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शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

दृष्टि

 

          बचपन में, मैं भी किसी भी अन्य बच्चे के समान ही शरारती थी, और अपनी शरारतों और बुराइयों को छिपाने के प्रयास करती थी, जिससे उनके लिए मुझे कोई दण्ड न मिले। लेकिन फिर भी अकसर मेरी माँ को तुरंत ही पता चल जाता था। मुझे अचंभा होता था कि वह कैसे मेरी शैतानियों के बारे में सब कुछ जान लेती थी। मैं जब भी अचंभित होकर उससे इसके बारे में पूछती, तो माँ का एक ही उत्तर होता था, “मेरे सिर के पीछे भी आँखें है।”  इस कारण जब भी उसकी पीठ मेरी ओर होती थी तो मैं बड़े ध्यान से उसके सिर को देखती रहती थी, कि उसकी उन आँखों को देखने पाऊँ – क्या वे आँखें अदृश्य थीं या उसके बालों से ढकी रहती थीं? बड़ी होते हुए, मैंने उसकी उन अतिरिक्त आँखों के प्रमाण को ढूँढना बन्द कर दिया, क्योंकि मुझे एहसास हो गया था कि मैं उतनी चतुर थी नहीं जितना मैं अपने आप को समझती थी। माँ की ध्यान से हम बच्चों पर लगी रहने वाली दृष्टि, हमारे प्रति उसके प्रेम और देखभाल का प्रमाण थी।

          मैं अपनी माँ की उस सतर्क दृष्टि और देखभाल के लिए बहुत कृतज्ञ हूँ (चाहे कभी-कभी मुझे लगता था कि मेरी शैतानी उसकी दृष्टि में नहीं आनी चाहिए थी), किन्तु उससे भी अधिक कृतज्ञ मैं इस बात के लिए हूँ कि परमेश्वर स्वर्ग पर से भी “सब मनुष्यों को निहारता है” (भजन 33:13)। वह केवल वह सब ही नहीं देखता है जो हम करते रहते हैं; वो हमारे दुखों, हमारी प्रसन्नता, और एक-दूसरे के प्रति हमारे प्रेम तथा व्यवहार आदि को भी देखता रहता है।

          परमेश्वर हमारे वास्तविक चरित्र को देखता है और उसे हमेशा पता होता है कि हमें किस बात की आवश्यकता है। अपनी सिद्ध दृष्टि से वह हमारे हृदयों की भीतरी दशा को भी देखता है, और जो उससे प्रेम करते हैं और उसमें अपनी आशा बनाए रखते हैं, उन पर अपनी सुरक्षा की दृष्टि बनाए रहता है। वह हम से प्रेम करने और हमारी देखभाल करने वाला पिता है, जिसकी दृष्टि से हम कभी ओझल नहीं होते हैं। - किर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर सारे संसार पर, विशेषकर अपने बच्चों पर, अपनी दृष्टि को बनाए रखता है।


 और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: भजन 33:6-19

भजन संहिता 33:6 आकाशमण्डल यहोवा के वचन से, और उसके सारे गण उसके मुंह ही श्वास से बने।

भजन संहिता 33:7 वह समुद्र का जल ढेर के समान इकट्ठा करता; वह गहिरे सागर को अपने भण्डार में रखता है।

भजन संहिता 33:8 सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें!

भजन संहिता 33:9 क्योंकि जब उसने कहा, तब हो गया; जब उसने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया।

भजन संहिता 33:10 यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है।

भजन संहिता 33:11 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी।

भजन संहिता 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो!

भजन संहिता 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है;

भजन संहिता 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है,

भजन संहिता 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।

भजन संहिता 33:16 कोई ऐसा राजा नहीं, जो सेना की बहुतायत के कारण बच सके; वीर अपनी बड़ी शक्ति के कारण छूट नहीं जाता।

भजन संहिता 33:17 बच निकलने के लिये घोड़ा व्यर्थ है, वह अपने बड़े बल के द्वारा किसी को नहीं बचा सकता है।

भजन संहिता 33:18 देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करुणा की आशा रखते हैं बनी रहती है,

भजन संहिता 33:19 कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35

मंगलवार, 13 जुलाई 2021

सुन्दर

 

          जब डेनीस ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ समय बिताना आरंभ किया, तो उसने प्रयास किया की वह पतली हो जाए और सुरुचिपूर्ण वस्त्र पहना करे, जिससे उसे सुन्दर लगे। महिलाओं की सारी पत्रिकाएँ, यही तो परामर्श देती थीं। लेकिन काफी समय बाद उसे पता चला कि उसका बॉयफ्रेंड क्या सोचता था; उसने डेनीस से कहा, “जब तुम थोड़े भारी शरीर की थीं और अपने वस्त्रों पर कुछ विशेष ध्यान नहीं देती थीं, तब भी मैं तुम्हें उतना ही पसंद करता था।”

          तब डेनीस को एहसास हुआ कि “सुन्दरता” कितनी अस्थाई है और विचारों के अनुसार बदल जाती है। सुन्दरता के विषय हमारा दृष्टिकोण औरों के द्वारा बहुत सरलता से प्रभावित हो जाता है। अकसर सुन्दर दिखाई देने का यह विचार भीतरी सुन्दरता की अवहेलना करते हुए, बाहरी स्वरूप पर ही ध्यान केन्द्रित रखता है। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल से हम सीखते हैं कि परमेश्वर हमें केवल एक ही दृष्टिकोण से देखता है – उसकी सुन्दर, प्रिय संतान। मेरा विचार है कि जब परमेश्वर ने संसार की सृष्टि की, तब उसने सर्वोत्तम को अन्त के लिए – हमारे लिए रखा छोड़ा। जो कुछ भी उसने बनाया वह सब अच्छा था, किन्तु हम मनुष्य कुछ विशेष हैं क्योंकि उसने हमें अपने ही स्वरूप में रचा है (उत्पत्ति 1:27)।

          परमेश्वर हमें सुन्दर मानता है! इसलिए इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि भजनकार विस्मय से भरा था जब उसने प्रकृति की महानता की तुलना मनुष्यों के साथ की। उसने प्रश्न किया,तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” (भजन 8:4)। लेकिन फिर भी परमेश्वर को यही भाया कि वह हम नाशमान मनुष्यों को ऐसी महिमा और वैभव दे जो अन्य किसी के भी पास नहीं है (पद 5)।

          यह सत्य हमें आश्वासन देता है और हमें उसकी स्तुति और प्रशंसा करने का कारण भी प्रदान करता है। चाहे अन्य कोई हमारे बारे में कुछ भी कहे या हम अपने बारे में कुछ भी सोचें, हमें इस बात से आश्वस्त रहना चाहिए कि हम परमेश्वर की दृष्टि में सुन्दर हैं। - लेस्ली कोह

 

पिता परमेश्वर आपके इस आश्वासन के लिए धन्यवाद कि हम आपकी दृष्टि में सुन्दर हैं।


तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:27

बाइबल पाठ: भजन 8:4-9

भजन 8:4 तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?

भजन 8:5 क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है।

भजन 8:6 तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है; तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है।

भजन 8:7 सब भेड़- बकरी और गाय- बैल और जितने वन-पशु हैं,

भजन 8:8 आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियां, और जितने जीव- जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं।

भजन 8:9 हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 7-9
  • प्रेरितों 18

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

दृष्टि

 

          प्रति प्रातः, मैं अपने घर के अन्दर बैठक की खिड़की के पास से, खिड़की के बाहर का मनोरम दृश्य देखते हुए निकलती हूँ – उस खिड़की से बाहर हमारे घर के पीछे के जंगल का विशाल क्षेत्र दिखाई पड़ता है, और घर के पास के पेड़ों पर बैठे विभिन्न पक्षी भी दिखाई दे जाते हैं जो मानो उस क्षेत्र का सर्वेक्षण कर रहे होते हैं। एक दिन मुझे देख कर अचंभा हुआ कि एक दुर्लभ प्रजाति की चील – बाल्ड ईगल, एक पेड़ की ऊँची शाखा पर बैठी हुई, सारे क्षेत्र पर इस प्रकार चारों ओर दृष्टि दौड़ा रही थी, मानो यह उसका अपना इलाका हो; उसके हाव-भाव और देखने का तरीका राजसी प्रतीत हो रहा था। वह शिकारी पक्षी संभवतः किसी शिकार की तलाश में था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में, 2 इतिहास 16 अध्याय में परमेश्वर के नबी, हनानी, ने एक राजा को परमेश्वर का यह सन्देश दिया कि उसके सभी कार्यों पर परमेश्वर की दृष्टि बनी हुई है। उसने यहूदा के राजा, आसा से कहा,... तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन अराम के राजा ही पर भरोसा रखा है, इस कारण अराम के राजा की सेना तेरे हाथ से बच गई है” (पद 7)। फिर हनानी ने इसका स्पष्टीकरण देते हुए कहा,देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ्य दिखाए ...” (पद 9)। क्योंकि आसा ने गलत जन पर भरोसा किया था, परमेश्वर पर नहीं वरन मनुष्य की सहायता पर भरोसा रखा था, इसलिए परिणाम निरन्तर युद्ध करते रहना होगा।

          इन शब्दों को पढ़ने से हम यह गलत अभिप्राय निकाल सकते हैं कि परमेश्वर हम पर इसलिए दृष्टि बना कर रखता है कि हम गलती करें और वह शिकारी पक्षी के समान हम पर टूट पड़े। इन शब्दों का यह तात्पर्य नहीं है, वरन हनानी का कहना सकारात्मक दृष्टिकोण से था, कि परमेश्वर निरन्तर दृष्टि बनाए रखता और प्रतीक्षा में रहता है कि हम कब सहायता के लिए उसे पुकारें और वह आगे आकर हमारी सहायता करे।

          जैसे वह चील मेरे घर के पीछे, ऊँचे पर बैठी, नीचे की सारी गतिविधियों पर दृष्टि बनाए हुए थी, परमेश्वर की दृष्टि भी संसार भर पर फिरती रहती है, अभी भी फिर रही है, कि कहाँ उसे उस पर भरोसा रखने वाले, उसके विश्वासयोग्य लोग मिलें, और वह उनकी सहायता के लिए कुछ करे। उसकी दृष्टि आप पर भी है, अपनी प्रत्येक सहायता के लिए आप उसे पुकार सकते हैं। - एलिसा मॉर्गन

 

हे परमेश्वर हमें ऐसे मन दें जो सदा ही आप पर भरोसा रखने वाले हों।


किसी को रथों को, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे। - भजन संहिता 20:7

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 16:7-9

2 इतिहास 16:7 उस समय हनानी दर्शी यहूदा के राजा आसा के पास जा कर कहने लगा, तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन अराम के राजा ही पर भरोसा रखा है, इस कारण अराम के राजा की सेना तेरे हाथ से बच गई है।

2 इतिहास 16:8 क्या कूशियों और लूबियों की सेना बड़ी न थी, और क्या उस में बहुत ही रथ, और सवार न थे? तौभी तू ने यहोवा पर भरोसा रखा था, इस कारण उसने उन को तेरे हाथ में कर दिया।

2 इतिहास 16:9 देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ्य दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 शमूएल 23-24
  • लूका 19:1-27

मंगलवार, 23 मार्च 2021

भरोसा

 

          नवम्बर 2016 में एक बहुत ही कम दिखाई देने वाली अद्भुत खगोलीय घटना हुई – चन्द्रमा अधिक बड़ा और तेज़ चमकता हुआ दिखाई दिया। पृथ्वी के चारों और घूमने की अपनी परिधि में चाँद साठ वर्षों में पहली बार पृथ्वी के निकट से होकर निकला, और इसलिए सामान्य से अधिक बड़ा तथा अधिक चमकीला दिखाई दिया। परन्तु मेरे लिए तो उस दिन आकाश अंधियारा ही रहा – मेरे रहने के स्थान के ऊपर घने बादल छाए हुए थे, इसलिए मैं तो केवल भरोसा ही कर सकी कि चाँद वैसा ही दिख रहा होगा जैसा अन्य स्थानों से मेरे मित्रों ने उसकी फोटो लेकर मुझे भेजी थीं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपने मसीही विश्वास के जीवन में अनेकों कठिनाइयों और परेशानियों का सामना किया था; किन्तु उसका दृष्टिकोण यही थी कि जो अभी अदृश्य है, वह चिरस्थाई है, अनन्तकाल तक बना रहेगा। उसने कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा, क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है” (2 कुरिन्थियों 4:17)। इस प्रकार से वह अपनी दृष्टि “देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं” पर लगाए रख सका क्योंकि जो अनदेखा है, वह अनन्त और चिरस्थाई भी है (पद 18)। पौलुस की लालसा थी कि कोरिन्थ के उन मसीही विश्वासियों का, और हमारा मसीही विश्वास भी, और अधिक बढ़े तथा उन्नति कर सके। और चाहे हमें अपने मसीही विश्वास के लिए दुःख भी उठाने पड़ें, फिर भी हम उस के समान परमेश्वर में भरोसा बनाए रखें। हम आज चाहे परमेश्वर को अपनी शारीरिक आँखों से देख नहीं पा रहे हैं, परन्तु हमारा भरोसा है कि वह हमें दिन-प्रति-दिन और नया एवं बेहतर करता जा रहा है (पद 16)।

          उस दिन जब उस चाँद को देखने की लालसा से मैं बादलों की ओर देख रही थी, यह जानते हुए कि चाहे मुझे वह अद्भुत चाँद दिखा नहीं रहा है किन्तु वह विद्यमान है, तब मुझे यह भी ध्यान आया कि इसी प्रकार से परमेश्वर चाहे दिखाई न दे, किन्तु हमारे साथ विद्यमान है। और मेरी आशा है कि अगली बार जब मैं यह सोचने के प्रलोभन में पड़ूँ कि परमेश्वर मुझसे कहीं दूर और मेरी परिस्थिति से अनभिज्ञ है, तब मैं अपना ध्यान अदृश्य पर लगाऊँ और उसकी मेरे साथ उपस्थिति पर भरोसा बनाए रखूँ। - एमी बाउचर पाई

 

चाहे हम परमेश्वर की उपस्थिति अनुभव करें या न करें, वहाँ सदा अपने बच्चों के साथ बना रहता है।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:13-18

2 कुरिन्थियों 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय में लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं।

2 कुरिन्थियों 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने सामने उपस्थित करेगा।

2 कुरिन्थियों 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।

2 कुरिन्थियों 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।

2 कुरिन्थियों 4:18 और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

दृष्टि

 

          मेरे पहले चश्मे ने एक अद्भुत संसार के प्रति मेरी ‘आँखें खोल दीं। मैं अपनी स्वाभाविक दृष्टि से निकट की वस्तुएँ तो साफ़ देखने पाती थी, परन्तु कुछ ही दूरी की वस्तुएँ धुंधली हो जाती थीं। जब मैंने पहली बार चश्मा पहना तब मैं बारह वर्ष की थी, और कक्षा में बलैकबोर्ड पर लिखे शब्दों को, पेड़ों पर छोटे-छोटे पत्तों को, और शायद सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात – लोगों के चेहरों पर मुस्कुराहट को, स्पष्ट देख कर मैं भौंचक्की रह गई।

          मेरे द्वारा उनका अभिनंदन करने से मेरे मित्रों के चेहरों पर आने वाली मुस्कराहट से मैंने सीखा कि औरों की दृष्टि में होना भी उतनी ही बड़ी आशीष है, जितनी  किसी को देख पाना है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में दासी हाजिरा को भी इस बात का एहसास हुआ, जब वह अपनी स्वामिनी सारै के पास से उसकी कठोरता के कारण भाग रही थी। उस समय की वहाँ संस्कृति के अनुसार हाजिरा – एक अकेली और गर्भवती दासी जो बिना किसी सहायता या आशा के रेगिस्तान को भाग रही थी, का कोई महत्व नहीं था। लेकिन परमेश्वर की दृष्टि में आने के बाद, उसे भी परमेश्वर का दर्शन देखने की सामर्थ्य मिल गई। अब परमेश्वर उसके लिए मात्र एक सिद्धांत, एक अनजान सी बात नहीं रह गया, वरन उसके लिए वास्तविक हो गया। इतना वास्तविक, कि उसने परमेश्वर को एक नाम भी दिया – एल रोई, जिसका अर्थ होता है “वह परमेश्वर जो मुझे देखता है;” उसने कहा,मैं यहां भी उसको जाते हुए देखने पाई” (उत्पत्ति 16:13)।

          सारे संसार पर दृष्टि रखने वाला हमारा परमेश्वर, हमें भी देखता है। क्या आप को लगता है कि आप लोगों की दृष्टि में नहीं हैं, अकेले और अस्तित्वहीन हैं? परमेश्वर न केवल आपको देखता है, वरन आपके भविष्य को भी जानता है। इसलिए प्रत्युत्तर में आप भी उस में हमारे सदा विद्यमान आशा, प्रोत्साहन, उद्धार, और आनन्द पर अपनी दृष्टि लगाए रखें, जो न केवल आज, वरन हमारे भविष्य के लिए भी है।

          दृष्टि की इस अद्भुत आशीष के लिए उस अद्भुत, एकमात्र, जीवते, सच्चे प्रभु परमेश्वर की स्तुति और आराधना करें। - पैट्रीशिया रेबोन

 

परमेश्वर मेरा नाम भी जानता है, और मुझ पर दृष्टि भी बनाए रखता है।


देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ्य दिखाए। - 2 इतिहास 16:9

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 16:7-14

उत्पत्ति 16:7 तब यहोवा के दूत ने उसको जंगल में शूर के मार्ग पर जल के एक सोते के पास पाकर कहा,

उत्पत्ति 16:8 हे सारै की दासी हाजिरा, तू कहां से आती और कहां को जाती है? उसने कहा, मैं अपनी स्वामिनी सारै के सामने से भाग आई हूं।

उत्पत्ति 16:9 यहोवा के दूत ने उस से कहा, अपनी स्वामिनी के पास लौट जा और उसके वश में रह।

उत्पत्ति 16:10 और यहोवा के दूत ने उस से कहा, मैं तेरे वंश को बहुत बढ़ाऊंगा, यहां तक कि बहुतायत के कारण उसकी गणना न हो सकेगी।

उत्पत्ति 16:11 और यहोवा के दूत ने उस से कहा, देख तू गर्भवती है, और पुत्र जनेगी, सो उसका नाम इश्माएल रखना; क्योंकि यहोवा ने तेरे दु:ख का हाल सुन लिया है।

उत्पत्ति 16:12 और वह मनुष्य बनैले गदहे के समान होगा उसका हाथ सबके विरुद्ध उठेगा, और सब के हाथ उसके विरुद्ध उठेंगे; और वह अपने सब भाई-बन्धुओं के मध्य में बसा रहेगा।

उत्पत्ति 16:13 तब उसने यहोवा का नाम जिसने उस से बातें की थीं, अत्ताएलरोई रखकर कहा कि, “क्या मैं यहां भी उसको जाते हुए देखने पाई और देखने के बाद भी जीवित रही?

उत्पत्ति 16:14 इस कारण उस कुएं का नाम लहैरोई कुआँ पड़ा; वह तो कादेश और बेरेद के बीच में है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 13 
  • मत्ती 26:26-50

बुधवार, 20 जनवरी 2021

लक्ष्य

 

          हम अपने जीवन की दिशा कैसे निर्धारित कर सकते हैं? एक बार मैंने इस प्रश्न का उत्तर एक अप्रत्याशित स्थान पर सुना – एक मोटर साइकिल सीखने के स्थान पर। मैं और मेरे कुछ मित्र मोटर साइकिल चलाना चाहते थे, इसलिए हम उसे चलाना सीखने के लिए गए। हमारे प्रशिक्षण का एक भाग था लक्ष्य निर्धारण करना। हमारे प्रशिक्षक ने हम से कहा, “कभी न कभी आपको कोई अनपेक्षित बाधा का सामना करना पड़ेगा। यदि आप उस बाधा ही को देखते रहोगे, तो वही लक्ष्य बन जाएगा, और आप उस से जा टकराओगे। परन्तु यदि आप उस बाधा के इधर-उधर और उसके पार देखोगे तो लक्ष्य भी उस बाधा से हट कर हो जाएगा और सामान्यतः आप उस बाधा से बचने पाओगे। आप जहाँ देखते हैं, वहीं पहुँचते भी हैं।”

          यही सरल और साधारण सिद्धांत हमारे आत्मिक जीवनों पर भी लागू होता है। जब हम अपनी समस्याओं और संघर्षों पर ही अपने ध्यान को केन्द्रित रखते हैं, तो वे ही हमारा लक्ष्य बने रहते हैं, और स्वतः ही हम अपने जीवनों को उन्हीं के चारों ओर चलाते रहते हैं।

          किन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में हमें प्रोत्साहित किया गया है कि हम अपनी समस्याओं के पार, उसकी ओर देखें जो उनके समाधान दे सकता है, हमारी सहायता कर सकता है। हम भजन 121:1 में पढ़ते हैं, मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?” फिर भजनकार स्वयं ही उत्तर देता है “मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।... यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा” (पद 2, 8)।

          हो सकता है कि हमें अपनी बाधाएँ इतनी बड़ी लगें कि हमें लगने लगे कि हम उन्हें पार नहीं कर सकते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें आमंत्रित करता है कि हम अपनी उन बाधाओं के पार उसकी ओर देखें, उसी पर अपनी दृष्टि लगाए रहें। उन बाधाओं को नहीं, परमेश्वर को अपना लक्ष्य बनाएँ, और वह हमें बाधाओं के पार निकाल ले जाएगा। - एडम होल्ज़

 

यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है। (भजन 124:8)


तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, जरूब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है : न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। - ज़कर्याह 4:6

बाइबल पाठ: भजन 121

भजन 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?

भजन 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।

भजन 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।

भजन 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।

भजन 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।

भजन 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।

भजन 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।

भजन 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58

सोमवार, 23 नवंबर 2020

निगरानी

 

         सू तब छोटी ही थी जब उसके माता-पिता का तलाक हो गया। उसकी देखभाल और पालन-पोषण तथा अन्य बातों को लेकर होने वाले वैधानिक संघर्षों के निवारण होने तक के लिए सू को एक बाल-आश्रम में भेज दिया गया। सू वहाँ अपने आप को अकेला और तिरस्कृत अनुभव करती थी, बड़े बच्चे उसे तंग करते थे। उसकी माँ उससे मिलाने के लिए महीने में एक ही बार आया करती थी, और उसने अपने पिता को शायद ही कभी देखा हो। लेकिन कई वर्षों के बाद उसकी माँ ने सू को बताया कि उस बाल-आश्रम के नियम उसकी माँ को सू से और अधिक मिलने आने से रोकते थे, किन्तु सू की माँ प्रतिदिन आश्रम के बाहर बाड़े के निकट खड़ी रहती थी, कि उसे सू की एक झलक मिल जाए। उसने सू को बताया, “कभी-कभी मैं बस तुम्हें बाग़ में खेलते हुए देखती रहती थी, यह जानने के लिए कि तुम ठीक हो कि नहीं।”

         जब सू ने अपनी यह कहानी बताई, तो मुझे इससे परमेश्वर के प्रेम की एक झलक मिली। अपने जीवन के संघर्षों में कभी-कभी हमें लग सकता है कि हम अकेले पड़ गए हैं, त्याग दिए गए हैं। किन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हमारा स्वर्गीय पिता परमेश्वर निरंतर हम पर दृष्टि बनाए रखता है (भजन 33:18)। चाहे हम उसे अपनी शारीरिक आँखों से देख नहीं सकते हैं, फिर भी वह हमेशा हमारे साथ बना रहता है। एक प्रेमी अभिभावक के समान उसकी दृष्टि और उसका मन हमेशा हमारी ओर लगा रहता है। वह सू की माँ के समान मजबूर नहीं है, और कभी भी हमारे पक्ष में हस्तक्षेप कर सकता है।

         भजन 91 वर्णन करता है कि किस प्रकार परमेश्वर अपने बच्चों को सुरक्षित रखता है, कठिनाइयों से छुड़ाता है, और उन्हें दृढ़ता से थामे रहता है। वह हमारे लिए शरणस्थान और आश्रय से भी बढ़कर है। जब हम जीवन की अंधियारी गलियों में से होकर निकलते हैं, हम इस बात से शान्ति पा सकते हैं कि हमारा सर्व-सामर्थी प्रभु निरंतर हम पर दृष्टि लगाए हुए है और हमारे जीवनों में सक्रिय है; हम हमेशा उसकी निगरानी में रहते हैं। उसने कहा है, “जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।” (पद 15)। - लेस्ली कोह

 

हमारा स्वर्गीय पिता परमेश्वर सदा हमारे निकट रहता है।


देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करुणा की आशा रखते हैं बनी रहती है, कि वह उनके प्राण को मृत्यु से बचाए, और अकाल के समय उन को जीवित रखे। - भजन संहिता 33:18-19

बाइबल पाठ: भजन 91:1-6

भजन संहिता 91:1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।

भजन संहिता 91:2 मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।

भजन संहिता 91:3 वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;

भजन संहिता 91:4 वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।

भजन संहिता 91:5 तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,

भजन संहिता 91:6 न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5

बुधवार, 18 नवंबर 2020

मार्गदर्शन

 

         साइमन को जब कार्य-स्थल पर एक नई भूमिका निभाने का अवसर मिला तो उसे लगा कि यह परमेश्वर द्वारा दिया गया अवसर है। इस निर्णय के विषय प्रार्थना करने और परामर्श लेने के बाद उसे लगा कि परमेश्वर चाहता है कि वह इस अवसर को स्वीकार कर ले तथा और बड़ी चुनौतियों को उठाए। सब कुछ ठीक से होता लग रहा था, और उसके अफसर ने भी उसके इस निर्णय को सराहा और उसे इसके लिए प्रोत्साहित किया। फिर बात बिगड़ने लगी। उसके कुछ सहकर्मियों को उसकी इस तरक्की से ईर्ष्या हुई और उन्होंने उसके साथ सहयोग करना बन्द कर दिया। साइमन सोचने लगा कि क्या उसे अपने कदम वापस ले लेने चाहिएँ।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब इस्राएली परमेश्वर के घर के पुनःनिर्माण के लिए यरूशलेम लौट कर आए तब उनके शत्रुओं ने उन्हें धमकाना और निराश करना चाहा (एज्रा 4:4)। पहले तो इस्राएलियों ने कार्य रोक दिया, परन्तु हाग्गै तथा ज़कर्याह भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा परमेश्वर से प्रोत्साहन प्राप्त करने के बाद उन्होंने कार्य को फिर से आरंभ कर दिया (एज्रा 4:24-5:2)।

         एक बार फिर शत्रु उन्हें तंग करने के लिए आए, परन्तु इस बार वे कार्य में लगे रहे, क्योंकि उन्हें पता था कि उनका परमेश्वर उन पर दृष्टि बनाए हुए है और उनकी देखभाल कर रहा है (एज्रा 5:5)। वे परमेश्वर के निर्देशों को दृढ़ता के साथ थामे रहे और अपने भरोसे को बनाए रखा कि हर विरोध में परमेश्वर उनका मार्गदर्शन करता रहेगा और उन्हें सफल करेगा। यही हुआ, और परमेश्वर ने फारस के राजा को मंदिर के निर्माण को पूरा करने में उनकी सहायता करने के लिए उभारा (पद 13-14)।

         इसी प्रकार से साइमन ने भी परमेश्वर से बुद्धिमत्ता माँगी, कि वह निर्णय ले सके, कि उसे वहीं रहना है या किसी अन्य स्थान पर जाना है। जब उसे लगा कि परमेश्वर चाहता है कि वह वहीं बना रहे, तो उसने परमेश्वर के मार्गदर्शन पर भरोसा किया, परमेश्वर से दृढ़ बने रहने के लिए सामर्थ्य माँगी। धीरे-धीरे, समय के साथ उसके साथियों का विरोध घटता गया और वे उसे स्वीकार करते चले गए।

         जब हम परमेश्वर का अनुसरण करने का प्रयास करते हैं, तो वह हमें जहाँ भी रखता है, संभव है कि हमें वहाँ लोगों के प्रतिरोध का सामना करना पड़े। यही वह समय होता है जब हमें परमेश्वर के मार्गदर्शन का पालन करना चाहिए। वह हर परिस्थिति से हमें अपने मार्गदर्शन में निकालते हुए ले जाएगा। - लेसली कोह

 

दृढ़ बने रहो, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि तुम पर बनी हुई है।


देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करुणा की आशा रखते हैं बनी रहती है - भजन 33:18

बाइबल पाठ: एज्रा 5:1-5

एज़्रा 5:1 तब हाग्गै नामक नबी और इद्दो का पोता जकर्याह यहूदा और यरूशलेम के यहूदियों से नबूवत करने लगे, उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर के नाम से उन से नबूवत की।

एज़्रा 5:2 तब शालतीएल का पुत्र जरुब्बाबेल और योसादाक का पुत्र येशू, कमर बान्ध कर परमेश्वर के भवन को जो यरूशलेम में है बनाने लगे; और परमेश्वर के वे नबी उनका साथ देते रहे।

एज़्रा 5:3 उसी समय महानद के इस पार का तत्तनै नाम अधिपति और शतर्बोजनै अपने सहचरियों समेत उनके पास जा कर यों पूछने लगे, कि इस भवन के बनाने और इस शहरपनाह के खड़े करने की किस ने तुम को आज्ञा दी है?

एज़्रा 5:4 तब हम लोगों से यह कहा, कि इस भवन के बनाने वालों के क्या क्या नाम हैं?

एज़्रा 5:5 परन्तु यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही, इसलिये जब तक इस बात की चर्चा दारा से न की गई और इसके विषय चिट्ठी के द्वारा उत्तर न मिला, तब तक उन्होंने इन को न रोका।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13