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बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

धन्यवादी


   मेरे घर के इलाके लैन्सिंग, मिशिगन में सर्दियों में खिली धूप वाले दिन कम ही होते हैं; लेकिन पिछले वर्ष परमेश्वर ने हमें एक ऐसा खिली धूप वाला दिन दिया। मुझे लगा कि उस दिन के लिए सभी परमेश्वर के धन्यवादी हो रहे थे, सिवाय मेरे। जब मैं अपने दफ्तर से निकलकर घर की ओर चला तो एक व्यक्ति ने टिप्पणी करी, "आज हमें परमेश्वर से कैसा अच्छा दिन उपहार में मिला है।" उसे मेरा प्रत्युत्तर था, "हाँ, लेकिन इस सप्ताहांत तो बर्फ पड़नी ही है।" मेरी सोच कितनी छोटी थी!

   अपनी पत्रियों में प्रेरित पौलुस ने अपने पाठकों को लिखा कि वे परमेश्वर के प्रति एक धन्यवादी दृष्टिकोण विकसित करें। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड की पुस्तकों के अन्य सभी लेखकों की अपेक्षा पौलुस ने ही सबसे अधिक, अर्थात 23 बार धन्यवादी होने के लिए लिखा है। जिन बातों के लिए धन्यवादी होने के लिए पौलुस ने लिखा है, उनसे हम इस विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातें सीख सकते हैं।

   पौलुस के धन्यवाद सदा ही परमेश्वर को संबोधित थे, वह अपने सहायकों के लिए भी परमेश्वर को धन्यवाद करता था, उन्हें परमेश्वर की ओर से उसे दिया गया उपहार मानता था - उन्हें उसके साथ जोड़ने के लिए, उन से उसे मिलने वाली सहायता के लिए और उनकी आत्मिक बढ़ोतरी, उनके प्रेम और उनके विश्वास के लिए भी वह परमेश्वर का धन्यवाद करता था (1 कुरिन्थियों 1:4; 1 थिस्सुलुनीकियों1:2)।

   हर बात के लिए वह परमेश्वर को अपने धन्यवाद प्रभु यीशु में होकर अर्पित करता था (कुलुस्सियों 3:15, 17)। पौलुस का मानना था कि प्रभु यीशु के अनुयायियों को हर बात के लिए परमेश्वर का धन्यवादी होना चाहिए क्योंकि परमेश्वर सर्वशक्तिमान है और सब बातों में अपने विश्वासियों की भलाई के लिए कार्य कर रहा है (1 थिस्सुलुनीकियों 5:18)।

   परमेश्वर के प्रति यही धन्यवादी मन हम सब का भी होना चाहिए, हम परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान करे गए विभिन्न उपहारों के प्रति सचेत रहें, और कृतज्ञ होकर उसका धनय्वाद करते रहें। जो कुछ परमेश्वर ने हमारे लिए किया है और कर रहा है, उसके प्रत्युत्तर में हम कम से कम धन्यवाद तो कह ही सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के उपहारों के लिए स्वाभाविक प्रत्युत्तर कृतज्ञ एवं धन्यवादी होना है।

और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। - इफिसियों 5:20

बाइबल पाठ: 1 थिस्सुलुनीकियों 5:16-25
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो। 
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। 
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है। 
1 Thessalonians 5:19 आत्मा को न बुझाओ। 
1 Thessalonians 5:20 भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो। 
1 Thessalonians 5:21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। 
1 Thessalonians 5:22 सब प्रकार की बुराई से बचे रहो। 
1 Thessalonians 5:23 शान्‍ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें। 
1 Thessalonians 5:24 तुम्हारा बुलाने वाला सच्चा है, और वह ऐसा ही करेगा। 
1 Thessalonians 5:25 हे भाइयों, हमारे लिये प्रार्थना करो।

एक साल में बाइबल: 
  • मरकुस 4-6


मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

कटनी


   एक दोपहर को मैं एक खेत के निकट से होकर निकला। वहाँ उस खेत के स्वामी किसान ने बड़ी बड़ी मशीनें सड़क के किनारे खड़ी कर रखीं थीं और पीले रंग का एक चेतावनी चिन्ह लगा रखा था जिस पर लिखा था, "सावधान! फसल काटी जा रही है।" खेत के बगल से निकलते हुए मैंने एक झलक खेत की ओर देखा और मैं तुरंत पहचान गया कि कुछ महीने पहले उस किसान ने कौन से बीज बोए थे - मक्की के छोटे छोटे बीज। मैं यह इस लिए कह सकता हूँ क्योंकि वह किसान अपने खेतों से मक्का के पक्के खेत काटने की तैयारी कर रहा था - खेत की उपज प्रमाण थी कि वहाँ क्या बोया गया था।

   चाहे यह एक बहुत ही स्वाभाविक और साधारण सी बात प्रतीत होती है कि जब मक्की के बीज बोए जाएंगे तो फसल भी मक्की की ही होगी; लेकिन बोने और काटने के इसी संबंध को हम अपने आत्मिक जीवनों में अनेक बार नज़रंदाज़ कर देते हैं। प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में गलतिया के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें सचेत किया, "धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा" (गलतियों 6:7)। यदि हम शारीरिक अभिलाषाओं की पूर्ति के लिए जीएंगे तो प्रतिफल में हमें भ्रष्ट आचरण ही मिलेगा जिस के कारण हम उसकी लालसा करेंगे जो हमारा नहीं है, हम स्वार्थी बन जाएंगे और अपने शरीरों का दुरुपयोग भी करने लगेंगे (गलतियों 5:19-21)। परन्तु यदि हम परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलेंगे तो हमारे जीवनों में आत्मा के फल जैसे शान्ति, भलाई, संयम आदि भी दिखाई देंगे। परमेश्वर के अनुग्रह में हमें यह दिया गया है कि हम आत्मा के लिए बोएं और अनन्त जीवन की कटनी काटें (गलतियों 5:22-23)।

   मान लीजिए कि प्रभु यीशु आज के दिन को हमारे जीवन के लिए "कटनी का दिन" घोषित कर दे और पिछले वर्ष में अपने दैनिक चुनाव द्वारा जो कार्य रूपी ’बीज’ हमने बोएं हैं उनकी फसल उसके सम्मुख लाने को कहे, तो हमारे पास उसे दिखाने के लिए क्या होगा? क्या हम कटनी के लिए तैयार हैं? - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जो बीज हम आज बोते हैं वे ही निर्धारित करते हैं कि कल हम क्या फसल काटेंगे।

पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। - गलतियों 5:16 

बाइबल पाठ: गलतियों 5:19-23; 6:1-10
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन। 
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म। 
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। 
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, 
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। 

Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। 
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। 
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। 
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • मरकुस 1-3


सोमवार, 20 अक्टूबर 2014

विलंब और प्रतीक्षा


   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह के 18 अध्याय में ऐसा लगता है कि सारा संसार परमेश्वर के लोगों के विरुद्ध युद्ध में उतरने के लिए तैयार है; लेकिन ऐसे में परमेश्वर का प्रत्युत्तर है, "...धूप की तेज गर्मी वा कटनी के समय के ओस वाले बादल की नाईं मैं शान्त हो कर निहारूंगा" (यशायाह 18:4)। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि परमेश्वर का यह शान्त होकर बैठना उसके लोगों के विरुद्ध संसार की साज़िश की मूक स्वीकृति है; लेकिन ऐसा था नहीं। परमेश्वर का यह शान्त प्रत्युत्तर इस बात का स्मरण करवाना था कि वह तब कार्य करता है जब समय सही होता है - उसके अनुसार और उसकी इच्छा में।

   प्रभु यीशु मसीह का अपने मित्र लाज़र की मृत्यु के बाद चार दिन तक प्रतीक्षा करते रहने के बारे में विचार कीजिए, जब कि लाज़र कब्र में पड़ा हुआ था (यूहन्ना 11:39)। क्या प्रभु लाज़र कि स्थिति से अनभिज्ञ था? क्या प्रभु को लाज़र की कोई परवाह नहीं थी? प्रभु यीशु को परवाह भी थी और वह लाज़र की स्थिति को अच्छे से जानता भी था, लेकिन उसे उस सही समय की प्रतीक्षा थी जब वह अपनी सामर्थ भी दिखा सके था और उस घटना को लेकर जो शिक्षाएं उसे देनी थीं उन्हें सही रीति से दे भी सके।

   बाइबल में अनेक स्थानों पर ऐसे उल्लेख हैं जहाँ लगता है कि परमेश्वर ने विलंब कर दिया, ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें वह विलंब मानवीय दृष्टिकोण से समझ से बाहर है। लेकिन परमेश्वर का प्रत्येक विलंब उसकी बुद्धिमता और प्रेम की गहराइयों से आता है और हमारी भलाई ही के लिए होता है। यदि और कुछ नहीं तो वह विलंब हमें कुछ सदगुण, जैसे कि नम्रता, धैर्य, सहनशीलता, दृढ़ता से डटे रहना इत्यादि सिखाता है, जो संभवतः हम किसी अन्य रीति से सीखने के लिए तैयार नहीं होते।

   क्या आप किसी परेशानी में हैं? क्या आपको लगता है कि परमेश्वर आप से दूर और अलग हो गया है, उसे आपकी परवाह नहीं है? स्मरण तथा विश्वास रखिए कि वह आपके कष्ट से अनभिज्ञ नहीं है और ना ही उसने आपकी प्रार्थनाएं अनसुनी करी हैं। वह अपने उद्देश्यों और समय के पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहा है, और फिर सही समय पर वह हस्तक्षेप करेगा और आपके लिए सर्वोत्तम करके देगा। परमेश्वर कभी जल्दबाज़ी में नहीं होता, परन्तु सही समय पर अवश्य होता है। - डेविड रोपर


परमेश्वर का समय सदा सही समय होता है, उसकी प्रतीक्षा करना सर्वोत्तम है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: यशायाह 18:1-7
Isaiah 18:1 हाय, पंखों की फड़फड़ाहट से भरे हुए देश, तू जो कूश की नदियों के परे है; 
Isaiah 18:2 और समुद्र पर दूतों को नरकट की नावों में बैठा कर जल के मार्ग से यह कहके भेजता है, हे फुर्तीले दूतो, उस जाति के पास जाओ जिसके लोग बलिष्ट और सुन्दर हैं, जो आदि से अब तक डरावने हैं, जो मापने और रौंदने वाला भी हैं, और जिनका देश नदियों से विभाजित किया हुआ है।
Isaiah 18:3 हे जगत के सब रहने वालों, और पृथ्वी के सब निवासियों, जब झंड़ा पहाड़ों पर खड़ा किया जाए, उसे देखो! जब नरसिंगा फूंका जाए, तब सुनो! 
Isaiah 18:4 क्योंकि यहोवा ने मुझ से यों कहा है, धूप की तेज गर्मी वा कटनी के समय के ओस वाले बादल की नाईं मैं शान्त हो कर निहारूंगा। 
Isaiah 18:5 क्योंकि दाख तोड़ने के समय से पहिले जब फूल फूल चुकें, और दाख के गुच्छे पकने लगें, तब वह टहनियों को हंसुओं से काट डालेगा, और फैली हुई डालियों को तोड़ तोड़कर अलग फेंक देगा। 
Isaiah 18:6 वे पहाड़ों के मांसाहारी पक्षियों और वन-पशुओं के लिये इकट्ठे पड़े रहेंगे। और मांसाहारी पक्षी तो उन को नोचते नोचते धूपकाल बिताएंगे, और सब भांति के वनपशु उन को खाते खाते जाड़ा काटेंगे। 
Isaiah 18:7 उस समय जिस जाति के लोग बलिष्ट और सुन्दर हैं, और जो आदि ही से डरावने होते आए हैं, और मापने और रौंदने वाले हैं, और जिनका देश नदियों से विभाजित किया हुआ है, उस जाति से सेनाओं के यहोवा के नाम के स्थान सिय्योन पर्वत पर सेनाओं के यहोवा के पास भेंट पहुंचाई जाएगी।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 26-28


रविवार, 19 अक्टूबर 2014

आवश्यकता और उपयोग


   मेरी पहली साईकिल में केवल एक ही गियर था - चाहे मैं तेज़ी से चल रही हूँ या धीमे, चाहे मैं चढ़ाई पर चढ़ रही हूँ या ढाल पर उतर रही हूँ, सब कुछ बस उस एक ही गियर की सहायता से करना होता था। मेरी अगली साईकिल में तीन गियर थे, एक समतल स्थानों के लिए, एक चढ़ाई चढ़ने के लिए और एक ढाल पर उतरने के लिए। अब मेरी तीसरी साईकिल में दस गियर हैं जिनके सहारे मैं विभिन्न प्रकार की सतहों पर साईकिल चलाने के लिए सहायता प्राप्त कर सकती हूँ; कोई साईकिल चलाना आरंभ करते समय प्रयोग करने के लिए हैं, तो कोई चढ़ाई चढ़ने के लिए, कोई तेज़ गति से चलने के लिए और कोई आराम से साईकिल चलाने के लिए। चाहे मेरी इस साईकिल में प्रयोग के लिए बहुत गियर हैं, लेकिन हर बार जब मैं साईकिल चलाने के लिए निकलती हूँ तो मुझे उन सभी को प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होती। इतने गियर साईकिल में उपलब्ध होने का लाभ यह है कि किसी भी परिस्थिति में सही गियर की सहायता से साईकिल चलाने के लिए सहायता सदा उपलब्ध है, चाहे मैं सभी गियर कभी प्रयोग करूँ या नहीं, मुझे उनमें से किसी की भी आवश्यकता कभी भी हो सकती है, और मैं आश्वस्त हूँ कि वे सभी मेरे पास हैं।

   यही बात हमें परमेश्वर से मिलने वाले आत्मिक वरदानों और योग्यताओं के लिए भी लागू है। जब ऐसे समय होते हैं जिनमें मैं वह नहीं कर रही होती हूँ जो मैं किया करती थी, तो उन बातों को लेकर अपने आप को व्यर्थ और अनुपयोगी महसूस करने की बजाए मैं परमेश्वर का धन्यवाद करती हूँ उन बातों के लिए जो मैं कर सकती हूँ और उनके लिए भी जो मैंने करी हैं; मेरे जीवन के वे "गियर" मेरे लिए उपयोगी थे, मुझे अभी भी उपलब्ध हैं और फिर कभी उपयोगी हो सकते हैं। क्योंकि वर्तमान परिस्थिति में किसी कौशल की आवश्यकता नहीं पड़ रही है, इसका यह अर्थ नहीं है कि फिर कभी आवश्यकता पड़ेगी ही नहीं; परिस्थितियाँ भी बदलेंगी और उनके अनुसार आवश्यकताएं भी।

   क्योंकि परिस्थितियाँ अनेपक्षित और अप्रत्याशित रीति से बदलती रहती हैं, हमें भिन्न आत्मिक वरदानों की आवश्यकता होती है और उनका उपयोग भिन्न समयों पर भिन्न रीति से करना होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने तीतुस को लिखी अपनी पत्री में उसे निर्देश दिया कि वह लोगों से कहे कि वे "...हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहें" (तीतुस 3:1)। जो निर्देश उस समय तीतुस के लिए आवश्यक था, वही आज हमारे लिए भी उतना ही आवश्यक है। हम अपने प्रभु के कार्य और उसके दूसरे आगमन के लिए सदा चौकस और तैयार रहें और अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने में लगे रहें तथा आवश्यकतानुसार अपने आत्मिक वरदानों का उपयोग करते रहें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपने औज़ार तैयार रखिए, परमेश्वर आपके लिए कार्य निर्धारित कर देगा।

कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डांट, और समझा। पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर। - 2 तिमुथियुस 4:2, 5

बाइबल पाठ: तीतुस 3:1-8
Titus 3:1 लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहें। 
Titus 3:2 किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्‍वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। 
Titus 3:3 क्योंकि हम भी पहिले, निर्बुद्धि, और आज्ञा न मानने वाले, और भ्रम में पड़े हुए, और रंग रंग के अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्‍व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे। 
Titus 3:4 पर जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की कृपा, और मनुष्यों पर उसकी प्रीति प्रगट हुई। 
Titus 3:5 तो उसने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्म के स्‍नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। 
Titus 3:6 जिसे उसने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला। 
Titus 3:7 जिस से हम उसके अनुग्रह से धर्मी ठहरकर, अनन्त जीवन की आशा के अनुसार वारिस बनें। 
Titus 3:8 यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 23-25


शनिवार, 18 अक्टूबर 2014

अनुग्रह और प्रेम


   मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसका यह मानना था कि उसके कार्य इतने बुरे थे कि उनके लिए परमेश्वर उसे कभी क्षमा नहीं कर सकता। एक अन्य व्यसक और परिपक्व जन ने उसे अपने साथ लिया और उसे संभाला, और फिर एक वर्ष बाद जब मैं उससे मिला तब तक वह पहला व्यक्ति प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार को पा चुका था और बड़ी लगन से परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने में लगा हुआ था। लेकिन और तीन वर्ष के बाद जब मेरी उससे बातचीत हुई तो मुझे आभास हुआ कि मसीही विश्वास के जीवन का उसका वह आरंभिक उत्साह अब क्षीण हो गया था, उसके स्थान पर कुड़कुड़ाहट उसके जीवन में आ गई थी; उसने कहा, "मुझे यह समझ नहीं आता कि परमेश्वर कैसे बुराई को पनपने और समृद्ध होने देता है जबकि उसके अपने पुत्र और पुत्रियाँ (उसका संकेत स्वयं अपनी ओर था) जीवन यापन के लिए संघर्ष में लगे हैं।" उसकी कुड़कुड़ाहट ने उसके मसीही विश्वास के आनन्द को समाप्त कर दिया था।

   बहुतेरे अन्य लोगों के समान ही, वह भी यह भूल गया था कि एक समय वह स्वयं भी उस बुराई में पड़ा था, और यह केवल मसीह यीशु में होकर उपलब्ध परमेश्वर का अनुग्रह ही था जिसके द्वारा उसका जीवन बदला और वह पापों से छूट सका। आज वह उस पाप क्षमा और उद्धार के लिए अपनी आरंभिक कृतज्ञता को भूल गया था, उसने अपने प्रति प्रभु के अनुग्रह का मूल्यांकन करने और अपना जीवन प्रभु के समक्ष बिताने की बजाए दूसरों का मूल्यांकन करने और अपनी तुलना उनसे करना आरंभ कर दिया था, जिससे उसका दृष्टिकोण बदल गया और उसका आनन्द जाता रहा। उसके इस व्यवहार से मुझे प्रभु यीशु द्वारा दाख की बारी में काम करने के लिए मज़दुरों को बुलाए जाने वाले दृष्टांत (मत्ती 20:1-16) की याद आई। स्वामी ने जिन्हें उस बारी में कार्य करने के लिए बुलाय था, उनमें से कुछ अपने कर्त्वय को भूल कर दुसरों के बारे में सोचने लग गए थे (पद 10-12), और परिणाम दुखदायी था।

   परमेश्वर हम में से किसी का भी, किसी भी रीति से, किसी भी बात के लिए लेशमात्र भी कर्ज़दार नहीं है। यदि हमारे पापों के बावजूद वह हमें अपनी पृथ्वी पर बने रहने देता है, हमें खाने-पीने-रहने-ओढ़ने को देता है, हमारे जीवनों में आनन्द के अवसर आने देता है, तो यह सब उसका हमारे प्रति अनुग्रह और प्रेम ही है। लेकिन इससे भी बढ़कर उसका प्रेम इसमें प्रदर्शित होता है कि वह संसार के सभी लोगों को प्रभु यीशु में होकर सेंत-मेंत उद्धार उपलब्ध कराता है, उनके पाप क्षमा करने को तैयार रहता है, उन्हें अपने परिवार में जोड़ने को लालायित रहता है। वह चाहता है कि हम सब उसके साथ अनन्तकाल तक स्वर्ग में निवास करें, और जो कोई प्रभु यीशु में होकर उसके पास आता है, उसके अन्दर वह अपना आत्मा निवास करने को देता है जिससे वह व्यक्ति उस अनन्तकाल के जीवन के लिए तैयार किया जा सके।

   किसी के भी जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव उसके प्रति परमेश्वर के इस महान अनुग्रह और प्रेम को किसी रीति से कमतर नहीं आँक सकते। जब तक हमारी नज़रें अपने उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह पर लगी रहेंगी, और हम उसके वचन की रौशनी में स्वयं अपना आँकलन उसके समक्ष करते रहेंगे, हम उसके अनुग्रह के महत्व तथा हमारे प्रति उसके प्रेम की महानता को समझते रहेंगे। फिर हमारे जीवन में ना तो कुड़कुड़ाने का कोई अवसर होगा और ना ही प्रभु में हमारा आनन्द कभी छिन्न हो सकेगा। - रैन्डी किल्गोर


जीवन में तृप्त और आनन्दित रहने के लिए कभी यह ना भूलें कि परमेश्वर भला है और अपने बच्चों के लिए सदा भला ही करता है।

हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। - याकूब 5:9

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-16
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 
Matthew 20:16 इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहिले होंगे, और जो पहिले हैं, वे पिछले होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 20-22


शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2014

अवसर


   अपनी किशोरावस्था में मेरे बेटे स्टीव ने मुझ से एक प्रश्न पूछा: "पिताजी, यदि परमेश्वर सनातन से है तो सृष्टि को रचने से पूर्व वह क्या करता था?"

   परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि "आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की" (उत्पत्ति 1:1), तो उस ’आदि’ से पूर्व के अवर्णित, असीमित समय में परमेश्वर क्या कर रहा था? बाइबल हमें इस बारे में एक हलकी सी झलक देती है। हम देखते हैं कि प्रभु यीशु मसीह पृथ्वी की सृष्टि से पहले ही परमेश्वर के द्वारा महिमान्वित किया गया और परमेश्वर ने उससे प्रेम रखा (यूहन्ना 17:5, 24)। यह भी लिखा है कि सृष्टि की रचना से पहले "बुद्धि" थी, जिसका उद्गम परमेश्वर का चरित्र था। "बुद्धि" अपने बारे में नीतिवचन 8:23 में कहती है, "मैं सदा से वरन आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि के पहिले ही से ठहराई गई हूं।"

   हम तीतुस की पत्री से जानने पाते हैं कि हम मनुष्यों के लिए अनन्त जीवन की आशा की योजना भी परमेश्वर ने सनातन से बना रखी थी "उस अनन्त जीवन की आशा पर, जिस की प्रतिज्ञा परमेश्वर ने जो झूठ बोल नहीं सकता सनातन से की है" (तीतुस 1:2)। बाइबल से हम यह भी ज्ञात होता है कि पृथ्वी की सृष्टि से पहले से ही परमेश्वर के द्वारा मसीह यीशु में होकर अनुग्रह द्वारा मनुष्य के उद्धार की योजना कार्यान्वित हो रही थी: "जिसने हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से बुलाया, और यह हमारे कामों के अनुसार नहीं; पर अपनी मनसा और उस अनुग्रह के अनुसार है जो मसीह यीशु में सनातन से हम पर हुआ है" (2 तिमुथियुस 1:9)। इसी प्रकार 

   इस पृथ्वी की सृष्टि से पहले ही परमेश्वर द्वारा किए गए कार्यों और बनाई गई योजनाओं की यह एक हलकी सी झलक हमें अपने प्रेमी परमेश्वर पिता की महानता, प्रताप और सामर्थ की हमारी कल्पना से भी बाहर विशालता का आभास करवाती है। कितना अद्भुत है वह परमेश्वर जो हमारे उद्धार के लिए अपनी सृष्टि में एक मानव रूप में सिमट कर आ गया और अन्य मनुष्यों से सब कुछ सहना स्वीकार किया, और आज भी सह रहा है, जिससे साधारण विश्वास और पापों से पश्चाताप के द्वारा हम मनुष्य उद्धार पा जाएं, उसकी सनतान बन जाएं, उसके साथ स्वर्ग में रहने के अधिकारी बन जाएं।

   यदि अभी भी आपने उस अद्भुत परमेश्वर के महान प्रेम को नहीं पहचाना है तो यह अवसर आपके लिए अभी भी उपलब्ध है - वह आपकी प्रतीक्षा में है। - डेव ब्रैनन


यह रचा गया संसार अनन्त में एक लघु अन्तराल मात्र है। - सर थौमस ब्राउन

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-31
Genesis 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। 
Genesis 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। 
Genesis 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। 
Genesis 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। 
Genesis 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।
Genesis 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। 
Genesis 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।
Genesis 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:11 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्ही में एक एक की जाति के अनुसार होते हैं पृथ्वी पर उगें; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:12 तो पृथ्वी से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनुसार बीज होता है, और फलदाई वृक्ष जिनके बीज एक एक की जाति के अनुसार उन्ही में होते हैं उगे; और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:13 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार तीसरा दिन हो गया।
Genesis 1:14 फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों। 
Genesis 1:15 और वे ज्योतियां आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देने वाली भी ठहरें; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:16 तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये, और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया: और तारागण को भी बनाया। 
Genesis 1:17 परमेश्वर ने उन को आकाश के अन्तर में इसलिये रखा कि वे पृथ्वी पर प्रकाश दें, 
Genesis 1:18 तथा दिन और रात पर प्रभुता करें और उजियाले को अन्धियारे से अलग करें: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:19 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार चौथा दिन हो गया।
Genesis 1:20 फिर परमेश्वर ने कहा, जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें। 
Genesis 1:21 इसलिये परमेश्वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया और एक एक जाति के उड़ने वाले पक्षियों की भी सृष्टि की: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:22 और परमेश्वर ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें। 
Genesis 1:23 तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पांचवां दिन हो गया। 
Genesis 1:24 फिर परमेश्वर ने कहा, पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात घरेलू पशु, और रेंगने वाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:25 सो परमेश्वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगने वाले जन्तुओं को बनाया: और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है। 
Genesis 1:26 फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। 
Genesis 1:27 तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। 
Genesis 1:28 और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो। 
Genesis 1:29 फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं: 
Genesis 1:30 और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:31 तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 16-19


गुरुवार, 16 अक्टूबर 2014

महान सुअवसर


   हाल ही में मैं पढ़ रहा था कि परमेश्वर के वचन बाइबल के सन्देश को लोग कितनी सरलता से बिगाड़ कर प्रस्तुत करते हैं - बस यह कहते हुए कि "बाइबल में लिखा है" उसके किसी भाग को लेकर उसकी व्याख्या सन्दर्भ से बाहर तथा अपनी धारणा के अनुसार कर दीजिए, सन्देश की सच्चाई बदल जाएगी। अनेक लोग के लिए पहले से ही बनाई गई अपनी धारणाओं के अनुसार अपनी बात के समर्थन के लिए इस प्रकार से बाइबल का दुरुपयोग करना आम बात है। कुछ लोग बाइबल को किसी बात के एक पहलू का समर्थन करने के लिए प्रयोग करते हैं तो कुछ अन्य लोग उसी बात का विरोध करने के लिए बाइबल का उपयोग करते हैं; दोनों ही अपनी बात प्रमाणित करने के लिए बाइबल में से ही पद उद्धरित करते हैं - लेकिन दोनों ही सही नहीं हो सकते। बाइबल से सही जानकारी पाने के लिए हर बात पर बाइबल की सभी शिक्षाओं को उनकी संपूर्णता में देखें तथा बाइबल पर अपनी धारणाएं ना थोपें, वरन उसे परमेश्वर की इच्छानुसार आप से बात करने दें।

   यह अनिवार्य है कि जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल का उपयोग करते हैं तो हम ना तो जो उसमें कहा गया है उससे अधिक कुछ बोलें और ना ही उसकी किसी बात को घटा कर बताएं - जो जैसा है, वैसा ही कहें, ना अधिक और ना कम। यदि हम परमेश्वर के वचन को लापरवाही द्वारा गलत ढंग से प्रयोग करेंगे तो हम परमेश्वर की बात और चरित्र को गलत ढंग से प्रस्तुत करेंगे। इसीलिए प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को लिखी अपनी पत्री में उसे सचेत किया कि, "अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो" (2 तिमुथियुस 2:15)। मसीह यीशु के लिए सेवकाई करने वालों को लज्जा से बचने तथा अपने प्रभु की प्रशंसा का पात्र बनने के लिए अनिवार्य है कि वे परमेश्वर के वचन को "ठीक रीति से काम में लाएं" अर्थात उसकी सही व्याख्या करें, ना उसमें कुछ जोड़ें और ना ही उस में से कुछ घटाएं। जब हम बिना किसी पूर्वधारणा को लिए, सच्चे समर्पित मन के साथ परमेश्वर के चरणों में बैठेंगे और उससे प्रार्थना करेंगे कि अपने वचन की समझ हमें दे और उसे हमें सिखाए तब वह ऐसा करेगा भी; क्योंकि यह वचन उसने हमारे लिए ही लिखवाया है और इस वचन को समझाने के लिए अपना पवित्र आत्मा हमें दिया है।

   अपने शब्दों तथा कर्मों के द्वारा हमारे पास अवसर रहते हैं कि हम परमेश्वर के इस अनमोल वचन को संसार के सामने ऐसा प्रस्तुत कर सकें जो वास्तव में परमेश्वर के सच्चे स्वरूप को दिखाता है; और मसीही विश्वासी के लिए यह अपने प्रभु को आदर देना का महान सुअवसर है; इसे व्यर्थ ना करें। - बिल क्राउडर


बाइबल परमेश्वर का वचन है; इसे सावधानी से प्रयोग करें।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:14-26
2 Timothy 2:14 इन बातों की सुधि उन्हें दिला, और प्रभु के साम्हने चिता दे, कि शब्‍दों पर तर्क-वितर्क न किया करें, जिन से कुछ लाभ नहीं होता; वरन सुनने वाले बिगड़ जाते हैं।
2 Timothy 2:15 अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। 
2 Timothy 2:16 पर अशुद्ध बकवाद से बचा रह; क्योंकि ऐसे लोग और भी अभक्ति में बढ़ते जाएंगे। 
2 Timothy 2:17 और उन का वचन सड़े-घाव की नाईं फैलता जाएगा: हुमिनयुस और फिलेतुस उन्‍हीं में से हैं। 
2 Timothy 2:18 जो यह कह कर कि पुनरुत्थान हो चुका है सत्य से भटक गए हैं, और कितनों के विश्वास को उलट पुलट कर देते हैं। 
2 Timothy 2:19 तौभी परमेश्वर की पड़ी नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे। 
2 Timothy 2:20 बड़े घर में न केवल सोने-चान्दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। 
2 Timothy 2:21 यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। 
2 Timothy 2:22 जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। 
2 Timothy 2:23 पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं। 
2 Timothy 2:24 और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो। 
2 Timothy 2:25 और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें। 
2 Timothy 2:26 और इस के द्वारा उस की इच्छा पूरी करने के लिये सचेत हो कर शैतान के फंदे से छूट जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 12-15