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शुक्रवार, 19 मई 2023

Miscellaneous Questions / कुछ प्रश्न - 14b - Back Sliders - Part 2/ पीछे हटने वाले - भाग 2

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क्या विश्वास से भटकने अथवा पीछे हटने वाले स्वर्ग जाएँगे? - भाग (2)


    ऐसे भी अनेकों लोग हैं जो मसीही विश्वास में आने के पश्चातकिसी कारणवश विश्वास से भटक गएपरन्तु प्रभु ने अपने वायदे (इब्रानियों 13:5) के अनुसार, उन्हें कभी छोड़ा नहीं। देर-सवेर, किसी न किसी रीति से, प्रभु उन्हें फिर विश्वास में लौटा कर ले आयाऔर फिर वे बहुत सामर्थी होकर प्रभु के लिए इस्तेमाल हुएविश्वास में अपने लौट कर आने की गवाही के द्वारा वे अनेकों अन्य भटके हुए या कमज़ोर विश्वासियों के लिए प्रोत्साहन और हिम्मत का कारण बने। यदि आज के संदर्भ से देखें, तो जब प्रभु यीशु ने कलवारी के क्रूस पर समस्त सँसार के पापों का दण्ड अपने ऊपर लिया, उस समय तो हमारा कोई भौतिक अस्तित्व था ही नहीं। साथ ही बाइबल में कहीं यह नहीं लिखा है कि प्रभु ने लोगों के केवल उन ही पापों को अपने ऊपर लेकर उनके दण्ड को सहा जो लोगों ने प्रभु के पास आने – अर्थात, उद्धार पाने से पहले किए थे; और उन लोगों के उद्धार पाने के बाद के पापों का निवारण प्रभु ने उन लोगों के हाथों में, उनके द्वारा किए गए कर्मों पर छोड़ दिया – यह तो असंभव है – उद्धार का एक भाग परमेश्वर के अनुग्रह पर, और दूसरा भाग मनुष्यों के कर्मों के आधार पर कैसे हो सकता है? प्रभु ने तो प्रत्येक व्यक्ति के समस्त जीवन में किए गए समस्त पापों की पूरी-पूरी कीमत क्रूस पर पहले ही चुका दी है, चाहे इतिहास में उसका अस्तित्व कभी भी हो। प्रभु ने उसके पापों के दुष्परिणाम से उस व्यक्ति के अधूरे नहीं परन्तु संपूर्ण निवारण का मार्ग बना कर दे दिया है; अब किसी भी मनुष्य के लिए उद्धार का जीवन जीने के लिए कुछ भी करना शेष नहीं रहा है। जब व्यक्ति के जन्म से लेकर उसके मरण के समय तक के सभी पापों को प्रभु ने अपने ऊपर ले लिया, उनकी पूरी कीमत चुका दी, तो फिर उस व्यक्ति को स्वर्ग जाने से रोकने वाला कौन सा पाप बच गया? क्या उसके विश्वास से भटक जाने का पाप भी उसके जीवन के अन्य पापों में सम्मिलित नहीं है, जिसकी कीमत प्रभु द्वारा कलवारी के क्रूस पर चुकाई जा चुकी है? 

    और यदि यह मान लिया जाए कि व्यक्ति उद्धार पाने के बाद अपने जीवन की शुद्धता और पवित्रता, तथा निष्पाप रहने को अपने ही प्रयासों, कार्यों, और सामर्थ्य से बनाए रख सकता है, तो फिर वह यही कार्य उद्धार पाने से पहले भी कर सकता था – फिर तो प्रभु का आना न केवल व्यर्थ हो गया, वरन पापी, मरणहर मनुष्य, प्रभु परमेश्वर से भी बढ़कर हो गया! क्योंकि फिर तो मनुष्य मात्र अपने कर्मों से ही वह कर सकने की क्षमता रखता है जिसके लिए प्रभु को स्वर्ग छोड़कर धरती पर मनुष्य रूप में आना पड़ा, दुःख और अपमान सहना पड़ा, और अपनी जान देनी पड़ी – यह तो पूर्णतः असंगत और असंभव विचार है! फिर, ऐसा कौन सा उद्धार पाया हुआ व्यक्ति है जो सच्चे मन से कहा सकता है कि उद्धार पाने के बाद उससे कभी भी – शरीर, मन, ध्यान, विचार में, कोई भी पाप नहीं हुआ? प्रेरित यूहन्ना कहता है: “यदि हम कहेंकि हम में कुछ भी पाप नहींतो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। यदि कहें कि हम ने पाप नहीं कियातो उसे झूठा ठहराते हैंऔर उसका वचन हम में नहीं है” (1 यूहन्ना 1:8, 10) – ध्यान कीजिए कि वह प्रेरित और उद्धार पाया हुआ होने के बावजूद, “हम” शब्द के प्रयोग द्वारा, अपने आप को भी पाप करने वालों में सम्मिलित कर रहा है। तो फिर अब विश्वास से भटके और न भटके हुए में क्या अन्तर रह गया? पाप विश्वास से भटकने वाले ने भी किया, और पाप उन्होंने भी किया है और करते हैं जो अभी भी विश्वास में बने हुए हैं – और क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है (रोमियों 6:23), इसलिए दोनों ही समान स्थिति में हैं, और दोनों ही अपने कैसे भी कार्यों या कर्मों के द्वारा अथवा उनके आधार पर नहीं वरन प्रभु के अनुग्रह, क्षमा, और प्रेम द्वारा ही परमेश्वर के सम्मुख धर्मी ठहरते हैं, और दोनों ही फिर स्वर्ग जाने के लिए प्रभु के अनुग्रह और क्षमा द्वारा ही स्वीकार्य माने जाते हैं।

    इसलिए ऐसे लोगों के लिए जो विश्वास से भटक गए हैं प्रार्थना करते रहना चाहिएन कि उनकी भर्त्सना करनी चाहिएऔर उनका विश्वास में लौट कर आना तथा प्रभु के लिए उपयोगी होना प्रभु के हाथों मेंउसके समय और योजना के अनुसारपूरा होने के लिए छोड़ देना चाहिए।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

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Will Back-Sliders go to Heaven? - Part (2)


    There are many such people who after coming into the Christian Faith, for some reason or the other, back-slid or fell away from the Faith, but the Lord in accordance with His promise (Hebrews 13:5) did not leave or forsake them. Sooner or later, through some way, Lord brought them back into the Faith, and subsequently they were used mightily for the Lord, and through their witness and example of returning back into the Faith they became a source of encouragement and courage to others who were weak in, or had fallen away from the Faith. If we look at it from our current context, then the time when the Lord Jesus had taken the penalty of the world’s sins upon Himself, at that time we had no physical existence. Also, nowhere is it written in the Bible that the Lord took upon Himself and suffered the penalty of only those sins of the people which they had committed before coming to the Lord – i.e., the sins they had committed before being saved; and the Lord has left the remedy of their sins committed after their being saved in their own hands, by virtue of their works – this is an impossibility – how can a part of salvation be dependent upon the grace of God, and the remaining part be based on the works of a person? 

    The Lord has paid in full, the penalty for all the sins of all the people committed in their entire life-time, at whatever time in the history of the world they have existed. He has made available not a just partial but the complete way out from the deadly consequences of every person's entire sin burden of their entire life-time; now there is nothing left for any person to accomplish by his own efforts to live a saved life. When the Lord has taken upon Himself all the sins of every person, from their birth to their death, has paid in full for them, then which sin is left that will hinder the person from entering heaven? Is his sin of back-sliding or falling away from the Faith not a part of the sins of his lifetime, the price for which has already been paid in full by the Lord? 

    And if, supposing, having been cleansed on being saved, a person is able to maintain his life pure and sinless by his own efforts, works, and abilities, then he could have done the same before being saved as well – then the Lord's coming has been in vain; rather, the sinful, mortal man, actually has become greater than the Lord God! Since if this were possible, then man merely by his works, can accomplish that for which the Lord had to leave heaven and come down as a man to earth, suffer ignominy and tortureand had to sacrifice His life – this is an absolutely inconsistent and impossible contention! Moreover, which saved person can in all honesty say that since salvation, he has never – physically, mentally, or in thoughts, ever committed any sin? The Apostle John says: “If we say that we have no sin, we deceive ourselves, and the truth is not in us. If we say that we have not sinned, we make Him a liar, and His word is not in us.” (1 John 1:8, 10) – take note that though he was a saved person and an Apostle, yet, through the use of the word "we" he is including himself amongst the sinners referred to in this verse. Therefore what difference if any is left between those who have back-slid or fallen away from the Faith, and those who haven't? The one falling away has also sinned, and those who are still in the Faith, they too have sinned or do sin – and since the wages of sin is death (Romans 6:23), therefore both of them are in a similar situation, and both are justified before God not by their works of any kind, but solely by the grace, forgiveness, and love of God, and both are made acceptable for entry into heaven through the grace and forgiveness of God.

    Therefore for those who have back-slid or fallen away from faith, instead of criticizing and condemning them, we should pray for them; and we should leave their returning back into the Faith and being useful for the Lord in the hands of the Lord, to be accomplished according to the time and plan of God.

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

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गुरुवार, 18 मई 2023

Miscellaneous Questions / कुछ प्रश्न - 14a - Back Sliders - Part 1/ पीछे हटने वाले - भाग 1

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क्या विश्वास से भटकने अथवा पीछे हटने वाले स्वर्ग जाएँगे? - भाग (1)


प्रश्न:
    एक बार जो व्यक्ति उद्धार पा गया तो क्या वह विश्वास से भटक जाने के बाद स्वर्ग जाएगा?

उत्तर:
    जिसने भी उद्धार पाया है, अर्थात, स्वेच्छा तथा सच्चे मन से, अपने पापों से पश्चाताप करके, प्रभु यीशु मसीह को अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार किया है, उससे अपने पापों की क्षमा माँगी है, और अपना जीवन उसे समर्पित किया है, परमेश्वर के अनुग्रह से केवल वही व्यक्ति स्वर्ग जाएगा – लेकिन मनुष्य की वास्तवक आत्मिक दशा केवल परमेश्वर ही जानता है, इसलिए कौन स्वर्ग जाएगा और कौन नहीं, इसका निर्धारण केवल परमेश्वर ही कर सकता है, और कोई नहीं।

    परमेश्वर के वचनबाइबल के अनुसारयह बिलकुल स्पष्ट और स्थापित है कि उद्धार सदा काल के लिए है अर्थात ‘eternal’ है। इब्रानियों की पत्री का लेखकप्रभु यीशु मसीह के द्वारा मनुष्यों को उद्धार प्रदान करने के लिए किए गए कार्यों के विषय लिखता है, “और पुत्र होने पर भीउसने दुख उठा उठा कर आज्ञा माननी सीखी। और सिद्ध बन करअपने सब आज्ञा मानने वालों के लिये सदा काल के उद्धार (eternal salvation) का कारण हो गया” (इब्रानियों 5:8-9)। प्रभु यीशु मसीह ने भी कहा कि उस पर विश्वास लाए हुए उसके लोगों को वह अनन्त जीवन (अर्थात कभी समाप्त न होने वाला अक्षय जीवन, eternal life) प्रदान करता हैतथा साथ ही यह आश्वासन भी दिया कि कोई भी प्रभु या परमेश्वर के हाथों से उन अनन्त जीवन पाए हुओं को नहीं छीन सकता है (यूहन्ना 10:27-29) – प्रभु का यह वायदा बहुत ही गंभीर एवं बहुत महत्वपूर्ण तात्पर्य रखने वाला कथन है। प्रभु के इस वायदे के आधार पर, उद्धार खो देने का अभिप्राय होता है कि, शैतान ने किसी विधि से उन उद्धार पाए हुए व्यक्तियों को प्रभु या परमेश्वर के हाथ से छीन कर फिर से अपनी आधीनता में ले लिया है। यदि किसी भी प्रकार यह संभव होता, तो फिर तीन असंभव बातें संभव हो जाती हैं – पहली यह कि शैतान परमेश्वर से अधिक शक्तिशाली है; दूसरी यह प्रभु यीशु ने झूठ बोला, उसने झूठा आश्वासन दिया कि कोई भी उद्धार पाए हुओं को उसके या परमेश्वर पिता के हाथों से छीन नहीं सकता है; और तीसरी यह कि प्रभु को न शैतान की, न अपनी और न परमेश्वर की शक्ति की वास्तविकताओं का पता है, और वह यूं ही कुछ भी कहे जा रहा है! क्योंकि यह हो पाना पूर्णतः असंभव है, इसलिए प्रगट है कि कोई भी व्यक्तिजिसने वास्तव में उद्धार पाया है, वह यूहन्ना 10:27-29 के आधार पर अपना उद्धार कभी भी नहीं खो सकता है। और क्योंकि उद्धार पाए हुओं पर दण्ड की कोई आज्ञा नहीं है (रोमियों 8:1), इसलिए जो वास्तव में उद्धार पाए हुए हैंवे स्वर्ग में अवश्य ही प्रवेश करेंगे, चाहे विश्वास में उनकी परिपक्वता एवं स्थिति का स्तर कुछ भी क्यों न हो।

    किन्तु यह बात केवल परमेश्वर ही जानता है कि कौन वास्तविक मसीही विश्वासी है और कौन नहीं। उदाहरण के लिए युहूदा इस्करियोती को ही लीजिएवह प्रभु द्वारा बुलाया गयाप्रभु के साथ रहाप्रभु से शिक्षा पाईप्रभु की सामर्थ्य और निर्देशन द्वाराअन्य शिष्यों के साथ सुसमाचार प्रचार पर भी गया और उनके साथ मिलकर प्रचार कियाआश्चर्यकर्म भी किएकिन्तु अन्त में वह प्रभु के द्वारा विनाश का पुत्र’ और नाश होने वाला’ कहा गया (यूहन्ना 17:12), और अनन्त विनाश में चला गया। प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने पहाड़ी प्रचार के अन्त में कहा है कि हर कोई जो उन्हें हे प्रभु’ कहता हैवह स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेगाचाहे उन्होंने प्रभु के नाम में कई प्रकार के प्रचार, आश्चर्यकर्म, तथा अद्भुत एवँ उल्लेखनीय कार्य ही क्यों न किए हों – प्रभु ने उन लोगों के इन कामों को ‘कुकर्म’ कहा ; स्वर्ग में केवल वे ही प्रवेश करेंगे जो परमेश्वर पिता के आज्ञाकारी रहते हैं और परमेश्वर की इच्छे के अनुसार कार्य करते हैं (मत्ती 7:21-23)। इसलिए लोगों के प्रगट व्यवहारप्रचार, और कार्यों के आधार पर हम किसी भी मनुष्य के विषय यह निश्चित नहीं कह सकते हैं कि प्रभु में विश्वास रखने का दावा करने और उसके नाम से प्रचार और कार्य करने वाला प्रत्येक व्यक्ति वास्तव में उद्धार पाया हुआ है भी कि नहीं! पौलुस ने भी इस बात के विषय सचेत किया और समझाया कि शैतान और उसके दूत भी ज्योतिर्मय स्वर्गदूतों और मसीह के प्रेरितों का स्वरूप धारण कर के लोगों को बहकाते हैं (2 कुरिन्थियों 11:3, 13-15)। इसलिए व्यक्ति के उद्धार पाया हुआ होने की वास्तविकता तो केवल परमेश्वर ही जानता हैऔर वही इसका निर्णय कर सकता है, तथा करता है।

    साथ हीबाइबल यह भी कहती है कि ऐसे भी मसीही विश्वासी पाए जाएँगे जो सच्चे मन से पश्चाताप करके प्रभु के पास तो आएवे वास्तव में उद्धार पाए हुए भी थेकिन्तु उन्होंने प्रभु के लिए ऐसा कुछ नहीं किया जो जांचे जाने पर प्रतिफल दिए जाने के योग्य स्वीकार किया जाता। जब न्याय के समय उनके काम जांचे जाएँगेतो वे उद्धार पाया हुआ होने के कारण स्वर्ग में तो प्रवेश करेंगेपरन्तु छूछे हाथबिना कुछ भी प्रतिफल लिएऔर अनन्त-काल तक फिर ऐसे ही छूछे हाथ ही रहेंगे (1 कुरिन्थियों 3:9-15)। सँसार के सभी लोगों के समानकिए गए कर्मों के अनुसारन्याय तो मसीही विश्वासियों का भी होगावरन न्याय आरंभ ही मसीही विश्वासियों से होगा (1 पतरस 4:17-18)परन्तु मसीही विश्वासियों का यह न्याय उनके उद्धार पाने के लिए नहींवरन अनन्तकाल के लिए उनके कर्मों के आधार पर उन्हें प्रतिफल दिए जाने के लिए होगा – उद्धार कर्मों के आधार पर नहीं है, परन्तु प्रतिफल कर्मों के आधार पर हैं। उद्धार तो केवल पापों से पश्चाताप और प्रभु यीशु पर लाए विश्वास के आधार पर परमेश्वर के अनुग्रह ही से है; किसी भी या कैसे भी कामों, अथवा प्रथाओं, या रीति-रिवाजोंया अनुष्ठानों/विधि-विधानों आदि के पालन के द्वारा कदापि नहीं है (इफिसियों 2:1-9)।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।
- क्रमशः
अगला लेख: उद्धार कर्मों द्वारा या कर्मों से नहीं है

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Will Back-Sliders go to Heaven? - Part (1)


Question:
    Once a person is saved, if he back-slides, then will he go to heaven?

Answer:
    Whosoever has been savedi.e.voluntarily and with a true hearthas repented of his sinsaccepted the Lord Jesus Christ as his personal saviorhas asked for forgiveness of his sins from Himand has submitted his life to Himonly that person will go to heaven by the grace of God – but only God knows the actual spiritual condition of mantherefore it is only God who can decide on who will go to heaven, and who will not.

    According to God’s Word, the Bible, it is very clear and firmly established that salvation is forever, i.e. is eternal. The writer of the epistle to Hebrews, writing about the Lord Jesus Christ’s work to provide salvation to mankind writes, “though He was a Son, yet He learned obedience by the things which He suffered. And having been perfected, He became the author of eternal salvation to all who obey Him,” (Hebrews 5:8-9). The Lord Jesus also said that He will give eternal life to all who believe in Him (i.e. an endless and indestructible life for all eternity, eternal life) and at the same time also assured that no one will be able to take the saved ones out of the Lord’s, or God’s hands (John 10:27-29) – this statement of the Lord has very serious and extremely important implications. On the basis of this promise from the Lordto lose one’s salvation implies thatsomehow Satan has been able to snatch away the saved persons from the Lord’s, or God’s hands, and taken possession of them again. If at all somehow this were to be possible, it would mean that three impossibilities have become possible – first, that Satan is more powerful than Godsecond, that the Lord Jesus spoke a lieHe gave a false assurance that no one will be able to take away a saved person from the hand of the Lord or of Godand third, that the Lord does not know about Satan’s power or His own power, or God’s power; He is just saying things without any basisSince any and all of this is an absolute impossibility and can never happentherefore it is evident that any person who has been savedon the basis of John 10:27-29 can never ever lose his salvation. And since those who are saved are no longer under any condemnation (Romans 8:1), therefore those who are actually saved, will most certainly enter heavenwhatever be their state of maturity in faith and standing in spirituality.

    But it is only the Lord God who knows, who is an actual Christian Believer and who is not. For example, take Judas Iscariot; he was called to be a disciple by the Lord, he stayed in fellowship with the Lord, he learnt from the Lord, he too went for preaching in the power and instructions from the Lord, along with the other disciples, and along with the disciples he too preached the gospel, he too did miracles, but in the end he was called ‘the son of perdition’ and ‘the only one lost’ (John 17:12), and went into eternal destruction. The Lord Jesus towards the end of His Sermon on the Mount had said that not everyone who calls Him ‘Lord’ will enter into heaven, even though they may have abundantly preached, worked miracles and done other remarkable works in the Lord’s name – the Lord called all such works as ‘iniquity’ – and made it clear that only they will enter heaven who are obedient to God and work according to the will of God (Matthew 7:21-23). Therefore on the basis of the evident behavior, preaching, and works of any person we can never say for sure that all those who claim to believe in the Lord and everyone who preaches or works in His name, is actually a saved personPaul also cautioned and exhorted that Satan and his angels come as angels of light and apostles of Christ to deceive people (2 Corinthians 11:3, 13-15). Therefore it is only God who knows the fact of a person’s being saved, and only He can decide, and does decide, about a person’s being saved or not.

    The Bible also says that there will be Christian Believers who truly repented and came to the Lord with a true heart, they were really saved, but they did not do anything that could be considered worthy of being rewarded by the Lord. At the time of judgement when their works are evaluated, they will surely enter heaven because they are saved, but will enter empty handed, without any rewards, and remain so forever for all eternity (1 Corinthians 3:9-15). Like for everyone else in the world, even the Christian Believers will face judgment on the basis of their works, rather, the beginning of judgement will be with the Christian Believers (1 Peter 4:17-18), but the judgement of the Christian Believers will not be for their salvation, but for giving them eternal rewards based on the evaluation of their works – salvation is not based upon works, but rewards are based on works. Salvation is only by the grace of God through repentance from sins and coming to faith in the Lord Jesus; not through any works of any kind, nor by fulfilling any traditions, or rituals, or carrying out religious observances of any kind (Ephesians 2:1-9).

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.
- To Be Continued:
Next Article: Salvation is neither by nor dependent upon works

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रविवार, 25 अगस्त 2019

प्रलोभन



      कुछ वर्ष पहले की बात है, मेरी भांजी ने मुझे स्मार्ट फोन पर खेले जाने वाले वीडियो गेम “पोकेमोन गो” को उसके साथ खेलने के लिए बाध्य किया। उस खेल का उद्देश्य पोकेमोन नामक छोटे प्राणियों को पकड़ना है। जब खेल के दौरान कोई पोकेमोन फोन के स्क्रीन पर प्रगट होता है तो साथ ही लाल और सफ़ेद गेंद भी स्क्रीन पर आ जाती हैं, और खेलने वाले को अपनी उँगली के झटके से उस गेंद को पोकेमोन की ओर फेंकना होता है। परन्तु पोकेमोन को और अधिक सरलता से पकड़ने का तरीका होता है उन्हें किसी प्रलोभन से आकर्षित करना।

      केवल पोकेमोन ही प्रलोभनों द्वारा आकर्षित किए जाकर भटकाए नहीं जा सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह के भाई याकूब ने अपनी पत्री में लिखा कि, “परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है” (1:14)। दूसरे शब्दों में, हमारी लालसाएँ, प्रलोभनों के साथ मिलकर हमें गलत मार्ग पर चला देते हैं। चाहे हम शैतान या परमेश्वर को अपनी समस्या के लिए दोषी ठहराएँ, परन्तु हमारे लिए वासत्विक खतरा हमारे अन्दर ही  होता है।

      परन्तु अच्छा समाचार भी है। हम प्रलोभनों द्वारा भटकाए जाने से बच सकते हैं, परमेश्वर से अपनी लालसाओं और प्रलोभनों के बारे में बातचीत करने के द्वारा। यद्यपि, जैसा कि याकूब 1:13  में स्पष्ट करता है, “...क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है”, लेकिन वह गलत करने की मानव प्रवृत्ति को समझता है। हमें बस परमेश्वर से उसके द्वारा दी गई प्रतिज्ञा (पद 5) के अनुसार उपयुक्त बुद्धि माँगने की आवश्यकता है, कि हम उस प्रलोभन और लालसा के चँगुल में पड़कर गलत मार्ग अपनाने से बचे रह सकें। - लिंडा वॉशिंगटन


गलती करने की अपनी प्रवृत्ति पर प्रार्थना द्वारा काबू पाएँ।

मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? – यिर्मयाह 17:9

बाइबल पाठ: याकूब 1: 2-6, 12-15
James 1:2 हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
James 1:3 तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है।
James 1:4 पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
James 1:5 पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी।
James 1:6 पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
James 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
James 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है।
James 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है।
James 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119:1-88
  • 1 कुरिन्थियों 7:20-40



शनिवार, 26 मई 2018

भेड़



   जब मैं अपने दादाजी के साथ उत्तरी घाना में रहता था, तब मेरा रोज का कार्य था भेड़ों की देख-भाल करना। प्रति प्रातः मैं उन्हें चराने के लिए ले जाता और संध्या को उन्हें लेकर लौटता। उस समय मैंने इस बात पर पहली बार ध्यान दिया कि भेड़ कितनी ढीठ हो सकती हैं। जब भी उन्हें कोई खेत दिखाई देते, वे उसमें जाने के प्रयास करतीं, जिससे अनेकों बार मुझे किसानों के साथ परेशानियों का सामना करना पड़ा।

   कभी-कभी जब मैं थका हुआ होता और किसी पेड़ की छाया में विश्राम कर रहा होता तो मैं देखता के भेड़ें तित्तर-बित्तर होकर झाड़ियों में घुस रही हैं और पहाडियों की ओर जा रही हैं। मुझे उनके पीछे भागना पड़ता जिससे मेरी टांगें झाड़ियों से छिल जातीं। मुझे उन्हें पशुओं के खतरों और मुसीबत से बचाए रखने के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता, विशेषतया तब जब पशुओं को चुराने वाले चोर भटकी हुई भेड़ों को चुराने के लिए हमले करते।

   इसलिए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा कही गई बात, “हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया” (यशायाह 53:6) को भली-भांति समझ सकता हूँ। हम अनेकों तरह से भटक जाते हैं, जैसे कि: जो प्रभु को पसन्द नहीं है उसकी लालसा तथा व्यवहार करने के द्वारा, अपने व्यवहार द्वारा औरों को आहत करके, और क्योंकि हम बहुत व्यस्त हैं या क्योंकि हमारी रुचि नहीं है इसलिए परमेश्वर तथा उसके वचन के साथ समय बिताने में ध्यान न लगाने के द्वारा। हम मैदान में भेड़ों के समान आचरण करते हैं।

   यह हमारा सौभाग्य है कि हमारा एक अच्छा चरवाहा है, जिसने हमारे लिए अपने प्राण दिए (यूहन्ना 10:11), और जो हमारे पापों और दुखों को अपने ऊपर उठाए रहता है (यशायाह 53:4-6)। और हमारा चरवाहा होने के नाते, वह हमें सुरक्षित चारागाहों में वापस बुलाता है जिससे हम अधिक निकटता के साथ उसका अनुसरण कर सकें। - लॉरेंस दरमानी


यदि आप चाहते हैं कि परमेश्वर आपकी अगुवाई करे, 
तो उसके पीछे चलने को भी तैयार रहें।

मेरी प्रजा खोई हुई भेडें हैं; उनके चरवाहों ने उन को भटका दिया और पहाड़ों पर भटकाया है; वे पहाड़-पहाड़ और पहाड़ी-पहाड़ी घूमते-घूमते अपने बैठने के स्थान को भूल गई हैं। - यिर्मयाह 50:6

बाइबल पाठ: यशायाह 53: 1-12
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर के समान, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isaiah 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।
Isaiah 53:8 अत्याचार कर के और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया? मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
Isaiah 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उसने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isaiah 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा; उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
Isaiah 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा; और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
Isaiah 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 9:24-41



सोमवार, 14 मार्च 2016

भटकने वाले


   उत्कृष्ट तथा सुप्रसिद्ध मसीही भजन "Come, Thou Fount of Every Blessing" (हे प्रभु! आशीष के सोते) सन 1757 में 22 वर्षीय रॉबर्ट रॉबिन्सन द्वारा लिखा गया था। इस भजन की एक पंक्ति है जो हमेशा ही मेरा ध्यान खींचती है और मुझे आत्म-निरीक्षण करने के लिए बाध्य करती है; यह पंक्ति का भाव है, "तुझसे भटक जाने, अपने परमेश्वर से दूर हो जाने की मेरी प्रवृति बनी रहती है, मैं यह जानता हूँ।" मुझे लगता है कि यह बात मेरे लिए भी उतनी ही सत्य है जितनी कि रॉबर्ट रॉबिन्सन के लिए थी। कितनी ही बार मैं देखता हूँ कि बजाए इसके कि मैं अपने उद्धाकर्ता पर मन लगाए रखूँ जिसने मेरे उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान किए, जो मुझ से असीम प्रेम करता है, मेरा मन संसार की बातों में इधर-उधर भागता भटकता फिरता है; और मैं तथा रॉबर्ट रॉबिन्सन इस बात में अकेले नहीं हैं।

   लेकिन साथ ही यह भी सत्य है कि भटकने के उन समयों में हमारे हृदय की मूल भावना परमेश्वर को छोड़ कर उस से दूर चले जाने की नहीं होती। हम तो बस प्रेरित पौलुस की सी दशा में होते हैं, जब पौलुस ने कहा: "क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं" (रोमियों 7:19)। ऐसे भटक जाने स्थिति में हमारी तीव्र इच्छा, हमें संभाल कर रख सकने वाले अपने प्रभु परमेश्वर की ओर वापस मुड़ जाने की होनी चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार अपने ऐसे ही संघर्ष को लेकर लिखता है, "मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे" (भजन 119:10)।

   कभी-कभी चाहे हमारे मन परमेश्वर के निकट आने के लालयित हों, जीवन की परिस्थितियाँ या संसार के आकर्षण हमें परमेश्वर से तथा उसके वचन से दूर ले जाते हैं। लेकिन हमें कितना अधिक धन्यवादी होना चाहिए उस धीरजवन्त, दयालु, प्रेमी पिता परमेश्वर के लिए जिसका अनुग्रह हम पर बना रहता है और हमारे उससे भटक जाने की दशा में भी उसका प्रेम हमारे प्रति कम नहीं होता, वरन वह साधन करता है कि हम उसके पास लौट आएं, उसकी संगति में बने रहें। - बिल क्राउडर


हमारी भटकने की प्रवृति से कहीं अधिक सामर्थी है परमेश्वर की हमें खोजने और अपने पास ले आने की प्रवृति।

मैं खोई हुई भेड़ की नाईं भटका हूं; तू अपने दास को ढूंढ़ ले, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं को भूल नहीं गया। - भजन 119:176

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 14:1-26


मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015

प्रेम और अनुग्रह


   पिछली पतझड़ ऋतु की बात है, मेरे शहर से निकलने वाला एक प्रमुख राजमार्ग कई घंटों तक बन्द रहा क्योंकि वहाँ मवेशियों से भरा एक ट्रक पलट गया था और वे जानवर उस में से निकलकर राजमार्ग पर इधर-उधर घूम रहे थे। भटकते हुए मवेशियों के इस समाचार को पढ़कर मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में निर्गमन 32 अध्याय में इस्त्राएलियों के परमेश्वर से भटक जाने के बारे में स्मरण हो आया।

   परमेश्वर के पराक्रम के अद्भुत कार्य देखने और कठोर दासत्व से निकल कर वाचा के देश की ओर पलायन करते समय इस्त्राएलियों के मन शीघ्र ही परमेश्वर से भटक गए। जब इस्त्राएलियों का अगुवा मूसा सिनै पर्वत पर परमेश्वर से व्यवस्था के लेख को लेने गया हुआ था तो अपने अगुवे को लंबे समय तक अपने मध्य ना पाकर उन इस्त्राएलियों के मन परमेश्वर से भटक गए और उन्होंने मूसा के भाई हारून को उकसाया; तब हारून ने उनके लिए एक सोने का बछड़ा बना कर दे दिया और इस्त्राएलियों को उसकी उपासना करने को कहा।

   परमेश्वर के लोगों को भटकाने का ऐसा ही एक और कार्य प्राचीन इस्त्राएल के विभाजित राज्य में राजा यरोबाम ने भी किया था। यरोबाम ने अपने राज्य इ्स्त्राएल में अपने आप को दृढ़ करने के उद्देश्य से अपने राज्य के लोगों को यहूदा में स्थित यरुशालेम के मन्दिर में उपासना के लिए जाने से रोकने की योजना बनाई, और उनके लिए वहीं सोने से बने दो बछड़े स्थापित करवा दिए, उनके पर्व निर्धारित कर दिए और उनके पुरोहित नियुक्त कर दिए, और इस्त्राएल के लोगों से कहा कि वे यरुशालेम जाने की बजाए उन बछड़ों की उपासना करें (1 राजा 12:25-32)।

   इब्रानियों का लेखक इस प्रकार की मूर्तिपूजा को लेकर परमेश्वर के रोष के लिए लिखता है, "इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना" (इब्रानियों 3:10)। लेकिन फिर भी अपने महान और बेबयान प्रेम तथा अनुग्रह के अन्तर्गत परमेश्वर ने उन्हें त्यागा नहीं, जैसा प्रेरित पौलुस लिखता है, "इसलिये मैं कहता हूं, क्या परमेश्वर ने अपनी प्रजा को त्याग दिया? कदापि नहीं; मैं भी तो इस्त्राएली हूं: इब्राहीम के वंश और बिन्यामीन के गोत्र में से हूं। परमेश्वर ने अपनी उस प्रजा को नहीं त्यागा, जिसे उसने पहिले ही से जाना..." (रोमियों11:1-2)।

   परमेश्वर हमारी सृष्टि को जानता है, उसे हमारी कमज़ोरियों का एहसास है (भजन 103:14)। इसीलिए वह हमारे साथ बहुत ही सहनशीलता, धैर्य, करुणा और अनुग्रह के साथ व्यवहार करता है; वह सदा प्रभु यीशु में होकर हमारे पापों को क्षमा करने और हमें अपने साथ ले लेने को तैयार रहता है (प्रेरितों 17:30)। आज भी परमेश्वर के द्वार संसार के हर पश्चातापी जन के लिए खुले हैं; आज भी कोई भी जन साधारण विश्वास से प्रभु यीशु से पापों की क्षमा माँगकर तत्काल परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकता है। - सिंडी हैस कैस्पर


आप जिस किसी भी चीज़ को परमेश्वर से अधिक चाहते हैं, परमेश्वर से अधिक जिसकी लालसा रखते हैं, वह आपके लिए एक मूर्ति है। - ए. बी. सिंप्सन

क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है। - भजन 103:14

बाइबल पाठ: प्रेरितों17:22-31
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 59-61
  • 2 थिस्सलुनीकियों 3


गुरुवार, 7 नवंबर 2013

निशाना और उद्देश्य


   ट्रैक्टर चलाने का वह मेरा पहला दिन था। प्रातः की ठण्डी बयार खेत से होकर बह रही थी; मैंने ट्रैक्टर के ईंजन को चलाया और उसकी आवाज़ के सामने खेत से आती झींगुरों की आवाज़ दब गई। मैंने जोतने वाले हल को नीचे धरती पर किया, ट्रैक्टर को गियर में डाला और खेत जोतता हुआ चल दिया। मैं ट्रैक्टर की शक्ति के बारे में सोचने लगा, उस पर लगे तेल, गति, ईंजन की कार्य-स्थिति आदि बताने वाले विभिन्न गेज पर नज़र दौड़ाने लगा, ट्रैक्टर घुमाने के लिए लगे स्टेरिंग को निहारने लगा। खेत के दुसरे छोर पर पहुँच कर मैंने इस आशा से पीछे मुड़ कर देखा कि जोती हूई भूमि पर हल से एक सीधी रेखा बनी हुई होगी, लेकिन मेरी आशा के विपरीत वह तो साँप की चाल के समान एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा थी।

   मैं समझ गया; मुझसे कहा गया था कि ट्रैक्टर चलाते समय ध्यान इधर-उधर नहीं वरन सामने लगी बाड़ के एक खंबे पर नज़र लगाए रखकर चलाना। सामने लगे उस खंबे पर नज़र लगाए रहने से ध्यान इधर-उधर नहीं जाता और चलाने वाला इस बात के लिए आश्वस्त रहता है कि खेत सीधी रेखाओं में जोता जा रहा है। वापस लौटते में मैंने ऐसा ही किया; अब मेरा ध्यान ट्रैक्टर की विभिन्न बातों पर नहीं वरन सामने वाले खंबे पर लगा हुआ था। इस बार दुसरे छोर पर पहुँच कर जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो जुताई की रेखा वास्तव में सीधी थी। पहले मैं एक बिन्दु पर केन्द्रित नहीं था, इसलिए जुताई की रेखा टेढ़ी-मेढ़ी रही, लेकिन दूसरी बार जब मैं एक बिन्दु पर ध्यान लगा कर जोतने लगा तब रेखा सीधी रही।

   मसीही जीवन को सिधाई से जीने का भी यही रहस्य है - मसीह यीशु पर ध्यान लगाए रखकर उसी की ओर बढ़ते चले जाना। प्रेरित पौलुस ने भी इसी बात को फिलिप्पियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में बताया। पौलुस कहता है कि ना केवल उसने अपने ध्यान को इधर-उधर भटकने नहीं दिया (फिलिप्पियों 3:8, 13), वरन उसने अपना निशाना भी निर्धारित किया (पद 8, 14), यह ध्यान में रखते हुए कि इसका कैसा परिणाम होगा (पद 9-11), और दूसरों के लिए वह कैसा उदाहरण बनेगा (पद 16-17)।

   पौलुस के समान ही यदि हम मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित रखें तो हम भी अपने जीवन के लिए परमेश्वर के उद्देश्य को सीधी रीति से पूरा करने पाएंगे। आपका निशाना और उद्देश्य क्या है? कहीं संसार की लुभावनी बातें और सांसारिक उपलब्धियों का आकर्षण आप को आप के वास्तविक निशाने से भटका तो नहीं रहा है? - रैण्डी किल्गोर


जब आप अपनी नज़रें मसीह यीशु पर बनाए रखेंगे तो संसार की लुभावनी बातें और सांसारिक उपलब्धियों की चाह आपको सीधे मार्ग से भटकाने नहीं पाएंगी।

निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों 3:14

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:8-17
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। 
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा। 
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42 
  • इब्रानियों 4