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शुक्रवार, 23 मई 2014

जोखिम


   अपनी जीवनी की पुस्तक, "Stuntman! My Car-Crashing, Plane-Jumping, Bone-Breaking, Death-Defying Hollywood Life" (करतब-बाज़! मेरा कार-टकराने, वायु-यान से कूदने, हड्डियाँ तुड़वाने और मौत का जोखिम उठाने वाला हॉलिवुड का जीवन) में हैल नीडहैम अपने द्वारा हॉलिवुड की फिल्मों में उठाए गए जोखिमों के बारे में लिखता है। उसने मुक्केबाज़ी की है, तेज़ रफ्तार से कार चलाईं हैं, उड़ते हुए वायु-यानों के पंखों पर चला है, घोड़ों से गिरा है और उसे आग भी लगाई गई है! यह सब उसने इसलिए किया कि हॉलिवुड फिल्मों के दर्शकों का मनोरंजन हो सके; इतने करतब दिखाने के कारण उसे हॉलिवुड के सर्वश्रेष्ठ करतब-बाज़ का खिताब भी मिला है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र - प्रेरित पौलुस और उनका साथी बरनबास भी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने जीवन जोखिम में डाले (प्रेरितों 15:26); लेकिन इस जोखिम के लिए उनका उद्देश्य फर्क था। उन्होंने ऐसा प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करने तथा प्रभु यीशु मसीह को महिमा देने के लिए किया। रोमी साम्राज्य में एक सुसमाचार प्रचारक के रुप में पौलुस ने अनेक जोखिम उठाए जिनमें उसके पानी के जहाज़ का टूटना, उसका पीटे जाना, उसे ताड़नाएं दिए जाना और बन्दीगृह में डाले जाना सम्मिलित है (2 कुरिन्थियों 11:22-30)। लेकिन प्रभु यीशु के प्रचार के लिए पौलुस इन सब जोखिमों को उठाने से कभी कतराया नहीं, वह सब दुख उठा कर भी सुसमाचार प्रचार की अपनी सेवकाई में अपने जीवन के अन्त तक लगा रहा।

   आज भी ऐसे अनेक मसीही विश्वासी हैं जो प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार के प्रचार के लिए हर तरह का जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। क्या आप एक मसीही विश्वासी होने के बावजूद ऐसे ही किनारे पर बैठे हुए हैं, सुसमाचार प्रचार में भाग नहीं ले रहे हैं? परमेश्वर ने अपना आत्मा और अपना वचन आपको इसलिए दिया है कि आप सामर्थ पाएं और सुसमाचार प्रचार में लगें (रोमियों 1:16; प्रेरितों 1:8)।

   यदि आप अभी तक सुसमाचार प्रचार से कतराते रहे हैं तो परमेश्वर से माँगें कि वह आपको ऐसा मन और चाह दे कि आप बिना हिचकिचाए या भयभीत हुए सुसमाचार प्रचार में लग सकें। सुसमाचार प्रचार के लिए उठाया गया जोखिम कोई जोखिम नहीं वरन आने वाले भविष्य के लिए एक उत्तम निवेश है जिसके प्रतिफल सर्वोत्तम हैं; उन प्रतिफलों से बढ़कर ना तो इस जीवन में और ना ही आते जीवन कुछ मिल सकता है। - डेनिस फिशर


सुसमाचार प्रचार करने के प्रतिफल उसके लिए उठाए गए जोखिमों से बढ़कर हैं।

क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है। - रोमियों 1:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-30
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 32-34


गुरुवार, 22 मई 2014

आश्वस्त


   मेरी पत्नि गर्भवती थी; हमारा दूसरा बच्चा आने को था, लेकिन गर्भावस्था के समय में वह गंभीर रूप से बीमार हो गई। चिकित्सक उसकी बीमारी के कारण को ढ़ूढ़ने का प्रयास कर रहे थे, और वह कमज़ोर होती जा रही थी; उसकी कमज़ोरी बहुत बढ़ गई और जान पर बन आई थी। इस तरह लाचार हो कर उसे तकलीफ उठाते हुए देखते रहना मेरे लिए एक बेचैन तथा भयावह कर देने वाला अनुभव था। ऐसे भी दिन निकले जिन में लगा कि परमेश्वर हमारी प्रर्थनाएं अनसुनी कर रहा है। एक इतवार उसकी हालात को देखते हुए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने लिए शांति और सांत्वना ढ़ूंढ़ रहा था, और मेरी आँखें यशायाह नबी की पुस्तक के 43 अध्याय के पहले पद पर पड़ीं।

   उस पद में परमेश्वर द्वारा अपनी प्रजा इस्त्राएल को दिए गए आश्वासन के आरंभिक शब्द हैं "मत डर" और वह आश्वासन अन्त होता है परमेश्वर के कथन "तू मेरा ही है" के साथ। तुरंत ही परमेश्वर के आत्मा ने वह आश्वासन मेरे लिए व्यक्तिगत बना दिया। जिस आत्मियता के साथ परमेश्वर ने आगे के पदों में इस्त्राएल को आश्वस्त किया है - जब तू जल से होकर निकले...नदी से निकले...आग से निकले, सब में मैं तेरे साथ हूँ - उसने मुझे भी आश्वस्त किया कि परमेश्वर मेरे साथ लगातार बना हुआ है। उस खण्ड का प्रत्येक वाक्यांश मानो बुलन्द आवाज़ में मुझ से कह रहा था - यह तेरे लिए भी उतना ही सत्य है।

   उस तकलीफ की घड़ी में मैंने और मेरी पत्नि ने जो शांति तथा सांत्वना पाई वह किसी चँगाई या आश्चर्यकर्म की प्रतिज्ञा से नहीं वरन उस आश्वासन से पाई कि हम कभी अकेले नहीं हैं, वरन हर परिस्थिति में हमारा परमेश्वर हमारे साथ है। इसके बाद भी हमें कई भयभीत करने वाली परिस्थितियों से होकर निकलना पड़ा, यहाँ तक कि बच्चे के पैदा होने के तुरंत बाद ऐसा भी लगा कि हम माँ और बच्चे दोनों को ही खो देंगे। लेकिन परमेश्वर हमेशा हमें अपने वचन से आश्वस्त करता रहा और हर परिस्थिति के लिए तैयाएर करता रहा।

   हर मसीही विश्वासी को उसके उद्धारकर्ता परमेश्वर का वचन आश्वस्त करता है कि परमेश्वर सदा ही उनके साथ बना रहता है; वे कभी किसी भी परिस्थिति में या किसी भी बात में अकेले नहीं होते। - रैण्डी किल्गोर


जिसे आप हर उजाले का सत्य जानते तथा मानते हैं उसे कभी किसी अन्धकार में ना भूलें।

तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा; - यशायाह 46:4

बाइबल पाठ: यशायाह 43:1-4
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है। 
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। 
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं। 
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 28-31


बुधवार, 21 मई 2014

आज्ञाकारी


   पैट की वह पहली नौकरी थी; उसे किराने की दुकान पर काम मिला था, और आरंभ से ही उसे रात्रि की पारी मिली थी। शाम को जब दुकान बन्द हो जाती तब रात्रि की पारी वाले कर्मचारी आकर अगले दिन के लिए दुकान के समान को ठीक करके लगाते, बिक चुके सामान के स्थान पर और नया सामान रखते थे। पैट के मालिक का यह निर्देश था कि हमेशा सूप के डिब्बे ऐसे रखे जाएं कि उनके लेबल सामने की ओर हों जिससे वे सरलता से पढ़े जा सकें, लेकिन इसके साथ ही उस के यह भी निर्देश थे कि ऐसा कम से कम डब्बों की एक के बाद एक तीन पंक्तियाँ तक किया जाना था। एक रात को जब पैट अन्य लोगों के साथ सामान लगा रहा था, उसके सह-कर्मचारी अपने मालिक का ठठा करते हुए कहने लगे, "अरे, बस यह ध्यान रखो कि सबसे आगे की पंक्ति के डब्बे सही रखे हैं, पीछे की पंक्तियां कौन देखता है?" युवा पैट के लिए यह एक निर्णय का क्षण था - वह अपने मालिक की बात को माने या अन्य लोगों के समान वह करे जो सरल है और बाकी सब कर रहे हैं?

   हम सब कभी ना कभी ऐसी ही किसी परिस्थिति से होकर निकले हैं, जहाँ हमें भी ऐसा ही कोई निर्णय लेना पड़ा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में लिखा कि हम मसीही विश्वासियों को उस समय भी आज्ञाकारी बने रहना है जब कोई हमें देख भी नहीं रहा होता है: "हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से" (कुलुस्सियों 3:22)।

   हमारा वह करना जो सही है इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि हमारा अधिकारी या मालिक आस-पास है कि नहीं, या कोई हमें देख रहा है कि नहीं। भली, उचित या न्यायसंगत आज्ञाओं के लिए भी हर समय आज्ञाकारी रहना चाहे सरल या सुविधाजनक नहीं भी हो, लेकिन ऐसा करना सही होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल की चेतावनी के प्रति सचेत रहें: "इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है" (याकूब 4:17)। - सिंडी हैस कैसपर


जब कोई ना देख रहा हो ऐसे में हम जो करते हैं वह हमारे चरित्र का नाप है।

जितने दास जूए के नीचे हैं, वे अपने अपने स्‍वामी को बड़े आदर के योग्य जानें, ताकि परमेश्वर के नाम और उपदेश की निन्‍दा न हो। - 1 तिमुथियुस 6:1

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:22-25
Colossians 3:22 हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। 
Colossians 3:23 और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। 
Colossians 3:24 क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। 
Colossians 3:25 क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27


मंगलवार, 20 मई 2014

तैयार


   पिछले अनेक वर्षों में अनेक लोगों ने प्रभु यीशु मसीह के दूसरे आगमन की तिथि की भविष्यवाणियाँ की हैं। कुछ वर्ष पहले भी अमेरिका से रेडियो प्रसारण द्वारा प्रचार करने वाले एक व्यक्ति ने मीडीया की रुचि को बहुत जागृत किया जब उसने यह भविष्यवाणी करी कि प्रभु यीशु 21 मई 2011 को पुनः आएंगे।

   जो कोई परमेश्वर के वचन बाइबल को जानते हैं, वे यह भी जानते हैं कि ऐसी भविष्यवाणी कभी सत्य नहीं हो सकती; और यही हुआ भी, क्योंकि प्रभु यीशु ने स्वयं अपने दूसरे आगमन के लिए कहा है कि: "तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उस घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जावेगा" (लूका 12:40)। लेकिन मैं यह तो मानूँगा कि उस प्रचारक की भविष्यवाणी ने मेरा भी ध्यान आकर्षित किया। अकसर मैं जीवन की व्यस्तता में इतना खो जाता हूँ कि मैं ऐसे जीने लगता हूँ मानो प्रभु यीशु का दूसरा आगमन कोई बहुत दूर भविष्य में होने वाली घटना है। मैं भूल जाता हूँ कि प्रभु यीशु कभी भी पुनः आ सकते हैं। उस प्रचारक की वह भविश्यवाणी गलत तो थी ही, लेकिन उस ने मुझे स्मरण कराया कि मुझे अपने उद्धारकर्ता प्रभु के पुनः आगमन के लिए कैसे तैयार रहना चाहिए, तथा मेरे उस पुनः आगमन के लिए उत्साहित रहने को फिर से जागृत किया, क्योंकि यह किसी भी दिन हो सकता है - आज भी।

   कभी कभी हम सोचते हैं कि प्रभु यीशु के पुनः आगमन के लिए तैयार रहने का अर्थ है कुछ बातों को अपने जीवन में ना होने देना या उन्हें नहीं करना। लेकिन प्रभु यीशु से मिलने के लिए तैयार होने का अर्थ है कि हम निरंतर उसकी समानता में ढ़लते चले जाएं, जिससे कि जब भी वह आए हम उसे भावते हुए रहें (1 यूहन्ना 3:2-3)। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि उसके आगमन के लिए तैयार रहने का तात्पर्य है हमेशा उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करते रहना (लूका 12:47)।

   ज़रा विचार कीजिए, जब कभी भी प्रभु यीशु का दूसरा आगमन वास्तव में हो जाए, तब क्या आप उसके लिए तैयार पाए जाएंगे? - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के लिए तैयार बने रहिए, और आप उसकी महिमा और आज्ञाकारिता का जीवन बिताते रहेंगे।

और वह दास जो अपने स्‍वामी की इच्छा जानता था, और तैयार न रहा और न उस की इच्छा के अनुसार चला बहुत मार खाएगा। - लूका 12:47

बाइबल पाठ: लूका 12:35-40
Luke 12:35 तुम्हारी कमरें बन्‍धी रहें, और तुम्हारे दीये जलते रहें। 
Luke 12:36 और तुम उन मनुष्यों के समान बनो, जो अपने स्‍वामी की बाट देख रहे हों, कि वह ब्याह से कब लौटेगा; कि जब वह आकर द्वार खटखटाए, तुरन्त उसके लिये खोल दें। 
Luke 12:37 धन्य हैं वे दास, जिन्हें स्‍वामी आकर जागते पाए; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वह कमर बान्‍ध कर उन्हें भोजन करने को बैठाएगा, और पास आकर उन की सेवा करेगा। 
Luke 12:38 यदि वह रात के दूसरे पहर या तीसरे पहर में आकर उन्हें जागते पाए, तो वे दास धन्य हैं। 
Luke 12:39 परन्तु तुम यह जान रखो, कि यदि घर का स्‍वामी जानता, कि चोर किस घड़ी आएगा, तो जागता रहता, और अपने घर में सेंध लगने न देता। 
Luke 12:40 तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उस घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जावेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 21-24


सोमवार, 19 मई 2014

इतिहास


   मैं अपनी पत्नि के साथ ब्रिटिश संग्रहालय को देखने गया; वहाँ भ्रमण करते हुए हम लंडन शहर में स्थित उस विशाल भवन में विद्यमान इतिहास तथा विरासत की महानता को देख कर बहुत प्रभावित हुए। वहाँ हमने ऐसे पुरातन अवशेष देखे जो हमारे अपने देश अमेरिका में पाई जाने वाली किसी भी वस्तु से सैंकड़ों वर्ष पहले के थे। यह सब देखकर मुझे बोध हुआ कि इतिहास का भाव रखना कितना महत्वपूर्ण है। इतिहास हमें दृष्टिकोण, संदर्भ और परिणामों का ऐसा लेखा-जोखा देता है जो हमें शिक्षा लेने तथा सही फैसले करने में सहायक होते हैं, क्योंकि जो हम से पहले हो कर गए हैं उनकी सफलताओं एवं असफलताओं का संपूर्ण ब्यौरा हमारे सामने खुला होता है।

   प्रेरित पौलुस ने भी इतिहास से पाठ सीखने के महत्व को जाना और समझा। उसने अपने पाठकों को स्मरण दिलाया कि कैसे इस्त्राएली लोगों के द्वारा किए गए गलत निर्णय तथा परमेश्वर की योजनाओं पर अविश्वास ने उन्हें चालीस वर्ष की जंगल यात्रा करने पर बाध्य कर दिया था (गिनती 14)। इस घटना के संदर्भ में पौलुस ने कुरिन्थुस के विश्वासियों को चिताया, "परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर थीं; और वे हमारी चेतावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं" (1 कुरिन्थियों 10:11)।

   परमेश्वर ने हमें अपना वचन बाइबल इस लिए दिया है कि हम उस में होकर परमेश्वर को जानें तथा उस में दिए गए परमेश्वर के लोगों के इतिहास से अपने वर्तमान के लिए शिक्षा लें। बाइबल में दिए गए उदाहरण और शिक्षाएं हमें सचेत करती हैं कि हम अपनी प्रवृतियों में फंसकर वही गलतियाँ ना करें जो लोग पहले कर चुके हैं, और जिनके परिणाम हमारे लिए लिखे गए हैं, वरन उन से चेतावनी पाकर बुद्धिमता के साथ परमेश्वर को समर्पित तथा उसके प्रति विश्वास एवं आज्ञाकारिता का जीवन बिताएं।

   प्रश्न यही है - क्या हम इतिहास से शिक्षा ले कर सही मार्ग चुनेंगे, अथवा हम से पहले के लोगों की उन्हीं गलतियों को दोहरा कर वैसे ही परिणामों के भागी बनेंगे? - बिल क्राउडर


हम से पहले के परमेश्वर के लोगों के जीवनों से बहुमूल्य शिक्षाएं ली जा सकती हैं - क्या हम ऐसा करते हैं?

यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी। - भजन 102:18

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 10:1-13
1 Corinthians 10:1 हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बाप दादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए। 
1 Corinthians 10:2 और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपितिस्मा लिया। 
1 Corinthians 10:3 और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया। 
1 Corinthians 10:4 और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था। 
1 Corinthians 10:5 परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए। 
1 Corinthians 10:6 ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरी, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें। 
1 Corinthians 10:7 और न तुम मूरत पूजने वाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे। 
1 Corinthians 10:8 और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये । 
1 Corinthians 10:9 और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए। 
1 Corinthians 10:10 और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए। 
1 Corinthians 10:11 परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर थीं; और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं। 
1 Corinthians 10:12 इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। 
1 Corinthians 10:13 तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 18-20


रविवार, 18 मई 2014

सर्वोत्तम


   यह वह नहीं है जो मैंने अपने जीवन के बारे में सोचा था। मैंने सोचा था कि मैं 19 वर्ष की आयु में ही शादी कर लूँगी, मेरे आधा-दर्जन बच्चे होंगे और मैं एक पत्नी एवं माँ के रूप में अपना जीवन व्यतीत करूँगी। लेकिन मैं काम करने लगी, चालीस वर्ष से ऊपर की आयु में मेरी शादी हुई, और मैं माँ नहीं बनी। बहुत वर्षों तक मैं यही आशा रखती थी कि परमेश्वर मेरे लिए भजन 37:4 - "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा" के अनुसार करेगा; लेकिन यह भी नहीं हुआ।

   कभी कभी इन अधूरी इच्छाओं की यादें मन को थोड़ा उदास कर देती हैं। जैसे मेरे साथ हुआ, हो सकता है कि आपके साथ भी हुआ हो और जीवन आपकी आशा के अनुसार नहीं वरन उससे भिन्न मार्ग पर चला हो। इस संदर्भ में भजन 37 में लिखी गई कुछ बातें विचार के लिए आपके सामने रखती हूँ (यद्यपि यह भजन मुख्यतः दुष्टों के साथ धर्मी जन के जीवन की तुलना है)।

   इस भजन का चौथा पद हमें सिखाता है कि अपूर्ण इच्छाएं हमारे जीवन के आनन्द को हम से नहीं छीन सकतीं; जैसे जैसे हम परमेश्वर के मन को जानते चले जाते हैं, परमेश्वर स्वयं ही हमारा आनन्द होता चला जाता है।

   पद पाँच हमें सिखाता है कि हम अपने मार्ग की चिंता पूर्णतः परमेश्वर पर छोड़ दें, ऐसे जैसे एक कमज़ोर व्यक्ति अपने उस बोझ को जिसे वह स्वयं नहीं उठा सकता उसे अपने उस बलवन्त मित्र एवं साथी को सौंप देता है जो उसकी सहायता करने के लिए सदा उसके साथ रहता है। साथ ही यह पद हमें अपने उस साथी एवं मित्र, अर्थात परमेश्वर पर सदा भरोसा बनाए रखने को भी कहता है। क्योंकि जब हम यह भरोसा बनाए रखते हैं, तब हम निश्चिंत तथा शांत होकर रह सकते हैं, जैसा कि पद सात कहता है।

   मूल बात है, परमेश्वर पर भरोसा रखें, उस पर ही निर्भर रहें, क्योंकि वह जो करेगा, अपने बच्चों के लिए सर्वोत्तम ही करेगा। - ऐनी सेटास


मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है। - नीतिवचन 16:9

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 37:1-8
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! 
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे। 
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। 
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा। 
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-17


शनिवार, 17 मई 2014

घर


   एक दम्पति ने अपनी एक वृद्ध रिशेतदार को उनकी देख-रेख के लिए अपने साथ रखने का निर्णय लिया। उस दम्पति को चिंता थी कि वे वृद्धा जब एक नए घर और माहौल में आएंगी तो उन्हें अटपटा लगेगा। इसलिए उन्होंने उनके रहने के कमरे को बिलकुल वैसा ही बनाने का निर्णय लिया जैसा उनका अपना कमरा उस घर में था जिसे छोड़कर वे उनके साथ रहने आ रहीं थीं। जब वे वृद्धा उनके साथ रहने आईं तो उन्होंने पाया कि उनके रहने का स्थान, उसकी साज-सज्जा, वहाँ की मेज़-कुर्सी आदि बिलकुल वैसा ही था जैसा वे छोड़कर आईं थीं; यह उनके लिए अपने ही घर में मिले स्वागत के समान था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 13:36-14:4 में प्रभु यीशु की अपने चेलों के साथ हो रही वार्ता में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु उन्हें अपने मारे जाने, पुनरुत्थान और फिर स्वर्गारोहण के लिए तैयार कर रहा है। जब पतरस ने प्रभु यीशु से पूछा कि वह कहाँ जा रहा है तो प्रभु ने उत्तर दिया, जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ अभी तो तू नहीं आ सकता, परन्तु बाद में वहाँ आएगा (यूहन्ना 13:36)। फिर वार्तालाप में और थोड़ा आगे प्रभु यीशु ने पतरस तथा अन्य सभी चेलों को आश्वस्त करते हुए कहा, "मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:2-3)।

   स्वर्ग वह स्थान है जहाँ समस्त संसार के हर जाति, राष्ट्र, भाषा, समूह इत्यादि से मसीही विश्वासी एक साथ एक परिवार के समान एकत्रित होंगे और साथ रहेंगे, क्योंकि वह हम सब मसीही विश्वासियों के स्वर्गीय पिता का घर भी है; और उस घर में प्रभु यीशु हम सब के लिए स्थान तैयार कर रहा है।

   जब आप अपने घर पहुँचेंगे और प्रभु यीशु वहाँ आपका स्वागत करेगा, तो आप तुरंत पहचान लेंगे कि आप अपने घर ही में आए हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी का घर स्वर्ग है।

हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। - 1 पतरस 2:11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:36-14:4
John 13:36 शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तू कहां जाता है यीशु ने उत्तर दिया, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा। 
John 13:37 पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूंगा। 
John 13:38 यीशु ने उत्तर दिया, क्या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि मुर्ग बांग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा। 
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13