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गुरुवार, 7 नवंबर 2019

अवसर



      लिंडा को बहुत अचम्भा हो रहा था; उसने उस दंपत्ति से कहा, “जबकि आप मुझे जानते भी नहीं हैं, तो भी आप मेरे प्रति इतने कृपालु कैसे हो सकते हैं?” लिंडा के कुछ गलत निर्णयों के कारण उसे एक अन्य देश में जेल में छः वर्ष बिताने पड़े थे। जब वह रिहा हुई तो उसके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं था और उसे लग रहा था कि अब जीवन में उसके लिए कुछ शेष नहीं रहा है। उसका परिवार उसे वापस घर लाने के लिए आवश्यक पैसों को जुटाने के प्रयास में लगा था; ऐसे में एक कृपालु दंपत्ति ने उसे अपने घर में आश्रय और भोजन दिया, तथा उसकी सहायता करने के लिए हाथ बढ़ाया। लिंडा उनकी इस कृपा से इतनी प्रभावित हुई कि उसने उनसे उस प्रेमी और दयालु परमेश्वर के सुसमाचार के बारे में सुनना स्वीकार किया जो अब भी उससे भी प्रेम करता था और उसे फिर से जीवन का अवसर देना चाहता था।

      लिंडा मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल की एक पात्र, नाओमी की याद दिलाती है; नाओमी विधवा थी, उसने परदेश में अपने पति और दोनों बेटों को गँवा दिया था, और तब उसे भी लगता था कि अब उसके जीवन में कुछ शेष नहीं रहा है (रूत 1)। परन्तु प्रभु परमेश्वर ने नाओमी को नहीं छोड़ा था; नाओमी की बहु के प्रेम और बोआज़ नामक एक धर्मी व्यक्ति की सहायता से नाओमी ने परमेश्वर के प्रेम का अनुभव किया और उसे जीवन में एक अवसर और मिला (रूत 4:13-17)।

      वही परमेश्वर आज हमारी भी चिंता एवँ देखभाल करता है। औरों के प्रेम के द्वारा हमें उसकी उपस्थिति और कार्य का आभास मिलता है; वह हमें ऐसे लोगों के द्वारा भी जिन्हें हम भलीभांति नहीं जानते हैं, सहायता प्रदान करता है। सबसे उत्तम बात यह है कि वह हमें भी एक और अवसर देने के लिए तैयार है। लिंडा और नाओमी के समान हमें भी हमारे दैनिक जीवन में कार्यरत परमेश्वर के अनदेखे हाथ की पहचान, और उसके द्वारा प्रदान किए गए अवसर का सदुपयोग करने की आवश्यकता है। - कीला ओकोआ

परमेश्वर हमें अवसर देता है।

उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! – रूत 2:20

बाइबल पाठ: रूत 4:13-17
Ruth 4:13 तब बोअज ने रूत को ब्याह लिया, और वह उसकी पत्नी हो गई; और जब वह उसके पास गया तब यहोवा की दया से उसको गर्भ रहा, और उसके एक बेटा उत्पन्न हुआ।
Ruth 4:14 तब स्त्रियों ने नाओमी से कहा, यहोवा धन्य है, जिसने तुझे आज छुड़ाने वाले कुटुम्बी के बिना नहीं छोड़ा; इस्राएल में इसका बड़ा नाम हो।
Ruth 4:15 और यह तेरे जी में जी ले आनेवाला और तेरा बुढ़ापे में पालने वाला हो, क्योंकि तेरी बहू जो तुझ से प्रेम रखती और सात बेटों से भी तेरे लिये श्रेष्ट है उसी का यह बेटा है।
Ruth 4:16 फिर नाओमी उस बच्चे को अपनी गोद में रखकर उसकी धाई का काम करने लगी।
Ruth 4:17 और उसकी पड़ोसिनों ने यह कहकर, कि नाओमी के एक बेटा उत्पन्न हुआ है, लड़के का नाम ओबेद रखा। यिशै का पिता और दाऊद का दादा वही हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42
  • इब्रानियों 4



बुधवार, 6 नवंबर 2019

समय



      कभी-कभी परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देने में अपना ही समय लगाता है, और यह हमारे लिए समझना सहज नहीं होता है।

      हम परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र ज़कर्याह के जीवन में यही होता देखते हैं। ज़कर्याह मंदिर का एक याजक (पुरोहित) था, जिसके पास परमेश्वर का स्वर्गदूत जिब्राइल आया, और उससे कहा, “परन्तु स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे जकरयाह, भयभीत न हो क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरी पत्‍नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना” (लूका 1:13)। परन्तु संभवतः ज़कर्याह ने परमेश्वर से सन्तान की माँग वर्षों पहले की थी; अब वह जिब्राइल के सन्देश के साथ संघर्ष कर रहा था क्योंकि उसकी पत्नि इलीशिबा की बच्चा जानने की आयु बहुत पहले बीत चुकी थी। फिर भी, हम देखते हैं कि, परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना का उत्तर दिया।

      परमेश्वर की यादाशत सिद्ध है। वह हमारी प्रार्थनाओं को केवल वर्षों तक ही नहीं वरन हमारे जीवन काल से आगे पीढ़ियों तक स्मरण रखता है। वह कभी नहीं भूलता है, और प्रार्थनाओं का उत्तर देने के लिए हमारे द्वारा अपने निवेदन प्रस्तुत किए जाने के वर्षों बाद भी कार्यवाही कर सकता है। कभी-कभी उसका उत्तर “नहीं” होता है, और कभी “प्रतीक्षा करो” होता है – परन्तु उसका प्रत्येक उत्तर सप्रेम होता है। परमेश्वर की कार्यविधि हमारी समझ से कहीं परे है, परन्तु सदा हमारे हित में होती है।

      ज़कर्याह ने भी यही पाठ सीखा। उसने पुत्र माँगा था, परन्तु परमेश्वर ने उसे और भी बढ़कर दिया। ज़कर्याह का पुत्र यूहन्ना वह भविष्यद्वक्ता बना जिसने सँसार के समक्ष जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के आगमन की घोषणा की। ज़कर्याह का अनुभव एक महत्वपूर्ण सत्य को प्रगट करता है, जो हमारी प्रार्थनाओं में हमारे प्रोत्साहन के लिए है: परमेश्वर का समय शायद ही कभी हमारे समय के अनुसार होता हो, परन्तु उसके समय की प्रतीक्षा करना सदा लाभदायक होता है। - जेम्स बैंक्स

हम चाहे परमेश्वर के हाथ को कार्य करते नहीं देख सकते हैं, 
परन्तु हमें उसके हृदय पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है – इफिसियों 3:20

बाइबल पाठ: लूका 1:5-17
Luke 1:5 यहूदियों के राजा हेरोदेस के समय अबिय्याह के दल में जकरयाह नाम का एक याजक था, और उस की पत्‍नी हारून के वंश की थी, जिस का नाम इलीशिबा था।
Luke 1:6 और वे दोनों परमेश्वर के साम्हने धर्मी थे: और प्रभु की सारी आज्ञाओं और विधियों पर निर्दोष चलने वाले थे। उन के कोई भी सन्तान न थी,
Luke 1:7 क्योंकि इलीशिबा बांझ थी, और वे दोनों बूढ़े थे।
Luke 1:8 जब वह अपने दल की पारी पर परमेश्वर के साम्हने याजक का काम करता था।
Luke 1:9 तो याजकों की रीति के अनुसार उसके नाम पर चिट्ठी निकली, कि प्रभु के मन्दिर में जा कर धूप जलाए।
Luke 1:10 और धूप जलाने के समय लोगों की सारी मण्‍डली बाहर प्रार्थना कर रही थी।
Luke 1:11 कि प्रभु का एक स्वर्गदूत धूप की वेदी की दाहिनी ओर खड़ा हुआ उसको दिखाई दिया।
Luke 1:12 और जकरयाह देखकर घबराया और उस पर बड़ा भय छा गया।
Luke 1:13 परन्तु स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे जकरयाह, भयभीत न हो क्योंकि तेरी प्रार्थना सुन ली गई है और तेरी पत्‍नी इलीशिबा से तेरे लिये एक पुत्र उत्पन्न होगा, और तू उसका नाम यूहन्ना रखना।
Luke 1:14 और तुझे आनन्द और हर्ष होगा: और बहुत लोग उसके जन्म के कारण आनन्‍दित होंगे।
Luke 1:15 क्योंकि वह प्रभु के साम्हने महान होगा; और दाखरस और मदिरा कभी न पिएगा; और अपनी माता के गर्भ ही से पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाएगा।
Luke 1:16 और इस्राएलियों में से बहुतेरों को उन के प्रभु परमेश्वर की ओर फेरेगा।
Luke 1:17 वह एलिय्याह की आत्मा और सामर्थ में हो कर उसके आगे आगे चलेगा, कि पितरों का मन लड़के बालों की ओर फेर दे; और आज्ञा न मानने वालों को धर्मियों की समझ पर लाए; और प्रभु के लिये एक योग्य प्रजा तैयार करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3



मंगलवार, 5 नवंबर 2019

न्याय



      एशिया में आयोजित एक सम्मलेन में भाग लेते समय, मुझे कुछ ही घंटों के अन्दर दो चौंका देने वाली बातें सुनने को मिलीं। पहले तो एक पास्टर ने बताया कि उसने बरी होने से पहले कैद में ग्यारह वर्ष हत्या के एक गलत आरोप के अन्तर्गत काटे थे। फिर एक परिवार ने बताया कि अपने ही देश में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए कैसे उन्हें एक बहुत बड़ी रकम देनी पड़ी थी, किन्तु उन्होंने बचाने के लिए जिन्हें वह रकम दी थी, उन्होंने ही उन्हें धोखा देकर पकड़वा दिया। अब वर्षों से एक शरणार्थी शिविर में रहते हुए, वे सोचते हैं कि क्या कभी उन्हें कोई घर मिलेगा!

      इन दोनों ही घटनाओं में, किया गया अत्याचार, न्याय के अभाव में और अधिक पीड़ादायक हो गया, जो कि हमारे सँसार के टूटेपन का एक प्रमाण है। परन्तु यह न्याय का अभाव स्थाई स्थिति नहीं है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 67 में आया है कि परमेश्वर के लोगों को, परमेश्वर के बारे में इस दुखित सँसार को बताना है। परमेश्वर की निकटता में आने और बने रहने का परिणाम आनन्द है, न केवल परमेश्वर के प्रेम के कारण, परन्तु उसके न्याय के भी कारण। भजनकार लिखता है, “राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा” (पद 4)।

      यद्यपि बाइबल के लेखक समझते थी कि “खराई” (निष्पक्षता और न्याय) परमेश्वर के प्रेम का महत्वपूर्ण भाग है, किन्तु वे यह भी समझते थे कि इसकी पूर्ति भविष्य में परमेश्वर का राज्य स्थापित होने के बाद ही होगी। उस समय तक अन्याय से भरे हमारे इस सँसार में, हम लोगों को परमेश्वर के उस सिद्ध न्याय के विषय बताते रहें। प्रभु परमेश्वर का आगमन, “न्याय की नदी के समान, और धर्म महानद के समान होगा” (अमोस 5:24)। - बिल क्राउडर

न्याय के लिए कार्य करें; करुणा के लिए प्रार्थना करें।

परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे। - मलाकी 4:2

बाइबल पाठ: भजन 67
Psalms 67:1 परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए
Psalms 67:2 जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।
Psalms 67:3 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:4 राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा।
Psalms 67:5 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:6 भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।
Psalms 67:7 परमेश्वर हम को आशीष देगा; और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



सोमवार, 4 नवंबर 2019

मुस्कराहट



      मुझे और मेरी पत्नि को पैरिस में लुवरे संग्रहालय जाने के सौभाग्य मिलने बाद, हमने अपनी ग्यारह वर्षीय पोती से फोन पर बात की। जब हमने उसे बताया कि हमने वहाँ पर सुविख्यात “मोना लिसा” चित्र को देखा, तो उसने तुरंत पूछा, “क्या वह मुस्कुरा रही है?” इस चित्र से संबंधित यह एक बड़ा प्रश्न है। लियोनार्डो द्वारा तेल के रंगों से बनाए गए इस चित्र के बनने के 600 से भी अधिक वर्ष के बाद भी हमें यह निश्चित पता नहीं है कि वह मुस्कुरा रही है या नहीं। हम चाहे उस चित्र की सुंदरता से मन्त्र-मुग्ध हों, परन्तु हम अभी तक मोना लिसा की मुद्रा के विषय अनिश्चित हैं।

      उस चित्र के विसमय का एक भाग उसकी “मुस्कराहट” है। किन्तु क्या यह महत्वपूर्ण है भी? क्या परमेश्वर के वचन बाइबल में मुस्कुराना आया है? वास्तव में, यह शब्द बाइबल में पाँच से भी कम बार आया है, और कभी इस अभिप्राय से नहीं कि हमें ऐसा करना चाहिए। परन्तु बाइबल हमें ऐसा रैवया अपनाने के लिए अवश्य कहती है जिससे कि मुस्कराहट आए – और यह रवैया है आनन्दित रहने का। बाइबल में हम आनन्द से संबंधित शब्दों को लगभग 250 बार पढ़ते हैं। दाऊद बताता है कि वह जब प्रभु के विषय में सोचता है तो, “मेरा हृदय प्रफुल्लित है” (भजन 28:7)। भजनों में यह भी आया है कि हमें “यहोवा के कारण जयजयकार करना है” (भजन 33:1); परमेश्वर के नियम “मेरे[हमारे] हृदय के हर्ष का कारण हैं” (भजन 119:111); और, “हम आनन्दित हैं” क्योंकि “यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं” (भजन 126:3)।

      स्पष्ट रूप से जो आनन्द प्रभु हमें उस सब से प्रदान करता है जो उसने हमारे लिए किया है, वह हमारे चहरे पर मुस्कराहट ला सकता है। - डेव ब्रैनन


हृदय में बसी आशा, चहरे पर मुस्कराहट ला सकती है।

धर्मियों को आशा रखने में आनन्द मिलता है, परन्तु दुष्टों की आशा टूट जाती है। - नीतिवचन 10:28

बाइबल पाठ: भजन 28:6-9
Psalms 28:6 यहोवा धन्य है; क्योंकि उसने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुना है।
Psalms 28:7 यहोवा मेरा बल और मेरी ढ़ाल है; उस पर भरोसा रखने से मेरे मन को सहायता मिली है; इसलिये मेरा हृदय प्रफुल्लित है; और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psalms 28:8 यहोवा उनका बल है, वह अपने अभिषिक्त के लिये उद्धार का दृढ़ गढ़ है।
Psalms 28:9 हे यहोवा अपनी प्रजा का उद्धार कर, और अपने निज भाग के लोगों को आशीष दे; और उनकी चरवाही कर और सदैव उन्हें सम्भाले रह।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1



रविवार, 3 नवंबर 2019

महत्व



      जब मैंने उसे पहली बार देखा, मैं रो पड़ा। वह पूर्णतः अपने पालने में सो रहे नवजात शिशु जैसा दिख रहा था। परन्तु हम जानते थे कि वह कभी नहीं उठेगा; जब तक कि वह प्रभु यीशु की बाहों में न हो। वह कई महीने तक जीवन से संघर्ष करता रहा था। फिर उसकी माँ ने एक दिल को कसमसा देने वाली ई-मेल के द्वारा हमें बताया कि उसकी मृत्यु हो गई। उसने उस “गहरी, अति गहरी पीड़ा जो आपके अन्दर कराहती है” के विषय लिखा; फिर उसने कहा, “उस छोटे से जीवन के द्वारा परमेश्वर ने अपने प्रेम को कितनी गहराई से हमारे हृदयों में तराशा था! वह जीवन कितना सामर्थी था।”

      सामर्थी? वह यह कैसे कह सकती थी?

      उस परिवार के छोटे और प्रिय बच्चे ने उन्हें और हमें दिखाया कि हमें प्रत्येक बात के लिए परमेश्वर पर निर्भर रहना चाहिए। विशेषकर तब, जब परिस्थितियाँ ऐसे अत्यंत बिगड़ी हुई हो जाएँ। यह कठोर किन्तु सांत्वना देने वाला सत्य है कि परमेश्वर हम से हमारी पीड़ा में मिलता और बातें करता है। उसने भी पुत्र को खोने की पीड़ा को सहा है।

      अपनी पीड़ा की गहराईयों में हम परमेश्वर के वचन में दाऊद के भजनों की ओर मुड़ते हैं, क्योंकि वह अपनी पीड़ा के विषय लिखता है। उसने भजन 13:2 में प्रश्न किया, “मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?” और फिर कहा कि “मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी” (पद 3)। किन्तु फिर भी दाऊद अपने सभी प्रश्न परमेश्वर को सौंप सका और कह सका कि, “परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा” (पद 5)।

      केवल परमेश्वर ही है जो हमारी सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से भी हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ महत्व दे सकता है। - टिम गुस्ताफासन

जो हमें सबसे तुच्छ लगता है, परमेश्वर उसे भी सर्वाधिक उपयोगी बना सकता है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! – भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमोन



शनिवार, 2 नवंबर 2019

सिद्धान्त



      मुझे जेन योलेन द्वारा लिखित निबंध “Working Up to Anon” (Anonymus - अज्ञात) बारंबार पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, और मैं इसे कई बार पढ़ चुका हूँ। मैंने इस निबंध की एक प्रति कई वर्ष पहल ‘द राईटर’ पत्रिका से ली थी। जेन ने लिखा है कि सबसे अच्छे लेखक वे होते हैं जो वास्तव में, अपने दिल की गहराईयों में, अपने नाम के बजाए ‘अज्ञात’ होकर लिखना चाहते हैं। उनके लिए महत्व कहानी का है, न कि कहानी को बताने वाले का।

      हम मसीही विश्वासी भी प्रभु यीशु के विषय, जिन्होंने हमारे उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए, बताते हैं। उनके अन्य विश्वासियों के साथ मिलकर हम उनके लिए जीवन जीते हैं तथा औरों के साथ उनके प्रेम को बाँटते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 12:3-21 में नम्रता और प्रेम के उस आचरण का वर्णन किया गया है जिसे मसीही अनुयायी होने के नाते हमें औरों के साथ अपने संबंधों में दिखाना चाहिए – “क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो” (पद 3, 10)।

      अपनी उपलब्धियों में किया जाने वाला हमारा गर्व औरों के गुणों के प्रति हमें अन्धा कर सकता है। हमारा अभिमान हमारे भविष्य में ज़हर घोल सकता है।

      यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने, जिसका उद्देश्य था प्रभु यीशु के लिए मार्ग तैयार करना था, कहा – “अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं” (यूहन्ना 3:30)।

      यह हम सभी के अनुसरण करने के लिए अच्छा सिद्धान्त है। - अज्ञात

परमेश्वर के समक्ष सदा नम्र रहो और उसे अपना सर्वे-सर्वा होने दो।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-13
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3



शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

यह कौन है?



      मैं जब विद्यार्थी था, तो जब भी कक्षा में आकर अध्यापक ये भयभीत करने वाले शब्द कहते कि, “अपने डेस्क पर से सब कुछ हटा लो, और एक कोरा कागज़ तथा पेन्सिल निकाल कर रख लो” तो हम समझ जाते थे कि परिक्षा देने का समय आ गया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 4 अध्याय में हम पढ़ते हैं कि प्रभु यीशु के दिन का आरंभ झील के किनारे प्रचार करने से हुआ था (पद 1), और उस दिन का अन्त झील में परिक्षा के साथ हुआ ( 35)। जिस नाव पर चढ़कर प्रभु ने भीड़ को प्रचार किया था, अब उसी नाव में प्रभु यीशु और उनके चेले झील के पार जा रहे थे। उस यात्रा के दौरान (जब प्रभु थक कर नाव कि पिछले भाग में सो रहे थे), उन लोगों को एक भयानक तूफ़ान का सामना करना पड़ा (पद 37)। तूफ़ान की तीव्रता से घबरा कर चेलों ने प्रभु यीशु को यह कहकर जगाया, “...हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?” (पद 38)। फिर कुछ अप्रत्याशित और अविश्वसनीय हुआ; जिस प्रभु ने भीड़ को संबोधित करते हुए उनसे उसकी सुनने के लिए कहा था (पद 3), उसी ने प्रकृति के इस प्रबल स्वरूप को एक सहज और बलवंत आज्ञा दी – “शान्त रह, और थम जा!” (पद 39)।

      तूफ़ान ने प्रभु की आज्ञा का पालन किया, और विस्मित तथा भयभीत चेले पूछने लगे “यह कौन है?” ( 41) प्रश्न तो अच्छा था, परन्तु इसके उत्तर को वास्तव में समझने और उसके महत्व को पहचानने में, कि प्रभु यीशु परमेश्वर का पुत्र है, उन्हें कुछ समय लगा। निष्ठापूर्ण, सच्चे, खुले-दिल से किए गए प्रश्न और अनुभव आज भी लोगों को उसी निष्कर्ष पर लेकर आते हैं जिस पर तब वे अचम्भित चेले आए थे – यीशु ही प्रभु है।

      प्रभु यीशु सुनने भर के लिए एक अच्छा शिक्षक मात्र नहीं है; वह आराध्य प्रभु परमेश्वर है! – आर्थर जैक्सन

“...हे गुरू, जहां कहीं तू जाएगा, मैं तेरे पीछे पीछे हो लूंगा।” – मत्ती 8:19

रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा - रूत 1:16

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं।
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी।
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया।
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2