा का अनुभव करने में, शोक से आनन्द मनाने में (पद 2, 3, 11)।

      दाउद को इस भजन का लेखक माना जाता है, और दाऊद ने पवित्र-शास्त्र में कुछ अत्यंत शोकपूर्ण विलाप के भजन लिखे हैं। परन्तु दाऊद ने इतने अद्भुत बहाल किए जाने का भी अनुभव किया है, जिसके कारण वह लिख सका कि, “क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा” (पद 5)। दाऊद द्वारा अनुभव किए गए उस दुःख और पीड़ा के साथ ही, उसने कुछ इससे भी बढ़कर अनुभव किया – परमेश्वर का चंगाई देने वाला सामर्थी हाथ।

      यदि आज आप दुखित हैं, और आपको संभाल तथा प्रोत्साहन की आवश्यकता है, तो अपने जीवन के उन समयों को स्मरण कीजिए जब परमेश्वर आपको संभाले रहा, और कठिन परिस्थितियों में से भी सुरक्षित निकाल लाया; वह पहले भी संभालता आया है, और आगे भी संभालता रहेगा। - मोनिका ब्रैंड्स


हमारे जीवन के दुखों में से भी परमेश्वर प्रेमपूर्वक हमें संभाले हुए,
 आनन्द और बहाली की ओर ले जा रहा है।

हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है। जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। - यशायाह 43:1-2

बाइबल पाठ: भजन 30:1-12
Psalms 30:1 हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया।
Psalms 30:2 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है।
Psalms 30:3 हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है।
Psalms 30:4 हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो।
Psalms 30:5 क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सबेरे आनन्द पहुंचेगा।
Psalms 30:6 मैं ने तो अपने चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का।
Psalms 30:7 हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था; जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया।
Psalms 30:8 हे यहोवा मैं ने तुझी को पुकारा; और यहोवा से गिड़गिड़ाकर यह बिनती की, कि
Psalms 30:9 जब मैं कब्र में चला जाऊंगा तब मेरे लोहू से क्या लाभ होगा? क्या मिट्टी तेरा धन्यवाद कर सकती है? क्या वह तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकती है?
Psalms 30:10 हे यहोवा, सुन, मुझ पर अनुग्रह कर; हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो।
Psalms 30:11 तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है;
Psalms 30:12 ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो। हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1