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रविवार, 9 अप्रैल 2017

पहचान


   हम समय समय पर ऐसे लोगों के बारे में पढ़ते-सुनते रहते हैं जो इस बात से आहत रहते हैं कि लोग उन्हें वह आदर और ओहदा नहीं देते हैं जिसके योग्य वे अपने आप को समझते हैं। इस बात से अप्रसन्न और क्रोधित होकर कुछ तो औरों पर यह कहकर चिल्लाते हैं, "क्या तुम जानते भी हो कि मैं कौन हूँ?" यदि आप को किसी से यह बात कहनी पड़े, तो इससे संबंधित एक और जानी पहचानी बात स्मरण हो आती है, "यदि आपको लोगों को यह बताना पड़ता है कि आप कौन हैं, तो संभवतः आप वह नहीं हैं जो आप अपने आप को समझते हैं!" ऐसे घमण्ड और अपनी दृष्टि में महत्वपूर्ण होने के बिलकुल विपरीत प्रभु यीशु मसीह का चरित्र है।

   पृथ्वी पर अपने जीवन और सेवकाई के अन्त समय के निकट जब प्रभु यीशु ने यरुशलेम में प्रवेश किया तो लोग उन की जयजयकार के नारे लगाने लगे (मत्ती 21:7-9)। जब नगर के लोगों ने उन नारे लगाने वालों से पूछा कि "यह कौन है?" तो उस भीड़ ने उत्तर दिया, "...यह गलील के नासरत का भविष्यद्वक्ता यीशु है" (मत्ती 21:10-11)। प्रभु यीशु अपने लिए कोई विशेष अधिकार या सम्मान माँगते हुआ नहीं आए थे; वरन वह दीन और नम्र बनकर आए ताकि अपने पिता परमेश्वर की इच्छानुसार अपने प्राण सारे संसार के सभी लोगों के उद्धार और पाप क्षमा के लिए बलिदान करें।

   जो बातें प्रभु यीशु ने कहीं और जो कार्य उन्होंने किए, उनसे उसे स्वतः ही उन्हें समाज के सभी लोगों से आदर मिला। असुरक्षित अनुभव करते रहने वाले शासकों और संसार के लोगों के समान उन्होंने कभी यह माँग नहीं रखी कि लोग उनका आदर करें। उनके द्वारा अपना बलिदान देने और उस बलिदान के समय सबसे अधिक दुःख उठाने का उनका समय, उनके जीवन का सबसे निम्न बिंदु था जहाँ वे निर्बल और असफल प्रतीत हो रहे थे। परन्तु प्रभु यीशु की पहचान और उद्देश्य की सामर्थ ने उन्हें इस कठिन और पीड़ादायक अन्धकारपूर्ण घड़ी से भी आदर एवं महिमा के साथ निकाला, और उनकी मृत्यु तथा पुनरुत्थान सारे संसार के सभी लोगों के लिए परमेश्वर के प्रेम और अनन्त जीवन का मार्ग बन गई; सारे संसार के इतिहास में सदा के लिए अभूतपूर्व और कभी भी किसी के भी द्वारा नहीं दोहराई जा सकने वाली घटना बन गई, बलिदान का ऐसा उत्कृष्ठ उदाहरण जो अनुपम था, है और सदा रहेगा।

   आज अपने कार्य के द्वारा प्रभु यीशु की संसार में अलग ही पहचान है, ऐसी पहचान जो हमारे जीवन और उपासना को पाने के सर्वथा योग्य हैं; उनकी इस पहचान को क्या आप समझते तथा स्वीकारते हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


यदि एक बार आपने प्रभु यीशु को उनकी वास्तविकता में पहचान लिया
 तो आप फिर कभी पहले के समान नहीं रह सकते हैं। - ओस्वॉल्ड चैम्बर्स

और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी, पुकार पुकार कर कहती थी, कि दाऊद की सन्तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना। जब उसने यरूशलेम में प्रवेश किया, तो सारे नगर में हलचल मच गई; और लोग कहने लगे, यह कौन है? - मत्ती 21:9-10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 13-14
  • लूका 10:1-24


शनिवार, 8 अप्रैल 2017

सुगन्धित


   मैं आभारी हूँ कि परमेश्वर ने हमें सूँघने की शक्ति दी है, जिससे हम जीवन की अनेकों सुगन्धों का आनन्द ले सकते हैं। मैं जानता हूँ कि मैं प्रातः दाढ़ी बनाने के बाद लगाए गए आफटर-शेव की ताज़गी भरी सुगन्ध का कैसा आनन्द लेता हूँ। या फिर बसन्त के समय में ताज़ी काटी गई घास की सुगन्ध कैसी मनभावनी होती है। मुझे अपने घर के पीछे के आँगन में बैठकर बाग़ से आने वाली गुलाबों की सुगन्ध का आनन्द लेना बहुत प्रीय है। और फिर अनेकों प्रकार के भोजनों की भिन्न प्रकार की सुगन्धों का तो कहना ही क्या।

   इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा लिखा हुई बात मेरा ध्यान आकर्षित करती है। पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को उनके द्वारा सप्रेम किए गए सहायता कार्यों के संबंध में अपनी पत्री में लिखा, "मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है" (फिलिप्पियों 4:18)। जब हम उनकी सहायता करने के बारे में विचार करते हैं,जो किसी आवश्यकता में हैं, तो बहुधा हम इसे केवल करने के लिए एक अच्छा कार्य मात्र समझ लेते हैं; या फिर ऐसा कार्य जो मसीह और मसीही विश्वासी के चरित्र के अनुरूप है। परन्तु पौलुस के द्वारा परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने हमारे लिए लिखवाया है कि दूसरों की सहायतार्थ स्वेच्छा से किया गया कार्य, परमेश्वर के सिंहासन स्थल को ऐसी सुगन्ध से भर देता है जिससे वह प्रसन्न होता है।

   यह आभास होना कि परमेश्वर के नाम में हमारे द्वारा किसी की सहायता के लिए किए गए कार्य एक सुगन्ध के समान परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं, उन सहायता-कार्यों को करने के लिए कितना बड़ा प्रोत्साहन और कितना अधिक प्रेरणादायक है।

   प्रतिदिन अपनी दिनचर्या में ध्यान करें कि आपके द्वारा किए जाने वाले ऐसे कार्यों की आवश्यकता किसे है; परमेश्वर से प्रार्थना करें कि आपको किसी ऐसे के पास लेकर जाए जिसकी आप कुछ सहायता कर सकें। औरों के लिए आशीष बनें; यह परमेश्वर को प्रसन्न करने वाली भली सुगन्ध होगा। - जो स्टोवैल


औरों के लिए आशीष बनना परमेश्वर से आशीष पाना है।

पर भलाई करना, और उदारता न भूलो; क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्न होता है। - इब्रानियों 13:16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-20
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है। 
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। 
Philippians 4:20 हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 10-12
  • लूका 9:37-62


शुक्रवार, 7 अप्रैल 2017

बुनियाद


   प्रशांत महासागर के किनारों के क्षेत्र में, जिसे "Ring of Fire" या "आग का घेरा" भी कहा जाता है, भूकंप बहुत आते हैं। सारे विश्व के 90% भूकंप और सारे विश्व में आए सबसे बड़े भूकंपों में से 81% इसी क्षेत्र में आए हैं। मुझे मालूम हुआ कि हौंग-कौंग शहर की अनेकों अनेकों इमारतें ग्रैनाइट पर बनाई गई हैं, जिससे भूकंप आने पर हानि बहुत कम हो। विश्व के भूकंप संभावित क्षेत्रों में बनाई गई इमारतों की बुनियाद बहुत महत्वपूर्ण होती है।

   प्रभु यीशु मसीह ने अपने अनुयायियों को सिखाया कि परमेश्वर को भाने वाले भले जीवनों के निर्माण के लिए भी सही बुनियाद का होना अनिवार्य है। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती रचित सुसमाचार में प्रभु यीशु ने कहा, "इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी" (मत्ती 7:24-25)। प्रभु यीशु मसीह और उसकी शिक्षाओं पर बनाया गया जीवन ही अब तथा भविष्य की हर परिस्थिति तथा परीक्षा में हमें स्थिरता, उन्नति और आशीष प्रदान करेगा।

   जब हम प्रभु की बुद्धिमता को अपने संबंधों, निर्णयों, और प्राथमिकताओं में हमें सही मार्गदर्शन प्रदान करने देते हैं, तो हम पाते हैं कि उससे हमें जीवन के निर्माण, स्थिरता तथा उन्नति के लिए सर्वोत्तम बुनियाद मिलती है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु मसीह ही वह सर्वोत्तम बुनियाद है 
जिस पर मज़बूत जीवन का निर्माण किया जा सकता है।

इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो। इफिसियों 2:19-22

बाइबल पाठ: मत्ती 7:21-29
Matthew 7:21 जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। 
Matthew 7:22 उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए? 
Matthew 7:23 तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ। 
Matthew 7:24 इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। 
Matthew 7:25 और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी। 
Matthew 7:26 परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। 
Matthew 7:27 और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।
Matthew 7:28 जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई। 
Matthew 7:29 क्योंकि वह उन के शास्‍त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी की नाईं उन्हें उपदेश देता था। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 7-9
  • लूका 9:18-36


गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

अडिग विश्वास


   मेरी पत्नी तथा मेरे परिवारों में हमारी दादी-नानी रहीं है जो 100 वर्ष की आयु से भी अधिक तक जीवित रहीं। मैंने संसार के लगभग सभी स्थानों में वृद्ध लोगों में एक प्रवृति देखी है; वे बीते समय की कठिन एवं कष्टदायक परिस्थितियों का स्मरण बहुत गहरी भावना के साथ करते हैं। वृद्ध लोग दूसरे विश्व-युद्ध की तथा सारे विश्व को प्रभावित करने वाली आर्थिक महामन्दी के समय की कहानियों और घटनाओं का आदान-प्रदान करते हैं; वे बर्फीले तूफानों, बचपन में खेलने के स्थानों, कॉलेज में कठिन आर्थिक परिस्थितियों में बिताए गए दिन जब लगातार तीन सप्ताह तक डिब्बा बन्द सूप और बासी डबल रोटी के साथ जीना पड़ता था आदि कठिनाईयों के विषय में बड़ी लगन के साथ बातचीत करते हैं।

   यह एक प्रकार का विरोधाभास ही है कि ये कठिन एवं कष्टदायक परिस्थितियाँ अकसर परस्पर संबंधों को और प्रगाढ़ तथा परमेश्वर पर विश्वास के बंधनों को और दृढ़ बना देती हैं। क्योंकि मैंने इस सिद्धांत को अपने निकट संबंधियों के जीवनों में सजीव अनुभव किया है इसलिए मैं परमेश्वर से संबंधित एक रहस्य को और बेहतर समझने पाया हूँ - परमेश्वर पर विश्वास का तात्पर्य अन्ततः उस पर हर बात के लिए रखा गया भरोसा है। यदि मैं परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार परमेश्वर पर विश्वास के चट्टान रूपी भरोसे पर खड़ा हूँ (भजन 18:2) तो सबसे बदतर परिस्थिति भी उस भरोसे के संबंध को तोड़ नहीं सकती है।

   ठोस-चट्टान जैसा अडिग विश्वास मुझे भरोसा दिलाता है कि वर्तमान की अव्यवस्था के बावजूद, परमेश्वर शासन कर रहा है, हर बात को जानता है और हर परिस्थिति को नियंत्रित करता है। चाहे मैं अपनी नज़रों में कितना भी महत्वहीन क्यों ना होऊँ, मुझसे प्रेम करने वाले मेरे प्रभु परमेश्वर के लिए मैं बहुत महत्वपूर्ण हूँ। कोई भी पीड़ा सदा बनी नहीं रहती है, और हर बुराई अन्ततः पराजित होती है।

   ठोस-चट्टान जैसा अडिग विश्वास मुझे दिखाता है कि मानव इतिहास का सबसे काला कृत्य, परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह का क्रूस पर मारा जाना, सारे मानव इतिहास के सबसे ज्योतिर्मय पल अर्थात उसके पुनरुत्थान और मृत्यु पर उसकी विजय के लिए आवश्यक पूर्व घटना थी। इस बलिदान, मृत्यु, पुनरुत्थान और विजय ने ही समस्त मानव जाति के लिए साधारण विश्वास के द्वारा सेंत-मेंत पाप क्षमा, उद्धार और परमेश्वर से मेल-मिलाप का मार्ग तैयार कर के दिया है। - फिलिप यैन्सी


चट्टान मसीह यीशु हमारी दृढ़ आशा का आधार है।

कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं। परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं। - रोमियों 8:35-37

बाइबल पाठ: भजन 18:1-3; 16-28
Psalms 18:1 हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूं। 
Psalms 18:2 यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। 
Psalms 18:3 मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूंगा; इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊंगा।
Psalms 18:16 उसने ऊपर से हाथ बढ़ाकर मुझे थाम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया। 
Psalms 18:17 उसने मेरे बलवन्त शत्रु से, और उन से जो मुझ से घृणा करते थे मुझे छुड़ाया; क्योंकि वे अधिक सामर्थी थे। 
Psalms 18:18 मेरी विपत्ति के दिन वे मुझ पर आ पड़े। परन्तु यहोवा मेरा आश्रय था। 
Psalms 18:19 और उसने मुझे निकाल कर चौड़े स्थान में पहुंचाया, उसने मुझ को छुड़ाया, क्योंकि वह मुझ से प्रसन्न था। 
Psalms 18:20 यहोवा ने मुझ से मेरे धर्म के अनुसार व्यवहार किया; और मेरे हाथों की शुद्धता के अनुसार उसने मुझे बदला दिया। 
Psalms 18:21 क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ। 
Psalms 18:22 क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा। 
Psalms 18:23 और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा। 
Psalms 18:24 यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था।
Psalms 18:25 दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता; और खरे पुरूष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है। 
Psalms 18:26 शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है। 
Psalms 18:27 क्योंकि तू दीन लोगों को तो बचाता है; परन्तु घमण्ड भरी आंखों को नीची करता है। 
Psalms 18:28 हां, तू ही मेरे दीपक को जलाता है; मेरा परमेश्वर यहोवा मेरे अन्धियारे को उजियाला कर देता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 4-6
  • लूका 9:1-17


बुधवार, 5 अप्रैल 2017

स्वर्ग


   मेरे मित्र गस का कुछ महीने पहले देहाँत हो गया; उसे मछली पकड़ना बहुत पसन्द था। अकसर स्पताहांत में वह निकट की एक झील में अपनी छोटी नाव में जाकर मछली पकड़ा करता था। कुछ दिन पहले मुझे उसकी बेटी हेडी का पत्र मिला; हेडी ने बताया कि उसके नाती-पोतों के साथ स्वर्ग के बारे में उसकी चर्चा चल रही है। उसके छः वर्षीय पोते ने, जिसे अपने परदादा गस के समान मछली पकड़ना पसन्द है, स्वर्ग की कल्पना करते हुए कहा, "वह बहुत सुन्दर है, और वहाँ पर यीशु परदादा गस को मछली पकड़ने के उत्तम स्थान दिखा रहे हैं।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब प्रेरित पौलुस ने उसे परमेश्वर से मिले स्वर्ग के दर्शन के बारे में बताया, तो उसका वर्णन करने के लिए उसके पास पर्याप्त शब्द नहीं थे। पौलुस ने लिखा, "कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं" (2 कुरिन्थियों 12:4)। स्वर्ग के तथ्यों का वर्णन हमारे शब्दों से बाहर है - शायद इसलिए क्योंकि हम मनुष्यों के पास उन तथ्यों को समझ पाने की बौद्धिक क्षमता नहीं है।

   चाहे स्वर्ग के बारे में कुछ और वर्णन जान लेने से हम कुछ दिलासा पा लें; परन्तु हम मसीही विश्वासियों के लिए आश्वसन तथा विश्वास का कारण स्वर्ग से संबंधित ज्ञान नहीं है। हमारे विश्वास और आश्वासन का आधार तो हमारे प्रभु परमेश्वर के संबंध में हमारा ज्ञान है, क्योंकि उस ज्ञान में ही जीवन और भक्ति से संबंधित सभी बातें हमें उपलब्ध करवाई गई हैं (2 पतरस 1:2-3)। क्योंकि मसीही विश्वासी हो जाने पर अब मेरा व्यक्तिगत संबंध प्रभु परमेश्वर के साथ हो गया है, मैं उसे जान जान गया हूँ, और यह भी जान गया हूँ कि वह कितना भला है, कितना विश्वासयोग्य है, इसलिए मैं इस जीवन और यहाँ की प्रत्येक बात को निःसंकोच इस भरोसे के साथ छोड़ सकता हूँ कि स्वर्ग बहुत सुन्दर और उत्तम स्थान होगा, जहाँ मेरा उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह होगा, जिसके साथ मैं संगति करूँगा और आनन्दित हूँगा; क्योंकि वह ऐसा करने वाला उद्धारकर्ता परमेश्वर है। - डेविड रोपर


स्वर्ग में मसीह के साथ होने के समान पृथ्वी की कोई बात नहीं है।

परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से संबंध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:2-3

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 22:1-7
Revelation 22:1 फिर उसने मुझे बिल्लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्वर और मेंम्ने के सिंहासन से निकल कर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। 
Revelation 22:2 और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे। 
Revelation 22:3 और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे। 
Revelation 22:4 और उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उन के माथों पर लिखा हुआ होगा। 
Revelation 22:5 और फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले का प्रयोजन न होगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा: और वे युगानुयुग राज्य करेंगे।
Revelation 22:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें विश्वास के योग्य, और सत्य हैं, और प्रभु ने जो भविष्यद्वक्ताओं की आत्माओं का परमेश्वर है, अपने स्वर्गदूत को इसलिये भेजा, कि अपने दासों को वे बातें जिन का शीघ्र पूरा होना अवश्य है दिखाए। 
Revelation 22:7 देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; धन्य है वह, जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें मानता है। 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 1-3
  • लूका 8:26-56


मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

असहनीय


   किसी ने एक पिता से कहा, "परमेश्वर कभी हमें हमारे झेल पाने की क्षमता से अधिक नहीं देता है।" उसने यह शब्द उस पिता के पाँच वर्षीय बेटे के कैंसर से निधन होने पर उसे सांत्वना देने के लिए कहे थे। परन्तु इन शब्दों से प्रोत्साहन पाने के स्थान पर उस पिता की हताशा और बढ़ गई, क्योंकि अब उसे ना केवल अपने पुत्र की मृत्यु का अत्याधिक दुःख था, परन्तु साथ ही वह इस बात की भी चिन्ता करने लग गया कि वह इस परिस्थिति को क्यों झेल नहीं पा रहा है। बेटे से बिछुड़ जाने के कारण उसका दुःख इतना अधिक था कि वह ठीक से साँस भी नहीं ले पा रहा था। उसे बस इतना पता था कि यह दुःख उसके लिए असहनीय है और उसे अत्यंत आवश्यकता थी कि परमेश्वर उसे दृढ़ता से थामे रहे।

   उस पिता से कहे गए कथन, "परमेश्वर कभी हमें हमारे झेल पाने की क्षमता से अधिक नहीं देता है" की पुष्टि करने के लिए बहुधा लोग परमेश्वर के वचन में कही गई "बात तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको" (1 कुरिन्थियों 10:13) का सहारा लेते हैं। परन्तु इस पद का संदर्भ दुःख उठाना नहीं, प्रलभनों एवं परीक्षाओं में पड़ना है। विपरीत परिस्थितियों से निकालने के लिए जो मार्ग परमेश्वर बना कर देता है, हम उस पर चलना चुन सकते हैं; परन्तु दुःखों से निकलने का मार्ग हम नहीं चुन सकते हैं।

   प्रभु यीशु ने भी अपने आने वाले दुःखों से निकलने के मार्ग के बारे में प्रार्थना की, और पिता परमेश्वर से कहा, "...हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो" (मत्ती 26:39)। लेकिन फिर भी हमारे उद्धार के लिए वह स्वेच्छा से उस दुःख भरे मार्ग से होकर चला, और सारे संसार के सभी लोगों के लिए, अपने बलिदान तथा पुनरुत्थान द्वारा, उद्धार का मार्ग बना कर दे दिया।

   जब जीवन के दुःख असहनीय लगें, तो विश्वास के साथ अपने आप को परमेश्वर की करुणा पर छोड़ दें, और उस असहनीय परिस्थिति में भी वह आपको थामे रखेगा, अपनी शान्ति एवं सांत्वना देगा। - ऐनी सेटास


यदि परमेश्वर आपके पीछे है और उसकी बाहें आपके नीचे हैं 
तो सामने जो कुछ भी हो आप निःसंकोच उसका सामना कर सकते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-46
Matthew 26:36 तब यीशु अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं। 
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। 
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। 
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। 
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? 
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है। 
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो। 
Matthew 26:43 तब उसने आकर उन्हें फिर सोते पाया, क्योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं। 
Matthew 26:44 और उन्हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की। 
Matthew 26:45 तब उसने चेलों के पास आकर उन से कहा; अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Matthew 26:46 उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है। 

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4
  • लूका 8:1-25


सोमवार, 3 अप्रैल 2017

जीवन


   अमेरिका के अभिनेता और हास्य कलाकार, जॉर्ज बर्न्स ने कहा, "यदि आप मुझसे पूछें कि लंबी आयु तक जीने का सबसे महत्वपूर्ण आधार क्या है, तो मैं कहूँगा चिन्ता और तनाव से मुक्त रहना। परन्तु यदि आप मुझ से यह ना भी पूछें, तो भी मैं आप से यही कहूँगा!" बर्न्स को, जो 100 वर्ष की आयु तक जीवित रहे, लोगों को हंसाना अच्छा लगता था, और प्रकट है कि वे अपने इस परामर्श का स्वयं भी पालन करते थे।

   परन्तु जब हमारे जीवन इतने अनिश्चित हैं, इतनी समस्याओं और आवश्यकताओं से भरे हैं, तो हम चिन्ता एवं तनाव से मुक्त कैसे रह सकते हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने, उन मसीही विश्वासियों को जिन्हें प्रथम शताब्दी में अपने मसीही विश्वास के कारण सताव में आकर एशिया में स्थान स्थान पर तितर-बित्तर होना पड़ा था, प्रोत्साहित करते हुए लिखा, "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है" (1 पतरस 5:6-7)।

   पतरस ने यह बात सताव एवं तकलीफों से बचने का मार्ग देने के लिए नहीं कही थी (पद 9), वरन इसलिए जिससे शैतान के हमलों के समय हम मसीही विश्वासी उन हमलों के विरुद्ध जयवंत होकर खड़े रहने की सामर्थ तथा शान्ति पा सकें (पद 8-10)। बजाए इसके कि हम चिन्ता और तनाव से ग्रसित होकर जीवन बिताएं, परमेश्वर ने हमें उसके प्रेम में आनन्दित रहने और उस प्रेम को औरों के साथ बाँटने के लिए चुना है।

   हमारा उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि हमारा जीवन कितने वर्षों का हो सकता है, वरन यह कि जीवन के जितने भी वर्ष परमेश्वर ने हमें दिए हैं उन्हें परमेश्वर के प्रेम की सेवकाई में भरपूरी से व्यय करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर मेरा पिता है, 
मैं अपने बारे में ऐसा कुछ भी नहीं सोच सकता हूँ जिसे वह भूल गया हो;
 इसलिए मुझे चिन्ता करने की क्या आवश्यकता है? - ओस्वॉल्ड चैंबर्स

जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा। परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है? - भजन 56:3-4

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:1-11
1 Peter 5:1 तुम में जो प्राचीन हैं, मैं उन की नाईं प्राचीन और मसीह के दुखों का गवाह और प्रगट होने वाली महिमा में सहभागी हो कर उन्हें यह समझाता हूं। 
1 Peter 5:2 कि परमेश्वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच में हैं रखवाली करो; और यह दबाव से नहीं, परन्तु परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आनन्द से, और नीच-कमाई के लिये नहीं, पर मन लगा कर। 
1 Peter 5:3 और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं, उन पर अधिकार न जताओ, वरन झुंड के लिये आदर्श बनो। 
1 Peter 5:4 और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने का नहीं। 
1 Peter 5:5 हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1 Peter 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1 Peter 5:7 और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 
1 Peter 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। 
1 Peter 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका साम्हना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं। 
1 Peter 5:10 अब परमेश्वर जो सारे अनुग्रह का दाता है, जिसने तुम्हें मसीह में अपनी अनन्त महिमा के लिये बुलाया, तुम्हारे थोड़ी देर तक दुख उठाने के बाद आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्‍त करेगा। 
1 Peter 5:11 उसी का साम्राज्य युगानुयुग रहे। आमीन। 

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 19-21
  • लूका 7:31-50