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सोमवार, 2 अगस्त 2021

परमेश्वर का वचन – बाइबल – रूपरेखा – 1

 

          शब्द बाइबल यूनानी भाषा के शब्द ‘ता बिबलिआ’ (ta biblia) से आया है। बिबलिआ शब्द का अर्थ होता है “पुस्तकें”। बाइबल अपने मूल स्वरूप में 66 पुस्तकों का संकलन है। ये 66 पुस्तकें, अलग-अलग समयों में, अलग-अलग लेखकों द्वारा, भिन्न स्थानों, भिन्न भाषाओं, और भिन्न परिस्थितियों में लिखी गईं; किन्तु संकलित हो जाने के बाद, ये अब आरंभ से लेकर अंत तक एक पुस्तक हैं। बाइबल की पुस्तकों को मुख्यतः दो भागों में रखा गया है – पुराना नियम (39 पुस्तकें) तथा नया नियम (27 पुस्तकें)। पुराने नियम का आरंभ उत्पत्ति की पुस्तक से, परमेश्वर द्वारा जगत की सृष्टि, मनुष्य की सृष्टि, मनुष्य के पाप में गिरने के वर्णन, और मनुष्यों को पाप से छुड़ाने के लिए आने वाले उद्धारकर्ता की प्रतिज्ञा के साथ होता है। और नए नियम की अंतिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य, जगत के अंत और समस्त संसार के न्याय की भविष्यवाणी की पुस्तक है, जो संसार के सभी लोगों के द्वारा परमेश्वर को अपने जीवनों का हिसाब देने, और उनका दंड अथवा प्रतिफल पाने, पाप तथा मृत्यु से मुक्त नई सृष्टि और परमेश्वर के अनन्तकालीन राज्य के बारे में बताती है। इस प्रकार, बाइबल वर्तमान जगत के आरंभ से लेकर इस जगत के अंत तक का विवरण देती है; और फिर परमेश्वर के साथ अनन्त काल के आरंभ की प्रतिज्ञा तथा उस अनन्त काल की एक झलक के साथ समाप्त होती है।

          पुराना नियम प्रभु यीशु मसीह के जन्म से पहले लिखी गई 39 पुस्तकों का, जो परमेश्वर द्वारा यहूदियों को दिया गया परमेश्वर का वचन भी हैं, संकलन है। सम्पूर्ण पुराने नियम के सभी वृतांतों का मूल विषय, जगत का आने वाले उद्धारकर्ता, प्रभु यीशु मसीह है। पुराने नियम की सभी पुस्तकें प्रभु यीशु मसीह के बारे में आलंकारिक अथवा सांकेतिक रीति से, या भविष्यवाणियों के द्वारा बताती हैं। इन पुस्तकों में प्रभु यीशु मसीह की विभिन्न बातों को, उन से संबंधित भविष्यवाणियों को, उनके गुणों, उनके कार्यों, सारे जगत के सभी लोगों के उद्धार के लिए उनके बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान को, पहले से ही बता कर लिख दिया गया है: “तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं” (इब्रानियों 10:7)।

          इसीलिए प्रभु यीशु मसीह ने उनके मारे जाने, गाड़े जाने और फिर मृतकों में से जी उठने के बाद की घटनाओं के कारण असमंजस और अविश्वास में डांवांडोल हो रहे अपने शिष्यों से कहा, “तब उसने उन से कहा; हे निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं की सब बातों पर विश्वास करने में मन्‍दमतियों! क्या अवश्य न था, कि मसीह ये दुख उठा कर अपनी महिमा में प्रवेश करे? तब उसने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ कर के सारे पवित्र शास्त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया” (लूका 24:25-27); तथा “फिर उसने उन से कहा, ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों। तब उसने पवित्र शास्त्र बूझने के लिये उन की समझ खोल दी। और उन से कहा, यों लिखा है; कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। और यरूशलेम से ले कर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा” (लूका 24:44-47)।

          नया नियम प्रभु यीशु मसीह के जन्म के वर्णन के साथ आरंभ होता है। नए नियम की आरंभिक 4 पुस्तकें प्रभु यीशु मसीह की जीवनी हैं, और अंतिम पुस्तक इस वर्तमान जगत के अंत और न्याय की भविष्यवाणी की पुस्तक, प्रकाशितवाक्य है। इनके मध्य प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों की मंडली बनने, संसार भर में फैलाने, और उससे संबंधित मसीही विश्वास की शिक्षाएं हैं।

          पुराने नियम की अंतिम पुस्तक “मलाकी” है; और नए नियम की प्रथम पुस्तक “मत्ती रचित सुसमाचार” है। मलाकी और मत्ती के मध्य 400 वर्ष का अंतराल है जिसमें परमेश्वर ने कोई प्रकाशन नहीं दिया, कोई बात नहीं लिखवाई। अर्थात, प्रभु यीशु मसीह से संबंधित पुराने नियम की हर शिक्षा और भविष्यवाणी, उनके जन्म से भी कम से कम 400 वर्ष या उससे अधिक पहले की है!

 

 

          प्रार्थना करें कि परमेश्वर अपने अद्भुत वचन के लिए आपके मन को तैयार करे, और आप पर अपने वचन को प्रकट करे।

 

बाइबल पाठ: भजन 1

भजन 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरुष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है!

भजन 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।

भजन 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।

भजन 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।

भजन 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;

भजन 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 60-62
  • रोमियों 5

रविवार, 1 अगस्त 2021

परमेश्वर का वचन – बाइबल – परिचय

 

          सामान्यतः बाइबल को ईसाइयों का धर्म-ग्रन्थ; पश्चिमी सभ्यता से आई हुई पुस्तक समझा जाता है, जो लोगों को पश्चिमी सभ्यता तथा व्यवहार में ले जाती है; और यह मिथ्या आरोप लगा कर व्यर्थ में बाइबल का तथा बाइबल को मानने वालों का विरोध किया जाता है। लेकिन वास्तव में बाइबल किसी धर्म-विशेष अथवा सभ्यता विशेष की पुस्तक नहीं है; और न ही किसी सांसारिक सभ्यता का अनुसरण करने की शिक्षा देती है। बाइबल सृष्टि के सृष्टिकर्ता, इस संसार के प्रत्येक व्यक्ति के रचयिता, इस संपूर्ण जगत के सृजनहार, पालनहार, तारणहार परमेश्वर द्वारा संपूर्ण मानवजाति से उसके असीम, अपरिवर्तनीय, निःस्वार्थ, पवित्र प्रेम की लिखित अभिव्यक्ति है।

          बाइबल में परमेश्वर ने अपने आप को, अपने गुणों, अपने चरित्र, अपनी पसंद-नापसन्द को, और समस्त मानवजाति से जो अद्भुत, अवर्णनीय प्रेम परमेश्वर ने रखा है, उसे व्यक्त किया है। यह ऐसा विलक्षण प्रेम है जो परमेश्वर ने मनुष्यों से उनके पाप के दशा में होते हुए भी किया है। बाइबल ही वह एकमात्र ग्रन्थ है जो परमेश्वर के विषय यह बताता है कि वह पापियों से भी प्रेम करता है, उनका नाश नहीं चाहता, वरन उसकी यही लालसा है कि वे अपने पापों से पश्चाताप के साथ उसकी ओर फिरें, और वह उन्हें क्षमा करके अपने साथ अनन्तकाल के लिए अपनी संतान बनाकर जोड़ ले। यह इसलिए संभव है क्योंकि प्रभु यीशु मसीह ने संसार के सभी मनुष्यों के सभी पापों को अपने ऊपर ले लिया, और उनके दण्ड को, क्रूस की मृत्यु को, सभी मनुष्यों के लिए सह लिया। अब, प्रभु यीशु मसीह में सभी मनुष्यों के सभी पापों का दण्ड चुकाया जा चुका है, और किसी भी मनुष्य को अपने पापों की क्षमा को प्राप्त करने के लिए प्रभु यीशु मसीह के इस बलिदान के कार्य को स्वीकार करने के अतिरिक्त और कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है।

          केवल बाइबल का परमेश्वर ही वह परमेश्वर है जो मनुष्यों के प्रति अपने प्रेम के कारण स्वर्ग छोड़कर, एक साधारण मनुष्य की समानता में देहधारी होकर प्रभु यीशु मसीह के नाम से पृथ्वी पर आया, जिससे कि मनुष्यों के लिए स्वर्ग जाने का मार्ग तैयार करके उन्हें दे। ऐसा मार्ग जिस मार्ग पर चलने के लिए संसार के किसी भी मनुष्य को परमेश्वर प्रभु यीशु पर और उसके क्रूस पर दिए गए बलिदान के कार्य पर विश्वास करने, स्वेच्छा से अपना जीवन उसे समर्पित करके उसका अनुसरण करना स्वीकार कर लेने के अतिरिक्त और कुछ भी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मनुष्य को परमेश्वर का यह प्रेम, मनुष्य के प्रति परमेश्वर के अनुग्रह से उसे मिलता है; न कि मनुष्य के किसी भी कर्म अथवा उसकी अपनी किसी भी ‘धार्मिकता के आधार पर। परमेश्वर का यह प्रेम संसार के प्रत्येक व्यक्ति को, परमेश्वर की ओर से सेंत-मेंत उपलब्ध है। परमेश्वर के इस प्रावधान को स्वीकार अथवा अस्वीकार करना, यह प्रत्येक मनुष्य का अपना व्यक्तिगत निर्णय है।

          बाइबल मनुष्यों को पृथ्वी पर की वस्तुओं, संपत्ति, स्थान, वैभव, राज्य या ओहदा प्राप्त करने के लिए नहीं, स्वर्ग में परमेश्वर के साथ निवास करने के लिए तैयार करती है। बाइबल का दृष्टिकोण इस पृथ्वी का नहीं, वरन स्वर्ग का है। बाइबल बारंबार यही सिखाती है कि मनुष्य का यह शरीर और पृथ्वी का समय तथा संपदा अस्थाई हैं, यहीं नाश हो जाएँगी। जो स्थाई और चिरस्थाई है, वह मृत्योपरांत है – स्वर्ग या नरक; जिन में से एक स्थान पर जाने के लिए मनुष्य को अभी यहाँ पृथ्वी पर रहते हुए व्यक्तिगत निर्णय लेना है और उसके अनुसार तैयार होना है। जो पापों के लिए पश्चाताप करके, प्रभु यीशु से पापों की क्षमा प्राप्त करके प्रभु के साथ रहने का निर्णय लेते हैं, वे अपने इस निर्णय लेने के समय से आरम्भ कर के मृत्योपरांत अनन्तकाल तक प्रभु यीशु के साथ स्वर्ग में रहेंगे। जो प्रभु यीशु के इस प्रेम-प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं, प्रभु के साथ नहीं रहना चाहते हैं, वे परलोक में अपना अनन्तकाल व्यतीत करने के लिए उनके द्वारा लिए गए व्यक्तिगत निर्णय के अनुसार, मृत्योपरांत उस स्थान पर जाएंगे जहाँ परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह नहीं है – नरक में।

          बाइबल में परमेश्वर ने मनुष्यों को परस्पर व्यवहार करने, और परमेश्वर के प्रति व्यवहार रखने के बारे में बताया गया है। बाइबल सिखाती है कि मनुष्य पाप के स्वभाव के साथ जन्म लेता है, पाप के स्वभाव के साथ ही पलता और बड़ा होता है, व्यवहार करता है, और पाप कमाता रहता है; और अन्ततः पापों के साथ ही मर जाता है, और उसका यही पाप स्वभाव उसे इस पृथ्वी पर परमेश्वर प्रभु यीशु से दूर रखता है। उसके पाप उसके साथ परलोक में जाते हैं, और उसे अनन्त पीड़ा के स्थान नरक में ले जाते हैं। किन्तु प्रभु यीशु मसीह पर लाया गया विश्वास और पापों से पश्चाताप उसके इस पाप स्वभाव, तथा पापों के दण्ड को हटाकर, प्रभु यीशु के स्वभाव को उसमें डाल देता है, और पापों की क्षमा पाया हुआ वह पापी मनुष्य अंश-अंश करके प्रभु यीशु की समानता में ढलने लगता है, प्रभु यीशु के व्यवहार, चरित्र, गुणों आदि को अपनाने लगता है, प्रभु यीशु की समानता में आने लग जाता है।

          बाइबल की शिक्षा के अनुसार, प्रभु यीशु में स्वेच्छा तथा सच्चे समर्पण से लाया गया यह विश्वास मनुष्य के धर्म को नहीं वरन उसके मन को, उसकी पाप करने की प्रवृत्ति को, उसके जीवन को बदलता है। उसे किसी सांसारिक सभ्यता अथवा संस्कृति विशेष का नहीं वरन स्वर्गीय दृष्टिकोण तथा व्यवहार रखने वाला, परमेश्वर की संतान बना देता है। प्रभु यीशु के एक अनुयायी ने कहा है: “या तो पाप आपको बाइबल से दूर रखेगा; अन्यथा, बाइबल आपको पाप से दूर रखेगी।”

 

 

          परमेश्वर से सच्चे मन से प्रार्थना करें कि वह अपने वचन बाइबल के प्रति आपके मन और समझ को खोले; और इस पापों की क्षमा का मार्ग दिखाने वाले, जीवन बदलने वाले, अनन्त जीवन देने वाले, परमेश्वर की संतान बनाकर स्वर्ग का उत्तराधिकारी बना देने वाले अद्भुत वचन, बाइबल, के अध्ययन की यात्रा में आपको आगे बढ़ाए।

 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-4

यूहन्ना 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।

यूहन्ना 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था।

यूहन्ना 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।

यूहन्ना 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी।


एक साल में बाइबल: 

  • भजन 57-59
  • रोमियों 4


शनिवार, 31 जुलाई 2021

सूचना - ब्लॉग के लेखों में परिवर्तन

 रोज़ की रोटी ब्लॉग के सन्देश 1 अगस्त 2021 से एक बदले हुए स्वरूप में होंगे। अब अंग्रेज़ी की दैनिक मनन के संदेशों की पुस्तिका Our Daily Bread के संदेशों के अनुवाद के स्थान पर, इसी ब्लॉग के लिए लिखे गए सन्देश पोस्ट किए जाएँगे।

           जो पाठक Our Daily Bread के संदेशों को हिन्दी में पढ़ते रहना चाहते हैं, वे इस लिंक के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं: प्रतिदिन की रोटी (www.hindi-odb.org )

अंग्रेज़ी में मुख्य वेब साईट का लिंक है: Our Daily Bread (www.ourdailybread.org)

 

          1 अगस्त से इसी ब्लॉग के अंतर्गत की एक नई श्रृंखला आरंभ होगी, जिसका विषय होगा “परमेश्वर का वचन – बाइबल”

          इस नई श्रंखला में हम: 

  • बाइबल क्या है? 
  • मसीही विश्वासी इसे परमेश्वर का वचन क्यों कहते हैं
  • इसकी शिक्षाएँ क्या हैं? 
  • इसे कैसे समझा जा सकता है
  • क्या यह आज के समय के लिए समकालिक है? 
  • क्या बाइबल विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती है? 
  • बाइबल का लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव होता है? 

    आदि, और भी कई प्रश्नों के उत्तरों को छोटे लेखों के द्वारा पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा जिससे पाठक स्वयं देख और जान लें कि बाइबल की वास्तविकता क्या है; और इसे बदनाम करने के लिए इसके बारे में कितनी झूठी धारणाएँ गढ़ी और फैलाई गई हैं।

 

          पाठकों से निवेदन है कि 1 अगस्त से किए जाने वाले इस परिवर्तन के विषय अपनी राय और टिप्पणियाँ दें।

 

          धन्यवाद


शुक्रवार, 30 जुलाई 2021

सूचना - ब्लॉग के लेखों में परिवर्तन

  रोज़ की रोटी ब्लॉग के सन्देश 1 अगस्त 2021 से एक बदले हुए स्वरूप में होंगे। अब अंग्रेज़ी की दैनिक मनन के संदेशों की पुस्तिका Our Daily Bread के संदेशों के अनुवाद के स्थान पर, इसी ब्लॉग के लिए लिखे गए सन्देश पोस्ट किए जाएँगे।

           जो पाठक Our Daily Bread के संदेशों को हिन्दी में पढ़ते रहना चाहते हैं, वे इस लिंक के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं: प्रतिदिन की रोटी (www.hindi-odb.org )

अंग्रेज़ी में मुख्य वेब साईट का लिंक है: Our Daily Bread (www.ourdailybread.org)


          1 अगस्त से इसी ब्लॉग के अंतर्गत की एक नई श्रृंखला आरंभ होगी, जिसका विषय होगा “परमेश्वर का वचन – बाइबल”

          इस नई श्रंखला में हम: 

  • बाइबल क्या है? 
  • मसीही विश्वासी इसे परमेश्वर का वचन क्यों कहते हैं
  • इसकी शिक्षाएँ क्या हैं? 
  • इसे कैसे समझा जा सकता है? 
  • क्या यह आज के समय के लिए समकालिक है? 
  • क्या बाइबल विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती है? 
  • बाइबल का लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव होता है? 
    आदि, और भी कई प्रश्नों के उत्तरों को छोटे लेखों के द्वारा पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा जिससे पाठक स्वयं देख और जान लें कि बाइबल की वास्तविकता क्या है; और इसे बदनाम करने के लिए इसके बारे में कितनी झूठी धारणाएँ गढ़ी और फैलाई गई हैं।

 

          पाठकों से निवेदन है कि 1 अगस्त से किए जाने वाले इस परिवर्तन के विषय अपनी राय और टिप्पणियाँ दें।

 

          धन्यवाद

गुरुवार, 29 जुलाई 2021

सूचना - ब्लॉग के लेखों में परिवर्तन

 रोज़ की रोटी ब्लॉग के सन्देश 1 अगस्त 2021 से एक बदले हुए स्वरूप में होंगे। अब अंग्रेज़ी की दैनिक मनन के संदेशों की पुस्तिका Our Daily Bread के संदेशों के अनुवाद के स्थान पर, इसी ब्लॉग के लिए लिखे गए सन्देश पोस्ट किए जाएँगे।

           जो पाठक Our Daily Bread के संदेशों को हिन्दी में पढ़ते रहना चाहते हैं, वे इस लिंक के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं: प्रतिदिन की रोटी (www.hindi-odb.org )

अंग्रेज़ी में मुख्य वेब साईट का लिंक है: Our Daily Bread (www.ourdailybread.org)


          1 अगस्त से इसी ब्लॉग के अंतर्गत की एक नई श्रृंखला आरंभ होगी, जिसका विषय होगा “परमेश्वर का वचन – बाइबल”

          इस नई श्रंखला में हम: 

  • बाइबल क्या है? 
  • मसीही विश्वासी इसे परमेश्वर का वचन क्यों कहते हैं
  • इसकी शिक्षाएँ क्या हैं? 
  • इसे कैसे समझा जा सकता है? 
  • क्या यह आज के समय के लिए समकालिक है? 
  • क्या बाइबल विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती है? 
  • बाइबल का लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव होता है? 
    आदि, और भी कई प्रश्नों के उत्तरों को छोटे लेखों के द्वारा पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा जिससे पाठक स्वयं देख और जान लें कि बाइबल की वास्तविकता क्या है; और इसे बदनाम करने के लिए इसके बारे में कितनी झूठी धारणाएँ गढ़ी और फैलाई गई हैं।

 

          पाठकों से निवेदन है कि 1 अगस्त से किए जाने वाले इस परिवर्तन के विषय अपनी राय और टिप्पणियाँ दें।

 

          धन्यवाद

व्यर्थ

 

          मादक पदार्थ हीरोइन की लत बहुत मार्मिक और दुखद होती है। इस का सेवन करने वाले इसके आदि होते चले जाते हैं, इसलिए उसके नशे का वही अनुभव प्राप्त करने के लिए उन्हें और भी अधिक मात्रा में हिरोइन को लेना पड़ता है; और शीघ्र ही उनकी लत और पदार्थ का आदि होना इतनी बढ़ जाते हैं, कि नशे का पर्याप्त अनुभव करने के लिए जिस मात्रा में हिरोइन की उन्हें आवश्यकता महसूस होती है, वह उन्हें मार डालने के लिए काफी होती है। जब इस लत के आदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि इस लत में पड़ा हुआ कोई अन्य व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में हिरोइन लेने से मर गया है, तो उनके मन में पहला विचार उस लत के लिए भय का नहीं, वरन उतनी मात्रा में हिरोइन को प्राप्त करने का होता है – “मुझे इतनी हिरोइन कहाँ से मिलेगी?

          सुप्रसिद्ध मसीही लेखक सी. एस. ल्युईस ने अपनी पुस्तक ‘स्क्रू टेप लेटर्स में इस निरंतर पतन की ओर जाते हुए चक्र के विषय में चेतावनी दी। उनकी यह पुस्तक एक काल्पनिक वर्णन है, कैसे एक दुष्टात्मा दूसरी दुष्टात्मा को विभिन्न दुष्टताओं में लोगों को फंसाने के बारे में सिखा रही है। शिक्षक दुष्टात्मा कहती है कि किसी सुख की अभिलाषा के साथ आरंभ करो – यदि संभव हो तो परमेश्वर द्वारा दिए जाने वाले किसी सुख के साथ – और उसे उस व्यक्ति को एक ऐसे तरीके से परोसो, जिसे परमेश्वर ने वर्जित किया हो। एक बार व्यक्ति जाल में आ जाए, तो उसे और अधिक पाने के प्रलोभन में फंसाओ, किन्तु पहले से कम मात्रा में उसका सुख प्रदान करो। इस व्यर्थता के चक्र में उसे फंसाकर ऐसा प्रयोजन करो कि उसकी लालसा बढ़ती जाए, किन्तु जो उसे मिलता है, वह घटता चला जाए, और अन्ततः हम उसकी आत्मा तक पहुँच जाएंगे और बदले में उसे कुछ नहीं देंगे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 7 अध्याय में इसी विनाशकारी व्यर्थता के चक्र का वर्णन यौन पापों के विषय किया गया है। यौन संबंध परमेश्वर द्वारा हमें दिया गया एक अच्छा उपहार है, किन्तु जब हम इसके सुख की अभिलाषा वैवाहिक बंधनों के बाहर रखने लगते हैं, तो हम वध के लिए ले जाए जा रहे बैल के समान हो जाते हैं (पद 22)। हम से भी अधिक शक्तिशाली लोगों ने अपने आप को यौन दुराचार में फंसाकर बर्बाद कर लिया है। इसलिए ध्यान दें और अपने मनों को गलत मार्गों पर न जाने दें (पद 24-25)। पाप मोहित करने वाला और लत में फंसाने वाला हो सकता है, किन्तु सदा ही उसकी अभिलाषा व्यर्थ ही होती ही, उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है (पद 27)।

          परमेश्वर की सामर्थ्य और मार्गदर्शन के द्वारा पाप करने के प्रलोभन से बचने से हम व्यर्थ की हानिकारक बातों से बचकर, परमेश्वर में सच्चे आनन्द और संतुष्टि को प्राप्त कर सकते हैं। - माइक व्हिटमर

 

प्रभु पवित्र आत्मा, मैं अपने आप में प्रलोभनों पर जयवंत नहीं हो सकता हूँ; 

मुझे आपके सामर्थ्य और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।


तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: नीतिवचन 7:10-27

नीतिवचन 7:10 और उस से एक स्त्री मिली, जिस का भेष वेश्या का सा था, और वह बड़ी धूर्त थी।

नीतिवचन 7:11 वह शान्ति रहित और चंचल थी, और अपने घर में न ठहरती थी;

नीतिवचन 7:12 कभी वह सड़क में, कभी चौक में पाई जाती थी, और एक एक कोने पर वह बाट जोहती थी।

नीतिवचन 7:13 तब उसने उस जवान को पकड़ कर चूमा, और निर्लज्जता की चेष्टा कर के उस से कहा,

नीतिवचन 7:14 मुझे मेलबलि चढ़ाने थे, और मैं ने अपनी मन्नतें आज ही पूरी की हैं;

नीतिवचन 7:15 इसी कारण मैं तुझ से भेंट करने को निकली, मैं तेरे दर्शन की खोजी थी, सो अभी पाया है।

नीतिवचन 7:16 मैं ने अपने पलंग के बिछौने पर मिस्र के बेल-बूटे वाले कपड़े बिछाए हैं;

नीतिवचन 7:17 मैं ने अपने बिछौने पर गन्घरस, अगर और दालचीनी छिड़की है।

नीतिवचन 7:18 इसलिये अब चल हम प्रेम से भोर तक जी बहलाते रहें; हम परस्पर की प्रीति से आनन्दित रहें।

नीतिवचन 7:19 क्योंकि मेरा पति घर में नहीं है; वह दूर देश को चला गया है;

नीतिवचन 7:20 वह चान्दी की थैली ले गया है; और पूर्णमासी को लौट आएगा।

नीतिवचन 7:21 ऐसी ही बातें कह कह कर, उसने उसको अपनी प्रबल माया में फंसा लिया; और अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से उसको अपने वश में कर लिया।

नीतिवचन 7:22 वह तुरन्त उसके पीछे हो लिया, और जैसे बैल कसाई-खाने को, या जैसे बेड़ी पहने हुए कोई मूढ़ ताड़ना पाने को जाता है।

नीतिवचन 7:23 अन्त में उस जवान का कलेजा तीर से बेधा जाएगा; वह उस चिडिय़ा के समान है जो फन्दे की ओर वेग से उड़े और न जानती हो कि उस में मेरे प्राण जाएंगे।

नीतिवचन 7:24 अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों पर मन लगाओ।

नीतिवचन 7:25 तेरा मन ऐसी स्त्री के मार्ग की ओर न फिरे, और उसकी डगरो में भूल कर न जाना;

नीतिवचन 7:26 क्योंकि बहुत से लोग उस के द्वारा मारे पड़े हैं; उसके घात किए हुओं की एक बड़ी संख्या होगी।

नीतिवचन 7:27 उसका घर अधोलोक का मार्ग है, वह मृत्यु के घर में पहुंचाता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 49-50
  • रोमियों 1

बुधवार, 28 जुलाई 2021

परिश्रम

 

          जो लोग विलियम केरी (1761-1834) के इंग्लैंड के उसके गाँव में उसके साथ पले बड़े हुए थे, उन्होंने सोचा होगा कि वह अधिक कुछ नहीं करने पाएगा। किन्तु आज उसे आधुनिक मसीही सेवकाइयों का पिता कहा जाता है। उसका जन्म जुलाहों के परिवार में हुआ था, और वह एक ऐसा शिक्षक और मोची बना, जो कुछ विशेष सफल नहीं था, और साथ ही अपने आप को यूनानी, इब्रानी, और लातीनी भाषाएँ भी सिखाता रहा। बहुत वर्षों के परिश्रम के बाद, उसका भारत में मसीही सेवकाई करने का सपना पूरा हुआ। किन्तु उसे बहुत कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा, जिनमें उसके बच्चे की मृत्यु और उसकी पत्नी के मानसिक रोग भी सम्मिलित थे, तथा बहुत वर्षों तक उसे उन लोगों से इस सेवकाई के लिए जाने के लिए कोई प्रत्युत्तर नहीं मिल रहा था, जिनके मध्य वह सेवा करता था।

          ऐसा क्या था जो उसे इन सभी कठिनाइयों में होकर भी सेवकाई में लगे रहने के लिए प्रेरित करता रहा; उस सेवकाई में जिसमें उसने संपूर्ण बाइबल का छः भाषाओं में अनुवाद किया, और बाइबल के कुछ भागों का उन्तीस भिन्न भाषाओं में अनुवाद किया? उसने कहा, मुझे परिश्रम करते रहना आता है; मैं किसी भी निश्चित लक्ष्य को पूरा करने के लिए दृढ़ता से उसमें लगा रह सकता हूँ। उसने तय कर रखा था की चाहे कुछ भी हो जाए, जो भी परीक्षा आए, किन्तु वह परमेश्वर की सेवा करता रहेगा।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों का लेखक भी इसी निरन्तर बनी रहने वाली भक्ति के बारे में परामर्श देता है। लेखक ने अपने पाठकों से कहा कि वे आलसी न हों, किन्तु अन्त तक प्रयत्न करते ही रहें (इब्रानियों 6:11, 12)। उसने उन्हें आश्वासन दिया कि जब वे परमेश्वर को आदर देने में परिश्रम करते रहेंगे, तो परमेश्वर भी उनके इस परिश्रम को नहीं भूलेगा (पद 10)।

          विलियम केरी के बाद के वर्षों में, उसने इस बात पर मनन करते हुए कि परमेश्वर कैसे उसकी आवश्यकताओं को निरंतर पूरा करता रहा, कहा, “वह अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने में कभी नहीं चूका, इसलिए मैं भी उसके प्रति अपनी सेवा में कभी नहीं चूक सकता हूँ।” परमेश्वर हमें भी सामर्थ्य दे कि हम दिन-प्रतिदिन उसकी सेवा परिश्रम के साथ करते रहें। - एमी बाउचर पाई

 

हे प्रभु जब मैं कठिनाइयों और परीक्षाओं का सामना करूं, 

तो यह कभी न भूलूँ कि आप सदा मेरे साथ हैं।


और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों 1:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 6:9-12

इब्रानियों 6:9 पर हे प्रियो यद्यपि हम ये बातें कहते हैं तौभी तुम्हारे विषय में हम इस से अच्छी और उद्धार वाली बातों का भरोसा करते हैं।

इब्रानियों 6:10 क्योंकि परमेश्वर अन्यायी नहीं, कि तुम्हारे काम, और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिये इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की, और कर भी रहे हो।

इब्रानियों 6:11 पर हम बहुत चाहते हैं, कि तुम में से हर एक जन अन्त तक पूरी आशा के लिये ऐसा ही प्रयत्न करता रहे।

इब्रानियों 6:12 ताकि तुम आलसी न हो जाओ; वरन उन का अनुकरण करो, जो विश्वास और धीरज के द्वारा प्रतिज्ञाओं के वारिस होते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 46-48
  • प्रेरितों 28