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शनिवार, 8 मई 2021

भरोसा


          मेसाचुसेट्स के बोस्टन शहर में एक पट्टिका लगी है जिस पर लिखा है “Crossing the Bowl of Tears” (आँसुओं का कटोरा पार करना)। यह उन लोगों की स्मृति में लगाई गई है जिन्होंने सन 1840 के अन्त के समय आयरलैंड में आए भयंकर अकाल से बचने के लिए अटलांटिक महासागर को पार करने का जोखिम उठाया। अकाल की इस भयानक त्रासदी में दस लाख से अधिक लोग मारे गए, और उतने ही लोगों ने घर-बार छोड़कर, खतरनाक हालात में महासागर पार करने का जोखिम उठाया। भूख और दुःख के कारण, ये यात्री कहीं पर, किसी रीति से कुछ आशा को ढूँढ रहे थे; उनकी इस तलाश को जॉन बॉयल ओरियली ने काव्यात्मक रीति से “आँसुओं का कटोरा” कहा।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 55 में, दाऊद बताता है कि वह कैसे आशा को ढूँढ़ रहा था। यद्यपि, जिन खतरों का वह सामना कर रहा था, हमें उनके कोई विवरण तो नहीं पता है, लेकिन हम यह समझ सकते हैं कि उनके बोझ के कारण वह अपने आप को भावनात्मक रीति से टूटा हुआ अनुभव करने लगा था (पद 4-5)। ऐसे में उसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी कि वह प्रार्थना करे, और उसने लिखा, और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता” (पद 6)।

          जब भी संकट आएँ, तो सदा स्मरण रखें कि सभी शान्ति का परमेश्वर आपको आपके सबसे अन्धकारपूर्ण समयों और सबसे गहरे भय के पार सुरक्षित लेकर जा सकता है। हमारे प्रभु परमेश्वर का अपने विश्वासियों से यह वायदा है कि वह हमारी आँखों से सब आँसुओं को पोंछ देगा (प्रकाशितवाक्य 21:4)। उसके इस आश्वासन से सामर्थ्य पाकर, हम आज अपने आँसुओं को भी उसे सौंप सकते हैं, इस भरोसे के साथ कि अवश्य ही एक दिन वह उन सभी का हिसाब चुकाएगा। - बिल क्राउडर

 

हे परमेश्वर पिता, जब जीवन अभिभूत करे, तो मुझे अपनी सामर्थ्य से भर देना।


तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? - भजन संहिता 56:8

बाइबल पाठ: भजन 55:4-19

भजन संहिता 55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।

भजन संहिता 55:5 भय और कंपकंपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं।

भजन संहिता 55:6 और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!

भजन संहिता 55:7 देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,

भजन संहिता 55:8 मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।

भजन संहिता 55:9 हे प्रभु, उन को सत्यानाश कर, और उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दे; क्योंकि मैं ने नगर में उपद्रव और झगड़ा देखा है।

भजन संहिता 55:10 रात दिन वे उसकी शहरपनाह पर चढ़कर चारों ओर घूमते हैं; और उसके भीतर दुष्टता और उत्पात होता है।

भजन संहिता 55:11 उसके भीतर दुष्टता ने बसेरा डाला है; और अन्धेर, अत्याचार और छल उसके चौक से दूर नहीं होते।

भजन संहिता 55:12 जो मेरी नामधराई करता है वह शत्रु नहीं था, नहीं तो मैं उसको सह लेता; जो मेरे विरुद्ध बड़ाई मारता है वह मेरा बैरी नहीं है, नहीं तो मैं उस से छिप जाता।

भजन संहिता 55:13 परन्तु वह तो तू ही था जो मेरी बराबरी का मनुष्य मेरा परम-मित्र और मेरी जान पहचान का था।

भजन संहिता 55:14 हम दोनों आपस में कैसी मीठी मीठी बातें करते थे; हम भीड़ के साथ परमेश्वर के भवन को जाते थे।

भजन संहिता 55:15 उन को मृत्यु अचानक आ दबाए; वे जीवित ही अधोलोक में उतर जाएं; क्योंकि उनके घर और मन दोनों में बुराइयां और उत्पात भरा है।

भजन संहिता 55:16 परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा।

भजन संहिता 55:17 सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा।

भजन संहिता 55:18 जो लड़ाई मेरे विरुद्ध मची थी उस से उसने मुझे कुशल के साथ बचा लिया है। उन्होंने तो बहुतों को संग ले कर मेरा सामना किया था।

भजन संहिता 55:19 ईश्वर जो आदि से विराजमान है यह सुनकर उन को उत्तर देगा। ये वे हैं जिन में कोई परिवर्तन नहीं और उन में परमेश्वर का भय है ही नहीं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 राजाओं 4-6
  • लूका 24:36-53

सोमवार, 21 मई 2018

निवास स्थान



   ब्रिटिश जनरल और संसद सदस्य जेम्स ओग्लेथोर्प का दर्शन एक महान नगर बनाने का था। उन्हें उत्तरी अमेरिका में जॉर्जिया प्रांत को बसाने का बीड़ा दिया गया था। उन्होंने अपने दर्शन के अनुसार वहाँ एक नगर स्थापित करने की योजना बनाई। अपनी इस योजना में उन्होंने अनेकों चौकोर स्थानों को परस्पर निकटता में बनाया। प्रत्येक चौकोर स्थान में चर्च और दुकानों के लिए स्थान और हरित स्थान थे, और शेष इलाका, रिहायशी मकान बनाए जाने के लिए था। उस समय जेम्स ओग्लेथोर्प द्वारा दर्शन के साथ बनाया गया शहर सवान्ना, आज अमेरिका के दक्षिणी क्षेत्र का उत्कृष्ठ शहर है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अंतिम पुस्तक, प्रकाशिवाक्य, के 21 अध्याय में यूहन्ना ने एक भिन्न नगर – नए यरूशलेम का दर्शन देखा। यूहन्ना ने इस शहर के बारे जो वर्णन दिया है वह उसकी परियोजना एवँ बनावट के विषय में कम और उसमें निवास करने वालों के चरित्र के बारे में अधिक है। जब यूहन्ना ने हम मसीही विश्वासियों के अनन्तकाल के निवास स्थान का वर्णन किया, तो उसने लिखा, “फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा” (पद 3)। जो वहाँ था – परमेश्वर पिता – उसकी उपस्थित के कारण यह निवास स्थान उस बात के लिए उल्लेखनीय है जो वहाँ नहीं होगी। यशायाह 25:8 को उद्धृत करते हुए यूहन्ना ने लिखा, “और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं” (पद 4)।

   फिर कोई मृत्यु नहीं होगी! न ही कोई विलाप या पीड़ा रहेगी। हमारे दुखों के स्थान पर परमेश्वर की अद्भुत चंगाई और शान्ति देने वाली, सृष्टि के परमेश्वर की उपस्थिति आ जाएगी। यही वह स्थान है जिसे आज प्रभु यीशु अपने विश्वासियों, अनुयायियों के लिए तैयार कर रहा है; उनके लिए जो पश्चाताप के साथ उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित कर देते हैं। - बिल क्राउडर


हे प्रभु, जब आप हमारे लिए स्थान तैयार कर रहे हैं, 
तो उस स्थान के लिए हमें भी तैयार करें।

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:1-3

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 13-15
  • यूहन्ना 7:1-27



सोमवार, 17 जुलाई 2017

सुसमाचार


   मैं चार किशोरों और एक बेघर जवान व्यक्ति के साथ निर्धनों के लिए भोजन उपलब्ध करवाने वाले एक स्थान में बैठा हुआ था, और उस जवान के प्रति उन किशोरों की अनुकंपा को देखकर बहुत प्रभावित हुआ। पहले वे धैर्य और नम्रता के साथ उस जवान से उसके बारे में और उसकी विश्वास धारणाओं के बारे में सुनते रहे, फिर उन्होंने कोमलता से प्रभु यीशु मसीह में आशा और आनन्द का सुसमाचार उसके सामने प्रस्तुत किया। दुःख की बात है कि उस जवान ने उनकी बात को मानने और प्रभु यीशु पर विश्वास करने से इंकार कर दिया।

   जब हम उस स्थान से जा रहे थे तो एक किशोरी ने आँखों में आँसुओं के साथ कहा कि वह कदापि नहीं चाहती है कि उस व्यक्ति की मृत्यु प्रभु यीशु को जाने बिना हो जाए। अपने हृदय की गहराईयों से वह उस व्यक्ति के लिए दुःखी थी, जिसने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के प्रेम के निमंत्रण को, कम से कम अभी के लिए, ठुकरा दिया था।

   उस किशोरी के आँसुओं से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, प्रेरित पौलुस का ध्यान आया जो प्रभु की सेवकाई बड़ी नम्रता से करता था और अपने जाति-भाई इस्त्राएलियों के लिए उसके हृदय में बहुत दुःख था; उसकी गहरी चाह थी कि उसके समान अन्य इस्त्राएली भी प्रभु यीशु पर विश्वास ले आएं (रोमियों 9:1-5)। अपने इस्त्राएली भाई-बहनों के प्रति पौलुस की चिंता और अनुकंपा, अनेकों बार उसकी आँखों में उनके लिए आँसू लेकर आई होगी।
   
   यदि उनके प्रति, जिन्होंने प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर से मिलने वाली पापों की क्षमा को स्वीकार नहीं किया है, हम वास्तव में चिंता रखते हैं तो उनके साथ सुसमाचार को बाँटने के लिए हम कोई न कोई तरीका ढूँढ़ लेंगे। अपने विश्वास के भरोसे को थामे हुए, अनुकंपा के आँसुओं के साथ, आईये हम सुसमाचार को उनके पास लेकर जाएं जिन्हें जगत के उद्धाकर्ता, प्रभु यीशु मसीह को जानने की आवश्यकता है। - डेव ब्रैनन


सुसमाचार बाँटने का अर्थ है एक व्यक्ति दूसरे तक अच्छा समाचार पहुँचाए।

क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है। क्योंकि उस में परमेश्वर की धामिर्कता विश्वास से और विश्वास के लिये प्रगट होती है; जैसा लिखा है, कि विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा। - रोमियों 1:16-17

बाइबल पाठ: रोमियों 9:1-5
Romans 9:1 मैं मसीह में सच कहता हूं, झूठ नहीं बोलता और मेरा विवेक भी पवित्र आत्मा में गवाही देता है। 
Romans 9:2 कि मुझे बड़ा शोक है, और मेरा मन सदा दुखता रहता है। 
Romans 9:3 क्योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्बी हैं, आप ही मसीह से शापित हो जाता। 
Romans 9:4 वे इस्त्राएली हैं; और लेपालकपन का हक और महिमा और वाचाएं और व्यवस्था और उपासना और प्रतिज्ञाएं उन्हीं की हैं। 
Romans 9:5 पुरखे भी उन्हीं के हैं, और मसीह भी शरीर के भाव से उन्हीं में से हुआ, जो सब के ऊपर परम परमेश्वर युगानुयुग धन्य है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


मंगलवार, 30 मई 2017

आँसू


   मैंने अपनी एक पुरानी सहेली को, उसकी माँ के देहान्त पर फोन किया। उसकी माँ और मेरी माँ भी बहुत अच्छी सहेलियाँ रहे थे, और अब दोनों ही इस संसार से जा चुके थे। परस्पर बातचीत करते हुए, हमारा वार्तालाप भावनाओं के चक्र में चला गया - देहान्त के कारण दुःख के आँसू और उनके प्रेम, देखभाल करने वाले स्वभाव और ज़िन्दादिली के उदाहरणों को स्मरण करके उनके साथ बिताए हुए पलों के लिए खुशी के आँसू।

   हम में से अनेकों ने इन मिश्रित भावनाओं का अनुभव किया होगा - एक पल रोना और दूसरे पल हँसना। यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान की गई बड़ी अद्भुत बात है कि हम दुःख और खुशी दोनों ही में आँसुओं के द्वारा अपने मन की भावना व्यक्त कर सकते हैं, अपना मन हलका कर सकते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हमें परमेश्वर ने अपने स्वरूप में सृजा है (उत्पत्ति 1:26)। क्योंकि सारे संसार के सभी मनुष्य उसी एक परमेश्वर के द्वारा, उस ही के स्वरूप में सृजे गए हैं, और संसार भर में, सभी संसकृतियों में विनोद व्यवहार का एक अभिन्न अंग है, इसलिए मेरा विचार है कि प्रभु यीशु का भी विनोदप्रीय व्यवहार रहा होगा। परन्तु हम यह भी जानते हैं कि वह दुःख की पीड़ा से भी भली-भांति अवगत था। जब प्रभु के मित्र लाज़र का देहान्त हुआ और प्रभु ने लाज़र की बहन मरियम को रोते हुए देखा, तो "जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? यीशु के आंसू बहने लगे" (यूहन्ना 11:33, 35)।

   अपनी भावनाओं को आँसुओं द्वारा व्यक्त करना परमेश्वर का एक दान है, और बाइबल हमें आश्वस्त करती है कि परमेश्वर हमारे प्रत्येक आँसू का हिसाब रखता है: "तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?" (भजन 56:8)। लेकिन साथ ही बाइबल हमें यह आश्वासन भी देती है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक ऐसा समय भी आने वाला है, जब हर दुःख, हर पीड़ा का अन्त हो जाएगा, और आँसुओं का भी; परमेश्वर हमारे साथ निवास करेगा और स्वयं हमारे सभी आँसू पोंछ डालेगा। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता, जिसने हमारे सभी पापों को धो डाला है, 
वही हमारे सभी आँसुओं को भी पोंछ देगा।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:32-44
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता 
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57


बुधवार, 4 मई 2016

आँसू


   मैंने और मेरी पत्नि ने प्रभु-भोज की एक सभा में भाग लिया जहाँ मसीही विश्वासियों को निमंत्रण दिया गया कि वे आगे आकर पादरी और उसके सहायकों से रोटी और दाखरस के प्याले को ग्रहण करें। जितने लोग भाग लेने के लिए आगे आए उन सभी से पादरी और उसके सहायकों ने उनके पापों की क्षमा और उद्धार के लिए प्रभु यीशु द्वारा दिए गए बलिदान के बारे में कहा, जिससे वह जो महज़ एक रस्म बन सकता है, एक मर्मस्पर्शी अवसर बन गया था। हम जब लौट कर अपने स्थानों पर आए तो हम ने कई लोगों को धीरे-धीरे विचारमग्न होकर वापस आते देखा, और उन में अनेक की आँखों में आँसू थे। मेरे लिए और उन लोगों के लिए, जिनसे मैंने सभा के बाद बातचीत करी, वे कृतज्ञता के आँसू थे।

   कृतज्ञता के उन आँसुओं का कारण प्रभु-भोज के कारण में ही निहित है। प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रभु-भोज के अर्थ को उन्हें समझाया, जिनमें ये सशक्त शब्द भी हैं: "क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो" (1 कुरिन्थियों 11:26)। जबकि प्रभु-भोज की वस्तुएं सीधे तौर पर प्रभु यीशु और क्रूस पर दिए गए उनके बलिदान की ओर इशारा कर रही हैं, तो प्रभु-भोज कोई रस्म नहीं है; यह मसीह यीशु के साथ संभागी होना है। प्रभु-भोज हमें मसीह यीशु के प्रेम, बलिदान, क्रूस और उसके द्वारा अपने विश्वासियों के लिए तैयार करे गए पापों की क्षमा, उद्धार तथा अनन्त जीवन के मार्ग का स्मरण करना है; साथ ही यह स्मरण कराता है कि हम मसीही विश्वासियों को अपने प्रभु का गवाह होना है।

   मसीह यीशु के इस बेशकीमत बलिदान के बेबयान महत्व और बहुमूल्यता को समझा और बता पाने के लिए हमारे शब्द कितने कमज़ोर और अधूरे हैं! जो बात शब्द नहीं समझा पाते, कई बार वह आँसुओं से व्यक्त हो जाती है। - बिल क्राउडर


जो प्रेम प्रभु यीशु ने हमारे लिए क्रूस पर प्रदर्शित किया है, उसे बयान करने के लिए शब्द काफी नहीं हैं।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। - यूहन्ना 15:13 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-32
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 16-18
  • लूका 22:47-71


शनिवार, 21 सितंबर 2013

आँसू

   क्या कभी आपका दिल टूटा है? क्यों टूटा? क्रूरता से? असफलता से? हानि से? धोखे या अविश्वासयोग्यता से? हो सकता है कि आप ने उस दुख में रोने के लिए अपने आप को किसी अंधेरे में समेट लिया हो।

   रोना कभी कभी अच्छा होता है; परिस्थिति अनुसार आँसू बहा लेना भला करता है। एक स्कौटिश प्रचारक जौर्ज मैकडौनल्ड ने कहा था, "आँसू ही रोने की आवश्यकता का एकमात्र इलाज हैं।"

   प्रभु यीशु भी अपने मित्र लाज़रस की कब्र पर आकर रोया था (यूहन्ना 11:35) क्योंकि उसका भी दिल टूटा था (पद 33) और वह आज भी हमारे दुखों में हमारे साथ सम्मिलित होता है; हमारे आँसू हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की करुणा और कोमल देखभाल को आकर्षित करते हैं, क्योंकि वह हमें तकलीफ में नहीं देखना चाहता। जब हम किसी दुख मुसीबत में होते हैं वह हमारी परेशान और निंद्राविहीन रातों को जानता है। जब हम शोकित होते हैं तो उसका भी दिल भर आता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों" (2 कुरिन्थियों 1:3-4)। वह अपने लोगों को एक दूसरे को शान्ति देने के लिए उपयोग करता है।

   लेकिन आज की सान्तवना और शान्ति सब दुखों का अन्तिम उत्तर नहीं है क्योंकि शान्ति तथा आँसुओं की आवश्यकता तो इस जीवन भर होती रहेगी। परन्तु वह दिन आ रहा है जब हमारा प्रभु यीशु हमारी "....आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य 21:4)। हम उसको इतने प्रीय हैं कि वह स्वयं हमारी आँखों से आँसू पोंछ डालेगा; वह हम से व्यक्तिगत रीति से और समझ से परे गहराई से प्रेम करता है।

   स्मरण रखें प्रभु यीशु ने अपने ’पहाड़ी उपदेश’ में आश्वासन दिया था "धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे" (मत्ती 5:4)। क्या आप आज भी अपने दुखों और आँसुओं को अकेले ही झेलना चाहते हैं? स्मरण रखिए, प्रभु यीशु आपके हर दुख और हर आँसु में आपके साथ सम्मिलित होना चाहता है, अपनी शान्ति और सान्तवना आपको देना चाहता है। क्या आप प्रभु यीशु को अपने दुख और आँसू बाँटने का अवसर प्रदान करेंगे? - डेविड रोपर


परमेश्वर ना केवल हमारे दुखों के विषय चिंता करता है, वह उन्हें बाँटता भी है।

धन्य हो तुम, जो अब भूखे हो; क्योंकि तृप्‍त किए जाओगे; धन्य हो तुम, जो अब रोते हो, क्योंकि हंसोगे। - लूका 6:21

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा।
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 7-9 
  • 2 कुरिन्थियों 13


मंगलवार, 3 सितंबर 2013

आँसू

   छोटे से राष्ट्र हेती में सन 2010 में आए विनाशकारी भूकम्प से हुई बरबादी और जान-माल के नुकसान तथा उसके कारण वहाँ के लोगों द्वारा झेली जाने वाली कठिनाईयों की तसवीरें टेलिविज़न पर हम सब ने देखी हैं और उनसे अभिभूत भी हुए हैं। उन अनेक दिल दहला देने वाली तस्वीरों में से एक थी एक महिला की जो अपने चारों ओर की तबाही को देखकर फूट-फूट कर रो रही थी। उस स्त्री का मस्तिष्क अपने लोगों की उस भयानक त्रासदी को संभाल नहीं पा रहा था, उसका हृदय टूट गया था और परिणामस्वरूप उसके आँसू बहे जा रहे थे। उसकी यह प्रतिक्रीया समझ में आती थी क्योंकि कभी कभी जिस कष्ट का सामना हम करते हैं उसके लिए आँसू ही उचित प्रत्युत्तर होते हैं।

   मैं जब उस तस्वीर को ग़ौर से देख रहा था तो मुझे अपने प्रभु यीशु की अनुकंपा स्मरण हो आई। प्रभु यीशु भी आँसुओं के महत्व को जानते थे, और वे भी रोए थे। लेकिन उनका रोना एक अलग ही प्रकार के विनाश के कारण था - पाप द्वारा लाए गए विनाश के कारण। जब वे अपने पकड़वाए और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले यरुशलेम की ओर बढ़ रहे थे, उस यरुशलेम शहर की ओर जहाँ परमेश्वर का मन्दिर भी था लेकिन जो अब भ्रष्टाचार और अन्याय जैसे दुराचारों के कारण लोगों को होने वाली परेशानियों तथा तकलीफों से भरा हुआ था, तो प्रभु के आँसू बहने लगे: "जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया" (लूका 19:41)। प्रभु यीशु उस नगर के प्रति अपने दुख और वहाँ के लोगों पर तरस आने के कारण रोया।

   आज जब हम अपने आस-पास संसार में अमानुषिकता, पीड़ा तथा पाप को देखते हैं जिसके कारण संसार में विनाश और त्रासदी व्याप्त है, तो हमारा प्रत्युत्तर क्या होता है? यदि हमारे प्रभु यीशु का हृदय संसार की इस दुर्दशा से टूटता है तो क्या हमारा नहीं टूटना चाहिए? जब हम अपने प्रभु की उस पीड़ा को पहचानेंगे तथा अनुभव करेंगे तो उसके समान ही हम भी संसार को पाप की पीड़ा और त्रासदी से छुड़ाने के लिए प्रयास करने वाले बन जाएंगे - वह छुटकारा जो प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा के द्वारा समस्त संसार के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है। - बिल क्राउडर


अनुकंपा दूसरों के दुख में उन्हें आराम पहुँचाने हेतु जो भी आवश्य्क हो उसका प्रबंध करती है।

जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया। - लूका 19:41

बाइबल पाठ: लूका 19:37-44
Luke 19:37 और निकट आते हुए जब वह जैतून पहाड़ की ढलान पर पहुंचा, तो चेलों की सारी मण्‍डली उन सब सामर्थ के कामों के कारण जो उन्होंने देखे थे, आनन्‍दित हो कर बड़े शब्द से परमेश्वर की स्‍तुति करने लगी।
Luke 19:38 कि धन्य है वह राजा, जो प्रभु के नाम से आता है; स्वर्ग में शान्‍ति और आकाश मण्‍डल में महिमा हो।
Luke 19:39 तब भीड़ में से कितने फरीसी उस से कहने लगे, हे गुरू अपने चेलों को डांट।
Luke 19:40 उसने उत्तर दिया, कि तुम से कहता हूं, यदि ये चुप रहें, तो पत्थर चिल्ला उठेंगे।
Luke 19:41 जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया।
Luke 19:42 और कहा, क्या ही भला होता, कि तू; हां, तू ही, इसी दिन में कुशल की बातें जानता, परन्तु अब वे तेरी आंखों से छिप गई हैं।
Luke 19:43 क्योंकि वे दिन तुझ पर आएंगे कि तेरे बैरी मोर्चा बान्‍धकर तुझे घेर लेंगे, और चारों ओर से तुझे दबाएंगे।
Luke 19:44 और तुझे और तेरे बालकों को जो तुझ में हैं, मिट्टी में मिलाएंगे, और तुझ में पत्थर पर पत्थर भी न छोड़ेंगे; क्योंकि तू ने वह अवसर जब तुझ पर कृपा दृष्टि की गई न पहिचाना।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 140-142 
  • 1 कुरिन्थियों 14:1-20


बुधवार, 16 नवंबर 2011

आँसुओं का मूल्य

   आँसू, भावनाएं व्यक्त करने में शब्दों से और संबंधों के बनाने में वाचाओं से अधिक सामर्थी होते हैं। सन १९४७ में तत्कालीन अमेरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन पड़ौसी देश मेक्सिको के दौरे पर थे और वे वहाँ के एक सैनिक प्रशिक्षण केंद्र पर श्रद्धांजलि देने गए। तब से लगभग सौ वर्ष पूर्व, अमेरीकी सैनिकों ने जब उस स्थान पर कब्ज़ा किया था तो प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे सैनिक छात्रों ने भी युद्ध में भाग लिया और उस युद्ध में सभी शहीद हो गए। जब ट्रूमैन उन शहीदों के स्मरण में बने स्मारक पर उनके लिए अपने श्रद्धा सुमन चढ़ा कर और उनके आदर में अपने सर को झुका कर खड़े हुए तो वहाँ उपस्थित सैनिकों की आँखों से आँसू बहने लगे। उस समय पर व्यक्त किए गए इस भावोद्वेग ने दोनो देशों के संबंध को दृढ़ करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

   मसीही विश्वासी भी अपने सबसे घोर संघर्ष और सबसे उत्तम भावनाएं अपने आँसुओं के माध्यम से प्रकट कर सकते हैं। जब आँसु प्रार्थना और संवेदना के साथ मिलाकर अर्पित करे जाते हैं, तो वे विश्वासी के विश्वास और भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति हो जाते हैं।

   मुझे कोई संदेह नहीं है कि प्रभु यीशु भी जीवन के सच्चे आनन्दों में आनन्दित होते थे; लेकिन अपने चारों ओर विद्यमान पाप के कारण उत्पन्न दुख से भी वो आहत होते थे। वे बेझिझक अपने मित्र की कब्र पर भी रोए और यरुशलेम के अविश्वास पर भी उनके आँसू बह निकले।

   हमारे उद्धाकर्ता के आँसू हमें प्रोतसाहित करते हैं कि हम भी अपने भावों की सच्ची अभिव्यक्ति के लिए आँसू बहाने से न हिचकिचाएं, बिगड़े संबंधों को सुधारने और अवरोधों को दूर करने के लिए हम अपने आँसुओं का पवित्र आत्मा को प्रयोग करने दें।

   क्योंकि कठोर, दुखी और अविश्वासी लोगों को यीशु के प्रेम, क्षमा और उद्धार की आवश्यक्ता है, इसलिए हमें उनके लिए परमेश्वर के सन्मुख आँसू बहाने की आवश्यक्ता है। उनके लिए हमारे आँसुओं को देख कर उनके कठोर मन पिघल सकते हैं और वे भी यीशु को ग्रहण करने वाले हो सक्ते हैं। - डेनिस डी हॉन


यदि आँखों में आँसू ना हों तो आत्मा को कोई मेघधनुष दिखाई नहीं देगा।

आनन्‍द करने वालों के साथ आनन्‍द करो, और रोने वालों के साथ रोओ। - रोमियों १२:१५

बाइबल पाठ: युहन्ना ११:१७-४४
    Joh 11:17  सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
    Joh 11:18  बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
    Joh 11:19  और बहुत से यहूदी मरथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
    Joh 11:20  सो मरथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्‍तु मरियम घर में बैठी रही।
    Joh 11:21  मरथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
    Joh 11:22  और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
    Joh 11:23  यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
    Joh 11:24  मरथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरूत्थान के समय वह जी उठेगा।
    Joh 11:25  यीशु ने उस से कहा, पुनरूत्थान और जीवन मैं ही हूं, जा कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
    Joh 11:26  और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्‍तकाल तक न मरेगा, क्‍या तू इस बात पर विश्वास करती है
    Joh 11:27  उस ने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आने वाला था, वह तू ही है।
    Joh 11:28  यह कह कर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुला कर कहा, गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है।
    Joh 11:29  वह सुनते ही तुरन्‍त उठ कर उसके पास आई।
    Joh 11:30  (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्‍तु उसी स्थान में था जहां मरथा ने उस से भेंट की थी।)
    Joh 11:31  तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्‍त उठके बाहर गई है और यह समझ कर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये।
    Joh 11:32  जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता।
    Joh 11:33  जब यीशु ने उस को और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?
    Joh 11:34  उन्‍होंने उस से कहा, हे प्रभु, चल कर देख ले।
    Joh 11:35  यीशु के आंसू बहने लगे।
    Joh 11:36  तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था।
    Joh 11:37  परन्‍तु उन में से कितनों ने कहा, क्‍या यह जिस ने अन्‍धे की आंखें खोलीं, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता?
    Joh 11:38  यीशु मन में फिर बहुत ही उदास होकर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
    Joh 11:39  यीशु ने कहा पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मरथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्‍योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
    Joh 11:40  यीशु ने उस से कहा, क्‍या मैं ने तुझ से न कहा कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी।
    Joh 11:41  तब उन्‍होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
    Joh 11:42  और मै जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्‍तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
    Joh 11:43  यह कह कर उस ने बड़े शब्‍द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
    Joh 11:44  जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था; यीशु ने उन से कहा, उसे खोलकर जाने दो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३-४ 
  • इब्रानियों ११:२०-४०