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सोमवार, 24 मार्च 2014

सदा साथ


   बहुत साल पहले की बात है, जब मैं कॉलेज में छात्र था; मेरी मित्रता एक ऐसे व्यक्ति के साथ हुई जिसने बहुत भारी नुकसान सहा था - उसके बेटे की मृत्यु हो गई और उसकी पत्नि इस दुख को ना झेल पाने के कारण उसे छोड़कर चली गई।

   एक दिन मैं अपने इस मित्र के साथ सड़क पर जा रहा था, तो मैंने देखा के हमारे आगे आगे अस्तव्यस्त हाल में एक महिला अपने छोटे और मैले लड़के को लिए चल रही थी। वह महिला उस लड़के से बहुत नाराज़ लग रही थी और उसका हाथ पकड़े हुए बड़ी तेज़ी से चल रही थी जिससे उस बच्चे को उसके साथ कदम मिला कर चलना कठिन हो रहा था। हम एक व्यस्त चौराहे पर पहुँचे जहाँ भीड़ और गाड़ियाँ देखकर वह बच्चा ठिठक कर खड़ा हो गया तथा उस महिला के हाथ से उसका हाथ छूट गया। उस महिला ने खिसिया कर उसकी ओर पीछे मुड़कर देखा, उसे गाली दी और आगे बढ़ गई। वह बच्चा घबरा कर वहीं सड़क के किनारे बैठ गया और ज़ोर से रो पड़ा। यह सब देखकर मेरा मित्र बिना एक क्षण भी हिचकिचाए, तुरंत उस बच्चे के पास बैठ गया, उसे अपनी बाहों में भरा और अपने से चिपका के उसे सान्तवना देने लगा। वह महिला फिर रुकी, फिर उसने उस बच्चे की ओर क्रोध से देखा और फिर उसे गालियाँ देने लगी। मेरे मित्र ने एक ठंडी सांस भरी और उस महिला को संबोधित करते हुए कहा, "यदि आपको इसकी आवश्यकता नहीं है तो इसे मुझे दे दीजिए, मैं इसकी देखभाल कर लूंगा।"

   यही बात हमारा परमेश्वर पिता अपने बड़े प्रेम और अनुग्रह में होकर हम पाप की गन्दगी में पड़े, संसार में तुच्छ समझे जाने वाले, और अन्य सभी लोगों के साथ करता है। परमेश्वर ने भी अपने पुत्र प्रभु यीशु की मृत्यु का दुख सहा है, वह भी सभी मनुष्यों से बहुत प्रेम करता है, संसार में किसी को नाश होते हुए नहीं देखना चाहता, इसलिए वह हमारे पापों और दुखों को लेकर हमें अपनी शान्ति और अपना पवित्रता का जीवन देना चाहता है, हमें अपने पास प्रेम से रखना चाहता है। चाहे हमारे परिवार जन या मित्र हमारा तिरिस्कार कर दें, परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता, सदा हमारे साथ बना रहता है, हमें अपनी देखभाल में बनाए रखता है; बस आवश्यकता है पापों से पश्चाताप कर के विश्वास के साथ उसका हाथ थाम लेने की। जिसने भी पश्चाताप और विश्वास के साथ अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया परमेश्वर सदा उसके साथ रहता है, उसे सदा संभालता रहता है। - डेविड रोपर


यदि परमेश्वर गौरैयों की चिन्ता करता है तो हमारी भी अवश्य करता है।

क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता। वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। - लूका 12:6-7

बाइबल पाठ: भजन 27
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? 
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।। 
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा। 
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे। 
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा। 
Psalms 27:9 अपना मुख मुझ से न छिपा। अपने दास को क्रोध कर के न हटा, तू मेरा सहायक बना है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर मुझे त्याग न दे, और मुझे छोड़ न दे! 
Psalms 27:10 मेरे माता पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है, परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।
Psalms 27:11 हे यहोवा, अपने मार्ग में मेरी अगुवाई कर, और मेरे द्रोहियों के कारण मुझ को चौरस रास्ते पर ले चल। 
Psalms 27:12 मुझ को मेरे सताने वालों की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे साक्षी जो उपद्रव करने की धुन में हैं मेरे विरुद्ध उठे हैं।
Psalms 27:13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की पृथ्वी पर यहोवा की भलाई को देखूंगा, तो मैं मूर्च्छित हो जाता। 
Psalms 27:14 यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह!

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 5-8


रविवार, 23 मार्च 2014

घोषणा और महिमा


   वह एयरपोर्ट पर करी जानी वाली सामान जाँच की एक सामान्य प्रक्रीया ही थी, उस सूटकेस में रखे सामान को देखने से उसमें कुछ विशेष प्रतीत नहीं हो रहा था। लेकिन जब कस्टम विभाग के अधिकारी ने कपड़ों को उठाकर देखा तो प्रसिद्ध चित्रकार पिकासो के बनाए 14 रेखा-चित्रों की मूल प्रतिलिपियों की स्केचबुक स्वेटरों के बीच में छिपा कर रखी गई मिली, जिनकी कुल कीमत लगभग 10.5 लाख अमेरीकी डॉलर आँकी गई, परन्तु जिस व्यक्ति का वह सामान था उसने कहा था कि उसके पास घोषित करने के लिए कुछ भी मूल्यवान नहीं है। स्पष्ट है कि वह व्यक्ति बहुमूल्य कलाकृति की तस्करी कर रहा था और अपराधी था, और उसके साथ फिर वैसा ही व्यवहार भी हुआ।

   हम मसीही विश्वासियों के पास पिकासो के चित्रों से भी कहीं अधिक मूल्यवान कुछ है, जिसे घोषित करने की ना केवल हमें आज्ञा मिली है, वरन ऐसा करना हमारी ज़िम्मेदारी भी है - वह है हमारा मसीह यीशु में विश्वास और उस विश्वास द्वारा हमें मिली पापों की क्षमा तथा उद्धार। हमारे प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है कि हम इस विश्वास, पापों की क्षमा और उद्धार के बारे में सारे संसार में जाकर सभी लोगों को बताएं (मत्ती 28:18-20; प्रेरितों 1:8), लेकिन फिर भी सारे संसार के लिए अति आवश्यक और उपयोगी इस बहुमूल्य बात को हम में से बहुतेरे अपने अन्दर ही छिपाए रहते हैं, बजाए इसके कि उसे लोगों के सामने घोषित करें।

   प्रभु यीशु ने हमें उस नगर के समान बताया है जो पहाड़ पर बसा है इसलिए छिप नहीं सकता, और हमें ’जगत की ज्योति’ कहा है तथा साथ ही कहा है कि इस ज्योति के उजियाले से सारा घर रौशन होना चाहिए। यही हमारे मसीही विश्वास का प्रमुख उद्देश्य है - वह ज्योति जो हमें परमेश्वर से मिली है, उसकी रौशनी, उसकी प्रतिभा सभी लोगों तक पहुँचाएं जिससे संसार के अन्य लोग भी जो पाप के अन्धकार में पड़े हैं वे उजियाले में आने का मार्ग और प्रेरणा पा सकें। प्रभु ने कहा है कि हमारी यह ज्योति मध्यम या हलकी नहीं वरन चमकती हुई होनी चाहिए (मत्ती 5:14-16) और हमें सब मनुष्यों के सामने अपने परमेश्वर पिता की महिमा का कारण होना चाहिए।

   यदि परमेश्वर द्वारा हमें सेंत-मेंत दिए गए इस अद्भुत और अनमोल उपहार की, जिसे वह इसी प्रकार सेंत-मेंत औरों को भी देना चाहता है, हम संसार और अपने आस-पास के लोगों के सामने घोषणा नहीं करते तो हम भी प्रभु यीशु की अनाज्ञाकारिता और घोषित करी जाने वाली बहुमूल्य वस्तु को छिपा कर रखने के दोषी ठहरते हैं, और संबंधित दण्ड के भागी भी होंगे। अपने मन के "सूटकेस" को खोलिए, अन्दर छिपे उस अनमोल खज़ाने को बाहर निकालिए और उसकी घोषणा लोगों के सामने कीजिए, और अपने प्रभु यीशु और परमेश्वर पिता की महिमा के कारण बन जाईए। - जेनिफर बेनसन शुल्ट


बुद्धिमता से चुने गए शब्द परमेश्वर के लिए मनों को खोल सकते हैं।

मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। - यूहन्ना 12:46

बाइबल पाठ: मत्ती 5:13-16
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-4


शनिवार, 22 मार्च 2014

लालसा


   किसी ने मुझ से पूछा, "आपकी सबसे बड़ी समस्या क्या है?" मैंने उत्तर दिया, "वह जो रोज़ सुबह मुझे दर्पण में दिखाई देता है!" मेरा तात्पर्य स्वयं अपने आप से था और मेरा इशारा मेरे अन्दर के "पहले मैं" वाली लालसाओं की ओर था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब 4:1 में आया है, "तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?" यहाँ याकूब ’सुख-विलासों’ द्वारा अपने पाठकों का ध्यान उन स्वार्थी लालसाओं की ओर खेंचना चाह रहा है जिनकी पूर्ति में ही हम अपने आनन्द को ढूँढते हैं तथा उन के लिए उचित-अनुचित सब करने को तैयार हो जाते हैं। याकूब हमें सचेत करता है कि इन लालसाओं के कारण ही हम में परस्पर लड़ाई झगड़े पनपते हैं (पद 1, 2) और ये हमें परमेश्वर से भी विमुख कर देती हैं (पद 4)। इसीलिए इस से पहले याकूब ने लिखा: "परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है" (याकूब 1:14)।

   इस कारण यह अति आवश्यक है कि हम यह ’पहले मैं’ वाला रवैया छोड़ दें। याकूब ऐसा कर पाने का उपाय भी बताता है: सर्वप्रथम, ’परमेश्वर के आधीन हो जाओ’ (पद 7) - परमेश्वर परमेश्वर ही है और हमारे जीवनों में उसी की इच्छा सदा सर्वोपरि रहनी चाहिए; अर्थात, हमें अपने प्राथमिकताओं के स्तर सही निर्धारित करने हैं और निभाने हैं। दूसरा, ’परमेश्वर के निकट आ जाओ’ (पद 8) - परमेश्वर आपके मन के अन्दर तक की प्रत्येक वास्तविकता आप से पहले और आप से बेहतर जानता है, इसलिए उस से छुपाने या संकोच करने के बजाए अपनी उन लालसाओं, कमज़ोरियों, पाप में फंसाने वाली इच्छाओं एवं बातों को लेकर, उन से शुद्धि पाने के लिए, परमेश्वर के निकट आ जाओ (1 यूहन्ना 1:9)। तीसरा, ’प्रभु के सामने दीन बनो’ (पद 10), अर्थात अपने पापों और बुराईयों के लिए पश्चातापी बनो, उनके लिए बहाने बनाने वाले या उन्हें न्यायसंगत ठहराने के लिए तर्क देने वाले ना बनो; जब उसके सामने हम दीन बनेंगे तो परमेश्वर स्वयं ही हमें शिरोमणि भी बनाएगा।

   ध्यान रखें, दुचित्ते हो कर बुराई और भलाई दोनों ही की ओर आकर्षित ना होते रहें। अपने मनों को परमेश्वर और उसके मार्ग पर लगाएं। ’पहले मैं’ या ’पहले मेरा’ वाली भावना सही मार्ग नहीं है, वरन इसके विपरीत हमारी भावना सदा ही ’पहले परमेश्वर’ एवं ’पहले परमेश्वर की इच्छा’ होना चाहिए। सही लालसा ही जीवन के लिए सही मार्ग और सही भविष्य निर्धारित करेगी। - एल्बर्ट ली


जो अपनी प्रशंसा तथा अपने स्वार्थ को भुला कर किया जाता है वो स्वतः ही प्रशंसनीय एवं विस्मरणीय हो जाता है।

कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। - इफिसियों 4:22

बाइबल पाठ: याकूब 4:1-10
James 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? 
James 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं। 
James 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। 
James 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है। 
James 4:5 क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? 
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 29-31


शुक्रवार, 21 मार्च 2014

जीवनी के शब्द


   मैं अपने कॉलेज के छात्रों को संक्षिप्त जीवनी लिखने के विचार को समझाने के लिए कोई रोचक और उपयुक्त उदाहरण ढूँढ रहा था, और मुझे यह विचार मिला: "एक संक्षिप्त वाक्य में जीवनी लिखो।" जब प्रसिद्ध लेखक और पुलिट्ज़र पुरुस्कार विजेता एर्नेस्ट हेमिंगवे से यह कहा गया तो उन्होंने यह मार्मिक वाक्य लिखा: "बिकाऊ हैं: कभी प्रयोग ना हो सकीं छोटे बच्चे की जूतियाँ।" इस वाक्य के पीछे छुपी दुख भरी गाथा की कलपना कर पाना कोई कठिन कार्य नहीं है।

   इस बात पर सोचते हुए मुझे विचारा आया कि क्या परमेश्वर के वचन बाइबल में भी किसी के लिए ऐसे ही संक्षिप्त शब्दों में ’एक वाक्य की जीवनी’ लिखी होगी? जब मैंने खोजना आरंभ किया तो मैं चकित हो गया कि परमेश्वर के लिए उपयोगी और समर्पित कई लोगों के लिए बाइबल में ऐसी संक्षिप्त जीवनी पहले से ही लिखी हुई है। उदाहरणस्वरूप दाऊद के लिए परमेश्वर ने कहा: "मेरे मन के अनुसार व्यक्ति" (1 शमूएल 13:14; प्रेरितों 13:22)। प्रेरित पौलुस ने अपने लिए लिखा, "परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित" (इफिसियों 1:1) तथा तिमुथियुस के लिए लिखा, "विश्वास में मेरा सच्चा पुत्र" (1 तिमुथियुस 1:1)। प्रभु यीशु की माता मरियम के लिए लिखा गया, "प्रभु की दासी" (लूका 2:38) और प्रभु यीशु के लिए लिखा गया है "देहधारी हुआ और हमारे बीच में निवास किया" (यूहन्ना 1:14)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आए इन उदाहरणों के संदर्भ में हमें आज अपने बारे यह विचार गंभीरता से करना चाहिए कि यदि हमारी जीवनी भी ऐसे ही एक संक्षिप्त वाक्य में लिखी जाए, तो वह क्या होगी? वह जीवनी वाक्य स्कारात्मक होगा या नकारात्मक? क्या लेखक कहेगा, "उस व्यक्ति से प्रेम करना सरल नहीं था" या कहेगा "अपने प्रभु के लिए चमकने वाली ज्योति"? यदि स्वयं आप से ही अपनी संक्षिप्त एक वाक्य की जीवनी लिखने को कहा जाए तो आप अपने जीवनी के शब्द क्या लिखेंगे? - डेव ब्रैनन


मेरी जीवनी: "पहले खोया हुआ था, अब खोजा हुआ तथा अनन्तकाल के लिए प्रभु यीशु का धन्यवादी हूँ।"

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-28


गुरुवार, 20 मार्च 2014

पुनर्मिलन


   लड़कपन में मेरे पास एक पालतु कुत्ता था जिसे मैं बहुत चाहता था। एक दिन अचानक ही वह ग़ायब हो गया। मुझे पता नहीं कि कोई उसे चुराकर ले गया, या वह खुद ही कहीं भाग गया, लेकिन उसके जाने से मैं बहुत टूट गया। मैंने उसे सब जगह ढूंढा, मुझे अच्छे से याद है कि मैं एक ऊँचे पेड़ पर चढ़कर अपने आस-पास के स्थानों को देखा करता था कि वह मुझे कहीं नज़र आ जाए। मैं अपने उस चहेते कुत्ते को वापस पाना चाहता था, और बहुत समय तक उसके लौट आने या उसके मिल जाने की खबर की प्रतीक्षा में रहा, लेकिन मैं अपने उस प्रीय कुत्ते से फिर कभी मिल नहीं पाया।

   मेरे इस विछोह के दुख से भी कहीं अधिक बढ़कर होता है वह दुख जब हमारा कोई प्रीय जन इस संसार से विदा हो जाता है। संसार के लोगों के पास उस बिछुड़े हुए प्रीय जन से फिर कभी मिल सकने की कोई आशा नहीं है, लेकिन हम मसीही विश्वासी जानते हैं कि हमारे जो प्रीय जन इस जीवन में प्रभु यीशु के विश्वासी रहे हैं, उनसे हमारा बिछुड़ना अस्थायी है, हम उनसे फिर मिलेंगे और उसके बाद फिर कभी जुदा नहीं होंगे; उन से हमारा पुनर्मिलन अनन्तकाल का होगा।

   प्रेरित पौलुस ने थिस्सलुनीकिया के विश्वासियों को आश्वस्त किया: "क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे" (1 थिस्सलुनीकियों 4:16-17)। इन पदों में लिखे जो शब्द बिछुड़ने से दुखी मनों को सान्तवना और शांति देते हैं वे हैं ’साथ’ और ’सदा’; ये हमें आश्वस्त करते हैं कि मसीह यीशु के अनुयायियों को स्थायी विछोह कभी सहना नहीं पड़ेगा। हम मसीही विश्वासियों के लिए मृत्यु का अर्थ ’अलविदा’ नहीं, ’फिर मिलेंगे’ है। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के विश्वासी कभी अन्तिम अलविदा नहीं कहते।

और मैं[यीशु] उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। - यूहन्ना 10:28

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18
1 Thessalonians 4:13 हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाईं शोक करो जिन्हें आशा नहीं। 
1 Thessalonians 4:14 क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। 
1 Thessalonians 4:15 क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे। 
1 Thessalonians 4:16 क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे। 
1 Thessalonians 4:17 तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। 
1 Thessalonians 4:18 सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 21-24


बुधवार, 19 मार्च 2014

प्रकृति और भजन


   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन संहिता के लेखकों को एक सुविधा थी - वे प्रकृति के बहुत समीप रहते थे इसलिए परमेश्वर की महिमा और प्रशंसा के लिए उन्हें उभारने को उनके सामने बहुत सी बातें रहती थीं। दाऊद ने अपना जीवन एक चरवाहे के रूप में आरंभ किया, फिर राजा शाऊल के आतंक से बचते रहने के लिए वह स्थान स्थान पर इस्त्राएल के विभिन्न इलाकों में छुपता फिरा। इसलिए यह कोई अनोखी बात नहीं है कि दाऊद के अनेक भजनों में प्रकृति के प्रति बहुत प्रेम और आदर दिखाई देता है। उसके भजनों में संसार अपने वास्तविक स्वरूप में नज़र आता है - संसार और प्रकृति के भिन्न भाग सब एक साथ मिलकर एक दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हुए और सब के सब एक इकाई के समान परमेश्वर के हाथों में, जो उनकी देखभाल करता है, स्थिर बने हुए।

   प्रकृति हमारी इन्द्रियों को उस अदृश्य और अद्भुत परमेश्वर की उपस्थिति का एहसास दिलाती है। वो परमेश्वर जिसने इतने विलक्षण और अद्भुत जीव जन्तु बनाकर स्थान स्थान पर रखे, जो स्लेटी पहाड़ों और भूरी धरती को हरे रंग के वृक्ष-वनसपति और चमकते तथा चटकीले रंग के फूलों से रंगीन कर देता है और फिर हर मौसम में उस रंग की छटा को बदलता रहता है - हम ऐसे परमेश्वर का आदर और आराधना कैसे ना करें? इन सब बातों से आनन्द विभोर हो कर भजनकार कहता है: "हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो; उत्साहपूर्वक जयजयकार करो, और भजन गाओ" (भजन 98:4) और प्रकृति को भी संबोधित करता है: "नदियां तालियां बजाएं; पहाड़ मिलकर जयजयकार करें" (भजन 98:8)।

   आज का हमारा संसार परमेश्वर की महिमा और कला को उतनी भली भांति नहीं देख पाता, क्योंकि हम परमेश्वर की कलाकृति अर्थात प्रकृति से ना केवल दूर हो गए हैं, वरन प्राकृतिक सुन्दरता को नष्ट करके हमने उसके स्वरूप को बिगाड़ दिया है, लेकिन भजन संहिता में हम परमेश्वर की कला और महिमा का उत्साह वर्धक और प्रेर्णापूर्ण वर्णन पाते हैं जो हमें उसकी आराधना के लिए उभारता है। यदि परमेश्वर की आराधना के लिए आज आप अपने अन्दर भाव और शब्दों की कमी अनुभव करते हैं तो भजन संहिता में आईए - भाव और शब्द आपके लिए तैयार रखे हैं, आपको केवल उन में अपने आप को प्रवेश देना है और आराधना आपके अन्दर से निकल पड़ेगी। भजनकारों की इन कृतियों का प्रयोग कीजिए, इन भजनों के द्वारा परमेश्वर को आपके अन्दर के समीकरण सही बैठा लेने दीजिए। - फिलिप यैन्सी


आराधना में सृष्टि आनन्दपूर्वक मान लेती है कि परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है।

हे आकाश, ऊंचे स्वर से गा, क्योंकि यहोवा ने यह काम किया है; हे पृथ्वी के गहिरे स्थानों, जयजयकार करो; हे पहाड़ों, हे वन, हे वन के सब वृक्षों, गला खोल कर ऊंचे स्वर से गाओ! क्योंकि यहोवा ने याकूब को छुड़ा लिया है और इस्राएल में महिमावान होगा। - यशायाह 44:23

बाइबल पाठ: भजन 98
Psalms 98:1 यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उसने आश्चर्यकर्म किए है! उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है! 
Psalms 98:2 यहोवा ने अपना किया हुआ उद्धार प्रकाशित किया, उसने अन्यजातियों की दृष्टि में अपना धर्म प्रगट किया है। 
Psalms 98:3 उसने इस्राएल के घराने पर की अपनी करूणा और सच्चाई की सुधि ली, और पृथ्वी के सब दूर दूर देशों ने हमारे परमेश्वर का किया हुआ उद्धार देखा है।
Psalms 98:4 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो; उत्साहपूर्वक जयजयकार करो, और भजन गाओ! 
Psalms 98:5 वीणा बजा कर यहोवा का भजन गाओ, वीणा बजा कर भजन का स्वर सुनाओ। 
Psalms 98:6 तुरहियां और नरसिंगे फूंक फूंककर यहोवा राजा का जयजयकार करो।
Psalms 98:7 समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें; जगत और उसके निवासी महाशब्द करें! 
Psalms 98:8 नदियां तालियां बजाएं; पहाड़ मिलकर जयजयकार करें। 
Psalms 98:9 यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आने वाला है। वह धर्म से जगत का, और सीधाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 17-20


मंगलवार, 18 मार्च 2014

सफलता की फिसलन


   रसायनशास्त्री और लेखक डॉ० ओ० ए० बत्तिस्ता द्वारा लिखित 19,000 से अधिक सूक्तियों में से एक यह बुद्धिमानी भरा कथन है: "जैसे ही आप धन, प्रशंसा और ख्याति में रुचि रखना बन्द कर देते हैं, समझ लीजिए कि आप सफलता की चोटी पर पहुँच गए हैं"। लेकिन दुर्भाग्यवश जब कभी हमारी किसी उपलब्धि की प्रशंसा होती है या हम उसके लिए पुरुस्कृत किए जाते हैं तो इस कथन का बिलकुल विपरीत घटित होने लगता है - एक नम्र हृदय शीघ्र ही अहंकार से फूला मन बन जाता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, इस्त्राएल का प्रथम राजा शाऊल भी इसी रोग का शिकार हुआ था। अपने आरंभ के समय में उसने अपने आप को इस्त्राएल के सबसे छोटे गोत्र के एक महत्वहीन परिवार के एक सदस्य के रूप में देखा था (1 शमूएल 9:21)। लेकिन कुछ ही वर्षों में परमेश्वर द्वारा मिली सफलताओं के कारण उसका मन इतना फूल गया कि उसने अपने सम्मान में एक स्मारक खड़ा करवा लिया और अपने व्यवहार का अन्तिम निर्णय लेने वाला बन गया (1 शमूएल 15:11-12)। परमेश्वर के नबी शमूएल ने राजा शाऊल द्वारा करी गई परमेश्वर की इस अनाज्ञाकारिता के लिए उसका सामना किया और उसे स्मरण दिलाया कि: "शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया?" (1 शमूएल 15:17)

   जिसे हम सफलता कहते हैं उसकी फिसलन भरी ढलान से फिसल कर विनाश को नीचे चल पड़ने की ओर पहला कदम होता है अभिमान। इस कदम के उठाए जाने का आरंभ तब होता है जब हम परमेश्वर द्वारा हमें दी गई सफलताओं का श्रेय उसे देने के स्थान पर उन्हें अपनी उपलब्धियाँ मान कर वह श्रेय स्वयं लेने लग जाते हैं तथा उसकी आज्ञाओं को अपनी इच्छाओं के अनुसार तोड़ना-मरोड़ना भी आरंभ कर देते हैं।

   सच्ची सफलता तब ही आती है जब हम परमेश्वर की आज्ञाकारिता में दीनता और नम्रता के साथ बने रहते हैं और अपनी नहीं वरन अपने जीवनों और कार्यों द्वारा परमेश्वर की प्रशंसा करते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड।


सच्ची नम्रता हर सफलता का श्रेय परमेश्वर को ही देती है।

इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; - व्यवस्थाविवरण 8:11

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:10-23
1 Samuel 15:10 तब यहोवा का यह वचन शमूएल के पास पहुंचा, 
1 Samuel 15:11 कि मैं शाऊल को राजा बना के पछताता हूं; क्योंकि उसने मेरे पीछे चलना छोड़ दिया, और मेरी आज्ञाओं का पालन नहीं किया। तब शमूएल का क्रोध भड़का; और वह रात भर यहोवा की दोहाई देता रहा।
1 Samuel 15:12 बिहान को जब शमूएल शाऊल से भेंट करने के लिये सवेरे उठा; तब शमूएल को यह बताया गया, कि शाऊल कर्म्मेल को आया था, और अपने लिये एक निशानी खड़ी की, और घूमकर गिलगाल को चला गया है। 
1 Samuel 15:13 तब शमूएल शाऊल के पास गया, और शाऊल ने उस से कहा, तुझे यहोवा की ओर से आशीष मिले; मैं ने यहोवा की आज्ञा पूरी की है। 
1 Samuel 15:14 शमूएल ने कहा, फिर भेड़-बकरियों का यह मिमियाना, और गय-बैलों का यह रंभाना जो मुझे सुनाई देता है, यह क्यों हो रहा है? 
1 Samuel 15:15 शाऊल ने कहा, वे तो अमालेकियों के यहां से आए हैं; अर्थात प्रजा के लोगों ने अच्छी से अच्छी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि करने को छोड़ दिया है; और बाकी सब को तो हम ने सत्यानाश कर दिया है। 
1 Samuel 15:16 तब शमूएल ने शाऊल से कहा, ठहर जा! और जो बात यहोवा ने आज रात को मुझ से कही है वह मैं तुझ को बताता हूं। उसने कहा, कह दे। 
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 14-16