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शनिवार, 5 जुलाई 2025

The Holy Communion – 24 - An Assurance of Future Blessings (1) / प्रभु भोज – 24 - भावी आशीषों का आश्वासन (1)

 

प्रभु भोज – 24

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निर्गमन 12:14 (8) - प्रभु की मेज़ - भावी आशीषों का आश्वासन (1)

 

       हम प्रभु भोज के बारे में अध्ययन कर रहे हैं, जिसे प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों के लिए स्थापित किया था, शिष्यों के साथ फसह का भोज खाते समय, फसह के भोज की सामग्री में से लेकर, जिससे कि प्रभु के वापस आने के समय तक उनके पास उसकी यादगार के लिए कुछ हो। समय के साथ जब प्रभु, उसके वचन, उसकी सेवकाई के प्रति लोगों का आरंभिक जोश और लगन फीकी पड़ने लगी, तब शैतान ने बड़े हल्के से, चतुराई और धोखे के साथ, प्रभु के निर्देशों के स्थान पर रीतियाँ, परम्पराएं, अनुष्ठान, और त्यौहार घुसा दिए। ये सभी प्रभु के नाम में तो थे, किंतु न तो उसके वचन में से थे, और न ही प्रभु की इच्छा के अनुसार या प्रभु के वचन अनुसार थे। जो कुछ भी शैतान परमेश्वर के द्वारा दिए गए निर्देशों का स्थान ले लेने के लिए ले कर आया था, वह सभी या तो किसी मनुष्य की इच्छा और कल्पना से था (चाहे वह मनुष्य कोई धार्मिक अगुवा ही रहा हो जो पवित्र शास्त्र का ज्ञानी भी रहा हो), या फिर अन्यजाति-मूर्तिपूजकों और आस-पास के संसार से लिया गया था, जिसे फिर कुछ फेर-बदल के साथ “ईसाई” या “मसीही” स्वरूप दे दिया गया। शैतान ऐसा सरलता से करने पाया क्योंकि लोगों के अन्दर परमेश्वर के वचन की भूख नहीं रही थी, उन्हें व्यक्तिगत बाइबल अध्ययन में, उसका पालन करने में, और उसे अपने जीवन में लागू करने में कोई रुचि नहीं रही थी। अब तो वे बस इसी से संतुष्ट थे कि कोई उन्हें परमेश्वर के नाम में पुल्पिट से कुछ बता दिया जाए, और फिर वे बिना बाइबल से उसकी जाँच-परख किए, बिना उसकी पुष्टि किए उसे स्वीकार कर लें, उसका पालन करने लगें। क्योंकि शैतान और उसकी गलत व्याख्याओं और परमेश्वर के वचन के दुरुपयोग के द्वारा लाई गई बातों को चुनौती देने के लिए शायद ही कोई खड़ा होता था, इसलिए उसकी गलत शिक्षाएं, झूठे सिद्धान्त, और बाइबल की बातों के शैतानी अर्थ, मसीहियत में धर्म और धार्मिक बातों के रूप में बहुत गहराई से जड़ पकड़ चुके हैं, बैठ गए हैं। शैतान ने परमेश्वर के हर निर्देश को भ्रष्ट कर दिया है, बिगाड़ कर बदल दिया है, लेकिन फिर भी लोग उसके द्वारा भ्रष्ट किए हुए वचन का पालन करने के प्रति अधिक प्रतिबद्ध हैं, बजाए परमेश्वर के वचन से उसके सही निर्देशों को सीखने और जानने, तब उसका पालन करने के। लोग अब मनुष्यों की बातों का पालन करने में और मनुष्यों को प्रसन्न करने वाले होने में अधिक विश्वास रखते हैं, न कि परमेश्वर की बातों को जानने और उनका पालन करने में। शैतान ने उनको मनों में बाइबल के विपरीत की इस गलत और शैतानी शिक्षा को बैठा दिया है कि यदि वे परमेश्वर के नाम में कुछ रीतियों और परंपराओं का पालन करते रहेंगे, तो वे परमेश्वर के प्रति सही, उसे स्वीकार्य तथा स्वर्ग में जाने के योग्य भी रहेंगे। अपनी इस धूर्तता के द्वारा वह अनगिनत लोगों को अपने साथ अनंतकाल के लिए नरक में लिए जा रहा है, वे अपने अंधेपन में उसकी बातों का पालन करते हुए अपने अनंत विनाश की ओर बढ़ते जा रहे हैं। जिस प्रकार से शैतान ने परमेश्वर की अन्य बातों को भ्रष्ट किया है, उसने प्रभु भोज को भी भ्रष्ट कर रखा है; और हम इस अध्ययन में बाइबल से, पुराने नियम में दिए गए उसके प्ररूप फसह से संबंधित निर्देशों के द्वारा, प्रभु की मेज़ से संबंधित बातों को देख और सीख रहे हैं।

        प्रभु की मेज़ से संबंधित अपने इस अध्ययन के आरंभ में हमने कहा था कि हम इसका अध्ययन तीन भागों में करेंगे:

 1.   निर्गमन 12:1-14 फसह के भोज के बलिदान का मेमना और उसका खाया जाना

 2.   निर्गमन 12:15-20 फसह के भोज से संबंधित नियम

 3.   निर्गमन 12:40-49 फसह के भोज में भाग लेने वाले

        आज के इस अध्ययन में हम अपने पहले खण्ड, निर्गमन 12:14, के अंत में पहुँच गए हैं। उस छुटकारे के अनुभव में से, जिसमें से होकर वे इस्राएली तब निकले थे, परमेश्वर ने “सदा की विधि” के द्वारा उसे एक यादगार का पर्व, “स्मरण दिलाने वाला” बना दिया, जिसे इस्राएलियों की पीढ़ियों को मनाते रहना था। परमेश्वर ने जब उनसे, मूसा में होकर यह बात कही थी, तब तक छुटकारे की यह घटना घटित नहीं हुई थी, किन्तु परमेश्वर ने अपनी योजनाओं और बातों के अटल और अपरिवर्तनीय होने की पुष्टि के लिए उन से इसे हमेशा मनाए जाने के लिए एक पर्व भी ठहरा दिया। जिस काम को उस समय उन लोगों को जल्दी में करना था, सीधे आग पर पकाए गए मेमने में से खाना था, बिना उसके साथ उसे कुछ स्वादिष्ट बनाने की वस्तु के उपयोग किए, बल्कि अखमीरी रोटी और कड़वे साग-पात के साथ खाना था, इस एक बार की तकलीफ के बाद, उनके लिए तथा उनकी आने वाली सभी पीढ़ियों के लिए परमेश्वर ने उसी को एक उत्सव, एक भोज में परिवर्तित कर दिया, कि उसमें होकर वे परमेश्वर द्वारा उनके लिए लाए गए छुटकारे को स्मरण रखें। और यह उत्सव, यह भोज, केवल उन लोगों या तब विद्यमान पीढ़ी के लिए नहीं था, वरन उनकी सभी भावी पीढ़ियों के लिए था। क्योंकि वे परमेश्वर के चुने हुए लोग थे, उनकी पीढ़ियों का कभी कोई अंत नहीं होना था, इसलिए इस उत्सव, इस भोज का भी कभी कोई अंत नहीं होना था। परमेश्वर के लोगों के द्वारा कुछ घंटों की असुविधा और समस्याओं का झेलना, परमेश्वर ने अपने लोगों और उनकी पीढ़ियों के लिए अनन्तकाल के उत्सव और भोज में बदल दिया।

        किन्तु यहाँ पर, इस पद में, एक बहुत महत्वपूर्ण और मुख्य वाक्यांश है। यद्यपि यह एक यादगार, एक उत्सव, एक भोज होना था, किन्तु इसे वैसा नहीं होना था जैसा संसार और संसार के लोग किसी यादगार, उत्सव, और भोज को मनाते हैं। परमेश्वर ने विशेषतः कहा, “तुम उसको यहोवा के लिये पर्व कर के मानना।” इसे मनुष्य या संसार के अनुसार भोज नहीं होना था, वरन परमेश्वर के आदर और उसकी महिमा के लिए, उसने जो उनके लिए किया था, उसका धन्यवाद करने के लिए मनाया जाना था।

        अगले लेख में हम परमेश्वर द्वारा फसह को स्मरण के लिए एक पर्व स्थापित करने के बारे कुछ और बातों को देखेंगे, और साथ ही देखेंगे कि यह आज हमारे प्रभु भोज में भाग लेने के साथ किस प्रकार से सम्बन्धित है।

        यदि आपने अभी तक प्रभु की शिष्यता को स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी उसके पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। यदि आपने अभी तक नया जन्म, उद्धार नहीं पाया है, प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा नहीं माँगी है, तो अभी आपके पास समय और अवसर है कि यह कर लें। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” परमेश्वर आपके साथ संगति रखने की बहुत लालसा रखता है तथा आपको आशीषित देखना चाहता है, लेकिन इसे सम्भव करना आपका व्यक्तिगत निर्णय है। सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी। क्या आप अभी समय और अवसर होते हुए, इस प्रार्थना को नहीं करेंगे? निर्णय आपका है।


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The Holy Communion – 24

English Translation

Exodus 12:14 (8) - The Lord’s Table - An Assurance of Future Blessings (1)

 

       We have been studying about the Holy Communion, established by the Lord Jesus for His disciples, while eating the Passover feast with His disciples, using the elements of the Passover meal, so that they can have a remembrance of Him till He comes again. Over time, as the initial zeal and fervor for the Lord, His Word, His ministry wore off, Satan subtly, cunningly, and deviously replaced the Lord’s instructions with rituals, traditions, ceremonies, and festivals, all in the name of the Lord God, but not from His Word, nor in the Lord’s will or according to Him. Everything that Satan brought in to replace what the Lord had given, came in either as a product of man’s imagination and desire (even if that man was a religious leader or elder, and well versed in the Scriptures), or was borrowed from pagans and the world around, then suitably modified to give it a “Christian” appearance. Satan could easily do this since people had lost their appetite for God’s Word, for personally studying it, obeying it, and applying it in their lives. Instead, they had become content and satisfied with other men telling it to them from the pulpit, and their following whatever was told to them without cross-checking and verifying it from the Bible. Since there was hardly anyone left to challenge Satan and his devious misinterpretations and misuse of God’s Word, wrong teachings, false doctrines, and satanic interpretations have become rampant and deeply entrenched in Christianity, in the garb of religion and religiosity. Satan has corrupted and altered every instruction of God, and yet people are more committed about following his aberrations of God’s instructions and Word, than learning the truth from God and following it; people prefer to be followers of men and men-pleasers, than follow God, and be God-pleasers. Satan has embedded into them his unBiblical and devious ploy, that so long as they keep fulfilling certain rituals and traditions in the name of God, they will be okay with God, be acceptable to Him, and worthy of going to heaven. Through this ploy, he is leading many to be in hell with him for eternity, as they blindly follow him to their eternal destruction. As Satan has corrupted other things, he has also corrupted the Holy Communion, and we have been looking at Biblical teachings about it, from its Old Testament antecedent, the Passover.

        At the beginning of our study of the Lord’s Table, we had said that we will be looking it up in three sections:

 Exodus 12:1-14 The Lamb of the Passover meal and it’s being eaten

 Exodus 12:15-20 The Ordinance of the Passover meal

 Exodus 12:40-49 The Partakers of the Passover meal

        In today’s study we have come to the end of the first section, to Exodus 12:14. From the deliverance event that the then Israelites experienced, God through “an everlasting ordinance” turned it into a memorial feast, to be celebrated by the Israelites “throughout your generations.” When God said this to them, through Moses, the event had not yet happened, but God, as confirmation of His eternal, irrevocable plans, has already told them to use it as an eternal memorial “feast” - what that generation, those set of people, at that time had to do hurriedly, had to eat a lamb directly roasted on fire without any savory additions or condiments, with unleavened bread and bitter-herbs, after this once, they and their subsequent generations, will celebrate as a “feast”, as a memorial to celebrate their deliverance brought about by God. This celebration, this memorial was not just for the generation of the people of that time, but was to be for all their generations. Since, as God’s chosen people, they would never have an end to their generations, and this memorial feast too would never have an end. A few hours of facing troubling and problematic experiences suffered by His people, were turned by God into an everlasting memorial and feast for all times, for His people.

        But there is a very important and key phrase here, in this verse. While this was to be a memorial, a feast, but it was not to be a feast according to the way the world celebrates a memorial. God expressly says, “you shall keep it as a feast to the Lord.” It was not to be a feast according to man and the ways of the world, but for the honor and glory of God, a way of thanking Him for what He has done for them.

        In the next article we will consider some more about God making the Passover a memorial feast, and how this relates to its observance as the Holy Communion for us today.

        If you have not yet accepted the discipleship of the Lord Jesus, then take a decision in its favor now to secure your eternal life and heavenly blessings. The Lord's security and blessings are present where there is obedience of the Lord, where His Word is honored and followed. If you are still not Born Again, have not obtained salvation, or have not asked the Lord Jesus for forgiveness for your sins, then you have the time and opportunity to do so right now. Ask the Lord Jesus to forgive your sins, and voluntarily and sincerely surrender yourselves into His hands - this is the only way to salvation and heavenly life. All you have to do is say a short prayer, voluntarily and with a sincere heart, with heartfelt repentance for your sins, and a fully submissive attitude. You can do this in this manner, “Lord Jesus, I confess that I have disobeyed You, and have knowingly or unknowingly, in mind, in thought, in attitude, and in deeds, committed sins. I believe that you have fully borne the punishment of my sins by your sacrifice on the cross, and have paid the full price of those sins for all eternity. Please forgive my sins, change my heart and mind towards you, and make me your disciple, take me with you." God longs for your company and wants to see you blessed, but to make this possible, is your personal decision. One prayer said with a sincere and surrendered heart will turn your present and future, your life here on earth and in the next world, forever and make you heavenly and blessed. Will you not say this prayer now, while you have the time and opportunity to do so? The decision is yours.

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सोमवार, 19 दिसंबर 2022

प्रभु भोज – पुराने नियम का आधार (19) / The Holy Communion - The OT Foundation (19)

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यादगार के उत्सव - फसह तथा प्रभु की मेज़


इस्राएलियों के लिए यादगार का फसह का उत्सव, प्रति वर्ष, सात दिन तक मनाए जाने के लिए निर्धारित किया गया था (निर्गमन 12:15); और “वह दिन तुम्हारी पीढ़ियों में सदा की विधि जान कर माना जाए” (निर्गमन 12:17); अर्थात जब तक कि इस्राएल का अस्तित्व रहे। नए नियम के नया जन्म पाए हुए मसीही विश्वासी के लिए, फसह का स्थान प्रभु-भोज या प्रभु की मेज़ ने ले लिया है। जैसा कि हम पहले भी देख चुके हैं, प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को आज्ञा दी है कि वे उसकी मेज़ में भाग कुछ निर्धारित दिनों के लिए वार्षिक रीति से नहीं किन्तु निरंतर तब तक लेते रहें जब तक कि वह और परमेश्वर का राज्य न आ जाएं (लूका 22:18; 1 कुरिन्थियों 11:26)। पहला फसह मनाने वाले इस्राएलियों और उनके बाद की पीढ़ियों पर जो बात प्रगट नहीं थी, वह थी कि परमेश्वर की योजना में, अन्ततः यहूदियों और अन्य-जातियों ने समान रीति से ही उद्धार पाना था, प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाने के द्वारा; और इस प्रकार से सब ने मिलकर एक लोग, परमेश्वर का एक घराना, बन जाना था (इफिसियों 2:14-20; रोमियों 9:27; 11:26)। इसलिए, जो यहूदियों के लिए वार्षिक सात दिन का उत्सव था, उसे उनके प्रभु यीशु में विश्वास लाने के द्वारा उद्धार पाने के साथ, प्रभु भोज या प्रभु की मेज़ के साथ मिल कर एक हो जाना था; एक बार फिर, प्ररूप, फसह, अन्ततः प्रभु की मेज़ हो गया।


परमेश्वर के वचन में संख्या सात पूर्णता और सिद्धता को दिखाती है। सात-दिन का फसह का उत्सव, इस बात का सूचक था कि इसे तब तक मनाना है जब तक कि फसह का अभिप्राय पूरा, अर्थात इस्राएल का छुटकारा पूर्ण नहीं हो जाता है; और यह तब होता है जब वे मसीहा, प्रभु यीशु मसीह को स्वीकार कर के उसमें विश्वास कर लेते हैं, जैसे कि उनके लिए भविष्यवाणी की गई है (रोमियों 11:26)। जैसे-जैसे वे मसीह की ओर मुड़ते जाते हैं, अभी जैसा हो रहा है, व्यक्तिगत रीति से, और बाद में पूरे राष्ट्र के रूप में, यहूदी विश्वासियों के लिए फसह का स्थान प्रभु-भोज लेता चला जाएगा। लिखा है कि उत्सव का आरंभ और अंत एक पवित्र सभा के आयोजन के साथ होना था (पद 16)। प्रभु यीशु मसीह ने प्रभु की मेज़ का आरंभ अपने शिष्यों को एकत्रित करने के साथ किया था; और इसका समापन परमेश्वर के राज्य में, जहाँ परमेश्वर के सभी लोग एकत्रित होंगे, वहाँ पर आयोजित भोज के साथ होगा (लूका 22:15-16)।


उत्सव के आरंभ के पहले दिन, इस्राएलियों को अपने घर में से खमीर के सभी अंश साफ कर देने थे। उन सात दिनों तक उन्हें अखमीरी रोटी ही खानी थी। परमेश्वर इस बात के प्रति कि इस्राएलियों में से खमीर बिल्कुल दूर रहे, कितना गंभीर था, इसका अंदाजा दो बातों से लगाया जा सकता है। पहली, जैसा कि पद 15 और 19 में लिखा है, यदि कोई भी जन खमीर खाए, तो उसे नाश किया जाना था; यह परमेश्वर की दृष्टि में इस आज्ञा की गंभीरता का सूचक है। दूसरी बात, पद 15 से 20, छः पदों में, केवल पद 16 को छोड़, अन्य सभी पाँच पदों में इस बात पर जोर दिया गया है कि खमीर न हो, और अखमीरी रोटी ही खाई जाए। छः पदों के खण्ड में से पाँच पदों में परमेश्वर द्वारा बारंबार इस एक बात को दोहराना उसकी दृष्टि में इसके महत्व और गंभीरता को दिखाता है। उन्हें मिस्र में से छुड़ाने के समय से ही परमेश्वर ने यही चाहा है कि इस्राएली केवल उसी के प्रति निष्ठावान होकर रहें (निर्गमन 19:3-6)। परमेश्वर के लोग भी होना, तथा संसार, सांसारिकता, और पाप के साथ मिलकर रहना या समझौते का जीवन बिताना, कभी साथ नहीं चल सकते हैं; परमेश्वर इसे सहन नहीं करता है (याकूब 4:4; 1 यूहन्ना 2:15-17)। मसीही विश्वासियों को भी अपने जीवन से “खमीर” दूर करके ही प्रभु के उत्सव में सम्मिलित होने के लिए निर्देश दिया गया है (1 कुरिन्थियों 5:7-8)।

 

हम पहले देख चुके हैं कि परमेश्वर के वचन में, खमीर पाप का सूचक है। इसका यह तात्पर्य हुआ कि परमेश्वर के लोग होने का अर्थ है उसकी आज्ञाकारिता में जीना, तथा पाप और सांसारिकता से दूर रहना; जानते-बूझते हुए पाप और सांसारिकता के साथ समझौता नहीं करना, उसमें भाग नहीं लेना। पौलुस में होकर पवित्र आत्मा ने मसीही विश्वासियों के लिए लिखवाया है “तुम प्रभु के कटोरे, और दुष्टात्माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते! तुम प्रभु की मेज और दुष्टात्माओं की मेज दोनों के साझी नहीं हो सकते” (1 कुरिन्थियों 10:21)। इसका यह अर्थ अथवा अभिप्राय नहीं है कि मसीही विश्वासी कभी पाप नहीं करता हमेशा निष्पाप जीवन जीता है। वरन, इसका अर्थ है कि जब कभी भी मसीही विश्वासी से पाप होता है, जो कि अवश्य ही होगा, तो जैसे ही वह अपने पाप को मान लेगा, उसके लिए क्षमा मांगेगा, परमेश्वर उसे क्षमा कर के फिर से बहाल कर देगा (1 यूहन्ना 1:7-10)। एक मसीही विश्वासी पाप में बना नहीं रह सकता है (1 यूहन्ना 3:9)। दूसरे शब्दों में एक मसीही विश्वासी को प्रभु के साथ संगति में बने रहना है, अपने आप को जाँचते रहना है कि कहीं कोई “खमीर” या पाप तो उसके जीवन में नहीं घुस आया है; और यदि या गया है, तो उसे प्रभु के सामने लाकर, प्रभु द्वारा उसे साफ करवा लेना है। प्रभु भोज में भाग लेने का अर्थ है अपने जीवन को जाँचते रहना, आँकलन करते रहना, और प्रभु के प्रति समर्पित बने रहना।


फसह में भाग लेने का परमेश्वर का निर्देश, और अपने शिष्यों से प्रभु की मेज़ में भाग लेते रहने का प्रभु यीशु का निर्देश, दोनों एक ही बात को दिखाते हैं - परमेश्वर के लोगों को परमेश्वर का आज्ञाकारी बने रहना है, उसके कार्य में लगे रहना है, और पाप तथा सांसारिकता से अपने आप को बचाकर रखना है। एक बार फिर यह, जैसा कि हम पहले देख चुके हैं, दिखाता है कि प्रभु भोज में भाग लेना एक धार्मिक रीति या औपचारिकता नहीं है, और न ही यह भाग लेने वालों के लिए परमेश्वर को स्वीकार्य तथा स्वर्ग जाने के योग्य होने के लिए है। किन्तु यह उनके लिए है जिन्होंने स्वेच्छा से प्रभु के योग्य जीवन बिताने उसकी आज्ञाकारिता में चलने का निर्णय लिया है, और इसके लिए कीमत चुकाने के लिए भी तैयार हैं। यदि आप एक मसीही विश्वासी हैं, और प्रभु की मेज़ में भाग लेते रहे हैं, तो कृपया अपने जीवन को जाँच कर देख लें कि आप वास्तव में पापों से छुड़ाए गए हैं तथा आप ने अपना जीवन प्रभु की आज्ञाकारिता में जीने के लिए उस को समर्पित किया है। आपके लिए यह अनिवार्य है कि आप परमेश्वर के वचन की सही शिक्षाओं को जानने के द्वारा एक परिपक्व विश्वासी बनें, तथा सभी शिक्षाओं को वचन की कसौटी पर परखने, और बेरिया के विश्वासियों के समान, लोगों की बातों को पहले वचन से जाँचने और उनकी सत्यता को निश्चित करने के बाद ही उनको स्वीकार करने और मानने वाले बनें (प्रेरितों 17:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)। अन्यथा शैतान द्वारा छोड़े हुए झूठे प्रेरित और भविष्यद्वक्ता मसीह के सेवक बन कर (2 कुरिन्थियों 11:13-15) अपनी ठग विद्या और चतुराई से आपको प्रभु के लिए अप्रभावी कर देंगे और आप के मसीही जीवन एवं आशीषों का नाश कर देंगे।

  

यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी। 

 

एक साल में बाइबल पढ़ें:

  • योना 1-4          

  • प्रकाशितवाक्य 10     


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English Translation



The Memorial Feasts - The Passover & The Lord’s Table 

  

The memorial feast of the Passover, for the Israelites, had been ordained for seven days (Exodus 12:15), every year; and they were to “observe this day throughout your generations as an everlasting ordinance” (verse 17), i.e., as long as Israel existed. For the New Testament Born-Again Christian Believers, instead of the Passover, it is the Holy Communion. As we have seen before, the Lord Jesus has commanded His disciples to keep observing it, or partaking it, not as an annual event for a certain number of days, but till He and God’s Kingdom come (Luke 22:18; 1 Corinthians 11:26). What was not apparent to the Israelites at the time of the first Passover being celebrated, and to their subsequent generations, was, that in God’s plans, the Jews and the gentiles were eventually to be saved in like manner, through faith in the Lord Jesus, and together form one people, the one household of God (Ephesians 2:14-20; Romans 9:27; 11:26). So what was an annual seven-day feast for the Jews, was eventually to turn into and merge with the Holy Communion or the Lord’s Table, as they come to salvation by faith in the Lord Jesus; once again, the antecedent Passover, becomes the final Lord’s Table.

 

Seven, in God’s Word is a number denoting perfection and completeness. The seven-day feast of the Passover, denotes celebrating it till the work of the Passover, the deliverance of Israel is completed, which happens when they accept and believe in the Messiah, the Lord Jesus Christ, as has been prophesied for them (Romans 11:26). As they turn to Christ, individually, as they are now, and at a later time as a nation, the Passover gets replaced by the Holy Communion for the Jewish Believers. The feast was to begin and end with a Holy Convocation, i.e., gathering together (verse 16). The Lord Jesus started this feast by gathering together His disciples and initiating the Communion from the Passover; and it will culminate with its being fulfilled in the Kingdom of God, when all of God’s people will be gathered and join in eating it (Luke 22:15-16).


On the first day of starting the feast, the Israelites had to remove all traces of leaven from their houses. Throughout the seven days, they were to eat unleavened bread. How serious God was about this ordinance of keeping leaven away from the Israelites is evident from two things: Firstly, as mentioned in verses 15 and 19, anyone who ate any leaven, was to be “cut-off” from the congregation of Israel; i.e., removed, or eliminated from Israel, whether by death or ex-communication has not been specified, and the original Hebrew word can mean both. In either case it was quite a serious punishment for anyone, and this signified the seriousness of the offence in God’s eyes. Secondly, in the six verses, from 15 to 20, except for verse 16, the other five verses emphasize this eating of bread without leaven or eating unleavened bread. For God to repeatedly emphasize and repeat this five times in a span of six verses shows how serious He was about it. Since delivering them out of Egypt, God has desired exclusive allegiance from the Jews (Exodus 19:3-6). Being God’s people, and living with the world, worldliness, and sin can never go together; God does not tolerate it (James 4:4; 1 John 2:15-17). The Christian Believers to have been instructed to remove all “leaven” and then participate in the Lord’s Festival (1 Corinthians 5:7-8).


We have seen earlier that in God’s Word, leaven is a sign of sin. This signified that being the people of God, meant living in obedience to God, and required staying away from all sin and worldliness; not to deliberately engage and partake in sin and worldliness. Through Paul, the Holy Spirit had it written to the Christian Believers “You cannot drink the cup of the Lord and the cup of demons; you cannot partake of the Lord's table and of the table of demons” (1 Corinthians 10:21). This does not imply or mean that a Christian Believer never sins and always lives a sinless life; rather, it means that as and when a Believer does sin, which will happen, as soon as he confesses his sin and asks for God’s forgiveness, God will forgive and restore him (1 John 1:7-10). A Christian Believer cannot continue or remain in sin (1 John 3:9; see NIV for a clearer translation). In other words, the Christian Believer has to remain in fellowship with the Lord, keep examining himself to see if any “leaven” or sin has come into his life; if it has, then to take it to the Lord and to get it cleaned out by the Lord. Celebrating the Holy Communion demands a life of self-evaluation and surrender to the Lord God.


 God’s ordinance for participating in the Passover feast, and the Lord Jesus’s commandment to His disciples to partake of His Table, both signify the same thing - God’s people to be obedient to God, be occupied with His work, without getting tarnished by sin and worldliness. Once again this, as we have seen earlier, shows that participating in the Holy Communion is not a religious ritual or formality to be carried out perfunctorily, nor is it meant to make the participants the people of God and worthy of going to heaven. But it is for those who willingly have chosen to be committed disciples of the Lord, to live in obedience to His Word, and are even willing to pay a price for doing so. If you are a Christian Believer, and have been participating in the Lord’s Table, then please examine your life and make sure that you are actually a disciple of the Lord, i.e., are redeemed from your sins, have submitted and surrendered your life to the Lord Jesus to live in obedience to Him and His Word. You should also always, like the Berean Believers, first check and test all teachings that you receive from the Word of God, and only after ascertaining the truth and veracity of the teachings brought to you by men, should you accept and obey them (Acts 17:11; 1 Thessalonians 5:21). If you do not do this, the false apostles and prophets sent by Satan as ministers of Christ (2 Corinthians 11:13-15), will by their trickery, cunningness, and craftiness render you ineffective for the Lord and cause severe damage to your Christian life and your rewards.


If you have not yet accepted the discipleship of the Lord Jesus, then to ensure your eternal life and heavenly rewards, take a decision in favor of the Lord Jesus now. Wherever there is surrender and obedience towards the Lord Jesus, the Lord’s blessings and safety are also there. If you are still not Born Again, have not obtained salvation, or have not asked the Lord Jesus for forgiveness for your sins, then you have the opportunity to do so right now. A short prayer said voluntarily with a sincere heart, with heartfelt repentance for your sins, and a fully submissive attitude, “Lord Jesus, I confess that I have disobeyed You, and have knowingly or unknowingly, in mind, in thought, in attitude, and in deeds, committed sins. I believe that you have fully borne the punishment of my sins by your sacrifice on the cross, and have paid the full price of those sins for all eternity. Please forgive my sins, change my heart and mind towards you, and make me your disciple, take me with you." God longs for your company and wants to see you blessed, but to make this possible, is your personal decision. Will you not say this prayer now, while you have the time and opportunity to do so - the decision is yours. 


Through the Bible in a Year: 

  • Jonah 1-4

  • Revelation 10


 

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शनिवार, 17 जुलाई 2021

विजय

 

          जब 2016 में शिकागो कबस की बेसबॉल टीम ने एक शताब्दी से भी अधिक में पहली बार विश्व सीरीज़ जीती, तो कुछ लोगों का कहना है कि उसके उपलक्ष्य में निकाले जुलूस को देखने और उस चैम्पियनशिप का जश्न मनाने के लिए पचास लाख से भी अधिक लोग जुलूस के मार्ग के किनारे खड़े हुए थे।

          विजय के जुलूस कोई आधुनिक आविष्कार नहीं हैं। एक प्रसिद्ध प्राचीन जुलूस रोमी विजय का जुलूस हुआ करता था, जिसमें विजयी सेनापति अपनी सेना और युद्ध-बंदियों के जुलूस को भीड़ से भरे मार्गों से होकर लिए चलते थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में कुछ ऐसे ही जुलूस का ध्यान शायद पौलुस के मन में भी था जब उसने कुरिन्थुस के चर्च को लिखी अपनी पत्री में परमेश्वर का धन्यवाद व्यक्त किया, मसीही विश्वासियों को मसीह के जय के उत्सव में लिए फिरने के लिए (2 कुरिन्थियों 2:14)। मुझे यह बहुत अचंभित तथा आकर्षक लगता है कि इस चित्रण में मसीही विश्वासियों को जुलूस के बन्दियों के समान दिखाया गया है। लेकिन मसीही विश्वासी होने के नाते, हम बंदी नहीं हैं, वरन स्वेच्छा से हमारे जयवंत और पुनर्जीवित हो उठे प्रभु को समर्पण करने वाले उसके अनुयायी हैं, जो उसके पीछे और उसके कहे के अनुसार, उसके बताए मार्ग पर चल रहे हैं। हम मसीही जश्न मनाते हैं कि मसीह की विजय के कारण, हम उसके साथ उसके उस राज्य के वारिस हैं जो वह बना रहा है, और अधोलोक के फाटक भी उस राज्य पर कभी प्रबल नहीं होंगे (मत्ती 16:18)।

          जब हम क्रूस पर मसीह की विजय के बारे में, और उसके कारण मसीही विश्वासियों को मिलने वाली स्वतंत्रता के बारे में बात करते हैं, तो हम उसके ज्ञान के सुगन्ध को हर जगह फैलाते हैं (2 कुरिन्थियों 2:14)। और लोगों को यह गन्‍ध उद्धार की मनोहर सुगन्ध लगे, या अपनी पराजय की गन्‍ध लगे, यह अदृश्य शक्तिशाली गन्‍ध हर स्थान पर विद्यमान है।

          जब हम मसीह का अनुसरण करते हैं, तो हम उसके पुनरुत्थान की विजय को भी घोषित करते हैं। यही विजय संसार को उद्धार उपलब्ध करवाती है। - लिसा सामरा

 

प्रभु यीशु हमारा विजयी सम्राट है।


और मैं[यीशु] भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। - मत्ती 16:18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:14-17

2 कुरिन्थियों 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।

2 कुरिन्थियों 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्ध हैं।

2 कुरिन्थियों 2:16 कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध, और इन बातों के योग्य कौन है?

2 कुरिन्थियों 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

दिन

 

          विलियम डीन हौवेल्स की कहानी Christmas Every Day में एक छोटी लड़की की इच्छा पूरी हो जाती है और पूरे एक वर्ष के प्रत्येक दिन के लिए क्रिसमस मनाया जाना स्वीकार कर लिया जाता है। तीसरे ही दिन तक उस त्यौहार का उल्लास फीका पड़ने लगता है। कुछ ही समय के बाद लोग मिठाइयों से परेशान हो जाते हैं। पारंपरिक रीति से क्रिसमस पर पकाया और खाया जाने वाला टर्की पक्षी की उपलब्धता समाप्त होने लगती है, उसका मिलना दुर्लभ हो जाता है, और जो थोड़े से बचे हैं वे बहुत महंगे दामों पर बिकने लगते हैं। एक-दूसरे को दिए जाने वाले उपहार सहर्ष स्वीकार नहीं किए जाते हैं क्योंकि वे यहाँ-वहाँ, सभी स्थानों पर एकत्रित होते चले जा रहे हैं। लोग अब खिसियाने लगे हैं, और एक-दूसरे के साथ चिड़चिड़ाहट के साथ व्यवहार करने लगते हैं।

          शुक्र है कि हौवेल्स की कहानी केवल एक व्यंग्यात्मक कथा है। लेकिन यह कितनी अद्भुत आशीष है कि क्रिसमस मनाए जाने का कारण, प्रभु यीशु मसीह, परमेश्वर के वचन बाइबल में सभी स्थानों पर होने के बाद भी हमें कभी भी उबाता नहीं है।

          प्रभु यीशु के स्वर्गारोहण के पश्चात, प्रेरित पतरस ने येरुशलम के मंदिर में एकत्रित लोगों की भीड़ से कहा कि प्रभु यीशु ही वह भविष्यद्वक्ता हैं जिसके बारे में मूसा ने कहा था “प्रभु परमेश्वर तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिये मुझ सा एक भविष्यद्वक्ता उठाएगा” (प्रेरितों 3:22; व्यवस्थाविवरण 18:18)। परमेश्वर द्वारा अब्राहम से की गई प्रतिज्ञा, “तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे घराने आशीष पाएंगे” प्रभु यीशु मसीह ही के लिए थी (प्रेरितों 3:25; उत्पत्ति 22:18)। पतरस ने उन से कहा कि मसीहा के आगमन के विषय “शमूएल से ले कर उसके बाद वालों तक जितने भविष्यद्वक्ताओं ने बातें की हैं उन सब ने इन दिनों का सन्देश दिया है” (प्रेरितों 3:24)।

          क्रिसमस के त्यौहार के उत्सव और उल्लास के बाद भी हम प्रभु यीशु मसीह के इस संसार में आने के कारण – संसार के सभी लोगों को सेंत-मेंत में पापों की क्षमा और उद्धार देने की खुशी को जीवित बनाए रख सकते हैं। बाइबल के हर स्थान में प्रभु यीशु मसीह को देखने के द्वारा हम इस बात की सराहना कर सकते हैं कि क्रिसमस, अर्थात प्रभु यीशु का जगत के उद्धार के लिए संसार में आने का उत्सव केवल एक दिन का ही आनन्द और उत्सव नहीं है। - टिम गुस्ताफसन

 

इस वर्ष क्रिसमस की सजावट को हटाने के बाद भी, उसके आनन्द को सदा बनाए रखें।


 तब उस [यीशु] ने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ कर के सारे पवित्र शास्त्रों में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया। - लूका 24:27

बाइबल पाठ: प्रेरितों 3:17-26

प्रेरितों के काम 3:17 और अब हे भाइयों, मैं जानता हूं कि यह काम तुम ने अज्ञानता से किया, और वैसा ही तुम्हारे सरदारों ने भी किया।

प्रेरितों के काम 3:18 परन्तु जिन बातों को परमेश्वर ने सब भविष्यद्वक्ताओं के मुख से पहिले ही बताया था, कि उसका मसीह दु:ख उठाएगा; उन्हें उसने इस रीति से पूरी किया।

प्रेरितों के काम 3:19 इसलिये, मन फिराओ और लौट आओ कि तुम्हारे पाप मिटाए जाएं, जिस से प्रभु के सम्मुख से विश्रान्ति के दिन आएं।

प्रेरितों के काम 3:20 और वह उस मसीह यीशु को भेजे जो तुम्हारे लिये पहिले ही से ठहराया गया है।

प्रेरितों के काम 3:21 अवश्य है कि वह स्वर्ग में उस समय तक रहे जब तक कि वह सब बातों का सुधार न कर ले जिस की चर्चा परमेश्वर ने अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के मुख से की है, जो जगत की उत्पत्ति से होते आए हैं।

प्रेरितों के काम 3:22 जैसा कि मूसा ने कहा, प्रभु परमेश्वर तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिये मुझ सा एक भविष्यद्वक्ता उठाएगा, जो कुछ वह तुम से कहे, उस की सुनना।

प्रेरितों के काम 3:23 परन्तु प्रत्येक मनुष्य जो उस भविष्यद्वक्ता की न सुने, लोगों में से नाश किया जाएगा।

प्रेरितों के काम 3:24 और शमूएल से ले कर उसके बाद वालों तक जितने भविष्यद्वक्ताओं ने बातें की हैं उन सब ने इन दिनों का सन्देश दिया है।

प्रेरितों के काम 3:25 तुम भविष्यद्वक्ताओं की सन्तान और उस वाचा के भागी हो, जो परमेश्वर ने तुम्हारे बाप दादों से बान्‍धी, जब उसने इब्राहीम से कहा, कि तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे घराने आशीष पाएंगे।

प्रेरितों के काम 3:26 परमेश्वर ने अपने सेवक को उठा कर पहिले तुम्हारे पास भेजा, कि तुम में से हर एक को उस की बुराइयों से फेरकर आशीष दे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • हाग्गै 1-2
  • प्रकाशितवाक्य 17

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

प्रश्न

 

         कैलेंडर में दिसंबर माह आरंभ होने से बहुत पहले ही हमारे शहर में क्रिसमस का उत्साह दिखाई देने लगता है। एक चिकित्सा दफतर अपने परिसर के पेड़ों और झाड़ियों के चारों ओर रंग-बिरंगी लाईट लगा देता है जिससे रात में वहाँ अद्भुत रंगीन रौशनी रहती है। एक अन्य व्यवसाय केंद्र अपने भवन को एक विशाल उपहार के समान सजा देता है। जिस ओर भी मुड़ो क्रिसमस – या कम से कम मौसमी व्यापार के उत्सव का उत्साह का कोई न कोई प्रमाण दिखाई देता है।

         कुछ लोगों को इस उत्सव के ये भव्य प्रदर्शन बहुत पसंद आते हैं। कुछ इनके प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। परन्तु महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि अन्य लोग क्रिसमस किस प्रकार से मनाते हैं, वरन हम में से प्रत्येक को विचार करना चाहिए कि हमारे लिए इस उत्सव का क्या अर्थ है?

         परमेश्वर के वचन बाइबल में, अपने जन्म के लगभग तीस वर्ष के पश्चात, प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से पूछा, “लोग मनुष्य के पुत्र को क्या कहते हैं?” (मत्ती 16:13)। उन्होंने वे प्रतिक्रियाएं बताईं जो औरों ने दी थीं: यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, एलिय्याह, या कोई अन्य भविष्यद्वक्ता। फिर प्रभु यीशु ने इस प्रश्न को उन शिष्यों के लिए और व्यक्तिगत कर दिया, और पूछा: “परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?” (पद 15)। पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है” (पद 16)।

         अनेकों, बिना इस बात पर विचार करे कि वह शिशु वास्तव में कौन है, क्रिसमस का उत्सव मनाएंगे। जब भी हमारा उन लोगों के साथ इस विषय पर वार्तालाप हो, हम उन्हें क्रिसमस से सम्बन्धित कुछ विशिष्ट प्रश्नों पर विचार करने में सहायता कर सकते हैं: क्या क्रिसमस चरनी में जन्म लेने वाले एक शिशु की केवल एक मर्मस्पर्शी कहानी मात्र है? या,  हमारा सृष्टिकर्ता वास्तव में अपनी सृष्टि में हमारे स्वरूप में आया और हमारे समान एक मनुष्य बनकर रहा? उसके स्वर्ग का वैभव छोड़कर पृथ्वी पर आने, रहने, और क्रूस पर मारे जाने, फिर तीसरे दिन जी उठने का क्या अभिप्राय और महत्व है? – टिम गुस्ताफसन

 

आपको क्या लगता है कि प्रभु यीशु कौन है?


पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। - 1 पतरस 3:15

बाइबल पाठ: मत्ती 16:13-21

मत्ती 16:13 यीशु कैसरिया फिलिप्पी के देश में आकर अपने चेलों से पूछने लगा, कि लोग मनुष्य के पुत्र को क्या कहते हैं?

मत्ती 16:14 उन्होंने कहा, कितने तो यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं और कितने एलिय्याह, और कितने यिर्मयाह या भविष्यद्वक्ताओं में से कोई एक कहते हैं।

मत्ती 16:15 उसने उन से कहा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?

मत्ती 16:16 शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।

मत्ती 16:17 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि हे शमौन योना के पुत्र, तू धन्य है; क्योंकि मांस और लहू ने नहीं, परन्तु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है।

मत्ती 16:18 और मैं भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

मत्ती 16:19 मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा: और जो कुछ तू पृथ्वी पर बान्धेगा, वह स्वर्ग में बन्‍धेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा।

मत्ती 16:20 तब उसने चेलों को चिताया, कि किसी से न कहना! कि मैं मसीह हूं।

मत्ती 16:21 उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा, कि मुझे अवश्य है, कि यरूशलेम को जाऊं, और पुरनियों और महायाजकों और शास्त्रियों के हाथ से बहुत दुख उठाऊं; और मार डाला जाऊं; और तीसरे दिन जी उठूं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 47-48
  • 1 यूहन्ना 3

बुधवार, 9 सितंबर 2020

सुगन्ध

 

         गर्म और धूल भरे वातावरण में बॉब बस की यात्रा करके अपने घर से दूर एक शहर को गया था। वह दिन भर की लम्बी यात्रा से बहुत थक गया था, और धन्यवादी थी कि वह उस इलाके में रहने वाले कुछ अपने मित्रों के मित्रों के साथ भोजन करने पाएगा। उन लोगों ने बॉब का स्वागत किया, और तुरंत ही उसे उन लोगों से मिलकर एक शान्ति और आराम का अनुभव हुआ। उसे लगा कि मानो वह घर में है, सुरक्षित है, आराम से है, और वे लोग उसकी कद्र करते हैं।

         बाद में इस बात पर विचार करते समय कि उसे उस अजनबी स्थान और लोगों के बीच तुरंत ही इतनी शान्ति कैसे मिल गई, बॉब को परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी गई उसकी दूसरी पत्री में उत्तर मिल गया। उस पत्री में पौलुस ने मसीह के अनुयायियों में “मसीह की सुगन्ध” होने की बात कही, और तुरंत ही बॉब ने अपने आप से कहा, “हाँ! यही बात थी” उस दिन उसे अपने मेजबानों से मसीह की सुगन्ध आई थी, और इससे उसके मन को शान्ति मिली थी।

         पौलुस जब लिखता है कि परमेश्वर अपने लोगों को मसीह में “जय के उत्सव” में लिए फिरता है  और उनमें होकर अपने ज्ञान की सुगन्ध फैलाता है, तो वह उस समय की एक प्रथा को अपनी लिखी बात का आधार बना रहा था। जब सेना विजयी होकर युद्ध से लौटती थी, तो उनके विजय-उत्सव का जलूस जिन मार्गों से होकर जाता था, वहाँ सुगन्धित पदार्थ जलाए जाते थे। उस विजयी सेना के समर्थक उस सुगन्ध से आनन्दित होते थे। पौलुस कहता है कि इसी प्रकार से परमेश्वर के लोग अपने साथ एक सुगन्ध लिए चलते हैं जिसकी अनुभूति अन्य मसीही विश्वासियों को होती है, उन्हें आनन्दित करती है। यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे हम अपने से उत्पन्न करते हैं; परन्तु यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान की जाती है जब वह हमें उसके ज्ञान को औरों में फैलाने के लिए प्रयोग करता है।

         बॉब मेरे पिता हैं, और वह दूर की यात्रा चालीस से भी अधिक वर्ष पहले की गई थी, परन्तु वे आज तक उसे भूले नहीं हैं। वे आज भी उन लोगों की यह कहानी सुनाते हैं – मसीह की सुगन्ध वाले लोगों की। - एमी पीटरसन

 

आपके लिए, कौन मसीह की सुगन्ध को फैलाने वाला है?


और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। - इफिसियों 5:2

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 2:14-17

2 कुरिन्थियों 2:14 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।

2 कुरिन्थियों 2:15 क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्ध हैं।

2 कुरिन्थियों 2:16 कितनों के लिये तो मरने के निमित्त मृत्यु की गन्‍ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध, और इन बातों के योग्य कौन है?

2 कुरिन्थियों 2:17 क्योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्तु मन की सच्चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2

मंगलवार, 20 अगस्त 2019

उपस्थित



      एक वृद्ध सेवानिवृत सैनिक के अंतिम संस्कार के समय, पादरी विचार करने लगा कि वह मृत अब कहाँ होगा। फिर, लोगों को यह बताने की बजाए कि वे परमेश्वर को कैसे जान सकते हैं, वह उन काल्पनिक बातों के बारे में बोलने लगा जो बाइबल में पाई भी नहीं जाती हैं। और मैं सोचने लगा कि आशा कहाँ है?

      अन्त में उसने हम सबसे एक अंतिम स्तुति-गीत गाने के लिए कहा। हम सब “प्रभु महान” गाने के लिए खड़े हुए, और लोग दिल की गहराई से परमेश्वर की स्तुति करने लगे। कुछ ही पल में कमरे का वातावरण बदल गया। अचानक ही उस स्तुति-गीत के तीसरे पद में आने पर मैं भावुक हो उठा और मेरी आवाज़ रुंध गई। उस तीसरे पद में लिखा है:
जब सोचता हूँ कि पिता ने अपना पुत्र, मरने भेजा है वर्णन से अपार,
कि क्रूस पर उसने मेरे पाप सब लेकर, रक्त बहाया कि मेरा हो उद्धार।
     
      उस महान गीत को गाने के समय तक मैं सोच रहा था कि उस अंतिम संस्कार में क्या परमेश्वर उपस्थित होगा? वास्तव में, वह हमें छोड़ कर कभी जाता ही नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में एस्तेर की पुस्तक को पढ़ने पर हमें इस तथ्य की एक पुष्टि मिलती है। यहूदी लोग अपने देश से निर्वासित थे, और उनके निर्वासन के स्थान पर शक्तिशाली लोग उन्हें मार डालना चाहते थे। किन्तु उनके उस अति-कठिन समय में भी, एक अधर्मी राजा ने  बंधुआई में रहने वाले यहूदियों को यह अधिकार दिया कि वे अपने मारने वालों के विरुद्ध बचाव में हाथ उठा सकें (एस्तेर 8:11-13)। इसके उपरान्त यहूदियों ने सफलता पूर्वक अपना बचाव किया और फिर एक उत्सव मनाया (9:17-19)।

      इसमें अचरज की कोई बात नहीं होनी चाहिए कि एक अंतिम संस्कार के समय परमेश्वर की उपस्थिति एक स्तुति-गीत के द्वारा पहचानी गई। आख़िरकार वह एक योजनाबद्ध नरसंहार के समय उपस्थित था और उसने उसे एक उत्सव में परिवर्तित कर दिया; वह प्रभु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के समय में उपस्थित था और उसे सँसार के उद्धार का मार्ग बना दिया! – टिम गुस्ताफ्सन


चकित करने वाला हमारा परमेश्वर अपनी उपस्थिति
 वहाँ दिखाता है जहाँ हम आशा भी नहीं करते हैं।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: एस्तेर 8:11-17
Esther 8:11 इन चिट्ठियों में सब नगरों के यहूदियों को राजा की ओर से अनुमति दी गई, कि वे इकट्ठे हों और अपना अपना प्राण बचाने के लिये तैयार हो कर, जिस जाति वा प्रान्त से लोग अन्याय कर के उन को वा उनकी स्त्रियों और बाल-बच्चों को दु:ख देना चाहें, उन को विध्वंसघात और नाश करें, और उनकी धन सम्मत्ति लूट लें।
Esther 8:12 और यह राजा क्षयर्ष के सब प्रान्तों में एक ही दिन में किया जाए, अर्थात अदार नाम बारहवें महीने के तेरहवें दिन को।
Esther 8:13 इस आज्ञा के लेख की नकलें, समस्त प्रान्तों में सब देशें के लोगों के पास खुली हुई भेजी गईं; ताकि यहूदी उस दिन अपने शत्रुओं से पलटा लेने को तैयार रहें।
Esther 8:14 सो हरकारे वेग चलने वाले सरकारी घोड़ों पर सवार हो कर, राजा की आज्ञा से फुर्ती कर के जल्दी चले गए, और यह आज्ञा शूशन राजगढ़ में दी गई थी।
Esther 8:15 तब मोर्दकै नीले और श्वेत रंग के राजकीय वस्त्र पहिने और सिर पर सोने का बड़ा मुकुट धरे हुए और सूक्ष्मसन और बैंजनी रंग का बागा पहिने हुए, राजा के सम्मुख से निकला, और शूशन नगर के लोग आनन्द के मारे ललकार उठे।
Esther 8:16 और यहूदियों को आनन्द और हर्ष हुआ और उनकी बड़ी प्रतिष्ठा हुई।
Esther 8:17 और जिस जिस प्रान्त, और जिस जिस नगर में, जहां कहीं राजा की आज्ञा और नियम पहुंचे, वहां वहां यहूदियों को आनन्द और हर्ष हुआ, और उन्होंने जेवनार कर के उस दिन को खुशी का दिन माना। और उस देश के लोगों में से बहुत लोग यहूदी बन गए, क्योंकि उनके मन में यहूदियों का डर समा गया था।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 105-106
  • 1 कुरिन्थियों 3