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मंगलवार, 18 मार्च 2014

सफलता की फिसलन


   रसायनशास्त्री और लेखक डॉ० ओ० ए० बत्तिस्ता द्वारा लिखित 19,000 से अधिक सूक्तियों में से एक यह बुद्धिमानी भरा कथन है: "जैसे ही आप धन, प्रशंसा और ख्याति में रुचि रखना बन्द कर देते हैं, समझ लीजिए कि आप सफलता की चोटी पर पहुँच गए हैं"। लेकिन दुर्भाग्यवश जब कभी हमारी किसी उपलब्धि की प्रशंसा होती है या हम उसके लिए पुरुस्कृत किए जाते हैं तो इस कथन का बिलकुल विपरीत घटित होने लगता है - एक नम्र हृदय शीघ्र ही अहंकार से फूला मन बन जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, इस्त्राएल का प्रथम राजा शाऊल भी इसी रोग का शिकार हुआ था। अपने आरंभ के समय में उसने अपने आप को इस्त्राएल के सबसे छोटे गोत्र के एक महत्वहीन परिवार के एक सदस्य के रूप में देखा था (1 शमूएल 9:21)। लेकिन कुछ ही वर्षों में परमेश्वर द्वारा मिली सफलताओं के कारण उसका मन इतना फूल गया कि उसने अपने सम्मान में एक स्मारक खड़ा करवा लिया और अपने व्यवहार का अन्तिम निर्णय लेने वाला बन गया (1 शमूएल 15:11-12)। परमेश्वर के नबी शमूएल ने राजा शाऊल द्वारा करी गई परमेश्वर की इस अनाज्ञाकारिता के लिए उसका सामना किया और उसे स्मरण दिलाया कि: "शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया?" (1 शमूएल 15:17)

   जिसे हम सफलता कहते हैं उसकी फिसलन भरी ढलान से फिसल कर विनाश को नीचे चल पड़ने की ओर पहला कदम होता है अभिमान। इस कदम के उठाए जाने का आरंभ तब होता है जब हम परमेश्वर द्वारा हमें दी गई सफलताओं का श्रेय उसे देने के स्थान पर उन्हें अपनी उपलब्धियाँ मान कर वह श्रेय स्वयं लेने लग जाते हैं तथा उसकी आज्ञाओं को अपनी इच्छाओं के अनुसार तोड़ना-मरोड़ना भी आरंभ कर देते हैं।

   सच्ची सफलता तब ही आती है जब हम परमेश्वर की आज्ञाकारिता में दीनता और नम्रता के साथ बने रहते हैं और अपनी नहीं वरन अपने जीवनों और कार्यों द्वारा परमेश्वर की प्रशंसा करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड।


सच्ची नम्रता हर सफलता का श्रेय परमेश्वर को ही देती है।

इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; - व्यवस्थाविवरण 8:11

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:10-23
1 Samuel 15:10 तब यहोवा का यह वचन शमूएल के पास पहुंचा, 
1 Samuel 15:11 कि मैं शाऊल को राजा बना के पछताता हूं; क्योंकि उसने मेरे पीछे चलना छोड़ दिया, और मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं किया। तब शमूएल का क्रोध भड़का; और वह रात भर यहोवा की दोहाई देता रहा।
1 Samuel 15:12 बिहान को जब शमूएल शाऊल से भेंट करने के लिये सवेरे उठा; तब शमूएल को यह बताया गया, कि शाऊल कर्म्मेल को आया था, और अपने लिये एक निशानी खड़ी की, और घूमकर गिलगाल को चला गया है। 
1 Samuel 15:13 तब शमूएल शाऊल के पास गया, और शाऊल ने उस से कहा, तुझे यहोवा की ओर से आशीष मिले; मैं ने यहोवा की आज्ञा पूरी की है। 
1 Samuel 15:14 शमूएल ने कहा, फिर भेड़-बकरियों का यह मिमियाना, और गय-बैलों का यह रंभाना जो मुझे सुनाई देता है, यह क्यों हो रहा है? 
1 Samuel 15:15 शाऊल ने कहा, वे तो अमालेकियों के यहां से आए हैं; अर्थात प्रजा के लोगों ने अच्छी से अच्छी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि करने को छोड़ दिया है; और बाकी सब को तो हम ने सत्यानाश कर दिया है। 
1 Samuel 15:16 तब शमूएल ने शाऊल से कहा, ठहर जा! और जो बात यहोवा ने आज रात को मुझ से कही है वह मैं तुझ को बताता हूं। उसने कहा, कह दे। 
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 14-16


सोमवार, 17 मार्च 2014

सांत्वना का वचन


   इस्त्राएल के लोग संघर्ष में थे। वे अशूर के लोगों द्वारा बन्धक बना कर एक दूर देश में जा कर रहने के लिए विवश किए गए थे। परमेश्वर का भविष्यद्वक्ता यशायाह इन थके-माँदे लोगों की सहायाता के लिए उन्हें को क्या दे सकता था?

   उसने उन्हें आशा की ऐसी भविष्यवाणी दी जो ना केवल उनके लिए परमेश्वर से एक सन्देश था वरन जो आते समय में प्रतिज्ञा किए हुए जगत के उद्धारकर्ता से भी संबंधित था। यशायाह 50:4 में स्वयं उस उद्धारकर्ता ने उस आने वाले विश्राम और सांत्वना के विषय में कहा: "प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं"।

   ये आशा के दोहरी परिपूर्णता के वचन थे - उन दासत्व में पड़े हुए लोगों के लिए भी और आने वाली पीढ़ी के उन लोगों के लिए भी जो अपने जीवन में मसीह यीशु के अनुग्रह से मिलने वाले उद्धार को स्वीकार कर लेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में आकर हम सुसमाचारों में दिए गए वृतांत में पाते हैं कि कैसे प्रभु यीशु ने जीवन की परिस्थितियों से थके हुए लोगों को उनकी आवश्यकतानुसार उपयुक्त वचन सुनाकर उसके लिए करी गई इस भविष्यवाणी को पूरा किया। प्रभु यीशु ने कहा, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   ये वास्तव में अनुग्रह और अनुकंपा से भरे शब्द हैं जिनके द्वारा प्रभु यीशु ने हमारे लिए उदाहरण छोड़ा है कि हम परेशान और थके हुए लोगों को कैसे संभाल सकते हैं। क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसे प्रोत्साहन के शब्दों की या एक सुनने वाले मित्र की आवश्यकता है? परमेश्वर के वचन बाइबल से लेकर कहा गया सांत्वना का वचन जीवन से थके हुओं को परमेश्वर की शांति देने के लिए बहुत कारगर होता है; उसे प्रयोग करना सीखिए भी तथा कीजिए भी। - डेनिस फिशर


दुखी हृदयों को आराम देने के लिए सांत्वना के शब्द आवश्यक होते हैं।

सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है, और अवसर पर कहा हुआ वचन क्या ही भला होता है! - नीतिवचन 15:23

बाइबल पाठ: यशायाह 50:4-10
Isaiah 50:4 प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। 
Isaiah 50:5 प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा। 
Isaiah 50:6 मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया।
Isaiah 50:7 क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इस कारण मैं ने संकोच नहीं किया; वरन अपना माथा चकमक की नाईं कड़ा किया क्योंकि मुझे निश्चय था कि मुझे लज्जित होना न पड़ेगा। 
Isaiah 50:8 जो मुझे धर्मी ठहराता है वह मेरे निकट है। मेरे साथ कौन मुकद्दमा करेगा? हम आमने-साम्हने खड़े हों। मेरा विरोधी कौन है? वह मेरे निकट आए। 
Isaiah 50:9 सुनो, प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है; मुझे कौन दोषी ठहरा सकेगा? देखो, वे सब कपड़े के समान पुराने हो जाएंगे; उन को कीड़े खा जाएंगे।
Isaiah 50:10 तुम में से कौन है जो यहोवा का भय मानता और उसके दास की बातें सुनता है, जो अन्धियारे में चलता हो और उसके पास ज्योति न हो? वह यहोवा के नाम का भरोसा रखे, और अपने परमेश्वर पर आशा लगाए रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 11-13


रविवार, 16 मार्च 2014

मूर्ख


   मुझे यह एक विरोधाभास लगता है कि वही प्रभु यीशु जो सामान्यतः इतना नम्र और प्रेमी रहता है (मत्ती 19:13-15), उसने कुछ लोगों को मूर्ख कैसे कहा? सुसमाचारों में कई स्थानों पर आया है कि प्रभु यीशु ने यह अपमानजनक शब्द कुछ लोगों के बारे में कहा है; विशेषकर उस समय के धर्म गुरू माने जाने वाले फरीसियों के लिए (मत्ती 23:17-19; लूका 11:39-40)।

   प्रभु यीशु ने यही मूर्ख शब्द अपने बताए एक दृष्टांत में एक ऐसे व्यक्ति के लिए भी कहा है जो लोभी था (लूका 12:13-21)। प्रभु ने उस व्यक्ति को मूर्ख क्यों कहा; इसलिए नहीं कि उसने अपनी बहुतायत से हुई फसल को रखने के लिए पुराने खत्ते तुड़वाकर नए और बड़े खत्ते बनवाना चाहा (पद 16-18)। यदि वह अपनी फसल को बाहर मैदान में खराब मौसम के द्वारा बर्बाद होने के लिए छोड़ देता, तो वह और भी अधिक मूर्ख ठहरता। ना ही वह व्यक्ति इसलिए मूर्ख था क्योंकि उसने सोचा कि फसल की बहुतायत से होने वाली आमदनी अब उसके शेष जीवन भर के लिए पर्याप्त है (पद 19); आखिरकर परमेश्वर के वचन ही में हमें चीटीं से सीखने और समय तथा अवसर रहते संचय करने की शिक्षा मिलती है (नीतिवचन 6:6-8)।

   तो फिर वह व्यक्ति मूर्ख क्यों कहलाया? इसलिए क्योंकि उसकी योजनाओं और कलपनाओं में परमेश्वर का कोई स्थान नहीं था। वह इसलिए मूर्ख था क्योंकि उसने यह ध्यान नहीं किया था कि उसका जीवन परमेश्वर के हाथों में है। वह मूर्ख इसलिए था क्योंकि उसने यहाँ पृथ्वी के अपने कुछ समय के जीवन के लिए तो योजनाएं बनाईं लेकिन उस अनन्त काल के जीवन और स्थान के लिए कोई योजना नहीं बनाई जहाँ अन्ततः उसे भी अन्य सभी के समान ही जाना ही होगा। वह मूर्ख इसलिए था क्योंकि यहाँ कुछ समय के जीवन के लिए उसने वह नश्वर धन तो संचय करना चाहा जिसे वह अपने साथ कभी नहीं ले जा पाएगा, लेकिन अपने लिए स्वर्ग में कभी नाश ना हो सकने वाले धन को एकत्रित करने की कोई योजना नहीं बनाई, कोई प्रयास नहीं किया (मत्ती 6:20)।

   आज आप की क्या स्थिति है? आपका मन और धन कहाँ है? आपकी योजनाओं में परमेश्वर का क्या स्थान है? क्या आप अपने अनन्त के लिए तैयार हैं? यदि नहीं तो प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा माँग कर और उसे अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करने के द्वारा अभी तैयार हो जाईए, नहीं तो उस अवश्यंभावी समय के आ जाने पर आप भी मूर्ख ही कहलाएंगे। - सी० पी० हिया


वह कदापि मूर्ख नहीं है जो उसे दे कर जो वह रख नहीं सकता वह पा लेता है जो वह कभी फिर खो नहीं सकता। - जिम ईलियट

मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं। - भजन 14:1

बाइबल पाठ: लूका 12:13-21
Luke 12:13 फिर भीड़ में से एक ने उस से कहा, हे गुरू, मेरे भाई से कह, कि पिता की संपत्ति मुझे बांट दे। 
Luke 12:14 उसने उस से कहा; हे मनुष्य, किस ने मुझे तुम्हारा न्यायी या बांटने वाला नियुक्त किया है? 
Luke 12:15 और उसने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। 
Luke 12:16 उसने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। 
Luke 12:17 तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्या करूं, क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं। 
Luke 12:18 और उसने कहा; मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उन से बड़ी बनाऊंगा; 
Luke 12:19 और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह। 
Luke 12:20 परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? 
Luke 12:21 ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 8-10


शनिवार, 15 मार्च 2014

वचन


   इंटरनेट पर बाइबल संबंधी जानकारी और सामग्री की एक साईट, बाइबलगेटवे ने अपनी साईट पर प्रतिमाह आने वाले 80 लाख दर्शकों की प्रवृतियों का विश्लेषण किया और पाया कि परमेश्वर के वचन बाइबल का सबसे अधिक खोजा जाने वाला पद है यूहन्ना 3:16 और मुझे से इससे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि यह पद बताता है कि परमेश्वर ने सारे जगत से इतना प्रेम किया है कि जगत के सभी लोगों को उनके पापों से बचाने तथा उन्हें अनन्त जीवन प्रदान करने के लिए अपने इकलौते पुत्र को दे दिया। पदों की खोज की सूचि में दसवें स्थान पर है प्रभु यीशु का अपने स्वर्गारोहण के समय चेलों को दिया गया उत्तरदायित्व के वे सारे संसार में जाकर चेले बनाएं (मत्ती 28:19)। प्रथम दस स्थानों की इसी सूचि में पाए जाने वाले अन्य पद हैं यर्मियाह 29:11, रोमियों 8:28 जो परमेश्वर द्वारा अपने लोगों के लिए बनाई गई भली योजनाओं के बारे में हैं।

   पवित्रशास्त्र बाइबल अनेक अद्भुत सत्यों से भरा पड़ा है और उन्हें खोजते रहना तथा दूसरों के साथ उन्हें बाँटना हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है। बाइबल का सबसे लंबा अध्याय है भजन 119 जो पूरा का पूरा परमेश्वर के वचन के बारे में है। इस अध्याय में भजनकार ने परमेश्वर के वचन के बारे में अपने विचार और उसे खोजते रहने तथा परमेश्वर से सीखते रहने की अपनी इच्छा को बताया है। एक स्थान पर भजनकार कहता है, "अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है" (भजन 119:97)। आज का बाइबल पाठ कुछ उन बातों को बताता है जिनके कारण भजनकार परमेश्वर के वचन से ऐसा प्रेम रखता है: परमेश्वर के वचन से उसे बुद्धि एवं समझ मिलती है, उसके पांव बुरे रास्ते पर चल निकलने से रोके जाते हैं और वह वचन उसके लिए मधुर है, इसी लिए यह वचन सारे दिन उसके मनन का कारण है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ते रहिए, उसके लिए प्रतिदिन समय निकालते रहिए। जितना अधिक हम बाइबल को पढ़ेंगे, उतना ही अधिक हमारा प्रेम उस वचन के प्रति तथा उसके मूल लेखक अर्थात परमेश्वर के लिए बढ़ता रहेगा। - ऐनी सेटास


आप बाइबल के साथ जितना अधिक समय बिताएंगे, परमेश्वर के प्रति आपका प्रेम उतना अधिक बढ़ता जाएगा।

क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कलपनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानी की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा। - यर्मियाह 29:11

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 4-7


शुक्रवार, 14 मार्च 2014

थामने वाला


   जीवन जोखिमों से भरा है। कभी हम सफलता की ऊँची उड़ान भर रहे होते हैं, और कभी अनायास ही असफलता की डरावनी सच्चाई और घोर निराशा की गहराईयों में पड़े विचार कर रहे होते हैं कि क्या आशा रख पाने का कोई कारण है भी?

   हाल ही में एक अन्त्येष्टि के समय एक पास्टर ने सरकस में ऊँचाईयों पर लटक कर कलाबाज़ीयों के करतब दिखाने वाले एक कलाकार की कहानी सुनाई - यद्यपि वह कलाकार उस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण और नायक समझा जाता था, लेकिन स्वयं उसके अनुसार असली नायक तो उसका साथी था जो दूसरे डंडे से लटक कर उसे थामता था और उसके सुरक्षित नीचे उतर आने को सुनिश्चित करता था। सारे करतबों के सफल होने और उस कलाकार के सुरक्षित रह पाने की कुंजी थी विश्वास। उस ऊँचाई पर करतब करते हुए एक से दूसरे डंडे पर जाने के लिए जब वह लपकता था तो उसे पूरा विश्वास रखना होता था कि उसका साथी उसे थामने के लिए तैयार है और सही स्थान पर उसे मिलेगा, उसे थाम लेगा। ऐसे ही मृत्यु के समय में भी हमें विश्वास रखना है कि परमेश्वर भी थामने वाले के समान सही समय और स्थान पर हम मसीही विश्वासियों को थामने के लिए तैयार मिलेगा। अपनी जीवन यात्रा की कलाबाज़ियाँ पूरी कर लेने के पश्चात संसार से उस पार उतर जाने के समय हम मसीही विश्वासी निश्चिंत होकर विश्वास रख सकते हैं कि दूसरी ओर परमेश्वर हमें थाम कर अनन्त काल के लिए अपने साथ स्वर्ग में स्थान देने के लिए तैयार खड़ा है।

   प्रभु यीशु ने अपने पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले अपने चेलों को आशवासन दिया कि वह उनके लिए स्थान तैयार करने जा रहा है और फिर आकर उन्हें वहाँ ले जाएगा, इसलिए वे घबराएं नहीं, विश्वास बनाए रखें (यूहन्ना 14:1-3)। इसमें कोई शक नहीं है कि जीवन जोखिमों से भरा है, लेकिन यदि आपने मसीह यीशु पर विश्वास किया है और उसे अपना उद्धारकर्ता माना है तो निश्चिंत रहें - वह इस जीवन में आपके साथ बना रहेगा, आपको सुरक्षा देता रहेगा, और पृथ्वी के इस जीवन के बाद आपका थामने वाला होकर आपको अपने साथ अनन्त स्वर्गीय जीवन में सुरक्षित उतार लाएगा। - जो स्टोवैल


हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता की बाहें अपने बच्चों को थामे रहने के लिए, इस जीवन तथा उस जीवन दोनों में ही, सदा तैयार और उपलब्ध रहती हैं।

यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा। - यूहन्ना 12:26

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-6
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल: 
1 शमूएल 1-3

गुरुवार, 13 मार्च 2014

धन्यवादी


   हमारी अपेक्षाओं के अनुसार यदि कोई जन आत्मिक जीवन में उन्नति नहीं कर रहा है तो उसके प्रति आलोचनात्मक हो जाना और उनमें ऐसे क्षेत्र देखना जिनमें उन्हें सुधार की आवश्यकता है, कोई कठिन बात नहीं होती; लेकिन साथ ही हमें वह भी देखना चाहिए कि उनमें क्या सही और बेहतर हो गया है। प्रेरित पौलुस को अकसर विभिन्न मसीही विश्वासी मण्डलियों को सुधारना होता था, लेकिन इस सुधारने के साथ ही जो बातें उन मण्डलियों में भली थीं, उनके लिए वह उन्हें प्रोत्साहन भी देता था और साथ ही परमेश्वर के प्रति उनके लिए धन्यवादी भी होता था।

   उदाहरण के लिए कुलुस्से की मसीही विश्वासी मण्डली को लिखी पौलुस की पत्री को देखिए। पत्री के आरंभ में ही वह कहता है कि प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार ने उनमें जड़ पकड़ ली थी और अब उन विश्वासियों के जीवन में फलवन्त हो रहा था (कुलुस्सियों 1:6)। पौलुस ने उनकी इस आत्मिक उन्नति के लिए परमेश्वर का धन्यवाद किया कि वे प्रभु यीशु को जानने पाए थे और अब झूठे शिक्षकों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे (कुलुस्सियों 2:6-8)। पौलुस ने परमेश्वर का धन्यवाद किया कुलुस्से के विश्वासी अन्य सभी मसीह विश्वासियों के प्रति गहरा और स्थिर प्रेम भी रखते थे। पौलुस का उनके लिए धन्यवादी होने का एक और कारण था कि उनका यह विश्वास और प्रेम उनकी उस वास्तविक और निश्चित आशा से जन्मा था कि संसार के जीवन से आगे भी उनके लिए कुछ अति उत्तम रखा हुआ है (कुलुस्सियों 1:5)।

   हो सकता है कि आज आपके सामने ऐसे अवसर आएं जिनमें आप अपने साथी मसीही विश्वासियों के जीवनों पर ध्यान कर सकें - ऐसे में आप आलोचनात्मक होंगे या उनकी आत्मिक बढ़ोतरी के लिए परमेश्वर के धन्यवादी? समय निकाल कर प्रभु परमेश्वर के प्रति धन्यवादी बनें कि मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार ने उनके जीवनों में जड़ पकड़ी है और फलवन्त भी हो रहा है। - मार्विन विलियम्स


सुधारने के लिए आलोचना कुछ सहायता कर सकती है, परन्तु प्रोत्साहन बहुत अधिक प्रभावी होता है।

हे भाइयो, तुम्हारे विषय में हमें हर समय परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए, और यह उचित भी है इसलिये कि तुम्हारा विश्वास बहुत बढ़ता जाता है, और तुम सब का प्रेम आपस में बहुत ही होता जाता है। - 2 थिस्सलुनीकियों 1:3 

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:1-14
Colossians 1:1 पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से। 
Colossians 1:2 मसीह में उन पवित्र और विश्वासी भाइयों के नाम जो कुलुस्‍से में रहते हैं। हमारे पिता परमेश्वर की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति प्राप्त होती रहे। 
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया। 
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ। 
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4


बुधवार, 12 मार्च 2014

महानतम


   खेल-कूद में सबसे महान क्या है? क्या वह बड़ी प्रतियोगिताएं है; या स्थापित होने वाले कीर्तिमान अथवा मिलने वाला यश? पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के बास्केट्बॉल कोर्ट में लगी एक पटिया पर एक भिन्न दृष्टिकोण वाला वाक्य लिखा है: "खेल जीतना महान है। खेल को सही खेलना उससे भी महान है। किंतु खेल से प्रेम करना सबसे महान है।" यह हमें स्मरण कराता है कि खेल स्पर्धा नहीं वरन वे क्रीड़ाएं हैं जिन्हें खेल कर हम बालकपन से आनन्दित होते रहे हैं।

   एक धार्मिक अगुवे ने एक बार प्रभु यीशु से परमेश्वर के वचन के बारे में उसकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से महानता के बारे में पूछा: "हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?" (मत्ती 22:36)। प्रभु यीशु ने अपने उत्तर में उसे प्रेम के विषय में चुनौति देते हुए कहा: "उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती 22:37-39)।

   मसीह यीशु में हमारा विश्वास हमें चाहे और कुछ भी करने के लिए प्रेरित करे, लेकिन इससे बढ़कर और कुछ नहीं कि हम अपने प्रेम को प्रदर्शित करें - क्योंकि प्रेम ही हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता के हृदय का प्रगटिकरण है। परमेश्वर का वचन बाइबल कहती है, "जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है" (1 यूहन्ना 4:8)। इससे कम महत्व की बातों के द्वारा मार्ग से भ्रमित हो जाना सरल है, इसलिए हमारा पूरा ध्यान उस महानतम बात पर लगा रहना चाहिए - प्रभु परमेश्वर से प्रेम। जब हम परमेश्वर से प्रेम रखेंगे तो परमेश्वर की सृष्टि, अर्थात एक दूसरे से भी प्रेम रखेंगे। इससे बढ़कर और कुछ भी नहीं है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम का प्रमाण है परमेश्वर की आज्ञाओं के लिए हमारी आज्ञाकारिता।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: मत्ती 22:34-40
Matthew 22:34 जब फरीसियों ने सुना, कि उसने सदूकियों का मुंह बन्‍द कर दिया; तो वे इकट्ठे हुए। 
Matthew 22:35 और उन में से एक व्यवस्थापक ने परखने के लिये, उस से पूछा। 
Matthew 22:36 हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है? 
Matthew 22:37 उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। 
Matthew 22:38 बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। 
Matthew 22:39 और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Matthew 22:40 ये ही दो आज्ञाएं सारी व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं का आधार है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 19-21