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शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

सहज और सरल


   सन 1814 में सेमिनरी से स्नातक होने के पश्चात थोमस ग्लौडेट का इरादा मसीही विश्वास का प्रचारक बनने का था। लेकिन प्रचारक बनने के उसके इरादे ने एक अलग ही मोड़ ही मोड़ ले लिया जब उसकी मुलाकात एलिस नामक एक 9 वर्षीय लड़की से हुई। एलिस उसके पड़ौस में ही रहती थी और सुन नहीं सकती थी क्योंकि वह बधिर थी। ग्लौडेट ने लकड़ी के द्वारा मिट्टी पर लिख कर एलिस के साथ संवाद करने के प्रयास किए। एलिस के साथ इस प्रकार वार्तालाप कर पाने की सफलता ने ग्लौडेट को प्रेरित किया कि वह ऐसे अन्य बधिरों के साथ भी संवाद करने के प्रयास करे। उसने अमेरिका और यूरोप में बधिर लोगों की शिक्षा में लगे विशेषज्ञों से संपर्क तथा विचार-विमर्श करके एक सांकेतिक भाषा बनाई जिसमें हाथों की मुद्राओं के द्वारा सन्देश को बधिर लोगों तक पहुँचाया जाता है। अन्ततः अपने इस प्रयास को उसने एक औपचारिक रूप देकर "अमेरिकन स्कूल फ़ोर द डेफ" की स्थापना करी।

   ग्लौडेट के इस स्कूल में बधिर लोगों के लिए पाठ्यक्रम बनाया गया जो परमेश्वर के वचन बाइबल पर आधारित था, प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को बताता था और बाइबल के निर्देशों को सिखाता था। ग्लौडेट का प्रचारक बनने का आरंभिक इरादा इस प्रकार से पूरा हुआ, और वह प्रभु यीशु के प्रेम और अनुग्रह तथा परमेश्वर के कार्य के बारे में एक ऐसे विशेष लोगों तक परमेश्वर के वचन को पहुँचा सका जो इस आशीष से वंचित रहते थे। ग्लौडेट के इस सफल प्रयास का आधार था परमेश्वर के सुसमाचार को लोगों तक ऐसे रूप में पहुँचाना जिसे वे समझ सकें, ग्रहण कर सकें।

   यही आधार हम सभी मसीही विश्वासियों के लिए आज भी उतना ही आवश्यक है; हमें प्रभु यीशु में सारे संसार के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को ऐसे रूप में सभी लोगों तक पहुँचाना है जिसे वे समझ सकें और फिर ग्रहण कर सकें। अन्यथा "फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें?" (रोमियों 10:14)। परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए और विचार कीजिए कि अपने आस-पास के लोगों तक आप प्रभु यीशु मसीह के इस सुसमाचार को कैसे सहज और सरलता से समझ आने वाला बनाकर प्रस्तुत कर सकते हैं, और फिर उसे व्यावाहरिक रीति से कार्यान्वित कीजिए। - डेनिस फिशर


संसार के सर्वश्रेश्ष्ठ सन्देश को संसार के सभी लोगों तक पहुँचाएं, कोई इससे वंचित ना रहने पाए।

और उन से कहा, यों लिखा है; कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। और यरूशलेम से ले कर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। - लूका 24:46-47

बाइबल पाठ: रोमियों 10:1-14
Romans 10:1 हे भाइयो, मेरे मन की अभिलाषा और उन के लिये परमेश्वर से मेरी प्रार्थना है, कि वे उद्धार पाएं। 
Romans 10:2 क्योंकि मैं उन की गवाही देता हूं, कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी के साथ नहीं। 
Romans 10:3 क्योकि वे परमेश्वर की धामिर्कता से अनजान हो कर, और अपनी धामिर्कता स्थापन करने का यत्न कर के, परमेश्वर की धामिर्कता के आधीन न हुए। 
Romans 10:4 क्योंकि हर एक विश्वास करने वाले के लिये धामिर्कता के निमित मसीह व्यवस्था का अन्त है। 
Romans 10:5 क्योंकि मूसा ने यह लिखा है, कि जो मनुष्य उस धामिर्कता पर जो व्यवस्था से है, चलता है, वह इसी कारण जीवित रहेगा। 
Romans 10:6 परन्तु जो धामिर्कता विश्वास से है, वह यों कहती है, कि तू अपने मन में यह न कहना कि स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा? अर्थात मसीह को उतार लाने के लिये! 
Romans 10:7 या गहिराव में कौन उतरेगा? अर्थात मसीह को मरे हुओं में से जिलाकर ऊपर लाने के लिये! 
Romans 10:8 परन्तु वह क्या कहती है? यह, कि वचन तेरे निकट है, तेरे मुंह में और तेरे मन में है; यह वही विश्वास का वचन है, जो हम प्रचार करते हैं। 
Romans 10:9 कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। 
Romans 10:10 क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है। 
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। 
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। 
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। 
Romans 10:14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें?

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 9-11


गुरुवार, 20 नवंबर 2014

त्यागा हुआ


   कैरिस्सा स्मिथ अपने 4 महीने की बच्ची के साथ स्थानीय पुस्तकालय में कुछ पुस्तकें देख रही थी, और उसकी बेटी प्रसन्नचित्त होकर मुँह से कुछ आवाज़ें निकाल रही थी। एक वृद्ध व्यक्ति ने बड़े रूखे स्वर में कैरिस्सा से कहा कि या तो कैरिस्सा स्वयं अपनी बच्ची को शान्त कर ले अन्यथा वह कर देगा। कैरिस्सा ने उसे उत्तर दिया, "मैं नहीं जानती कि आपके जीवन में ऐसा क्या है जो एक प्रसन्न बच्ची के कारण आपको दुखी कर रहा है, लेकिन वह जो भी है जो एक प्रसन्न बच्ची को देखकर आपको दुखी कर रहा है, मैं उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ; लेकिन ना तो मैं अपनी बच्ची को शान्त करूँगी और ना ही आपको उसे शान्त करने दूँगी।" उस वृद्ध ने तुरंत अपना सिर झुकाकर क्षमा माँगी, और फिर कैरिस्सा के साथ 50 वर्ष पहले अपने बेटे की अचानक हुई मृत्यु की कहानी बाँटी, जिसके दुख और आवेश को वह अपने अन्दर दबाए बैठा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 13 में दाऊद अपने दुखी मन के विचारों को बड़े खुले रूप में परमेश्वर के सामने रखता है। अपने दुख को व्यक्त करने के लिए वह बड़ी व्यथित परन्तु खरे शब्दों को प्रयोग करता है: "हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?" (पद 1) दाऊद के ये प्रश्न उसके अन्दर त्यागा हुआ होने के भय को दिखाते हैं; लेकिन थोड़ी ही देर में दाऊद की यह व्यथित भाषा परमेश्वर से सहायता की पुकार में परिवर्तित हो जाती है और वह परमेश्वर में अपने विश्वास और अपने प्रति उसके प्रेम को दृढ़ता से व्यक्त करता है (पद 3-6)।

   हम सब अपने जीवनों में कठिन समयों से होकर गुज़रते हैं; हमें प्रतीत होता है कि परमेश्वर ने हमें छोड़ दिया है। लेकिन जैसे दाऊद के साथ हुआ, वैसे ही हमारे साथ भी हो सकता है - हमारा शोक आनन्द में परिवर्तित हो सकता है, यदि हम भी दाऊद के समान ही खुले मन से अपनी बात परमेश्वर के सम्मुख रखें, उससे सहायता माँगें और अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम में भरोसा व्यक्त करें क्योंकि परमेश्वर का प्रेम अपने बच्चों के प्रति ना कभी बदलता है और ना ही कभी घटता-बढ़ता है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा।

क्रोध के झकोरे में आकर मैं ने पल भर के लिये तुझ से मुंह छिपाया था, परन्तु अब अनन्त करूणा से मैं तुझ पर दया करूंगा, तेरे छुड़ाने वाले यहोवा का यही वचन है। - यशायाह 54:8

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? 
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा? 
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। 
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 5-8


बुधवार, 19 नवंबर 2014

असफल


   अमेरिका में 1970 के दशक में एक प्रचलित सनक थी मोटरसाईकिल द्वारा लंबी दूरी की छलाँग लगाना। इस सनक की पराकाष्ठा, और संभवतः गहराई भी 8 सितंबर 1974 को देखने को मिली जब इडाहो प्रांत की स्नेक रिवर घाटी में हज़ारों दर्शक इवेल नीवेल को घाटी के एक छोर से दूसरे छोर तक एक विशेष रीति से बनाई गई ’स्काई साईकिल’ द्वारा छलाँग लगाने को देखने के लिए एकत्रित हुए। अन्ततः इवेल का यह प्रयास असफल रहा और कुछ दूर तक की छलांग के बाद वह पैराशूट द्वारा नीचे धरती पर आ गया। कुछ दर्शकों ने प्रश्न किया, "नीचे आने से पहले इवेल घाटी की चैड़ाई की कितनी दूरी तय कर सका?" लेकिन महत्वपूर्ण बात यह नहीं थी कि उसने कितनी दूरी तय करी, वरन यह कि वह पूरी दूरी तय नहीं कर सका, अपने लक्ष्य से कम रह गया और असफल माना गया।

   यह घटना पाप के साथ हमारे संघर्ष का एक अच्छा उदाहरण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने रोमियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा, "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23)। कोई मनुष्य ऐसा नहीं है जो पाप के कारण मनुष्य और परमेश्वर के बीच आई दूरी को अपने प्रयास से पार कर सके। इसीलिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु को इस संसार में भेजा जिससे वह अपने बलिदान तथा पुनरुत्थान के द्वारा पापों से पश्चाताप और उस पर विश्वास करने वाले सभी लोगों के लिए परमेश्वर और मनुष्य के बीच की उस घाटी को पार करने का मार्ग बन सके, लोगों को परमेश्वर तक ले जाने वाला बन सके।

   प्रभु यीशु ने पृथ्वी पर एक निषकलंक और निषपाप जीवन व्यतीत किया और समस्त मानव जाति के सभी पापों के दण्ड को अपने ऊपर लेकर सब के लिए उस दण्ड को सह लिया, वह हमारे बदले में मारा गया, गड़ा गया और अफिर तीसरे दिन मृतकों में से जीवित हो उठा और आज जीवित परमेश्वर है जो जगत के न्यायी के रूप में एक बार फिर आएगा: "क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है" (प्रेरितों 17:31)। जिस कार्य में हम मनुष्य केवल असफल रह सकते थे, वह प्रभु यीशु ने अपने बड़े प्रेम में होकर हम सब के लिए कर के दे दिया, उसे सभी के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध करवा दिया।

   अब हमें अपने किसी असफल प्रयास को करने की नहीं वरन केवल पापों से पश्चाताप करने और प्रभु यीशु के कार्य को स्वीकार करके उसे अपने जीवनों में लागू कर लेने की आवश्यकता है, और उद्धार तथा परमेश्वर से मेल मिलाप का कार्य हमारे लिए पूरा हो जाएगा। क्या आपने परमेश्वर तथा अपने मध्य की यह दूरी प्रभु यीशु में होकर पाट ली है? - बिल क्राउडर


मसीह यीशु का क्रूस उस दूरी को पाट देता है जिसे हम अपने प्रयासों से कभी पाट नहीं सकते।

नि:सन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ हो। - सभोपदेशक 7:20 

बाइबल पाठ: रोमियों 3:19-28
Romans 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे। 
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो। 
Romans 3:27 तो घमण्ड करना कहां रहा उस की तो जगह ही नहीं: कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन विश्वास की व्यवस्था के कारण। 
Romans 3:28 इसलिये हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं, कि मनुष्य व्यवस्था के कामों के बिना विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरता है।

एक साल में बाइबल: 
  • रोमियों 1-4


मंगलवार, 18 नवंबर 2014

सावधानियाँ और चेतावनियाँ


   अपने बचपन की एक घटना मुझे सदा स्मरण रहती है; सभा के बाद हम चर्च के बाहर खड़े थे, मैं अपने मित्र बॉबी के साथ खड़ा था, अचानक ही बॉबी को कुछ ध्यान आय और वह तेज़ी से व्यस्त सड़क की ओर भागा। तुरंत ही उसकी माँ ने ऊँची आवाज़ में पुकारा, "रुको!" और बॉबी वहीं रुक गया। बॉबी की माँ का उसे रुकने के लिए कहना बॉबी की भलाई और उसकी सुरक्षा के लिए था ना कि उसकी स्वतंत्रता में बाधा डालने के लिए। आज हम प्रायः सभी स्थानों पर या प्रत्येक उत्पाद पर सावधानी अथवा चेतावनी के सन्देश देख सकते हैं; यहाँ तक की दवाईयों के साथ भी बारीक अक्षरों में लिखे हुए सावधनी और चेतावनी संबंधी सन्देश दिए जाते हैं जिससे उन से संभावित प्रत्येक परिणाम के बारे में उनके उपभोगता जान सकें।

   परमेश्वर ने भी अपने वचन बाइबल में हमें हमारे जीवन निर्वाह, व्यवहार और संसार तथा उसके साथ हमारे संबंध के बारे में अनेक सावधानियाँ और चेतावनियाँ दी हैं। इसी प्रकार की अनेक चेतावनियाँ नीतिवचन नामक पुस्तक में भी लिखीं है, जिनमें से एक है: "छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन सात हैं जिन से उसको घृणा है" (नीतिवचन 6:16), और इसके बाद के तीन पदों में विनाशक प्रवृत्तियाँ जैसे घमण्ड और झूठ आदि पापों के बारे में चेतावनियाँ हैं। ये ऐसी बातें हैं जो ना केवल हमारे सांसारिक संबंधों को हानि पहुँचाती हैं, वरन हमारे परमेश्वर पिता के मन को भी दुखी करती हैं। आगे चलकर लिखा है कि "... सिखाने वाले की डांट जीवन का मार्ग है" (नीतिवचन 6:23); कहने का तात्पर्य है कि परमेश्वर की सावधानियाँ और चेतावनियाँ हमारे जीवन के आनन्द को कम करने या हमें बन्धनों में बाँधने के लिए नहीं वरन हमारी रक्षा करने हमें सुखी रखने के लिए हैं।

   ऐसा कई बार होता है कि हम परमेश्वर के निर्देशों और चेतावनियों के विरुद्ध उस उलटी दिशा में ही भागने का प्रयास करते हैं जहाँ जाने से परमेश्वर हमें रोकना चाह रहा है, और फिर अपने उस गलत निर्णय के दुषपरिणाम भुगतते हैं। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि परमेश्वर की चेतावनियों को मानने और सावधानियों का पालन करने में ही वास्तविक स्वंत्रता और आनन्द है, क्योंकि वे हमारी भलाई और सुख के लिए ही दी गई हैं। - जो स्टोवैल


परमेश्वर का वचन हमारी सुरक्षा और भलाई के लिए उसके प्रेम से भरी चेतावनियों और सावधानियों से भरा पड़ा है; उन्हें जानिए और मानिए।

आज्ञा तो दीपक है और शिक्षा ज्योति, और सिखाने वाले की डांट जीवन का मार्ग है - नीतिवचन 6:23

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:16-22
Proverbs 6:16 छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन सात हैं जिन से उसको घृणा है 
Proverbs 6:17 अर्थात घमण्ड से चढ़ी हुई आंखें, झूठ बोलने वाली जीभ, और निर्दोष का लोहू बहाने वाले हाथ, 
Proverbs 6:18 अनर्थ कल्पना गढ़ने वाला मन, बुराई करने को वेग दौड़ने वाले पांव, 
Proverbs 6:19 झूठ बोलने वाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करने वाला मनुष्य। 
Proverbs 6:20 हे मेरे पुत्र, मेरी आज्ञा को मान, और अपनी माता की शिक्षा का न तज। 
Proverbs 6:21 इन को अपने हृदय में सदा गांठ बान्धे रख; और अपने गले का हार बना ले। 
Proverbs 6:22 वह तेरे चलने में तेरी अगुवाई, और सोते समय तेरी रक्षा, और जागते समय तुझ से बातें करेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 27-28


सोमवार, 17 नवंबर 2014

मार्गदर्शक


   एक ऐसी प्रणाली बनाना जिसके द्वारा अन्तरिक्ष में विद्यमान ’आँख’ सभी गाड़ियों, वायुयानों तथा नौकाओं एवं जलपोतों पर नज़र बनाए रखे और उनका मार्गदर्शन करती रहे बहुत जटिल कार्य है; लेकिन आज का ’जीपीएस’ अर्थात ’ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम’ यही कार्य करता है। पृथ्वी से 12,500 मील की ऊँचाई पर अन्तरिक्ष में हर समय 24 से 32 उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगा रहे होते हैं और पृथ्वी से संबंध बनाए रखते हैं, जानकारी का आदान-प्रदान करते रहते हैं। इन उपग्रहों द्वारा दी जाने वाली जानकारी के सही होने और उनसे ठीक मार्गदर्शन मिलने के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वे पृथ्वी से एक निर्धारित दूरी तथा गति को बनाए रखें।

   मनुष्यों द्वारा बनाया गया यह ’जीपीएस’ परमेश्वर द्वारा दिए जाने वाले मार्गदर्शन का छोटा सा नमूना भर है। परमेश्वर के वचन बाइबल में उससे मिलने वाले मार्गदर्शन और सहायता के अनेक उदाहरण और वायदे हैं: परमेश्वर ने इस्त्राएल को आश्वस्त किया कि "और यहोवा तुझे लगातार लिये चलेगा, और काल के समय तुझे तृप्त और तेरी हड्डियों को हरी भरी करेगा; और तू सींची हुई बारी और ऐसे सोते के समान होगा जिसका जल कभी नहीं सूखता" (यशायाह 58:11)। भजनकार यह भली-भांति जानता था कि ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ परमेश्वर की नज़र उस पर बनी ना रहे (भजन 139:7-8)। ’जीपीएस’ के आने के बहुत पहले ही परमेश्वर "पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान" (यशायाह 40:22) संसार की हर बात पर अपनी नज़र और नियंत्रण बनाए हुए है, अपने लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है।

   इस बात का ज्ञान कि कोई है जो आप पर लगातार नज़र बनाए हुए है और उसकी नज़र से कहीं पर भी छिप पाना असंभव है उन्हें भयभीत कर सकता है जो किसी बात को छिपाना चाहते हैं या स्वयं छिपकर रहना चाहते हैं; परन्तु एक मसीही विश्वासी के लिए यह बात एक बड़े आनन्द, सान्तवना और आश्वासन की बात है। भजनकार इस बात से भी आश्वस्त था कि परमेश्वर का मार्गदर्शन सदा उसके साथ है (भजन 139:10); परमेश्वर का यही आश्वासन आज प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ भी है। परमेश्वर सदा ही आपको सही दिशा और सही मार्ग से ले जाना चाहता है। उसके हाथों में अपने जीवनों को समर्पित करके निशचिंत हो जाएं; आपको परमेश्वर से बेहतर कोई मार्गदर्शक कभी नहीं मिल सकता। सी. पी. हिया


गलत मार्ग पर चलने से बचने के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलते रहें।

मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। - भजन 32:8

बाइबल पाठ:  भजन 139:1-10
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 25-26


रविवार, 16 नवंबर 2014

कार्य और सामर्थ


   1924 में जौनी नामक एक बालक ने, जिसे बास्केटबॉल खेलना बहुत अच्छा लगता था, गाँव के एक छोटे से स्कूल से आठवीं कक्षा की परीक्षा पास करी। उसके पिता का दिल अपने बेटे के लिए प्रेम से तो भरा था, किन्तु बेटे के स्कूल पास कर लेने पर उसे कोई ईनाम दे पाने के लिए उनकी जेब खाली थी। इसलिए जौनी के पिता ने उसे एक कार्ड पर जीवन निर्वाह के 7 सिद्धांत लिख कर ईनाम के रूप में दिए, और उसे प्रोत्साहित किया कि वह उनका प्रतिदिन पालन करना आरंभ कर दे। उन सात सिद्धांतों में से तीन थे: अच्छी पुस्तकों का, विशेष कर परमेश्वर के वचन बाइबल का प्रतिदिन गहराई के साथ अध्य्यन करना; प्रत्येक दिन को अपनी सर्वश्रेष्ठ कृति बनाने का प्रयास करना; और, प्रतिदिन अपने मार्गदर्शन के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करना और उससे मिलने वाली आशीषों के लिए प्रतिदिन उसका धन्यवादी बने रहना।

   अपने सारे जीवन भर जौनी परमेश्वर से सामर्थ माँग कर अपना प्रत्येक दिन व्यतीत करता रहा। बड़ा होकर वह एक उतकृष्ठ बास्केटबॉल खिलाड़ी बना जिसने परड्यू विश्वविद्यालय में तीन बार सर्वश्रेष्ठ अमेरीकी बास्केटबॉल खिलाड़ी होने का खिताब जीता, और फिर आगे चलकर वह तब तक का सर्वश्रेष्ठ बास्केटबॉल प्रशिक्षक भी बना। जब 99 वर्ष की आयु में प्रशिक्षक जौन वुडेन की मृत्यु हुई, वह मृत्योप्रांत सबसे अधिक अपने चरित्र, अपने विश्वास और अनेक जीवनों को प्रभावित करने के लिए सराहे गए।

   परमेश्वर का वचन बाइबल आपके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन और उन्नति लाने की सामर्थ रखती है। उसका हर खण्ड परमेश्वर के अद्भुत ज्ञान तथा सामर्थ से परिपूर्ण है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को एक छोटी सी प्रार्थना सिखाई (मत्ती 6:9-13); किन्तु इस छोटी सी प्रार्थना में परमेश्वर और उससे हमारे संबंध के बारे में विलक्षण बातें हैं। यह प्रार्थना सिखाती है कि परमेश्वर से हमारा संबंध पिता और सन्तान का है और हम इसी संबंध के आधार पर प्रार्थना में उसके सम्मुख निसंकोच आ सकते हैं; उसकी आराधना और स्तुति कर सकते हैं (पद 9); हमें परमेश्वर के राज्य और उसकी इच्छा के खोजी होना चाहिए (पद 10); अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उस पर भरोसा रखना चाहिए (पद 11); और उससे क्षमा, छुटकारा तथा सामर्थ लेते रहना चाहिए (पद 12-13)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की यह अद्भुत शिक्षाएं, जैसे जौनी के जीवन में वैसे ही हमारे जीवनों में भी अद्भुत कार्य कर सकती हैं और हमें सामर्थ प्रदान कर सकती हैं कि हम भी अपने चरित्र, अपने विश्वास और अनेक जीवनों को प्रभावित करने के लिए जाने तथा सराहे जाने वाले व्यक्ति हो सकें। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


प्रभु यीशु के प्रति समर्पण प्रतिदिन निर्वाह की बुलाहट है।

जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। - भजन 119:9

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-15
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Matthew 6:8 सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। 
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन। 
Matthew 6:14 इसलिये यदि तुम मनुष्य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा। 
Matthew 6:15 और यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा न करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 22-24


शनिवार, 15 नवंबर 2014

वर्णन


   बच्चों की प्रार्थनाएं हमें दिखाती हैं कि वे परमेश्वर के बारे में क्या विचार रखते हैं। हाल ही में मैंने दो प्रार्थनाएं पढ़ीं:
   - "प्रीय परमेश्वर, इसका क्या अर्थ हुआ कि आप ’जलन रखने वाले’ परमेश्वर हैं? मैंने तो सोचा था कि आप ही के पास तो सब कुछ है।"

   - "मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि नारंगी रंग बैंगनी रंग के साथ मेल खाएगा, जब तक कि आपके द्वारा मंगलवार शाम को बनाया गया सूर्यास्त का दृश्य मैंने नहीं देख लिया - वह बहुत अच्छा था।"

   पहले बच्चे की समझ है कि क्योंकि परमेश्वर हर चीज़ का सृष्टिकर्ता और स्वामी है इसलिए उसे किसी बात की कोई घटी नहीं हो सकती; और दूसरे की सोच है कि परमेश्वर हमें बहुत सुन्दर दृश्य बना और दिखा सकता है। ये दोनों बच्चे अपनी अपनी सोच में सही हैं, लेकिन परमेश्वर अपने बारे में हमें क्या वर्णन देता है?

   जब परमेश्वर ने उसे इस्त्राएल को मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर वाचा किए हुए देश कनान में ले जाने के लिए चुना तब मूसा के सामने भी यही प्रश्न था और उसे इस बात का उत्तर चाहिए था। वह अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति और अगुवाई के लिए सुनिश्चित हो जाना चाहता था, इसलिए मूसा ने परमेश्वर से विनती करी कि अपने आप को प्रगट करे (निर्गमन 33:13, 18)। प्रत्युत्तर में परमेश्वर बादल में होकर उतर आया और अपने आप को मूसा पर यह कहते हुए प्रगट किया: "तब यहोवा ने बादल में उतर के उसके संग वहां खड़ा हो कर यहोवा नाम का प्रचार किया। और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है" (निर्गमन 34:5-7)।

   इस महान और अद्वितीय परमेश्वर के बारे में आज हम भी जान सकते हैं और हमारे साथ उसके संबंध के विषय में आश्वस्त हो सकते हैं, क्योंकि उसने अपने आप को अपने पुत्र, प्रभु यीशु मसीह के रूप में प्रकट किया है, अपने वचन बाइबल में अपना वर्णन दिया है। जैसे जैसे हम प्रभु यीशु और परमेश्वर के वचन बाइबल की निकटता में बढ़ते जाएंगे, हम परमेश्वर को, हमारे प्रति उसके प्रेम को, सदा हमारी भलाई करते रहने की उसकी लालसा को और अधिक सफाई से समझते जाएंगे। - ऐनी सेटास


परमेश्वर पिता के समान और तुल्य और कोई नहीं है।

क्योंकि उस[मसीह यीशु] में ईश्वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है। - कुलुस्सियों 2:9

बाइबल पाठ: निर्गमन 34:1-8, इब्रानियों 1:1-3
Exodus 34:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, पहिली तख्तियों के समान पत्थर की दो और तख्तियां गढ़ ले; तब जो वचन उन पहिली तख्तियों पर लिखे थे, जिन्हें तू ने तोड़ डाला, वे ही वचन मैं उन तख्तियों पर भी लिखूंगा। 
Exodus 34:2 और बिहान को तैयार रहना, और भोर को सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे साम्हने खड़ा होना। 
Exodus 34:3 और तेरे संग कोई न चढ़ पाए, वरन पर्वत भर पर कोई मनुष्य कहीं दिखाई न दे; और न भेड़-बकरी और गाय-बैल भी पर्वत के आगे चरते पाएं। 
Exodus 34:4 तब मूसा ने पहिली तख्तियों के समान दो और तख्तियां गढ़ी; और बिहान को सवेरे उठ कर अपने हाथ में पत्थर की वे दोनों तख्तियां ले कर यहोवा की आज्ञा के अनुसार पर्वत पर चढ़ गया। 
Exodus 34:5 तब यहोवा ने बादल में उतर के उसके संग वहां खड़ा हो कर यहोवा नाम का प्रचार किया। 
Exodus 34:6 और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य, 
Exodus 34:7 हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है। 
Exodus 34:8 तब मूसा ने फुर्ती कर पृथ्वी की ओर झुककर दण्डवत की।

Hebrews 1:1 पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। 
Hebrews 1:2 इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। 
Hebrews 1:3 वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 19-21