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रविवार, 27 नवंबर 2016

आराधना


   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 150 आराधना का ना केवल एक सुन्दर उदाहरण है, वरन आराधना करने का एक सुन्दर पाठ भी है। इस भजन से हम सीखते हैं कि परमेश्वर की आराधना कहाँ करनी है, क्यों करनी है, कैसे करनी है, और किसे करनी है। इन्हीं बिन्दुओं को थोड़ा विस्तार से देखते हैं:

   हम आराधना कहाँ करें? परमेश्वर के पवित्रस्थान में और उसकी सामर्थ्य से भरे आकाशमण्डल में (पद 1)। हम संसार में जहाँ कही भी हों, वही हमारे लिए सृष्टिकर्ता प्रभु परमेश्वर की आराधना करने का उपयुक्त स्थान है।

   हम आराधना क्यों करें? सर्व प्रथम परमेश्वर के पराक्रम के कार्यों के लिए। दूसरा, परमेश्वर की हस्ती के कारण; भजनकार उसकी आराधना उसकी अत्यन्त बड़ाई के कारण करता है (पद 2)। सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता परमेश्वर सारी सृष्टि पालनहार भी है।

   हम आराधना कैसे करें? ऊँचे स्वर के साथ; धीमी आवाज़ में; शान्तिदायक रीति से; उत्साहपूर्वक; लयबद्ध होकर; हिम्मत के साथ; अनायास भी; बेधड़क भी। दूसरे शब्दों में हम परमेश्वर की आराधना अनेकों प्रकार से और अनेकों अवसरों पर कर सकते हैं (पद 3-5)।

   आराधना कौन करे? "जितने प्राणी हैं सब के सब" (पद 6)। जवान और बुज़ुर्ग; अमीर और ग़रीब; निर्बल और बलवान; प्रत्येक जीवता प्राणी। परमेश्वर की इच्छा है कि जितनों को उसने जीवन का श्वास दिया है, वे उस श्वास का उपयोग उसकी सामर्थ और महानता के अंगीकार के लिए करें।

   आराधना परमेश्वर के प्रति, जो सर्वदा महिमा में राज्य करता है, कृतज्ञता की हमारी उत्साहपूर्ण अभिव्यक्ति है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


आराधना परमेश्वर द्वारा आनन्दित किए गए हृदय से निकलने वाले उद्गारों का प्रवाह है।

याह की स्तुति करो। हे मेरे मन यहोवा की स्तुति कर! मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूंगा; जब तक मैं बना रहूंगा, तब तक मैं अपने परमेश्वर का भजन गाता रहूंगा। - भजन 146:1-2

बाइबल पाठ: भजन 150
Psalms 150:1 याह की स्तुति करो! ईश्वर के पवित्रस्थान में उसकी स्तुति करो; उसकी सामर्थ्य से भरे हुए आकाशमण्डल में उसी की स्तुति करो! 
Psalms 150:2 उसके पराक्रम के कामों के कारण उसकी स्तुति करो; उसकी अत्यन्त बड़ाई के अनुसार उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:3 नरसिंगा फूंकते हुए उसकी स्तुति करो; सारंगी और वीणा बजाते हुए उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:4 डफ बजाते और नाचते हुए उसकी स्तुति करो; तार वाले बाजे और बांसुली बजाते हुए उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:5 ऊंचे शब्द वाली झांझ बजाते हुए उसकी स्तुति करो; आनन्द के महाशब्द वाली झांझ बजाते हुए उसकी स्तुति करो! 
Psalms 150:6 जितने प्राणी हैं सब के सब याह की स्तुति करें! याह की स्तुति करो!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 30-32
  • 1 पतरस 4


शनिवार, 26 नवंबर 2016

पकड़ो


   बहुत साल पहले, मैंने अपने बेटों के साथ मोन्टाना प्रांत की मैडिसन नदी में मछली पकड़ने और घूमने का आनन्द लिया; हमारे साथ सहायता के लिए वहाँ के दो व्यक्ति भी थे जो हमारे लिए नाव चला रहे थे, हमारा मार्ग-दर्शन कर रहे थे और मछली पकड़ने में हमारी सहायता कर रहे थे। जो सहायक मेरे साथ था, वह सारी उम्र उस नदी पर रहा था, और अच्छे से जानता था कि बड़ी ट्राउट मछलियाँ कहाँ होती हैं। वह शाँत रहने वाला व्यक्ति था और जितना समय वह हमारे साथ रहा उसने मुश्किल से दो दर्जन शब्द ही बोले होंगे, लेकिन उन थोड़े से शब्दों ने मेरे दिन बना दिए।

   हम अशांत पानी में छोटे चारे से मछली पकड़ रहे थे। मेरी दृष्टि भी पहले के मुकाबले कमज़ोर हो चुकी थी, और इस कारण बहुत सी मछलियाँ मेरे हाथ से निकल जा रही थीं। यह देखकर मेरे सहायक ने, जो धैर्य की प्रतिमूर्ति भी था, मुझे सचेत करना आरंभ किया; जैसे ही वह मछली को चारे की ओर बढ़ते देखता वह फुसफुसा कर बोलता, "पकड़ो"। जैसे ही मैं उसका संकेत सुनता, मैं अपनी बंसी का अगला भाग उठा लेता और मछली भी उस चारे के पीछे फंसी हुई उठी चली आती।

   मैंने अनेकों बार उस सहायक के बारे में और प्रभु यीशु द्वारा अपने शिष्यों को मनुष्यों का मछुआरा (मत्ती 4:18-19), कहने के बारे में सोचा है। हमारे पास प्रतिदिन लोगों को प्रभु के पास लाने के अनेकों अवसर होते हैं - लोग जो हमारे आसपास कुछ ऐसी "चीज़" को ढूँढ़ते हुए घूमते हैं जिसके लिए वे बेचैन हैं, जो उन्हें शान्ति दे सके। शान्ति के खोजी ऐसे लोगों को प्रभु यीशु, उसके प्रेम और उसमें मिलने वाली आशा तथा अनन्त शान्ति के बारे में बताना ही वे अवसर हैं जिन्हें यदि हम सचेत ना किए जाएं तो नज़रंदाज़ कर देंगे, अवसर को गवाँ देंगे।

   प्रत्येक के हृदय और आवश्यकता को जानने वाला हमारा महान प्रभु परमेश्वर हमें ऐसे मन और हृदय दे कि हम उसकी फुसफुसाहट को सुन सकें, और जब वह कहे "पकड़ो" तो उसके निर्देशों का पालन करें। - डेविड रोपर


जब भी परमेश्वर का आत्मा उभारे, उस के कहे अनुसार कार्य करें।

उसने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। - मत्ती 4:18-19

बाइबल पाठ: लूका 5:1-10
Luke 5:1 जब भीड़ उस पर गिरी पड़ती थी, और परमेश्वर का वचन सुनती थी, और वह गन्नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, तो ऐसा हुआ। 
Luke 5:2 कि उसने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं, और मछुवे उन पर से उतरकर जाल धो रहे थे। 
Luke 5:3 उन नावों में से एक पर जो शमौन की थी, चढ़कर, उसने उस से बिनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले, तब वह बैठकर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा। 
Luke 5:4 जब वे बातें कर चुका, तो शमौन से कहा, गहिरे में ले चल, और मछिलयां पकड़ने के लिये अपने जाल डालो। 
Luke 5:5 शमौन ने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा; तौभी तेरे कहने से जाल डालूंगा। 
Luke 5:6 जब उन्होंने ऐसा किया, तो बहुत मछिलयां घेर लाए, और उन के जाल फटने लगे। 
Luke 5:7 इस पर उन्होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे, संकेत किया, कि आकर हमारी सहायता करो: और उन्होंने आकर, दोनों नाव यहां तक भर लीं कि वे डूबने लगीं। 
Luke 5:8 यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पांवों पर गिरा, और कहा; हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्योंकि मैं पापी मनुष्य हूं। 
Luke 5:9 क्योंकि इतनी मछिलयों के पकड़े जाने से उसे और उसके साथियों को बहुत अचम्भा हुआ। 
Luke 5:10 और वैसे ही जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना को भी, जो शमौन के सहभागी थे, अचम्भा हुआ: तब यीशु ने शमौन से कहा, मत डर: अब से तू मनुष्यों को जीवता पकड़ा करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 27-29
  • 1 पतरस 3


शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

आश्वस्त


   परिवार के रूप में एकसाथ होने का यह छुट्टी का हमारा आखिरी समय था; इसके पश्चात हमारे सबसे बड़े बेटे ने कॉलेज चले जाना था। समुद्र तट के निकट के उस चर्च में हम एक साथ एक पंक्ति में अन्तिम बेन्च पर बैठे हुए थे, और अपने पाँचों बच्चों को सुव्यवस्थित बैठा देख कर मेरा हृदय प्रेम से भर उठा। आते समय में उन पर आने वाले दबावों और जिन चुनौतियों का उन्हें सामना करना पड़ेगा, उसका विचार करके मैंने मन ही में प्रार्थना करी, "प्रभु, कृपया इन्हें अपने निकट बनाए रखना और इनके आत्मिक जीवन की रक्षा करना।

   चर्च सभा में गाए गए अन्तिम स्तुति-गीत का कोरस बहुत उत्साहवर्धक था, वह परमेश्वर के वचन बाइबल के 2 तिमुथियुस 1:12 पर आधारित था जहाँ लिखा है: "इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है" इस से मुझे बहुत शांति मिली क्योंकि मैं आश्वस्त हुई कि परमेश्वर उनकी आत्माओं की रक्षा करेगा।

   इस बात को कई वर्ष बीत चुके हैं। इस समय में मेरे कुछ बच्चों के लिए इधर-उधर भटकने के, और कुछ के लिए पूर्णतया विद्रोह कर देने के अवसर हुए हैं। कभी कभी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को लेकर मन में संदेह भी आए हैं। ऐसे में मुझे बाइबल का प्रमुख पात्र अब्राहम स्मरण हो आता है; वह परिस्थितियों में पड़कर लड़खड़ाया तो परन्तु परमेश्वर से उसे मिली प्रतिज्ञाओं (उत्पत्ति 15:5-6; रोमियों 4:20-21) में विश्वास को लेकर कभी भी गिरा नहीं। वर्षों की प्रतीक्षा और अपने ही तरीके से परमेश्वर के कार्य को आगे बढ़ाने के असफल प्रयत्नों के बावजूद, अब्राहम परमेश्वर की प्रतिज्ञा को थाम कर चलता रहा जब तक कि इसहाक का जन्म नहीं हो गया।

   भरोसा रखने का स्मरण दिलाने वाली यह बात मुझे प्रोत्साहित करती है। हम प्रार्थना में परमेश्वर के सामने अपने निवेदन रखते हैं। हम स्मरण रखते हैं कि उसे हमारी चिंता रहती है। हम जानते हैं कि वह सर्वसामर्थी है। उसमें भरोसा रखकर हम आश्वस्त रहते हैं कि वह जो भी करेगा हमारी भलाई ही के लिए करेगा। - मेरियन स्ट्राउड


धैर्य के कुछ पाठ सीखने में लंबा समय लगता है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: रोमियों 4:16-22
Romans 4:16 इसी कारण वह विश्वास के द्वारा मिलती है, कि अनुग्रह की रीति पर हो, कि प्रतिज्ञा सब वंश के लिये दृढ़ हो, न कि केवल उसके लिये जो व्यवस्था वाला है, वरन उन के लिये भी जो इब्राहीम के समान विश्वास वाले हैं: वही तो हम सब का पिता है। 
Romans 4:17 जैसा लिखा है, कि मैं ने तुझे बहुत सी जातियों का पिता ठहराया है उस परमेश्वर के साम्हने जिस पर उसने विश्वास किया और जो मरे हुओं को जिलाता है, और जो बातें हैं ही नहीं, उन का नाम ऐसा लेता है, कि मानो वे हैं। 
Romans 4:18 उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि तेरा वंश ऐसा होगा वह बहुत सी जातियों का पिता हो। 
Romans 4:19 और वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्वास में निर्बल न हुआ। 
Romans 4:20 और न अविश्वासी हो कर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ हो कर परमेश्वर की महिमा की। 
Romans 4:21 और निश्चय जाना, कि जिस बात की उसने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरी करने को भी सामर्थी है। 
Romans 4:22 इस कारण, यह उसके लिये धामिर्कता गिना गया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 24-26
  • 1 पतरस 2


गुरुवार, 24 नवंबर 2016

उपस्थिति और आशा


   जब मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल से यिर्मयाह 1 से 4 का खण्ड पढ़ने के लिए खोला तो उस खण्ड के शीर्षक: "विलाप के समय में आशा" ने मुझे चकित किया; मैं लगभग रो ही पड़ी। मेरे लिए इस शीर्षक का समय बिलकुल उचित था, क्योंकि उन दिनों मैं अपनी माँ के देहाँत के बाद शोक के समय से निकल रही थी।

   उससे पहले दिन भी, अपने पास्टर द्वारा दिए गए प्रवचन को सुनकर भी मैंने कुछ ऐसा ही अनुभव किया। उस प्रवचन का शीर्षक था "सताव में आनन्दित होना"; उसे उन्होंने 1 पतरस 1:3-9 से लिया था। उस प्रवचन के दौरान उन्होंने अपने जीवन से एक उदाहरण दिया: उनके पिता के देहाँत की पहली बरसी का। वह प्रवचन अनेकों के लिए बहुत अर्थपूर्ण तो था ही, परन्तु मेरे लिए तो जैसे यह परमेश्वर से आने वाला उपहार था। यह और अन्य ऐसी घटनाएं, तथा परमेश्वर के वचन की बातें, इस बात का संकेत थे कि मेरे शोक के समय में भी परमेश्वर ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा है।

   यद्यपि शोक का मार्ग कठिन होता है, लेकिन उस में भी परमेश्वर हमारे साथ अपनी अटल उपस्थिति के संकेत पहुँचाता रहता है। जब इस्त्राएलियों को ढिठाई और परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के करण वाचा किए हुए देश से निकलने का दण्ड सहना पड़ा, तब भी परमेश्वर ने यिर्मयाह जैसे भविष्यद्वक्ताओं को उनके पास भेज कर उन्हें आशा दी कि पश्चाताप द्वारा परमेश्वर के साथ उनका मेल-मिलाप फिर से हो सकता है। और उन्हें, जिन्हें वह परीक्षा के समय में से होकर लिए चलता है, वह अपनी उपस्थिति का एहसास अपने विश्वासियों के समुदाय से मिलने वाले प्रेम और देखभाल में होकर करवाता है: "सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो" (1 पतरस 1:22)।

   पृथ्वी पर आने वाली परीक्षाओं के समय में परमेश्वर की उपस्थिति के ये संकेत परमेश्वर के इस वायदे की खराई को दर्शाते हैं कि प्रभु यीशु के पुनरुत्थान के समान जब हम मसीही विश्वासियों का भी वैसा ही पुनरुत्थान होगा, तो प्रभु परमेश्वर की अनन्तकाल की उपस्थिति में परम आनन्द से परिपूर्ण अनन्त जीवन की भव्य आशा हमारी प्रतीक्षा कर रही है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमें अपने आँसुओं के लिए कभी शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। - डिकिन्स

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:3-4

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:1-9
1 Peter 1:1 पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बिथुनिया में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं। 
1 Peter 1:2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। 
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये। 
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिस की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। 
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। 
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। 
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। 
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 22-23
  • 1 पतरस 1


बुधवार, 23 नवंबर 2016

क्षमा


   दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान, नेदेरलैन्डस में रहने वाला कोरी टेन बूम का परिवार घड़ियाँ बनाने का कार्य करता था, और वे यहूदी परिवारों को नाट्ज़ी आताताईयों से बचाने में सक्रीय भूमिका निभा रहे थे। यहूदियों के लिए उनकी इस सहायता के कारण अन्ततः उन सब को कैद करके नज़रबन्दी-शिविर में डाल दिया गया, जहाँ 10 दिन बाद कोरी के पिता का देहान्त हो गया। कोरी कि बहन बेट्सी का भी उसी शिविर में देहांत हुआ। जब बेट्सी और कोरी शिविर में साथ थे, तो बेट्सी के मसीही विश्वास ने कोरी के मसीही विश्वास को और दृढ़ किया।

   कोरी के इसी विश्वास ने उसे योग्य किया कि वह उन निर्मम आताताई शिविर के पहरेदारों को क्षमा कर सके। जबकि उन शिविरों के बन्द होने के बाद उन सताने वालों के प्रति नफरत और बदले की भावना अनेकों जीवनों को बरबाद कर रही थी, कोरी ने सत्य को पहचाना: नफरत उसे ही अधिक हानि पहुँचाती है जो नफरत अपने अन्दर पलने देता है, चाहे उस नफरत का कारण कितना ही जायज़ क्यों ना हो।

   कोरी के समान, हम में से प्रत्येक के पास यह अवसर होता है कि अपने बैरियों तथा शत्रुओं को क्षमा करें, उनसे प्रेम करें। क्षमा करना उस अपराध का ना तो इन्कार करता है और ना ही उसे सही होने का बहाना देता है, परन्तु जब हम क्षमा करते हैं तो हम संसार के सामने अपने प्रभु परमेश्वर और उस में हमारे विश्वास को व्यावाहरिक रूप में दिखाते हैं; क्योंकि हमारे प्रभु ने हम से कहा है: "और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो" (इफिसियों 4:32)।

   यदि आप उसे अपने जीवन में यह करने दें तो परमेश्वर आपकी सहायता करेगा कि प्रत्येक क्रोधपूर्ण दुर्भावना आपके जीवन से दूर हो जाए तथा उसके पवित्रात्मा का गहरा कार्य आपके जीवन को संवार एवं सुधार दे, जिससे आप में होकर हमारा तथा समस्त जगत का उद्धाकर्ता मसीह यीशु दूसरों को व्यावाहरिक रूप में दिखाई दे। - रैंडी किलगोर


जब हम किसी को क्षमा करते हैं तब उस समय हम अपने जीवन के 
किसी भी अन्य पल की अपेक्षा मसीह यीशु की समानता में अधिक होते हैं।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। 
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो। 
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। 
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 20-21
  • याकूब 5


मंगलवार, 22 नवंबर 2016

शोक


   बीच बॉयज़ बैण्ड के दो सदस्यों, ब्रायन विलसन और माईक लव ने नवंबर 1963 में एक अनूठा प्रेम-गीत लिखा जो उनकी विशिष्ट आशावादी शैली से बिलकुल भिन्न था; वह खोए हुए प्रेम के बारे में लिखा गया शोकपूर्ण गीत था। बाद में माईक ने कहा, "ऐसी हानि चाहे जितनी भी कठिन क्यों ना हो, जो एक भली बात उस से निकल कर आती है वह है कि आपको प्रेम करने का अनुभव तो हुआ।" उन्होंने उस गीत का शीर्षक रखा "The Warmth of the Sun." गीत लिखने के लिए शोक का उत्प्रेरक होना कोई नई बात नहीं है; अनेकों कवियों और गीतकारों ने दुःख भरे अनुभवों में होकर अति उत्तम कविताएं और गीत लिखें हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम देखते हैं कि दाऊद के सबसे मर्मस्पर्शी भजनों में से कुछ गहरी व्यक्तिगत हानि के समय में लिखे गए, जैसे कि भजन 6, जिसके शब्द शोक से भरे हैं। यद्यपि हमें यह नहीं बताया गया है कि इस भजन को लिखते समय दाऊद किस परिस्थिति से होकर निकल रहा था, परन्तु उसका शोक प्रकट है: "मैं कराहते कराहते थक गया; मैं अपनी खाट आंसुओं से भिगोता हूं; प्रति रात मेरा बिछौना भीगता है। मेरी आंखें शोक से बैठी जाती हैं, और मेरे सब सताने वालों के कारण वे धुन्धला गई हैं" (पद 6-7)।

   लेकिन यह भजन का अन्त नहीं है। दाऊद ने दर्द और हानि को सहा, परन्तु साथ ही उसने परमेश्वर की सांत्वना का भी अनुभव किया; इसलिए उसने आगे, भजन के अन्त में लिखा: "यहोवा ने मेरा गिड़गिड़ाना सुना है; यहोवा मेरी प्रार्थना को ग्रहण भी करेगा" (पद 9)।

   अपने शोक में ना केवल दाऊद ने एक भजन पाया, उसने परमेश्वर पर विश्वास रखने का कारण, जिसकी विश्वासयोग्यता जीवन की हर कठिन परिस्थिति में भी साथ बनी रहती है, भी पाया। परमेश्वर की उपस्थिति की गरमाहट में, हमारे शोक को भी आशा का परिपेक्ष मिल जाता है। - बिल क्राउडर


दुःख भरा गीत हमारे हृदयों को परमेश्वर की ओर मोड़ सकता है; 
जिसका आनन्द अनन्तकाल का है।

तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है; ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो। हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूंगा। - भजन 30:11-12

बाइबल पाठ: भजन 6
Psalms 6:1 हे यहोवा, तू मुझे अपने क्रोध में न डांट, और न झुंझलाहट में मुझे ताड़ना दे। 
Psalms 6:2 हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं कुम्हला गया हूं; हे यहोवा, मुझे चंगा कर, क्योंकि मेरी हडि्डयों में बेचैनी है। 
Psalms 6:3 मेरा प्राण भी बहुत खेदित है। और तू, हे यहोवा, कब तक? 
Psalms 6:4 लौट आ, हे यहोवा, और मेरे प्राण बचा अपनी करूणा के निमित्त मेरा उद्धार कर। 
Psalms 6:5 क्योंकि मृत्यु के बाद तेरा स्मरण नहीं होता; अधोलोक में कौन तेरा धन्यवाद करेगा? 
Psalms 6:6 मैं कराहते कराहते थक गया; मैं अपनी खाट आंसुओं से भिगोता हूं; प्रति रात मेरा बिछौना भीगता है। 
Psalms 6:7 मेरी आंखें शोक से बैठी जाती हैं, और मेरे सब सताने वालों के कारण वे धुन्धला गई हैं।
Psalms 6:8 हे सब अनर्थकारियों मेरे पास से दूर हो; क्योंकि यहोवा ने मेरे रोने का शब्द सुन लिया है। 
Psalms 6:9 यहोवा ने मेरा गिड़गिड़ाना सुना है; यहोवा मेरी प्रार्थना को ग्रहण भी करेगा। 
Psalms 6:10 मेरे सब शत्रु लज्जित होंगे और बहुत घबराएंगे; वे लौट जाएंगे, और एकाएक लज्जित होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 18-19
  • याकूब 4


सोमवार, 21 नवंबर 2016

ध्यान


   यरूशालेम के निकट स्थित अबु घोष नामक गाँव के एक रेस्ट्रॉन्ट के मालिक, जॉदत इब्राहिम, ने अपने ग्राहकों को 50% छूट देने की घोषणा करी यदि वे जितने समय उसके रेस्ट्रॉन्ट में बैठते हैं, उतने समय तक अपने मोबाइल फोन बन्द रखें। जॉदत का मानना है कि स्मार्टफोन के कारण भोजन करते समय का वातावरण संगति और संवाद से हटकर फोन पर सर्फिंग, टेक्सटिंग, और व्यावसायिक बातचीत करते रहने का हो गया है। जॉदत कहते हैं, "टेक्नॉलॉजी बहुत अच्छी चीज़ है; परन्तु जब आप परिवार और मित्र जनों के साथ होते हैं, तो आधा घण्टा थम कर भोजन तथा संगति का आनन्द लें।"

   हमारे लिए, संसार की कितनी ही बातों के द्वारा, दूसरों के या प्रभु यीशु के प्रति अपने संबंधों में, उन पर से अपना ध्यान हटा लेना कितना सरल हो गया है। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि आत्मिक ध्यान के भंग होने का आरंभ मन के संवेदनहीन हो जाने, कानों के कम सुनने, और आँखों से कम दिखने के साथ होता है (मत्ती 13:15)। बीज बोने वाले व्यक्ति के उदाहरण के द्वारा, प्रभु यीशु ने उन बीजों की, जो झाड़ियों में गिरे थे, तुलना ऐसे व्यक्ति से करी जो परमेश्वर का वचन सुनता तो है परन्तु जिसका मन और ही बातों पर केन्द्रित होता है; जिस कारण वह: "...वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्‍ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता" (मत्ती 13:22)।

   प्रतिदिन ऐसा समय निकालना, जिस में हम संसार और संसार की बातों से ध्यान हटा कर, अपना मन और ध्यान प्रभु यीशु और उसकी बातों पर लगाएं, हमारे लिए बहुत लाभदायक होगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित करने से बाकी सब कुछ स्वतः ही सही परिपेक्ष में आ जाता है।

इसलिये पहिले तुम उस [परमेश्वर] के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:33

बाइबल पाठ: मत्ती 13:13-23
Matthew 13:13 मैं उन से दृष्‍टान्‍तों में इसलिये बातें करता हूं, कि वे देखते हुए नहीं देखते; और सुनते हुए नहीं सुनते; और नहीं समझते। 
Matthew 13:14 और उन के विषय में यशायाह की यह भविष्यद्ववाणी पूरी होती है, कि तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं; और आंखों से तो देखोगे, पर तुम्हें न सूझेगा। 
Matthew 13:15 क्योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्होंने अपनी आंखें मूंद लीं हैं; कहीं ऐसा न हो कि वे आंखों से देखें, और कानों से सुनें और मन से समझें, और फिर जाएं, और मैं उन्हें चंगा करूं। 
Matthew 13:16 पर धन्य है तुम्हारी आंखें, कि वे देखती हैं; और तुम्हारे कान, कि वे सुनते हैं। 
Matthew 13:17 क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं, कि बहुत से भविष्यद्वक्ताओं ने और धर्मियों ने चाहा कि जो बातें तुम देखते हो, देखें पर न देखीं; और जो बातें तुम सुनते हो, सुनें, पर न सुनीं। 
Matthew 13:18 सो तुम बोने वाले का दृष्‍टान्‍त सुनो। 
Matthew 13:19 जो कोई राज्य का वचन सुनकर नहीं समझता, उसके मन में जो कुछ बोया गया था, उसे वह दुष्‍ट आकर छीन ले जाता है; यह वही है, जो मार्ग के किनारे बोया गया था। 
Matthew 13:20 और जो पत्थरीली भूमि पर बोया गया, यह वह है, जो वचन सुनकर तुरन्त आनन्द के साथ मान लेता है। 
Matthew 13:21 पर अपने में जड़ न रखने के कारण वह थोड़े ही दिन का है, और जब वचन के कारण क्‍लेश या उपद्रव होता है, तो तुरन्त ठोकर खाता है। 
Matthew 13:22 जो झाड़ियों में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनता है, पर इस संसार की चिन्‍ता और धन का धोखा वचन को दबाता है, और वह फल नहीं लाता। 
Matthew 13:23 जो अच्छी भूमि में बोया गया, यह वह है, जो वचन को सुनकर समझता है, और फल लाता है कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजेकल 16-17
  • याकूब 3