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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

सामर्थ्य

 

         एक युवा माँ होने के नाते, मैं अपनी बेटी के जीवन के पहले वर्ष की बातों को संभाल कर रखना चाहती थी। मैं हर महीने उसकी फोटो लिया करती थी, यह दिखाने के लिए कि वह किस तरह से बढ़ी और बदली। मेरी एक पसंदीदा फोटो में, वो बड़ी खुशी के साथ एक खोखला किए हुए कद्दू, जिसे मैंने एक स्थानीय किसान से खरीदा था, में बैठी है। आने वाले दिनों में वह कद्दू तो सूख कर मुरझा गया, लेकिन मेरी बेटी बढ़ती रही, पनपती रही।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस जिस प्रकार से प्रभु यीशु की सच्चाई को जानने को बताता और समझता है, वह मुझे अपनी बेटी की उस फोटो को स्मरण दिलाता है। पौलुस ने प्रभु यीशु मसीह के हमारे हृदय में वास करने की तुलना मिट्टी के बर्तन में रखे हुए खजाने से की है। प्रभु यीशु ने जो कुछ हमारे लिए किया है, वह हमें साहस और सामर्थ्य प्रदान करता है कि हम जीवन के संघर्षों के बावजूद उसके कार्यों में लगे रहें, चाहे चारों ओर से दबाव आ रहे हों (2 कुरिन्थियों 4:8)। क्योंकि परमेश्वर की सामर्थ्य हमारे जीवनों में कार्य करती है इसलिए हम उन दबावों में भी नाश नहीं होते, वरन प्रभु यीशु का जीवन हमारे जीवनों में से प्रगट होता है।

         जैसे वह कद्दू मुरझा कर सूख गया था, हम भी अपने जीवन के संघर्षों में शारीरिक सूखेपन और दुर्बलताओं  का अनुभव कर सकते हैं। लेकिन उन चुनौतियों के होते हुए भी, हम में विद्यमान प्रभु यीशु का आनन्द बढ़ता जाएगा, कार्य करता जाएगा। हमारे जीवनों में उसकी कार्यकारी सामर्थ्य, उसके बारे में हमारी समझ-बूझ, हमारे दुर्बल मिट्टी के शरीरों में रखा हुआ अद्भुत स्वर्गीय खज़ाना है। हम सभी कठिनाइयों के होते हुए भी पनप और बढ़ सकते हैं, क्योंकि परमेश्वर की सामर्थ्य हमारे जीवनों में कार्य करती है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर की सामर्थ्य हम में होकर कार्य करती है।

क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:7-18

2 कुरिन्थियों 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ्य हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।

2 कुरिन्थियों 4:8 हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।

2 कुरिन्थियों 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।

2 कुरिन्थियों 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।

2 कुरिन्थियों 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।

2 कुरिन्थियों 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।

2 कुरिन्थियों 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय में लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं।

2 कुरिन्थियों 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने सामने उपस्थित करेगा।

2 कुरिन्थियों 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।

2 कुरिन्थियों 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:18 और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 65-66
  • 1 तिमुथियुस 2

बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

वास्तविक

 

         कई वर्षों तक मेरा अतीत का जीवन और उसकी कमियां तथा बुराइयां, मेरे वर्तमान जीवन पर बहुत प्रभाव डालता रहा। मुझे यही भय रहता था कि क्या होगा यदि लोगों को मेरे अतीत और बुराइयों के बारे में पता चलेगा? यद्यपि परमेश्वर ने मेरी सहायता की और मैं साहस कर के इसके विषय चर्चा करने के लिए एक मसीही सेवकाई की अगुवाई करने वाली महिला को दोपहर के भोजन के लिए अपने घर पर आमंत्रित कर सकी। किन्तु फिर भी मैं उसके सामने अपने आप को बिलकुल ठीक और भली दिखाना चाह रही थी। मैंने अपने घर की अच्छे से सफाई करके उसे खूब चमका दिया, कोई दाग़-धब्बा नहीं रहने दिया, अच्छा सा भोजन बना लिया, और अपनी सबसे अच्छी जींस और ब्लाउज़ पहन लिया, और उसकी प्रतीक्षा करने लगी।

         तभी मुझे ध्यान आया कि बाहर लॉन पर पानी छिड़कने का फव्वारा चल रहा है, और मैं उसे बन्द करने के लिए दौड़कर बाहर गई। उसके बल खाए हुए पाईप को सीधा कर के मैं उसे बन्द करने का प्रयास कर रही थी, कि उसकी नाली मेरी तरफ घूमी और मुझे पानी की तेज़ धार ने पूरा भिगो दिया। मैं चिल्लाई, अन्दर जाकर तौलिये से अपने बाल सुखाने का प्रयास करने लगी, मेरा मेकप पानी से बहकर मेरे चेहरे को खराब कर रहा था, और मुझे अपने कपड़े  बदल कर सामान्य कपड़े पहनने पड़े। मैं अपने आप को अभी ठीक कर ही रही थी कि दरवाज़े की घंटी बजी – मेरी मेहमान भोजन के लिए पहुँच गई थी। मैंने अपनी उस अस्त-व्यस्त हालत में ही उसका स्वागत किया, उसे अन्दर बिठाया, अपनी दशा को समझाया, और उसे भोजन पर आमंत्रित करने के अपने उद्देश्य को बताया। मेरी उस नई सहेली ने मेरे साथ उसके अपने अतीत के कारण होने वाली असुरक्षा और भय, और दोष बोध की भावनाओं को बताया। हमने मिलकर प्रार्थना की, और उसने मुझे अपने साथ परमेश्वर की अपूर्ण सेविकाओं की टीम में सम्मिलित कर लिया।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रेरित पौलुस ने मसीह यीशु में अपने नए जीवन को स्वीकार करने पर अपने अतीत की बातों को स्वीकार करने से मुँह नहीं मोड़ा, और न ही अपने अतीत को परमेश्वर की सेवा करने में बाधा बनने दिया (1 तिमुथियुस 1:12-14)। क्योंकि पौलुस अच्छे से समझता था कि क्रूस पर किए गए प्रभु यीशु के कार्य के द्वारा वह बचाया गया है, और प्रभु ने उसे बदल दिया है – सबसे अधम पापी  को भी अपने योग्य बना लिया है – इसलिए उसने परमेश्वर की स्तुति और बड़ाई की तथा औरों को प्रोत्साहित किया कि वे भी परमेश्वर को आदर दें और उसकी आज्ञाकारिता में रहें (पद 15-17)।

         जब हम परमेश्वर के अनुग्रह और क्षमा को स्वीकार कर लेते हैं, तब हम अपने अतीत से मुक्त हो जाते हैं। चाहे हम में कमियाँ हों, परन्तु प्रभु परमेश्वर हम से बहुत प्रेम करता है। इसलिए अपने वास्तविक जीवन को लेकर हमें शर्मिंदा रहने की आवश्यकता नहीं है; हम परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए वरदानों के द्वारा, उसके द्वारा निर्धारित की गई सेवकाई को निःसंकोच निभा सकते हैं। - सोहचील डिक्सन

 

हम जैसे भी हैं, परमेश्वर हमें स्वीकार करता है, और अपने लिए उपयोगी बना लेता है।


परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। - 1 कुरिन्थियों 15:10

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 1:12-17

1 तीमुथियुस 1:12 और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिसने मुझे सामर्थ्य दी है, धन्यवाद करता हूं; कि उसने मुझे विश्वास योग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया।

1 तीमुथियुस 1:13 मैं तो पहिले निन्दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे।

1 तीमुथियुस 1:14 और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ।

1 तीमुथियुस 1:15 यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं।

1 तीमुथियुस 1:16 पर मुझ पर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं।

1 तीमुथियुस 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 62-64
  • 1 तिमुथियुस 1

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2020

स्वीकार्य

 

         कई वर्षों तक अपनी पढ़ाई में संघर्ष करते रहने के पश्चात एंजी को अन्ततः उसके उच्च-स्तरीय प्राथमिक विद्यालय से निकाल कर एक अन्य “सामान्य” विद्यालय में डाला गया। सिंगापुर के अत्यन्त स्पर्धात्मक शिक्षा के माहौल में, जहाँ किसी अच्छे स्कूल में होने से भविष्य की संभावनाएं बेहतर हो जाती हैं, बहुतों को ऐसा होना असफलता का चिह्न प्रतीत होगा। एंजी के माता-पिता निराश हुए, और स्वयं एंजी को भी लगा कि उसका स्तर नीचा कर दिया गया है। परन्तु अपने नए स्कूल में जाने के कुछ ही समय के बाद, नौ वर्षीय एंजी को समझ में आया कि “सामान्य” विद्यार्थियों की कक्षा में होने का क्या अभिप्राय है। उसने अपनी मम्मी से कहा “मम्मी, यही मेरे लिए उपयुक्त है, मैं सही स्थान पर हूँ, क्योंकि यहाँ मुझे स्वीकार किया जाता है।”

         इस घटना से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में ज़क्कई की घटना का स्मरण हो आया। ज़क्कई कितना उत्साहित हुआ था जब प्रभु यीशु ने अपने आप को उस चुंगी लेने वाले के घर में आमंत्रित किया (लूका 19:5)। प्रभु उनके साथ भोजन करने का इच्छुक था जो जानते थे कि उनमें कमियाँ हैं और वो परमेश्वर के अनुग्रह के योग्य नहीं हैं (पद 10)। प्रभु हमें खोजता हुआ आया, और हमें खोजने, और हम जैसे भी थे उसी हाल में हम से प्रेम करने के साथ ही, प्रभु यीशु ने हमें प्रतिज्ञा दी है कि उनकी मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण हम भी सिद्ध बन जाएँगे। हम उनके अनुग्रह ही से सिद्ध बन सकते हैं।

         मैंने बहुधा अपने आत्मिक जीवन-यात्रा को एक निरंतर संघर्ष की यात्रा पाया है, यह जानते हुए कि मेरा जीवन परमेश्वर के आदर्श से बहुत कम है। परन्तु यह कितना शान्तिदायक है कि हमारे अन्दर निवास करने वाला परमेश्वर पवित्र आत्मा हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के स्वरूप में ढालता चला जा रहा है और हम सदा ही प्रभु यीशु मसीह में होकर परमेश्वर को स्वीकार्य रहते हैं। - लेसली कोह

 

हम चाहे सिद्ध न हों, किन्तु हम सदा स्वीकार्य हैं।


परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10

लूका 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था।

लूका 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था।

लूका 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था।

लूका 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था।

लूका 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है।

लूका 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया।

लूका 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है।

लूका 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं।

लूका 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है।

लूका 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 59-61
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

सहायता

 

         सन 2017 में हार्वे नामक चक्रवाधी समुद्री तूफ़ान से पूर्वी टेक्सास प्रांत में विनाशकारी बाढ़ आ गई। वर्षा के प्रचंड प्रहार से हज़ारों लोग अपने अपने घरों में ही फंसे रह गए, बाढ़ के पानी से बाहर न निकल पाने के कारण। ऐसे में अनेकों नागरिक प्रांत तथा देश के अन्य भागों से अपनी नावों को लेकर आए और लोगों की सहायता की, उन्हें बाहर निकालने में सहायक हुए। इन लोगों को “टेक्सास नेवी” का नाम दिया गया।

         इन साहसी एवं उदार लोगों का यह कार्य परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 3:27 का स्मरण करवाता है, जो हमें निर्देश देता है कि हम औरों की यथासंभव सहायता करें, जब भी हमें अवसर मिले। उन लोगों के पास आवश्यकता में पड़े लोगों की सहायता करने के लिए अपनी नावों को लगा देने की सामर्थ्य थी, और उन्होंने यही किया भी।  उनका यह कार्य उनके पास उपलब्ध संसाधनों का दूसरों की सहायता और भलाई में उपयोग करने की चाह को दिखाता है।

         हम सदा ही अपने आप को हमारे सामने आई आवश्यकता के सक्षम अनुभव नहीं करते हैं; अकसर हम यह सोचकर निष्क्रिय हो जाते हैं कि हमारे पास उस कार्य के योग्य कौशल, अनुभव, संसाधन, या समय नहीं है जिससे हम सहायता कर सकें। इसलिए परिस्थिति आने पर हम अपने आप को एक किनारे कर लेते हैं, बिना उसे किसी महत्व का समझे, जो हमारे पास है और जिससे हम किसी और की सहायता कर सकते हैं।

         “टेक्सास नेवी” के वह लोग न तो पानी को चढ़ने से रोक सकते थे, और न ही सरकारी सहायता लाए जाने के लिए कोई कानून बना सकते थे। परन्तु उनके पास जो कुछ भी था, उन्होंने उसे ही अपने लोगों की सहायता के लिए प्रयोग किया। हमारे पास उपलब्ध संसाधन चाहे जो भी हों, हम समय और आवश्यकता के अनुसार उनका प्रयोग लोगों की सहायता के लिए करें। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर अपने लोगों की सहायता अन्य लोगों के द्वारा ही करता है।


इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ। - गलातियों 6:10

बाइबल पाठ: नीतिवचन 3:21-31

नीतिवचन 3:21 हे मेरे पुत्र, ये बातें तेरी दृष्टि की ओट न होने पाएं; खरी बुद्धि और विवेक की रक्षा कर,

नीतिवचन 3:22 तब इन से तुझे जीवन मिलेगा, और ये तेरे गले का हार बनेंगे।

नीतिवचन 3:23 और तू अपने मार्ग पर निडर चलेगा, और तेरे पांव में ठेस न लगेगी।

नीतिवचन 3:24 जब तू लेटेगा, तब भय न खाएगा, जब तू लेटेगा, तब सुख की नींद आएगी।

नीतिवचन 3:25 अचानक आने वाले भय से न डरना, और जब दुष्टों पर विपत्ति आ पड़े, तब न घबराना;

नीतिवचन 3:26 क्योंकि यहोवा तुझे सहारा दिया करेगा, और तेरे पांव को फन्दे में फंसने न देगा।

नीतिवचन 3:27 जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना।

नीतिवचन 3:28 यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा।

नीतिवचन 3:29 जब तेरा पड़ोसी तेरे पास बेखटके रहता है, तब उसके विरुद्ध बुरी युक्ति न बान्धना।

नीतिवचन 3:30 जिस मनुष्य ने तुझ से बुरा व्यवहार न किया हो, उस से अकारण मुकद्दमा खड़ा न करना।

नीतिवचन 3:31 उपद्रवी पुरुष के विषय में डाह न करना, न उसकी सी चाल चलना;

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

शान्ति

 

         मेरी तरजनी उँगली में काँटा चुभा, और मैं जोर से चिल्लाया, फिर कराहते हुए अपने हाथ को पीछे खींचा। परन्तु मुझे इस अनुभव के लिए तैयार रहना चाहिए था, इससे चकित नहीं होना चाहिए था। जब मैं एक कंटीली झाड़ी की छंटाई बिना बागबानी वाले दस्ताने पहने हुए कर रहा था, तो यह होने की तो पूरी संभावना थी।

         मेरी उंगली का दर्द और बहता हुआ खून, तुरंत ध्यान दिए जाने की माँग कर रहे थे; और मैं मरहम-पट्टी का सामान खोजने लगा। ऐसा करते समय मुझे अनायास ही अपने उद्धारकर्ता का स्मरण हो आया। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि सिपाहियों ने प्रभु यीशु के सिर पर काँटों का पूरा ताज लगा दिया (यूहन्ना 19:1-3)। यदि एक काँटा इतनी पीड़ा दे सकता है, तो उस ताज से प्रभु को कितनी पीड़ा हुई होगी। और यह तो उस शारीरिक पीड़ा का, जो उसने सही थी, एक अंश मात्र ही था। उसकी पीठ को कोड़ों से बुरी तरह से घायल कर दिया गया; उसके हाथों और पैरों में कीलें ठोकी गईं।

         परन्तु यीशु ने आत्मिक पीड़ा को भी सहा। यशायाह 53:5 में लिखा है, परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं” यशायाह यहाँ पर जिस शान्ति की बात कर रहा है वह क्षमा देने का ही एक स्वरूप है। प्रभु यीशु ने अपने आप को कीलों और काँटों के ताज से छेदे जाने दिया जिससे परमेश्वर के साथ हम आत्मिक शान्ति की स्थिति में आ सकें। हमारे स्थान पर मृत्यु सह लेने की उसकी स्वीकृति ने हमारे लिए परमेश्वर पिता के साथ संबंध को पुनःस्थापित करना संभव कर दिया। और पवित्र शास्त्र बताता है कि उसने यह सब मेरी और आपकी शान्ति के लिए किया। - एडम होल्ज़

 

प्रभु यीशु ने हमारी शान्ति के लिए स्वयं पीड़ा सह ली।


वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धार्मिकता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। - 1 पतरस 2:24

बाइबल पाठ: यशायाह 53:1-6

यशायाह 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?

यशायाह 53:2 क्योंकि वह उसके सामने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।

यशायाह 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दुःखी पुरुष था, रोग से उसकी जान पहचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।

यशायाह 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।

यशायाह 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।

यशायाह 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।

 

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 53-55
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1

शनिवार, 17 अक्टूबर 2020

प्रार्थना

 

         मैं अपनी आंटी ग्लेडिस की बेबाक आत्मा का आदर करता हूँ, चाहे उसी आत्मा के कारण मुझे कभी-कभी चिंता में क्यों न पड़ना पड़े। एक बार इस चिंता का कारण मुझे ईमेल में मिला, जिसमें उन्होंने लिखा, “कल मैंने अखरोट के पेड़ को काट दिया।”

         मैं आपको समझा दूँ, वह बिजली से चलने वाली बड़ी आरी को लेकर पेड़ को काट डालने वाली मेरी आंटी की आयु छिहत्तर वर्ष है। वह पेड़ उनके घर के गैराज के पीछे उग आया था। अब जब वह बड़ा हो गया और उसकी जड़ें गैराज की कंकरीट के लिए ख़तरा बनने लगीं, उन्होंने निर्णय कर लिया कि अब तो उस पेड़ को जाना ही होगा। परन्तु साथ ही उन्होंने यह भी लिखा, “ऐसा कोई भी कार्य करने से पहले, मैं प्रार्थना अवश्य कर लेती हूँ।”

         परमेश्वर के वचन बाइबल में नहेम्याह फारस के राजा का पियाऊ होकर सेवा कर रहा था, जब उसने यरूशलेम को वापस लौट कर चले जाने वालों से आए समाचार को सुना। वहाँ पर भी काम होना था, उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं” (नहेम्याह 1:3)। उन टूटी हुई दीवारों के कारण वहाँ के निवासी शत्रुओं के हमलों की संभावनाओं से असुरक्षित थे। नहेम्याह को अपने लोगों पर तरस आया और उसने उनके लिए कुछ करने की ठान ली। परन्तु पहला कार्य प्रार्थना था। यह और भी महत्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि एक नए राजा ने यरूशलेम में सारे निर्माण कार्य पर रोक लगवा दी थी (एज्रा 4)। नहेम्याह ने अपने लोगों के लिए प्रार्थना की (नहेम्याह 1:5-10), और फिर परमेश्वर से सहायता माँगी, और उसके बाद ही राजा से वहाँ जाकर कुछ करने के लिए अनुमति और सहायता को माँगा (पद 11)।

         किसी भी परिस्थिति के लिए, विशेषकर परेशानी में, क्या प्रार्थना आपका पहला प्रत्युत्तर होता है? किसी भी परीक्षा अथवा कार्य का सामना करने के लिए प्रार्थना ही सबसे उत्तम मार्ग है। - लिंडा वॉशिंगटन

 

प्रार्थना को अपनी प्राथमिकता बनाएँ, न कि अपना अंतिम विकल्प।


परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा। सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा। - भजन 55:16-17

बाइबल पाठ: नहेम्याह 1

नहेम्याह 1:1 हकल्याह के पुत्र नहेम्याह के वचन। बीसवें वर्ष के किसलवे नाम महीने में, जब मैं शूशन नाम राजगढ़ में रहता था,

नहेम्याह 1:2 तब हनानी नाम मेरा एक भाई और यहूदा से आए हुए कई एक पुरुष आए; तब मैं ने उन से उन बचे हुए यहूदियों के विषय जो बन्धुआई से छूट गए थे, और यरूशलेम के विषय में पूछा।

नहेम्याह 1:3 उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं।

नहेम्याह 1:4 ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा।

नहेम्याह 1:5 हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भय योग्य ईश्वर! तू जो अपने प्रेम रखने वाले और आज्ञा मानने वाले के विषय अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है;

नहेम्याह 1:6 तू कान लगाए और आंखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है।

नहेम्याह 1:7 हम ने तेरे सामने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएं, विधियां और नियम तू ने अपने दास मूसा को दिए थे, उन को हम ने नहीं माना।

नहेम्याह 1:8 उस वचन की सुधि ले, जो तू ने अपने दास मूसा से कहा था, कि यदि तुम लोग विश्वासघात करो, तो मैं तुम को देश देश के लोगों में तितर बितर करूंगा।

नहेम्याह 1:9 परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो, और मेरी आज्ञाएं मानो, और उन पर चलो, तो चाहे तुम में से निकाले हुए लोग आकाश की छोर में भी हों, तौभी मैं उन को वहां से इकट्ठा कर के उस स्थान में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने अपने नाम के निवास के लिये चुन लिया है।

नहेम्याह 1:10 अब वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिन को तू ने अपनी बड़ी सामर्थ्य और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है।

नहेम्याह 1:11 हे प्रभु बिनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर। (मैं तो राजा का पियाऊ था।)

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 50-52
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

सामना

 

         भय हमें एक स्थान पर स्तब्ध कर सकता है। हमें भयभीत होने के सभी कारण ध्यान हैं – पिछले समय की हमारी सारी बातें जिनसे हम आहत हुए, हर वह बात जो फिर से ऐसा ही कर सकती है। इसलिए हम कभी-कभी अटक जाते हैं – पीछे जा नहीं सकते; आगे बढ़ने में अत्यधिक भयभीत रहते हैं। हम सोचते हैं, ‘मैं यह नहीं कर सकता हूँ। मैं इस प्रकार से फिर से दुखी होने का जोखिम नहीं उठा सकता हूँ, मैं न तो इतना सक्षम हूँ, न इतना बलवंत हूँ, और न ही इतना साहसी हूँ।’

         लेखक फ्रेडरिक ब्यूक्नर ने जिस प्रकार से परमेश्वर के अनुग्रह का वर्णन किया है, मैं उससे मुग्ध हूँ, वो कहते हैं, ‘एक कोमल आवाज़ के समान जो कहती है, यह संसार है। इसमें भयानक बातें भी होंगी और मनोहर बातें भी होंगी। परन्तु मत डर, मैं तेरे साथ हूँ।

         भयानक बातें होंगी। हमारे संसार में, दुखी लोग औरों को भी दुखी कर देते हैं, कई बार बहुत अधिकाई से। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद के समान हम सब भी अपनी ही उन कहानियों को लिए चलते हैं, जब बुराई ने हमें घेर लिया, जब पशुओं के समान, लोगों ने हमें आहत किया (भजन 57:4); और इसलिए हम दुखी होते हैं, हम पुकारते हैं (पद 1, 2)।

         परन्तु क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है इसलिए हमारे साथ मनोहर बातें भी होंगी। जब हम उसके पास अपने दुःख और भय को लेकर जाते हैं, हम पाते हैं कि वह हमें अपने उस प्रेम के साथ लिए चलता है जो किसी की भी हमें आहत करने की शक्ति से कहीं बढ़कर है (पद 1-3); इतना महान प्रेम जो स्वर्ग तक भरा हुआ है (पद 10)। चाहे विनाश  ने हमें हमारे चारों ओर से क्यों न घेर रखा हो, परमेश्वर का प्रेम हमारा वह दृढ़ शरणस्थान है जहाँ हमारे हृदयों को शान्ति मिलती है (पद 1, 7)।

         और फिर एक दिन हम अपने आप को एक नए साहस के साथ उठते हुए पाते हैं, उस दिन का सामना उसकी विश्वासयोग्यता के स्तुति गीत के साथ करने को तैयार। - मोनिका ब्रैंड्स

 

परमेश्वर का प्रेम और मनोहरता हमें साहसी बना देती है।


हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है। - यशायाह 43:1

बाइबल पाठ: भजन 57

भजन संहिता 57:1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिये रहूंगा।

भजन संहिता 57:2 मैं परम प्रधान परमेश्वर को पुकारूंगा, ईश्वर को जो मेरे लिये सब कुछ सिद्ध करता है।

भजन संहिता 57:3 ईश्वर स्वर्ग से भेज कर मुझे बचा लेगा, जब मेरा निगलने वाला निन्दा कर रहा हो। परमेश्वर अपनी करुणा और सच्चाई प्रगट करेगा।

भजन संहिता 57:4 मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बरछी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार है।

भजन संहिता 57:5 हे परमेश्वर तू स्वर्ग के ऊपर अति महान और तेजोमय है, तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!

भजन संहिता 57:6 उन्होंने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है; मेरा प्राण ढला जाता है। उन्होंने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े।

भजन संहिता 57:7 हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है; मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा।

भजन संहिता 57:8 हे मेरी आत्मा जाग जा! हे सारंगी और वीणा जाग जाओ। मैं भी पौ फटते ही जाग उठूंगा।

भजन संहिता 57:9 हे प्रभु, मैं देश के लोगों के बीच तेरा धन्यवाद करूंगा; मैं राज्य राज्य के लोगों के बीच में तेरा भजन गाऊंगा।

भजन संहिता 57:10 क्योंकि तेरी करुणा स्वर्ग तक बड़ी है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुंचती है।

भजन संहिता 57:11 हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर अति महान है! तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4