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गुरुवार, 10 नवंबर 2011

व्याकुल हृदयों के लिए शान्ति

   एक प्रिय मित्र ने अपने पत्र में हमारे साथ एक रोचक घटना बाँटी: उनकी एक अन्य सहेली का पालन पोष्ण एक भक्तिहीन एवं नास्तिक परिवार में हुआ था और वह अपने जीवन से बहुत असन्तुष्ट और निराश रहती थी। एक दिन उसने अखबार में ’शान्ति सेना’ में भर्ती के लिए विज्ञापन देखा और उसे विचार आया कि मेरे जीवन में शान्ति ही की तो कमी है, और वह उस शान्ति की तलाश में शान्ति सेना में भर्ती हो गई और उसे एक कबायली इलाके में स्वयंसेवा के लिए भेज दिया गया। सेवा करने के कुछ समय में ही वह जान गई कि जिस शान्ति की उसे तलाश थी वह अभी भी उस से दूर ही थी। अपने कार्य के दौरान वह एक वृद्ध कबायली के संपर्क में आई, और उसने देखा कि वह अन्य जितने कबायलियों के साथ संपर्क में आई थी, यह वृद्ध अपने व्यवहार और जीवन में उन सब से भिन्न है। उसने उस वृद्ध से उसके जीवन में इस सन्तुष्टि और शान्ति का राज़ पूछा, तो व्रुद्ध ने कहा यह इसलिए है क्योंकि प्रभु यीशु मसीह उसके हृदय में राज्य करते हैं। उस वृद्ध के कहने से उस स्त्री ने बाइबल पढ़नी आरंभ करी, और परमेश्वर के वचन तथा उस वृद्ध के जीवन की गवाही ने उसके जीवन में कार्य किया और उसने मसीह यीशु में उस अद्भुत शान्ति को पा लिया।

   यही शान्ति उन सब को भी उपलब्ध है जो साधारण विश्वास द्वारा प्रभु यीशु को अपने निज उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करते हैं। जिनके पास परमेश्वर की यह शान्ति है उनका परमेश्वर के साथ मेलमिलाप है "जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें" (रोमियों ५:१); तथा वे हर समय उस परमेश्वर और उसकी शान्ति की सुरक्षा में रहते हैं "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६, ७)।

   व्याकुल हृदयों के लिए इसी संसार में शान्ति उपलब्ध है - परमेश्वर की अद्भुत शान्ति; जीवन में यदि प्रभु यीशु नहीं तो शान्ति भी नहीं। - रिचर्ड डी हॉन

यीशु को ग्रहण करो, उसकी शान्ति स्वतः ही आ जाएगी।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - युहन्ना १४:२७
 
बाइबल पाठ: युहन्ना १४:१५-२७
    Joh 14:15  यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
    Joh 14:16  और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
    Joh 14:17  अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्‍योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
    Joh 14:18  मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
    Joh 14:19  और थोड़ी देर रह गई है कि संसार मुझे न देखेगा, परन्‍तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
    Joh 14:20  उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
    Joh 14:21  जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।
    Joh 14:22  उस यहूदा ने जो इस्‍किरयोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्‍या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं।
    Joh 14:23  यीशु ने उस को उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
    Joh 14:24  जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिस ने मुझे भेजा।
    Joh 14:25  ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
    Joh 14:26  परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
    Joh 14:27  मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४८-४९ 
  • इब्रानियों ७

बुधवार, 9 नवंबर 2011

शांति

   भूतपूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति जेरालड फोर्ड ने अपनी एक पुस्तक A Time to Heal में एक ऐसी कहानी बताई जो कुछ वर्ष पहले उन्होंने सुनी थी - ग्रीस (युनान) देश के गृह युद्ध के समय, सन १९४८ में, अमेरीका में बसने जा रहे एक गाँव वाले ने अपने साथ के लोगों से पूछा, "अमेरीका पहुँच कर मैं तुम्हारे लिए क्या भेजूँ - पैसा, भोजन, कपड़े?" उसके एक गरीब पड़ौसी ने उत्तर दिया, "नहीं, इन में से कुछ नहीं, बस एक टन शान्ति भेज देना।" आज भी मन-मस्तिष्क की शान्ति हमारे लिए बहुत दुर्लभ और अति आवश्यक वस्तु बनी हुई है।

   जब प्रभु यीशु अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से थोड़ा पहले अपने चेलों के साथ वार्तलाप कर रहे थे तब वे आते समय में घटने वाले उन दुखों को जानते थे जो वे और उनके चेले अनुभव करने पर थे। उन्हें पता था कि कुछ समय में ही उनके चेले उनका विश्वासघात होते, उन्हें पकड़े जाते और फिर क्रूरता के साथ क्रूस पर बलिदान होते देखेंगे। वे ये भी जानते थे कि उनके पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद चेलों को संसार के वैमनस्य का सामना करना पड़ेगा; जहाँ भी चेले प्रभु यीशु द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार लेकर जाएंगे, उन्हें हर जगह विरोध, उपहास और सताव का सामना करना होगा। इसलिए उन अन्तिम क्षणों में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से अनन्त शान्ति की प्रतिज्ञा करी, उन्होंने चेलों से कहा, "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (युहन्ना १४:२७)।

   जब संसार में हम बोझिल हों और क्लेषों से दबने लगें, तब हमें शान्ति की आवश्यक्ता होती है, ऐसी शान्ति जो अलौकिक हो। ऐसे में मसीही विश्वासी अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की शान्ति की प्रतिज्ञा में विश्वास कर सकते हैं कि उसने अपनी शान्ति उन्हें उपलब्ध करवा रखी है। जब हम स्मरण करें कि उसने हमारे लिए क्या कुछ किया है तो उसकी प्रेम भरी बाहों में सिमट कर हम उसकी शान्ति के लिए आश्वस्त हो सकते हैं और शान्ति के राजकुमार की सामर्थ का अनुभव कर सकते हैं। - डेव एग्नर

जब मसीह हृदय पर राज्य करता है तब उसकी शान्ति मन में भर जाती है।

यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा। - भजन २९:११

बाइबल पाठ: युहन्ना १४:२५-३१
Joh 14:25  ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
Joh 14:26  परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
Joh 14:27  मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
Joh 14:28  तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्‍योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
Joh 14:29  और मैं ने अब इस के होने के पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
Joh 14:30  मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्‍योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
Joh 14:31  परन्‍तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४६-४७ 
  • इब्रानियों ६

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

जांचने का समय

   न्यूयॉर्क के एक विशिष्ट क्लब ने एक व्यक्ति को इसलिए सदस्यता देने से इन्कार कर दिया क्यों कि वह यहूदी था। एक चर्च के पास्टर ने, जो उस क्लब का सदस्य था, चर्च में दिये गए अपने इतवार के सन्देश में इस बात की भर्तस्ना करी और इसे अनैतिक कहा। उसके इस कथन से चर्च में बैठे कई लोगों को धक्का लगा, क्योंकि वे भी उस क्लब के सदस्य थे। लेकिन पास्टर यहीं नहीं रुके, उन्होंने प्रभु भोज के आमंत्रण के समय कहा कि, "यदि किसी जन ने अपने विचारों, शब्दों अथवा कार्यों द्वारा इस यहूदी व्यक्ति को क्लब सदस्यता न दिये जाने का समर्थन किया है तो वह प्रभु भोज में सम्मिलित होने के लिए तब तक आमंत्रित नहीं है जब तक वह इस संबंध में परमेश्वर के साथ अपने आप को ठीक नहीं कर लेता।"

   उस पास्टर के पास अपनी इस बात को ऐसे दृढ़ता के साथ रखने और मनवाने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल का समर्थन था, क्योंकि यह परमेश्वर का निर्देश है कि किसी भी जन के लिए प्रभु भोज में भाग लेना तब तक उचित नहीं है जब तक वह परमेश्वर से अपने पापों का अंगीकार कर के उससे उनकी क्षमा नहीं मांग लेता। बाइबल में १ कुरिन्थियों ११ अध्याय में प्रेरित पौलुस ने कुछ ऐसे चर्च सदस्यों का सामना किया जिन्हें अपने स्वार्थी और मण्डली में विभाजन कराने वाली प्रवृति को पाप के रूप में स्वीकार करके, क्षमा मांगने की आवश्यक्ता थी ( पद १८, २१)। उसने उन से आग्रह किया कि प्रभु भोज में सम्मिलित होने से पहले वे रुकें, अपने आप को गंभीरता से जांचें और पापों की क्षमा के साथ ही प्रभु यीशु के बलिदान द्वारा मिली स्वतंत्रता और नए जीवन के इस भोज में भाग लें।

   यही सिद्धांत आज भी प्रभु भोज के लिए लागू होता है। यदि ऐसा कुछ भी है जो हमारे और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु के बीच आ गया है, तो उसकी पहचान तथा अंगीकार कर के और उसकी क्षमा मांगकर ही प्रभु भोज में सम्मिलित होना चाहिए। तब ही प्रभु भोज की वह रोटी और प्याला, जो प्रभु की तोड़ी गई देह और बहाए गए लहु के प्रतीक हैं, सार्थक होंगे और हम पापों की क्षमा की स्वतंत्रता का आनन्द ले सकेंगे। - डेनिस डी हॉन


मसिही विश्वासी के लिए प्रभु भोज पहले अपने आप को जांचने और फिर नए जीवन की गवाही देने का माध्यम है।

यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। - १ कुरिन्थियों ११:३१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ११:१७-३४
    1Co 11:17  परन्तु यह आज्ञा देते हुए, मैं तुम्हें नहीं सराहता, इसलिये कि तुम्हारे इकट्ठे होने से भलाई नहीं, परन्‍तु हानि होती है।
    1Co 11:18  क्‍योंकि पहिले तो मैं यह सुनता हूं, कि जब तुम कलीसिया में इकट्ठे हाते हो, तो तुम में फूट होती है और मैं कुछ कुछ प्रतीति भी करता हूं।
    1Co 11:19  क्योंकि विधर्म भी तुम में अवश्य होंगे, इसलिये कि जो लोग तुम में खरे निकले हैं, वे प्रगट हो जांए।
    1Co 11:20  सो तुम जो एक जगह में इकट्ठे होते हो तो यह प्रभु भोज खाने के लिये नहीं।
    1Co 11:21  क्‍योंकि खाने के समय एक दूसरे से पहिले अपना भोज खा लेता है, सो कोई तो भूखा रहता है, और कोई मतवाला हो जाता है।
    1Co 11:22  क्‍या खाने पीने के लिये तुम्हारे घर नहीं? या परमेश्वर की कलीसिया को तुच्‍छ जानते हो, और जिन के पास नहीं है उन्‍हें लज्ज़ित करते हो? मैं तुम से क्‍या कहूं? क्‍या इस बात में तुम्हारी प्रशंसा करूं? मैं प्रशंसा नहीं करता।
    1Co 11:23  क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली।
    1Co 11:24  और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:25  इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:26  क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।
    1Co 11:27  इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा।
    1Co 11:28  इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।
    1Co 11:29  क्‍योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है।
    1Co 11:30  इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए।
    1Co 11:31  यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते।
    1Co 11:32  परन्‍तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें।
    1Co 11:33  इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो।
    1Co 11:34  यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हारा इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४३-४५ 
  • इब्रानियों ५

सोमवार, 7 नवंबर 2011

रस्म या स्मरण

   प्रति वर्ष अमेरीकी नगरिक एक दिवस मनाते हैं "स्मरण दिवस", अपने उन नागरिकों को स्मरण करने के लिए जिन्हों ने अपने प्राण दे दिये ताकि अन्य स्वतंत्रता के साथ रह सकें। इस दिवस पर ध्यान उन दिवंगत सैनिकों पर रहना चाहिए जिन्होंने अपना बलिदान दिया, किंतु कई लोगों के लिए इस दिवस की महत्वता नहीं रही है, और वे उन बलिदान देने वालों के बारे में सोचने की बजाए केवल अपने बारे ही में सोचते रहते हैं।

   डेट्रोइट शहर के एक अखबर में एक पत्रकार ने इस दिवस पर हुई ऐसी ही एक घटना का वर्णन किया, जिसमें वहां उपस्थित एक नौसैनिक ने इस बात का दुख जताया कि लोगों के अन्दर इस दिवस और उसके अर्थ की संवेदनशीलता नहीं रही। जब इस दिवस से संबंधित कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, तो थोड़ी ही दूरी पर एक नौजवान भड़कीले वस्त्र पहने अपनी सजी हुई साईकिल पर चक्कर लगा रहा था। साईकिल पर सुनहरे रंग का कार्डबोर्ड लगा था, जिस पर उस नौजवान की सहेलियों की फोटो लगीं थीं, २ रेडियो बज रहे थे और २० बतियाँ चारों ओर जल बुझ रहीं थी। जब उस नौजवान से इसका तात्पर्य पूछा गया तो उसने बड़ी लापरवाही से कहा, वह यह अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के १ कुरिन्थियों ११ अध्याय में एक और स्मरण दिवस का उल्लेख है, जिसे कुरिन्थुस के मसीही विश्वासी बहुत लापरवही से लेने लगे थे, और तब प्रेरित पौलुस को उन लोगों को इस दिवस की महत्वता और गंभीरता को अपनी पत्री में समझाना पड़ा था कि यह समय प्रभु यीशु के क्रूस पर दिये गए बलिदान और प्रभु के विश्वासी के जीवन में उसके अर्थ एवं महत्व को स्मरण करने का है। उस समय के बहुत से मसीही विश्वासी मसीह यीशु को स्मरण करने के बजाए केवल अपना ही ध्यान करने लगे थे; उनके लिए स्मरण का वह प्रभु भोज खाने, पीने और मौज-मस्ती का अवसर बन गया था। जैसे उस समय हुआ था, वैसा ही आज भी यह दिवस भी बहुतेरे मसीहीयों के लिए अपना वास्तविक अर्थ खो चुका है, क्योंकि वे इसकी गंभीरता की ओर ध्यान लगाए बिना इसे एक रस्म के तौर पर मनाते हैं।

   परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि जब हम प्रभु भोज में सम्मिलित हों तो उस समय अपने बारे में सोचना छोड़कर प्रभु के बलिदान को, उसके कारण को और उस बलिदान से हमें मिले जीवन, उद्धार तथा आशीषों समरण करें तथा अपने आप को जांचें कि हम अपने प्रभु के निर्देषों के अनुसार चल रहे हैं अथवा नहीं, उसको अपने जीवन में उचित महत्व दे रहें हैं अथवा नहीं। प्रभु भोज कोई रस्म नहीं है, यह प्रभु और उसके कार्य को आदर देने का अवसर है।

   प्रभु भोज का समय मसीह यीशु और उसके बलिदान पर ध्यान केंद्रित करने और अपने आप को उसकी शिक्षाओं के आधार पर जांचने का समय होना चाहिए। - मार्ट डी हॉन


कभी न भूलें, प्रभु भोज का मेज़बान प्रभु परमेश्वर होता है।

इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। - १ कुरिन्थियों ११:२५

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ११:१७-२८
    1Co 11:17  परन्तु यह आज्ञा देते हुए, मैं तुम्हें नहीं सराहता, इसलिये कि तुम्हारे इकट्ठे होने से भलाई नहीं, परन्‍तु हानि होती है।
    1Co 11:18  क्‍योंकि पहिले तो मैं यह सुनता हूं, कि जब तुम कलीसिया में इकट्ठे हाते हो, तो तुम में फूट होती है और मैं कुछ कुछ प्रतीति भी करता हूं।
    1Co 11:19  क्योंकि विधर्म भी तुम में अवश्य होंगे, इसलिये कि जो लोग तुम में खरे निकले हैं, वे प्रगट हो जांए।
    1Co 11:20  सो तुम जो एक जगह में इकट्ठे होते हो तो यह प्रभु भोज खाने के लिये नहीं।
    1Co 11:21  क्‍योंकि खाने के समय एक दूसरे से पहिले अपना भोज खा लेता है, सो कोई तो भूखा रहता है, और कोई मतवाला हो जाता है।
    1Co 11:22  क्‍या खाने पीने के लिये तुम्हारे घर नहीं? या परमेश्वर की कलीसिया को तुच्‍छ जानते हो, और जिन के पास नहीं है उन्‍हें लज्ज़ित करते हो? मैं तुम से क्‍या कहूं? क्‍या इस बात में तुम्हारी प्रशंसा करूं? मैं प्रशंसा नहीं करता।
    1Co 11:23  क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली।
    1Co 11:24  और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:25  इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:26  क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।
    1Co 11:27  इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा।
    1Co 11:28  इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४०-४२ 
  • इब्रानियों ४

रविवार, 6 नवंबर 2011

कभी न भूलें

   मेरा मित्र रौजर जब बालक था तब वह और उसका परिवार गांव में एक कच्चे मार्ग के किनारे खेत में रहते थे। उस मार्ग पर बहुत कम यातायात था और कभी ही कोई मोटर कार वहां से निकलती थी। लेकिन एक दिन जब रौजर का छोटा भाई अपनी साईकिल पर वह कच्ची सड़क पार कर रहा था तो पास की एक छोटी पहाड़ी पर से एक कार तेज़ी से आई, उससे टकराई और तुरंत ही उसका देहांत हो गया। रौजर ने बताया कि बाद में जब पिताजी ने उसकी टूटी हुई साईकिल मार्ग पर से उठाई तो जीवन में पहली बार मैंने उन्हें सुबक सुबक कर रोते देखा। पिताजी ने वह टूटी हुई साईकिल उठा कर खलिहान के भीतरी ऐसे कोने में रख दी जहां हम बहुत कम जाया करते थे। लेकिन बहुत वर्षों तक मैंने देखा कि जब भी पिताजी उस साईकिल को देखते तो उनकी आंखों से आंसू बहने लगते थे। रौजर ने आगे कहा, तब से मैं अकसर यह प्रार्थना करता हूँ, "प्रभु आपकी मृत्यु की याद मेरे अन्दर भी ऐसी ही ताज़ा बनी रहे! जब कभी मैं आप के प्रभुभोज में भाग लूँ तो मेरा हृदय ऐसे कसमसा उठे जैसे यह घटना कल ही की हो। कभी भी यह प्रभुभोज मेरे लिए महज़ एक रस्म न बने और ना ही मैं रस्मपरस्ति के रूप में इसमें भाग लूँ। यह भाग लेना मेरे लिए सदा ही एक मार्मिक और दिल छू लेने वाला अनुभव रहे।"

   हमारे उद्धार के लिए प्रभु यीशु के द्वारा सही गई क्रूस की वेदना तथा मृत्यु सदा हमें परमेश्वर के प्रति दिल की गहराईयों से कृतार्थ रखे। जब हम मसीही विश्वासी प्रभु भोज में भाग लें तो स्मरण रखें कि हमारे निष्पाप और निष्कलंक प्रभु यीशु ने कैसी दर्दनाक मृत्यु हम पापियों लिए सह ली; और यह हमें पवित्र और परमेश्वर का आज्ञाकरी जीवन जीने के लिए प्रेरित करता रहे।

मसीह के ज़खमों की याद से हमें उसके वचन की आज्ञाकारिता की प्रेर्णा लेनी चाहिए।

फिर उस ने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उन को यह कहते हुए दी, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। - लूका २२:१९
 
बाइबल पाठ: लूका २२:१४-२०
    Luk 22:14  जब घड़ी पहुंची, तो वह प्रेरितों के साथ भोजन करने बैठा।
    Luk 22:15  और उस ने उन से कहा; मुझे बड़ी लालसा थी, कि दुख-भोगने से पहिले यह फसह तुम्हारे साथ खाऊं।
    Luk 22:16  क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि जब तक वह परमेश्वर के राज्य में पूरा न हो तब तक मैं उसे कभी न खाऊंगा।
    Luk 22:17  तब उस ने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और कहा, इस को लो और आपस में बांट लो।
    Luk 22:18  क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि जब तक परमेश्वर का राज्य न आए तब तक मैं दाख रस अब से कभी न पीऊंगा।
    Luk 22:19  फिर उस ने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उन को यह कहते हुए दी, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    Luk 22:20  इसी रीति से उस ने बियारी के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, कि यह कटोरा मेरे उस लोहू में जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३७-३९ 
  • इब्रानियों ३

शनिवार, 5 नवंबर 2011

"आप अंगूरों को पी नहीं सकते"

   जब मैंने अपने पास्टर द्वारा दिये जाने वाले सन्देश का यह शीर्षक पढ़ा, तो मैं सोच में पड़ गया कि वे कहना क्या चाहते हैं? प्रभु भोज के लिए उनका यह सन्देश प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों के साथ किये गए अन्तिम भोज में उपयोग किए गए और आते समय के लिए दिए गए दो चिन्हों पर आधरित था - रोटी और दाखरस (अंगूरों का रस)। रोटी प्रभु यीशु की देह को दिखाती है जो संसार के पापों के लिए तोड़े जाने को दी गई और दाखरस उसके लहू को दिखाता है जो संसार के पापों के धोए जाने के लिए बहाया गया। वह दाखरस पके हुए मीठे अंगूरों से आया था; लेकिन उनसे रस के निकाले जाने के लिए अंगूरों को अपने आप को कुचले जाने के लिए समर्पित करना आवश्यक था, तभी वह रस उनमें से निकल सकता था।

   यही प्रभु यीशु के जीवन के लिए भी सत्य था। उनके इस पृथ्वी पर आने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह अनिवार्य था कि उनका दूसरों की सेवा और भलाई में समर्पित जीवन संसार के सर्वोत्तम भले के लिए कुचले जाने के लिए दिया जाए। वे संसार में संसार के पापों की कीमत चुकाने आए थे जिससे संसार को पापों से मुक्ति और उद्धार का मार्ग दे सकें। यह कीमत थी उनका अपने प्राणों का बलिदान। उन्होंने यह कीमत रोमी क्रूस पर चढ़कर चुकाई। चाहे क्रूस पर चढ़ाने वाले सैनिक रोमी साम्राज्य के थे, परन्तु उनके इस दण्ड के भोगे जाने की अनुमति पिता परमेश्वर की ओर सी थी, जिसके विष्य में भविष्यद्वक्ता यशायाह ने लिखा था "तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा, उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी" (यशायाह ५३:१०)।
   यह सत्य है कि हम अंगूरों को पी नहीं सकते; उन्हें पहले कुचला जाना आवश्यक है, तभी उनका रस हमें मिल सकता है। यही मसीह यीशु के साथ कलवरी के क्रूस पर हुआ। उन्होंने अपने शारीरिक जीवन को कुचले जाने के लिए दे दिया ताकि संसार को उद्धार द्वारा अनन्त आत्मिक जीवन मिल सके। आज समस्त संसार में जो कोई भी सच्चे मन और साधारण विश्वास से उनके इस बलिदान पर विश्वास करके उन्हें स्वीकार करता है, उनसे अपने पापों की क्षमा मांगता है, वह अपने इस विश्वास द्वारा उद्धार और अनन्त जीवन पाता है।

   जब मसीही विश्वासी प्रभु भोज में भाग लेते हैं तो वे स्मरण करते हैं कि हमारे पापों के लिए परमेश्वर के पवित्र और निष्पाप पुत्र ने अपनी जान बलिदान कर दी; वह हमारे ही पापों के कारण कुचला गया और हमारे ही अधर्म के कारण उसने दुखः उठाए। - डेव एग्नर

शारीरिक जीवन परमेश्वर की श्वास द्वारा मिला, किंतु अनन्त जीवन मसीह की मृत्यु से मिला।

तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा, उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी। - यशायाह ५३:१०
 
बाइबल पाठ: यशायाह ५३
    Isa 53:1  जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
    Isa 53:2  क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
    Isa 53:3  वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी, और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
    Isa 53:4  निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया, तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
    Isa 53:5  परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया, हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
    Isa 53:6  हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया, और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
    Isa 53:7  वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला।
    Isa 53:8  अत्याचार करके और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया; मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
    Isa 53:9  और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उस ने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
    Isa 53:10  तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा, उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
    Isa 53:11  वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा, और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
    Isa 53:12  इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया, तौभी उस ने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और अपराधियों के लिये बिनती करता है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३४-३६ 
  • इब्रानियों २

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

सही मानदण्ड

एक छोटे बच्चे ने घोषणा करी, "मेरा कद ९ फुट है, मैं गोलियत के समान हूँ।" उसकी माँ ने पूछा, "तुम यह किस आधार पर कह सकते हो?" बच्चा बोला, "मैंने कद नापने का अपना पैमाना बनाया है और उसके अनुसार मेरा कद ९ फुट का है।" उस बच्चे ने नापा तो सही था पर जिस पैमाने से नापा था, वही गलत था।

कुछ ऐसा ही लोगों के साथ होता है जब वे अपनी धार्मिकता का स्तर अन्य लोगों की धार्मिकता से नापते हैं। दूसरों के व्यवहार की तुलना में अपने व्यवहार को रख कर उन्हें लगता है कि उनमें कोई कमी नहीं है, इसलिए उन्हें अपने आप में कोई पाप का बोध नहीं होता और न ही पाप की क्षमा पाने तथा उद्धार की कोई आवश्यक्ता महसूस होती है। लेकिन उनके अपनी धार्मिकता नापने के गलत पैमाने की सच्चाई तब सामने आती है जब वे अपने आप को धार्मिकता के सम्पूर्ण, सिद्ध और कभी न बदलने वाले स्तर - परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के सामने रखते हैं।

परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह ने जब परमेश्वर का दर्शन उसके वैभव और महिमा में पाया तो वह पुकार उठा, "... हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठों वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं, क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है!" जब प्रभु यीशु के चेले और प्रेरित युहन्ना ने प्रभु यीशु का दर्शन उसके ईश्वरीय स्वरूप में पाया, तो उसका अनुभव यशायाह के अनुभव से भिन्न नहीं था; यूहन्ना लिखता है, "जब मै ने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उस ने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, कि मत डर मैं प्रथम और अन्‍तिम और जीवता हूं" (प्रकाशितवाक्य १:१७)। जब यह हाल उनका है जो परमेश्वर के भक्त और चुने हुए धर्मी जन हैं, तो हम साधारण मनुष्यों का, जिनके लिए लिखा है कि "सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों ३:२३) उस सिद्ध के सामने क्या हाल होगा?

जब हम अपनी धार्मिकता को अपने समान ही अन्य पापी लोगों से तुलना द्वारा आंकते हैं तो ना तो हम सही होते हैं और ना ही हमारे निष्कर्श, क्योंकि हमारा नापने का मानदण्ड ही गलत है। चाहे हम मनुष्यों की नज़रों में इस गलत पैमाने द्वारा धर्मी माने जा सकते हैं, लेकिन इस गलत पैमाने द्वारा हम कभी परमेश्वर के समक्ष धर्मी नहीं ठहर सकते। परन्तु परमेश्वर ने हमें धर्मी ठहराने के लिए हमारे लिए केवल एक ही मार्ग दिया है, वह मार्ग जो समस्त संसार के प्रत्येक जन के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है - किसी भी प्रकार के कर्मों द्वारा नहीं वरन साधारण विश्वास द्वारा।

प्रभु यीशु द्वारा क्रूस पर दिये गए उसके बलिदान में विश्वास करके और साधारण विश्वास से उस से अपने पापों की क्षमा माँगने भर से ही कोई भी व्यक्ति कभी भी कहीं भी किसी भी समय परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर सकता है और अनन्त काल तक उस अविनाशी धार्मिकता के भले परिणामों का आनन्द ले सकता है। - मार्ट डी हॉन


यदि किन्ही कर्मों द्वारा मनुष्य स्वयं धर्मी बन सकता तो प्रभु यीशु मसीह को इसके लिए अपने प्राण बलिदान करने की कदापि आवश्यक्ता नहीं पड़ती।

क्‍योंकि हमें यह हियाव नहीं कि हम अपने आप को उन में से ऐसे कितनों के साथ गिनें, या उन से अपने को मिलाएं, जो अपनी प्रशंसा करते हैं, और अपने आप को आपस में नाप तौल कर एक दूसरे से मिलान कर के मूर्ख ठहरते हैं। - २ कुर्न्थियों १०:१२


बाइबल पाठ: रोमियों ३:१०-२४

Rom 3:10 जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।
Rom 3:11 कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं।
Rom 3:12 सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।
Rom 3:13 उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्हों ने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है।
Rom 3:14 और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है।
Rom 3:15 उन के पांव लोहू बहाने को फुर्तीले हैं।
Rom 3:16 उन के मार्गों में नाश और क्‍लेश है।
Rom 3:17 उन्‍होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना।
Rom 3:18 उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।
Rom 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्‍हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्‍द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्‍ड के योग्य ठहरे।
Rom 3:20 क्‍योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।
Rom 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं।
Rom 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्‍योंकि कुछ भेद नहीं।
Rom 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है।
Rom 3:24 परन्‍तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४-६
  • प्रेरितों १७:१६-३४

रविवार, 24 अप्रैल 2011

नए जीवन की ज़िम्मेदारी

ईस्टर के अगले दिन अखबार की सुर्खियाँ थीं "सारे संसार ने मसीह का पुनरुत्थान मनाया"; और उसी मुख्यपृष्ठ पर अन्य समाचार संसार में विभिन्न स्थानों पर चल रहे युद्ध, जातिवाद की हिंसा, संघर्ष एवं मृत्यु के थे। इन सब निराशाजनक समाचारों को पढ़कर मुझे लगा, "यह सब परसपर कितना विरोधी है!" समाचार सुर्खियाँ बताती हैं कि संसार मसीह का पुनरुत्थान मना रहा है, लेकिन शेष पृष्ठ दर्षा रहा है कि कैसे संसार के लोग मसीह के पुनरुत्थान से मिलने वाले अनुग्रह, शांति और आशीश को व्यर्थ कर रहे हैं। संसार भर के वो करोड़ों लोग जो ईस्टर के दिन चर्च जाकर मसीह के पुनरुत्थान का पर्व मनाते हैं, उनमें से अधिकांश्तः अपने जीवनों द्वारा इस एतिहासिक तथ्य को और उसके आत्मिक अभिप्राय को दर्शाते ही नहीं हैं।

कई बार हम मसीह में अपने विश्वास को दर्शाने के बाहरी हाव-भाव तो दिखाते हैं, लेकिन मसीह के साथ अपने जोड़े जाने के अर्थ को जी कर नहीं दिखाते। रोमियों के नाम अपनी पत्री के ६ अध्याय में पौलुस बताता है कि हम मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ा दिये गए हैं और अब पाप के लिए मर गए हैं, लेकिन हम मसीह के साथ जीवित भी किए गए हैं कि हम एक नया जीवन जी कर दिखाएं। इसलिए वह अपनी एक अन्य पत्री में कहता है, "सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।" (कुलिस्सियों ३:१, २)

मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाए जाने के कारण अब हमें यह सौभाग्य है कि हम उसके लिए जिएं भी। ऐसा करके हम मसीह के पुनरुत्थान से मिली आशीश और सामर्थ के लिए उसे अपना आभार प्रगट करते हैं। - रिचर्ड डी हॉन


जिस सामर्थ ने मसीह की कब्र को खोल दिया, वही सामर्थ हमारे लिए जीवन की भरपूरी के द्वार भी खोलती है।

...जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। - रोमियों ६:४


बाइबल पाठ: रोमियों ६:१-१३

Rom 6:1 सो हम क्‍या कहें क्‍या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो?
Rom 6:2 कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्‍यों कर जीवन बिताएं?
Rom 6:3 क्‍या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया?
Rom 6:4 सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।
Rom 6:5 क्‍योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुड़ गए हैं, तो निश्‍चय उसके जी उठने की समानता में भी जुड़ जाएंगे।
Rom 6:6 क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्‍व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्‍व में न रहें।
Rom 6:7 क्‍योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा।
Rom 6:8 सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी।
Rom 6:9 क्‍योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठकर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की।
Rom 6:10 क्‍योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया, परन्‍तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।
Rom 6:11 ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्‍तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।
Rom 6:12 इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो।
Rom 6:13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जान कर परमश्‍ेवर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल १९-२०
  • लूका १८:१-२३

शनिवार, 23 अप्रैल 2011

उम्मीद का जीवन

जब यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के काले दिन का अन्त हुआ, तो ऐसा लगा कि सबसे अनोखे जीवन का अन्त हो गया। कुछ वर्षों से मसीह ने अपने चेलों और लोगों की भीड़ को अपनी शिक्षाओं और आश्चर्यकर्मों की विलक्षणता द्वारा अचंभित कर रखा था। लेकिन क्रूस पर चढ़ाए गए यीशु ने न तो क्रूस से बचना चाहा और न ही क्रूस से उतर आना चाहा, और अब उसकी मृत्यु हो चुकी थी। अब उससे कोई उम्मीद रखना व्यर्थ लग रहा था।

लेकिन पुनरुत्थान की उस पहली सुबह उम्मीद फिर से जाग उठी। सूर्योदय के कुछ ही समय के बाद मरियम मगदलीनी ने यीशु के चेलों, पतरस और युहन्ना को बताया कि उसने तथा उसकी साथियों ने यीशु की कब्र को खाली पाया। चित्रकार यूजीन बर्नेन्ड ने पतरस और युहन्ना को इस समचार के सुनने के पश्चात कब्र दौड़ कर यीशु की कब्र पर जाते हुए चित्रित किया है। बर्नेन्ड के चित्र में उन दोनो के चेहरों पर उभरते मनोभावों को दर्शाया गया है। दोनो के चेहरों पर परसपर विरोधाभास वाले भावे दिखाई देते हैं - वेदना तथा राहत, दुख तथा अचंभा, निराशा तथा अचरज; उनकी निगाहें उत्सुकता से आगे की ओर लगीं हुई हैं, और उनके झुके हुए शरीर खाली कब्र और जीवित उद्धारकर्ता की ओर हमारा ध्यान खींचते हैं।

मसीह यीशु आज भी जीवित है, तथा आज भी अपने अनुयायियों के जीवन में उद्धार का आश्चर्यकर्म करता है। परन्तु हम में से कई आज भी ऐसे अपने दिन बिताते हैं जैसे वह अभी भी कब्र में ही हो।

कितना भला हो कि हम उम्मीद से भरकर और खाली कब्र के आगे उस जीवित मसीह की ओर अपनी निगाहें लगाएं जो हमें अपने पुनरुत्थान की शक्ति से भर सकता है। - डेव एग्नर


कलवरी का बलिदान पुनरुत्थान द्वारा विजेता हो गया।

तब पतरस और वह दूसरा चेला निकल कर कब्र की ओर चले। और दोनों साथ साथ दौड़ रहे थे, परन्‍तु दूसरा चेला पतरस से आगे बढ़कर कब्र पर पहिले पहुंचा। - यूहन्ना २०:३, ४


बाइबल पाठ: यूहन्ना २०:१-१०

Joh 20:1 सप्‍ताह के पहिले दिन मरियम मगदलीनी भोर को अंधेरा रहते ही कब्र पर आई, और पत्थर को कब्र से हटा हुआ देखा।
Joh 20:2 तब वह दौड़ी और शमौन पतरस और उस दूसरे चेले के पास जिस से यीशु प्रेम रखता था आकर कहा, वे प्रभु को कब्र में से निकाल ले गए हैं और हम नहीं जानतीं, कि उसे कहां रख दिया है।
Joh 20:3 तब पतरस और वह दूसरा चेला निकल कर कब्र की ओर चले।
Joh 20:4 और दोनों साथ साथ दौड़ रहे थे, परन्‍तु दूसरा चेला पतरस से आगे बढ़कर कब्र पर पहिले पहुंचा।
Joh 20:5 और झुककर कपड़े पड़े देखे: तौभी वह भीतर न गया।
Joh 20:6 तब शमौन पतरस उसके पीछे पीछे पहुंचा और कब्र के भीतर गया और कपड़े पड़े देखे।
Joh 20:7 और वह अंगोछा जो उसके सिर से बन्‍धा हुआ या, कपड़ों के साथ पड़ा हुआ नहीं परन्‍तु अलग एक जगह लपेटा हुआ देखा।
Joh 20:8 तब दूसरा चेला भी जो कब्र पर पहिले पहुंचा था, भीतर गया और देखकर विश्वास किया।
Joh 20:9 वे तो अब तक पवित्र शास्‍त्र की वह बात न समझते थे, कि उसे मरे हुओं में से जी उठना होगा।
Joh 20:10 तब ये चेले अपने घर लौट गए।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल १६-१८
  • लूका १७:२०-३७

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

वैध वसीयत

एडिनबर्ग के रौबी फ्लोकहार्ट नामक एक सुसमाचार प्रचारक ने प्रभु यीशु की मत्यु और पुनरुत्थान को समझाने के लिए दो आपबीति कहानियाँ सुनाईं।

रौबी की मित्रता एक ऐसे कैदी से हुई जिसे मृत्युदण्ड दिया गया था। जब उस कैदी का अपनी वसीयत बनाने का समय आया तो जो भी थोड़ा सा पैसा उसके पास था, उसने रौबी के नाम कर दिया। इसके कुछ समय पश्चात कैदी को मृत्युदण्ड से क्षमा मिल गई, इसलिए उसकी बनाई हुई वाचा कार्यान्वित नहीं हुई; रौबी ने कहा, "क्योंकि वो जीवित रहा, इसलिए मुझे वसीयत से कुछ नहीं मिला।"

रौबी ने उसके नाम वसीयत करने वाले एक दूसरे व्यक्ति के बारे में बताया। इस वसीयत से भी उसे कुछ नहीं मिला, क्योंकि वसीयत बनाने वाले की मृत्यु के पश्चात कोई कपटी वकील आया और सब कुछ हड़प कर गया। रौबी ने कहा, "यदि मेरा मित्र जीवित होता तो निश्चित करता कि उसके मित्र रौबी को कुछ मिले; किंतु क्योंकि वह मर चुका था इसलिए अब अपनी वसीयत का सही रीति से निभाया जाना वह सुनिश्चित नहीं कर सकता था।"

प्रभु यीशु, नई वाचा का महान वाचाकर्ता निसन्देह मरा, इसलिए उसके रक्त द्वारा प्रमाणित उसकी अनमोल वाचा वैध है और लागू है। प्रायश्चित के लिए यीशु की मृत्यु के कारण उसने हम सब के लिए अनन्त उद्धार को हासिल कर लिया है।

लेकिन वह कब्र में पड़ा नहीं रहा, तीसरे दिन वह फिर जी उठा। आज वह जीवित है तथा सुनिश्चित करता है कि उसकी वाचा पूर्ण रूप से निभायी जाए। उसका जीवित होना इस बात की गारंटी है कि उसकी नई वाचा में जिन आशीशों की प्रतिज्ञा दी गई है वे उसे अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता मानने वाले प्रत्येक विश्वासी को सम्पूर्णतया प्राप्त होंगी।

मसीह की मृत्यु उसकी वाचा के लागू होने को सुनिश्चित करती है; उसका पुनरुत्थान हमारे अमूल्य मीरास की गारंटी है। - पौल वैन गोर्डर


केवल एक जीवित उद्धारकर्ता ही मरते संसार को बचा सकता है।

क्‍योंकि जहां वाचा बान्‍धी गई है वहां वाचा बान्‍धने वाले की मृत्यु का समझ लेना भी अवश्य है। - इब्रानियों ९:१६


बाइबल पाठ: इब्रानियों ९:१६-२८

Heb 9:16 क्‍योंकि जहां वाचा बान्‍धी गई है वहां वाचा बान्‍धने वाले की मृत्यु का समझ लेना भी अवश्य है।
Heb 9:17 क्‍योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धने वाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती।
Heb 9:18 इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लोहू के नहीं बान्‍धी गई।
Heb 9:19 क्‍योंकि जब मूसा सब लोगों को व्यवस्था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उस ने बछड़ों और बकरों का लोहू लेकर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया।
Heb 9:20 और कहा, कि यह उस वाचा का लोहू है, जिस की आज्ञा परमेश्वर ने तुम्हारे लिये दी है।
Heb 9:21 और इसी रीति से उस ने तम्बू और सेवा के सारे सामान पर लोहू छिड़का।
Heb 9:22 और व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्‍तुएं लोहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं और बिना लोहू बहाए क्षमा नहीं होती।
Heb 9:23 इसलिये अवश्य है, कि स्‍वर्ग में की वस्‍तुओं के प्रतिरूप इन के द्वारा शुद्ध किए जाएं पर स्‍वर्ग में की वस्‍तुएं आप इन से उत्तम बलिदानों के द्वारा।
Heb 9:24 क्‍योंकि मसीह ने उस हाथ के बनाए हुए पवित्र स्थान में जो सच्‍चे पवित्र स्थान का नमूना है, प्रवेश नहीं किया, पर स्‍वर्ग ही में प्रवेश किया, ताकि हमारे लिये अब परमेश्वर के साम्हने दिखाई दे।
Heb 9:25 यह नहीं कि वह अपने आप को बार बार चढ़ाए, जैसा कि महायाजक प्रति वर्ष दूसरे का लोहू लिये पवित्रस्थान में प्रवेश किया करता है।
Heb 9:26 नहीं तो जगत की उत्‍पत्ति से लेकर उस को बार बार दुख उठाना पड़ता पर अब युग के अन्‍त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।
Heb 9:27 और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।
Heb 9:28 वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ और जो लोग उस की बाट जोहते हैं, उन के उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप के दिखाई देगा।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल १४-१५
  • लूका १७:१-१९

गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

पिता के प्रेम का दर्द

वियतनाम युद्ध के समय, सन १९६८ अमरीकी नौसेना के कमान एडमिरल एल्मो ज़ुम्वौल्ट ने संभाली। अमरीकी सेना के सैनिकों के हताहत होने को कम करने के लिए उन्होंने जल मार्गों के किनारों पर एक रासायनिक Agent Orange छिड़कने का आदेश दिया, जिससे जल तट पर वनस्पति मर गई और शत्रु के सैनिकों के छुप कर हमला बोलने के रास्ते बन्द हो गए।

उन जल मार्गों पर गश्त करने वाली नौसेना की नौकाओं में से एक की कमान एडमिरल एल्मो के २१ वर्षीय पुत्र के हाथ में थी। विडंबना यह हुई कि उस छिड़के हुए रासायनिक के संपर्क में आने के कारण उनके पुत्र को एक घातक किस्म का कैंसर हो गया। पिता और पुत्र दोनो यह जानते थे कि कैंसर का कारण वह रासायनिक ही है। यह एक हृदय विदारक कहानी है एक पिता की जिसके एक निर्णय का दुख उसके पुत्र को उठाना पड़ा, किंतु दोनो ही का यह मानना था कि उस समय रासायनिक छिड़कवाए जाने का वह निर्णय सही था।

मानव जाति के लिए पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के लिए परमेश्वर पिता ने जान-बूझ कर एक ऐसा निर्णय लिया जिसके कारण उसके एकमात्र और प्रीय पुत्र को बयान से बाहर कष्ट और दुख उठाने पड़े। मानव जाति को उसके बलिदान द्वारा उद्धार दिलवाने के निर्णय के बाद पिता को अपने निर्दोष और निष्कलंक पुत्र का भीड़ द्वारा ठ्ठा उड़ाये जाने, कोड़ों की मार खाने और क्रूस पर हाथों और पैरों में कीलों द्वारा ठोके जाने का दर्दनाक दृश्य देखना और सहना पड़ा। परमेश्वर पिता को खामोशी से बर्दाशत करना पड़ा जब समस्त मानव जाति के पाप उसके निष्पाप पुत्र पर लाद दिये गए और वह दीन और नम्र पुत्र जिसने सदा सबका भला चाहा और किया, वर्णन से बाहर पीड़ा और तिरिस्कार से होकर गुज़रा।

ऐसे में यीशु के प्रति हमारी कृतघन्ता पिता परमेश्वर के दुख को और बढ़ा देती है। उसके अद्भुत बलिदान के लिए हमें सदा उसका कृतज्ञ और धन्यवादी रहना चाहिए तथा साधारण विश्वास के साथ उसके क्रूस पर किए गए कार्य को ग्रहण कर के उद्धार स्वीकर करना चाहिए। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर के प्रेम का सच्चा माप यही है कि उसके प्रेम को कभी मापा नहीं जा सकता।

तब उन्‍होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया... - मत्ती २७:३५


बाइबल पाठ: मत्ती २७:२७-५०

Mat 27:27 तब हाकिम के सिपाहियों ने यीशु को किले में ले जाकर सारी पलटन उसके चहुं ओर इकट्ठी की।
Mat 27:28 और उसके कपड़े उतार कर उसे किरिमजी बागा पहिनाया।
Mat 27:29 और काटों को मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा, और उसके दाहिने हाथ में सरकण्‍डा दिया और उसके आगे घुटने टेक कर उसे ठट्ठे में उड़ाने लगे, कि हे यहूदियों के राज नमस्‍कार।
Mat 27:30 और उस पर थूका और वही सरकण्‍डा लेकर उसके सिर पर मारने लगे।
Mat 27:31 जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो वह बागा उस पर से उतार कर फिर उसी के कपड़े उसे पहिनाए, और क्रूस पर चढ़ाने के लिये ले चले।
Mat 27:32 बाहर जाते हुए उन्‍हें शमौन नाम एक कुरेनी मनुष्य मिला, उन्‍होंने उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले।
Mat 27:33 और उस स्थान पर जो गुलगुता नाम की जगह अर्थात खोपड़ी का स्थान कहलाता है पहुंचकर।
Mat 27:34 उन्‍होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्‍तु उस ने चख कर पीना न चाहा।
Mat 27:35 तब उन्‍होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया और चिट्ठियां डाल कर उसके कपड़े बांट लिए।
Mat 27:36 और वहां बैठ कर उसका पहरा देने लगे।
Mat 27:37 और उसका दोषपत्र, उसके सिर के ऊपर लगाया, कि यह यहूदियों का राजा यीशु है।
Mat 27:38 तब उसके साथ दो डाकू एक दाहिने और एक बाएं क्रूसों पर चढ़ाए गए।
Mat 27:39 और आने जाने वाले सिर हिला हिला कर उस की निन्‍दा करते थे।
Mat 27:40 और यह कहते थे, कि हे मन्‍दिर के ढाने वाले और तीन दिन में बनाने वाले, अपने आप को तो बचा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो क्रूस पर से उतर आ।
Mat 27:41 इसी रीति से महायाजक भी शास्‍त्रियों और पुरिनयों समेत ठट्ठा कर करके कहते थे, इस ने औरों को बचाया, और अपने को नहीं बचा सकता।
Mat 27:42 यह तो इस्राएल का राजा है। अब क्रूस पर से उतर आए, तो हम उस पर विश्वास करें।
Mat 27:43 उस ने परमेश्वर का भरोसा रखा है, यदि वह इस को चाहता है, तो अब इसे छुड़ा ले, क्‍योंकि इस ने कहा था, कि मैं परमेश्वर का पुत्र हूं।
Mat 27:44 इसी प्रकार डाकू भी जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे उस की निन्‍दा करते थे।
Mat 27:45 दोपहर से लेकर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्‍धेरा छाया रहा।
Mat 27:46 तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्‍द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी अर्थात हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्‍यों छोड़ दिया?
Mat 27:47 जो वहां खड़े थे, उन में से कितनों ने यह सुन कर कहा, वह तो एलिय्याह को पुकारता है।
Mat 27:48 उन में से एक तुरन्‍त दौड़ा, और स्‍पंज लेकर सिरके में डुबोया, और सरकण्‍डे पर रख कर उसे चुसाया।
Mat 27:49 औरों ने कहा, रह जाओ, देखें, एलिय्याह उसे बचाने आता है कि नहीं।
Mat 27:50 तब यीशु ने फिर बड़े शब्‍द से चिल्ला कर प्राण छोड़ दिए।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल १२-१३
  • लूका १६

बुधवार, 20 अप्रैल 2011

केवल यीशु द्वारा

यदि कोई मनुष्य जो तैरना न जानता हो और गहरे पानी में गिर पड़े तथा सहायता के लिए पुकारे तो आप क्या करेंगे? क्या आप उसकी ओर एक पुस्तक फेंकेंगे जो तैरने के पाठ सरलता से सिखाती हो? क्या आप उसे प्रोत्साहित करने के लिए कोई प्रवचन सुनाएंगे? क्या आप भी पानी में कूदकर उसे कहेंगे कि मेरा अनुसरण करो, जैसा मैं कर रहा हूँ, वैसा ही करते रहो और मैं तुम्हें तैरना सिखा दूँगा? इनमें से कोई भी कार्य उस डूबते हुए मनुष्य को नहीं बचा पाएंगे। उस डूबते हुए मनुष्य को किसी पुस्तक की शिक्षाओं की या किसी उत्साहवर्धक प्रवचन की या तैरना सीखने के उपायों की आवश्यक्ता नहीं है। उसे एक बचाने वाला चाहिए, कोई ऐसा जो जहाँ और जिस स्थिति में वह है वहीं से हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ ले और उन जानलेवा परिस्थितियों से खींच ले तथा सुरक्षित बाहर निकाल लाए।

हमारी पाप के दलदल में धंसी ज़िंदगी को भी ऐसे ही बचाने वाले की आवश्यक्ता है। बाइबल बताती है कि "सबने पाप किया" (रोमियों ३:२३), और "पाप की मज़दूरी मृत्यु है" (रोमियों ६:२३)। इस संसार में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति पाप से ग्रसित है और विनाश की ओर अग्रसर है। हम अपने आप को धर्म पुस्तकों के ज्ञान द्वारा, अथवा और बेहतर धार्मिकता के कार्य करके या किसी अन्य मनुष्य का अनुसरण करके बचा नहीं सकते क्योंकि इनमें से कोई भी मार्ग पाप का नाश नहीं कर सकता। हमारी एकमात्र आशा मसीह यीशु ही है जिसने पाप के डंक को तोड़कर पाप के दलदल में फंसी मनुष्य जाति को बाहर निकालने के लिए अपने बड़े अनुग्रह में पापियों की ओर अपने हाथ बढ़ाए हैं, कि वह उन्हें खींच कर बाहर निकाल ले।

बाइबल बताती है कि, "क्‍योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है" (लूका १९:१०)। वह उन सबका उद्धार करता है जो उसपर विश्वास करते हैं। जैसे डूबते हुए को अपने बचाने वाले के हाथों में अपने आप को विश्वास के साथ सौंप देना होता है, हम पापियों को भी पाप से निकलने के लिए अपने आप को विश्वास के साथ प्रभु यीशु के हाथों में सौंप देना है। - रिचर्ड डी हॉन


मसीह में विश्वास का अर्थ है उद्धार।

यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया... - १ तिमुथियुस १:१५


बाइबल पाठ: रोमियों ५:१-१०

Rom 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Rom 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें।
Rom 5:3 केवल यही नहीं, बरन हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें, यही जान कर कि क्‍लेश से धीरज,
Rom 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्‍पन्न होती है।
Rom 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्‍योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
Rom 5:6 क्‍योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Rom 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्‍तु क्‍या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Rom 5:8 परन्‍तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Rom 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहु के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्‍यों न बचेंगे?
Rom 5:10 क्‍योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्‍यों न पाएंगे?

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल ९-११
  • लूका १५:११-३२

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

यीशु के बहाए लहु द्वारा

युद्ध में बुरी तरह घायल और मृत्यु के निकट एक सैनिक के साथ एक महिला प्रार्थना कर रही थी कि एक नर्स वहाँ पहुंची और सैनिक से कहने लगी, "तुम्हें अपने पापों की चिंता करने की आवश्यक्ता नहीं है; जो भी अपने प्राण अपने देश पर न्योछावर कर सकता है, वह गलत नहीं हो सकता।" सैनिक मुस्कुराया और बोला, "यह बात सही नहीं है। मैं जब युद्ध भूमि में घायल पड़ा था, तब मैं जानता था कि मैं जो कुछ अपनी मातृभूमि के लिए कर सकता था, मैंने किया है, लेकिन इस विचार ने मुझे परमेश्वर के सामने अपना हिसाब देने का साहस नहीं दिया। मुझे ज्ञात था कि मैं मर कर न्याय का सामना नहीं कर पाऊंगा। लेकिन इस महिला ने मुझे यह समझने में सहायता करी है कि यीशु ने मेरे समस्त पापों के लिए दण्ड उठा लिया है और मुझे पापों से क्षमा कर दिया है, अब मैं मरने से नहीं डरता।"

उस नर्स ने कुछ बुरा तो नहीं कहा, परन्तु जो कहा वह अज्ञानता में कहा। सैनिक ने सुसमाचार के मर्म को समझ लिया - यीशु हमारे पापों के लिए मरा। कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु की मृत्यु हमारे स्थान पर थी - जहाँ हमें होना था, वह चला गया; हम अधर्मियों के स्थान पर वह धर्मी मरा तथा वही हमारे अनन्त उद्धार की एकमात्र आशा है।

एक कवि ने लिखा: "हे यीशु, वो पापों का बोझ था जिसने तेरे सिर को झुका दिया,/ मेरे पाप तुझे उठाने पड़े;/ तूने मेरा बोझ उठा लिया और मेरे संति मर गया,/ अपने प्राण मेरे प्राण के लिए बलिदान कर दिये,/ तेरा लहु बलिदान बन कर बह गया!/ अपने अनुग्रह से तूने मुझे बचा लिया।"

हमें आवश्यक्ता है कि हम बार बार रुक कर प्रभु यीशु का धन्यवाद करें कि उसने हमारे पापों के दण्ड को अपने उपर लिया और हमारे लिए अपने प्राण दिये।

केवल उसने ही यह किया और केवल वह ही यह कर सकता था। - पौल वैन गौर्डर


स्वर्ग का जायज़ प्रवेशपत्र केवल यीशु के लहु से ही हस्ताक्षरित है।

परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी... - यशायाह ५३:५


बाइबल पाठ: यशायाह ५३

Isa 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास कया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
Isa 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
Isa 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isa 53:4 निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया, तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
Isa 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
Isa 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे, हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isa 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला।
Isa 53:8 अत्याचार करके और दोष लगाकर वे उसे ले गए, उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया; मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
Isa 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उस ने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isa 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले, उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
Isa 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठाकर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
Isa 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया तौभी उस ने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल ६-८
  • लूका १५:१-१०

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

यीशु क्यों मरा?

सदियों से इस प्रश्न ने दुविधा उत्पन्न कर रखी है कि यीशु की मृत्यु का कारण क्या था? मध्य काल में, धर्म के नाम पर युद्ध करने वाले, तुर्कियों के हाथ से यरुशलेम को छुड़ाने योरोप से निकले। उनमे भ्रांति थी कि यहूदियों के कारण ही यीशु को मरना पड़ा, और वे यहूदियों को ’मसीह के हत्यारे’ कहते थे; इसलिए मार्ग में जहाँ भी यहूदी उन्हें मिलते, वे उन्हें मार डालते।

आज भी यीशु की मृत्यु को लेकर लोग संवेदनशील रहते हैं। लेकिन बाइबल इस बारे में क्या कहती है? मत्ती द्वारा लिखित वृतांत के अनुसार, रोमी इस बात के लिए ज़िम्मेदार प्रतीत होते हैं, क्योंकि रोमी शासक पीलातुस ने यीशु को निर्दोष करार देते हुए भी उसे मृत्यु दण्ड के लिए सौंप दिया, तथा रोमी सैनिकों ने उसे ले जाकर क्रूस पर चढ़ा दिया। लेकिन इस घटना के कुछ ही सप्ताह पश्चात, पतरस ने यरुशलेम में अपने प्रचार में यहूदियों को यीशु को क्रूस देने का दोषी ठहराया (प्रेरितों २:२२-२४)।

परन्तु सच्चाई यह है कि हम सब यीशु की मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार हैं। क्रूस पर यीशु ने न केवल यहूदियों और रोमियों के पापों की कीमत चुकाई, वरन हम सब के पापों की कीमत भी चुकाई ( १ पतरस २:२४)। यीशु प्रत्येक पापी के लिए मरा (२ कुरिन्थियों ५:१५)। इसलिए इस बात पर बहस करना कि यीशु को किसने मारा, किसी विशवासी के लिए उचित नहीं है - वास्तविक्ता यही है कि हम सब इसके ज़िम्मेदार हैं।

यीशु ने हम सब के लिए अपने प्राण दिये, हमारे पाप ही उसकी मृत्यु का कारण हैं। उसपर विश्वास करने से हमें पापों की क्षमा, परमेश्वर से शांति और मेल-मिलाप तथा अनन्त जीवन मिलता है। - डेव एग्नर


यीशु हमारे स्थान पर मरा ताकि हम उसकी शांति पाएं; उसने हमारे पाप अपने ऊपर ले लिए जिससे हम उसके उद्धार को प्राप्त कर सकें।

हे इस्‍त्राएलियों, ये बातें सुनो: कि यीशु नासरी एक मनुष्य था जिस का परमेश्वर की ओर से होने का प्रमाण उन सामर्थ के कामों और आश्‍चर्य के कामों और चिन्‍हों से प्रगट है, जो परमेश्वर ने तुम्हारे बीच उसके द्वारा कर दिखलाए जिसे तुम आप ही जानते हो। उसी को, जब वह परमेश्वर की ठहराई हुई मनसा और होनहार के ज्ञान के अनुसार पकड़वाया गया, तो तुम ने अधमिर्यों के हाथ से उसे क्रूस पर चढ़वा कर मार डाला। प्रेरितों २:२२-२३


बाइबल पाठ: प्रेरितों २:२२-३९

Act 2:22 हे इस्‍त्राएलियों, ये बातें सुनो: कि यीशु नासरी एक मनुष्य था जिस का परमेश्वर की ओर से होने का प्रमाण उन सामर्थ के कामों और आश्‍चर्य के कामों और चिन्‍हों से प्रगट है, जो परमेश्वर ने तुम्हारे बीच उसके द्वारा कर दिखलाए जिसे तुम आप ही जानते हो।
Act 2:23 उसी को, जब वह परमेश्वर की ठहराई हुई मनसा और होनहार के ज्ञान के अनुसार पकड़वाया गया, तो तुम ने अधमिर्यों के हाथ से उसे क्रूस पर चढ़वाकर मार डाला।
Act 2:24 परन्‍तु उसी को परमेश्वर ने मृत्यु के बन्‍धनों से छुड़ाकर जिलाया: क्‍योंकि यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता।
Act 2:25 क्‍योंकि दाऊद उसके विषय में कहता है, कि मैं प्रभु को सर्वदा अपने साम्हने देखता रहा क्‍योंकि वह मेरी दाहिनी ओर है, ताकि मैं डिग न जाऊं।
Act 2:26 इसी कारण मेरा मन आनन्‍द हुआ, और मेरी जीभ मगन हुई, वरन मेरा शरीर भी आशा में बसा रहेगा।
Act 2:27 क्‍योंकि तू मेरे प्राणों को अधोलोक में न छोड़ेगा और न अपने पवित्र जन को सड़ने ही देगा!
Act 2:28 तू ने मुझे जीवन का मार्ग बताया है, तू मुझे अपने दर्शन के द्वारा आनन्‍द से भर देगा।
Act 2:29 हे भाइयो, मैं उस कुलपति दाऊद के विषय में तुम से साहस के साथ कह सकता हूं कि वह तो मर गया और गाड़ा भी गया और उस की कब्र आज तक हमारे यहां वर्तमान है।
Act 2:30 सो भविष्यद्वक्ता होकर और यह जानकर कि परमेश्वर ने मुझ से शपथ खाई है, कि मैं तेरे वंश में से एक व्यक्ति को तेरे सिंहासन पर बैठाऊंगा।
Act 2:31 उस ने होनहार को पहिले ही से देखकर मसीह के जी उठने के विषय में भविष्यद्वाणी की कि न तो उसका प्राण अधोलोक में छोड़ा गया, और न उस की देह सड़ने पाई।
Act 2:32 इसी यीशु को परमेश्वर ने जिलाया, जिस के हम सब गवाह हैं।
Act 2:33 इस प्रकार परमेश्वर के दाहिने हाथ से सर्वोच्‍च पद पाकर, और पिता से वह पवित्र आत्मा प्राप्‍त करके जिस की प्रतिज्ञा की गई थी, उस ने यह उंडेल दिया है जो तुम देखते और सुनते हो।
Act 2:34 क्‍योंकि दाऊद तो स्‍वर्ग पर नहीं चढ़ा परन्‍तु वह आप कहता है, कि प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा;
Act 2:35 मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पांवों तले की चौकी न कर दूं।
Act 2:36 सो अब इस्‍त्राएल का सारा घराना निश्‍चय जान ले कि परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।
Act 2:37 तब सुनने वालों के ह्रृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, कि हे भाइयो, हम क्‍या करें?
Act 2:38 पतरस ने उन से कहा, मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले, तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।
Act 2:39 क्‍योंकि यह प्रतिज्ञा तुम, और तुम्हारी सन्‍तानों, और उन सब दूर दूर के लोगों के लिये भी है जिनको प्रभु हमारा परमेश्वर अपने पास बुलाएगा।


एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल ३-५
  • लूका १४:२५-३५

रविवार, 17 अप्रैल 2011

आशा अथवा निराश

मैं सोचता हूँ कि उस समय यरुशलेम में कितने ही लोग ऐसे थे जो रविवार को तो प्रभु यीशु के स्वागत के लिए "होशाना" (धन्य-धन्य) के नारे लगा रहे थे और कुछ दिन पश्चात उसे क्रूस की मृत्यु देने के लिए भी चिल्ला रहे थे। लोग निराश थे कि प्रभु यीशु ने रोमी राज्य को हटा कर अपना राज्य स्थापित नहीं किया। प्रभु यीशु ने न तो लोगों द्वारा उत्साहपूर्वक अपने स्वागत को रोकने की कोशिश करी और न ही उन लोगों के जोश का लाभ उठा कर किसी बलवे के लिए उन्हें उकसाया। उस भीड़ में जो केवल विदेशी सत्ता की आधीनता से मुक्ति पाना चाहते थे, वे यीशु से बहुत निराश हुए।

लोग यह नहीं पहचान सके कि यीशु अपना सांसारिक प्रभुत्व स्थापित करना नहीं वरन उनके हृदयों पर राज्य करना चाहता है। उस समय के यहूदियों की सबसे बड़ी आवश्यक्ता रोमी साम्राज्य से छुटकारा नहीं वरन पापों से मुक्ति थी। एक दिन अवश्य यीशु अपनी महिमा और सामर्थ में समस्त संसार राज्य करेगा, लेकिन उससे पहले उसे क्रूस पर बलिदान द्वारा समस्त संसार के पाप के दण्ड की कीमत चुकाने के द्वारा ही संभव था। उसके साम्राज्य की स्थापना की कुंजी संसार में कोई विद्रोह अथवा क्रांति नहीं वरन मनुष्यों में पश्चाताप और समर्पण है; क्योंकि उसका राज्य पृथ्वी पर नहीं वरन लोगों के हृदय में और स्वर्ग में है।

सदीयाँ बीतने पर भी मुद्दा बदला नहीं है, बात वहीं और वैसी ही है। यदि हम प्रभु यीशु का अनुसरण इस उद्देश्य से करते हैं कि वह हमें ज़िन्दगी की मुशकिलों से बचा लेगा, हमारे सारे रोगों को चंगा कर देगा, हमें समृद्धि प्रदान कर देगा तो यकीन जानिए, उस समय की उस भीड़ की तरह आप भी निराशा की ओर अग्रसर हैं।

लेकिन अगर हम अपने पापों से पश्चाताप करके उसे अपने हृदय का राजा बना लें, अपना क्रूस उठाकर उसके पीछे हो लें और उसके लिए जीने की ठान लें क्योंकि वही हमारा सर्जनहार-पालनहार-तारणहार परमेश्वर है, तो हमें कभी यीशु से कोई निराशा नहीं होगी और उसकी शांति और सामर्थ हमारे जीवनों में अनन्तकाल तक राज करेगी, हमें सामर्थ देगी और हम एक जयवंत जीवन जीने वाले लोग होंगे। - डेनिस डी हॉन


अपने जीवन में यीशु को प्रथम रखिये, उसकी शांति और सामर्थ अन्त तक आपके साथ रहेगी।

देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है बरन लादू के बच्‍चे पर। - मत्ती २१:५


बाइबल पाठ: मत्ती २१:१-११

Mat 21:1 जब वे यरूशलेम के निकट पहुंचे और जैतून पहाड़ पर बैतफगे के पास आए, तो यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा।
Mat 21:2 कि अपने साम्हने के गांव में जाओ, वहां पंहुचते ही एक गदही बन्‍धी हुई, और उसके साथ बच्‍चा तुम्हें मिलेगा; उन्‍हें खोलकर, मेरे पास ले आओ।
Mat 21:3 यदि तुम में से कोई कुछ कहे, तो कहो, कि प्रभु को इन का प्रयोजन है: तब वह तुरन्‍त उन्‍हें भेज देगा।
Mat 21:4 यह इसलिये हुआ, कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया या, वह पूरा हो
Mat 21:5 कि सिय्योन की बेटी से कहो, देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है बरन लादू के बच्‍चे पर।
Mat 21:6 चेलों ने जाकर, जैसा यीशु ने उन से कहा था, वैसा ही किया।
Mat 21:7 और गदही और बच्‍चे को लाकर, उन पर अपने कपड़े डाले, और वह उन पर बैठ गया।
Mat 21:8 और बहुतेरे लोगों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछाए, और और लोगों ने पेड़ों से डालियां काटकर मार्ग में बिछाईं।
Mat 21:9 और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी, पुकार पुकार कर कहती थी, कि दाऊद की सन्‍तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना।
Mat 21:10 जब उस ने यरूशलेम में प्रवेश किया, तो सारे नगर में हलचल मच गई और लोग कहने लगे, यह कौन है?
Mat 21:11 लोगों ने कहा, यह गलील के नासरत का भविष्यद्वक्ता यीशु है।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल १-२
  • लूका १४:१-२४

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

छिछली निष्ठा

अमेरिका में रविवार की प्रातः समय होता है "इलैकट्रौनिक चर्च" का। अनेक टी. वी. चैनलों द्वारा मसीही कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। कुछ टी.वी. प्रचारक तो स्पष्ट और सटीक सुसमाचार सुनाते हैं, परन्तु कई ऐसे हैं जो सम्मोहित से बैठे दर्शकों के सामने मंच पर इधर से उधर चक्कर लगाते हैं और उन्हें लुभावनी बातों से वशीभूत करने का प्रयास करते हैं, कि यीशु आपको सभी बिमरियों से चंगाई देगा, वह आपको अमीर बना देगा, गरीबी शैतान की ओर से है किंतु यीशु आपको समृद्ध देखना चाहता है। लोग ऐसे चंगाई और स्मृद्धि के "सुसमाचार" को सुनना बहुत पसन्द करते हैं और ऐसे प्रचारकों की सुनने को बड़ी भीड़ एकत्रित रहती है।

अब ज़रा अपने आप को पहली सदी के एक रविवार के दिन में ले चलिए; वर्ष है लगभग ३३ ईस्वीं और शहर है यरुशलेम। यहाँ पर पिछले ३ वर्षों से य़ीशु बिमारों को चंगा करता रहा है, उसने भूखों को भोजन दिया और यहाँ तक कि मुर्दों को भी जिला दिया। अब वह यरुशलेम में गदही के बच्चे पर बैठ कर प्रवेश कर रहा है, और बड़ी भीड़ उसका स्वागत "होशाना" (धन्य-धन्य) के नारों से कर रही है। लेकिन यह भीड़ उसका स्वागत अपने पिछले अनुभव के आधार पर इस सोच से कर रही है कि वह हमें क्या कुछ नहीं दे सकता; उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि वह कौन है और क्यूँ आया है। उन्हें एक सांसारिक मसीहा चाहिए जो उनकी पार्थिव आवश्यक्ताओं को पूरा कर सके। जब यीशु उनकी उम्मीदों के अनुसार नहीं बना तो इसी भीड़ ने उसके लिए क्रूस की मृत्यु भी माँगने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उन्हें दुख उठाने वाले मसीहा से कोई सरोकार नहीं है जिसकी क्रूस पर की मृत्यु उनके पापों को प्रगट करती है, उन्हें पश्चाताप के लिए उकसाती है, उनसे समर्पण का जीवन चाहती है और उन्हें पापों की क्षमा का मार्ग देती है।

प्रभु यीशु ने कभी यह वायदा नहीं दिया कि वह संसार में संसार के सभी दुखों से छुटकारा देगा। लेकिन उसने यह वायदा अवश्य किया कि वह पापों की क्षमा, शान्ति, अनन्त जीवन और इस संसार में क्रूस उठाने का जीवन देगा।

प्रभु यीशु की सेवा करने के जीवन में क्रूस उठाने के जीवन से कमतर किसी भी बात की आशा रखना प्रभु यीशु के प्रति एक छिछली निष्ठा का प्रमाण है। - डेनिस डी हॉन


सहज (आसान) शब्द सुसमाचारों में केवल एक बार प्रयोग हुआ है, वह भी प्रभु यीशु के साथ उसके जुए में जुतने के संदर्भ में।

और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी, पुकार पुकार कर कहती थी, कि दाऊद की सन्‍तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना। - मत्ती २१:९


बाइबल पाठ: युहन्ना १२:१२-१९

Joh 12:12 दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्ब्‍ब में आए थे, यह सुनकर, कि यीशु यरूशलेम में आता है।
Joh 12:13 खजूर की, डालियां ले लीं, और उस से भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, कि होशाना, धन्य इस्‍त्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है।
Joh 12:14 जब यीशु को एक गदहे का बच्‍चा मिला, तो उस पर बैठा।
Joh 12:15 जैसा लिखा है, कि हे सिय्योन की बेटी, मत डर, देख, तेरा राजा गदहे के बच्‍चे पर चढ़ा हुआ चला आता है।
Joh 12:16 उसके चेले, ये बातें पहिले न समझे थे; परन्‍तु जब यीशु की महिमा प्रगट हुई, तो उन को स्मरण आया, कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं और लोगों ने उस से इस प्रकार का व्यवहार किया था।
Joh 12:17 तब भीड़ के लोगों ने जो उस समय उसके साथ थे यह गवाही दी कि उस ने लाजर को कब्र में से बुला कर, मरे हुओं में से जिलाया था।
Joh 12:18 इसी कारण लोग उस से भेंट करने को आए थे क्‍योंकि उन्‍होंने सुना था, कि उस ने यह आश्‍चर्यकर्म दिखाया है।
Joh 12:19 तब फरीसियों ने आपस में कहा, सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता: देखो, संसार उसके पीछे हो चला है।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल ३०-३१
  • लूका १३:२३-३५