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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

चौकसी


     उसके स्कूल के लिए दरवाज़े के बाहर भाग जाने से पहले मैंने अपने बेटे से पूछा कि उसने अपने दांत साफ़ कर लिए थे कि नहीं। उसे सच बोलने के महत्त्व को समझाते हुए, मैंने उससे दोबारा यही प्रश्न पूछा। मेरी हलकी सी चेतावनी की परवाह किए बिना, उसने कुछ विनोद के साथ मुझ से कहा कि मुझे बाथरूम में एक सुरक्षा कैमरा लगवा लेना चाहिए। तब मुझे कुछ पूछने के आवश्यकता ही नहीं होगी, और मैं अपने आप जाँचने पाऊँगी कि उसने दांत साफ़ किए हैं अथवा नहीं, और वह भी झूठ बोलने के प्रलोभन से बचा रहेगा।

     चाहे सुरक्षा कैमरा की उपस्थिति हमारे लिए नियमों का पालन करने को स्मरण रखने में सहायक हो सकती है, परन्तु फिर भी ऐसे अनेकों स्थान होते हैं जहाँ हम बिना कैमरे द्वारा देखे रह सकते हैं, या उस से बच सकते हैं। हम सुरक्षा कैमरा से तो बच सकते हैं, या उसे झाँसा दे सकते हैं, परन्तु हम अपने आप को धोखा देते हैं यदि यह समझते हैं कि हम कभी भी परमेश्वर की दृष्टि से ओझल हो सकते हैं।

     परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में पूछा है, “फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?” (यिर्मयाह 23:24)। उसके इस प्रश्न में चेतावनी भी है और प्रोत्साहन भी। चेतावनी यह है की हम कभी परमेश्वर की दृष्टि से ओझल नहीं हो सकते हैं, कभी उसे धोखा नहीं दे सकते हैं, कभी उससे आगे नहीं निकल सकते हैं। हम जो कुछ भी करते हैं, उसे सब दिखता रहता है।

     प्रोत्साहन यह कि संसार या आकाश में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की चौकसी से बाहर हों। हम चाहे अपने आप को अकेला अनुभव करें, परमेश्वर फिर भी हमारे साथ होता है। हम चाहे जहाँ चले जाएँ, परन्तु उसके इस सत्य का एहसास हमें सदा प्रोत्साहित करता रहे कि हम उसके वचन के आज्ञाकारी बने रहें, क्योंकि वह हम पर चौकसी रखता है। - लीसा सामरा

 

हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की चौकसी के कभी बाहर नहीं होते हैं।


मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!  - भजन 139:7-8

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 23:20-24

यिर्मयाह 23:20 जब तक यहोवा अपना काम और अपनी युक्तियों को पूरी न कर चुके, तब तक उसका क्रोध शान्त न होगा। अन्त के दिनों में तुम इस बात को भली भांति समझ सकोगे।

यिर्मयाह 23:21 ये भविष्यद्वक्ता बिना मेरे भेजे दौड़ जाते और बिना मेरे कुछ कहे भविष्यद्वाणी करने लगते हैं।

यिर्मयाह 23:22 यदि ये मेरी शिक्षा में स्थिर रहते, तो मेरी प्रजा के लोगों को मेरे वचन सुनाते; और वे अपनी बुरी चाल और कामों से फिर जाते।

यिर्मयाह 23:23 यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ, जो दूर नहीं, निकट ही रहता हूँ?

यिर्मयाह 23:24 फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 33-34
  • प्रेरितों 24


बुधवार, 22 जुलाई 2020

आशा


     मेरे द्वारा सन 1988 से लेकर अब तक Our Daily Bread के लिए लिखे गए सैंकड़ों लेखों में से कुछ हैं जो मेरे मन में बस गए हैं। इनमें से एक लेख है जिसे मैंने 1990 के दशक के मध्य के समय लिखा था, जिसमें मैंने उस समय के बारे में बताया था जब हमारी तीनो बेटियाँ घर से बाहर या तो किसी कैम्प अथवा मिशन दौरे पर गई हुई थीं, और हमारा छः वर्षीय बेटा स्टीव हमारे साथ था।

     एक दिन स्टीव के साथ बाहर सैर पर जाते हुए, उसने कहा, “बिना मेलिस्सा के यह उतना मज़ेदार नहीं है” – मेलिस्सा उसकी आठ वर्षीय बहन थी, और दोनों की आपस में बहुत पटती थी। उस समय हम में से कोई नहीं जानता था कि उसके ये शब्द आगे कितने मार्मिक हो जाएँगे। कुछ वर्ष बाद, किशोरावस्था में मेलिस्सा की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई; और तब से उसके बिना जीवन वास्तव में “उतना मज़ेदार” नहीं रह गया है। समय के साथ उसके जाने का दुःख कम अवश्य हुआ है, परन्तु पूरी तरह से गया नहीं है, और न ही जाएगा। समय उस घाव को पूरी तरह कभी नहीं भरने पाएगा। परन्तु फिर भी कुछ है जो सहायता करता है – परमेश्वर को उसके वचन बाइबल में होकर सुनना, उस पर मनन करना, और उसकी शान्ति का स्वाद लेना।

     सुनना: “हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है” (विलापगीत 3:22)।

     मनन करना: “क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा” (भजन संहिता 27:5)।

     स्वाद लेना:  मेरे दु:ख में मुझे शान्ति उसी से हुई है, क्योंकि तेरे वचन के द्वारा मैं ने जीवन पाया है” (भजन 119:50)।

     जब हमारा कोई प्रिय जन जाता रहता है तो जीवन कभी पहले जैसा नहीं होने पाता है, परन्तु परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ आशा और शान्ति प्रदान करती हैं। - डेव ब्रैनन

 

परमेश्वर का वचन सच्ची शान्ति का स्त्रोत है।


तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है; और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती। - भजन 119:165

बाइबल पाठ: भजन 34:15-18

भजन संहिता 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।

भजन संहिता 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।

भजन संहिता 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।

भजन संहिता 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35


मंगलवार, 21 जुलाई 2020

शरण स्थान


     जब मैं ओक्लाहोमा में रहता था, तो मेरा एक मित्र था, जॉन, जो चक्रवाधी तूफानों का “पीछा” करता था। जॉन बड़े ध्यान से अपने समान अन्य तूफ़ान का पीछा करने वालों के और स्थानीय रडार यंत्र के साथ संपर्क में बना रहता था, और उनकी सहायता से एक सुरक्षित दूरी से लोगों को उस चक्रवाध की स्थिति, दिशा, और संभावित मार्ग बताता रहता था, जिससे जो लोग उस तूफ़ान के मार्ग में हों, वे अपनी सुरक्षा की तैयारी कर लें। एक दिन एक चक्रवाध ने अचानक और इतनी तीव्रता से अपनी दिशा बदली कि जॉन बड़े खतरे में पड़ गया। किन्तु संयोग से उसे एक शरण स्थान मिल गया, और वह वहाँ सुरक्षित रह सका।

     जॉन के उस दोपहर के अनुभव से मुझे एक अन्य विनाशकारी बात का स्मरण हो आता है – हमारे जीवनों में बसा हुआ पाप। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है, “परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है। फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है” (याकूब 1:14-15)। इस पद में पाप के दुष्परिणामों का एक क्रम दिया गया है। वह जो आरम्भ में अहानिकारक प्रतीत होता है, वही अचानक ही नियंत्रण से बाहर होकर विनाशकारी बन सकता है। परन्तु हम मसीही विश्वासियों को हमारा प्रभु परमेश्वर एक शरण स्थान प्रदान करता है, जो हमें सदा उपलब्ध रहता है।

     परमेश्वर का वचन हमें यह भी आश्वासन देता है कि कभी भी परमेश्वर हमें किसी परीक्षा में नहीं डालता है, और हम अपने बुरे या गलत चुनावों के लिए अपने आप को ही दोषी कह सकते हैं। परमेश्वर का आश्वासन है “तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको” (1 कुरिन्थियों 10:13)। जब हम उसकी ओर मुड़ते हैं, और परीक्षा की घड़ी में उससे सहायता की प्रार्थना करते हैं, तब हमारा प्रभु हमें उस परिस्थिति पर जयवंत होने तथा सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक सामर्थ्य एवं मार्गदर्शन भी उपलब्ध करवाता है।

     प्रभु यीशु सदा हमारा दृढ़ और विश्वसनीय शरण स्थान है। - जेम्स बैंक्स

 

जगत का उद्धारकर्ता प्रभु यीशु, हमारे जीवनों के तूफानों में हमारा शरण स्थान है।


परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरण स्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं। - भजन 73:28

बाइबल पाठ: याकूब 1:12-18

याकूब 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।

याकूब 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है।

याकूब 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है।

याकूब 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।

याकूब 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।

याकूब 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।

याकूब 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15


सोमवार, 20 जुलाई 2020

घर


     मेरे बेटे ने मुझ से पूछा, “हमें अपना घर छोड़कर दूसरे स्थान पर क्यों जाना पड़ रहा है?” किसी को भी, विशेषकर एक पाँच वर्षीय बालक को यह समझा पाना कठिन है कि घर क्या होता है। हम एक मकान छोड़ रहे थे, घर नहीं, इस अर्थ में कि घर वह स्थान है जहाँ हमारे प्रिय जन हैं; घर वह स्थान है जहाँ लौटने के लिए हम लालायित रहते हैं, चाहे दिन भर के काम के बाद, या किसी लंबी यात्रा के बाद।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि अपनी मृत्यु से कुछ ही घंटे पहले, प्रभु यीशु जब अपने शिष्यों के साथ ऊपर के कमरे में थे, तब उन्होंने उन से कहा, “तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो” (यूहन्ना 14:1)। क्योंकि प्रभु यीशु ने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी की थी, इसलिए शिष्य अपने भविष्य को लेकर दुविधा में थे। परन्तु प्रभु यीशु ने उनके साथ अपनी उपस्थिति के विषय उन्हें आश्वस्त किया, और उन्हें स्मरण करवाया कि वे फिर से उन्हें देखेंगे। प्रभु ने उन से कहा, “मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं” (पद 2)। स्वर्ग के बारे में बताने के लिए प्रभु अन्य शब्द भी प्रयोग कर सकते थे। परन्तु उन्होंने वो शब्द चुनें जो किसी असुविधाजनक या अपरिचित स्थान के बारे में नहीं थे, वरन ऐसे स्थान के बारे में थे जहाँ हमारा प्रिय जन, प्रभु यीशु स्वयं होगा।

     सी. एस. ल्युइस ने लिखा, “हमारी यात्रा में हमारा परमेश्वर पिता हमें अनेकों आरामदायक सरायों में लाकर हमें तरोताज़ा करता है, परन्तु हमें कभी यह सोचने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है कि हम उन्हें अपना घर समझ लें।” हम जीवन यात्रा के आरामदायक पड़ावों के लिए प्रभु परमेश्वर के धन्यवादी हो सकते हैं, परन्तु यह सदा स्मरण रखें कि हमारा वास्तविक घर स्वर्ग में है, जहाँ “हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे” (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)। कीला ओकोआ

 

हम प्रभु के साथ अनन्तकाल की राह देख रहे हैं।


तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:17

बाइबल पाठ: युहन्ना 14:1-14

यूहन्ना 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।

यूहन्ना 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।

यूहन्ना 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।

यूहन्ना 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।

यूहन्ना 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?

यूहन्ना 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

यूहन्ना 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।

यूहन्ना 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।

यूहन्ना 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।

यूहन्ना 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।

यूहन्ना 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।

यूहन्ना 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।

यूहन्ना 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।

यूहन्ना 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22



रविवार, 19 जुलाई 2020

क्रूस


     मेरा एक सहकर्मी, जो कैंसर से बच कर आया है, अपने डेस्क पर कांच का एक क्रूस सदा रखता है। उसे यह क्रूस उसके समान एक अन्य कैंसर से बच कर आए उसके एक मित्र ने दिया था, जिससे वह हर बात को क्रूस में से होकर देख सके। वह कांच का क्रूस उसे सदा परमेश्वर के प्रेम और उसके लिए परमेश्वर के भले उद्देश्यों को स्मरण दिलाता है।

     यह हम सभी मसीही विश्वासियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण विचार है, विशेषकर कठिन परिस्थितियों में; क्योंकि हमारे लिए परमेश्वर के प्रेम पर ध्यान केन्द्रित रखने से अधिक सरल अपनी ही समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित रखना होता है।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रेरित पौलुस का जीवन निःसंदेह क्रूस के दृष्टिकोण को सामने रखकर व्यतीत किया गया जीवन था। पौलुस ने अपने दुःख और सताव के समय के लिए कहा, “सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते” (2 कुरिन्थियों 4:9)। उसका विश्वास था कि कठिन समयों में भी परमेश्वर हम में होकर और हमारे लिए कार्य कर रहा है, “क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं” (2 कुरिन्थियों 4:17-18)।

     अनदेखी वस्तुओं को देखते रहने का अर्थ यह नहीं है कि हम अपनी समस्याओं का आंकलन कम या हलका करके करें। इस खंड पर अपनी व्याख्या में पॉल बार्नेट इसे समझाता है, “हमारे लिए परमेश्वर के उद्देश्यों पर आधारित भरोसा तो होना ही है ... दूसरी ओर हमें यह भी गंभीर बोध रहता है कि जिस आशा में हम जीते हुए कराहते हैं उसके साथ दुःख भी मिला हुआ है।”

     प्रभु यीशु ने क्रूस पर हमारे लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उसका प्रेम बहुत गहरा और बलिदान से भरा हुआ है। जब हम क्रूस के दृष्टिकोण से जीवन को देखते हैं, तो हमें उसका यही प्रेम और विश्वासयोग्यता दिखाई देती है, और उसका क्रूस हम में एक भरोसा उत्पन्न करता और बढ़ाता रहता है। -  एनी सेटास

 

हर बात को क्रूस के दृष्टिकोण से देखें।


क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ्य है। - 1 कुरिन्थियों 1:18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:8-18

2 कुरिन्थियों 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।

2 कुरिन्थियों 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।

2 कुरिन्थियों 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।

2 कुरिन्थियों 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरणहार शरीर में प्रगट हो।

2 कुरिन्थियों 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।

2 कुरिन्थियों 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय मे लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं।

2 कुरिन्थियों 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा।

2 कुरिन्थियों 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।

2 कुरिन्थियों 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।     

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40


शनिवार, 18 जुलाई 2020

अभिलाषा


     मेरे बैंक के एक कर्मचारी के पास की खिड़की पर फोर्ड मोटर कंपनी द्वारा उच्च प्रदर्शन के लिए बनाई गई शेल्बी कोबरा गाड़ी की एक फोटो लगी है। एक दिन बैंक में अपने कार्य से संबंधित लेन-देन करते हुए, मैंने उस कर्मचारी से उस फोटो के सम्बन्ध में पूछा कि क्या वह उसकी कार है? उसने उत्तर दिया, “नहीं; यह मेरी अभिलाषा है; मैं एक दिन इसे खरीदूँगा, और आज यही मुझे रोज़ प्रातः उठकर काम के लिए आने को प्रोत्साहित करता है।”

     मैं इस जवान व्यक्ति की अभिलाषा को समझ सकता हूँ। मेरे एक मित्र के पास यह गाड़ी हुआ करती थी, और एक बार मैंने इसे चलाया भी था। यह वास्तव में बहुत बलवंत गाड़ी है; परन्तु संसार की अन्य वस्तुओं के समान, यह भी जीवन जीने की अभिलाषा रखने का कारण नहीं हो सकती है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो परमेश्वर को छोड़ कर अन्य किसी भी बात में भरोसा रखते हैं, वे भजन 20 के भजनकार के अनुसार, झुकाए और गिराए जाएँगे।

     ऐसा इसलिए क्योंकि हमें परमेश्वर ने अपने लिए सृजा है, और बाकी सभी बातें व्यर्थ हैं। हम इस तथ्य को प्रतिदिन अपने जीवन में प्रमाणित होते हुए देखते हैं: हम कभी यह, तो कभी वह खरीदते रहते हैं, हमें लगता है कि वे वस्तुएँ हमें संतुष्टि प्रदान करेंगी, आनंदित करेंगी। परन्तु जैसे छोटे बच्चों को चाहे जितने भी उपहार दे दो, उन्हें कुछ और की लालसा लगी रहती है; और जो उपहार उन्हें मिलते हैं, उसके प्रति उनका उल्लास और उत्तेजना शीघ्र ही समाप्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी यही सोचते रहते हैं, अब इसके बाद और क्या लिया जाए? पूर्ण तृप्ति कभी नहीं मिलती है।

     संसार की कोई भी वस्तु हमें पूर्णतः संतुष्ट नहीं करने पाती है – वह चाहे कोई भली वस्तु ही क्यों न हो। उनके द्वारा अवश्य ही हमें कुछ आनंद तो मिलता है, परन्तु यह प्रसन्नता कुछ समय बाद धूमिल हो जाती है (1 यूहन्ना 2:17)। जैसा सी. एस. ल्यूइस ने कहा, “परमेश्वर अपने से बाहर हमें कोई प्रसन्नता और शान्ति नहीं दे सकता है; क्योंकि उसके बाहर वह है ही नहीं।” – डेविड एच. रोपर

 

प्रत्येक हृदय में एक अभिलाषा है, जिसे केवल प्रभु यीशु ही पूर्ण कर सकता है।


तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। - यूहन्ना 15:4

बाइबल पाठ: भजन 20:6-9

भजन संहिता 20:6 अब मैं जान गया कि यहोवा अपने अभिषिक्त का उद्धार करता है; वह अपने दाहिने हाथ के उद्धार करने वाले पराक्रम से अपने पवित्र स्वर्ग पर से सुनकर उसे उत्तर देगा।

भजन संहिता 20:7 किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।

भजन संहिता 20:8 वे तो झुक गए और गिर पड़े परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं।

भजन संहिता 20:9 हे यहोवा, बचा ले; जिस दिन हम पुकारें तो महाराजा हमें उत्तर दे।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17


शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

धन्य


     उस निराश विद्यार्थी ने दुखी होकर कहा, “यह मुझ से नहीं होगा।” उसे उस पृष्ठ पर केवल छपे हुए छोटे अक्षर, कठिन विचार, और कार्य पूरा करने की बेरहम सीमा ही दिखाई दे रही थी। उसे अपने शिक्षक की सहायता की आवश्यकता थी।

     जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा प्रचार किया गया पहाड़ी उपदेश पढ़ते हैं, तो हमें भी ऐसी ही निराशा का अनुभव हो सकता है। जब प्रभु हम से कहता है, “अपने शत्रुओं से प्रेम करो” (मत्ती 5:44); क्रोध करना हत्या करने के समान ही बुरा है (पद 22); कुदृष्टि व्यभिचार ही के बराबर है (पद 28); और यदि हम यह सोचने भी लग जाएं कि हम इन मानकों को निभा लेंगे, तो हमारा सामना “इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है ” (पद 48) से होता है।

     सुप्रसिद्ध प्रचारक ओस्वौल्ड चैम्बर्स ने कहा, “पहाड़ी उपदेश की शिक्षाएँ निराशा उत्पन्न करती हैं।” परन्तु उन्होंने इसे अच्छा ही समझा, क्योंकि “निराश होने पर ही हम, मानों कंगाल बनकर, उसी से प्राप्त करने के लिए प्रभु यीशु के पास आने के लिए तैयार होते हैं।” परमेश्वर कभी-कभी सहजज्ञान से उलट मार्ग के द्वारा कार्य करता है, जिससे वे जो यह जानते हैं कि वो अपने आप से कुछ नहीं कर सकते हैं, वे ही परमेश्वर के अनुग्रह प्राप्त करने के पात्र बन जाते हैं। जैसा प्रेरित पौलुस ने लिखा, “हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे” (1 कुरिन्थियों 1:26-27)।

     परमेश्वर की बुद्धिमता में, हमारा शिक्षक ही हमारा उद्धारकर्ता भी है। हम जब भी उसके पास विश्वास के साथ आते हैं, तो उसकी आत्मा के द्वारा हम उसकी धार्मिकता, पवित्रता, और छुटकारे का आनन्द लेने पाते हैं (पद 30), और उसके लिए जीवन जीने का अनुग्रह और सामर्थ्य प्राप्त करते हैं। इसी लिए प्रभु ने कहा, “धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है” (मत्ती 5:3)। - टिम गुस्ताफसन

 

परमेश्वर के पुत्र में होकर हम उसके राज्य में जीवन का आनन्द ले सकते हैं।


इसलिये व्यवस्था मसीह तक पहुंचाने को हमारा शिक्षक हुई है, कि हम विश्वास से धर्मी ठहरें। - गलतियों 3:24

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 1:26-31

1 कुरिन्थियों 1:26 हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए।

1 कुरिन्थियों 1:27 परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे।

1 कुरिन्थियों 1:28 और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए।

1 कुरिन्थियों 1:29 ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए।

1 कुरिन्थियों 1:30 परन्तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा।

1 कुरिन्थियों 1:31 ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38