ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

परदेशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
परदेशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 29 सितंबर 2020

सहायता


         तंज़ानिया में रहने वाली मेरी एक सहेली, रूत, का दर्शन है कि वह राजधानी दोदोमा में एक उजाड़ पड़े भूमि के भाग को खरीद ले। रूत की बहुत इच्छा है कि वह कुछ स्थानीय विधवाओं की सहायता के लिए कुछ करे; और वह इस धूल भरे और गंदे पड़े भू-भाग पर खेती और मुर्गी-पालन करना चाहती है। उन विधवाओं की सहायता करने की उसकी इच्छा परमेश्वर के वचन बाइबल में उसकी हमनाम स्त्री, रूत, के जीवन की प्रेरणा से है।

         बाइबल में, निर्धनों और परदेशियों को परमेश्वर की ओर से यह अधिकार दिया गया था कि फसल की कटाई के समय वे खेतों के किनारों से गिर जाने वाली अनाज की बालियाँ अपने उपयोग के लिए बटोर लें (लैव्यव्यवस्था 19:9-10), खेतों के मालिक और मज़दूर उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकते थे। बाइबल वाली रूत, जो विधवा थी और उस समय वहाँ बैतलहम में एक परदेशी थी, इसलिए उसे खेतों में फसल की कटाई के समय, अपने और अपनी सास, नाओमी, के भोजन के लिए अनाज की बालियाँ बटोरने की अनुमति थी।

         उनके परिवार के एक निकट संबंधी, बोआज़, के खेतों में अनाज की बालियाँ बटोरने से रूत बोअज़ की नज़रों में आई; और क्योंकि रूत अपने अच्छे चरित्र तथा अपने सास के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती थी, इसलिए बोअज़ ने उसके कुटुम्बी होने के अपने दायित्व का निर्वाह किया, उससे विवाह किया, और रूत तथा नाओमी को एक घर और परिवार मिल गया, तथा परमेश्वर ने उन्हें आशीष दी। यही रूत दाऊद की परदादी बनी, और उसी के वंश में आगे चलकर सारे जगत के एकमात्र उद्धारकर्ता, प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ।

         सहायता करने के लिए मेरी सहेली रूत, तथा बाइबल की रूत, दोनों ही की लालसा, मुझे परमेश्वर का धन्यवाद और आराधना करने के लिए उभारते हैं, कि वह किस प्रकार से निर्धनों और तिरस्कृत लोगों के लिए प्रावधान करता है। उनके जीवन मुझे प्रोत्साहित करते हैं कि मैं भी अपने समुदाय में औरों की सहायता में योगदान करूं और अपने कार्यों के द्वारा परमेश्वर के प्रति अपने धन्यवाद को व्यक्त करूं।

         औरों की सहायता करने के द्वारा आप भी परमेश्वर की आराधना कर सकते हैं, उसके प्रति अपने धन्यवाद को व्यक्त कर सकते हैं। - एमी बाउचर पाई

 

परमेश्वर दुर्बलों और निःसहायों का सहायक है।


फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो तब अपने खेत के कोने कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना। और अपनी दाख की बारी का दाना दाना न तोड़ लेना, और अपनी दाख की बारी के झड़े हुए अंगूरों को न बटोरना; उन्हें दीन और परदेशी लोगों के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। - लैव्यव्यवस्था 19:9-10

बाइबल पाठ: रूत 2:1-12

रूत 2:1 नाओमी के पति एलीमेलेक के कुल में उसका एक बड़ा धनी कुटुम्बी था, जिसका नाम बोअज़ था।

रूत 2:2 और मोआबिन रूत ने नाओमी से कहा, मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जो मुझ पर अनुग्रह की दृष्टि करे, उसके पीछे पीछे मैं सिला बीनती जाऊं। उसने कहा, चली जा, बेटी।

रूत 2:3 सो वह जा कर एक खेत में लवने वालों के पीछे बीनने लगी, और जिस खेत में वह संयोग से गई थी वह एलीमेलेक के कुटुम्बी बोअज़ का था।

रूत 2:4 और बोअज़ बेतलेहेम से आकर लवने वालों से कहने लगा, यहोवा तुम्हारे संग रहे, और वे उस से बोले, यहोवा तुझे आशीष दे।

रूत 2:5 तब बोअज़ ने अपने उस सेवक से जो लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था पूछा, वह किस की कन्या है।

रूत 2:6 जो सेवक लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था उसने उत्तर दिया, वह मोआबिन कन्या है, जो नाओमी के संग मोआब देश से लौट आई है।

रूत 2:7 उसने कहा था, मुझे लवने वालों के पीछे पीछे पूलों के बीच बीनने और बालें बटोरने दे। तो वह आई, और भोर से अब तक यहीं है, केवल थोड़ी देर तक घर में रही थी।

रूत 2:8 तब बोअज ने रूत से कहा, हे मेरी बेटी, क्या तू सुनती है? किसी दूसरे के खेत में बीनने को न जाना, मेरी ही दासियों के संग यहीं रहना।

रूत 2:9 जिस खेत को वे लवतीं हों उसी पर तेरा ध्यान बन्धा रहे, और उन्हीं के पीछे पीछे चला करना। क्या मैं ने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझ से न बोलें? और जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू बरतनों के पास जा कर जवानों का भरा हुआ पानी पीना।

रूत 2:10 तब वह भूमि तक झुककर मुंह के बल गिरी, और उस से कहने लगी, क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि कर के मेरी सुधि ली है?

रूत 2:11 बोअज़ ने उत्तर दिया, जो कुछ तू ने पति मरने के पीछे अपनी सास से किया है, और तू किस रीति अपने माता पिता और जन्मभूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिन को पहिले तू न जानती थी, यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।

रूत 2:12 यहोवा तेरी करनी का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों के तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दे

 

एक साल में बाइबल: 

  • यशायाह 7-8
  • इफिसियों 2


शनिवार, 11 जुलाई 2020

परिवार


     जब मैं और मेरे पति, उनकी बहन के निकट रहने के लिए एक दूसरे शहर को स्थानांतरित हुए, तो हमें पता नहीं था कि हम कहाँ रहेंगे या काम करेंगे। एक किराए का घर ढूँढने में स्थानीय चर्च ने हमारी सहायता की, और उस घर में कई शयन-कक्ष थे। हम एक कमरे में रह सकते थे, और अन्य कमरों को वहाँ अध्ययन के लिए आने वाले अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों को किराए पर दे सकते थे। अगले तीन वर्षों तक हम ऐसे परदेशी थे, जो संसार भर से आने वाले अन्य परदेशियों का स्वागत करते थे, उनके साथ अपने घर और भोजन को साझा करते थे। और वे लोग हमारे साथ परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में सम्मिलित होने के लिए हर शुक्रवार को अन्य दर्जनों अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों को लाया करते थे।

     परमेश्वर के लोग जानते हैं कि घर से दूर होने का क्या अर्थ होता है। सैंकड़ों वर्षों तक, इस्राएली मिस्र में परदेशी थे, दास थे। लैव्यव्यवस्था 19 में, अन्य चिर-परिचित निर्देशों जैसे कि “अपने माता और पिता का आदर करना” और “चोरी न करना” (पद 3, 11) के साथ परमेश्वर ने अपने लोगों को स्मरण दिलाया कि वे दयालु होकर परदेशियों की देखभाल करें, क्योंकि उन्हें परदेशी तथा आतंकित होने का अनुभव था (पद 33-34)।

     आज प्रभु परमेश्वर के अनुयायी होते हुए हम में से अधिकाँश ने वास्तव में निर्वासित होने के अनुभव को नहीं जाना है, परन्तु हम सभी यह जानते हैं की पृथ्वी पर “परदेशी” होकर रहने (1 पतरस 2:11) का क्या अनुभव होता है – वे लोग जो यहाँ पर भी अपने आप को बाहर का अनुभव करते हैं, परमेश्वर के स्वर्गीय राज्य के साथ संबंधित होने के कारण। हमें पहुनाई करने वाले समुदाय के निर्माण के लिए कहा गया है, जहाँ परदेशी परमेश्वर के परिवार के सदस्य बनने के लिए अन्य परदेशियों का स्वागत करते हैं।

     उस नए शहर में जो उदार और प्रेमपूर्ण स्वागत मुझे और मेरे पति को मिला, उसने हमें उस स्वागत को औरों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया, और यही परमेश्वर के परिवार का सदस्य होने का मर्म है (रोमियों 12:13)।

 

आज हम किसे पहुनाई दिखा सकते हैं?


पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। - इब्रानियों 13:2

बाइबल पाठ: लैव्यव्यवस्था 19:1-9, 33-34

लैव्यव्यवस्था 19:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा,

लैव्यव्यवस्था 19:2 इस्त्राएलियों की सारी मण्डली से कह, कि तुम पवित्र बने रहो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा पवित्र हूं।

लैव्यव्यवस्था 19:3 तुम अपनी अपनी माता और अपने अपने पिता का भय मानना, और मेरे विश्राम दिनों को मानना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

लैव्यव्यवस्था 19:4 तुम मूरतों की ओर न फिरना, और देवताओं की प्रतिमाएं ढालकर न बना लेना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

लैव्यव्यवस्था 19:5 जब तुम यहोवा के लिये मेलबलि करो, तब ऐसा बलिदान करना जिससे मैं तुम से प्रसन्न हो जाऊं।

लैव्यव्यवस्था 19:6 उसका मांस बलिदान के दिन और दूसरे दिन खाया जाए, परन्तु तीसरे दिन तक जो रह जाए वह आग में जला दिया जाए।

लैव्यव्यवस्था 19:7 और यदि उस में से कुछ भी तीसरे दिन खाया जाए, तो यह घृणित ठहरेगा, और ग्रहण न किया जाएगा।

लैव्यव्यवस्था 19:8 और उसका खानेवाला यहोवा के पवित्र पदार्थ को अपवित्र ठहराता है, इसलिये उसको अपने अधर्म का भार स्वयं उठाना पड़ेगा; और वह प्राणी अपने लोगों में से नाश किया जाएगा।

लैव्यव्यवस्था 19:9 फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो तब अपने खेत के कोने कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना।

लैव्यव्यवस्था 19:33 और यदि कोई परदेशी तुम्हारे देश में तुम्हारे संग रहे, तो उसको दु:ख न देना।

लैव्यव्यवस्था 19:34 जो परदेशी तुम्हारे संग रहे वह तुम्हारे लिये देशी के समान हो, और उस से अपने ही समान प्रेम रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।     

 एक साल में बाइबल: 

  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15

बुधवार, 3 अक्टूबर 2018

चरित्र



      घाना के दूरस्थ इलाकों में, जहाँ मैं बचपन में रहा करता था, एक सामान्य कहावत थी, “भोजन के समय, कोई मित्र नहीं।” सामान्यतः भोजन के आभाव के कारण, स्थानीय लोग इसे अशिष्ट मानते थे यदि कोई मेहमान भोजन के समय किसी के घर पहुँच जाता। यह बात पड़ौसी और बाहरी लोगों दोनों पर समान लागू होती थी।

      परन्तु फिलिप्पींस में, जहाँ पर भी मैं कुछ वर्ष रहा था, आप चाहे भोजन के समय बिना बताए भी चले आते थे तो भी मेज़बान इस बात पर ज़ोर देते थे के आप उनके साथ कुछ खाएं, चाहे स्वयँ उनके लिए भी भोजन पर्याप्त न हो। अपने कुछ खास कारणों से भिन्न स्थानों पर भिन्न संस्कृतियां होती हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब इस्राएली मिस्र से निकलकर चले, तब परमेश्वर ने उन्हें उनकी संस्कृति के लिए कुछ विशेष नियम दिए। परन्तु नियम, वे चाहे परमेश्वर ही के नियम क्यों न हों, मनुष्यों के मनों को परिवर्तित नहीं कर सकते हैं। इसीलिए मूसा ने उन से कहा, “इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो” (व्यवस्थाविवरण 10:16)। यह रोचक है कि मन परिवर्तन के इस आहवान के तुरंत बाद ही मूसा ने इस्राएलियों द्वारा परदेशियों के प्रति किए जाने वाले व्यवहार के विषय निर्देश दिए; उसने परमेश्वर के चरित्र के आधार पर उनसे कहा, “वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है। इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे” (पद 18-19)।

      इस्राएली एक अति महान एवँ अनुपम परमेश्वर की सेवा करते थे: “क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है” (पद 17) । ऐसे महान और पराक्रमी परमेश्वर के जन होने के कारण उन्हें इस बात का प्रमाण परदेशियों के प्रति, वे जो उनकी संस्कृति से नहीं थे, उनके प्रति प्रेम दर्शाने के द्वारा दिखाना था।

      परमेश्वर के चरित्र का यह संक्षिप्त विवरण, आज हमारे लिए क्या अर्थ रखता है? परमेश्वर के जन होने के कारण आज हम मसीही विश्वासी, परमेश्वर के प्रेम को तिरीस्कृत और ज़रूरतमंद लोगों को किस प्रकार से दिखा सकते हैं? – टिम गुस्ताफ्सन


मसीह यीशु में कोई परदेशी नहीं है।

इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। - इफिसियों 2:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-22
Deuteronomy 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे,
Deuteronomy 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो?
Deuteronomy 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है;
Deuteronomy 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है।
Deuteronomy 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो।
Deuteronomy 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है।
Deuteronomy 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है।
Deuteronomy 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे।
Deuteronomy 10:20 अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना।
Deuteronomy 10:21 वही तुम्हारी स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है, जिसने तेरे साथ वे बड़े महत्व के और भयानक काम किए हैं, जिन्हें तू ने अपनी आंखों से देखा है।
Deuteronomy 10:22 तेरे पुरखा जब मिस्र में गए तब सत्तर ही मनुष्य थे; परन्तु अब तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरी गिनती आकाश के तारों के समान बहुत कर दिया है।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19
  • इफिसियों 5:17-33



बुधवार, 23 मई 2018

सुरक्षा


   रूत परदेशी थी, विधवा थी, निर्धन थी। सँसार के अनेकों स्थानों पर आज भी उसे नाचीज़, वह जिसके भविष्य में कोई आशा नहीं थी, समझा जाता ।

   किन्तु रूत को उसके दिवंगत पति के एक कुटुम्बी, बोआज, की कृपादृष्टि प्राप्त हुई। बोआज संपन्न था, खेतों का स्वामी था; और रूत को उसी के खेतों में से नीचे गिरा हुआ अनाज बीनने की अनुमति मिली हुई थी। उसकी कृपादृष्टि के लिए रूत ने बोआज से पूछा, “...क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि कर के मेरी सुधि ली है?” (रूत 2:10)।

   बोआज ने, जिसने रूत पर कृपादृष्टि की थी, उसे सच्चाई से उत्तर दिया – उसने रूत द्वारा अपनी सास नाओमी के साथ किए गए भले व्यवहार के बारे में, और कैसे रूत ने अपने लोगों और देश को छोड़कर, नाओमी के साथ रहने और उसके परमेश्वर को अपना परमेश्वर मानने के निर्णय के बारे में सुना था। बोआज ने प्रार्थना की कि परमेश्वर रूत को आशीष दे। बाद में जब रूत का कुटुम्बी छुड़ानेवाला होने के नाते बोआज ने रूत से विवाह किया, तो वह रूत की प्रार्थना के उत्तर का एक भाग और उसे सुरक्षा प्रदान करने वाला भी बन गया।

   रूत के समान, हम भी परमेश्वर से दूर, और परदेशी थे। हम भी अचरज कर सकते हैं कि हमारे इतना अयोग्य होने के बावजूद क्यों परमेश्वर ने हम से प्रेम करने का निर्णय लिया? उत्तर हम में नहीं है, परन्तु परमेश्वर के चरित्र में है: “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा” (रोमियों 5:8)। प्रभु यीशु मसीह हमारा मुक्तिदाता बन गया है। हम जब उसके पास अपने पापों के लिए पश्चाताप और उसके प्रति समर्पण तथा पापों के लिए क्षमा याचना के साथ आते हैं, वह हमें अनन्त काल के लिए अपनी सुरक्षा में ले लेता है। - कीला ओकोआ


अयोग्य होने पर भी, परमेश्वर द्वारा दिखाए गए महान प्रेम के प्रति 
कृतज्ञता ही आभारी हृदय की प्रतिक्रया है।

प्रभु यहोवा, जो निकाले हुए इस्राएलियों को इकट्ठे करने वाला है, उसकी यह वाणी है कि जो इकट्ठे किए गए हैं उनके साथ मैं औरों को भी इकट्ठे कर के मिला दूंगा। - यशायाह 56:8

बाइबल पाठ: रूत 2:1-11
Ruth 2:1 नाओमी के पति एलीमेलेक के कुल में उसका एक बड़ा धनी कुटुम्बी था, जिसका नाम बोअज था।
Ruth 2:2 और मोआबिन रूत ने नाओमी से कहा, मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जो मुझ पर अनुग्रह की दृष्टि करे, उसके पीछे पीछे मैं सिला बीनती जाऊं। उसने कहा, चली जा, बेटी।
Ruth 2:3 सो वह जा कर एक खेत में लवने वालों के पीछे बीनने लगी, और जिस खेत में वह संयोग से गई थी वह एलीमेलेक के कुटुम्बी बोअज का था।
Ruth 2:4 और बोअज बेतलेहेम से आकर लवने वालों से कहने लगा, यहोवा तुम्हारे संग रहे, और वे उस से बोले, यहोवा तुझे आशीष दे।
Ruth 2:5 तब बोअज ने अपने उस सेवक से जो लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था पूछा, वह किस की कन्या है।
Ruth 2:6 जो सेवक लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था उसने उत्तर दिया, वह मोआबिन कन्या है, जो नाओमी के संग मोआब देश से लौट आई है।
Ruth 2:7 उसने कहा था, मुझे लवने वालों के पीछे पीछे पूलों के बीच बीनने और बालें बटोरने दे। तो वह आई, और भोर से अब तक यहीं है, केवल थोड़ी देर तक घर में रही थी।
Ruth 2:8 तब बोअज ने रूत से कहा, हे मेरी बेटी, क्या तू सुनती है? किसी दूसरे के खेत में बीनने को न जाना, मेरी ही दासियों के संग यहीं रहना।
Ruth 2:9 जिस खेत को वे लवतीं हों उसी पर तेरा ध्यान बन्धा रहे, और उन्हीं के पीछे पीछे चला करना। क्या मैं ने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझ से न बोलें? और जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू बरतनों के पास जा कर जवानों का भरा हुआ पानी पीना।
Ruth 2:10 तब वह भूमि तक झुककर मुंह के बल गिरी, और उस से कहने लगी, क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि कर के मेरी सुधि ली है?
Ruth 2:11 बोअज ने उत्तर दिया, जो कुछ तू ने पति मरने के पीछे अपनी सास से किया है, और तू किस रीति अपने माता पिता और जन्मभूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिन को पहिले तू ने जानती थी, यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 19-21
  • यूहन्ना 8:1-27


शनिवार, 10 मार्च 2018

परदेशी



   मैंने अपनी साइकिल खड़ी की, और साहस तथा सांत्वना के लिए केम्ब्रिज के नक़्शे को सहलाया। क्योंकि दिशानिर्देश पता लगाना मेरी कमजोरी था, इसलिए मैं जानती थी कि कैम्ब्रिज की उन ऐतिहासिक इमारतों की भूल-भुलैया में मैं सरलता से खो जाऊँगी।

   मेरे लिए जीवन सुखद होना चाहिए था, क्योंकि मैंने अपने पसन्द के इंग्लैण्ड निवासी से हाल में विवाह किया था और उसके साथ रहने और घर बनाने के लिए इंग्लैण्ड आ गई थी; परन्तु मैं अपने आप को निरुद्देश्य इधर-उधर बहता हुआ अनुभव कर रही थी। जब तक मैं अपना मुँह बन्द रखती थी, मैं अन्य लोगों में रम जाती थी, परन्तु जैसे ही मैं कुछ बोलती, तुरंत मुझे अमेरिकन सैलानी समझ लिया जाता था। मुझे अब तक यह समझ नहीं आया था कि मेरा कार्य क्या है, और मैंने शीघ्र ही यह समझ लिया कि दो अड़ियल जीवनों को एक साझा जीवन बनाना, उतना सरल नहीं था जितना मैंने सोचा था।

   मैंने अपने आप को परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रमुख पात्र, अब्राहम के समान पाया, जो परमेश्वर की बुलाहट पर अपना सब कुछ छोड़ कर एक नए देश में परदेशी और अजनबी बनकर रहने के लिए निकल पड़ा था (उत्पत्ति 12:1)। परमेश्वर में अपने विश्वास को बनाए हुए वह सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना करता रहा, और 2000 वर्ष के बाद, इब्रानियों के लेखक ने उसे परमेश्वर में विश्वास का एक नायक बताया (इब्रानियों 11:9)। इब्रानियों के इस अध्याय में उल्लेखित अन्य पुरुषों और महिलाओं के समान, अब्राहम ने अपना जीवन, प्रतिज्ञा की हुई वस्तुओं की बाट जोहते हुए, विश्वास द्वारा व्यतीत किया और अपने स्वर्गीय घर की आशा और प्रतीक्षा करता रहा।

   हो सकता है कि आप जन्म के समय से, या बहुत लंबे समय से एक ही नगर में रहते आए हों, परन्तु यदि आप मसीह यीशु के शिष्य हैं, तो हम इस पृथ्वी पर, यहाँ से होकर निकलने वाले परदेशी और अजनबी हैं। विश्वास के साथ हम आगे की ओर बढ़ते जाते हैं, यह मानते हुए कि परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करेगा, हमें हमारे गंतव्य तक लेकर जाएगा, और हम विश्वास रखते हैं कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा न त्यागेगा। विश्वास से हम परदेशी, अपने स्थाई घर पहुँछाए जाने की बाट जोह रहे हैं। - ऐमी बाउचर पाई


परमेश्वर हमें विश्वास से जीने के लिए बुलाता है, 
यह विश्वास करने के लिए भी कि वह सदा अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करेगा।

और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा। - इब्रानियों 10:38

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं।
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था।
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।


एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 11-13
  • मरकुस 12:1-27



गुरुवार, 19 नवंबर 2015

यात्रा


   हाल ही में मैंने अपने साथ कॉलेज से स्नात्क होने वाले छात्रों के बारे में पता लगाया, और पाया कि मेरे साथ के कई विद्यार्थी अब संसार से कूच कर चुके हैं; जीवन के अल्पकालीन होने का यह गंभीर स्मरण था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्य की आयु के लिए लिखा है, "हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं" (भजन 90:10) - बस अस्सी वर्ष के लगभग और हमारे संसार से कूच करके अनन्तकाल में प्रवेश करने का समय हो जाता है। भजनकार सही है, हम इस पृथ्वी पर परदेशी और यात्री ही तो हैं (भजन 39:12)।

   जीवन के अल्पकालीन होने के कारण हमें अपने ’अन्त’ तथा अनन्त, दोनों के बारे में गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए, यह जानते हुए कि हम कैसे अनित्य हैं (भजन 39:4); और जैसे जैसे हमारा अन्त समय निकट आता जाता है, यह भावना और प्रबल होती जाती है कि संसार हमारा घर नहीं है, हम तो यहाँ परदेशी और यात्री मात्र हैं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को एक बहुत सामर्थी आश्वासन भी है - इस यात्रा में हम अकेले नहीं हैं; हमारा परमेश्वर पिता भी हमारे हर पल, हर पग में हमारे साथ बना रहता है। इस कारण यात्री और परदेशी होने तथा अनन्तकाल व्यतीत करने संसार से बाहर जाने का विचार हमारे लिए कम परेशानी, कम भय और कम चिंता उत्पन्न करने वाला है। इस संसार में भी और आने वाले संसार में भी हमारा प्रेमी स्वर्गीय पिता हमारा सहायक तथा मार्गदर्शक बनकर सदा हमारे साथ रहता है (मत्ती 28:20); अपनी यात्रा में हम कभी अकेले नहीं होते (भजन 73:24-25)।

   हमारे माता-पिता, जीवन साथी, मित्रगण हमारी नज़रों से ओझल हो सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि परमेश्वर सदा हमारे साथ बना रहता है, और जैसा एक पुरानी कहावत है, ’अच्छे साथी के साथ मार्ग सरल प्रतीत होता है’ - इस लोक तथा आते लोक, दोनों में परमेश्वर का साथ हमारी यात्रा को सरल और सार्थक बना देता है। - डेविड रोपर


जीवन के थका देने वाले मार्ग पर प्रभु यीशु आपका भारी बोझ उठाना चाहता है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। - भजन 73:24-25

बाइबल पाठ: - भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तेरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1