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रविवार, 29 अगस्त 2010

प्रेम की सामर्थ

एक डॉक्युमेन्टरी फिल्म "Young@Heart" (दिल से जवान) २४ गायकों के ऐसे समूह की रोचक कहानी है जिनकी औसत आयु ८० वर्ष है। इस फिल्म में उनके इस गुट के कार्यों को बड़े रोचक, विनोद से भरे और हलके फुलके अन्दाज़ में दिखाया गया है। इस फिल्म की एक मर्मस्पर्षी घटना है जब वे एक बन्दीगृह में जाकर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, और कार्यक्रम के अन्त में वे मंच से उतरकर उपस्थित बन्दियों के बीच में चले जाते हैं और उनके के साथ हाथ मिलाकर और उन से गले लगकर, उन अवाक कैदियों का अभिनन्दन करते हैं।

कैदी उनके इस कोमल और अप्रतिक्षित व्यवहार से प्रभावित और विस्मित हुए। यह मुझे स्पनयाह की पुस्तक स्मरण दिलाता है जहां स्पन्याह भविष्यद्वक्ता दुखः में पड़े लोगों के लिये परमेश्वर की उपस्थिति और प्रेम का सन्देश लेकर आता है - "तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुप ना रहेगा, वह फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा" (स्पन्याह ३:१७)।

बाइबल शिक्षिका हेनरीयटा मेयर्स के अनुसार, "स्पन्याह की पुस्तक का आरंभ तो दुखः के साथ, परन्तु अन्त आनन्द के गीत के साथ होता है। पुस्तक के पहले भाग में उदासी और निराशा है, किंतु अन्तिम भाग में पुराने नियम में पाये जाने वाले प्रेम के सबसे मधुर गीत हैं।"

परमेश्वर का प्रेम हमें सदा चकित करता रहता है, विशेषकर तब जब वह हमें जीवन के किसी निराशा से भरे समय में छूता है। निराशा के ऐसे समयों में परमेश्वर हमारे पास अपने आनन्द, अपने प्रेम और अपने गीत लिये हुए आता है। - डेविड मैककैसलैंड


परमेश्वर की वाटिका में हम कभी न भुलाए जाने वाले सुमन की तरह हैं।

तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुप ना रहेगा, वह फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा। - स्पन्याह ३:१७


बाइबल पाठ: स्पन्याह ३:१४-२०

हे सिय्योन, ऊंचे स्वर से गा, हे इस्राएल, जयजयकार कर! हे यरूशलेम अपने सम्पूर्ण मन से आनन्द कर, और प्रसन्न हो!
यहोवा ने तेरा दण्ड दूर कर दिया और तेरा शत्रु भी दूर किया गया है। इस्राएल का राजा यहोवा तेरे बीच में है, इसलिये तू फिर विपत्ति न भोगेगी।
उस समय यरूशलेम से यह कहा जाएगा, हे सिय्योन मत डर, तेरे हाथ ढीले न पड़ने पाएं।
तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुप ना रहेगा, फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा।
जो लोग नियत पर्वो में सम्मिलित न होने के कारण खेदित रहते हैं, उनको मैं इकट्ठा करूंगा, क्योंकि वे तेरे हैं और उसकी नामधराई उनको बोझ जान पड़ती है।
उस समय मैं उन सभों से जो तुझे दु:ख देते हैं, उचित बर्ताव करूंगा। और मैं लंगड़ों को चंगा करूंगा, और बरबस निकाले हुओं को इकट्ठा करूंगा, और जिनकी लज्जा की चर्चा सारी पृथ्वी पर फैली है, उनकी प्रशंसा और कीर्ति सब कहीं फैलाऊंगा।
उसी समय मैं तुम्हें ले जाऊंगा, और उसी समय मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा, और जब मैं तुम्हारे साम्हने तुम्हारे बंधुओं को लौटा लाऊंगा, तब पृथ्वी की सारी जातियों के बीच में तुम्हारी कीर्ति और प्रशंसा फैला दूंगा, यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२६-१२८
  • १ कुरिन्थियों १०:१९-३३

शनिवार, 28 अगस्त 2010

पलटी हुई भेड़

अपनी सुप्रसिद्ध पुस्तक "A Shepherd Looks at Psalm 23" (भजन २३ - एक चरवाहे के नज़रिये से) में फिलिप केलेर भेड़ों के प्रति चरवाहों की देख-रेख और कोमलता का सजीव चित्रण प्रस्तुत करते हैं। भजन के तीसरे पद को समझाने के लिये, जहां दाउद कहता है "वह मेरे जी में जी ले आता है" फिलिप भेड़ों की देख-रेख से संबन्धित ऐसे उदाहरणों का उपयोग करता है जिन्हे हर एक चरवाहा पहचानता है।

भेड़ों के शरीर का गठन ऐसा होता है कि यदि वे किसी एक तरफ गिरकर पलट जाएं और पीठ के बल हो जाएं तो उनके लिये फिर अपने आप सीधे खड़े हो जाना बहुत कठिन होता है; वे केवल हवा में अपनी टांगें चलाती और मिमियाती रहती हैं, किंतु सीधी नहीं हो पातीं। ऐसे कुछ घंटे पलटे हुए पड़े रहने से उनके पेट में हवा जमा होने लगती है, पेट के फूलने से उनके सांस लेने में बाधा उत्पन्न होने लगती है और फिर वे सांस रुकने से मर जातीं हैं। उनकी इस स्थिति को पलटी हुई स्थिति कहते हैं।

जब चरवाहा ऐसी पलटी हुई भेड़ को फिर सीधा खड़ा करता है, तो वह उससे कोमलता से बात करता है, उसके टांगों की मालिश करके उनमें खून का प्रवाह ठीक करता है, फिर धीरे से उसे सीधा करके उसे अपने हाथों में उठा लेता है और उसके फिर से संतुलन पा लेने तक उसे सहारा दिये रहता है।

जो परमेश्वर हमारे लिये करना चाहता है यह उसका कितना अद्भुत चित्र है। जब हम परेशानियों के कारण ’पलटे’ हुए होते हैं, दुखः या असन्तोष या पाप के प्रभाव में छटपटा रहे होते हैं, हमारा प्रेमी और अच्छा चरवाहा अपने अनुग्रह से हमें सांत्वना देता है, हमें उठा कर खड़ा करता है और जब तक हम अपना आत्मिक सन्तुलन फिर प्राप्त न कर लें, वह हमें संभाले रहता है।

यदि किसी भी कारण से आप ’पलट’ गए हैं, तो परमेश्वर ही है जो अच्छे चरवाहे के समान आपको फिर से खड़ा कर सकता है। वही है जो आपके विश्वास, आनन्द और सामर्थ को आपको फिर से लौटा कर दे सकता है। - मार्विन विलियम्स


जो लाचार और कमज़ोर हैं वे उस ’अच्छे चरवाहे’ की विशेष देख-रेख में रहते हैं।

वह मेरे जी में जी ले आता है - भजन २३:३


बाइबल पाठ: भजन २३

यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।
वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है, वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है;
वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त अगुवाई करता है।
चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है, तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।
तू मेरे सताने वालों के साम्हने मेरे लिये मेज बिछाता है, तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है।
निश्चय भलाई और करूणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२३-१२५
  • १ कुरिन्थियों १०:१-१८

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

हल्का मन

हम मसीही कभी कभी अपने गौरव को बनाए रखने के भ्रम में आवश्यक्ता से अधिक गंभीर और विनोद रहित हो जाते हैं। यह एक अजीब व्यवहार है, यह जानते हुए कि हम उस परमेश्वर के लोग हैं जिसने हंसी और आनन्द का अद्भुत दान हमें दिया है।

आनन्द-विनोद करना कोई गलत बात नहीं है, हर परिवार इसे अपने ही तरीके से करता है। मैं परमेश्वर का धन्यवादी हूँ कि उसने मुझे हंसी खुशी से भरे परिवार में रखा है। परिवार के हम सब सदस्य, आपस में हंसी मज़ाक करने, एक दूसरे की टांग खेंचने और एक दूसरे के साथ किसी न किसी बात में स्वस्थ प्रतियोगिता करने में लगे रहते हैं। हंसी हमारे जीवन की अनेक कठिनाईयों में परमेश्वर का ऐसा वरदान रहा है, जिसके साथ हम उन में से निकल सके। परमेश्वर का आनन्द अक्सर हमारा शरण स्थान और दृढ़ गढ़ रहा है (नेहेमेयाह ८:१०)।

जब राजा दाउद वाचा का पवित्र सन्दूक ओबेदेदोम के घर से यरुशलेम में लेकर आया तो "यहोवा के सम्मुख तन मन से नाचता रहा" ( २ शमुएल ६:१४)। पद १६ बताता है कि "जब यहोवा का सन्दूक दाऊदपुर में आ रहा था, तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की में से झांककर दाऊद राजा को यहोवा के सम्मुख नाचते कूदते देखा, और उसे मन ही मन तुच्छ जाना।" मीकल, जो दाउद की पत्नी भी थी, को लगा कि दाउद का यह करना उसके राजा होने की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं था और उसने दाउद को इसके लिये कड़ा उलाहना दिया। दाउद की प्रतिक्रिया थी कि वह परमेश्वर के सम्मुख अपने आप को और भी तुच्छ कर लेगा (पद २२) क्योंकि परमेश्वर में, दाउद का मन हलका और निश्चिंत था।

हंसी और आनन्द के लिये समय निकालिये (सभोपदेशक ३:४)। - डेविड रोपर


स्वस्थ हंसी बेशकीमती होती है।

मन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियां सूख जाती हैं। - नीतिवचन १७:२२


बाइबल पाठ: २ शमुएल ६:१२-२३

तब दाऊद राजा को यह बताया गया, कि यहोवा ने ओबेदेदोम के घराने पर, और जो कुछ उसका है, उस पर भी परमेश्वर के सन्दूक के कारण आशिष दी है। तब दाऊद ने जाकर परमेश्वर के सन्दूक को ओबेदेदोम के घर से दाऊदपुर में आनन्द के साथ पहूंचा दिया।
जब यहोवा के सन्दूक के उठानेवाले छ: कदम चल चुके, तब दाऊद ने एक बैल और एक पाला पोसा हुआ बछड़ा बलि कराया।
और दाऊद सनी का एपोद कमर में कसे हुए यहोवा के सम्मुख तन मन से नाचता रहा।
यों दाऊद और इस्राएल का समस्त घराना यहोवा के सन्दूक को जय जयकार करते और नरसिंगा फूंकते हुए ले चला।
जब यहोवा का सन्दूक दाऊदपुर में आ रहा था, तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की में से झांककर दाऊद राजा को यहोवा के सम्मुख नाचते कूदते देखा, और उसे मन ही मन तुच्छ जाना।
और लोग यहोवा का सन्दूक भीतर ले आए, और उसके स्थान में, अर्थात उस तम्बू में रखा, जो दाऊद ने उसके लिये खड़ा कराया था, और दाऊद ने यहोवा के सम्मुख होमबलि और मेलबलि चढ़ाए।
जब दाऊद होमबलि और मेलबलि चढ़ा चुका, तब उस ने सेनाओं के यहोवा के नाम से प्रजा को आशीर्वाद दिया।
तब उस ने समस्त प्रजा को, अर्थात‌, क्या स्त्री क्या पुरुष, समस्त इस्राएली भीड़ के लोगों को एक एक रोटी, और एक एक टुकड़ा मांस, और किशमिश की एक एक टिकिया बंटवा दी। तब प्रजा के सब लोग अपने अपने घर चले गए।
तब दाऊद अपने घराने को आशीर्वाद देने के लिये लौटा। और शाऊल की बेटी मीकल दाऊद से मिलने को निकली, और कहने लगी, आज इस्राएल का राजा जब अपना शरीर अपके कर्मचारियों की लौंडियों के साम्हने ऐसा उघाड़े हुए था, जैसा कोई निकम्मा अपना तन उघाढ़े रहता है, तब क्या ही प्रतापी देख पड़ता था!
दाऊद ने मीकल से कहा, यहोवा, जिस ने तेरे पिता और उसके समस्त घराने की सन्ती मुझ को चुनकर अपनी प्रजा इस्राएल का प्रधान होने को ठहरा दिया है, उसके सम्मुख मैं ने ऐसा खेला--और मैं यहोवा के सम्मुख इसी प्रकार खेला करूंगा।
और इस से भी मैं अधिक तुच्छ बनूंगा, और अपने लेखे नीच ठहरूंगा, और जिन लौंडियों की तू ने चर्चा की वे भी मेरा आदरमान करेंगी।
और शाऊल की बेटी मीकल के मरने के दिन तक उसके कोई सन्तान न हुआ।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२०-१२२
  • १ कुरिन्थियों ९

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

आध्यात्म विद्या का महत्व

किसी नई कार को खरिदते समय खरीदने वाले केवल उसकी बहरी रंग-रूप को ही नहीं देखते, वे उसके आंतरिक भागों को और उसे सुचारू रूप से और भली भांति चलाने वाले इंजन को भी जांचते हैं।

किंतु जीवन साथी चुनते समय, कुछ लोग इस प्रकार सावधान नहीं होते। उन्हें बहुत देर से समझ आता है कि आकर्षक दिखने वाली देह के अंदर एक दोषपूर्ण दिमाग और आत्मा है। आदमी और औरत, दोनों ही यह गलती करते हैं, परन्तु लेखिका कैरोलिन जेम्स विशेषकर मर्दों के लिये यह लिखती है कि, "एक मर्द के लिये जीवन साथी चुनते समय जो जांचने की प्रथम बात होनी चाहिये वह है उस औरत की आध्यात्म विद्या में रुचि। इस बात का महत्व समझ में तब आता है जब आदमी को जीवन में किसी गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ता है और उसे प्रोत्साहन देने के लिये केवल वह स्त्री ही उसके साथ हो।

राजा सुलेमान को यह पता होना चहिये था, आखिरकर वह संसार का सबसे बुद्धिमान मनुष्य था ( १ राजा ३:१२, ४:२९-३४)। परन्तु सुलेमान ने परमेश्वर की आज्ञा मानने के स्थान पर, अपनी इच्छाओं के अनुसार मनमानी करी, और ऐसी स्त्रीओं से ब्याह किया जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करतीं थीं (११:१, २)। इसके परिणाम घातक हुए, सुलेमान की पत्नियों ने उसका मन अन्य देवी-देवताओं की ओर मोड़ दिया (पद ३, ४) और परमेश्वर उससे क्रोधित हुआ। इसका दीर्घकालीन परिणाम हुआ कि इस्त्राएल का राज्य विभाजित और पराजित हुआ (पद ११-१३)।

परमेश्वर का अच्छा ज्ञान सबके लिये आवश्यक है। यदि हमारा प्रेम किसी ऐसे जन के प्रति है जो परमेश्वर को नहीं जानता और न प्रेम करता है, तो जीवन में सही निर्णय ले पाना हमारे लिये कठिन होगा। - जूली ऐकरमैन लिंक


परमेश्वर के संबंध में गलत धारणाएं और विश्वास रखने से, मनुष्यों के संबंध में गलत निर्णय ले लिए जाते हैं।


अविश्वासियों के साथ असमान जूए में न जुतो - २ कुरिन्थियों ६:१४

बाइबल पाठ: १ राजा १:४-१३

सो जब सुलैमान बूढ़ा हुआ, तब उसकी स्त्रियों ने उसका मन पराये देवताओं की ओर बहका दिया, और उसका मन अपने पिता दाऊद की नाईं अपने परमेश्वर यहोवा पर पूरी रीति से लगा न रहा।
सुलैमान तो सीदोनियों की अशतोरेत नाम देवी, और अम्मोनियों के मिल्कोम नाम घृणित देवता के पीछे चला।
और सुलैमान ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और यहोवा के पीछे अपने पिता दाऊद की नाईं पूरी रीति से न चला।
उन दिनों सुलैमान ने यरूशलेम के साम्हने के पहाड़ पर मोआबियों के किमोश नाम घृणित देवता के लिये और अम्मोनियों के मोलेक नाम घृणित देवता के लिये एक एक ऊंचा स्थान बनाया।
और अपनी सब पराये स्त्रियों के लिये भी जो अपने अपने देवताओं को धूप जलातीं और बलिदान करती थीं, उस ने ऐसा ही किया।
तब यहोवा ने सुलैमान पर क्रोध किया, क्योंकि उसका मन इस्राएल के परमेश्वर यहोवा से फिर गया था जिस ने दो बार उसको दर्शन दिया था।
और उस ने इसी बात के विषय में आज्ञा दी थी, कि पराये देवताओं के पीछे न हो लेना, तौभी उस ने यहोवा की आज्ञा न मानी।
और यहोवा ने सुलैमान से कहा, तुझ से जो ऐसा काम हुआ है, और मेरी बन्धाई हुई वाचा और दी हुई वीधि तू ने पूरी नहीं की, इस कारण मैं राज्य को निश्चय तुझ से छीन कर तेरे एक कर्मचारी को दे दूंगा।
तौभी तेरे पिता दाऊद के कारण तेरे दिनो में तो ऐसा न करूंगा, परन्तु तेरे पुत्र के हाथ से राज्य छीन लूंगा।
फिर भी मैं पूर्ण राज्य तो न छीन लूंगा, परन्तु अपने दास दाऊद के कारण, और अपने चुने हुए यरूशलेम के कारण, मैं तेरे पुत्र के हाथ में एक गोत्र छोड़ दूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११९:८९-१७६
  • १ कुरिन्थियों ८

बुधवार, 25 अगस्त 2010

मित्र के लिए विलाप

एक पास्टर होने के नाते मुझे कई बार अन्त्येष्टि क्रियाओं का नेतृत्व करना पड़ता है। ऐसे में सभा का संचालक मुझे एक पोस्ट कार्ड के आकार का कार्ड पकड़ा देता है जिसमें मृतक के बारे में लिखा होता है, जिससे मैं उस व्यक्ति के बारे में जानकारी बता सकूं। चाहे यह पद्वति कितनी भी व्यावाहरिक और आवश्यक हो, मैं कभी भी इसके साथ सन्तुष्ट नहीं रहा। मुझे सदा यही लगा कि किसी के संपूर्ण जीवन को एक छोटे से कार्ड पर सीमित कर देना सही नहीं है, जीवन एक कार्ड से कहीं बड़ा है।

अपने मित्र योनातान की मृत्यु का समाचार मिलने के बाद, दाउद ने उसके जीवन को याद करने में समय बिताया, उसने अपने मित्र की याद में एक विलपगीत भी लिखा (२ शमुएल १:१७-२७) जिसे गाकर लोग उसे स्मरण कर सकें। विलापगीत में दाउद ने अपने मित्र के साहस और कौशल को स्मरण किया, अपने गहरे दुखः की बात कही, योनातान के उत्तम, मनोहर और वीरता से भरे जीवन की सराहना करी। दाउद के लिए यह यादगारी और गहरे विलाप का समय था।

जब हम किसी प्रीय के लिये दुखी होते हैं, तो यह अति आवश्यक है कि हम उसके जीवन की प्रीय यादों और उसके साथ के अपने अनुभवों को स्मरण करें। यह यादें हमारे हृदय में ख्यालों की एक बाढ़ सी ले आतीं हैं, जिन्हें एक कार्ड में सीमित कर पाना संभव नहीं है। जिस दिन यह दुखः हमारे पास आता है, वह दिन संक्षिप्त यादों और अपने प्रीय के जीवन की छोटी झांकियों को याद करने का समय नहीं है। वह समय है विस्तारपूर्वक और गहराई से अपने प्रीय जन को याद करने का और उसके जीवन के प्रसंगों, विवरण और उसके द्वारा हमारे जीवन पर पड़ी छाप के लिये परमेश्वर को धन्यवाद देने का।

ऐसा समय होता है ठहरने, मनन करने और आदर देने का। - बिल क्राउडर


जीवन की बहुमूल्य यादें मृत्यु के गंभीर दुखः को सहने योग्य बना देती हैं।

हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ, तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था - २ शमुएल १:२६


एक साल में बाइबल:
  • भजन ११९:१-८८
  • १ कुरिन्थियों ७:२०-४०

मंगलवार, 24 अगस्त 2010

अपनी कहानी सुनाओ

न्यूयॉर्क के एक संगठन में कार्य करने वाले एक सलहकार का कहना है उसके स्नातक विद्यार्थी उसके द्वारा उनके सामने रखी गई बातों का केवल लगभग ५ प्रतिशत ही याद रखते हैं, किंतु उन्हीं बातों के दौरान, उदाहरण स्वरूप सुनाई गई कहानियों का लगभग ५० प्रतिशत उन्हें याद रहता है। संपर्क विशेषज्ञों में यह मत बढ़ता जा रहा है कि किसी बात को दूसरों तक पहुंचाने में व्यक्तिगत संपर्क का बहुत महत्व है। किसी भी वकतव्य में, कोरे तथ्य और संख्याएं श्रोताओं को सुला देते हैं किंतु वास्तविक अनुभवों के दृष्टांत उन्हें कार्य करने के लिये प्रेरित करते हैं। लेखिका ऐनैट सिमन्स का कहना है कि किसी भी असफल संपर्क में असफलता का मुख्य कारण मानवीय स्पर्श का अभाव होता है।

मरकुस ५:१-२० में वृतान्त है एक ऐसे मनुष्य का जो दुष्टात्माओं से पीड़ित था, किसी के भी काबू में नहीं रहता था और अपने आप को घायल करता रहता था। प्रभु यीशु ने उसे उन दुष्टआत्माओं से छुड़ाया, तो उस चंगे हुए व्यक्ति ने प्रभु से विनती करी कि अब प्रभु उसे अपने साथ ही रहने दे, "परन्‍तु उस [प्रभु यीशु] ने उसे आज्ञा न दी, और उस से कहा, अपने घर जाकर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया करके प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं। वह जाकर दिकपुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े काम किए, और सब अचम्भा करते थे।" (मरकुस ५:१९, २०)

साधारणतया, प्रभु यीशु के सुसमाचार के प्रचार में ज्ञान और वाकपटुता को आवश्यक्ता से कहीं अधिक महत्व दिया जाता है। परमेश्वर ने आप के साथ जो किया है, उसकी सामर्थ को कम मत समझिये, और अपने उद्धार के जीवन कि कहानी लोगों को सुनाने से मत घबराइये। - डेविड मैककैसलैंड


सुसमाचार बांटना, एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे को अच्छी खबर सुनाने जैसा है।

...अपने घर जाकर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया करके प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं। - मरकुस ५:१९


बाइबल पाठ:

और वे झील के पार गिरासेनियों के देश में पहुंचे।
और जब वह नाव पर से उतरा तो तुरन्‍त एक मनुष्य जिस में अशुद्ध आत्मा थी कब्रों से निकल कर उसे मिला।
वह कब्रों में रहा करता था। और कोई उसे सांकलों से भी न बान्‍ध सकता था।
क्‍योंकि वह बार बार बेडिय़ों और सांकलों से बान्‍धा गया था, पर उस ने साकलों को तोड़ दिया, और बेडिय़ों के टुकड़े टुकड़े कर दिए थे, और कोई उसे वश में नहीं कर सकता था।
वह लगातार रात-दिन कब्रों और पहाड़ो में चिल्लाता, और अपने को पत्थरों से घायल करता था।
वह यीशु को दूर ही से देखकर दौड़ा, और उसे प्रणाम किया।
और ऊंचे शब्‍द से चिल्लाकर कहा "हे यीशु, परमप्रधान परमेश्वर के पुत्र, मुझे तुझ से क्‍या काम? मैं तुझे परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि मुझे पीड़ा न दे।"
क्‍योंकि उस ने उस से कहा था, "हे अशुद्ध आत्मा, इस मनुष्य में से निकल आ।"
उस ने उस से पूछा "तेरा क्या नाम है?" उस ने उस से कहा "मेरा नाम सेना है क्‍योंकि हम बहुत हैं।"
और उस ने उस से बहुत बिनती की, हमें इस देश से बाहर न भेज।
वहां पहाड़ पर सूअरों का एक बड़ा झुण्‍ड चर रहा था।
और उन्‍होंने उस से बिनती करके कहा, कि "हमें उन सूअरों में भेज दे, कि हम उन के भीतर जाएं।"
सो उस ने उन्‍हें आज्ञा दी और अशुद्ध आत्मा निकल कर सूअरों के भीतर पैठ गई और झुण्‍ड, जो कोई दो हजार का था, कड़ाडे पर से झपटकर फील में जा पड़ा, और डूब मरा।
और उन के चरवाहों ने भाग कर नगर और गांवों में समाचार सुनाया।
और जो हुआ था, लोग उसे देखने आए। और यीशु के पास आकर, वह जिस में सेना समाई थी, उसे कपड़े पहिने और सचेत बैठे देख कर, डर गए।
और देखने वालों ने उसका जिस में दुष्‍टात्माएं थीं, और सूअरों का पूरा हाल, उन को कह सुनाया।
और वे उस से बिनती कर के कहने लगे, कि हमारे सिवानों से चला जा।
और जब वह नाव पर चढ़ने लगा, तो वह जिस में पहिले दुष्‍टात्माएं थीं, उस से बिनती करने लगा, कि मुझे अपने साथ रहने दे।
परन्‍तु उस ने उसे आज्ञा न दी, और उस से कहा, "अपने घर जाकर अपने लोगों को बता, कि तुझ पर दया करके प्रभु ने तेरे लिये कैसे बड़े काम किए हैं।"
वह जाकर दिकपुलिस में इस बात का प्रचार करने लगा, कि यीशु ने मेरे लिये कैसे बड़े काम किए, और सब अचम्भा करते थे।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११६-११८
  • १ कुरिन्थियों ७:१-१९

सोमवार, 23 अगस्त 2010

दाउद के समान

एक वृद्धा को अपने पास्टर का प्रति रविवार की प्रातः प्रार्थना करने का तरीका अच्छा नहीं लगता था, सो उसने जाकर यह बात उनसे कही। वृद्धा ने पास्टर से कहा कि, "मेरा पास्टर पाप कर सकता है, मैं ऐसा सोचना भी नहीं चाहती"। जब सन्देश देने से पहले पास्टर प्रार्थना में परमेश्वर के आगे यह अंगीकार और पश्चाताप करता कि बीते सप्ताह में उससे पाप हुआ है, इससे उसे परेशानी होती थी।

हम यह मानना चाहते हैं कि हमारे आत्मिक अगुवे पाप नहीं करते, परन्तु वास्तविकता यही है कि कोइ भी मसीही शरीर के पापी स्वभाव के बोझ से मुक्त नहीं है। पौलुस ने कुलुस्सियों के विश्वासियों से कहा "इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर [के] हैं..."(कुलुस्सियों ३:५)। समस्या तब होती है जब हम ऐसा करने की अपेक्षा प्रलोभनों के आगे झुक जाते हैं और फिर पाप द्वारा परेशनियों में पड़ जाते है। यदि ऐसा हो तो हमें अपने आप को विवश और असहाय समझकर निराश नहीं हो जाना चाहिये। परमेश्वर ने आत्मिक अवस्था की पुनः प्राप्ति के लिये उपाय दिया है, परमेश्वर के वचन में हमारे पास अनुसरण करने के लिये एक उदाहरण है - राजा दाउद का।

राजा दाउद के पाप प्रलोभनओं के आगे घुटने टेकने से उत्पन्न दुशपरिणामों का उदाहरण हैं। ऐसी अव्स्था में पड़कर, जब दाउद ने परमेश्वर के सन्मुख अपने पाप को स्वीकार किया, तो उसके मन और कलम से जो निकला वह भजन ५१ में हमारे लिये एक नमूना है। भजन ५१ को ध्यान से पढ़िये और देखिये कि दाउद ने क्या किया - सबसे पहले वह परमेश्वर के चरणों पर गिर पड़ा, उससे अपने पाप का अंगीकार किया, क्षमा याचना करी और परमेश्वर के खरे न्याय पर विश्वास व्यक्त किया (पद १-६)। फिर उसने परमेश्वर द्वारा, जो क्षमा करके उसके पापों का लेखा मिटा सकता है, शुद्ध और स्वच्छ किये जाने का आग्रह किया (पद ७-९)। फिर अपने साथ पवित्र आत्मा की सहायता के बने रहने और अपने बहाल होने के लिये प्रार्थना करी (पद १०-१२)।

क्या पाप ने आपके आनन्द को छीन लिया है और परमेश्वर से आपकी संगति में बाधक हो गया है? तो दाउद के समान, आप भी अपनी समस्या के साथ परमेश्वर की शरण में जाएं। - डेव ब्रैनन


पश्चाताप, परमेश्वर के साथ हमारे चलने के लिये मार्ग को साफ करता है।

मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं... - भजन ५१:३


बाइबल पाठ: भजन ५१:१-१२

हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर, अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ा कर मुझे शुद्ध कर!
मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
मैं ने केवल तेरे ही विरूद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है, और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा, मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ११३-११५
  • १ कुरिन्थियों ६